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हाईकोर्ट का अहम फैसला: बिना सबूत अफेयर का आरोप लगाना मानसिक क्रूरता, डॉक्टर पति को तलाक, पत्नी को 25 लाख गुजारा भत्ता

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने वैवाहिक विवाद से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। जस्टिस रजनी दुबे और जस्टिस एके प्रसाद की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया कि बिना ठोस प्रमाण के जीवनसाथी पर अवैध संबंधों का आरोप लगाना मानसिक क्रूरता की श्रेणी में आता है। कोर्ट ने एक डॉक्टर पत्नी द्वारा लगाए गए आरोपों को निराधार मानते हुए डॉक्टर पति की तलाक याचिका स्वीकार कर ली। साथ ही पत्नी को 25 लाख रुपये एकमुश्त गुजारा भत्ता देने का आदेश भी दिया गया है। क्या है पूरा मामला मामला सारंगढ़ निवासी डॉक्टर से जुड़ा है, जिनकी शादी वर्ष 2008 में रायगढ़ में भिलाई की रहने वाली महिला डॉक्टर से हुई थी। शादी के बाद दंपती की एक बेटी हुई, लेकिन कुछ वर्षों बाद ही दोनों के रिश्तों में तनाव पैदा हो गया। अंततः वर्ष 2014 से दोनों अलग-अलग रहने लगे। पति का आरोप था कि पत्नी का व्यवहार शादी के कुछ समय बाद ही अपमानजनक और संदेहपूर्ण हो गया था। उस पर बार-बार अवैध संबंधों के आरोप लगाए गए, जिससे उसे मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी। पति ने यह भी आरोप लगाया कि पत्नी छोटी-छोटी बातों पर विवाद करती थी, मांग में सिंदूर लगाने और मंगलसूत्र पहनने से इनकार करती थी, यहां तक कि एक बार जानलेवा हमला भी किया गया। फैमिली कोर्ट से हाईकोर्ट तक पहुंचा मामला पति ने दुर्ग स्थित फैमिली कोर्ट में तलाक की याचिका दायर की थी, जिसे फैमिली कोर्ट ने खारिज कर दिया। इसके बाद पति ने हाईकोर्ट में अपील की। सुनवाई के दौरान सामने आया कि पत्नी ने अपने लिखित बयान में पति पर किसी अन्य महिला डॉक्टर से संबंध होने का गंभीर आरोप लगाया था। पत्नी का यह भी दावा था कि कथित महिला ने उसके घर में घुसकर तोड़फोड़ की थी, लेकिन इन आरोपों के समर्थन में कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया जा सका। कोर्ट की टिप्पणी: चरित्र हनन सबसे गंभीर क्रूरता हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि शिक्षित पत्नी द्वारा बिना आधार के पति के चरित्र पर लांछन लगाना मानसिक क्रूरता का सबसे गंभीर रूप है। कोर्ट ने माना कि पत्नी अपने आरोपों को साबित करने में असफल रही, जिससे पति को गंभीर मानसिक पीड़ा हुई। हालांकि कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि केवल अलग रहने के आधार पर तलाक नहीं दिया जा सकता, लेकिन मानसिक क्रूरता के आधार पर तलाक उचित है। 25 लाख रुपये एकमुश्त गुजारा भत्ता हाईकोर्ट ने तलाक मंजूर करते हुए यह भी कहा कि दोनों पति-पत्नी डॉक्टर हैं और आर्थिक रूप से सक्षम हैं, फिर भी बेटी की परवरिश और भविष्य के कानूनी विवादों से बचने के लिए पति को पत्नी को 25 लाख रुपये एकमुश्त गुजारा भत्ता देना होगा। यह राशि 6 महीने के भीतर अदा करनी होगी।

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रायपुर की सड़कों पर हथियारों के साथ युवकों की रील, कट्टा–चाकू लहराते VIDEO वायरल; पुलिस ने शुरू की तलाश

राजधानी रायपुर में सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो ने पुलिस और आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। वायरल फुटेज में कुछ युवक कार चलाते हुए खुलेआम कट्टा और चाकू लहराते नजर आ रहे हैं। ये युवक शहर की सड़कों, गलियों और सुनसान इलाकों में फिल्मी और बदमाश-लाडले जैसे गानों पर रील बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड कर रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इन युवकों ने अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपने पेज और आईडी बना रखी हैं, जहां लगातार ऐसे वीडियो साझा कर खुद को ‘डॉन’ और ‘भाई’ के रूप में पेश करने की कोशिश की जा रही है। वीडियो सामने आने के बाद रायपुर पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। हाथ और कमर में हथियार, दबंगई का प्रदर्शन वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि युवक हाथ में कट्टा और कमर में चाकू रखकर गानों पर रील बना रहे हैं। कुछ वीडियो में आपत्तिजनक भाषा और गालियों का भी इस्तेमाल किया गया है। बताया जा रहा है कि शहर में अपना वर्चस्व दिखाने और सोशल मीडिया पर दबंग छवि बनाने के लिए ये युवक ग्रुप बनाकर वीडियो शूट कर वायरल कर रहे हैं। 18 से 25 साल के बताए जा रहे युवक प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, वीडियो में दिख रहे युवकों की उम्र 18 से 25 वर्ष के बीच है। सोशल मीडिया पर लाइक और फॉलोअर्स बढ़ाने की होड़ में ये युवक कानून को ताक पर रखकर इस तरह की खतरनाक गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं। शुरुआती जांच में सामने आया है कि ये वीडियो खमतराई, तेलीबांधा, पुरानी बस्ती और डीडी नगर जैसे इलाकों में शूट किए गए हैं। जांच के बाद होगी सख्त कार्रवाई रायपुर पुलिस के अधिकारियों ने कहा है कि सोशल मीडिया पर हथियारों के साथ रील बनाने वालों की पहचान की जा रही है। सभी वायरल वीडियो की जांच कर संबंधित युवकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का कहना है कि शहर में शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए ऐसे असामाजिक तत्वों पर जीरो टॉलरेंस नीति के तहत सख्त कदम उठाए जाएंगे और दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।

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रायपुर में कारोबारी ने की आत्महत्या, विज्ञापन एजेंसी संचालक का फ्लैट में मिला शव

राजधानी रायपुर से एक दुखद मामला सामने आया है, जहां एक कारोबारी ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मृतक की पहचान विज्ञापन एजेंसी के संचालक विश्वरंजन पुरोहित के रूप में हुई है। 10 जनवरी की सुबह न्यू राजेंद्र नगर स्थित उनके फ्लैट में उनका शव फंदे से लटका मिला। यह मामला न्यू राजेंद्र नगर थाना क्षेत्र का है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, मृतक हाल के दिनों में अपने व्यवसाय में हुए नुकसान के कारण मानसिक तनाव में था, हालांकि आत्महत्या के पीछे की वास्तविक वजह अभी स्पष्ट नहीं हो सकी है। पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। अपने ही फ्लैट में उठाया आत्मघाती कदम बताया जा रहा है कि विश्वरंजन पुरोहित अपने परिवार के साथ न्यू राजेंद्र नगर के एक फ्लैट में रहते थे। इसी फ्लैट में उन्होंने यह आत्मघाती कदम उठाया। घटना की जानकारी मिलते ही परिजन मौके पर पहुंचे और पुलिस को सूचित किया गया। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने घटनास्थल पर पहुंचकर शव को कब्जे में लिया और पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। परिजनों से पूछताछ, सुसाइड नोट नहीं मिला पुलिस द्वारा मृतक के परिवारजनों और परिचितों से पूछताछ की जा रही है। फिलहाल कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है, जिससे आत्महत्या के कारणों का खुलासा हो सके। पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज और अन्य साक्ष्यों की भी जांच कर रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्रारंभिक जांच में किसी तरह की आपराधिक आशंका नहीं दिख रही है, लेकिन पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।

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रायपुर में आबकारी विभाग की सख्त कार्रवाई, स्कूटी से हो रही थी अवैध शराब की सप्लाई; आरोपी गिरफ्तार

रायपुर जिले में आबकारी विभाग ने अवैध शराब के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए देशी मदिरा की खेप बरामद की है। विभाग की टीम ने स्कूटी के जरिए शराब की डिलीवरी करते एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई में 5.76 बल्क लीटर देसी शराब और एक स्कूटी जब्त की गई है। यह कार्रवाई सचिव सह आबकारी आयुक्त आर. संगीता के मार्गदर्शन और कलेक्टर रायपुर डॉ. गौरव सिंह के निर्देश पर की गई। जिला आबकारी विभाग रायपुर की टीम ने 8 जनवरी 2026 को आरंग थाना क्षेत्र के ग्राम बाना में यह कार्रवाई अंजाम दी। जांच के दौरान नवीन प्राथमिक शाला के सामने एक व्यक्ति को संदिग्ध अवस्था में रोका गया। तलाशी लेने पर उसकी स्कूटी (हीरो डेस्टिनी प्राइम) की डिक्की से 32 पाव देसी मदिरा मसाला यूनीक बरामद की गई। जब्त शराब की कुल मात्रा 5.76 बल्क लीटर बताई गई है, जो अन्य जिला महासमुंद की होने की जानकारी सामने आई है। आरोपी जेल भेजा गया गिरफ्तार आरोपी की पहचान ग्राम बाना निवासी उजेंद्र बंजारे के रूप में हुई है। आबकारी विभाग ने मौके से अवैध शराब और वाहन को जब्त कर आरोपी के खिलाफ छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम की धारा 34(2) के तहत मामला दर्ज किया। इसके बाद आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। इस प्रकरण की जांच आबकारी उपनिरीक्षक प्रीति कुशवाहा कर रही हैं। कार्रवाई के दौरान आरक्षक राकेश दुबे की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही।

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उरला–बेंद्री रोड पर सुबह-सुबह सनसनी, निशाद ढाबा के पास अज्ञात व्यक्ति का शव मिला

रायपुर। राजधानी रायपुर के उरला थाना क्षेत्र अंतर्गत बेंद्री रोड पर बुधवार सुबह उस समय सनसनी फैल गई, जब निशाद ढाबा के पास एक अज्ञात व्यक्ति का शव बरामद किया गया। शव कंबल से ढका हुआ था और प्रथम दृष्टया शरीर पर चोट के निशान दिखाई दे रहे थे, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया। जानकारी के अनुसार, निशाद ढाबा का मालिक सुबह करीब 7 बजे ढाबा खोलने पहुंचा। इसी दौरान उसकी नजर ढाबे के पास पड़े शव पर पड़ी। शव को देखकर वह घबरा गया और तुरंत उरला पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और क्षेत्र को घेराबंदी कर जांच शुरू की। पुलिस द्वारा शव की तलाशी लेने पर मृतक का आधार कार्ड बरामद हुआ, जिससे उसकी पहचान तमिलनाडु निवासी के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि मृतक पेशे से ट्रक चालक था। प्रारंभिक जांच में मृतक के शरीर पर चोट के निशान पाए गए हैं, वहीं मुंह से खून की उल्टी होने के संकेत भी मिले हैं। उरला पुलिस के अनुसार, प्रथम दृष्टया मामला सड़क दुर्घटना का प्रतीत हो रहा है। आशंका जताई जा रही है कि किसी हादसे में घायल होने के बाद व्यक्ति यहां आकर सो गया होगा और रात के दौरान उसकी मौत हो गई। हालांकि, जिस स्थिति में शव मिला है, उसे पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। पुलिस को घटनास्थल से खून के स्पष्ट निशान नहीं मिले हैं, जिससे हत्या की आशंका भी पूरी तरह खारिज नहीं की जा रही है। इसी वजह से पुलिस हर पहलू से मामले की जांच कर रही है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। उरला पुलिस का कहना है कि मौत दुर्घटना से हुई है या फिर यह हत्या का मामला है, इसका खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगा। फिलहाल पुलिस आसपास के लोगों से पूछताछ कर रही है और मामले की गहन जांच जारी है।

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रायपुर में ऑनलाइन सट्टा रैकेट का भंडाफोड़, 4 आरोपी गिरफ्तार, 50 लाख कैश बरामद

रायपुर। राजधानी रायपुर में पुलिस ने ऑनलाइन सट्टा और बेटिंग के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए 4 सटोरियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से 50 लाख 35 हजार रुपए नकद और करीब 80 लाख रुपए का सामान जब्त किया गया है। यह कार्रवाई गंज थाना क्षेत्र में की गई। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में खम्हारडीह निवासी रितेश गोविंदानी (32), मौदहापारा निवासी मोहम्मद अख्तर (32), डीडी नगर निवासी विक्रम राजकोरी (32) और पुरानी बस्ती निवासी सागर पिंजानी (30) शामिल हैं। आरोपी कार में बैठकर ऑनलाइन सट्टा खिलाने के साथ-साथ बेटिंग वेबसाइट्स की ID भी बेच रहे थे। कार में बैठकर चल रहा था ऑनलाइन सट्टारायपुर पुलिस को सूचना मिली थी कि कुछ लोग सिंधु भवन पार्किंग के पास कार में बैठकर ऑनलाइन सट्टा संचालित कर रहे हैं। सूचना मिलते ही एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट और गंज थाना पुलिस की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची और चारों आरोपियों को रंगे हाथों पकड़ लिया। पूछताछ के दौरान आरोपियों ने पहले पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की, लेकिन सख्ती से पूछताछ करने पर उन्होंने ऑनलाइन सट्टा खिलाने की बात स्वीकार कर ली। आरोपियों ने बताया कि उनके पास बेटिंग साइट्स की मास्टर ID थी, जिसके जरिए वे सट्टा संचालित करते थे और कई लोगों को ID बेच चुके हैं। इन वेबसाइट्स से जुड़ा था सट्टा नेटवर्कआरोपियों के पास Allpanelexch.com, Power7777.com, Powerexch.com और Classicexch99.com जैसी ऑनलाइन बेटिंग साइट्स की मास्टर ID होने की जानकारी सामने आई है। पुलिस अब इनसे जुड़े अन्य लोगों और सट्टा खेलने वालों की भी पहचान कर रही है। 80 लाख रुपए का सामान जब्त, खातों में करोड़ों होल्डरायपुर SSP डॉ. लाल उमेद सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि IG रायपुर अमरेश मिश्रा के निर्देशन में यह कार्रवाई की गई है। आरोपियों के पास से नकद राशि के अलावा लैपटॉप, मोबाइल फोन, कार, पासपोर्ट, एटीएम कार्ड, चेक बुक और अन्य दस्तावेज जब्त किए गए हैं। साथ ही आरोपियों से जुड़े बैंक खातों में मौजूद करोड़ों रुपए की राशि को होल्ड कराया गया है। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ छत्तीसगढ़ जुआ निषेध अधिनियम 2022 की धारा 7, 1

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दुर्ग में गंदे पानी से पीलिया फैला: उतई नगर पंचायत के 2 वार्ड प्रभावित, हैंडपंप बंद कर भेजे गए पानी के सैंपल

दुर्ग।छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले की नगर पंचायत उतई में दूषित पानी पीने से पीलिया (जॉन्डिस) फैलने का मामला सामने आया है। वार्ड क्रमांक 14 और 15 में बीते करीब एक महीने से लगातार मरीज मिल रहे हैं, जिससे पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि नालियों में जमा गंदे पानी की वजह से घरों और सार्वजनिक हैंडपंपों का जल स्रोत दूषित हो गया, जिसके बाद बदबूदार पानी की शिकायतें मिलने लगीं। शुरुआत में कुछ परिवारों ने इसे व्यक्तिगत समस्या समझा, लेकिन धीरे-धीरे पूरे मोहल्ले में एक जैसे लक्षण नजर आने लगे। हैंडपंप और बोरिंग का पानी बना बीमारी की वजह सूचना मिलने पर स्वास्थ्य विभाग की टीम मौके पर पहुंची और करीब 20 मरीजों के घरों में जाकर जांच की। जांच के दौरान पाया गया किअधिकांश परिवार हैंडपंप या बोरिंग के पानी का उपयोग कर रहे थे। एहतियातन वार्ड में मौजूद एक सार्वजनिक हैंडपंप को तुरंत बंद कर दिया गया है। साथ ही सभी संदिग्ध जलस्रोतों से पानी के नमूने लेकर लैब भेजे गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। एक ही वार्ड में मिले 12 मरीज जानकारी के अनुसार, वहीं वार्ड 14 में पहले 12 मरीज सामने आए थे, लेकिन स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि सभी मरीज अब स्वस्थ हैं। यहां एक बोरिंग को संदिग्ध मानते हुए तुरंत बंद कर दिया गया। बीएमओ और डॉक्टरों की टीम ने किया घर-घर निरीक्षण बीएमओ डॉ. देवेंद्र बेलचंदन ने बताया किडॉक्टरों की टीम ने प्रभावित वार्डों के घरों में जाकर स्थिति का आकलन किया है।हालांकि हाल ही में दो घरों में हल्के लक्षण दिखे थे, लेकिन उनकी हालत फिलहाल सामान्य है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से किया गया है। लोगों को केवल उबला हुआ पानी पीने की सख्त सलाह दी गई है। हैंडपंप बंद, टैंकर से हो रही पानी की सप्लाई सुरक्षा के लिहाज से प्रभावित इलाकों में इसके साथ ही का काम भी तेज कर दिया गया है। नगर पंचायत के मुख्य नगर पालिका अधिकारी राजेंद्र नायक ने बताया कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरती जाएगी। पानी के सैंपल जांच में, स्थिति नियंत्रण में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया किप्रभावित घरों के सभी पानी के सैंपल जांच के लिए भेज दिए गए हैं।फिलहाल हालात नियंत्रण में हैं, लेकिन वार्ड 14 और 15 में निगरानी लगातार जारी है।

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मौसम बदलते ही बीमारियां बढ़ीं: रायपुर में रोज 600 से ज्यादा वायरल और सर्दी-खांसी के मरीज, डॉक्टरों की चेतावनी

रायपुर।मौसम में अचानक आए बदलाव का सीधा असर अब लोगों की सेहत पर दिखने लगा है। राजधानी रायपुर के सरकारी और निजी अस्पतालों में पिछले कुछ दिनों से वायरल फीवर, सर्दी और खांसी के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। हालात यह हैं कि शहर में हर दिन 600 से अधिक मरीज वायरल जैसे लक्षणों के साथ इलाज के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार कई मरीजों में बीमारी ठीक होने के बाद 2–3 दिन के भीतर दोबारा बुखार लौट रहा है, जो सामान्य वायरल से अलग संकेत माना जा रहा है। 🏥 चार दिनों में अस्पतालों पर बढ़ा दबाव पिछले चार दिनों के आंकड़ों के मुताबिक, रायपुर के अलग-अलग अस्पतालों में रोज औसतन इतने मरीज पहुंच रहे हैं: अस्पतालों में ओपीडी का लोड लगातार बढ़ रहा है। 🔁 ठीक होने के बाद फिर लौट रहा बुखार डॉक्टरों का कहना है कि इस बार वायरल का पैटर्न अलग नजर आ रहा है।अधिकतर मामलों में: इस वजह से मरीज लंबे समय तक थकान और चक्कर की शिकायत कर रहे हैं। ⚠️ 3 दिन बाद दोबारा बुखार आए तो तुरंत डॉक्टर से मिलें डॉक्टरों की सलाह है कि यदि तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और जरूरी जांच कराएं। 💊 बिना जांच दवा लेना हो सकता है खतरनाक मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मिथिलेश चौधरी ने बताया किमौसम में उतार-चढ़ाव, बढ़ता प्रदूषण और कमजोर इम्यूनिटी के कारण वायरल और बुखार के मामलों में तेजी आई है। उन्होंने कहा कि कई मरीजों में डेंगू और मलेरिया जैसे लक्षण भी देखे जा रहे हैं।ऐसे में बिना ब्लड जांच, प्लेटलेट काउंट और अन्य जरूरी टेस्ट कराए दवा लेना नुकसानदायक हो सकता है। 🦠 ऐसे पहचानें नया वायरल फीवर ✅ बचाव के जरूरी उपाय डॉक्टरों का कहना है कि लापरवाही इस वायरल को गंभीर और लंबा बना सकती है, इसलिए शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करें।

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महादेव सट्टा ऐप मामला: ED ने 92 करोड़ की संपत्ति की सीज, दुबई से चल रहा था रिग्ड बेटिंग नेटवर्क

रायपुर / नई दिल्ली।महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 92 करोड़ रुपये की संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच कर लिया है। यह कार्रवाई PMLA कानून के तहत की गई है और इसे अब तक की सबसे अहम कार्रवाइयों में से एक माना जा रहा है। ED की जांच में सामने आया है कि इस पूरे नेटवर्क के पीछे सौरभ चंद्राकर, रवि उप्पल और उनके सहयोगियों का संगठित सिंडिकेट काम कर रहा था, जो भारत से अवैध तरीके से करोड़ों रुपये विदेश भेज रहा था। 💰 किन संपत्तियों पर ED की कार्रवाई ED के अनुसार, इसके अलावा, 🌍 दुबई से संचालित हो रहा था महादेव ऐप जांच एजेंसी के मुताबिक, महादेव ऑनलाइन बुक (MOB) ऐप को सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल प्रमोट कर रहे थे। दोनों छत्तीसगढ़ के निवासी हैं और फिलहाल UAE (दुबई) में मौजूद बताए जा रहे हैं।भारत सरकार उनकी प्रत्यर्पण प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी कर रही है। 🎰 रिग्ड गेम्स से होती थी ग्राहकों की लूट ED की जांच में खुलासा हुआ है किMahadev Online Book और Skyexchange जैसे प्लेटफॉर्म पर रिग्ड गेम्स चलाए जा रहे थे,जहां इस तरह लाखों यूजर्स से अवैध तरीके से रकम वसूली जाती थी। 💸 हवाला, क्रिप्टो और FPI से विदेश पहुंचा पैसा जांच में सामने आया कि सट्टेबाजी से कमाई गई रकम को के जरिए विदेश भेजा गया।बाद में इसी पैसे को FPI (Foreign Portfolio Investment) के नाम पर भारतीय शेयर बाजार में निवेश किया गया। 🔁 कैशबैक रैकेट का भी खुलासा ED ने एक बड़े कैशबैक रैकेट का भी पर्दाफाश किया है।जांच में पता चला कि ED का दावा है कि गगन गुप्ता कोSalasar Techno Engineering और Tiger Logistics से जुड़े सौदों में करीब 98 करोड़ रुपये का फायदा हुआ। 📂 अब तक की कार्रवाई ED के अनुसार, इस नेटवर्क में छत्तीसगढ़ के कई हाई-प्रोफाइल नेता और अधिकारी भी जांच के दायरे में हैं। एजेंसी का कहना है कि महादेव ऐप एक ‘अंब्रेला सिंडिकेट’ की तरह काम कर रहा था। 💎 सर्राफा कारोबारी के जरिए पहुंची प्रोटेक्शन मनी EOW की जांच में यह भी सामने आया है किमहादेव बुक प्रमोटर्स ने कार्रवाई से बचने के लिएराजनेताओं, ब्यूरोक्रेट्स और पुलिस अफसरों तक प्रोटेक्शन मनी पहुंचाई। इसमें छत्तीसगढ़ के सर्राफा कारोबारी सुनील कुमार दम्मानी (श्री आभूषण ज्वैलर्स) की भूमिका सामने आई है।हवाला के जरिए पैसा कलेक्ट करचंद्रभूषण वर्मा और राहुल वक्टे के माध्यम से आगे पहुंचाया जाता था। 👥 पैनल चलाने वाले नाम सामने आए जांच में जिन लोगों के नाम सामने आए हैं: ⚠️ चालान में अफसरों के नाम गायब EOW द्वारा कोर्ट में पेश किए गए चालान मेंकिसी भी ब्यूरोक्रेट या पुलिस अधिकारी को नामजद आरोपी नहीं बनाया गया है।चालान में केवल पदनामों का उल्लेख किया गया है। 🔍 जांच जारी, और खुलासों की उम्मीद ED और EOW का कहना है कि जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में इस हाई-प्रोफाइल सट्टा और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।

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दावरा यूनिवर्सिटी पर गंभीर आरोप, छात्र ने लगाया भविष्य बर्बाद करने का आरोप

रायपुर। छत्तीसगढ़ की दावरा यूनिवर्सिटी एक बार फिर विवादों में घिरती नजर आ रही है। यूनिवर्सिटी में फार्मेसी कोर्स में एडमिशन लेने वाले छात्र सागर गुप्ता ने संस्थान पर गंभीर आरोप लगाए हैं। छात्र का कहना है कि यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने उन्हें पीसीआई (Pharmacy Council of India) की मान्यता होने का भरोसा देकर एडमिशन कराया, लेकिन बाद में यह सामने आया कि कोर्स को पीसीआई की स्वीकृति ही नहीं मिली थी। छात्र सागर गुप्ता ने बताया कि उन्होंने एडमिशन से पहले कई बार यूनिवर्सिटी से PCI अप्रूवल को लेकर स्पष्ट सवाल किए थे। हर बार उन्हें यही बताया गया कि कोर्स पूरी तरह से अप्रूव्ड है। इसके बाद उन्होंने तय फीस जमा कर फार्मेसी कोर्स में एडमिशन ले लिया। 5 दिसंबर को किया गया बड़ा खुलासा सागर का आरोप है कि एडमिशन के काफी समय बाद, 5 दिसंबर को यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने अचानक यह जानकारी दी कि पीसीआई अप्रूवल रिजेक्ट हो चुका है, जबकि इससे पहले दो बार इंस्पेक्शन होने के बावजूद छात्रों को आश्वासन दिया जाता रहा कि सब कुछ ठीक है। फ्रॉड जैसे विकल्प दिए गए छात्र का कहना है कि जब अप्रूवल न होने की बात सामने आई तो यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार द्वारा तीन विकल्प दिए गए, जो पूरी तरह से भ्रामक और धोखेबाज़ी से भरे थे। इन विकल्पों में न तो पढ़ाई की उचित व्यवस्था थी और न ही भविष्य की कोई गारंटी। शिक्षकों और पढ़ाई की भारी कमी सागर ने बताया कि यूनिवर्सिटी में न तो ठीक से बैठने की व्यवस्था थी, न नियमित क्लासेज़। कई दिनों तक शिक्षक ही नहीं आते थे। 17 अगस्त से 3 अक्टूबर तक छात्र लगातार शिक्षकों और प्रशासन से संघर्ष करते रहे। दो महीने बाद एक शिक्षक आईं, लेकिन वे भी अनुभवहीन बताई जा रही हैं। कंपनसेशन से भी इनकार जब छात्रों ने अपने बर्बाद हुए समय और भविष्य को देखते हुए यूनिवर्सिटी से कंपनसेशन की मांग की, तो प्रबंधन ने इस पर भी सहमति नहीं जताई। छात्रों का आरोप है कि यूनिवर्सिटी को बच्चों के भविष्य से कोई लेना-देना नहीं है। छात्र का आरोप सागर गुप्ता का कहना है, “हमने पूरी जानकारी लेकर एडमिशन लिया था। यूनिवर्सिटी ने झूठ बोला। हमारा कीमती समय, पैसा और भविष्य बर्बाद कर दिया गया।” ⚠️ प्रशासन से कार्रवाई की मांग इस पूरे मामले के सामने आने के बाद सवाल उठ रहे हैं कि बिना पीसीआई अप्रूवल के छात्रों को एडमिशन कैसे दिया गया। छात्रों और उनके परिजनों ने शिक्षा विभाग और प्रशासन से निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की है। Note- इस पूरे मामले में लगाए गए सभी आरोप छात्र सागर गुप्ता के हैं। खबर लिखे जाने तक दावरा यूनिवर्सिटी प्रबंधन से इस विषय पर कोई लिखित या मौखिक जवाब प्राप्त नहीं हो सका है।

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