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सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट नियम लागू, लेकिन व्यवस्था अधूरी: 4 रंग के डस्टबिन नियम पर अमल नहीं

छत्तीसगढ़ में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट (SWM) नियम 1 अप्रैल 2026 से लागू हो गए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इसकी तैयारी अधूरी दिखाई दे रही है। नए नियम के तहत अब घरों, दुकानों और कार्यालयों से निकलने वाले कचरे को चार अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर अलग-अलग डस्टबिन में रखना अनिवार्य किया गया है। इस व्यवस्था के तहत गीला कचरा, सूखा कचरा, घरेलू खतरनाक कचरा और विशेष/सैनिटरी कचरे को अलग-अलग रंग के डिब्बों में संग्रहित करना होगा। नियम का पालन न करने पर जुर्माना लगाने का भी प्रावधान है, लेकिन अब तक जुर्माने की राशि तय नहीं की गई है। नए नियम के अनुसार गीले कचरे के लिए हरे रंग का डस्टबिन, सूखे कचरे के लिए नीला, खतरनाक कचरे के लिए लाल और विशेष कचरे के लिए काला डिब्बा निर्धारित किया गया है। गीले कचरे में भोजन के अवशेष, सब्जी-फल के छिलके और बगीचे का कचरा शामिल होता है, जिससे कम्पोस्ट तैयार किया जा सकता है। सूखे कचरे में प्लास्टिक, कागज, धातु और कांच जैसी सामग्री आती है, जिन्हें रीसाइक्लिंग के लिए अलग रखा जाता है। खतरनाक कचरे में बैटरी, केमिकल, पेंट, डायपर और बल्ब जैसे सामान शामिल हैं, जबकि विशेष कचरे में मास्क, ग्लव्स और मेडिकल वेस्ट जैसी सामग्री आती है। हालांकि नियम कागजों में लागू हो चुके हैं, लेकिन शहरों में इसकी तैयारी पूरी नहीं हो सकी है। रायपुर में करीब 250 कचरा गाड़ियों में से केवल 100 गाड़ियों में ही चार कंपार्टमेंट की व्यवस्था है, जबकि बाकी अभी भी दो कंपार्टमेंट वाली ही हैं। अन्य जिलों में स्थिति और भी कमजोर बताई जा रही है। कई नगरीय निकायों में न तो नई गाड़ियां पूरी तरह उपलब्ध हैं और न ही कचरा संग्रहण प्रणाली में बदलाव किया गया है। इस कारण पुराने तरीके से ही कचरा उठाया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, संसाधनों की कमी और जुर्माने की स्पष्ट गाइडलाइन न होने के कारण सख्ती नहीं हो पा रही है। राज्य में 27 जनवरी को अधिसूचना जारी की गई थी, लेकिन उसके बाद भी आवश्यक तैयारियां पूरी नहीं हो सकीं। नगरीय प्रशासन विभाग का कहना है कि सभी निकायों को चार कंपार्टमेंट वाली गाड़ियां अनिवार्य रूप से अपनाने के निर्देश दिए गए हैं और जुर्माने की राशि तय करने की प्रक्रिया जल्द पूरी की जाएगी।

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प्रदेश में खरीफ सीजन से फार्मर आईडी अनिवार्य: बिना आईडी नहीं मिलेगा यूरिया और अन्य खाद

प्रदेश में आने वाले खरीफ सीजन से खाद वितरण व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है। अब यूरिया, पोटाश और डीएपी जैसे खाद केवल उन्हीं किसानों को मिलेंगे, जिनके पास फार्मर आईडी होगी। नई व्यवस्था के तहत Urea Fertilizer सहित सभी प्रमुख खाद समितियों से केवल फार्मर आईडी दिखाने पर ही उपलब्ध होंगे। जिन किसानों के पास आईडी नहीं होगी, उन्हें खाद नहीं दिया जाएगा। इसके अलावा, निजी दुकानों से खाद खरीदने पर भी किसान की जानकारी जैसे नाम और मोबाइल नंबर दर्ज करना अनिवार्य होगा। इस प्रणाली का उद्देश्य खाद वितरण में पारदर्शिता लाना और अनियमितता तथा कालाबाजारी को रोकना है। अधिकारियों के अनुसार, आने वाले समय में खाद की उपलब्धता को लेकर दबाव बढ़ सकता है, इसलिए यह व्यवस्था पहले से लागू की जा रही है ताकि वास्तविक किसानों तक समय पर खाद पहुंच सके। यदि किसान फार्मर आईडी नहीं बनवाते हैं, तो उन्हें न केवल खाद बल्कि अन्य सरकारी योजनाओं के लाभ से भी वंचित होना पड़ सकता है। प्रदेश में इस समय बड़ी संख्या में किसान अभी भी एग्री-टेक रजिस्ट्रेशन से नहीं जुड़े हैं, जिन्हें जल्द से जल्द पंजीकरण कराने की सलाह दी गई है। यह नियम 2026-27 के खरीफ सीजन से पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा।

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रायपुर में अग्रवाल महिला मंडल की पहल: वाटर कूलर लगाए, दिव्यांग बालिका को व्हीलचेयर, UPSC टॉपर का सम्मान

रायपुर में सामाजिक सेवा की मिसाल पेश करते हुए Agarwal Mahila Mandal ने भीषण गर्मी के बीच जरूरतमंदों की मदद के लिए कई पहल की हैं। मंडल की अध्यक्ष ममता अग्रवाल के नेतृत्व में शहर में दो स्थानों पर वाटर कूलर लगाए गए, ताकि आम लोगों को राहत मिल सके। इनमें से एक वाटर कूलर कोर्ट परिसर में स्थापित किया गया, जिसे सुनील अग्रवाल ने अपने माता-पिता की स्मृति में भेंट किया। वहीं दूसरा वाटर कूलर सड्डू स्थित Maa Baglamukhi Temple परिसर में लगाया गया, जहां श्रद्धालुओं और राहगीरों को पेयजल की सुविधा मिलेगी। दोनों वाटर कूलरों का उद्घाटन अग्रवाल सभा के अध्यक्ष विजय अग्रवाल द्वारा किया गया। इसके अलावा मंडल ने सामाजिक दायित्व निभाते हुए लाभांडी के एक शासकीय स्कूल में पढ़ने वाली एक जरूरतमंद दिव्यांग बालिका को व्हीलचेयर प्रदान की। यह सहायता नीरू अग्रवाल के सहयोग से दी गई, जिससे छात्रा की पढ़ाई और दैनिक जीवन में सहूलियत मिलेगी। कार्यक्रम के दौरान कोषाध्यक्ष प्रेम अग्रवाल, कार्यकारिणी सदस्य सुभाष अग्रवाल सहित महिला मंडल के अन्य सदस्य भी मौजूद रहे। इसी अवसर पर मंडल ने यूपीएससी परीक्षा में देशभर में 35वां स्थान हासिल करने वाली Vaibhavi Agrawal का उनके निवास पर जाकर सम्मान किया। मंडल की टीम ने उन्हें शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इस पूरे आयोजन की जानकारी मीडिया प्रभारी ज्योति अग्रवाल ने दी।

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रायपुर में रील बनाना पड़ा महंगा पड़ सकता है: स्पीडोमीटर के सामने दौड़ने वालों को पुलिस की सख्त चेतावनी

Raipur Police ने शहर में सड़कों पर लगे स्पीडोमीटर के सामने रील बनाने वाले लोगों को कड़ी चेतावनी दी है। हाल के दिनों में कई ऐसे वीडियो सामने आए हैं, जिनमें लोग सड़क पर दौड़ लगाकर अपनी स्पीड मापते हुए सोशल मीडिया पर रील पोस्ट कर रहे हैं। पुलिस का कहना है कि ये स्पीडोमीटर मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि वाहनों की रफ्तार नियंत्रित करने और सड़क हादसों को रोकने के लिए लगाए गए हैं। इस तरह की गतिविधियां न केवल नियमों का उल्लंघन हैं, बल्कि लोगों की जान के लिए भी खतरा बन सकती हैं। पुलिस ने सोशल मीडिया पर संदेश जारी करते हुए कहा कि “रील के चक्कर में अपनी असली जिंदगी को जोखिम में न डालें। बीच सड़क पर दौड़ना खुद के साथ दूसरों की सुरक्षा से भी खिलवाड़ है।” छत्तीसगढ़ में बढ़ते सड़क हादसों को ध्यान में रखते हुए परिवहन विभाग ने पहली बार लेडार आधारित आधुनिक स्पीड कैमरे लगाए हैं। पायलट प्रोजेक्ट के तहत करीब 1.90 करोड़ रुपए की लागत से 7 कैमरे स्थापित किए गए हैं। ये कैमरे रायपुर के मरीन ड्राइव, वीआईपी रोड और मंदिर हसौद क्षेत्र के अलावा बिलासपुर बायपास, अंबिकापुर, जगदलपुर और धमतरी के कुरूद इलाके में लगाए गए हैं। इन स्थानों का चयन ट्रैफिक दबाव और दुर्घटनाओं के आंकड़ों के आधार पर किया गया है। वाई-फाई से जुड़े ये कैमरे 100 मीटर दूर से भी वाहनों की गति को सटीक रूप से माप सकते हैं। दो लेन सड़कों पर एक साथ कई वाहनों की निगरानी कर उनकी जानकारी रिकॉर्ड की जा सकती है। यदि कोई वाहन निर्धारित गति सीमा से अधिक चलता है, तो कैमरा उसकी नंबर प्लेट स्कैन कर फोटो और वीडियो रिकॉर्ड करता है। इसके आधार पर ऑटोमैटिक ई-चालान जारी होता है, जो व्हाट्सएप और ईमेल के माध्यम से वाहन मालिक तक पहुंचता है। इन कैमरों में नाइट विजन की सुविधा भी है, जिससे रात में और खराब मौसम में भी निगरानी संभव है। फिलहाल इनकी टेस्टिंग चल रही है, लेकिन जल्द ही इन्हें पूरी तरह लागू कर सख्ती से नियमों का पालन कराया जाएगा।

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सीबीएसई का बड़ा कदम: कक्षा 3 से 8 तक AI और कंप्यूटेशनल थिंकिंग कोर्स शुरू

Central Board of Secondary Education ने स्कूली शिक्षा को आधुनिक और तकनीक-आधारित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। बोर्ड ने कक्षा 3 से 8 तक के छात्रों के लिए ‘कंप्यूटेशनल थिंकिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ (CT&AI) नाम से नया कोर्स शुरू किया है। इस पहल का लक्ष्य वर्ष 2030 तक देश के छात्रों को एआई के प्रति जागरूक और सक्षम बनाना है। नए सत्र 2026-27 से कक्षा 9 में चल रहे पुराने एआई कोर्स को बंद कर दिया जाएगा। वहीं 9वीं से 12वीं तक के लिए National Council of Educational Research and Training विशेष मॉड्यूल तैयार कर रहा है। सीबीएसई के अनुसार, यह नया कोर्स छात्रों पर अतिरिक्त बोझ नहीं डालेगा। इसके लिए बनाई गई रिसोर्स बुक्स एनसीईआरटी की गणित की किताबों के साथ जुड़ी होंगी। गणित के हर अध्याय के साथ संबंधित एआई और कंप्यूटेशनल गतिविधियां कराई जाएंगी, जिससे छात्रों को अवधारणाएं बेहतर तरीके से समझ आएंगी। इस पाठ्यक्रम में रटने की बजाय समझ और सोच पर जोर दिया जाएगा। इसमें ऐसे प्रश्न और गतिविधियां शामिल होंगी, जो छात्रों की तार्किक क्षमता और समस्या समाधान कौशल को विकसित करेंगी। सीबीएसई ने छात्रों और शिक्षकों के लिए अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर हैंडबुक्स भी जारी कर दी हैं और स्कूलों को इन्हें लागू करने के निर्देश दिए हैं। शिक्षकों के लिए भी नई गाइडलाइन जारी की गई है। अब पारंपरिक पढ़ाने के बजाय ‘फैसिलिटेटर’ की भूमिका पर जोर दिया जाएगा। शिक्षकों को सलाह दी गई है कि वे छात्रों को सीधे जवाब देने के बजाय उन्हें खुद सोचने और सीखने के लिए प्रेरित करें। कक्षा 9 से 12 के लिए तैयार किए जा रहे एनसीईआरटी मॉड्यूल 2026-27 सत्र से इंटरनल असेसमेंट का हिस्सा होंगे। हालांकि वर्तमान में 10वीं के छात्र पुराने पाठ्यक्रम के अनुसार ही अपनी पढ़ाई पूरी करेंगे। इस नए कोर्स में साइबर सिक्योरिटी, बेसिक नेटवर्किंग, डेटा आधारित निर्णय, और एआई के नैतिक पहलुओं जैसे विषय शामिल होंगे। साथ ही पढ़ाई को रोचक बनाने के लिए गेमिंग, वर्चुअल रियलिटी और ऑगमेंटेड रियलिटी जैसी तकनीकों का भी उपयोग किया जाएगा।

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अबूझमाड़ में बदलाव की शुरुआत: नक्सल प्रभाव खत्म होने के बाद 239 गांवों में पहली बार पहुंचा प्रशासन

बस्तर का Abujhmad क्षेत्र, जो कभी नक्सल गतिविधियों का गढ़ माना जाता था, अब धीरे-धीरे मुख्यधारा से जुड़ रहा है। केंद्र सरकार द्वारा इस क्षेत्र को नक्सल प्रभाव से मुक्त घोषित किए जाने के बाद यहां प्रशासनिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। पहली बार यहां के 239 गांवों में सरकारी सर्वे शुरू किया गया है। इस सर्वे के जरिए गांवों में रहने वाले परिवारों की संख्या, सदस्यों का विवरण, खेती करने वाले लोगों की जानकारी और जमीन के उपयोग का आकलन किया जा रहा है। राजस्व और वन विभाग की संयुक्त टीम इस काम में जुटी हुई है। सर्वे को आधुनिक तकनीक से जोड़ते हुए Indian Institute of Technology Roorkee की मदद से पूरे क्षेत्र का सैटेलाइट मैप तैयार किया जा रहा है। सैटेलाइट इमेज के आधार पर गांवों और आबादी का प्रारंभिक नक्शा बनाया जा रहा है, जिसके बाद फील्ड टीम मौके पर जाकर हर घर और जमीन का सत्यापन करेगी। सर्वे पूरा होने के बाद दावा-आपत्ति की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इसके आधार पर जो परिवार जहां निवास कर रहा है और जिस जमीन पर खेती कर रहा है, उसे उसी के अनुसार मालिकाना हक प्रदान किया जाएगा। इससे लंबे समय से बिना अधिकार के रह रहे वनवासियों को कानूनी पहचान और जमीन का अधिकार मिल सकेगा। नारायणपुर जिले का ओरछा ब्लॉक, जिसे अबूझमाड़ के नाम से जाना जाता है, दशकों तक प्रशासन की पहुंच से बाहर रहा। आजादी के बाद भी यहां कई गांव सड़क और संचार सुविधाओं से कटे हुए थे। जैसे ही सड़क निर्माण शुरू हुआ, नक्सली गतिविधियां बढ़ गईं, जिससे यह इलाका उनका सुरक्षित ठिकाना बन गया। इसी वजह से यहां गांवों, आबादी और जमीन का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड तैयार नहीं हो पाया था। अब सुरक्षा बलों की मौजूदगी और सड़क विस्तार के बाद हालात बदल रहे हैं और प्रशासन पहली बार गांवों तक पहुंच पा रहा है। करीब 3 लाख हेक्टेयर में फैले इस घने जंगल क्षेत्र में वन विभाग की गतिविधियां भी दोबारा शुरू की जा रही हैं। जिन इलाकों में वर्षों पहले नक्सलियों द्वारा वन विभाग के भवनों को नष्ट कर दिया गया था, वहां फिर से काम शुरू हो रहा है। प्रशासन के अनुसार, सर्वे के साथ-साथ ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण भी किया जाएगा। नक्शा और खसरा तैयार होने के बाद जमीन के अधिकार देने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। यह पहल न केवल विकास को गति देगी, बल्कि क्षेत्र के लोगों को स्थायी पहचान और अधिकार भी दिलाएगी।

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साय कैबिनेट बैठक आज: बस्तर रोडमैप, इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेश पर बड़े फैसलों की तैयारी

मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai की अध्यक्षता में आज 15 अप्रैल को मंत्रिपरिषद की बैठक आयोजित होने जा रही है। यह बैठक मंत्रालय स्थित महानदी भवन के मंत्रिपरिषद कक्ष में होगी, जहां विभिन्न विभागों से आए प्रस्तावों और योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। जरूरत के अनुसार नई नीतियों और प्रस्तावों को मंजूरी भी दी जा सकती है। बैठक में बस्तर क्षेत्र के विकास को लेकर विशेष फोकस रहेगा। “बस्तर रोडमैप 2.0” के तहत सरकार नई कार्ययोजना पर विचार करेगी, जिसमें पुराने प्रोजेक्ट्स की समीक्षा के साथ-साथ नए विकास प्रस्ताव भी शामिल हो सकते हैं। इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में बस्तर में सड़क, कनेक्टिविटी और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा। खासतौर पर दूरस्थ इलाकों को जिला मुख्यालय और शहरी क्षेत्रों से जोड़ने के लिए नई सड़कों और पुलों के निर्माण पर चर्चा संभव है। साथ ही बिजली, पानी और संचार सेवाओं को बेहतर बनाने से जुड़े प्रोजेक्ट भी एजेंडे में शामिल रहेंगे। रोजगार बढ़ाने के लिए सरकार स्थानीय युवाओं के लिए स्किल डेवलपमेंट, छोटे उद्योगों और सरकारी योजनाओं के माध्यम से अवसर बढ़ाने पर विचार कर सकती है। लक्ष्य यह रहेगा कि बस्तर के युवाओं को अपने क्षेत्र में ही रोजगार मिल सके। इसके अलावा, औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए माइनिंग, वन उत्पाद और एग्रो-बेस्ड इंडस्ट्री से जुड़े नए प्रोजेक्ट्स पर चर्चा होने की संभावना है। निवेशकों को आकर्षित करने के लिए विशेष प्रोत्साहन और नई नीतियों पर भी विचार किया जा सकता है। कैबिनेट बैठक में निवेश और औद्योगिक विकास से जुड़े अहम प्रस्तावों पर निर्णय लिए जा सकते हैं। सरकार सिंगल विंडो सिस्टम को और प्रभावी बनाने, जमीन आवंटन प्रक्रिया को सरल करने और उद्योग स्थापित करने की प्रक्रिया को तेज करने जैसे कदम उठा सकती है। बैठक में विभिन्न विभागों की योजनाओं की प्रगति रिपोर्ट भी पेश की जाएगी, जिसके आधार पर योजनाओं की जमीनी स्थिति की समीक्षा की जाएगी और आवश्यक सुधार के निर्देश दिए जा सकते हैं। कैबिनेट बैठक के बाद मुख्यमंत्री का कार्यक्रम भी तय है। दोपहर 1:30 बजे वे 515 पैक्स (नवीन सोसायटी) का वर्चुअल शुभारंभ करेंगे। इसके बाद वे करीब 3:15 बजे रायपुर के डीडीयू ऑडिटोरियम में आयोजित “नारी शक्ति वंदन” कार्यक्रम में शामिल होंगे।

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सक्ती वेदांता प्लांट हादसा: अपनों की तलाश में रातभर भटके परिजन, 22 घंटे बाद जारी हुई मृतकों की सूची

सक्ती स्थित वेदांता प्लांट में हुए भीषण बॉयलर विस्फोट के बाद हालात बेहद दर्दनाक रहे। हादसे में 17 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई घायल अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती हैं। घटना के बाद सबसे ज्यादा परेशानी उन परिजनों को झेलनी पड़ी, जो अपने अपनों की तलाश में पूरी रात अस्पतालों और सड़कों पर भटकते रहे। जांजगीर-चांपा जिले के बलौदा ब्लॉक के हरदी विशाल गांव निवासी सनी कुमार अनंत अपने भाई की तलाश में शाम से लेकर देर रात तक कई अस्पतालों के चक्कर लगाते रहे। रात के करीब साढ़े तीन बजे तक उन्होंने 5 से 6 अस्पतालों में खोजबीन की, यहां तक कि ICU तक जाकर देखा, लेकिन कहीं भी उनके भाई का पता नहीं चला। सनी के भाई रामेश्वर महिलांगे वेदांता प्लांट में बॉयलर ऑपरेटर के पद पर कार्यरत थे। उनकी उम्र करीब 28-29 साल थी और वे शादीशुदा थे, उनके एक छोटा बच्चा भी है। हादसे के दिन उनका फोन बंद आ रहा था, जिसके बाद उनके साथियों से घटना की जानकारी मिली। परिजन प्लांट भी पहुंचे, लेकिन वहां गेट बंद मिला और प्रबंधन की ओर से कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। बाहर भीड़ जमा थी, लेकिन किसी अधिकारी ने सामने आकर स्थिति स्पष्ट नहीं की। करीब 12 घंटे तक भूखे-प्यासे परिजन अस्पतालों में अपने परिजनों को ढूंढते रहे। जिंदल अस्पताल में अधिक घायलों के होने की सूचना मिली, लेकिन वहां भी शुरू में अंदर जाने की अनुमति नहीं दी गई। काफी अनुरोध के बाद ICU में जाकर देखने की इजाजत मिली, लेकिन वहां भी सनी को अपने भाई का कोई सुराग नहीं मिला। अस्पताल में भर्ती ज्यादातर लोग गंभीर रूप से झुलसे हुए थे, जिनकी पहचान करना भी मुश्किल था। आखिरकार बुधवार सुबह सनी को उनके भाई की मौत की सूचना मिली, जबकि मृतकों की आधिकारिक सूची दोपहर में जारी की गई। इस दौरान एक और समस्या सामने आई, जब प्लांट प्रबंधन की ओर से ठहरने की व्यवस्था के नाम पर होटल भेजे गए परिजनों से वहां पैसे मांगे गए। काफी बहस के बाद ही उन्हें कमरा मिल पाया। हादसे के बाद प्रशासन और प्रबंधन की लापरवाही भी उजागर हुई। मृतकों की पहचान और सूची जारी करने में करीब 22 घंटे का समय लगा, जिससे परिजन लगातार परेशान होते रहे। इतना ही नहीं, रात करीब 12 बजे तक प्लांट परिसर में एंबुलेंस में शव रखे होने की बात भी सामने आई। आशंका जताई गई कि बाहर मौजूद भीड़ के उग्र होने के डर से शवों को तुरंत बाहर नहीं लाया गया। बाद में भीड़ कम होने पर उन्हें पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया। यह हादसा न केवल औद्योगिक सुरक्षा पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि आपदा प्रबंधन और सूचना व्यवस्था की गंभीर कमियों को भी उजागर करता है।

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रायगढ़ में 35 हाथियों का महादल: 7 शावकों समेत जंगल से गांव तक बढ़ा मूवमेंट, अलर्ट जारी

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में हाथियों की गतिविधि तेजी से बढ़ रही है। धरमजयगढ़ वन मंडल के छाल रेंज में 35 हाथियों का बड़ा दल देखा गया है, जिसमें 7 शावक भी शामिल हैं। इस दल का वीडियो सामने आने के बाद वन विभाग और ग्रामीणों में सतर्कता बढ़ा दी गई है। जानकारी के अनुसार, सोमवार शाम छाल वन परिक्षेत्र के बोजिया परिसर स्थित पेलमबांध के पास इस दल को देखा गया। हाथियों के इस समूह में 3 नर, 25 मादा और 7 बच्चे शामिल हैं। यह दल जंगल के साथ-साथ गांवों के आसपास भी घूमता नजर आया, जिसका वीडियो ग्रामीणों ने बनाकर सोशल मीडिया पर साझा किया। हाथियों की मौजूदगी को देखते हुए हाथी मित्र दल को अलर्ट पर रखा गया है। बोजिया से औरानारा मार्ग, गड़ाईनबहरी और सिंघीझाप क्षेत्र में मुनादी कर ग्रामीणों को सतर्क रहने की चेतावनी दी जा रही है। बताया जा रहा है कि यह दल घरघोड़ा क्षेत्र से होते हुए छाल रेंज में पहुंचा है। एक वीडियो में देखा गया कि सड़क पर आए हाथियों को हाथी मित्र दल के सदस्य ने आवाज देकर सुरक्षित जंगल की ओर लौटा दिया। इससे पहले भी इस तरह के प्रयासों से हाथियों और लोगों के बीच टकराव टाला गया है। वन विभाग के अनुसार, रायगढ़ जिले में इस समय कुल 123 हाथियों की मौजूदगी दर्ज की गई है। इनमें से छाल रेंज में 59, धरमजयगढ़ रेंज में 48 और लैलूंगा रेंज में 13 हाथी हैं। कुल संख्या में 36 नर, 62 मादा और 26 शावक शामिल हैं। वन विभाग द्वारा ड्रोन और जमीनी टीमों की मदद से लगातार निगरानी की जा रही है। छाल रेंज अधिकारी राजेश चौहान ने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों में सतर्कता बरती जा रही है और ग्रामीणों को सावधानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।

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बिलासपुर निगम का 1300 करोड़ बजट, लेकिन जमीनी विकास अधूरा: 8 साल से घोषणाएं दोहराई जा रहीं

बिलासपुर नगर निगम का बजट पिछले आठ वर्षों में लगातार बढ़ते हुए 1300 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है, लेकिन इसके बावजूद शहर में कई अहम विकास कार्य अब तक अधूरे हैं। वर्ष 2018-19 में निगम का बजट 776 करोड़ था, जो धीरे-धीरे बढ़कर वर्तमान स्तर तक पहुंच गया, मगर योजनाएं अब भी फाइलों में अटकी हुई हैं। हर साल नए वादे और घोषणाएं की जाती हैं, लेकिन पुराने प्रोजेक्ट पूरे नहीं हो पाते। कई योजनाएं ऐसी हैं, जिन्हें हर बजट में दोहराया जाता है, फिर भी उनका काम शुरू नहीं हो पाता या अधूरा रह जाता है। नगरोत्थान योजना के तहत वर्ष 2025-26 में 60 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे, लेकिन अधिकांश कार्य अब तक शुरू नहीं हो सके हैं। जिन 17 ग्राम पंचायतों को निगम में शामिल किया गया, वहां आज भी बिजली, पानी, सड़क और नाली जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी बनी हुई है। पिछले वर्षों में घोषित कई प्रमुख प्रोजेक्ट जैसे अशोक नगर से बिरकोना रोड चौड़ीकरण, अरपा इंदिरा सेतु से राम सेतु तक अटल पथ निर्माण, मंगला चौक से आजाद चौक तक सड़क निर्माण और बाहरी क्षेत्रों के विकास कार्य अब तक अधूरे हैं। अमेरी में 50 एकड़ जमीन पर स्टेडियम और स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स की योजना फंड की कमी के कारण आगे नहीं बढ़ पाई। महिलाओं के लिए 750 सीटों वाला प्रशिक्षण केंद्र भी अभी तक शुरू नहीं हो सका। इसके अलावा 2 करोड़ रुपये की लागत से बने अर्बन कॉटेज और सर्विस इंडस्ट्रीज पार्क का भी सही उपयोग नहीं हो पाया है। इस बार के बजट में शिक्षा और डिजिटल सुविधाओं पर विशेष जोर दिया गया है। छात्रों के लिए फ्री वाई-फाई सुविधा शुरू करने और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में मदद देने की योजना बनाई गई है। छात्राओं के लिए मुफ्त सेनेटरी पैड उपलब्ध कराने का प्रस्ताव भी रखा गया है, जिससे स्वास्थ्य और स्वच्छता को बढ़ावा मिले। खेल सुविधाओं को मजबूत करने के लिए मंगला क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम निर्माण हेतु जमीन देने पर सहमति बनी है। महिलाओं की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए हर जोन में पिंक टॉयलेट और पिंक गार्डन विकसित करने की योजना शामिल की गई है। साथ ही शहर को आधुनिक बनाने के लिए स्मार्ट वेंडिंग जोन और फूड स्ट्रीट विकसित करने का प्रस्ताव भी रखा गया है, जिससे छोटे व्यापारियों और युवाओं को नए अवसर मिल सकें। बजट को लेकर पक्ष और विपक्ष के बीच भी मतभेद सामने आए हैं। सभापति विनोद सोनी का कहना है कि इस बजट से शहर के विकास को गति मिलेगी और अधूरे कार्य पूरे किए जाएंगे। वहीं विपक्ष की पार्षद शहजादी कुरैशी ने आरोप लगाया कि बजट में केवल राशि बढ़ाकर पुराने प्रस्तावों को दोबारा पेश किया गया है, लेकिन जमीन पर कोई खास काम नहीं दिख रहा। मेयर पूजा विधानी का कहना है कि बजट का उद्देश्य शहरवासियों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना है। सड़कों का डामरीकरण, डिवाइडर का सौंदर्यीकरण, पिंक टॉयलेट और पिंक गार्डन जैसी योजनाएं इसी दिशा में हैं। साथ ही निगम में शामिल गांवों के विकास के लिए प्रत्येक को 5-5 करोड़ रुपये देने का प्रावधान किया गया है, ताकि जलभराव, नाली और अन्य समस्याओं का समाधान किया जा सके।

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