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रायपुर में पंडित धीरेंद्र शास्त्री का दिव्य दरबार शुरू: 4 से 8 अक्टूबर तक होगी हनुमंत कथा, सुरक्षा में 5 हजार बाउंसर तैनात

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आज से आस्था और श्रद्धा का भव्य संगम देखने को मिल रहा है। बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री गुढ़ियारी इलाके में दिव्य दरबार और हनुमंत कथा का आयोजन कर रहे हैं। यह कार्यक्रम 4 अक्टूबर से 8 अक्टूबर तक चलेगा। इसमें लाखों भक्तों के शामिल होने की संभावना है और तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। 🔹 सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने कड़े सुरक्षा इंतजाम किए हैं। कार्यक्रम स्थल पर हजारों पुलिस जवानों के साथ 5 हजार बाउंसरों की तैनाती की गई है। पूरा परिसर CCTV कैमरों से लैस है ताकि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या विवाद की स्थिति न बने। 🔹 आयोजन की जिम्मेदारी इस आयोजन की जिम्मेदारी ‘स्व. पुरुषोत्तम अग्रवाल स्मृति फाउंडेशन’ ने संभाली है, जिसका नेतृत्व चंदन अग्रवाल और बसंत अग्रवाल कर रहे हैं। बीते 14 सितंबर को भूमि पूजन और अर्चन के साथ कार्यक्रम स्थल का शुभारंभ किया गया था। मुख्य आयोजक बसंत अग्रवाल ने बताया कि आयोजन के संचालन के लिए एक केंद्रीय कार्यालय बनाया गया है, जहां से पंडाल, भंडारा, सुरक्षा, यातायात और भक्तों की बैठने की व्यवस्था की निगरानी की जाएगी। 🔹 भक्तों के लिए विशेष सुविधाएं फाउंडेशन के मीडिया समन्वयक सौरभ कुमार के अनुसार, आयोजन के दौरान 8 हजार से अधिक स्वयंसेवक सेवा देंगे। बुजुर्गों और दिव्यांगों की सुविधा के लिए 200 नि:शुल्क ई-रिक्शा की व्यवस्था की गई है, जो 4 से 8 अक्टूबर तक कथा स्थल तक आने-जाने की सेवा देंगे। भक्तों के लिए भंडारा सुबह 10 बजे और रात 9 बजे नि:शुल्क आयोजित किया जाएगा। 🔹 पार्किंग की व्यवस्था श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए साइंस कॉलेज मैदान, कोटा मैदान, और डब्ल्यूआरएस कॉलोनी मैदान में पार्किंग की व्यवस्था की गई है, जहां कार और बाइक सुरक्षित खड़ी की जा सकेगी। 🔹 प्रमुख अतिथि होंगे शामिल कथा में शामिल होने के लिए कई वरिष्ठ नेता और गणमान्य अतिथि पहुंचेंगे — यह आयोजन रायपुर में भक्ति, संस्कृति और संगठन का अद्भुत संगम साबित होगा, जहां आस्था के साथ-साथ सामाजिक एकता का भी संदेश दिया जाएगा।

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छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: ACB-EOW ने कांग्रेस को नोटिस जारी, गैदू बोले-9 घंटे बैठाकर पूछताछ की गई

छत्तीसगढ़ के शराब घोटाला मामले में एसीबी-ईओडब्ल्यू (EOW) ने कांग्रेस के प्रभारी महामंत्री मलकीत सिंह गैदू को नोटिस जारी किया है। नोटिस में पार्टी कार्यालय के अकाउंटेंट देवेंद्र डड़सेना से संबंधित पूरी जानकारी मांगी गई है। बताया जा रहा है कि देवेंद्र कोषाध्यक्ष राम गोपाल के करीबी थे। ACB-EOW ने पूछी अहम जानकारीनोटिस में एजेंसी ने पूछा कि देवेंद्र डड़सेना पार्टी कार्यालय में किस जिम्मेदारी में थे, उनकी नियुक्ति किसने की और उन्हें कितना वेतन मिलता था। इसके साथ ही उनके कार्यकाल और गतिविधियों का पूरा विवरण देने को कहा गया। इस पर गैदू ने कहा कि यह पहली बार है जब किसी राजनीतिक दल को जांच एजेंसी द्वारा प्रताड़ित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि उन्होंने पहले ED को तीन बार लिखित जवाब दे चुके हैं, लेकिन हर बार उन्हें 9-9 घंटे तक कार्यालय में बैठाकर पूछताछ की गई। गैदू ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई राजनीतिक दबाव में की जा रही है। ED की पूछताछ और दस्तावेजगैदू ने बताया कि ED ने उनसे सुकमा कांग्रेस भवन से जुड़ी जानकारी मांगी थी। एजेंसी ने पूछा कि भवन निर्माण के लिए कितना फंड दिया गया और निर्माण प्रक्रिया कैसी रही। इसके लिए पूरी फाइल और दस्तावेज लिखित रूप में ED को सौंप दिए गए थे। शराब घोटाले की पृष्ठभूमि28 दिसंबर 2024 को ED ने पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा और उनके बेटे हरीश लखमा के घर पर छापेमारी की थी। साथ ही लखमा के करीबी सुशील ओझा और नगर पालिका अध्यक्ष राजू साहू के घर पर भी दबिश दी गई। जांच में पता चला कि शराब घोटाले की कमाई से सुकमा में कांग्रेस भवन का निर्माण हुआ। ED ने इस मामले में कई अहम दस्तावेज जब्त किए। संपत्ति अटैचमेंट का मतलबED ने दावा किया कि शराब घोटाले में भ्रष्टाचार से अर्जित पैसा कवासी लखमा को मिला था। इसके बाद सुकमा में कांग्रेस भवन और रायपुर में लखमा के बंगले को अटैच किया गया। अटैचमेंट का मतलब है कि संपत्ति को अस्थायी रूप से जब्त किया जाता है, लेकिन इसका इस्तेमाल किया जा सकता है, हालांकि इसे बेचना या ट्रांसफर नहीं किया जा सकता। शराब घोटाले का तरीका और राशिED के अनुसार, शराब घोटाले में 2,000 करोड़ रुपए से अधिक की धनराशि शामिल है। तत्कालीन भूपेश सरकार के कार्यकाल में IAS अफसर अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के MD AP त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के सिंडिकेट के जरिए यह घोटाला किया गया। कवासी लखमा इस सिंडिकेट के अहम सदस्य थे और जेल में बंद हैं। ED के अनुसार, लखमा ने शराब नीति में बदलाव कर FL-10 लाइसेंस की शुरुआत कराई। सिंडिकेट ने तीन तरह से अवैध धन अर्जित किया: A: डिस्टलरी संचालकों से कमीशनB: नकली होलोग्राम वाली शराब को सरकारी दुकानों से बेचनाC: डिस्टलरीज की सप्लाई जोन को बदलकर अवैध वसूली इस प्रक्रिया के तहत सिंडिकेट ने तीन वित्तीय वर्षों में 52 करोड़ रुपए तक की रकम अर्जित की।

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रायपुर में जन्मदिन सेलिब्रेशन का नया अंदाज: NH पर लग्जरी कारों से स्टंटबाजी, सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल

छत्तीसगढ़ में हाल ही में जन्मदिन सेलिब्रेशन का तरीका खतरनाक होता जा रहा है। रायपुर से एक वीडियो सामने आया है, जिसमें लग्जरी कारों का काफिला नेशनल हाईवे पर स्टंट करता नजर आ रहा है। वीडियो में 15-20 लग्जरी कारों का काफिला केनाल रोड से NH होते हुए आरंग की तरफ बढ़ता दिख रहा है। कुछ युवक खिड़की और सनरूफ से लटककर स्टंट कर रहे हैं। काफिले में गाड़ियों के हूटर और सायरन भी बज रहे हैं। बताया जा रहा है कि यह जन्मदिन सेलिब्रेशन था, जिसमें युवक गैंगस्टर गाने जैसे AK-47, कैदी नंबर 302, रात के शिकारी पर रील भी बना रहे थे। वीडियो इंस्टाग्राम पर कई आईडी से पोस्ट किया गया, जिनमें vikky-sanap-357, rahul_gawali_02, bharat_tharwani_ शामिल हैं। वीडियो में युवक कार की सनरूफ से बाहर निकलकर रौब दिखाते भी दिखाई दे रहे हैं। ASP ट्रैफिक प्रशांत शुक्ला ने बताया कि गाड़ी नंबरों की पहचान की जा रही है और मोटर व्हीकल एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी। पहले हुए जन्मदिन स्टंट के मामले छत्तीसगढ़ में यह पहली बार नहीं है कि जन्मदिन सेलिब्रेशन में सड़क पर खतरनाक हरकतें हुई हों। पिछले कुछ महीनों में कई मामले सामने आए हैं: इन सभी घटनाओं में युवक अपनी बहादुरी और रौब दिखाने के लिए वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड कर देते हैं। हाईकोर्ट ने पहले भी इस तरह की हरकतों पर पुलिस को कड़ी फटकार लगाई है। ASP ट्रैफिक ने स्पष्ट किया कि सड़क पर स्टंट करना और वाहनों के नियमों की अनदेखी करना जानलेवा है। पुलिस इस बार भी युवकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने जा रही है।

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रायपुर से दुबई तक लाल चंदन तस्करी का खुलासा, 8.6 करोड़ की संपत्ति जब्त

रायपुर।प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने लाल चंदन की तस्करी के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए 63 करोड़ रुपये के रैकेट से जुड़े आरोपी अब्दुल जाफर की 8.6 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच कर दी है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, अब्दुल जाफर ने रायपुर को लाल चंदन (रेड सैंडर्स) की लोडिंग और शिपमेंट का प्रमुख ठिकाना बना रखा था। रायपुर से लेकर नागपुर, मुंबई और चेन्नई तक 3,000 किलोमीटर लंबा रूट तैयार कर माल को दुबई भेजा जाता था। कंटेनरों में ऊपर से स्पंज आयरन भरा जाता और अंदर लाल चंदन के लट्ठे छिपाए जाते थे। साल 2016 में DRI नागपुर की टीम ने रायपुर के एक गोदाम से 11 मीट्रिक टन (576 लट्ठे) लाल चंदन जब्त किया था। इसके अलावा नागपुर और मुंबई के पोर्ट पर भी बड़े पैमाने पर रेड सैंडर्स पकड़े गए। फरवरी से अक्टूबर 2016 के बीच 13 निर्यात खेपों में 159 मीट्रिक टन लकड़ी भेजने का खुलासा हुआ, जिसकी बाजार कीमत लगभग 63 करोड़ रुपये थी। ED की जांच में सामने आया कि अब्दुल जाफर ने इस काले कारोबार से कमाई गई रकम से लग्जरी गाड़ियां, फ्लैट और अन्य संपत्तियां अपने परिवार और सहयोगियों के नाम पर खरीदीं। चेन्नई, कांचीपुरम और तमिलनाडु के अन्य इलाकों में ऊंची कीमत की जमीनें भी उसके कब्जे में पाई गईं। अब्दुल जाफर और उसकी पार्टनरशिप फर्म M/s A.F. Enterprises के खिलाफ नागपुर की PMLA स्पेशल कोर्ट में मुकदमा दर्ज किया गया है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, मोबाइल कॉल डिटेल और तस्वीरों ने इस सिंडिकेट की पूरी साजिश का पर्दाफाश किया। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि लाल चंदन रायपुर तक कैसे पहुंचता था और किस रास्ते से दुबई भेजा जाता था। ED इस बिंदु पर भी जांच कर रही है।

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नान घोटाला: रिटायर्ड IAS आलोक शुक्ला कोर्ट में सरेंडर करने पहुंचे, सुप्रीम कोर्ट का आदेश न होने पर लौटे

छत्तीसगढ़ के चर्चित नान (नागरिक आपूर्ति निगम) घोटाले में रिटायर्ड IAS अफसर आलोक शुक्ला शुक्रवार को रायपुर की स्पेशल कोर्ट में आत्मसमर्पण करने पहुंचे। लेकिन कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के लिखित आदेश के बिना सरेंडर स्वीकार करने से इंकार कर दिया। इसके बाद आलोक शुक्ला अदालत से वापस लौट गए। कोर्ट ने क्या कहा बचाव पक्ष के वकील फैज़ल रिज़वी के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आलोक शुक्ला सरेंडर करने पहुंचे थे, लेकिन जज ने कहा कि फिलहाल आदेश अपलोड नहीं हुआ है। जब आदेश की कॉपी आ जाएगी तभी सरेंडर स्वीकार होगा।सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि आलोक शुक्ला को दो हफ्ते ED (प्रवर्तन निदेशालय) की कस्टडी और दो हफ्ते न्यायिक हिरासत में रहना होगा। सुप्रीम कोर्ट का फैसला नान घोटाले में हाईकोर्ट ने आलोक शुक्ला और अनिल टुटेजा को पहले अग्रिम जमानत दे दी थी, लेकिन ED ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।जस्टिस सुंदरेश और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने ED की दलील सुनने के बाद हाईकोर्ट का फैसला रद्द कर दिया। कोर्ट ने ED और EOW को तय समयसीमा में जांच पूरी करने के निर्देश दिए — ED को तीन महीने और EOW को दो महीने। क्या है नान घोटाला फरवरी 2015 में ACB/EOW ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) को संभालने वाले नागरिक आपूर्ति निगम (NAN) के 25 ठिकानों पर एक साथ छापे मारे थे।इन छापों में 3.64 करोड़ रुपये नकद मिले थे और चावल-नमक समेत कई नमूनों की गुणवत्ता जांच में घटिया पाए गए। EOW की FIR के मुताबिक, डॉ. आलोक शुक्ला और अनिल टुटेजा ने तत्कालीन महाधिवक्ता सतीशचंद्र वर्मा के साथ मिलकर अपनी स्थिति का दुरुपयोग किया। आरोप है कि उन्होंने सरकारी कागजों और प्रक्रियात्मक दस्तावेज़ों में हेरफेर कर अपने पक्ष में जवाब तैयार करवाए ताकि अदालत में उन्हें अग्रिम जमानत मिल सके। किन धाराओं में मामला दर्ज EOW ने डॉ. आलोक शुक्ला, अनिल टुटेजा, सतीश चंद्र वर्मा और अन्य पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 2018 की धाराओं 7, 7(क), 8, 13(2) और IPC की धाराएं 182, 211, 193, 195-A, 166-A और 120-B के तहत केस दर्ज किया है।

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छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में बड़ा एक्शन – रिटायर्ड IAS निरंजन दास गिरफ्तार

छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में EOW (आर्थिक अपराध शाखा) ने रिटायर्ड IAS अफसर निरंजन दास को हिरासत में लिया है। कांग्रेस सरकार के दौरान आबकारी आयुक्त रहे दास पर आरोप है कि उन्होंने पूर्व IAS अनिल टुटेजा, कारोबारी अनवर ढेबर और तत्कालीन विशेष सचिव अरुणपति त्रिपाठी के साथ मिलकर शराब घोटाले का सिंडिकेट तैयार किया था।जांच एजेंसी का दावा है कि इस अवैध नेटवर्क से उन्हें हर महीने करीब 50 लाख रुपए की अवैध कमाई होती थी। सिंडिकेट की कार्यप्रणाली EOW की चार्जशीट के मुताबिक, सरकारी शराब दुकानों में कमीशन तय करने, डिस्टलरी से अतिरिक्त शराब तैयार कराने, विदेशी ब्रांड की अवैध आपूर्ति कराने और नकली होलोग्राम के जरिये शराब बेचने जैसी योजनाओं से राज्य सरकार को हजारों करोड़ रुपए का नुकसान पहुंचाया गया। दास पर यह भी आरोप है कि उन्होंने नोएडा स्थित ‘प्रिज़्म होलोग्राफिक सिक्योरिटी फिल्म्स’ को टेंडर दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कंपनी योग्य नहीं थी, इसके बावजूद शर्तें बदलकर उसे काम दिया गया और फिर डुप्लीकेट होलोग्राम बनाकर अवैध शराब को वैध दिखाया गया। झारखंड तक फैला असर चार्जशीट में यह भी कहा गया है कि निरंजन दास और उनके सहयोगियों ने झारखंड की आबकारी नीति में बदलाव कराने की कोशिश की। जनवरी 2022 में ढेबर और त्रिपाठी के साथ मिलकर उन्होंने झारखंड के अधिकारियों से बैठक की और ‘छत्तीसगढ़ मॉडल’ लागू करवाने की साजिश रची। रिटायरमेंट के बाद भी फरवरी 2023 में दास को संविदा पर आबकारी आयुक्त बनाया गया था। उनकी अग्रिम जमानत की अर्जी कई बार खारिज हो चुकी है। अब EOW उन्हें रिमांड पर लेकर पूछताछ करेगी और माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में और भी खुलासे हो सकते हैं। घोटाले की शुरुआत 2019 में ED की जांच के मुताबिक, फरवरी 2019 में कारोबारी अनवर ढेबर ने रायपुर के जेल रोड स्थित होटल वेनिंगटन में छत्तीसगढ़ की प्रमुख डिस्टलरियों के मालिकों को बुलाकर एक मीटिंग की थी। इस बैठक में शराब की सप्लाई और प्रति पेटी कमीशन तय किया गया।शुरुआत में हर महीने 200 ट्रक (लगभग 800 पेटियां) अवैध शराब की आपूर्ति होती थी, बाद में यह बढ़कर 400 ट्रक प्रतिमाह हो गई। शुरुआती कीमत 2,840 रुपए प्रति पेटी थी, जो बाद में 3,880 रुपए प्रति पेटी तक पहुंच गई। जांच एजेंसी के अनुसार, तीन साल में 60 लाख से अधिक पेटियां अवैध रूप से बेची गईं। शराब दुकानों को सलाह दी गई थी कि सरकारी रेकॉर्ड में खपत दर्ज न करें, ताकि बिना शुल्क चुकाए नकली होलोग्राम वाली शराब दुकानों तक पहुंचाई जा सके।

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उरला स्वास्थ्य केंद्र के पास गणेश पंडाल गिरा, विवाद के कारण नहीं मिला सहारा

रायपुर। उरला स्वास्थ्य केंद्र के पास श्रीराम गणेश उत्सव समिति का पंडाल रविवार देर रात तेज बारिश और आंधी के चलते गिर गया। जानकारी के मुताबिक, पिछले 20–25 वर्षों से यहां गणेश प्रतिमा की स्थापना की जा रही है, लेकिन इस बार आयोजन स्थल को लेकर विवाद की स्थिति बन गई। समिति सदस्यों का कहना है कि पहले पंडाल अस्पताल की दीवार से थोड़ी दूरी छोड़कर बनाया जाता था, जिससे उसे सहारा मिल जाता था और मजबूती बनी रहती थी। मगर इस बार अस्पताल प्रबंधन और स्थानीय पार्षद ने दीवार को सड़क की ओर बढ़ाकर बनवा दिया, जिसके कारण आयोजन समिति को पंडाल लगाने के लिए सहारा नहीं मिल पाया। आयोजकों ने आरोप लगाया कि अगर अस्पताल और पार्षद की ओर से सहयोग मिलता और थोड़ी जगह दी जाती, तो पंडाल पहले की तरह सुरक्षित खड़ा रहता। मजबूरी में सड़क पर पंडाल खड़ा करना पड़ा और इसी वजह से वर्षों में पहली बार वह ढह गया। गनीमत रही कि इस हादसे में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। समिति ने प्रशासन से मांग की है कि परंपरा को बनाए रखने के लिए भविष्य में उपयुक्त स्थान उपलब्ध कराया जाए, ताकि इस तरह की परेशानी दोबारा न हो।

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