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उधारी के पैसे को लेकर युवक की हत्या: NSUI नेता और साथियों ने होटल में बंधक बनाकर पीटा, इलाज के दौरान मौत

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले से एक सनसनीखेज हत्या का मामला सामने आया है, जहां उधारी के पैसे को लेकर NSUI के एक नेता और उसके साथियों ने मिलकर एक युवक की बेरहमी से पिटाई कर दी। होटल के कमरे में बंधक बनाकर लात-घूंसों से पीटे गए युवक की इलाज के दौरान मौत हो गई। पुलिस ने इस मामले में NSUI जिला उपाध्यक्ष सहित कुल पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। मृतक की पहचान ऋषि निर्मलकर (19) के रूप में हुई है। वह अपने पिता की कपड़े प्रेस करने की दुकान में हाथ बंटाता था। यह घटना दुर्ग सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र की है। पैसे नहीं लौटाए तो उठा लिया रास्ते से पुलिस जांच में सामने आया है कि NSUI जिला उपाध्यक्ष मेजर सागर ने ऋषि को कुछ पैसे उधार दिए थे। जब ऋषि ने पैसे लौटाने में देर की और फोन उठाना बंद कर दिया, तो आरोपी गुस्से में आ गए। 20 जनवरी को ऋषि अपने एक दोस्त के साथ बाइक से घूम रहा था। इसी दौरान स्टेशन रोड पर पीछे से कार में आए मेजर सागर और उसके साथियों ने उसे रोक लिया। जबरदस्ती बाइक से उतारकर उसे कार में बैठाया गया और सीधे दुर्ग स्थित “36 इन होटल” ले जाया गया। होटल के कमरे में बंधक बनाकर की पिटाई बताया जा रहा है कि जिस होटल में ऋषि को ले जाया गया, वहां आरोपी मेजर सागर ही मैनेजर था। होटल के एक कमरे में ऋषि को बंद कर सभी आरोपियों ने उसकी लात-घूंसों से जमकर पिटाई की। अधमरा हालत में उसे होटल के बाहर फेंक दिया गया। इसके बाद ऋषि ने अपने दोस्त को फोन कर बुलाया और किसी तरह घर पहुंचा। घरवालों ने चोटों के बारे में पूछा, लेकिन उसने कुछ नहीं बताया। दो दिन बाद बिगड़ी हालत, अस्पताल में मौत घटना के दो दिन बाद ऋषि की तबीयत अचानक बिगड़ गई। पहले उसे स्थानीय डॉक्टर को दिखाया गया, फिर हालत गंभीर होने पर भिलाई के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। 25 जनवरी को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मौत का कारण गंभीर अंदरूनी चोटें बताया गया है। पांच आरोपी गिरफ्तार, सभी ने कबूला जुर्म परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने 26 जनवरी को हत्या का मामला दर्ज किया। जांच के दौरान पहले 27 जनवरी को दो आरोपियों—NSUI जिला संयोजक प्रशांत राव (26) और लक्की उर्फ किशन ध्रुवे (18) को गिरफ्तार किया गया। इसके बाद 2 फरवरी को पुलिस ने मुख्य आरोपी मेजर सिंह सागर उर्फ राज सिंह सागर (19), काके उर्फ हरविंदर सिंह (20) और अंकित झा (22) को घेराबंदी कर गिरफ्तार किया। सभी आरोपी दुर्ग के निवासी हैं और पूछताछ में उन्होंने अपराध स्वीकार कर लिया है। पुलिस ने सभी को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है और मामले की आगे जांच जारी है।

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एक कमरे में दो-दो कक्षाएं: अलमारी से बना ऑफिस, गुरुनानक प्राथमिक शाला की बदहाल व्यवस्था पर सवाल

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के मालवीय नगर क्षेत्र में स्थित गुरुनानक प्राथमिक शाला में बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी सामने आई है। स्कूल पिछले चार वर्षों से पं. मदन मोहन मालवीय प्राथमिक शाला परिसर में अस्थायी रूप से संचालित हो रहा है, जहां सिर्फ तीन कमरों में पहली से पांचवीं तक की कक्षाएं चलाई जा रही हैं। कमरों की कमी के कारण एक ही कक्षा में दो-दो कक्षाओं के बच्चों को बैठाकर पढ़ाया जा रहा है। सबसे चिंताजनक स्थिति यह है कि स्कूल में न तो हेडमास्टर के बैठने के लिए अलग कमरा है और न ही कोई स्टाफ रूम। मजबूरी में शिक्षकों ने एक अलमारी लगाकर उसी कक्षा में पार्टिशन बनाकर कार्यालय तैयार किया है। अलमारी के एक तरफ ऑफिस का काम चलता है, जबकि दूसरी तरफ बच्चों की पढ़ाई होती है। गुरुनानक प्राथमिक शाला को दीपक नगर स्थित स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय परिसर में शिफ्ट किया गया था। यहां पहली से पांचवीं तक की कक्षाओं के लिए केवल तीन कमरे ही उपलब्ध कराए गए। सीमित संसाधनों में स्कूल का संचालन करना शिक्षकों और विद्यार्थियों दोनों के लिए चुनौती बना हुआ है। हेडमास्टर रतिदास सिरमौर ने बताया कि स्कूल पहले अपने भवन में संचालित होता था, लेकिन एक छोटा छज्जा गिरने के बाद भवन की मरम्मत कराने के बजाय स्कूल को तत्काल खाली करने का आदेश दे दिया गया। इसके बाद से पिछले चार सालों से स्कूल इसी अस्थायी व्यवस्था में चल रहा है। स्कूल में पढ़ने वाले अधिकांश बच्चे पैदल आते हैं। उन्हें स्कूल पहुंचने के लिए व्यस्त सड़क पार करनी पड़ती है, जिससे दुर्घटना का खतरा हमेशा बना रहता है। अभिभावकों का कहना है कि छोटे बच्चों के लिए यह स्थिति असुरक्षित है, लेकिन विकल्प न होने के कारण वे मजबूर हैं। इसके अलावा स्कूल के ठीक पास स्थित अन्य विद्यालय में माइक सिस्टम से पढ़ाई कराई जाती है, जिसकी तेज आवाज से गुरुनानक प्राथमिक शाला के छात्रों की पढ़ाई बार-बार बाधित होती है। शिक्षकों का कहना है कि शोर के कारण बच्चों का ध्यान केंद्रित करना मुश्किल हो जाता है। हेडमास्टर ने अक्टूबर 2025 में स्कूल शिक्षा मंत्री को पत्र लिखकर नई भवन व्यवस्था और मूलभूत सुविधाओं की मांग की थी, लेकिन अब तक न कोई जवाब मिला है और न ही कोई ठोस कदम उठाया गया है। स्कूल में कुल तीन स्टाफ सदस्य पदस्थ हैं। हेडमास्टर स्वयं तीसरी कक्षा पढ़ाते हैं, एक शिक्षक चौथी और पांचवीं कक्षा की जिम्मेदारी संभालते हैं, जबकि एक शिक्षिका पहली और दूसरी कक्षा को एक साथ पढ़ाती हैं। इस पूरे मामले पर जिला शिक्षा अधिकारी का कहना है कि संबंधित प्रिंसिपल को कमरों की उचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

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तांत्रिक ठगी का खुलासा: 2.50 लाख को करोड़ बनाने का झांसा, बदले में कार और कैश की लूट

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में नेशनल हाईवे-130 पर हुई कार और नकदी लूट की वारदात ने अब एक चौंकाने वाला मोड़ ले लिया है। पुलिस जांच में सामने आया है कि लूट की इस घटना के पीछे तांत्रिक द्वारा की गई ठगी और उससे उपजा बदला छिपा हुआ था। रतनपुर थाना क्षेत्र में दर्ज इस मामले में पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। वहीं, जांच के दौरान यह भी सामने आया कि जिस व्यक्ति ने खुद को लूट का शिकार बताया था, वह दरअसल तंत्र-मंत्र के नाम पर लोगों से ठगी कर रहा था। एडिशनल एसपी ग्रामीण मधुलिका सिंह के अनुसार, कोरबा जिले के दीपका निवासी विजय कुमार राज (48) ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। उसने बताया कि 31 जनवरी की रात वह अपनी तीन महिला रिश्तेदारों के साथ बिल्हा मेला देखने गया था। लौटते समय रात करीब 3:35 बजे रतनपुर के एक ढाबे के पास टॉयलेट के लिए कार रोकी, तभी दो कारों में सवार चार युवकों ने उस पर हमला कर दिया। हमलावरों ने मारपीट कर उसकी स्विफ्ट डिजायर कार, तीन मोबाइल फोन और करीब 8 हजार रुपये नकद लूट लिए और फरार हो गए। घटना की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी रजनेश सिंह के निर्देश पर विशेष टीम गठित की गई। तकनीकी साक्ष्यों और मोबाइल लोकेशन के आधार पर पुलिस टीम ने सरगुजा और कोरिया जिलों में दबिश देकर चार आरोपियों—विद्यादास महंत, रामसुंदर, राजीव सिंह और गुलशन कुजूर—को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि विजय कुमार राज खुद को तांत्रिक बताकर तंत्र विद्या के जरिए 2.50 लाख रुपये को 2.50 करोड़ रुपये बनाने का झांसा दे रहा था। इसी लालच में उन्होंने उसे पैसे दिए, लेकिन बाद में न तो रकम वापस मिली और न ही कोई लाभ हुआ। जब आरोपियों ने अपने पैसे वापस मांगे तो विजय ने इंकार कर दिया। इसी से नाराज होकर उन्होंने बदले की भावना से उसकी कार और सामान लूट लिया। पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि विजय ने तंत्र-मंत्र से ठगी की बात लूट की शिकायत के दौरान छिपाई थी। अब बिल्हा थाना क्षेत्र में विजय कुमार राज और उसके सहयोगियों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया गया है और उसकी गिरफ्तारी की तैयारी की जा रही है। एसएसपी रजनेश सिंह ने आम लोगों से अपील की है कि झाड़-फूंक, तंत्र-मंत्र या पैसे दोगुना करने जैसे दावों से दूर रहें। ऐसे दावे करने वाले लोग सिर्फ लोगों के लालच का फायदा उठाकर ठगी करते हैं और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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तेलीबांधा पार्किंग विवाद पर निगम का प्लान साफ, आम लोगों से नहीं वसूला जाएगा शुल्क

रायपुर। तेलीबांधा तालाब क्षेत्र में पार्किंग शुल्क को लेकर मचे विवाद के बीच महापौर मीनल चौबे ने निगम की स्थिति स्पष्ट कर दी है। उन्होंने कहा कि सुबह 12 बजे तक आने वाले लोगों से किसी भी प्रकार का पार्किंग चार्ज नहीं लिया जाएगा। इसके साथ ही शाम के समय इवनिंग वॉक के लिए आने वालों के लिए अलग से पार्किंग स्पेस सुरक्षित रखा जाएगा। महापौर ने साफ किया कि पार्किंग शुल्क केवल उन होटल और रेस्टोरेंट संचालकों व उनके ग्राहकों से लिया जाएगा, जो घंटों तक सड़क पर गाड़ियां खड़ी कर देते हैं और इससे यातायात व्यवस्था अस्त-व्यस्त हो जाती है। “कमाई नहीं, व्यवस्था सुधार हमारा लक्ष्य” सोमवार को तेलीबांधा पार्किंग मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए महापौर मीनल चौबे ने कहा कि नगर निगम का उद्देश्य राजस्व कमाना नहीं, बल्कि ट्रैफिक जाम की समस्या को नियंत्रित करना है।उन्होंने आश्वासन दिया कि सुबह की मॉर्निंग वॉक और शाम की इवनिंग वॉक के दौरान आम नागरिकों को किसी तरह की परेशानी नहीं होने दी जाएगी। बोर्ड लगते ही शुरू हुआ विरोध नगर निगम द्वारा तेलीबांधा तालाब किनारे सड़क पर पार्किंग शुल्क वसूली की तैयारी के तहत जैसे ही सूचना बोर्ड लगाए गए, स्थानीय लोगों ने इसका विरोध शुरू कर दिया। इस मुद्दे को मीडिया में प्रमुखता से उठाए जाने के बाद निगम प्रशासन ने स्थिति स्पष्ट की है। फिलहाल निगम द्वारा वाहनों का डाटा संग्रह किया जा रहा है, ताकि यह तय किया जा सके कि किस समय, कितने वाहन और किस उद्देश्य से यहां खड़े होते हैं। कर्मचारी तैनात, जुटाया जा रहा डाटा नगर निगम ने जोन क्रमांक-3 और मुख्यालय के कर्मचारियों को दोपहर 3 बजे के बाद तेलीबांधा क्षेत्र में तैनात किया है। ये कर्मचारी— का डाटा जुटा रहे हैं। निगम का कहना है कि इसी आधार पर अंतिम व्यवस्था लागू की जाएगी। वीकेंड पर सबसे ज्यादा दबाव यातायात पुलिस के अनुसार, वीकेंड पर शाम 5 बजे से रात 12 बजे तक तेलीबांधा तालाब किनारे सड़क पर— खड़ी रहती हैं। यानी हर वीकेंड करीब 1600 लोग इस क्षेत्र में शाम से देर रात तक मौजूद रहते हैं। नियम तोड़ने पर कार्रवाई जारी लेन से बाहर वाहन खड़े करने वालों पर यातायात पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है। वीकेंड पर रोजाना करीब 70 वाहनों पर ई-चालान की कार्रवाई की जाती है। इसके अलावा एक टीम पूरे दिन क्षेत्र में पेट्रोलिंग भी करती है।

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छत्तीसगढ़ में खुलेगा पहला अंतरिक्ष केंद्र, रायपुर बनेगा स्पेस एजुकेशन हब

रायपुर। छत्तीसगढ़ अब अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम उठाने जा रहा है। राज्य में पहली बार अंतरिक्ष केंद्र (Space Centre) की स्थापना होने जा रही है, जिससे छत्तीसगढ़ देश के उन चुनिंदा राज्यों में शामिल हो जाएगा, जहां छात्रों को स्पेस टेक्नोलॉजी की व्यावहारिक शिक्षा मिलेगी। यह अत्याधुनिक अंतरिक्ष केंद्र नवा रायपुर में शुरू किया जा रहा है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का शुभारंभ 3 फरवरी को सुबह 10 बजे, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय राखी, नवा रायपुर में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय करेंगे। इस मौके पर देश के दूसरे अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला भी विशेष रूप से मौजूद रहेंगे। छात्र बनाएंगे सैटेलाइट, रॉकेट लॉन्च की मिलेगी ट्रेनिंग इस अंतरिक्ष केंद्र के शुरू होने के बाद राज्य के छात्र: यह केंद्र छात्रों को केवल किताबों तक सीमित नहीं रखेगा, बल्कि उन्हें रियल टाइम स्पेस मिशन एक्सपीरियंस से जोड़ेगा। ‘प्रोजेक्ट अंतरिक्ष संगवारी’ की शुरुआत जिला प्रशासन द्वारा आईडीवायएम फाउंडेशन और सारडा एनर्जी एंड मिनरल्स लिमिटेड के सहयोग से इस परियोजना को “प्रोजेक्ट अंतरिक्ष संगवारी” नाम दिया गया है। इसके तहत नवा रायपुर में राज्य का पहला अत्याधुनिक स्पेस सेंटर स्थापित किया गया है। शुभांशु शुक्ला होंगे ब्रांड एंबेसडर देश के दूसरे अंतरिक्ष यात्री कैप्टन शुभांशु शुक्ला इस स्पेस सेंटर के ब्रांड एंबेसडर होंगे। उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान वे छात्रों से संवाद करेंगे और उन्हें अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में करियर बनाने के लिए प्रेरित करेंगे। इसरो मानकों पर तैयार हुआ स्पेस सेंटर कलेक्टर डॉ. गौरव कुमार सिंह के अनुसार, यह अंतरिक्ष केंद्र इसरो के मानकों के अनुरूप विकसित किया गया है। यहां— जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी। यह केंद्र छत्तीसगढ़ के छात्रों के लिए स्पेस रिसर्च और इनोवेशन का नया द्वार खोलेगा।

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राज्य में नई जल दरें लागू, उद्योगों के लिए पानी हुआ महंगा

रायपुर। राज्य सरकार ने औद्योगिक उपयोग में आने वाले पानी की दरों में बढ़ोतरी करते हुए नई जल शुल्क नीति लागू कर दी है। जल संसाधन विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार ये नई दरें 2 फरवरी से प्रभावी हो चुकी हैं। सरकार का कहना है कि यह फैसला जल संरक्षण, राजस्व बढ़ाने और भू-जल के अत्यधिक दोहन पर रोक लगाने के उद्देश्य से लिया गया है। नई नीति के तहत उद्योगों को अब पानी के स्रोत और उसके उपयोग के प्रकार के आधार पर अलग-अलग शुल्क चुकाना होगा। यह व्यवस्था पानी से उत्पाद तैयार करने वाले उद्योगों के साथ-साथ थर्मल और जल विद्युत परियोजनाओं पर भी लागू होगी। पानी को कच्चे माल की तरह इस्तेमाल करने वालों पर ज्यादा बोझ नई दर संरचना में उन उद्योगों पर सबसे अधिक शुल्क तय किया गया है, जिनके लिए पानी कच्चा माल है। इसमें शामिल हैं— इन उद्योगों को सरकारी जलाशय से पानी लेने पर 300 रुपए प्रति घनमीटर और नहर से पानी लेने पर 360 रुपए प्रति घनमीटर शुल्क देना होगा।वहीं, प्राकृतिक या स्वयं विकसित जल स्रोतों से पानी लेने पर 150 रुपए प्रति घनमीटर की दर तय की गई है। कूलिंग और प्रोसेसिंग के लिए कम दरें जो उद्योग पानी का उपयोग केवल कूलिंग, धुलाई या प्रोसेसिंग के लिए करते हैं और जहां पानी अंतिम उत्पाद का हिस्सा नहीं बनता, उन्हें तुलनात्मक रूप से कम जल-कर देना होगा। जल विद्युत परियोजनाओं पर नई व्यवस्था सरकार ने 25 मेगावाट से अधिक क्षमता वाली जल विद्युत परियोजनाओं के लिए प्रति यूनिट उत्पादन पर शुल्क निर्धारित किया है। इसके साथ हर वर्ष एस्केलेशन चार्ज भी लागू होगा।25 मेगावाट तक की परियोजनाओं के लिए अपेक्षाकृत न्यूनतम दर रखी गई है।इसके अलावा, जलाशयों की सतह या विभागीय भूमि पर लगने वाली सौर ऊर्जा परियोजनाओं से 1000 रुपए प्रति एकड़ प्रति वर्ष शुल्क वसूला जाएगा। अग्रिम भुगतान करने वालों को राहत नई नीति के अनुसार, जो उद्योग 5 से 10 साल का जल-कर एकमुश्त जमा कर देंगे, उनके लिए उस अवधि तक जल दरें स्थिर रहेंगी, भले ही आगे चलकर शुल्क बढ़ा दिया जाए। जिन उद्योगों ने जलाशय निर्माण के लिए अग्रिम जल-कर अंशदान नहीं किया है, उन्हें अनुबंध से पहले 1 करोड़ रुपए प्रति मिलियन घनमीटर की दर से एकमुश्त सुगमता शुल्क देना होगा। यह राशि न तो समायोज्य होगी और न ही वापस की जाएगी। भू-जल उपयोग पर सख्ती नई भू-जल प्रबंधन नीति के तहत, जहां सतही जल उपलब्ध है, वहां औद्योगिक उपयोग के लिए भू-जल अनुमति का नवीनीकरण नहीं किया जाएगा। ईटीपी नहीं लगाने पर तीन गुना शुल्क राज्य सरकार ने साफ किया है कि जिन उद्योगों ने अपशिष्ट उपचार संयंत्र (ETP) नहीं लगाया है या उसे पूरी क्षमता से संचालित नहीं कर रहे हैं, उनसे लागू जल-कर का तीन गुना शुल्क वसूला जाएगा। उद्योगों को अपने उपचारित जल का पुनः उपयोग करने की अनुमति दी गई है, लेकिन यदि उसे संयंत्र से बाहर उपयोग या सप्लाई करना हो तो विभाग की पूर्व स्वीकृति अनिवार्य होगी। माइनिंग पिट का पानी भी महंगा खनन कार्य से बने गड्ढों (माइन पिट) में जमा पानी का औद्योगिक इस्तेमाल करने पर सामान्य दर से दोगुना शुल्क लिया जाएगा। सरकार का उद्देश्य इस तरह के उपयोग को हतोत्साहित करना है।

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राजधानी में बढ़ते ट्रैफिक के सामने स्मार्ट सिग्नल सिस्टम बेअसर, कम वाहन होने पर भी लंबा इंतजार

रायपुर। राजधानी रायपुर में वाहनों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। बढ़ती आबादी और सड़कों पर बढ़ते दबाव के कारण शहर के कई प्रमुख चौराहों पर रोजाना जाम की स्थिति बन रही है। ट्रैफिक को सुचारू बनाने के उद्देश्य से स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत वर्ष 2019 में इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) लागू किया गया था, लेकिन मौजूदा हालात में यह सिस्टम अपनी अपेक्षित भूमिका निभाता नजर नहीं आ रहा। इस परियोजना के अंतर्गत शहर के प्रमुख चौराहों पर वॉल्यूम एक्चुएटेड ट्रैफिक सिग्नल लगाए गए थे, जो कैमरों और सेंसर के माध्यम से वाहनों की संख्या को पहचान कर सिग्नल का समय अपने आप तय करते हैं। योजना यह थी कि जहां अधिक ट्रैफिक होगा, वहां ग्रीन सिग्नल की अवधि बढ़ेगी और जहां वाहन कम होंगे, वहां सिग्नल जल्दी बदलेगा। लेकिन हकीकत यह है कि कई सिग्नलों पर वाहनों की संख्या कम होने के बावजूद भी डेढ़ मिनट या उससे अधिक समय तक इंतजार करना पड़ रहा है। पीक आवर्स में बढ़ती परेशानी शहर के जयस्तंभ चौक, शारदा चौक और शास्त्री चौक सहित अन्य व्यस्त चौराहों पर सुबह 9 बजे से दोपहर 1 बजे तक और शाम 5 बजे से रात 9 बजे तक ट्रैफिक का दबाव सबसे अधिक रहता है। इन समयों में सिग्नल सिस्टम की खामियां और ज्यादा नजर आती हैं। जयस्तंभ चौक पर हालात सुबह करीब 10:30 बजे जयस्तंभ चौक पर चारों ओर वाहनों की लंबी कतारें देखी गईं। सबसे अधिक दबाव शास्त्री चौक की दिशा में था। यहां 100 सेकेंड रेड और 100 सेकेंड ग्रीन सिग्नल का चक्र चल रहा था, लेकिन इतने समय में आधे से भी कम वाहन ही चौराहा पार कर पाए। शारदा चौक पर ट्रैफिक का असर करीब 11 बजे शारदा चौक पर आजाद चौक की ओर से आने वाले वाहनों का दबाव अधिक था। यहां भी 90 सेकेंड रेड और 90 सेकेंड ग्रीन का समय निर्धारित रहा। सभी वाहन पार हो गए, लेकिन जयस्तंभ चौक से जुड़े ट्रैफिक के कारण कुछ देर के लिए जाम की स्थिति बनी। शास्त्री चौक पर सिस्टम की खामी दोपहर 12:30 बजे शास्त्री चौक पर मोतीबाग, तेलीबांधा और रेलवे स्टेशन की ओर से आने वाले वाहनों की संख्या काफी अधिक थी। सभी लेन में वाहनों को करीब डेढ़ मिनट तक रुकना पड़ा। वहीं जयस्तंभ चौक की ओर से आने वाली लेन अपेक्षाकृत जल्दी खाली हो गई, इसके बावजूद उस दिशा में ग्रीन सिग्नल चालू रहा। जबकि नियम के अनुसार वाहन न होने की स्थिति में सिग्नल को रेड होकर अन्य लेन को ग्रीन मिलना चाहिए था। 160 करोड़ का प्रोजेक्ट, फिर भी सवाल स्मार्ट सिटी योजना के तहत करीब 160 करोड़ रुपए की लागत से यह सिस्टम तैयार किया गया था। इसके अंतर्गत शहर के 40 चौराहों पर स्मार्ट सिग्नल, 372 से अधिक सीसीटीवी कैमरे और 23 स्थानों पर रेड लाइट उल्लंघन डिटेक्शन सिस्टम लगाए गए हैं। अधिकारी बोले— तकनीकी जांच कराएंगे इस पूरे मामले पर सहायक पुलिस आयुक्त यातायात सतीश सिंह का कहना है कि वॉल्यूम एक्चुएटेड सिग्नल सिस्टम चालू है और ट्रैफिक के अनुसार स्वचालित रूप से काम करता है। अत्यधिक दबाव की स्थिति में कई बार सिग्नल को मैनुअल मोड में भी रखा जाता है।उन्होंने कहा कि यदि कहीं तकनीकी समस्या सामने आ रही है, तो उसकी जांच कराकर सुधार किया जाएगा।

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जिले में 75 राइस मिलरों ने नहीं दिया चावल, दो माह का राशन वितरण प्रभावित

रायपुर। जिले के नान (NAN) गोदामों में अब तक कोर पीडीएस (PDS) चावल की पर्याप्त आपूर्ति नहीं हो पाई है। खाद्य विभाग से करार करने वाले 75 राइस मिलर्स अब तक तय मात्रा में चावल जमा नहीं कर पाए हैं। हालात यह हैं कि कुछ मिलर्स ने धान उठाव के बाद एक किलो चावल भी गोदाम में जमा नहीं किया। जानकारी के अनुसार करीब एक दर्जन राइस मिलर्स पर 50 टन से अधिक चावल बकाया है। बकाया सूची में तिरुपति राइस मिल सबसे ऊपर है, जिस पर करीब 2443.62 टन चावल जमा करना शेष है। वहीं पर्ल राइस एंड एग्रो प्रोडक्ट पर 1084.24 टन चावल बकाया बताया जा रहा है। इसके अलावा कई मिलर्स ऐसे भी हैं, जिन पर 200 से 500 टन तक चावल जमा नहीं किया गया है। फरवरी-मार्च का राशन एक साथ, लेकिन स्टॉक अधूरा राज्य सरकार के निर्देशानुसार इस बार फरवरी और मार्च माह का राशन एक साथ वितरण किया जाना है। इसकी प्रक्रिया 1 फरवरी से शुरू हो चुकी है, लेकिन अधिकांश राशन दुकानों तक पर्याप्त मात्रा में चावल नहीं पहुंच पाने के कारण वितरण प्रभावित हुआ है। अधिकारियों का कहना है कि चावल आपूर्ति की प्रक्रिया तेज की जा रही है और जल्द ही सभी उचित मूल्य दुकानों तक स्टॉक पहुंचा दिया जाएगा। अब तक नहीं हुई किसी मिलर पर कार्रवाई इतनी बड़ी देरी और लापरवाही के बावजूद अब तक किसी भी राइस मिलर को ब्लैक लिस्ट नहीं किया गया है। नियमों के अनुसार पिछले एक साल में मिलर्स को पूरा स्टॉक क्लियर करना था, ताकि 2026 में उठाए गए धान के चावल की आपूर्ति समय पर शुरू हो सके। लेकिन पिछली फसल का ही चावल जमा नहीं होने से इस साल की सप्लाई पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। नियम यह भी कहते हैं कि चावल जमा न करने पर मिलर्स को ब्लैक लिस्ट किया जा सकता है और उनकी सुरक्षा निधि जब्त की जा सकती है, बावजूद इसके प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। अफसर बोले— होगी सख्ती, वसूली तय खाद्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जिन मिलर्स ने अब तक चावल जमा नहीं किया है, उनके खिलाफ सख्ती की जा रही है। बकाया चावल की हर हाल में वसूली की जाएगी।अधिकारियों के अनुसार नोटिस जारी करने के बाद भी यदि सप्लाई नहीं होती है तो संबंधित मिलर्स को काली सूची में डालने की कार्रवाई की जाएगी।

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महादेव ऐप की तर्ज पर नया ऑनलाइन सट्टा रैकेट बेनकाब, रायपुर से 6 आरोपी गिरफ्तार

रायपुर। टी-20 वर्ल्ड कप से पहले रायपुर पुलिस की क्राइम एंड साइबर यूनिट (ACCU) ने ऑनलाइन सट्टा खिलाने वाले एक नए सिंडिकेट का खुलासा किया है। यह गिरोह कुख्यात महादेव ऐप की तरह खुद की बुक और ऐप बनाकर प्रदेशभर में ऑनलाइन सट्टा संचालित कर रहा था। पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी jmdbet777.com और Classic777.com नाम की ऑनलाइन बुक के जरिए लोगों से दांव लगवा रहे थे। इन प्लेटफॉर्म पर 40 से ज्यादा गेम्स उपलब्ध थे, जिनके जरिए क्रिकेट सहित अन्य खेलों पर सट्टा खिलाया जा रहा था। कार में बैठकर लगवा रहे थे दांव रायपुर पुलिस ने 31 जनवरी को कार्रवाई करते हुए दुर्ग निवासी रखब देव पाहुजा, रायपुर के पीयूष जैन, जितेंद्र कुमार कृपलानी उर्फ जित्तू, कमल राघवानी, सचिन जैन और बिलासपुर निवासी दीपक अग्रवाल को गिरफ्तार किया है।आरोपी शहर में अलग-अलग जगहों पर चारपहिया वाहनों में बैठकर ऑनलाइन सट्टा संचालित कर रहे थे। 95 लाख के कैश और सामान जब्त पुलिस ने आरोपियों के पास से: जब्त की है। जब्त नकदी और सामान की कुल कीमत करीब 95 लाख रुपए आंकी गई है। सिंडिकेट में और भी लोग शामिल जांच में यह भी सामने आया है कि इस सट्टा नेटवर्क में दुर्ग निवासी रवि सोनकर, रायपुर के नितिन मोटवानी और नागपुर निवासी अंकित भी शामिल हैं। ये सभी फिलहाल फरार हैं और उनकी तलाश जारी है। किसकी क्या भूमिका थी? पुलिस के अनुसार: ऐसे खुला पूरा मामला 31 जनवरी को एसीसीयू टीम को सूचना मिली कि थाना गंज क्षेत्र के नागोराव गली अंडर ब्रिज के पास कुछ लोग कार में बैठकर ऑनलाइन सट्टा चला रहे हैं।सूचना के आधार पर पुलिस ने मौके पर दबिश दी और तीन अलग-अलग कारों से 6 लोगों को हिरासत में लिया। मोबाइल फोन की जांच में ऑनलाइन बैटिंग ऐप से जुड़ा पूरा सेटअप मिला। पूछताछ में सट्टा खिलाने की पुष्टि होने पर सभी आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। आईटी विभाग भी करेगा जांच पुलिस उपायुक्त स्मृतिक राजनाला के अनुसार, आरोपियों के बैंक खातों और लेन-देन की गहन जांच की जा रही है। खातों में करोड़ों रुपए के ट्रांजैक्शन पाए गए हैं।मामले में आईटी विभाग के अधिकारियों को भी जांच में शामिल किया जाएगा। इसके अलावा, म्यूल अकाउंट्स से जुड़े लोगों की पहचान की जा रही है।

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1 अप्रैल से छत्तीसगढ़ में शराब के दाम बढ़ेंगे, नई आबकारी नीति लागू

रायपुर। छत्तीसगढ़ में 1 अप्रैल 2026 से शराब महंगी हो जाएगी। राज्य सरकार ने शराब पर संशोधित आबकारी ड्यूटी को लेकर अधिसूचना जारी कर दी है, जिसे 30 जनवरी 2026 को राजपत्र में प्रकाशित किया गया। यह नई दरें आबकारी नीति 2026-27 के तहत लागू होंगी। नई व्यवस्था के अनुसार राज्य में बिकने वाली देसी शराब, विदेशी शराब और बीयर की कीमतों में बढ़ोतरी तय मानी जा रही है। इसके अलावा रेडी-टू-ड्रिंक (RTD) श्रेणी के पेय पदार्थों पर भी अतिरिक्त टैक्स लगाया गया है। प्रीमियम शराब पर ज्यादा टैक्स जारी अधिसूचना में विदेशी शराब पर ड्यूटी तय करने का तरीका बदला गया है। अब टैक्स रिटेल सेल प्राइस (RSP) यानी बाजार में बिकने वाली कीमत के आधार पर लगेगा।इसका मतलब यह है कि: इस बदलाव के बाद हाई-एंड और प्रीमियम शराब ब्रांड की कीमतों में ज्यादा उछाल देखने को मिलेगा। देसी शराब और बीयर भी होंगी महंगी नई आबकारी दरों के तहत केवल विदेशी शराब ही नहीं, बल्कि देसी शराब और बीयर भी महंगी होंगी। इससे आम उपभोक्ताओं की जेब पर भी असर पड़ेगा। कांच नहीं, अब प्लास्टिक बोतल में मिलेगी शराब आबकारी नीति 2026-27 में एक और अहम बदलाव किया गया है। अब राज्य की सरकारी शराब दुकानों में शराब कांच की बोतल के बजाय प्लास्टिक बोतल में बेची जाएगी।सरकार का कहना है कि इससे: हालांकि, टैक्स बढ़ने के कारण कीमतों में किसी तरह की राहत मिलने की उम्मीद कम है। क्या होता है प्रूफ लीटर? प्रूफ लीटर शराब में मौजूद शुद्ध अल्कोहल की मात्रा को दर्शाने वाली इकाई है। यह कुल तरल नहीं, बल्कि उसमें मौजूद अल्कोहल की वास्तविक मात्रा बताता है। उदाहरण के तौर पर:

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