Chhattisgarh News

पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप 2025-26: आवेदन की आखिरी तारीख तय, 18 से 22 अप्रैल तक पूरी करें प्रक्रिया

पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति सत्र 2025-26 के लिए आवेदन और स्वीकृति से जुड़ी अंतिम तिथियों की घोषणा कर दी गई है। रायपुर जिले के सभी शासकीय और निजी कॉलेजों, विश्वविद्यालयों, इंजीनियरिंग, मेडिकल, नर्सिंग संस्थानों, पॉलिटेक्निक और आईटीआई को इस संबंध में निर्देश जारी किए गए हैं। छात्रवृत्ति की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन माध्यम से विभागीय पोर्टल पर संचालित की जा रही है। पात्र अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों को निर्धारित समय के भीतर पंजीयन कर जरूरी दस्तावेज अपलोड करने होंगे, ताकि समय पर स्वीकृति और भुगतान सुनिश्चित किया जा सके। निर्देशों के अनुसार, संस्थानों को लंबित प्रस्तावों को लॉक कर सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास रायपुर को भेजने की अंतिम तिथि 18 अप्रैल 2026 तय की गई है। इसके बाद शासकीय संस्थानों और जिला स्तर पर स्वीकृति आदेश लॉक करने की आखिरी तारीख 20 अप्रैल है। वहीं राज्य कार्यालय को भुगतान प्रस्ताव भेजने की अंतिम तिथि 22 अप्रैल 2026 निर्धारित की गई है। छात्रवृत्ति के लिए आय सीमा भी तय की गई है। अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के लिए वार्षिक आय सीमा 2.5 लाख रुपए और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 1 लाख रुपए रखी गई है। आवेदन के लिए स्थायी जाति प्रमाण पत्र, मूल निवास प्रमाण पत्र और पिछली कक्षा का परीक्षा परिणाम अनिवार्य होगा। सत्र 2025-26 से कुछ नई व्यवस्थाएं भी लागू की गई हैं। अब संस्थानों के लिए जियो-टैगिंग और विद्यार्थियों के लिए NSP पोर्टल पर वन टाइम रजिस्ट्रेशन (OTR) अनिवार्य कर दिया गया है।

पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप 2025-26: आवेदन की आखिरी तारीख तय, 18 से 22 अप्रैल तक पूरी करें प्रक्रिया Read Post »

Chhattisgarh, Education, GOVERNMENT, Raipur, State, Top News

छत्तीसगढ़ में प्लास्टिक बोतल शराब नीति पर बवाल: सप्लाई घटी, सस्ती शराब दुकानों से गायब

छत्तीसगढ़ में शराब की पैकेजिंग को लेकर सरकार की नई नीति विवाद का कारण बन गई है। कांच की बोतलों की जगह प्लास्टिक (PET) बोतलों में शराब बेचने के फैसले का डिस्टिलर्स और बोतल एसोसिएशन ने विरोध शुरू कर दिया है। इसका असर अब सीधे बाजार और उपभोक्ताओं पर दिखने लगा है। राज्य की कई सरकारी शराब दुकानों में सस्ती शराब की उपलब्धता अचानक कम हो गई है या पूरी तरह खत्म हो गई है। बताया जा रहा है कि विरोध के चलते कई डिस्टिलर्स ने उत्पादन और सप्लाई धीमी कर दी है, जिससे खासकर लो-कॉस्ट देसी और विदेशी शराब की कमी देखने को मिल रही है। सरकार का कहना है कि प्लास्टिक बोतलों का इस्तेमाल करने से ट्रांसपोर्ट आसान होगा, टूट-फूट कम होगी और लागत में भी कमी आएगी। लेकिन डिस्टिलर्स और बोतल निर्माता कंपनियों का तर्क है कि यह फैसला बिना पर्याप्त तैयारी के लिया गया है और इससे उनके कारोबार पर सीधा असर पड़ेगा। इसी बीच, विभागीय स्तर पर भी मतभेद की खबरें सामने आ रही हैं। सूत्रों के मुताबिक, कुछ फील्ड अफसरों ने अलग समूह बनाकर अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। कई जगह शराब दुकानों के बाहर चालानी कार्रवाई भी तेज कर दी गई है, जिससे ग्राहकों को अतिरिक्त परेशानी झेलनी पड़ रही है। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इस मुद्दे पर बॉटलिंग एसोसिएशन पहले ही प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपना विरोध दर्ज करा चुका है। उनका कहना है कि इस फैसले से करीब 15 लाख परिवार प्रभावित हो सकते हैं, खासकर वे लोग जो कांच की बोतलों की रीसाइक्लिंग से जुड़े हैं। फिलहाल, सरकार और उद्योग से जुड़े संगठनों के बीच जारी इस खींचतान का सबसे ज्यादा असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है, जिन्हें दुकानों में मनचाहा उत्पाद नहीं मिल पा रहा है।

छत्तीसगढ़ में प्लास्टिक बोतल शराब नीति पर बवाल: सप्लाई घटी, सस्ती शराब दुकानों से गायब Read Post »

Chhattisgarh, GOVERNMENT, Health, State, Top News

सक्ती पावर प्लांट हादसा: 20 दिन पहले हुई शादी, मजदूर की मौत; 600°C गर्म भाप में झुलसकर 20 की जान गई

छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में स्थित वेदांता पावर प्लांट में हुए भीषण हादसे ने कई परिवारों को उजाड़ दिया। इस दुर्घटना में अब तक 20 मजदूरों की मौत हो चुकी है। इनमें से 4 लोगों की मौके पर ही जान चली गई, जबकि 14 ने रायगढ़ के अलग-अलग अस्पतालों में दम तोड़ा। वहीं 2 मजदूरों की मौत रायपुर के कालड़ा अस्पताल में इलाज के दौरान हुई। मृतकों में बिहार के आकिब खान और झारखंड के अब्दुल करीम भी शामिल हैं। अब्दुल करीम की शादी महज 20 दिन पहले ही हुई थी और उनके हाथों की मेंहदी भी पूरी तरह नहीं उतरी थी। वे हाल ही में काम पर लौटे थे, लेकिन इससे पहले ही यह हादसा हो गया। इस दुर्घटना में कुल 36 मजदूर गंभीर रूप से झुलसे हैं, जिनमें से 16 का इलाज अभी भी अलग-अलग अस्पतालों में जारी है। डॉक्टरों के अनुसार, कई घायलों का शरीर 90 प्रतिशत तक जल चुका है और उनकी हालत बेहद नाजुक बनी हुई है। अगले 48 घंटे उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण बताए जा रहे हैं। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, यह हादसा बॉयलर ब्लास्ट के बाद निकली 500 से 600 डिग्री सेल्सियस तक गर्म भाप की चपेट में आने से हुआ। इतनी गर्म और तेज दबाव वाली भाप शरीर को कुछ ही सेकंड में बुरी तरह जला देती है और सांस के जरिए अंदर जाने पर फेफड़ों को भी गंभीर नुकसान पहुंचाती है। घटना के समय मौजूद मजदूरों ने बताया कि लंच के बाद अचानक तेज धुआं और धमाके की आवाज आई। इसके बाद चारों तरफ अफरा-तफरी मच गई और लोग जान बचाने के लिए भागने लगे। कई मजदूर वहीं झुलस गए। जानकारी के अनुसार, इस प्लांट में पिछले महीने भी दो छोटे हादसे हो चुके थे। इसके बाद 27 मार्च से एक हफ्ते के लिए यूनिट को बंद किया गया था और कर्मचारियों को सेफ्टी ट्रेनिंग देने की बात कही गई थी। बावजूद इसके इतना बड़ा हादसा होना कई सवाल खड़े करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, पावर प्लांट का बॉयलर अत्यधिक तापमान और दबाव पर काम करता है। अगर इसमें किसी तरह की तकनीकी खराबी या लापरवाही हो जाए, तो यह प्रेशर कुकर की तरह फट सकता है, लेकिन इसका असर कहीं ज्यादा खतरनाक होता है।

सक्ती पावर प्लांट हादसा: 20 दिन पहले हुई शादी, मजदूर की मौत; 600°C गर्म भाप में झुलसकर 20 की जान गई Read Post »

Accident, Chhattisgarh, Top News

मस्तूरी गोलीकांड: फरार कांग्रेस नेता के घर आधी रात पुलिस का सर्च ऑपरेशन, नहीं मिला आरोपी

बिलासपुर के मस्तूरी में हुए गोलीकांड मामले में फरार आरोपियों की तलाश तेज कर दी गई है। इसी क्रम में पुलिस ने कांग्रेस नेता और इनामी आरोपी नागेंद्र राय के ठिकाने पर आधी रात को सर्च ऑपरेशन चलाया। पुलिस की टीम रात करीब एक बजे तोरवा क्षेत्र के लालखदान-महमंद स्थित उसके घर पहुंची। कार्रवाई के दौरान डॉग स्क्वायड और हथियारबंद जवान भी मौजूद थे। टीम ने घर के हर कमरे की बारीकी से तलाशी ली, लेकिन आरोपी का कोई सुराग नहीं मिला। छापेमारी के दौरान नागेंद्र राय के परिजनों ने पुलिस कार्रवाई का विरोध किया और बहसबाजी भी की। परिजनों ने देर रात की गई कार्रवाई पर आपत्ति जताते हुए पुलिस को रोकने की कोशिश की। इसके चलते मौके पर तनावपूर्ण स्थिति बन गई। करीब ढाई घंटे तक चले इस सर्च ऑपरेशन के बावजूद आरोपी का पता नहीं चल सका। पुलिस का कहना है कि इस दौरान परिजनों द्वारा शासकीय कार्य में बाधा भी डाली गई, जिसके चलते उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने इस मामले में फरार आरोपी नागेंद्र राय और टाकेश्वर पाटले पर 5-5 हजार रुपए का इनाम घोषित कर रखा है। दोनों की गिरफ्तारी के लिए लगातार संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है। पुलिस को सूचना मिली थी कि आरोपी अपने घर पर छिपा हो सकता है, जिसके आधार पर यह कार्रवाई की गई। हालांकि वह वहां नहीं मिला, जिससे आशंका जताई जा रही है कि आरोपी राज्य से बाहर भी हो सकता है। यह मामला 29 अक्टूबर को मस्तूरी बस स्टैंड स्थित एक ऑफिस में हुई फायरिंग से जुड़ा है, जहां नकाबपोश हमलावरों ने अंधाधुंध गोलीबारी की थी। जवाबी कार्रवाई में भी फायरिंग हुई, जिसके बाद हमलावर मौके से फरार हो गए थे। जांच में यह मामला आपसी रंजिश और वर्चस्व से जुड़ा पाया गया, जिसमें कई लोगों की भूमिका सामने आई है। अब तक 11 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है, जबकि मुख्य साजिशकर्ता अब भी फरार हैं।

मस्तूरी गोलीकांड: फरार कांग्रेस नेता के घर आधी रात पुलिस का सर्च ऑपरेशन, नहीं मिला आरोपी Read Post »

Bilaspur, Chhattisgarh, Crime, State, Top News

छत्तीसगढ़ में सड़क पर मारपीट के दो मामले वायरल: कोरबा और बिलासपुर में मामूली विवाद पर हिंसा

छत्तीसगढ़ में सड़क पर मारपीट की दो अलग-अलग घटनाएं सामने आई हैं, जिनके वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। एक मामला कोरबा का है, जबकि दूसरा बिलासपुर का बताया जा रहा है। दोनों ही घटनाओं में मामूली विवाद के बाद जमकर लात-घूंसे चले। कोरबा जिले के सिविल लाइन रामपुर थाना क्षेत्र में 11 अप्रैल की रात निहारिका स्थित अंग्रेजी शराब दुकान के बाहर यह घटना हुई। शराब खरीदने के दौरान भीड़ में हाथ टकराने को लेकर दो पक्षों में बहस शुरू हो गई, जो देखते ही देखते मारपीट में बदल गई। इस दौरान एक युवक ने सुरक्षा कर्मी के डंडे से हमला किया, जिसके बाद दूसरे पक्ष ने भी उसे पकड़कर पिटाई कर दी। कुछ देर तक मौके पर हंगामा चलता रहा, बाद में मामला शांत हुआ। वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया है। पूछताछ के दौरान आरोपियों के व्यवहार को देखते हुए उनके खिलाफ कानूनी धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है। दूसरी घटना बिलासपुर के तोरवा थाना क्षेत्र की है। यहां सिरगिट्टी के गणेश नगर निवासी शेख इकबाल रात में रेलवे स्टेशन के पास स्थित होटल से खाना लेकर लौट रहा था। इसी दौरान लक्की दास और पंकज से उसका विवाद हो गया। विवाद के बाद आरोपियों ने अपने साथियों को बुला लिया और युवक को घेरकर मारपीट की, जिससे वह घायल हो गया। पूरी घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें युवक को जमीन पर गिराकर लात-घूंसे से पीटते हुए देखा जा सकता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि रेलवे स्टेशन के पास स्थित होटल देर रात तक खुला रहता है, जिससे वहां भीड़ जमा रहती है और अक्सर विवाद की स्थिति बन जाती है। इससे पहले भी इस क्षेत्र में मारपीट की घटनाएं हो चुकी हैं।

छत्तीसगढ़ में सड़क पर मारपीट के दो मामले वायरल: कोरबा और बिलासपुर में मामूली विवाद पर हिंसा Read Post »

Bilaspur, Chhattisgarh, korba, State, Top News, violence

प्रदेश में खरीफ सीजन से फार्मर आईडी अनिवार्य: बिना आईडी नहीं मिलेगा यूरिया और अन्य खाद

प्रदेश में आने वाले खरीफ सीजन से खाद वितरण व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है। अब यूरिया, पोटाश और डीएपी जैसे खाद केवल उन्हीं किसानों को मिलेंगे, जिनके पास फार्मर आईडी होगी। नई व्यवस्था के तहत Urea Fertilizer सहित सभी प्रमुख खाद समितियों से केवल फार्मर आईडी दिखाने पर ही उपलब्ध होंगे। जिन किसानों के पास आईडी नहीं होगी, उन्हें खाद नहीं दिया जाएगा। इसके अलावा, निजी दुकानों से खाद खरीदने पर भी किसान की जानकारी जैसे नाम और मोबाइल नंबर दर्ज करना अनिवार्य होगा। इस प्रणाली का उद्देश्य खाद वितरण में पारदर्शिता लाना और अनियमितता तथा कालाबाजारी को रोकना है। अधिकारियों के अनुसार, आने वाले समय में खाद की उपलब्धता को लेकर दबाव बढ़ सकता है, इसलिए यह व्यवस्था पहले से लागू की जा रही है ताकि वास्तविक किसानों तक समय पर खाद पहुंच सके। यदि किसान फार्मर आईडी नहीं बनवाते हैं, तो उन्हें न केवल खाद बल्कि अन्य सरकारी योजनाओं के लाभ से भी वंचित होना पड़ सकता है। प्रदेश में इस समय बड़ी संख्या में किसान अभी भी एग्री-टेक रजिस्ट्रेशन से नहीं जुड़े हैं, जिन्हें जल्द से जल्द पंजीकरण कराने की सलाह दी गई है। यह नियम 2026-27 के खरीफ सीजन से पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा।

प्रदेश में खरीफ सीजन से फार्मर आईडी अनिवार्य: बिना आईडी नहीं मिलेगा यूरिया और अन्य खाद Read Post »

AGRICULTURE, Chhattisgarh, GOVERNMENT, Political, State, Top News

सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट नियम लागू, लेकिन व्यवस्था अधूरी: 4 रंग के डस्टबिन नियम पर अमल नहीं

छत्तीसगढ़ में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट (SWM) नियम 1 अप्रैल 2026 से लागू हो गए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इसकी तैयारी अधूरी दिखाई दे रही है। नए नियम के तहत अब घरों, दुकानों और कार्यालयों से निकलने वाले कचरे को चार अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर अलग-अलग डस्टबिन में रखना अनिवार्य किया गया है। इस व्यवस्था के तहत गीला कचरा, सूखा कचरा, घरेलू खतरनाक कचरा और विशेष/सैनिटरी कचरे को अलग-अलग रंग के डिब्बों में संग्रहित करना होगा। नियम का पालन न करने पर जुर्माना लगाने का भी प्रावधान है, लेकिन अब तक जुर्माने की राशि तय नहीं की गई है। नए नियम के अनुसार गीले कचरे के लिए हरे रंग का डस्टबिन, सूखे कचरे के लिए नीला, खतरनाक कचरे के लिए लाल और विशेष कचरे के लिए काला डिब्बा निर्धारित किया गया है। गीले कचरे में भोजन के अवशेष, सब्जी-फल के छिलके और बगीचे का कचरा शामिल होता है, जिससे कम्पोस्ट तैयार किया जा सकता है। सूखे कचरे में प्लास्टिक, कागज, धातु और कांच जैसी सामग्री आती है, जिन्हें रीसाइक्लिंग के लिए अलग रखा जाता है। खतरनाक कचरे में बैटरी, केमिकल, पेंट, डायपर और बल्ब जैसे सामान शामिल हैं, जबकि विशेष कचरे में मास्क, ग्लव्स और मेडिकल वेस्ट जैसी सामग्री आती है। हालांकि नियम कागजों में लागू हो चुके हैं, लेकिन शहरों में इसकी तैयारी पूरी नहीं हो सकी है। रायपुर में करीब 250 कचरा गाड़ियों में से केवल 100 गाड़ियों में ही चार कंपार्टमेंट की व्यवस्था है, जबकि बाकी अभी भी दो कंपार्टमेंट वाली ही हैं। अन्य जिलों में स्थिति और भी कमजोर बताई जा रही है। कई नगरीय निकायों में न तो नई गाड़ियां पूरी तरह उपलब्ध हैं और न ही कचरा संग्रहण प्रणाली में बदलाव किया गया है। इस कारण पुराने तरीके से ही कचरा उठाया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, संसाधनों की कमी और जुर्माने की स्पष्ट गाइडलाइन न होने के कारण सख्ती नहीं हो पा रही है। राज्य में 27 जनवरी को अधिसूचना जारी की गई थी, लेकिन उसके बाद भी आवश्यक तैयारियां पूरी नहीं हो सकीं। नगरीय प्रशासन विभाग का कहना है कि सभी निकायों को चार कंपार्टमेंट वाली गाड़ियां अनिवार्य रूप से अपनाने के निर्देश दिए गए हैं और जुर्माने की राशि तय करने की प्रक्रिया जल्द पूरी की जाएगी।

सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट नियम लागू, लेकिन व्यवस्था अधूरी: 4 रंग के डस्टबिन नियम पर अमल नहीं Read Post »

Chhattisgarh, GOVERNMENT, Health, State, Top News

प्रदेश में खरीफ सीजन से फार्मर आईडी अनिवार्य: बिना आईडी नहीं मिलेगा यूरिया और अन्य खाद

प्रदेश में आने वाले खरीफ सीजन से खाद वितरण व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है। अब यूरिया, पोटाश और डीएपी जैसे खाद केवल उन्हीं किसानों को मिलेंगे, जिनके पास फार्मर आईडी होगी। नई व्यवस्था के तहत Urea Fertilizer सहित सभी प्रमुख खाद समितियों से केवल फार्मर आईडी दिखाने पर ही उपलब्ध होंगे। जिन किसानों के पास आईडी नहीं होगी, उन्हें खाद नहीं दिया जाएगा। इसके अलावा, निजी दुकानों से खाद खरीदने पर भी किसान की जानकारी जैसे नाम और मोबाइल नंबर दर्ज करना अनिवार्य होगा। इस प्रणाली का उद्देश्य खाद वितरण में पारदर्शिता लाना और अनियमितता तथा कालाबाजारी को रोकना है। अधिकारियों के अनुसार, आने वाले समय में खाद की उपलब्धता को लेकर दबाव बढ़ सकता है, इसलिए यह व्यवस्था पहले से लागू की जा रही है ताकि वास्तविक किसानों तक समय पर खाद पहुंच सके। यदि किसान फार्मर आईडी नहीं बनवाते हैं, तो उन्हें न केवल खाद बल्कि अन्य सरकारी योजनाओं के लाभ से भी वंचित होना पड़ सकता है। प्रदेश में इस समय बड़ी संख्या में किसान अभी भी एग्री-टेक रजिस्ट्रेशन से नहीं जुड़े हैं, जिन्हें जल्द से जल्द पंजीकरण कराने की सलाह दी गई है। यह नियम 2026-27 के खरीफ सीजन से पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा।

प्रदेश में खरीफ सीजन से फार्मर आईडी अनिवार्य: बिना आईडी नहीं मिलेगा यूरिया और अन्य खाद Read Post »

AGRICULTURE, Chhattisgarh, Raipur, State, Top News

रायपुर में रील बनाना पड़ा महंगा पड़ सकता है: स्पीडोमीटर के सामने दौड़ने वालों को पुलिस की सख्त चेतावनी

Raipur Police ने शहर में सड़कों पर लगे स्पीडोमीटर के सामने रील बनाने वाले लोगों को कड़ी चेतावनी दी है। हाल के दिनों में कई ऐसे वीडियो सामने आए हैं, जिनमें लोग सड़क पर दौड़ लगाकर अपनी स्पीड मापते हुए सोशल मीडिया पर रील पोस्ट कर रहे हैं। पुलिस का कहना है कि ये स्पीडोमीटर मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि वाहनों की रफ्तार नियंत्रित करने और सड़क हादसों को रोकने के लिए लगाए गए हैं। इस तरह की गतिविधियां न केवल नियमों का उल्लंघन हैं, बल्कि लोगों की जान के लिए भी खतरा बन सकती हैं। पुलिस ने सोशल मीडिया पर संदेश जारी करते हुए कहा कि “रील के चक्कर में अपनी असली जिंदगी को जोखिम में न डालें। बीच सड़क पर दौड़ना खुद के साथ दूसरों की सुरक्षा से भी खिलवाड़ है।” छत्तीसगढ़ में बढ़ते सड़क हादसों को ध्यान में रखते हुए परिवहन विभाग ने पहली बार लेडार आधारित आधुनिक स्पीड कैमरे लगाए हैं। पायलट प्रोजेक्ट के तहत करीब 1.90 करोड़ रुपए की लागत से 7 कैमरे स्थापित किए गए हैं। ये कैमरे रायपुर के मरीन ड्राइव, वीआईपी रोड और मंदिर हसौद क्षेत्र के अलावा बिलासपुर बायपास, अंबिकापुर, जगदलपुर और धमतरी के कुरूद इलाके में लगाए गए हैं। इन स्थानों का चयन ट्रैफिक दबाव और दुर्घटनाओं के आंकड़ों के आधार पर किया गया है। वाई-फाई से जुड़े ये कैमरे 100 मीटर दूर से भी वाहनों की गति को सटीक रूप से माप सकते हैं। दो लेन सड़कों पर एक साथ कई वाहनों की निगरानी कर उनकी जानकारी रिकॉर्ड की जा सकती है। यदि कोई वाहन निर्धारित गति सीमा से अधिक चलता है, तो कैमरा उसकी नंबर प्लेट स्कैन कर फोटो और वीडियो रिकॉर्ड करता है। इसके आधार पर ऑटोमैटिक ई-चालान जारी होता है, जो व्हाट्सएप और ईमेल के माध्यम से वाहन मालिक तक पहुंचता है। इन कैमरों में नाइट विजन की सुविधा भी है, जिससे रात में और खराब मौसम में भी निगरानी संभव है। फिलहाल इनकी टेस्टिंग चल रही है, लेकिन जल्द ही इन्हें पूरी तरह लागू कर सख्ती से नियमों का पालन कराया जाएगा।

रायपुर में रील बनाना पड़ा महंगा पड़ सकता है: स्पीडोमीटर के सामने दौड़ने वालों को पुलिस की सख्त चेतावनी Read Post »

Chhattisgarh, GOVERNMENT, Raipur, State, Top News

अबूझमाड़ में बदलाव की शुरुआत: नक्सल प्रभाव खत्म होने के बाद 239 गांवों में पहली बार पहुंचा प्रशासन

बस्तर का Abujhmad क्षेत्र, जो कभी नक्सल गतिविधियों का गढ़ माना जाता था, अब धीरे-धीरे मुख्यधारा से जुड़ रहा है। केंद्र सरकार द्वारा इस क्षेत्र को नक्सल प्रभाव से मुक्त घोषित किए जाने के बाद यहां प्रशासनिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। पहली बार यहां के 239 गांवों में सरकारी सर्वे शुरू किया गया है। इस सर्वे के जरिए गांवों में रहने वाले परिवारों की संख्या, सदस्यों का विवरण, खेती करने वाले लोगों की जानकारी और जमीन के उपयोग का आकलन किया जा रहा है। राजस्व और वन विभाग की संयुक्त टीम इस काम में जुटी हुई है। सर्वे को आधुनिक तकनीक से जोड़ते हुए Indian Institute of Technology Roorkee की मदद से पूरे क्षेत्र का सैटेलाइट मैप तैयार किया जा रहा है। सैटेलाइट इमेज के आधार पर गांवों और आबादी का प्रारंभिक नक्शा बनाया जा रहा है, जिसके बाद फील्ड टीम मौके पर जाकर हर घर और जमीन का सत्यापन करेगी। सर्वे पूरा होने के बाद दावा-आपत्ति की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इसके आधार पर जो परिवार जहां निवास कर रहा है और जिस जमीन पर खेती कर रहा है, उसे उसी के अनुसार मालिकाना हक प्रदान किया जाएगा। इससे लंबे समय से बिना अधिकार के रह रहे वनवासियों को कानूनी पहचान और जमीन का अधिकार मिल सकेगा। नारायणपुर जिले का ओरछा ब्लॉक, जिसे अबूझमाड़ के नाम से जाना जाता है, दशकों तक प्रशासन की पहुंच से बाहर रहा। आजादी के बाद भी यहां कई गांव सड़क और संचार सुविधाओं से कटे हुए थे। जैसे ही सड़क निर्माण शुरू हुआ, नक्सली गतिविधियां बढ़ गईं, जिससे यह इलाका उनका सुरक्षित ठिकाना बन गया। इसी वजह से यहां गांवों, आबादी और जमीन का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड तैयार नहीं हो पाया था। अब सुरक्षा बलों की मौजूदगी और सड़क विस्तार के बाद हालात बदल रहे हैं और प्रशासन पहली बार गांवों तक पहुंच पा रहा है। करीब 3 लाख हेक्टेयर में फैले इस घने जंगल क्षेत्र में वन विभाग की गतिविधियां भी दोबारा शुरू की जा रही हैं। जिन इलाकों में वर्षों पहले नक्सलियों द्वारा वन विभाग के भवनों को नष्ट कर दिया गया था, वहां फिर से काम शुरू हो रहा है। प्रशासन के अनुसार, सर्वे के साथ-साथ ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण भी किया जाएगा। नक्शा और खसरा तैयार होने के बाद जमीन के अधिकार देने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। यह पहल न केवल विकास को गति देगी, बल्कि क्षेत्र के लोगों को स्थायी पहचान और अधिकार भी दिलाएगी।

अबूझमाड़ में बदलाव की शुरुआत: नक्सल प्रभाव खत्म होने के बाद 239 गांवों में पहली बार पहुंचा प्रशासन Read Post »

BASTAR, Chhattisgarh, Development, GOVERNMENT, State, Tech, Top News
Scroll to Top