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छत्तीसगढ़ में कड़ाके की ठंड का प्रकोप बढ़ता जा रहा है।

राजधानी रायपुर समेत कई जिलों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री से नीचे पहुंच गया है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि अगले तीन दिनों तक राज्य के उत्तरी और मध्य हिस्सों के आठ जिलों में शीतलहर का असर बना रहेगा। राजधानी रायपुर में रात का न्यूनतम तापमान 6.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया है। वहीं प्रदेश के सबसे ठंडे इलाकों में शामिल मैनपाट में तापमान 1.8 डिग्री तक गिर गया। अंबिकापुर में पारा 3.3 डिग्री, पेंड्रा में 7.6 डिग्री, दुर्ग और राजनांदगांव में 8 डिग्री तथा जगदलपुर में 8.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। पिछले 24 घंटों में प्रदेश का अधिकतम तापमान 29.1 डिग्री (जगदलपुर) और न्यूनतम तापमान 3.3 डिग्री (अंबिकापुर) रहा। ठंड के बढ़ते असर को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने बुजुर्गों, छोटे बच्चों और गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है। ❄️ ठंड के कारण स्कूल बंद कड़ाके की ठंड को देखते हुए सरगुजा, सूरजपुर, बलरामपुर, कोरिया और गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिलों में प्राइमरी स्कूलों को 10 जनवरी तक बंद कर दिया गया है। मिडिल, हाई और हायर सेकेंडरी स्कूल खुले रहेंगे, लेकिन दो पालियों में चलने वाले स्कूलों का समय बदल दिया गया है। अब पहली पाली सुबह 9:30 से 12:30 बजे तक और दूसरी पाली दोपहर 12:30 से शाम 4 बजे तक संचालित होगी। ⚠️ ठंड से जान का खतरा अंबिकापुर के श्रीगढ़ इलाके में नए साल की रात एक बुजुर्ग की ठंड से मौत हो गई। कम कपड़ों में खुले में सोने के कारण वे हाइपोथर्मिया की चपेट में आ गए। यह अंबिकापुर में ठंड से मौत का दूसरा मामला है। इससे पहले 11 दिसंबर को बस स्टैंड में सो रहे एक व्यक्ति की भी मौत हो चुकी है। 🏥 बच्चों की सेहत पर असर तेज ठंड का असर बच्चों पर भी साफ दिख रहा है। रायपुर के सरकारी और निजी अस्पतालों में पिछले एक महीने में हाइपोथर्मिया के 400 से ज्यादा मामले सामने आए हैं। डॉक्टरों के मुताबिक नवजात और छोटे बच्चों का शरीर जल्दी ठंडा हो जाता है, जिससे उन्हें NICU और SNCU तक में भर्ती कराना पड़ रहा है। 🤒 अस्पतालों की OPD में बढ़ी भीड़ ठंड के चलते वायरल फीवर, सर्दी-खांसी और सांस से जुड़ी बीमारियों के मरीज बढ़ गए हैं। अंबेडकर अस्पताल की ओपीडी में रोजाना 2000 से अधिक मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं, जिनमें मेडिसिन, पीडियाट्रिक और चेस्ट विभाग में सबसे ज्यादा भीड़ है। 🧊 क्या है हाइपोथर्मिया? हाइपोथर्मिया एक गंभीर और जानलेवा स्थिति है, जिसमें शरीर का तापमान सामान्य 37 डिग्री सेल्सियस से नीचे चला जाता है। डॉक्टरों के अनुसार ठंडी हवा या पानी के संपर्क में आने से शरीर तेजी से गर्मी खो देता है। अगर समय पर इलाज न मिले तो यह स्थिति घातक साबित हो सकती है। 🔥 नगर निगम ने जलवाए अलाव शीतलहर के बढ़ते असर को देखते हुए रायपुर नगर निगम ने शहर के 12 से अधिक स्थानों पर अलाव जलाने की व्यवस्था की है। मेयर मीनल चौबे और निगम कमिश्नर विश्वदीप के निर्देश पर अधिकारियों को रात में फील्ड में रहकर व्यवस्थाओं की निगरानी करने को कहा गया है। 🦟 बदलते मौसम में मलेरिया का खतरा मौसम विशेषज्ञों के अनुसार दिन में अधिक और रात में कम तापमान मलेरिया फैलाने वाले मच्छरों के लिए अनुकूल स्थिति बनाता है। अगले कुछ दिनों में ग्रामीण और जंगल क्षेत्रों में मलेरिया का खतरा बढ़ सकता है। स्वास्थ्य विभाग ने मच्छरदानी के उपयोग, पानी जमा न होने देने और समय पर जांच कराने की सलाह दी है। 🛡️ ठंड से बचाव के उपाय डॉक्टरों का कहना है कि ठंड के मौसम में भाप लेना, नमक-पानी से गरारे करना, विटामिन-C युक्त आहार, अदरक-तुलसी की चाय और गर्म कपड़ों का इस्तेमाल बेहद जरूरी है। इससे इम्यूनिटी मजबूत होती है और सर्दी-जुकाम व वायरल संक्रमण से बचाव होता है।

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खारून नदी में बिना ट्रीटमेंट छोड़ा जा रहा औद्योगिक गंदा पानी, बीरगांव की जल आपूर्ति पर बड़ा संकट

रायपुर।खारून नदी लगातार प्रदूषण की चपेट में आती जा रही है। कारा क्षेत्र में स्थित सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) में नियमों की खुलेआम अनदेखी करते हुए उरला औद्योगिक क्षेत्र से निकलने वाला केमिकल युक्त और जहरीला पानी बिना किसी शुद्धिकरण के सीधे नदी में छोड़ा जा रहा है। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि बीरगांव नगर निगम की पेयजल व्यवस्था पर सीधा खतरा मंडराने लगा है। जानकारी के अनुसार, कारा एसटीपी में पिछले कई महीनों से ट्रीटमेंट सिस्टम लगभग बंद पड़ा है। मशीनें निष्क्रिय हैं, फिल्टर काम नहीं कर रहे और दूषित पानी नालियों व खुली पाइप लाइनों के माध्यम से सीधे खारून नदी में बहाया जा रहा है। निरीक्षण के दौरान ट्रीटमेंट टैंकों के आसपास काले रंग का झाग, तेज दुर्गंध और केमिकल युक्त पानी जमा पाया गया। मंगलवार को बीरगांव नगर निगम के महापौर नंदलाल देवांगन, निगम आयुक्त युगल किशोर उर्वशा और अधिकारियों की टीम ने कारा स्थित एसटीपी का निरीक्षण किया। मौके पर कई पाइपलाइनें सीधे नदी की ओर खुली मिलीं, जिनसे बिना ट्रीटमेंट किया गया गंदा पानी लगातार बह रहा था। इस स्थिति पर नाराजगी जताते हुए महापौर ने इसे जनता की सेहत के साथ खिलवाड़ बताया और तत्काल सुधार के निर्देश दिए। सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि एसटीपी से कुछ ही दूरी पर बीरगांव नगर निगम का इंटकवेल स्थित है, जहां से हजारों घरों में पीने का पानी सप्लाई किया जाता है। खारून नदी में मिल रहा यह जहरीला पानी भू-जल को भी प्रभावित कर सकता है। यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई, तो क्षेत्र में जल जनित बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। इसी आशंका को देखते हुए महापौर और निगम आयुक्त ने बेंद्री स्थित इंटकवेल का भी निरीक्षण किया और अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि किसी भी हालत में दूषित पानी जल स्रोत तक न पहुंचने पाए। गौरतलब है कि कारा एसटीपी का संचालन नगर निगम रायपुर के अधीन है, जबकि इसका सीधा असर बीरगांव नगर निगम क्षेत्र पर पड़ रहा है। दोनों निकायों के बीच जिम्मेदारी तय न होने से हालात और बिगड़ते जा रहे हैं। निरीक्षण के दौरान एमआईसी सदस्य इकराम अहमद, संतोष साहू, कार्यपालन अभियंता डी.एल. देवांगन सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। महापौर नंदलाल देवांगन ने कहा कि इस पूरे मामले की जानकारी रायपुर कलेक्टर को दी जाएगी और दोषी अधिकारियों व एजेंसियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की जाएगी।

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चांदी ने बनाया नया रिकॉर्ड: ₹2.48 लाख प्रति किलो के ऑल टाइम हाई पर पहुंची, सोने के दाम भी मजबूत

कीमती धातुओं के बाजार में आज बड़ा बदलाव देखने को मिला। 7 जनवरी को चांदी के दाम अपने अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गए। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, चांदी की कीमत में एक ही दिन में ₹4,850 की उछाल आई और यह बढ़कर ₹2,48,000 प्रति किलो हो गई। इससे पहले चांदी का भाव ₹2,43,150 प्रति किलो था। वहीं सोने की कीमतों में हल्का उतार-चढ़ाव देखने को मिला। 10 ग्राम 24 कैरेट सोना आज ₹15 बढ़कर ₹1,36,615 पर पहुंच गया। हालांकि, 29 दिसंबर 2025 को सोना अपने ऑल टाइम हाई ₹1,38,161 प्रति 10 ग्राम तक पहुंच चुका है। 2025 में कीमती धातुओं की रिकॉर्ड तेजी पिछले साल यानी 2025 में सोना और चांदी दोनों ने निवेशकों को जबरदस्त रिटर्न दिया— सोने की कीमत बढ़ने के 3 बड़े कारण चांदी में उछाल के 3 प्रमुख कारण आगे और महंगी हो सकती है चांदी और सोना केडिया एडवाइजरी के डायरेक्टर अजय केडिया के मुताबिक, चांदी की मांग फिलहाल मजबूत बनी हुई है और यह ₹2.75 लाख प्रति किलो तक जा सकती है। वहीं सोने की बात करें तो साल के अंत तक इसका भाव ₹1.50 लाख प्रति 10 ग्राम के पार जाने की संभावना जताई जा रही है।

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आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी: कब तक लोग परेशानी झेलेंगे, स्कूल-कोर्ट परिसर में इनकी जरूरत क्या?

आवारा कुत्तों से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जाहिर की है। अदालत ने सवाल उठाया कि कुत्तों की वजह से आम लोगों को आखिर कब तक परेशानी झेलनी पड़ेगी। कोर्ट ने साफ किया कि उसका निर्देश सड़कों पर नहीं, बल्कि केवल संस्थागत परिसरों जैसे स्कूल, अस्पताल और अदालतों के लिए है। सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि बच्चों, बुजुर्गों और आम नागरिकों की सुरक्षा प्राथमिकता है। ऐसे में यह समझ से परे है कि स्कूलों, अस्पतालों और कोर्ट कैंपस के भीतर आवारा कुत्तों की मौजूदगी क्यों जरूरी मानी जा रही है और इन्हें वहां से हटाने पर आपत्ति क्यों की जा रही है। बुधवार को यह सुनवाई करीब ढाई घंटे तक चली। मामले की अगली सुनवाई 8 जनवरी को सुबह 10:30 बजे फिर से शुरू होगी। सुनवाई के दौरान सामने आईं अहम बातें अदालत का स्पष्ट रुख सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया कि उसका आदेश केवल संस्थागत क्षेत्रों तक सीमित है और इसका उद्देश्य सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करना है। कोर्ट ने संकेत दिया कि यदि नियमों का सही ढंग से पालन नहीं हुआ, तो इस मुद्दे पर और सख्त रुख अपनाया जा सकता है।

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रायपुर हिट एंड रन मामला: रेणुका सिंह के बेटे की कार से बाइक सवार को टक्कर, गिरफ्तारी के बाद मिली जमानत

रायपुर हिट एंड रन मामला: रेणुका सिंह के बेटे की कार से बाइक सवार को टक्कर, गिरफ्तारी के बाद मिली जमानत छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में हिट एंड रन का एक हाई-प्रोफाइल मामला सामने आया है। बीजेपी विधायक और पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री रेणुका सिंह के बेटे बलवंत सिंह पर बाइक सवार युवक को कार से टक्कर मारकर गंभीर रूप से घायल करने का आरोप है। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया, लेकिन थाने से ही उसे जमानत मिल गई। हादसे में घायल युवक की हालत नाजुक बताई जा रही है। यह घटना तेलीबांधा थाना क्षेत्र के अग्रसेन धाम चौक के पास 5 जनवरी की देर रात करीब 1:15 बजे हुई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, तेज रफ्तार कार ने बाइक सवार को जोरदार टक्कर मारी, जिसके बाद आरोपी मौके से फरार हो गया। घायल युवक की हालत गंभीर हादसे में घायल युवक की पहचान त्रिभुवन सिंह ठाकुर (34) के रूप में हुई है, जो डीजे और इवेंट से जुड़ा काम करता है। वह काम खत्म कर सेरीखेड़ी से बाइक से तेलीबांधा लौट रहा था। टक्कर इतनी भीषण थी कि वह सड़क पर दूर जा गिरा और गंभीर रूप से घायल हो गया। मौके पर मौजूद लोगों ने तत्काल पुलिस को सूचना दी और घायल को एम्बुलेंस के जरिए अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसका इलाज जारी है। कार छोड़कर फरार हुआ आरोपी पुलिस जब घटनास्थल पर पहुंची, तो वहां दुर्घटनाग्रस्त कार मौजूद थी, लेकिन चालक फरार था। जांच में सामने आया कि कार (CG 04 PC 0853) बलवंत सिंह चला रहा था। वाहन मालिक जयप्रकाश उपाध्याय, निवासी रामानुज नगर, कुशालपुर (सरगुजा) के नाम पर कार रजिस्टर्ड है, जिसने नोटिस के जवाब में पुष्टि की कि घटना के समय वाहन बलवंत सिंह के पास था। पीड़ित के भाई राज नारायण सिंह की शिकायत पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 281 और 125(a) के तहत मामला दर्ज कर वाहन को जब्त कर लिया। गिरफ्तारी के बाद तुरंत मिली जमानत पुलिस ने 6 जनवरी की रात आरोपी बलवंत सिंह (33) को गिरफ्तार किया। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह जोरा मॉल से तेलीबांधा की ओर लौट रहा था, तभी अचानक बाइक सामने आने से कार का संतुलन बिगड़ गया और हादसा हो गया। गिरफ्तारी के कुछ समय बाद ही आरोपी को थाने से जमानत दे दी गई। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है। सड़क हादसों के बढ़ते आंकड़े चिंता का विषय छत्तीसगढ़ में सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली मौतों की संख्या लगातार बढ़ रही है। सड़क सुरक्षा से जुड़े सरकारी आंकड़ों के अनुसार— राष्ट्रीय स्तर पर भी स्थिति चिंताजनक है। 2023 में सबसे ज्यादा सड़क दुर्घटनाएं तमिलनाडु में दर्ज की गईं, जबकि सबसे अधिक मौतें उत्तर प्रदेश में हुईं। सड़क हादसों के प्रमुख कारण हादसों से बचाव के उपाय

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रायपुर हेलीपैड के पास मेडिकल वेस्ट का ढेर: सैकड़ों PPE किट खुले में फेंकी गईं, कोरोना काल की खरीद होने की आशंका

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में मेडिकल वेस्ट के लापरवाह निपटान का एक गंभीर मामला सामने आया है। हेलीपैड के पास स्थित खाली जमीन पर सैकड़ों की संख्या में PPE किट खुले में फेंकी गई हैं। स्थानीय लोगों ने जब मौके पर बड़ी मात्रा में बिखरी PPE किट देखीं, तब इस मामले का खुलासा हुआ। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, ये PPE किट कोरोना महामारी के दौरान खरीदी गई हो सकती हैं। घटनास्थल पर कई किट पैक हालत में तो कुछ खुले और पुराने रूप में पाई गई हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह मेडिकल सामग्री लंबे समय से यहां पड़ी थी, लेकिन हाल के दिनों में इसकी मात्रा अचानक बढ़ गई है। मेडिकल वेस्ट जलाने की भी सूचना स्थानीय लोगों का दावा है कि इनमें से कुछ PPE किट को मेडिकल कचरे के साथ जलाए जाने की भी जानकारी मिली है। यदि यह बात सही पाई जाती है, तो यह पर्यावरण नियमों का गंभीर उल्लंघन है। नियमों के अनुसार, मेडिकल वेस्ट को खुले स्थान पर जलाना प्रतिबंधित है, क्योंकि इससे जहरीली गैसें निकलती हैं और सार्वजनिक स्वास्थ्य को खतरा होता है। प्रशासनिक निगरानी पर उठे सवाल राजधानी के एक संवेदनशील और हाई-सिक्योरिटी क्षेत्र के पास इस तरह से PPE किट का खुले में पड़ा होना प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा करता है। हेलीपैड जैसे महत्वपूर्ण स्थान के नजदीक बड़ी मात्रा में मेडिकल सामग्री का डंप होना सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि ये PPE किट किस विभाग या संस्था से संबंधित हैं। यह भी जांच का विषय है कि यह सरकारी खरीदी का हिस्सा थीं या किसी निजी एजेंसी द्वारा यहां लाकर फेंकी गईं। स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों के लिए खतरा विशेषज्ञों का कहना है कि PPE किट प्लास्टिक और सिंथेटिक पदार्थों से बनी होती हैं, जिन्हें खुले में छोड़ना या जलाना पर्यावरण के लिए बेहद नुकसानदायक है। यदि इनमें से कोई किट पहले इस्तेमाल की गई हो, तो संक्रमण फैलने का खतरा भी पूरी तरह से नकारा नहीं जा सकता। जांच और कार्रवाई की मांग तेज मामला सामने आने के बाद स्थानीय लोगों ने नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग से तत्काल जांच की मांग की है। लोगों का कहना है कि कोरोना काल की मेडिकल सामग्री को इस तरह खुले में फेंकना या जलाना नियमों के साथ-साथ जनता के स्वास्थ्य के साथ भी खिलवाड़ है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और यह स्पष्ट हो पाता है या नहीं कि सैकड़ों PPE किट आखिर यहां कैसे और किसके निर्देश पर डंप की गईं।

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खरोरा पुलिस की बड़ी कार्रवाई: 4 किलो से अधिक गांजा जब्त, ओडिशा से ला रहे दो अंतरराज्यीय तस्कर गिरफ्तार

नशीले पदार्थों के खिलाफ अभियान के तहत खरोरा पुलिस ने 5 जनवरी को बड़ी कार्रवाई करते हुए 4.256 किलोग्राम गांजा जब्त किया है। इस मामले में दो अंतरराज्यीय तस्करों को गिरफ्तार किया गया है, जो ओडिशा से गांजा लेकर छत्तीसगढ़ आ रहे थे। जब्त सामग्री की कुल कीमत करीब 1.65 लाख रुपए आंकी गई है। पुलिस के अनुसार, मुखबिर से सूचना मिली थी कि ग्राम तुलसी डहरिया निवासी राकेश सिंह ठाकुर एक ओडिशा के गांजा तस्कर के साथ नीले रंग की बिना नंबर वाली स्कूटी से कोसरंगी रोड होते हुए घिवरा पुलिया की ओर आ रहा है। सूचना मिलते ही खरोरा पुलिस टीम ने ग्राम घिवरा नहर पुलिया के पास घेराबंदी कर दी। नुवापाड़ा, ओडिशा का रहने वाला आरोपी कुछ समय बाद एक स्कूटी पर दो युवक आते हुए दिखाई दिए, जिन्हें पुलिस ने मौके पर रोका। पूछताछ में स्कूटी चला रहे युवक ने अपना नाम राकेश सिंह ठाकुर (38 वर्ष) बताया, जबकि पीछे बैठे युवक की पहचान पिंटू सतनामी (21 वर्ष), निवासी भलेसर भूतकायरा, बेलटुकरी, जिला नुवापाड़ा, ओडिशा के रूप में हुई। सफेद प्लास्टिक बैग से मिला गांजा तलाशी के दौरान स्कूटी की डिक्की में रखे सफेद प्लास्टिक के झोले से खाकी टेप से लिपटा गांजा का पैकेट बरामद किया गया। वहीं दूसरे आरोपी पिंटू सतनामी के हाथ में रखे सफेद प्लास्टिक बैग से भी इसी तरह पैक किया हुआ गांजा मिला। 1.65 लाख रुपए का माल जब्त दोनों आरोपियों के पास से कुल 4.256 किलोग्राम गांजा जब्त किया गया, जिसकी कीमत करीब 85,120 रुपए बताई जा रही है। इसके साथ ही गांजा परिवहन में इस्तेमाल की गई स्कूटी भी जब्त की गई है, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 80,000 रुपए है। इस तरह कुल जब्त संपत्ति का मूल्य 1,65,120 रुपए आंका गया है। फिलहाल दोनों आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 20(बी) के तहत मामला दर्ज कर आगे की जांच की जा रही है।

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NDPS मामलों में सख्ती: रायपुर कोर्ट ने तीन दोषियों को सुनाई कड़ी सजा, कैप्सूल तस्करों को 10-10 साल जेल

नशीले पदार्थों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए रायपुर की विशेष अदालत ने एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्ज दो अलग-अलग मामलों में तीन आरोपियों को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है। ट्रामाडोल कैप्सूल की अवैध तस्करी के मामले में दो आरोपियों को 10-10 वर्ष की सश्रम कैद दी गई है, जबकि 7 किलो से अधिक गांजा रखने के दोषी एक युवक को 7 साल की सजा सुनाई गई है। मामला-1: ट्रामाडोल कैप्सूल बेचते पकड़े गए दो आरोपी विशेष लोक अभियोजक के.के. चंद्राकर के अनुसार, 19 अक्टूबर 2022 को थाना टिकरापारा क्षेत्र में सहायक उपनिरीक्षक विजय नेताम को सूचना मिली थी कि हनुमान नगर, पुराने धमतरी रोड पर दो युवक नशीली कैप्सूल की बिक्री के लिए खड़े हैं। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने स्वतंत्र गवाहों के साथ मौके पर दबिश दी और घेराबंदी कर दोनों संदिग्धों को पकड़ा। पूछताछ में उनकी पहचान एहसान खान उर्फ एहसान और सरफराज खान उर्फ शाहरुख के रूप में हुई। तलाशी के दौरान दोनों के पास से काले रंग के बैग में रखे ट्रामाडोल कैप्सूल बरामद किए गए। प्रत्येक आरोपी के कब्जे से 144-144 कैप्सूल मिले। आरोपियों के पास न तो किसी तरह का लाइसेंस था और न ही डॉक्टर का कोई वैध पर्चा। पुलिस ने मौके पर ही कैप्सूल को सील कर जब्त किया और एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया। जांच पूरी होने और एफएसएल रिपोर्ट आने के बाद अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषी मानते हुए 10-10 साल की सश्रम कैद की सजा सुनाई। मामला-2: 7.206 किलो गांजा के साथ युवक गिरफ्तार दूसरा मामला थाना सरस्वती नगर क्षेत्र से जुड़ा है। मुखबिर की सूचना पर पुलिस टीम ने परशुराम चौक, कोटा स्टेडियम के सामने रेड कार्रवाई की। यहां एक संदिग्ध युवक को रोका गया, जिसने अपना नाम भार्गव तांडी उर्फ चीकू तांडी बताया। एनडीपीएस एक्ट की धारा 50 के तहत प्रक्रिया का पालन करते हुए तलाशी ली गई। आरोपी की मोटरसाइकिल से खाकी पॉलीथिन में पैक गांजा बरामद हुआ, जिसका कुल वजन 7.206 किलोग्राम पाया गया। मौके पर ही सैंपलिंग और सीलिंग की गई। एफएसएल रायपुर की रिपोर्ट में गांजा होने की पुष्टि के बाद अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए 7 वर्ष की सश्रम कैद की सजा सुनाई।

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शेयर ट्रेडिंग में मुनाफे का झांसा: रायपुर में 2 करोड़ की ठगी, ओडिशा के कारोबारी से कैश लेकर फरार हुए ठग

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में शेयर ट्रेडिंग में मोटा मुनाफा दिलाने का झांसा देकर 2 करोड़ रुपए की बड़ी ठगी का मामला सामने आया है। ओडिशा के कालाहांडी जिले के एक कारोबारी से आरोपियों ने कैश में यह रकम हासिल की और फिर फरार हो गए। पीड़ित की शिकायत पर देवेंद्र नगर थाना पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पीड़ित कारोबारी नेमीचंद जैन के मुताबिक, नवंबर 2025 में उनके मोबाइल फोन पर एक टेलीग्राम ग्रुप का लिंक आया था। ग्रुप में दावा किया गया था कि टाटा कंसलटेंसी के नाम पर निवेश करने पर मात्र 10 दिनों में भारी मुनाफा मिलेगा। 1 लाख रुपए के निवेश पर 30 हजार रुपए प्रॉफिट का लालच दिया गया। शुरुआत में भरोसा जीतने के लिए आरोपियों ने कारोबारी को 30 हजार रुपए का मुनाफा भी दिखाया। इसके बाद उससे बड़ी रकम निवेश करने के लिए लगातार कॉल आने लगे। ठगों के झांसे में आकर कारोबारी ने अपने साले से 2 करोड़ रुपए उधार लिए और रायपुर आकर एक होटल में आरोपियों को कैश सौंप दिया। रकम मिलने के बाद आरोपी लगातार टालमटोल करने लगे और कुछ दिनों बाद अचानक संपर्क तोड़कर फरार हो गए। खुद को ठगा महसूस होने पर पीड़ित ने रायपुर के देवेंद्र नगर थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस का कहना है कि मामला संगठित साइबर और निवेश फ्रॉड से जुड़ा हो सकता है। आरोपियों की तलाश की जा रही है और बैंकिंग व डिजिटल लेन-देन से जुड़े पहलुओं की भी जांच की जा रही है।

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जिला अस्पतालों में चार गुना बढ़ेगा दवाओं का स्टॉक, अब गांव के अस्पतालों में भी मिलेंगी शुगर-थायराइड की दवाएं

राज्य सरकार ने ग्रामीण और जिला स्तर पर स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में बड़ा फैसला लिया है। अब प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) में सर्दी-जुकाम, बुखार और उल्टी-दस्त के साथ-साथ शुगर, थायराइड और खून पतला करने वाली दवाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। अभी तक ये दवाएं केवल जिला अस्पतालों या मेडिकल कॉलेजों में ही मिलती थीं, जिससे ग्रामीण मरीजों को बार-बार शहर जाना पड़ता था। स्वास्थ्य विभाग ने आवश्यक दवाओं की सूची में बड़ी बढ़ोतरी की है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में दवाओं की संख्या 146 से बढ़ाकर 247 कर दी गई है, जबकि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) में यह संख्या 196 से बढ़कर 365 हो जाएगी। इससे गांवों में रहने वाले मरीजों को अपने ही क्षेत्र में बेहतर इलाज मिल सकेगा। जिला अस्पतालों में 208 से बढ़कर 807 होंगी दवाएं जिला अस्पतालों में भी दवाओं के स्टॉक में बड़ा इजाफा किया गया है। वर्तमान में जहां जिला अस्पतालों में 208 प्रकार की दवाएं उपलब्ध हैं, वहीं अब इनकी संख्या बढ़ाकर 807 की जा रही है। इसका मतलब यह है कि जो दवाएं अब तक केवल मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में मिलती थीं, वे सुविधा अब जिला अस्पतालों में भी मरीजों को मिलेंगी। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, जिला अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती होने के बावजूद दवाओं की कमी के कारण गंभीर मरीजों को मेडिकल कॉलेज रेफर करना पड़ता था। दवाओं की उपलब्धता बढ़ने से अब अधिकतर मरीजों का इलाज जिला अस्पतालों में ही संभव हो सकेगा, जिससे मेडिकल कॉलेजों पर मरीजों का दबाव भी कम होगा। केंद्र सरकार के निर्देशों के तहत लिया गया फैसला यह निर्णय केंद्र सरकार द्वारा तैयार किए गए इंडियन प्राइमरी हेल्थ सिस्टम के तहत लिया गया है। इस प्रणाली के अनुसार गांव-गांव के अस्पतालों में अधिकतम दवाएं उपलब्ध कराना अनिवार्य है। राज्य सरकार ने इसी दिशा में कदम उठाते हुए ग्रामीण स्वास्थ्य संस्थानों में दवाओं की उपलब्धता बढ़ाने का फैसला किया है। उप स्वास्थ्य केंद्रों में भी बढ़ेंगी सुविधाएं अब उप स्वास्थ्य केंद्रों में भी केवल सामान्य दवाओं तक सीमित व्यवस्था नहीं रहेगी। यहां 146 प्रकार की दवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, जिनमें एंटीबायोटिक और दर्द निवारक इंजेक्शन भी शामिल होंगे। इससे उप स्वास्थ्य केंद्रों में वही सुविधाएं मिलेंगी, जो अब तक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक सीमित थीं। सीएचओ देंगे दवाएं, जांच जरूरी राज्य के सभी उप स्वास्थ्य केंद्रों में तैनात सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (CHO) मरीजों को शुगर और थायराइड जैसी बीमारियों की दवाएं देंगे। हालांकि, मरीज को कम से कम एक बार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराना अनिवार्य होगा। ग्रामीण मरीजों को मिलेगी बड़ी राहत स्वास्थ्य संचालक संजीव झा ने बताया कि ग्रामीण इलाकों में दवाओं की कमी से मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। अब गंभीर बीमारियों की दवाएं नजदीक मिलने से मरीजों को राहत मिलेगी। इस नई व्यवस्था की नियमित समीक्षा भी की जाएगी और यदि कोई कमी सामने आती है तो उसे दूर किया जाएगा, ताकि यह सिस्टम बेहतर तरीके से काम कर सके।

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