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गौ-तस्करी का ‘ट्रायंगल कॉरिडोर’ उजागर, छत्तीसगढ़ से ओडिशा होते हुए आंध्र तक पहुंच रहे मवेशी

छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले से संचालित हो रहे कथित गौ-तस्करी नेटवर्क को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। देवभोग क्षेत्र से ओडिशा सीमा के रास्ते गाय-बैलों को बड़े पैमाने पर बाहर भेजे जाने का मामला सामने आया है। जांच और स्थानीय जानकारी के मुताबिक यह नेटवर्क छत्तीसगढ़, ओडिशा और आंध्रप्रदेश को जोड़ते हुए संगठित तरीके से काम कर रहा है। देवभोग से करीब 8 किलोमीटर दूर ओडिशा सीमा शुरू होती है। यहां बीजू एक्सप्रेस-वे के आसपास रात के समय बड़ी संख्या में गाय-बछड़ों के साथ संदिग्ध लोग देखे गए। पूछताछ में उन्होंने खुद को किसान बताया और मवेशियों को धरमगढ़ बाजार ले जाने की बात कही। स्थानीय लोगों के अनुसार ओडिशा के कालाहांडी जिले के धरमगढ़ में हर शुक्रवार बड़ा मवेशी बाजार लगता है, जहां हजारों की संख्या में गाय-बैल खरीदे और बेचे जाते हैं। आरोप है कि यहां से अधिकांश मवेशियों को आंध्रप्रदेश और तेलंगाना के कसाईघरों तक पहुंचाया जाता है। जानकारी के मुताबिक तस्करी का नेटवर्क गांव स्तर तक फैला हुआ है। एजेंट सीमावर्ती गांवों में घूमकर बूढ़े और कमजोर मवेशियों को 1000 से 1500 रुपए में खरीदते हैं। बाद में इन्हें समूह बनाकर बाजार पहुंचाया जाता है। आरोप है कि एक एजेंट हर सप्ताह दर्जनों मवेशियों की खरीद-बिक्री करता है। धरमगढ़ मवेशी मंडी के बाहर लग्जरी वाहनों की मौजूदगी ने भी संदेह बढ़ाया है। स्थानीय लोगों का दावा है कि बाजार में किसान कम और बड़े सप्लायर व दलाल ज्यादा सक्रिय रहते हैं। यही लोग मवेशियों को आगे ट्रकों और जंगल के रास्तों से आंध्रप्रदेश तक पहुंचाते हैं। बताया जा रहा है कि मवेशियों को सीधे वाहनों में नहीं ले जाया जाता, बल्कि चरणबद्ध तरीके से पैदल सीमा पार कराई जाती है। इसके लिए अलग-अलग टीमों में मजदूर लगाए जाते हैं, जो जंगल और घाटी वाले रास्तों से मवेशियों को आगे बढ़ाते हैं ताकि पुलिस कार्रवाई से बचा जा सके। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि 1500 रुपए में खरीदे गए मवेशियों को आंध्र सीमा तक पहुंचाकर 4000 रुपए तक में बेचा जाता है। बूढ़े और कमजोर पशुओं को छोटे वाहनों से भी ले जाया जाता है। पुलिस को शक है कि इसके पीछे एक बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सीमावर्ती इलाकों में शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी जरूरतों के लिए ओडिशा पर निर्भरता का फायदा अब तस्करी नेटवर्क उठा रहा है। उनका आरोप है कि सीमा पर प्रभावी निगरानी और संयुक्त कार्रवाई नहीं होने से यह अवैध कारोबार लगातार बढ़ रहा है। गरियाबंद कलेक्टर भगवान सिंह उइके ने कहा कि उन्हें फिलहाल मवेशी तस्करी की जानकारी नहीं है। यदि ऐसे मामले सामने आते हैं तो जांच कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं गरियाबंद एसपी नीरज चंद्राकर ने दावा किया कि पुलिस लगातार निगरानी कर रही है और सीमावर्ती इलाकों में चौकसी बढ़ाई गई है। उन्होंने कहा कि समय-समय पर कार्रवाई भी की जा रही है।

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महासमुंद गैस घोटाले में बड़ा खुलासा, खाद्य अधिकारी निकला सिंडिकेट का मास्टरमाइंड

महासमुंद जिले में जब्त एलपीजी गैस कैप्सूल ट्रकों से करोड़ों रुपए की गैस गायब होने के मामले में पुलिस जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। जांच एजेंसियों के मुताबिक जिला खाद्य अधिकारी अजय यादव इस पूरे गैस सिंडिकेट का मुख्य संचालक था। पुलिस का दावा है कि अधिकारियों, गैस एजेंसी संचालकों और कारोबारियों की मिलीभगत से करीब 92 टन एलपीजी गैस का गबन किया गया। पुलिस के अनुसार खाद्य अधिकारी अजय यादव ने गौरव गैस एजेंसी के संचालक पंकज चंद्राकर, रायपुर निवासी मनीष चौधरी और अन्य आरोपियों के साथ मिलकर करीब डेढ़ करोड़ रुपए कीमत की गैस का अवैध कारोबार किया। मामले में अब तक चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि संतोष ठाकुर और सार्थक ठाकुर समेत अन्य आरोपी फरार बताए जा रहे हैं। जांच में सामने आया कि दिसंबर 2025 में सिंघोड़ा थाना क्षेत्र में 6 एलपीजी गैस से भरे कैप्सूल ट्रक जब्त किए गए थे। सुरक्षा कारणों से इन्हें सुरक्षित स्थान पर रखने की जिम्मेदारी खाद्य विभाग को दी गई थी। इसी दौरान गैस निकालने की योजना तैयार की गई। पुलिस के मुताबिक 23 मार्च 2026 को आरंग के एक ढाबे में आरोपियों की बैठक हुई, जहां गैस बेचने की डील तय की गई। इसके बाद 26 मार्च को ट्रकों में मौजूद गैस का आकलन किया गया। ट्रकों में करीब 102 से 105 मीट्रिक टन एलपीजी होने की जानकारी सामने आई थी। जांच में पता चला कि ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स के साथ करीब 80 लाख रुपए में सौदा तय हुआ। 30 मार्च को खाद्य विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी में छह गैस कैप्सूल ट्रकों को सुपुर्दनामा पर लेकर अभनपुर स्थित प्लांट पहुंचाया गया। पुलिस का कहना है कि इसके बाद सुनियोजित तरीके से ट्रकों से गैस निकाली गई। 31 मार्च, 1 अप्रैल और 5 अप्रैल की रात अलग-अलग कैप्सूलों से गैस खाली की गई और तीन दिनों में करीब 92 टन एलपीजी गायब कर दी गई। यह गैस निजी टैंकरों, बुलेट टैंकों और विभिन्न एजेंसियों में सप्लाई की गई। जांच में यह भी सामने आया कि ट्रकों का वजन जानबूझकर देर से कराया गया ताकि गैस पहले ही निकाली जा सके। पांच ट्रकों का वजन 6 अप्रैल और आखिरी ट्रक का वजन 8 अप्रैल को कराया गया, तब तक अधिकांश कैप्सूल खाली हो चुके थे। दस्तावेजों की जांच में पुलिस को कालाबाजारी के सबूत भी मिले हैं। रिकॉर्ड के अनुसार ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स ने अप्रैल में केवल 47 टन गैस खरीदी, जबकि बिक्री 107 टन दिखाई गई। इससे साफ हुआ कि बड़ी मात्रा में बिना वैध खरीदी के गैस बेची गई। पुलिस ने यह भी दावा किया कि आरोपियों ने जांच को गुमराह करने और पूरे मामले का ठीकरा पुलिस पर फोड़ने की योजना बनाई थी। अप्रैल महीने के रिकॉर्ड और एंट्री रजिस्टर गायब पाए गए, जिससे साक्ष्य मिटाने की कोशिश की पुष्टि हुई। महासमुंद पुलिस की 40 सदस्यीय टीम ने 15 दिनों तक तकनीकी जांच, कॉल डिटेल, दस्तावेज विश्लेषण और पूछताछ के बाद पूरे नेटवर्क का खुलासा किया। फिलहाल मामले में बीएनएस और आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कार्रवाई जारी है।

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प्रति एकड़ एक बोरी यूरिया-डीएपी देने के फैसले पर भड़का किसान संगठन, सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

खरीफ सीजन 2026-27 से पहले छत्तीसगढ़ में खाद वितरण को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। भारतीय किसान यूनियन ने राज्य सरकार की नई व्यवस्था का विरोध करते हुए आरोप लगाया है कि किसानों को पर्याप्त मात्रा में खाद नहीं मिल पाएगी और उन्हें निजी दुकानों पर निर्भर होना पड़ेगा। यूनियन के प्रदेश महासचिव तेजराम विद्रोही ने कहा कि सरकार ने सहकारी समितियों में खाद और नगद वितरण का अनुपात बदल दिया है। पहले किसानों को 40 प्रतिशत उर्वरक और 60 प्रतिशत नगद राशि दी जाती थी, जबकि अब इसे 30 प्रतिशत उर्वरक और 70 प्रतिशत नगद कर दिया गया है। उनका कहना है कि इस बदलाव से समितियों में खाद की उपलब्धता कम हो जाएगी। किसान संगठन का आरोप है कि खाद की कमी होने पर किसानों को निजी दुकानों से ज्यादा कीमत पर यूरिया और डीएपी खरीदनी पड़ेगी। साथ ही निजी विक्रेता किसानों पर अन्य उत्पाद खरीदने का दबाव भी बनाते हैं, जिससे आर्थिक बोझ बढ़ता है। तेजराम विद्रोही ने सरकार के प्रति एकड़ एक बोरी यूरिया और एक बोरी डीएपी देने के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि इससे फसल उत्पादन प्रभावित हो सकता है। उन्होंने दावा किया कि पिछले साल समय पर खाद नहीं मिलने की वजह से धान उत्पादन में लगभग 20 प्रतिशत तक गिरावट आई थी और इस बार स्थिति और गंभीर हो सकती है। किसान यूनियन ने सरकार की नीति को किसान विरोधी बताते हुए कहा कि सीमित खाद वितरण से उत्पादन घटेगा, जिससे समर्थन मूल्य पर धान खरीदी का दबाव भी कम हो जाएगा। संगठन ने सरकार से फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है।

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रायगढ़ में कुत्तों के हमले से कोटरी की मौत: पानी की तलाश में गांव पहुंचा था वन्यप्राणी

Raigarh जिले में पानी की तलाश में जंगल से बस्ती की ओर पहुंचे एक कोटरी (हिरण प्रजाति) की कुत्तों के हमले के बाद मौत हो गई। घायल हालत में वन विभाग ने उसे जंगल में छोड़ा था, लेकिन बाद में वह मृत मिला। मामला रायगढ़ वन परिक्षेत्र के चिराईपानी इलाके का है। जानकारी के अनुसार जंगल में पानी की कमी के कारण कोटरी भटकते हुए गांव तक पहुंच गया था। इसी दौरान कुत्तों के झुंड ने उस पर हमला कर दिया। जान बचाने के लिए वह ग्रामीण Manoj Dansena के घर के आंगन में घुस गया, लेकिन कुत्ते लगातार उसका पीछा करते रहे। ग्रामीणों ने लाठी-डंडों की मदद से कुत्तों को वहां से भगाया। बताया जा रहा है कि हमले में कोटरी के पिछले पैरों में गंभीर चोटें आई थीं और वह बेहद डरा हुआ था। घटना की सूचना मिलने के बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। वन अमले ने घायल वन्यप्राणी का पशु चिकित्सक से प्राथमिक उपचार कराया और बाद में उसे देलारी जंगल में सुरक्षित छोड़ दिया। विभाग की टीम उसकी निगरानी भी कर रही थी, लेकिन शाम के समय निरीक्षण के दौरान वह मृत अवस्था में मिला। इसके बाद शव को सुरक्षित स्थान पर रखा गया और अगले दिन पशु चिकित्सकों की मौजूदगी में पोस्टमार्टम कराया गया। नियमानुसार वन विभाग द्वारा अंतिम प्रक्रिया पूरी की गई। रायगढ़ रेंजर Sanjay Lakda ने बताया कि कोटरी काफी संवेदनशील वन्यप्राणी होता है। हमले और डर की वजह से उसकी हालत बिगड़ गई थी, जिसके चलते उसकी मौत हो गई।

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गर्भवती महिला ने ससुराल पक्ष पर दहेज प्रताड़ना का लगाया आरोप, पति-सास-ससुर के खिलाफ FIR दर्ज

Durg जिले के नंदिनी माइंस अहिवारा क्षेत्र की रहने वाली Shilpa Goswami ने अपने पति, सास और ससुर पर दहेज प्रताड़ना और मानसिक उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़िता चार महीने की गर्भवती है और उसका आरोप है कि पति उसे किराए के मकान में अकेला छोड़कर चला गया। महिला थाना भिलाई नगर में दर्ज शिकायत के अनुसार, शादी के शुरुआती दिनों में सब कुछ सामान्य था, लेकिन कुछ समय बाद ससुराल पक्ष का व्यवहार बदल गया। महिला ने आरोप लगाया कि पति Siddharth Giri, ससुर Ishwar Giri और सास Rekha Goswami दहेज को लेकर लगातार ताने देते थे। पीड़िता का कहना है कि उस पर सोने का ब्रेसलेट, कूलर और बड़ा टीवी नहीं लाने को लेकर दबाव बनाया जाता था। उसने शिकायत में बताया कि ससुराल वाले अक्सर कहते थे कि कहीं और शादी होती तो ज्यादा दहेज मिलता। महिला ने आरोप लगाया कि समय के साथ मानसिक प्रताड़ना बढ़कर शारीरिक और भावनात्मक उत्पीड़न में बदल गई। गर्भावस्था के दौरान भी उसका ध्यान नहीं रखा गया और न ही दवाइयों की व्यवस्था की गई। उसने यह भी आरोप लगाया कि पति कई बार तलाक देने और दूसरी शादी कर ज्यादा दहेज लाने की धमकी देता था। शिकायत के मुताबिक विवाद बढ़ने पर पहले महिला परामर्श केंद्र में दोनों पक्षों की काउंसलिंग भी हुई थी। समझौते के बाद दंपति खपरी इलाके में किराए के मकान में रहने लगे, लेकिन वहां भी विवाद जारी रहा। आरोप है कि 27 अप्रैल की रात पति ने फिर विवाद किया और गर्भवती पत्नी को अकेला छोड़कर चला गया। इसके बाद महिला अपने भाई के साथ Dhamtari जिले के ग्राम जुगदेही स्थित रिश्तेदारों के घर चली गई। पीड़िता का कहना है कि लगातार प्रताड़ना के कारण वह मानसिक रूप से टूट चुकी थी। Chhattisgarh Police ने शिकायत और प्रारंभिक जांच के आधार पर पति, सास और ससुर के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 85 और 3(5) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

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RTE एडमिशन पर हाईकोर्ट सख्त: 400 स्कूलों में एक भी आवेदन नहीं, सरकार से मांगा जवाब

Chhattisgarh High Court ने प्रदेश में शिक्षा के अधिकार (RTE) के तहत पहली कक्षा में एडमिशन की स्थिति को लेकर राज्य सरकार पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने उस रिपोर्ट पर हैरानी जताई, जिसमें बताया गया कि राज्य के करीब 400 स्कूलों में RTE के तहत एक भी आवेदन नहीं आया। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने शपथ पत्र पेश कर बताया कि 387 स्कूल ऐसे हैं जहां एडमिशन के लिए किसी भी अभिभावक ने आवेदन नहीं किया। वहीं 366 स्कूलों में सीटों के मुकाबले बेहद कम आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें कई बड़े और प्रतिष्ठित स्कूल भी शामिल बताए गए हैं। इस पर हाईकोर्ट ने सवाल उठाया कि क्या गरीब बच्चे बड़े स्कूलों में पढ़ना नहीं चाहते, या फिर कहीं सरकार वास्तविक स्थिति छिपाने की कोशिश तो नहीं कर रही। कोर्ट ने राज्य शासन को पूरी जानकारी शपथ पत्र के साथ पेश करने के निर्देश दिए हैं। मुख्य न्यायाधीश Ramesh Sinha की डिवीजन बेंच ने कहा कि RTE के तहत स्कूलों में 25 प्रतिशत सीटें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित हैं। ऐसे में यदि किसी स्कूल में सिर्फ एक-दो बच्चों के एडमिशन की जानकारी दी जा रही है, तो यह गंभीर सवाल खड़े करता है। कोर्ट ने शिक्षा विभाग से पूछा कि जब नया शैक्षणिक सत्र शुरू हो चुका है, तब गरीब बच्चों के दाखिले में देरी क्यों हो रही है। अदालत ने यह भी कहा कि प्रशासनिक लापरवाही के कारण हजारों बच्चों का भविष्य प्रभावित नहीं होना चाहिए। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि सभी स्कूलों में RTE के तहत आवंटित सीटों और हुए एडमिशन की जानकारी ऑनलाइन सार्वजनिक की जाए। साथ ही शिक्षा सचिव को 10 जुलाई तक विस्तृत शपथ पत्र के साथ जवाब दाखिल करने को कहा गया है।

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बुलेट सवार बदमाशों का आतंक: एक से लूट, दूसरे पर रॉड से हमला; बिलासपुर में 2 आरोपी गिरफ्तार

Bilaspur के ट्रांसपोर्ट नगर इलाके में लूट और मारपीट की दो वारदातों को अंजाम देने वाले बुलेट सवार तीन आरोपियों में से दो को Chhattisgarh Police ने गिरफ्तार कर लिया है। मामले में एक आरोपी अब भी फरार है, जिसकी तलाश जारी है। गिरफ्तार आरोपियों में सिरगिट्टी के नयापारा वार्ड निवासी Rahul Sahu (25) और एक नाबालिग शामिल है। पुलिस ने आरोपियों के पास से बुलेट बाइक, मोबाइल फोन और 3700 रुपए नकद जब्त किए हैं। पहली घटना 29 अप्रैल की रात की बताई जा रही है। ट्रांसपोर्ट नगर स्थित साहू ढाबा के पास ड्राइवर Sonu Bajra खाना खाने के बाद अपने ट्रक की ओर लौट रहा था। इसी दौरान बिना नंबर प्लेट की बुलेट पर पहुंचे तीन युवकों ने उस पर हमला कर मोबाइल फोन और 5 हजार रुपए लूट लिए और मौके से फरार हो गए। इसके चार दिन बाद 4 मई को उसी इलाके में दूसरी वारदात हुई। आरोप है कि वही तीन आरोपी फिर बुलेट पर पहुंचे और Gulshan Sahu पर लोहे की रॉड और बाइक की चाबी से हमला कर दिया, जिससे वह घायल हो गया। दोनों मामलों में चकरभाठा थाने में अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गई थीं। पुलिस ने घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच की, जिसके आधार पर आरोपियों की पहचान की गई। बाद में पुलिस ने दबिश देकर दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ के दौरान आरोपियों ने अपने एक अन्य साथी के साथ मिलकर वारदात को अंजाम देने की बात कबूल की। दोनोंआरोपियों को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है, जबकि फरार आरोपी की तलाश में पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है।

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बिलासपुर के पचपेड़ी इलाके में दिखा भालू, VIDEO वायरल: ग्रामीणों में दहशत, वन विभाग अलर्ट

Bilaspur जिले के पचपेड़ी परिक्षेत्र में भालू दिखाई देने से ग्रामीणों में भय का माहौल बन गया है। शुक्रवार सुबह करीब 6 बजे पचपेड़ी और ध्रुवाकारी गांव के बीच नहर किनारे घूम रहे लोगों ने अचानक जंगली भालू को देखा, जिसके बाद इलाके में हड़कंप मच गया। ग्रामीणों ने सतर्कता दिखाते हुए भालू को आबादी वाले क्षेत्र की ओर आने से रोकने की कोशिश की। इसके बाद भालू केवंतरा और सुकुलकारी गांव की तरफ बढ़ते हुए भरारी जंगल की दिशा में चला गया। घटना की जानकारी मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया गया। वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक इलाके में लगातार निगरानी की जा रही है। डिप्टी रेंजर Baghel ने बताया कि भालू की लोकेशन ट्रैक करने के लिए टीम जंगल और आसपास के क्षेत्रों में सर्च अभियान चला रही है। भालू के मिलने पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर उसे सुरक्षित जंगल क्षेत्र में छोड़ा जाएगा। वन विभाग ने ग्रामीणों से सतर्क रहने की अपील की है। खेतों में काम करने वाले किसानों और सुबह-शाम बाहर निकलने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है। विभाग ने साफ कहा है कि किसी भी स्थिति में भालू के पास जाने या उसे उकसाने की कोशिश न करें और तुरंत वन अमले को सूचना दें।

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छत्तीसगढ़ में जमीन रिकॉर्ड पूरी तरह डिजिटल: रजिस्ट्री के साथ ही शुरू होगा नामांतरण, हर बदलाव पर मिलेगा SMS अलर्ट

Chhattisgarh में जमीन संबंधी व्यवस्थाओं को पूरी तरह डिजिटल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य गठन के बाद पहली बार जमीन के लगभग सभी रिकॉर्ड ऑनलाइन कर दिए गए हैं। 5 मई तक रायपुर समेत पूरे प्रदेश के गांवों के 5.87 करोड़ से अधिक खसरा रिकॉर्ड डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड किए जा चुके हैं। राज्य सरकार ने अब जमीन की रजिस्ट्री और नामांतरण प्रक्रिया को भी ऑनलाइन सिस्टम से जोड़ दिया है। नई व्यवस्था के तहत रजिस्ट्री होते ही नामांतरण की प्रक्रिया स्वतः शुरू हो जाएगी। इससे लोगों को तहसील और पटवारी कार्यालयों के बार-बार चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। सरकार ने रजिस्ट्री में दर्ज मोबाइल नंबर को जमीन रिकॉर्ड से लिंक किया है। ऐसे में रिकॉर्ड में किसी भी तरह की छेड़छाड़, बदलाव या संदिग्ध गतिविधि होने पर जमीन मालिक और संबंधित अधिकारियों को तुरंत एसएमएस अलर्ट मिलेगा। इससे फर्जीवाड़े और अवैध फेरबदल पर रोक लगाने में मदद मिलने की उम्मीद है। राजस्व विभाग के अनुसार प्रदेश के 20 हजार से ज्यादा गांवों का भूमि डेटा ऑनलाइन किया जा चुका है। 20,286 गांवों के खसरा रिकॉर्ड और 19,694 गांवों के नक्शों को स्कैन कर डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराया गया है। वहीं प्रधानमंत्री गति शक्ति योजना के तहत 18,959 गांवों के नक्शों की जियोरेफरेंसिंग भी पूरी कर ली गई है। नई तकनीक की मदद से जमीन का लोकेशन, सीमांकन और रिकॉर्ड ऑनलाइन देखा जा सकेगा। इसके अलावा राज्य के सभी 105 उप-पंजीयक कार्यालयों को तहसील कार्यालयों से ऑनलाइन जोड़ा गया है, जिससे जमीन से जुड़े मामलों का निपटारा तेज होगा। राज्य सरकार का दावा है कि अब लोग मोबाइल एप और ऑनलाइन पोर्टल के जरिए घर बैठे खसरा, बी-1 और अन्य दस्तावेज डाउनलोड कर सकेंगे। साथ ही जमीन पर बैंक लोन या गिरवी जैसी जानकारी भी पोर्टल पर उपलब्ध रहेगी, जिससे खरीदी-बिक्री में पारदर्शिता बढ़ेगी। राजस्व मंत्री Tank Ram Verma ने कहा कि डिजिटल इंडिया भू-अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम के तहत राजस्व व्यवस्था को पारदर्शी और पेपरलेस बनाया जा रहा है, ताकि लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें।

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बिलासपुर में फैक्ट्री हादसा: 25 फीट ऊंचाई से गिरने पर मजदूर की मौत, सुरक्षा लापरवाही के आरोप

Bilaspur जिले के सीपत थाना क्षेत्र में एक बोरा फैक्ट्री में काम के दौरान दर्दनाक हादसा हो गया। प्लांट में सफाई करते समय एक मजदूर करीब 25 फीट ऊंचाई से नीचे गिर गया, जिससे उसकी मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों ने फैक्ट्री प्रबंधन पर सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। जानकारी के मुताबिक ग्राम जांजी निवासी Laxmi Prasad Dheewar (45) सोमवार सुबह रोज की तरह फैक्ट्री में काम करने पहुंचे थे। दोपहर करीब 3 बजे वे प्लांट के ऊपरी हिस्से में सफाई का काम कर रहे थे। इसी दौरान संतुलन बिगड़ने से वे ऊंचाई से नीचे गिर पड़े। बताया जा रहा है कि मजदूर को काम के दौरान हेलमेट, सेफ्टी बेल्ट या अन्य सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराए गए थे। हादसे के बाद फैक्ट्री परिसर में अफरा-तफरी मच गई। गंभीर रूप से घायल मजदूर को इलाज के लिए Shri Ram Care Hospital ले जाया गया, जहां देर रात इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों ने फैक्ट्री प्रबंधन के खिलाफ नाराजगी जताई। उनका कहना है कि फैक्ट्री में पहले भी हादसे हो चुके हैं, लेकिन सुरक्षा को लेकर कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई। परिजनों ने आरोप लगाया कि मजदूरों से लंबे समय तक काम कराया जाता है और श्रम कानूनों का भी ठीक से पालन नहीं होता। परिवार ने मृतक के लिए उचित मुआवजा और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। वहीं Chhattisgarh Police ने मामले की जांच शुरू कर दी है और जांच के बाद आगे की कार्रवाई की बात कही है।

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