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विधानसभा में बड़ा खुलासा: 665 खतरनाक अपशिष्ट फैलाने वाले उद्योग सक्रिय, OPS पर भी गरमाई बहस

प्रदेश में 665 खतरनाक उद्योगों का संचालन, 2.91 लाख कर्मचारियों ने चुना OPS — बजट सत्र के आखिरी दिन सदन में गूंजे कई बड़े मुद्दे विधानसभा के बजट सत्र के अंतिम दिन प्रश्नकाल के दौरान पर्यावरण, कर्मचारियों की पेंशन और स्वास्थ्य से जुड़े गंभीर मुद्दों पर तीखी बहस देखने को मिली। सरकार ने पहली बार खुलासा किया कि प्रदेश में सैकड़ों ऐसे उद्योग चल रहे हैं जो खतरनाक अपशिष्ट उत्पन्न करते हैं। साथ ही OPS बनाम NPS पर भी आंकड़े सामने आए, जिससे कर्मचारियों से जुड़े सवालों को नई दिशा मिली। ⚖️ पूरी खबर (विस्तार से) विधानसभा बजट सत्र के आखिरी दिन प्रश्नकाल में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सत्ता और विपक्ष आमने-सामने दिखाई दिए। नेता प्रतिपक्ष द्वारा प्रदेश में खतरनाक अपशिष्ट पैदा करने वाले उद्योगों की संख्या और नियंत्रण व्यवस्था पर सवाल उठाया गया। 665 खतरनाक अपशिष्ट उत्पन्न करने वाले उद्योग संचालित सरकार की ओर से जवाब देते हुए मंत्री ओपी चौधरी ने बताया कि प्रदेश में कुल 665 औद्योगिक इकाइयाँ ऐसी हैं जो खतरनाक अपशिष्ट उत्पन्न करती हैं। उन्होंने कहा कि इन उद्योगों की निगरानी के लिए कदम उठाए जा रहे हैं और अभी तक 19 उद्योगों में ऑनलाइन एमिशन मॉनिटरिंग सिस्टम लगाया गया है। यह सिस्टम उद्योगों द्वारा अपने खर्च पर स्थापित किया जाता है और प्रदूषण पर लगातार निगरानी रखी जाती है। 🌫️ इस मुद्दे पर सदन में हल्की नोकझोंक भी देखने को मिली, क्योंकि विपक्ष ने निगरानी व्यवस्था को पर्याप्त नहीं बताया। छातिम (सप्तपर्णी) वृक्ष पर रोक नहीं भाजपा विधायक द्वारा छातिम वृक्ष के दुष्प्रभावों को लेकर सवाल पूछा गया कि क्या इसके रोपण पर प्रतिबंध लगाया गया है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि: ➡️ छातिम वृक्ष के रोपण पर फिलहाल कोई रोक नहीं➡️ इसे हटाने की भी कोई योजना नहीं यह पेड़ अक्टूबर में फूलता है और इसकी तेज गंध व परागकण कई लोगों में एलर्जी और सांस की समस्या पैदा करते हैं। OPS बनाम NPS: 2.91 लाख कर्मचारियों ने चुना OPS सरकारी कर्मचारियों की पेंशन व्यवस्था भी चर्चा का प्रमुख विषय रही। सरकार ने बताया कि: ➡️ कुल 2,91,797 अधिकारी-कर्मचारियों ने NPS छोड़कर OPS का विकल्प चुना➡️ पेंशन योजना निर्धारित नियमों के अनुसार संचालित की जा रही है इस मुद्दे पर भी सदन में तीखी बहस हुई क्योंकि OPS वित्तीय बोझ से जुड़ा बड़ा विषय माना जाता है। छातिम (सप्तपर्णी) वृक्ष: फायदे और नुकसान संभावित नुकसान औषधीय महत्व निष्कर्ष बजट सत्र के अंतिम दिन सदन में पर्यावरण प्रदूषण, स्वास्थ्य, पेड़-पौधों के प्रभाव और कर्मचारियों की पेंशन जैसे जनहित के मुद्दे प्रमुख रूप से सामने आए। सरकार ने आंकड़े तो दिए, लेकिन कई सवाल अभी भी जवाब की प्रतीक्षा में हैं।

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बिरगांव (रायपुर) में LPG गैस महंगाई के खिलाफ आम आदमी पार्टी का अनोखा विरोध, सिलेंडर की निकाली शवयात्रा

छत्तीसगढ़ की राजधानी Raipur से लगे Birgaon क्षेत्र में आज Aam Aadmi Party (AAP) ने बढ़ती LPG गैस कीमतों, सिलेंडर की कमी और कथित कालाबाजारी के विरोध में अनोखा प्रदर्शन किया। पार्टी कार्यकर्ताओं ने गैस सिलेंडर की प्रतीकात्मक “शवयात्रा” निकालकर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने कहा कि लगातार बढ़ती रसोई गैस कीमतों से आम आदमी का घर चलाना मुश्किल होता जा रहा है। गरीब और मध्यम वर्ग पर महंगाई का सीधा असर पड़ रहा है, जिससे परिवारों का मासिक बजट बिगड़ गया है। AAP नेताओं का आरोप है कि कई जगहों पर LPG सिलेंडर की उपलब्धता भी समस्या बनी हुई है और कालाबाजारी की शिकायतें सामने आ रही हैं। इसी के विरोध में यह प्रतीकात्मक शवयात्रा निकालकर सरकार का ध्यान आम जनता की परेशानियों की ओर आकर्षित करने की कोशिश की गई। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता और स्थानीय लोग शामिल हुए। रैली के दौरान “महंगाई वापस लो” और “सस्ती गैस दो” जैसे नारे लगाए गए। 🚩 राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बढ़ती महंगाई देशभर में एक बड़ा मुद्दा बनती जा रही है और विभिन्न राजनीतिक दल इस पर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहे हैं। फिलहाल यह देखना दिलचस्प होगा कि इस विरोध प्रदर्शन के बाद प्रशासन या सरकार की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने आती है या नहीं।

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डिप्टी रेंजर की मिलीभगत से बाघ-तेंदुए का शिकार: आरोपियों ने मांस पकाकर खाया, कई गिरफ्तार

Indravati Tiger Reserve क्षेत्र में बाघ और तेंदुए के शिकार का सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसमें वन विभाग के ही एक डिप्टी रेंजर की संलिप्तता उजागर हुई है। आरोप है कि वह शिकारियों को वन्यजीवों की आवाजाही की गोपनीय जानकारी देता था, जिसके आधार पर गिरोह जंगल में जाल बिछाकर शिकार करता था। जांच में सामने आया कि बाघ को नैमेड़ के जंगलों में और तेंदुए को Dantewada जिले के वन क्षेत्र में फंसाकर मारा गया। शिकार के बाद आरोपियों ने जानवरों का मांस काटकर वहीं पकाया और खाया। वन विभाग ने उनके कब्जे से बाघ और तेंदुए के नाखून समेत अन्य अवशेष बरामद किए हैं। बताया जा रहा है कि यह गिरोह जानवरों की खाल, दांत और नाखूनों की तस्करी से भी जुड़ा हुआ था। मामले में अब तक कई आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है, जबकि मुख्य सरगना अभी फरार बताया जा रहा है। आरोपियों की निशानदेही पर केशापुर इलाके में छापेमारी कर तेंदुए की एक खाल भी बरामद की गई, जिसके बाद दो और लोगों को गिरफ्तार किया गया। इससे पहले बालूद मार्ग पर भी कुछ आरोपियों को बाघ की खाल के साथ पकड़ा गया था। वन अधिकारियों का कहना है कि इस पूरे नेटवर्क का जल्द बड़ा खुलासा किया जाएगा और विभाग से जुड़े किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। फिलहाल मामले ने वन्यजीव सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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दुर्ग में गैस कंपनी पर छापा: 599 सिलेंडर और भारी मात्रा में LPG जब्त, बिना अनुमति चल रहा था कारोबार

Durg में प्रशासन ने घरेलू गैस की कालाबाजारी पर बड़ी कार्रवाई करते हुए Papusha Gases Private Limited पर अचानक छापा मारा। यह कार्रवाई Borei Industrial Growth Center स्थित प्लांट में की गई, जहां बिना वैध दस्तावेजों के गैस कारोबार संचालित होने का मामला सामने आया। जांच के दौरान अधिकारियों ने मौके से 599 गैस सिलेंडर बरामद किए, साथ ही तीन बड़े स्टोरेज टैंकों में करीब 2,841 किलोग्राम एलपीजी भी पाया गया, जिसे जब्त कर लिया गया। बताया गया कि यहां से ‘गो गैस’ और ‘गैस प्वाइंट’ ब्रांड के सिलेंडर डीलरों के जरिए सीधे ग्राहकों तक पहुंचाए जा रहे थे, जो सार्वजनिक वितरण प्रणाली से अलग समानांतर सप्लाई मानी गई। अधिकारियों के अनुसार निरीक्षण के समय फैक्ट्री में सिलेंडरों की पेंटिंग और मार्किंग का काम चल रहा था, लेकिन जरूरी लाइसेंस और रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं थे। स्टॉक रजिस्टर में दर्ज संख्या और मौके पर मिले सिलेंडरों की संख्या में भी अंतर पाया गया, जिससे रिकॉर्ड में गंभीर गड़बड़ी का संदेह हुआ। कंपनी प्रबंधन ने एक डीलर फर्म को गैस सप्लाई करने की बात कही, लेकिन उससे जुड़ा कोई वैध अनुबंध या पंजीकरण दस्तावेज नहीं दिखा सका। साथ ही समानांतर विपणन (Parallel Marketing) के लिए आवश्यक प्रमाणपत्र भी मौजूद नहीं थे। जांच में यह भी सामने आया कि इस कारोबार की जानकारी जिला प्रशासन को नहीं दी गई थी। बिना अनुमति बिक्री, स्टॉक विवरण प्रदर्शित न करना और आवश्यक कागजात न रखना—इन सभी को नियमों का उल्लंघन माना गया है। खाद्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि गैस की कालाबाजारी रोकने के लिए लगातार छापेमारी जारी रहेगी, ताकि आम उपभोक्ताओं को नियमित और सुरक्षित सप्लाई मिल सके।

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मान्यता बिना CBSE पढ़ाई का खुलासा: बिलासपुर में पेरेंट्स के हंगामे के बाद जांच कमेटी गठित

Bilaspur में बिना आधिकारिक मान्यता के CBSE पैटर्न पर पढ़ाई कराने का मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने जांच के लिए कमेटी बना दी है। आरोप है कि कई स्कूलों ने खुद को Central Board of Secondary Education से संबद्ध बताकर बच्चों को पूरे साल उसी कोर्स से पढ़ाया, लेकिन परीक्षा के समय 5वीं और 8वीं के छात्रों को Chhattisgarh Board of Secondary Education की परीक्षा देने के लिए बाध्य किया गया। इस मुद्दे पर अभिभावकों में भारी नाराजगी है। उनका कहना है कि प्रवेश के समय स्कूलों ने CBSE स्कूल होने का दावा किया था, जिस भरोसे उन्होंने बच्चों का दाखिला कराया। अब अचानक राज्य बोर्ड की परीक्षा दिलाने से बच्चों का भविष्य प्रभावित हो सकता है। बताया जा रहा है कि Brilliant Public School और Narayana e‑Techno School सहित कुछ स्कूलों में केवल 8वीं तक कक्षाएं संचालित हैं। CBSE से संबद्धता के लिए 12वीं तक स्कूल चलाना जरूरी होता है, इसलिए इन संस्थानों को मान्यता नहीं मिली। इसके बावजूद CBSE पैटर्न से पढ़ाई कराई जा रही थी। जब छात्रों पर राज्य बोर्ड की परीक्षा देने का दबाव बनाया गया तो अभिभावकों ने विरोध शुरू कर दिया। उन्होंने स्कूल प्रबंधन के साथ कलेक्ट्रेट का भी घेराव किया और शिकायत उच्च स्तर तक पहुंचाई। मामले के बढ़ने पर शिक्षा विभाग ने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की है, जिसे 7 दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषी स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। साथ ही अभिभावकों को सलाह दी गई है कि किसी भी स्कूल में दाखिला लेने से पहले उसकी मान्यता और संबद्धता की आधिकारिक जांच जरूर करें।

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2 दिन बारिश और बिजली गिरने का अलर्ट: तेज आंधी के साथ 5 दिन गिरेगा तापमान, गर्मी से राहत

Chhattisgarh में भीषण गर्मी के बीच मौसम अचानक बदल गया है। कई इलाकों में बारिश, ओलावृष्टि और तेज हवाओं का दौर शुरू हो गया है। India Meteorological Department के अनुसार 19 और 20 मार्च को प्रदेश के कई हिस्सों में तेज आंधी, बिजली गिरने और बारिश की संभावना है। इसके बाद अगले 5 दिनों तक अधिकतम तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की जा सकती है, जिससे लोगों को गर्मी से राहत मिलेगी। पिछले 24 घंटों में कई जगहों पर अच्छी बारिश दर्ज की गई। Devbhog में लगभग 50 मिमी, Karpawand में 40 मिमी और Devkar में हल्की बारिश हुई। तापमान की बात करें तो Durg में अधिकतम 35.2°C और न्यूनतम 19.2°C दर्ज किया गया। मौसम विभाग ने आज के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। कुछ क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ भारी बारिश, ओले और 40–50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। राजधानी Raipur में भी बादल छाए रहने और हल्की बौछारों की संभावना है। वैज्ञानिकों के अनुसार प्रदेश में दो मौसम प्रणालियां सक्रिय हैं—मध्य भारत के ऊपर बना चक्रवाती घेरा और दक्षिण-पूर्वी राजस्थान से उत्तर छत्तीसगढ़ तक फैली ट्रफ लाइन। ये दोनों सिस्टम नमी को ऊपर उठाकर घने बादल बनाते हैं, जिससे बारिश, आंधी और ओलावृष्टि होती है। मौसम विभाग का अनुमान है कि 20 मार्च तक खराब मौसम बना रहेगा, जबकि 21–22 मार्च से स्थिति सामान्य होने लगेगी।

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छत्तीसगढ़ में RSS का महा अभियान: 30 लाख से ज्यादा परिवारों तक पहुंचा संघ, संगठन में भी होगा बड़ा बदलाव

Rashtriya Swayamsevak Sangh ने अपने शताब्दी वर्ष के मौके पर Chhattisgarh में अब तक का सबसे बड़ा ‘गृह संपर्क अभियान’ पूरा करने का दावा किया है। इस अभियान के दौरान स्वयंसेवकों ने करीब 30.55 लाख परिवारों तक पहुंच बनाकर सीधे संवाद किया, जिससे संगठन की जमीनी पकड़ और मजबूत हुई है। संघ के अनुसार, प्रदेश भर में 2,034 बड़े कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें लगभग 9 लाख से अधिक लोगों ने भाग लिया। उल्लेखनीय बात यह रही कि इन कार्यक्रमों में महिलाओं की भागीदारी पुरुषों से ज्यादा रही। संपर्क अभियान के तहत 13 हजार से अधिक गांवों और 600 से ज्यादा शहरी बस्तियों को कवर किया गया। संगठन ने भविष्य में निर्णय प्रक्रिया को तेज और प्रभावी बनाने के लिए अपने ढांचे में बदलाव की भी घोषणा की है। मार्च 2027 से मौजूदा प्रांत व्यवस्था की जगह संभाग आधारित संरचना लागू की जाएगी, जिसके तहत देश को 9 क्षेत्रों और 85 संभागों में विभाजित किया जाएगा। संघ के कार्य विस्तार की बात करें तो प्रदेश के सभी 34 जिलों में 2,000 से अधिक शाखाएं नियमित रूप से संचालित हो रही हैं। इनमें बड़ी संख्या विद्यार्थी और महाविद्यालयीन शाखाओं की है, जो युवाओं के बढ़ते जुड़ाव को दर्शाती है। राजधानी Raipur में भी संघ की गतिविधियां तेजी से बढ़ी हैं, जहां सैकड़ों बस्तियों में शाखाएं सक्रिय बताई जा रही हैं। युवा वर्ग को जोड़ने के लिए ‘युवा संगम’ कार्यक्रम भी आयोजित किए गए, जिनमें 23 हजार से अधिक युवाओं ने हिस्सा लिया। इन कार्यक्रमों में राष्ट्र निर्माण, उद्यमिता और सामाजिक विषयों पर चर्चा की गई। शताब्दी वर्ष के दौरान संघ ने ‘पंच परिवर्तन’—कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी, नागरिक कर्तव्य और सामाजिक समरसता—को समाज में व्यवहारिक रूप से अपनाने का लक्ष्य रखा है।

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सीवेज टैंक में 3 मौतें: रायपुर निगम ने अस्पताल को नोटिस भेजा, मैनुअल सफाई पर सख्ती

Raipur के Ramkrishna Care Hospital में सीवेज टैंक की सफाई के दौरान तीन युवकों की मौत के बाद नगर निगम ने अस्पताल प्रबंधन को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। शुरुआती जांच में बिना सुरक्षा उपकरण और मशीनरी के मजदूरों को टैंक में उतारने की गंभीर लापरवाही सामने आई है, जबकि इस तरह की मैनुअल सफाई पूरी तरह प्रतिबंधित है। बताया जा रहा है कि करीब 30 फीट गहरे टैंक में गैस निकालने की कोई व्यवस्था नहीं थी और मजदूरों को बिना मास्क, रस्सी या ऑक्सीजन सपोर्ट के नीचे भेज दिया गया। जहरीली गैस के कारण दम घुटने से तीनों की मौत हो गई। अस्पताल प्रबंधन ने पीड़ित परिवारों को 30-30 लाख रुपये मुआवजा और नाबालिग बच्चों की पढ़ाई के लिए प्रति माह 20 हजार रुपये देने की घोषणा की है। घटना के बाद राज्य सरकार ने सीवरेज की मैनुअल सफाई पर सख्ती के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai ने कहा कि केवल नगर निगम या पंजीकृत एजेंसियों के माध्यम से ही सफाई कराई जाए और सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य किया जाए। दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की बात भी कही गई है। पुलिस ने मामले में जांच शुरू कर दी है और जिम्मेदार लोगों पर कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।

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एक्सप्रेस-वे हादसे की जांच में बड़ा खुलासा: बिना सरिया डाला स्लैब, भारी कंक्रीट से ढहा हिस्सा

Raipur के तेलीबांधा एक्सप्रेस-वे हादसे की जांच में निर्माण एजेंसी की गंभीर लापरवाही सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार जिस हिस्से का स्लैब गिरा, वहां लोहे की सरिया (री-इन्फोर्समेंट) पर्याप्त नहीं थी, इसके बावजूद उस भाग को आगे बढ़ाकर केवल कंक्रीट डाल दिया गया। बिना मजबूत सपोर्ट के भारी कंक्रीट का भार सहन न कर पाने से स्लैब अचानक ढह गया। जांच में यह भी सामने आया कि निर्धारित 75 मिमी की जगह लगभग 150 मिमी मोटी कंक्रीट डाली गई, जिससे संरचना पर अतिरिक्त दबाव पड़ा। तकनीकी मानकों की अनदेखी ही हादसे की मुख्य वजह बताई गई है। यह वही फ्लाईओवर है जिसका एक हिस्सा 2019 में भी धंस गया था और बाद में इसे तोड़कर 2022 में दोबारा बनाया गया था। कुछ ही वर्षों में फिर से खराबी सामने आने से निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं। पुल के नीचे स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत लगाई गई फॉल्स सीलिंग भी जर्जर हालत में है और कई जगह से टूटकर लटक रही है, जो नीचे से गुजरने वालों के लिए खतरा बन सकती है। जांच टीम ने क्षतिग्रस्त हिस्से को दोबारा मानकों के अनुसार बनाने, दरारों की मरम्मत करने और खराब फॉल्स सीलिंग को हटाने या सुधारने की सिफारिश की है। रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेज दी गई है और आगे कार्रवाई की प्रतीक्षा है।

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विदेश से ऑनलाइन MBBS करने वालों पर सख्ती: ऑफलाइन पढ़ाई पूरी किए बिना नहीं मिलेगा रजिस्ट्रेशन

Chhattisgarh के उन मेडिकल छात्रों के लिए बड़ी परेशानी की खबर है, जिन्होंने कोरोना काल में विदेशों से ऑनलाइन माध्यम से एमबीबीएस की पढ़ाई की थी। National Medical Commission (NMC) के नए निर्देश के अनुसार केवल ऑनलाइन पढ़ाई को मान्य नहीं माना जाएगा। अब ऐसे छात्रों को उसी देश में वापस जाकर ऑफलाइन कक्षाएं, क्लीनिकल ट्रेनिंग और प्रैक्टिकल पूरा करना अनिवार्य होगा, जहां से उन्होंने प्रवेश लिया था। रूस, यूक्रेन, किर्गिस्तान और कजाकिस्तान जैसे देशों में पढ़ रहे प्रदेश के लगभग 1800 छात्र इस नियम से प्रभावित होंगे। Chhattisgarh Medical Council ने भी स्पष्ट कर दिया है कि बिना वैध ऑफलाइन प्रशिक्षण प्रमाणपत्र के किसी को स्थायी पंजीयन नहीं दिया जाएगा। यदि कोई बिना रजिस्ट्रेशन के प्रैक्टिस करता पाया गया तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई और एफआईआर दर्ज की जा सकती है। NMC का कहना है कि मेडिकल शिक्षा में क्लीनिकल और प्रैक्टिकल प्रशिक्षण बेहद जरूरी होता है, जिसकी भरपाई ऑनलाइन कक्षाओं से संभव नहीं है। इसलिए जितनी अवधि ऑनलाइन पढ़ाई हुई है, उतनी अवधि तक ऑफलाइन ट्रेनिंग करना अनिवार्य होगा। राज्य में ऐसे सभी छात्रों की सूची तैयार की जा रही है और उन्हें विदेश जाकर पढ़ाई पूरी कर “कंपनसेशन सर्टिफिकेट” लाना होगा। इसके बिना स्टेट मेडिकल काउंसिल स्थायी रजिस्ट्रेशन नहीं देगी।

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