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शालीमार-एलटीटी एक्सप्रेस में अस्थायी अतिरिक्त कोच, यात्रियों को मिलेगी राहत

रेलवे प्रशासन ने यात्रियों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए Shalimar–Lokmanya Tilak Terminus Express में अतिरिक्त कोच जोड़ने का फैसला लिया है। इस कदम का उद्देश्य अधिक से अधिक यात्रियों को कंफर्म बर्थ उपलब्ध कराना है। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे से होकर गुजरने वाली इस ट्रेन में एक अतिरिक्त एसी-3 टियर और एक स्लीपर कोच अस्थायी रूप से जोड़े जाएंगे। इससे वेटिंग लिस्ट वाले यात्रियों को काफी राहत मिलने की उम्मीद है। जानकारी के मुताबिक, गाड़ी संख्या 18030 (शालीमार से एलटीटी) में यह सुविधा 28, 29, 30, 31 मार्च और 01, 02, 03 अप्रैल 2026 को उपलब्ध रहेगी। वहीं, गाड़ी संख्या 18029 (एलटीटी से शालीमार) में 30, 31 मार्च और 01, 02, 03, 04, 05 अप्रैल 2026 तक अतिरिक्त कोच लगाए जाएंगे। रेलवे के इस निर्णय से इस रूट पर यात्रा करने वाले यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी, खासकर त्योहार और छुट्टियों के दौरान बढ़ने वाली भीड़ को देखते हुए यह व्यवस्था काफी उपयोगी साबित होगी।

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कोंडागांव में अनोखी शादी: युवक ने एक ही मंडप में दो युवतियों से लिए सात फेरे

छत्तीसगढ़ के Kondagaon जिले से एक अनोखी शादी का मामला सामने आया है, जहां एक युवक ने एक ही मंडप में अपनी दो प्रेमिकाओं के साथ विवाह कर लिया। इस शादी का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है। वीडियो में दूल्हा दोनों दुल्हनों का हाथ थामकर अग्नि के फेरे लेते दिखाई दे रहा है। शादी समारोह के दौरान गांव के लोग और युवक के दोस्त खुशी में झूमते और नाचते नजर आए। यह घटना फरसगांव ब्लॉक के बैलगांव गांव की बताई जा रही है। युवक हितेश यादव, जो पेशे से किसान है, ने शंकरपुर निवासी फूलबती और बनियागांव की रहने वाली यामिनी के साथ विवाह किया। हितेश यादव के अनुसार, उसने सबसे पहले फूलबती को शादी के लिए प्रपोज किया था, लेकिन उसने मना कर दिया। इसके बाद यामिनी ने प्रस्ताव स्वीकार कर लिया। बाद में परिस्थितियां बदलीं और फूलबती भी विवाह के लिए तैयार हो गई। इसके बाद तीनों की सहमति से एक ही मंडप में दोनों के साथ शादी करने का निर्णय लिया गया। शादी की सभी रस्में पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार पूरी की गईं। 23 मार्च 2026 को हल्दी और अन्य प्रारंभिक कार्यक्रम हुए, जबकि 24 मार्च को मुख्य विवाह और आशीर्वाद समारोह आयोजित किया गया। ग्रामीणों के मुताबिक, इस विवाह को लेकर दोनों परिवारों और समाज के बुजुर्गों की सहमति ली गई थी, ताकि भविष्य में किसी प्रकार का विवाद न हो। हालांकि, दोनों दुल्हनों की माताएं इस समारोह में शामिल नहीं हुईं, लेकिन परिवार के अन्य सदस्यों और गांव के लोगों ने इस विवाह का समर्थन किया। इस मामले पर कानूनी पक्ष रखते हुए अधिवक्ता निपेंद्र मिश्रा ने बताया कि Hindu Marriage Act, 1955 के तहत एक व्यक्ति एक ही समय में दो विवाह नहीं कर सकता, जब तक कि पहले विवाह का विधिवत तलाक न हो। हालांकि, कुछ आदिवासी समुदायों में बहुविवाह की परंपरा देखने को मिलती है, जहां सामाजिक सहमति के आधार पर ऐसे विवाह स्वीकार किए जाते हैं।

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बिलासपुर के रिसॉर्ट में हिरण शिकार का खुलासा: पका मांस मिला, मैनेजर सहित 4 गिरफ्तार

बिलासपुर जिले के कोटा क्षेत्र के बेलगहना वन परिक्षेत्र में स्थित एक रिसॉर्ट में वन्यजीव शिकार का गंभीर मामला सामने आया है। सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम ने कुरदर स्थित एथनिक रिसॉर्ट में छापेमारी की, जहां किचन में कड़ाही में मांस पकता हुआ मिला। प्रारंभिक जांच में इसे हिरण का मांस बताया जा रहा है। जांच में यह भी सामने आया कि यह रिसॉर्ट पर्यटन मंडल द्वारा संचालित है और यहां काम करने वाले कर्मचारियों के लिए ही मांस तैयार किया जा रहा था। वन विभाग ने मौके से कुक रामकुमार टोप्पो, मैनेजर रजनीश सिंह तथा कर्मचारी रमेश यादव और संजय वर्मा को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत मामला दर्ज किया है। पूछताछ के दौरान सभी आरोपी एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते नजर आए। मैनेजर और कर्मचारियों ने कुक को दोषी बताया, जबकि कुक ने कहा कि उसे गांव के एक व्यक्ति द्वारा मांस दिया गया था और उसे इसकी जानकारी नहीं थी कि यह किस जानवर का है। वन विभाग ने जब्त मांस को जांच के लिए जबलपुर लैब भेजने का निर्णय लिया है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि मांस वास्तव में हिरण का ही है या नहीं। फिलहाल जंगल में शिकार से जुड़े अन्य सबूत नहीं मिले हैं। कोटा-बेलगहना क्षेत्र में पहले भी वन्यजीव शिकार की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जहां करंट लगाकर जंगली जानवरों का शिकार किए जाने की शिकायतें मिलती रही हैं। इस घटना के बाद एक बार फिर क्षेत्र में अवैध शिकार और निजी रिसॉर्ट्स की गतिविधियों पर सवाल उठने लगे हैं।

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धरसीवां में 31 मार्च से कुंवरगढ़ महोत्सव: मुख्यमंत्री करेंगे 133 करोड़ के विकास कार्यों का शुभारंभ

रायपुर जिले के धरसीवां क्षेत्र में 31 मार्च 2026 को कुंवरगढ़ महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। इस कार्यक्रम का शुभारंभ विष्णुदेव साय करेंगे। इस मौके पर क्षेत्र को लगभग 133 करोड़ रुपए के विभिन्न विकास कार्यों की सौगात दी जाएगी। अनुज शर्मा ने बताया कि यह आयोजन क्षेत्र के विकास के साथ-साथ इसकी सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। कुंरा नगर अपनी ऐतिहासिक विरासत और सांस्कृतिक समृद्धि के लिए जाना जाता है, जहां राजा कुँवर सिंह गोंड की परंपरा आज भी जीवंत है। महोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री विभिन्न विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और भूमिपूजन करेंगे, जिनमें नव निर्मित तहसील कार्यालय का उद्घाटन भी शामिल है। इन परियोजनाओं से क्षेत्र में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी सुविधाओं में सुधार होने की उम्मीद है। कार्यक्रम में स्थानीय हस्तशिल्प, पारंपरिक व्यंजन और कुटीर उद्योगों के स्टॉल लगाए जाएंगे, जिससे स्थानीय व्यापारियों और कारीगरों को आर्थिक लाभ मिलेगा। इसके साथ ही लोक कलाकारों के अलावा राष्ट्रीय स्तर के कलाकारों की प्रस्तुतियां भी आकर्षण का केंद्र रहेंगी। आयोजन को लेकर प्रशासन ने सुरक्षा और पार्किंग की पर्याप्त व्यवस्था की है, ताकि बड़ी संख्या में आने वाले लोगों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। जनप्रतिनिधियों ने क्षेत्रवासियों से इस आयोजन में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की है।

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रायपुर में अग्निवीर भर्ती शुरू: 1 अप्रैल 2026 तक भरें ऑनलाइन फॉर्म

भारतीय सेना में अग्निवीर भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इच्छुक अभ्यर्थी 13 फरवरी 2026 से आवेदन कर सकते हैं, जबकि आवेदन की अंतिम तिथि 1 अप्रैल 2026 तय की गई है। ऐसे में युवाओं को सलाह दी गई है कि वे अंतिम समय का इंतजार न करते हुए जल्द से जल्द अपना फॉर्म भर लें। इस भर्ती के लिए 17 वर्ष 6 माह से 21 वर्ष तक के युवा पात्र हैं। शैक्षणिक योग्यता के रूप में 8वीं पास से लेकर स्नातक और डिप्लोमा धारक उम्मीदवार भी आवेदन कर सकते हैं, जिससे बड़ी संख्या में युवाओं को सेना में शामिल होने का अवसर मिल रहा है। रायपुर जिले में कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह के निर्देश पर अभ्यर्थियों की सुविधा के लिए विशेष हेल्प डेस्क बनाए गए हैं। ये हेल्प डेस्क रोजगार कार्यालय, नगरीय निकाय, पॉलिटेक्निक कॉलेज, शासकीय महाविद्यालय, आईटीआई, जनपद पंचायत और नगर पंचायतों में संचालित किए जा रहे हैं, जहां आवेदन से जुड़ी जानकारी और मार्गदर्शन उपलब्ध है। यदि किसी अभ्यर्थी को ऑनलाइन आवेदन में किसी प्रकार की समस्या आती है, तो वह रोजगार कार्यालय रायपुर में स्थापित हेल्प डेस्क से संपर्क कर सकता है। यहां सेना भर्ती से संबंधित सभी आवश्यक जानकारी और तकनीकी सहायता दी जा रही है।

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छत्तीसगढ़ में IPS प्रमोशन में देरी: 23 साल बाद मिल रहा पद, देश में 19वें स्थान पर राज्य

छत्तीसगढ़ में पुलिस अधिकारियों को भारतीय पुलिस सेवा में प्रमोशन मिलने में काफी देरी हो रही है। स्थिति यह है कि वर्ष 2002 बैच के अधिकारियों को लगभग 23 साल की सेवा के बाद अब जाकर IPS पदोन्नति दी गई है, जिससे राज्य इस मामले में देश में 19वें स्थान पर पहुंच गया है। दूसरी ओर, कर्नाटक, गुजरात, केरल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और सिक्किम जैसे राज्यों में बाद के बैच के अधिकारियों को भी पहले ही IPS प्रमोशन मिल चुका है। इससे साफ है कि अन्य राज्यों में प्रमोशन प्रक्रिया ज्यादा तेज है। इस देरी को लेकर राज्य के पुलिस अधिकारियों में नाराजगी है। उन्होंने सरकार को पत्र लिखकर कैडर रिव्यू कराने और IPS पदों की संख्या बढ़ाने की मांग की है। अधिकारियों का कहना है कि राज्य में कम से कम 60 नए IPS पद बढ़ाए जाने चाहिए ताकि प्रमोशन प्रक्रिया तेज हो सके। राज्य में कई अहम पद अब भी स्वीकृति का इंतजार कर रहे हैं। रायपुर में कमिश्नर और पांच DCP पद मंजूर नहीं हुए हैं। वहीं नए जिले मोहला-मानपुर और सारंगढ़-बिलाईगढ़ में भी IPS स्तर के SP पद स्वीकृत नहीं किए गए हैं। कैडर रिव्यू की प्रक्रिया भी समय पर पूरी नहीं हो पा रही है। नियम के अनुसार हर पांच साल में यह प्रक्रिया होनी चाहिए, लेकिन पिछले 25 साल में केवल चार बार ही कैडर रिव्यू हुआ है। वर्ष 2017 में 22 पदों के लिए प्रस्ताव भेजा गया था, जिसमें से सिर्फ 11 पदों को ही मंजूरी मिली। जहां पुलिस विभाग में प्रमोशन की गति धीमी है, वहीं अन्य सेवाओं में स्थिति बेहतर है। भारतीय प्रशासनिक सेवा में राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को करीब 13 साल में ही प्रमोशन मिल रहा है। प्रमोशन में देरी के पीछे विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की बैठक का देर से होना, पदों की कमी और कैडर रिव्यू में देरी जैसे कारण सामने आ रहे हैं। अन्य राज्यों में यह प्रक्रिया समय पर पूरी हो जाती है, जबकि छत्तीसगढ़ में यह अक्सर जनवरी-फरवरी तक खिंच जाती है।

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अबूझमाड़ बदल रहा है: जहां कभी था नक्सलियों का खौफ, अब बन रही सड़क और लौट रहे लोग

कभी ‘नो-गो एरिया’, अब खुल रहा रास्ता अबूझमाड़, जो कभी नक्सलियों का गढ़ माना जाता था, अब तेजी से बदल रहा है। नारायणपुर से करीब 50 किमी दूर इस इलाके में अब पहली बार सड़क निर्माण का काम शुरू हुआ है। जहां पहले नक्सलियों के बैरिकेड लगे होते थे और दिन में भी लोगों का आना-जाना मुश्किल था, अब वहां सुरक्षा बलों की मौजूदगी में विकास कार्य जारी हैं। सड़क के साथ बदलती जिंदगी अबूझमाड़ के अंदर क्रूसनार, बासिंघ, सोनपुर, ढोढ़रीबेड़ा, मसपुर और होरादी जैसे गांवों को जोड़ते हुए सड़क बनाई जा रही है। यह सड़क आगे महाराष्ट्र तक कनेक्ट करेगी। रास्ते में कई पुलिस कैंप बनाए गए हैं और सड़क किनारे अस्पताल जैसी बुनियादी सुविधाओं का निर्माण भी शुरू हो चुका है। लोगों की जुबानी पुराने हालात स्थानीय महिला सुकमती मेटामी बताती हैं कि पहले यहां हालात बेहद डरावने थे। अब गांव में अस्पताल बन रहा है और बस सेवा भी शुरू हो चुकी है, जिससे लोगों को राहत मिल रही है। अनाज तक छीन लेते थे नक्सली गांव के निवासी बताते हैं कि नक्सली पहले से सूचना देकर अनाज इकट्ठा करने को कहते थे।चाहे फसल हो या न हो, गांववालों को अपना पेट काटकर भी उन्हें अनाज देना पड़ता था। अगर कोई शहर चला जाता, तो उसे सजा दी जाती थी। कई लोग डर के कारण गांव छोड़कर चले गए थे। आत्मसमर्पण कर बदल रहे हालात गांव में सुरक्षा बलों के साथ मौजूद अनथ कवची जैसे लोग भी हैं, जो पहले नक्सली थे और अब आत्मसमर्पण कर चुके हैं।वे अब सुरक्षा बलों की मदद कर रहे हैं और बचे हुए नक्सलियों के खिलाफ अभियान में शामिल हैं। बस्तर में तेजी से घट रहा नक्सल प्रभाव बस्तर संभाग में नक्सलवाद के खिलाफ अभियान ने बड़ी सफलता हासिल की है। विजय शर्मा के अनुसार: विकास बना सबसे बड़ा हथियार सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और संचार सुविधाओं के विस्तार से स्थानीय लोग अब मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं।लगातार ऑपरेशन, आत्मसमर्पण और विकास कार्यों ने मिलकर हालात बदले हैं। एक तस्वीर, बड़ा संदेश हाल ही में विजय शर्मा की अबूझमाड़ में मॉर्निंग वॉक की तस्वीर सामने आई।यह सिर्फ एक फोटो नहीं, बल्कि यह संकेत है कि जहां कभी गोलियों की आवाज गूंजती थी, वहां अब शांति और सामान्य जीवन लौट रहा है।

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प्रदूषण पर सख्ती: रात में सिस्टम बंद करने वाले 30 उद्योग सील, बिजली कनेक्शन काटे

प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों पर बड़ा एक्शन राजधानी रायपुर में हवा को प्रदूषित करने वाली औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल ने सख्त कार्रवाई शुरू की है। जनवरी से अब तक उरला, सिलतरा और धरसींवा क्षेत्र के 30 उद्योगों को पूरी तरह बंद कर उनकी बिजली सप्लाई काट दी गई है। इसे हाल के वर्षों की सबसे बड़ी पर्यावरणीय कार्रवाई माना जा रहा है। रात में बंद कर देते थे प्रदूषण कंट्रोल सिस्टम जांच में सामने आया कि कई उद्योग मुनाफा बढ़ाने के लिए रात के समय ईएसपी (इलेक्ट्रोस्टैटिक प्रीसीपिटेटर) और अन्य प्रदूषण नियंत्रण उपकरण बंद कर देते थे। बार-बार चेतावनी और नोटिस के बावजूद सुधार नहीं होने पर मंडल ने सीधे क्लोजर ऑर्डर जारी कर पावर कट कर दिया। बड़े उद्योग भी कार्रवाई की जद में कार्रवाई के दायरे में कई बड़े नाम भी आए हैं, जिनमें जैसे उद्योग शामिल हैं। वहीं Sharda Energy and Minerals Limited के खिलाफ बिना अनुमति फ्लाई ऐश डंपिंग का मामला भी दर्ज किया गया है। कार्रवाई का पूरा रिपोर्ट कार्ड भारी जुर्माने का प्रावधान नियमों के अनुसार बिना अनुमति राखड़ फेंकने पर 5 लाख से 50 लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। यदि उद्योग चेतावनी के बाद भी प्रदूषण नियंत्रण उपकरण चालू नहीं करते, तो जल और वायु अधिनियम के तहत उनकी बिजली काटने की कार्रवाई की जाती है। सुधार के बाद ही मिलेगा संचालन की अनुमति मंडल ने साफ कर दिया है कि अब “पहले उत्पादन, बाद में सुधार” की नीति नहीं चलेगी।उद्योगों को पहले सभी पर्यावरण मानकों का पालन करना होगा, तभी संचालन की अनुमति दी जाएगी। अधिकारी का बयान मंडल के सदस्य सचिव राजू अगासीमानी के अनुसार, नोटिस देने के बावजूद संतोषजनक जवाब नहीं मिला और न ही सिस्टम चालू किए गए, इसलिए सख्त कार्रवाई की गई है।

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नारनौल के सोमेश को बड़ी जिम्मेदारी: खेलो इंडिया में बने शूटिंग डायरेक्टर

30 मार्च से रायपुर में होने वाले जनजातीय खेलों में निभाएंगे अहम भूमिका, युवाओं को देंगे प्रशिक्षण खेलो इंडिया में मिला अहम पद खेलो इंडिया जनजातीय खेल का आयोजन 30 मार्च से 3 अप्रैल तक रायपुर में होने जा रहा है।इस राष्ट्रीय स्तर के आयोजन के लिए जारी 25 सदस्यीय टीम में नारनौल के तीरंदाज सोमेश को शूटिंग डायरेक्टर नियुक्त किया गया है। हरियाणा से इकलौते प्रतिनिधि इस सूची में हरियाणा से केवल सोमेश को ही यह जिम्मेदारी दी गई है, जिससे उनके क्षेत्र में खुशी का माहौल है।परिवार, मित्र और खेल प्रेमियों ने इसे जिले के लिए गर्व का क्षण बताया है। पहले भी निभा चुके अहम जिम्मेदारियां सोमेश इससे पहले कई राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय तीरंदाजी प्रतियोगिताओं में अलग-अलग भूमिकाएं निभा चुके हैं।हालांकि, खेलो इंडिया जैसे बड़े मंच पर शूटिंग डायरेक्टर बनना उनके करियर की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। युवाओं को दे रहे प्रशिक्षण सोमेश अपनी तीरंदाजी अकादमी के माध्यम से युवाओं को प्रशिक्षण दे रहे हैं।उनके मार्गदर्शन में कई खिलाड़ी राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर बेहतर प्रदर्शन कर चुके हैं। वरिष्ठ पदाधिकारियों का जताया आभार अपनी नियुक्ति पर सोमेश ने अर्जुन मुंडा, वीरेंद्र सचदेवा और कोच सुरेंद्र शर्मा सहित अन्य पदाधिकारियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह जिम्मेदारी उनके लिए सम्मान की बात है और वे इसे पूरी निष्ठा से निभाएंगे।

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सरगुजा में आकाशीय बिजली का कहर: पेड़ के नीचे खड़ी बच्ची की मौत, रायपुर में आज भी मौसम अलर्ट

प्रदेश में हल्की बारिश और आंधी के आसार, आने वाले दिनों में तापमान 2-3 डिग्री तक गिरने की संभावना सरगुजा में दर्दनाक हादसा सरगुजा जिले में तेज आंधी-बारिश के दौरान आकाशीय बिजली गिरने से एक नाबालिग बच्ची की मौत हो गई। घटना लुंड्रा थाना क्षेत्र की है। बताया जा रहा है कि बच्ची बारिश से बचने के लिए पेड़ के नीचे खड़ी थी, तभी अचानक बिजली गिर गई। पास के दूसरे पेड़ के नीचे खड़ी दो अन्य लड़कियां भी इसकी चपेट में आईं, लेकिन उनकी जान बच गई। मौसम में बदलाव का असर राजधानी रायपुर समेत प्रदेश के कई इलाकों में मौसम अचानक बदला है। तेज हवाओं और बारिश के कारण तापमान में हल्की गिरावट दर्ज की गई है। मौसम विभाग के अनुसार पश्चिम बंगाल से ओडिशा तक बने ट्रफ के प्रभाव से प्रदेश के मध्य और दक्षिणी हिस्सों में आंधी और बारिश की स्थिति बनी हुई है। तापमान का हाल पिछले 24 घंटों में मौसम विभाग का कहना है कि अगले 4 दिनों तक तापमान में खास बदलाव नहीं होगा, लेकिन इसके बाद 2 से 3 डिग्री तक गिरावट आ सकती है। रायपुर में मौसम का पूर्वानुमान रायपुर में आज बादल छाए रहने की संभावना है। अलर्ट और सावधानी

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