State

वीजा खत्म, फिर भी सालों से रायपुर में रह रहीं थीं विदेशी युवतियां: पुलिस हिरासत में, IB कर रही पूछताछ

रायपुर। राजधानी रायपुर में पुलिस ने दो विदेशी महिला नागरिकों को हिरासत में लिया है। दोनों महिलाएं उज़्बेकिस्तान की रहने वाली बताई जा रही हैं और वीजा की अवधि समाप्त होने के बावजूद लंबे समय से रायपुर में रह रही थीं। मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर तेलीबांधा थाना पुलिस ने यह कार्रवाई की। फिलहाल पुलिस के साथ इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की टीम दोनों महिलाओं से पूछताछ कर रही है। उनके पास मौजूद दस्तावेजों की गहन जांच की जा रही है। मामला तेलीबांधा थाना क्षेत्र का है। IPS–CSP स्तर के अफसर कर रहे जांच पुलिस अधिकारियों के अनुसार, तेलीबांधा इलाके में दो विदेशी महिलाओं के लंबे समय से रहने की जानकारी मिली थी, लेकिन उनके वीजा और वैध निवास को लेकर संदेह बना हुआ था। सूचना की पुष्टि के बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची और दोनों महिलाओं को हिरासत में लिया। प्रारंभिक पूछताछ में महिलाओं ने खुद को उज़्बेकिस्तान का नागरिक बताया है। वे किस उद्देश्य से भारत आई थीं, किस श्रेणी का वीजा था और वह वर्तमान में वैध है या नहीं—इन सभी बिंदुओं की जांच की जा रही है। पासपोर्ट-वीजा जब्त, FRRO से संपर्क पुलिस ने दोनों महिलाओं के पासपोर्ट, वीजा और पहचान से जुड़े अन्य दस्तावेज जब्त कर लिए हैं। दस्तावेजों की वैधता की पुष्टि के लिए विदेशी पंजीकरण कार्यालय (FRRO) और संबंधित एजेंसियों से संपर्क किया गया है। जरूरत पड़ने पर इमिग्रेशन विभाग को भी पूरे मामले की जानकारी दी जाएगी। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद यदि वीजा नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो विदेशी नागरिक अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पहले भी रायपुर में सामने आ चुका है ऐसा मामला गौरतलब है कि करीब 11 महीने पहले भी रायपुर में एक विदेशी युवती की गिरफ्तारी हुई थी। तब वह अपने साथी के साथ शराब के नशे में तेज रफ्तार कार चला रही थी और VIP रोड पर स्कूटी सवार युवकों को टक्कर मार दी थी। इस हादसे में तीन युवक गंभीर रूप से घायल हुए थे, जिनमें एक की मौत हो गई थी। उस मामले की जांच के दौरान पुलिस को बड़े सेक्स रैकेट नेटवर्क के संकेत भी मिले थे। घटना 6 फरवरी 2025 की रात की थी, जब उज़्बेकिस्तान के ताशकंद की रहने वाली युवती भारत सरकार लिखी कार चला रही थी और हादसे के बाद मौके पर हंगामा भी किया था।

वीजा खत्म, फिर भी सालों से रायपुर में रह रहीं थीं विदेशी युवतियां: पुलिस हिरासत में, IB कर रही पूछताछ Read Post »

Chhattisgarh, Crime, International, Raipur, State, Top News

दुर्ग में गंदे पानी से पीलिया फैला: उतई नगर पंचायत के 2 वार्ड प्रभावित, हैंडपंप बंद कर भेजे गए पानी के सैंपल

दुर्ग।छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले की नगर पंचायत उतई में दूषित पानी पीने से पीलिया (जॉन्डिस) फैलने का मामला सामने आया है। वार्ड क्रमांक 14 और 15 में बीते करीब एक महीने से लगातार मरीज मिल रहे हैं, जिससे पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि नालियों में जमा गंदे पानी की वजह से घरों और सार्वजनिक हैंडपंपों का जल स्रोत दूषित हो गया, जिसके बाद बदबूदार पानी की शिकायतें मिलने लगीं। शुरुआत में कुछ परिवारों ने इसे व्यक्तिगत समस्या समझा, लेकिन धीरे-धीरे पूरे मोहल्ले में एक जैसे लक्षण नजर आने लगे। हैंडपंप और बोरिंग का पानी बना बीमारी की वजह सूचना मिलने पर स्वास्थ्य विभाग की टीम मौके पर पहुंची और करीब 20 मरीजों के घरों में जाकर जांच की। जांच के दौरान पाया गया किअधिकांश परिवार हैंडपंप या बोरिंग के पानी का उपयोग कर रहे थे। एहतियातन वार्ड में मौजूद एक सार्वजनिक हैंडपंप को तुरंत बंद कर दिया गया है। साथ ही सभी संदिग्ध जलस्रोतों से पानी के नमूने लेकर लैब भेजे गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। एक ही वार्ड में मिले 12 मरीज जानकारी के अनुसार, वहीं वार्ड 14 में पहले 12 मरीज सामने आए थे, लेकिन स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि सभी मरीज अब स्वस्थ हैं। यहां एक बोरिंग को संदिग्ध मानते हुए तुरंत बंद कर दिया गया। बीएमओ और डॉक्टरों की टीम ने किया घर-घर निरीक्षण बीएमओ डॉ. देवेंद्र बेलचंदन ने बताया किडॉक्टरों की टीम ने प्रभावित वार्डों के घरों में जाकर स्थिति का आकलन किया है।हालांकि हाल ही में दो घरों में हल्के लक्षण दिखे थे, लेकिन उनकी हालत फिलहाल सामान्य है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से किया गया है। लोगों को केवल उबला हुआ पानी पीने की सख्त सलाह दी गई है। हैंडपंप बंद, टैंकर से हो रही पानी की सप्लाई सुरक्षा के लिहाज से प्रभावित इलाकों में इसके साथ ही का काम भी तेज कर दिया गया है। नगर पंचायत के मुख्य नगर पालिका अधिकारी राजेंद्र नायक ने बताया कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरती जाएगी। पानी के सैंपल जांच में, स्थिति नियंत्रण में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया किप्रभावित घरों के सभी पानी के सैंपल जांच के लिए भेज दिए गए हैं।फिलहाल हालात नियंत्रण में हैं, लेकिन वार्ड 14 और 15 में निगरानी लगातार जारी है।

दुर्ग में गंदे पानी से पीलिया फैला: उतई नगर पंचायत के 2 वार्ड प्रभावित, हैंडपंप बंद कर भेजे गए पानी के सैंपल Read Post »

Bhilai / Durg, Chhattisgarh, Health, State, Top News

दावरा यूनिवर्सिटी पर गंभीर आरोप, छात्र ने लगाया भविष्य बर्बाद करने का आरोप

रायपुर। छत्तीसगढ़ की दावरा यूनिवर्सिटी एक बार फिर विवादों में घिरती नजर आ रही है। यूनिवर्सिटी में फार्मेसी कोर्स में एडमिशन लेने वाले छात्र सागर गुप्ता ने संस्थान पर गंभीर आरोप लगाए हैं। छात्र का कहना है कि यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने उन्हें पीसीआई (Pharmacy Council of India) की मान्यता होने का भरोसा देकर एडमिशन कराया, लेकिन बाद में यह सामने आया कि कोर्स को पीसीआई की स्वीकृति ही नहीं मिली थी। छात्र सागर गुप्ता ने बताया कि उन्होंने एडमिशन से पहले कई बार यूनिवर्सिटी से PCI अप्रूवल को लेकर स्पष्ट सवाल किए थे। हर बार उन्हें यही बताया गया कि कोर्स पूरी तरह से अप्रूव्ड है। इसके बाद उन्होंने तय फीस जमा कर फार्मेसी कोर्स में एडमिशन ले लिया। 5 दिसंबर को किया गया बड़ा खुलासा सागर का आरोप है कि एडमिशन के काफी समय बाद, 5 दिसंबर को यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने अचानक यह जानकारी दी कि पीसीआई अप्रूवल रिजेक्ट हो चुका है, जबकि इससे पहले दो बार इंस्पेक्शन होने के बावजूद छात्रों को आश्वासन दिया जाता रहा कि सब कुछ ठीक है। फ्रॉड जैसे विकल्प दिए गए छात्र का कहना है कि जब अप्रूवल न होने की बात सामने आई तो यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार द्वारा तीन विकल्प दिए गए, जो पूरी तरह से भ्रामक और धोखेबाज़ी से भरे थे। इन विकल्पों में न तो पढ़ाई की उचित व्यवस्था थी और न ही भविष्य की कोई गारंटी। शिक्षकों और पढ़ाई की भारी कमी सागर ने बताया कि यूनिवर्सिटी में न तो ठीक से बैठने की व्यवस्था थी, न नियमित क्लासेज़। कई दिनों तक शिक्षक ही नहीं आते थे। 17 अगस्त से 3 अक्टूबर तक छात्र लगातार शिक्षकों और प्रशासन से संघर्ष करते रहे। दो महीने बाद एक शिक्षक आईं, लेकिन वे भी अनुभवहीन बताई जा रही हैं। कंपनसेशन से भी इनकार जब छात्रों ने अपने बर्बाद हुए समय और भविष्य को देखते हुए यूनिवर्सिटी से कंपनसेशन की मांग की, तो प्रबंधन ने इस पर भी सहमति नहीं जताई। छात्रों का आरोप है कि यूनिवर्सिटी को बच्चों के भविष्य से कोई लेना-देना नहीं है। छात्र का आरोप सागर गुप्ता का कहना है, “हमने पूरी जानकारी लेकर एडमिशन लिया था। यूनिवर्सिटी ने झूठ बोला। हमारा कीमती समय, पैसा और भविष्य बर्बाद कर दिया गया।” ⚠️ प्रशासन से कार्रवाई की मांग इस पूरे मामले के सामने आने के बाद सवाल उठ रहे हैं कि बिना पीसीआई अप्रूवल के छात्रों को एडमिशन कैसे दिया गया। छात्रों और उनके परिजनों ने शिक्षा विभाग और प्रशासन से निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की है। Note- इस पूरे मामले में लगाए गए सभी आरोप छात्र सागर गुप्ता के हैं। खबर लिखे जाने तक दावरा यूनिवर्सिटी प्रबंधन से इस विषय पर कोई लिखित या मौखिक जवाब प्राप्त नहीं हो सका है।

दावरा यूनिवर्सिटी पर गंभीर आरोप, छात्र ने लगाया भविष्य बर्बाद करने का आरोप Read Post »

Chhattisgarh, Education, Raipur, State, Top News

छत्तीसगढ़ में कड़ाके की ठंड का प्रकोप बढ़ता जा रहा है।

राजधानी रायपुर समेत कई जिलों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री से नीचे पहुंच गया है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि अगले तीन दिनों तक राज्य के उत्तरी और मध्य हिस्सों के आठ जिलों में शीतलहर का असर बना रहेगा। राजधानी रायपुर में रात का न्यूनतम तापमान 6.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया है। वहीं प्रदेश के सबसे ठंडे इलाकों में शामिल मैनपाट में तापमान 1.8 डिग्री तक गिर गया। अंबिकापुर में पारा 3.3 डिग्री, पेंड्रा में 7.6 डिग्री, दुर्ग और राजनांदगांव में 8 डिग्री तथा जगदलपुर में 8.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। पिछले 24 घंटों में प्रदेश का अधिकतम तापमान 29.1 डिग्री (जगदलपुर) और न्यूनतम तापमान 3.3 डिग्री (अंबिकापुर) रहा। ठंड के बढ़ते असर को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने बुजुर्गों, छोटे बच्चों और गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है। ❄️ ठंड के कारण स्कूल बंद कड़ाके की ठंड को देखते हुए सरगुजा, सूरजपुर, बलरामपुर, कोरिया और गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिलों में प्राइमरी स्कूलों को 10 जनवरी तक बंद कर दिया गया है। मिडिल, हाई और हायर सेकेंडरी स्कूल खुले रहेंगे, लेकिन दो पालियों में चलने वाले स्कूलों का समय बदल दिया गया है। अब पहली पाली सुबह 9:30 से 12:30 बजे तक और दूसरी पाली दोपहर 12:30 से शाम 4 बजे तक संचालित होगी। ⚠️ ठंड से जान का खतरा अंबिकापुर के श्रीगढ़ इलाके में नए साल की रात एक बुजुर्ग की ठंड से मौत हो गई। कम कपड़ों में खुले में सोने के कारण वे हाइपोथर्मिया की चपेट में आ गए। यह अंबिकापुर में ठंड से मौत का दूसरा मामला है। इससे पहले 11 दिसंबर को बस स्टैंड में सो रहे एक व्यक्ति की भी मौत हो चुकी है। 🏥 बच्चों की सेहत पर असर तेज ठंड का असर बच्चों पर भी साफ दिख रहा है। रायपुर के सरकारी और निजी अस्पतालों में पिछले एक महीने में हाइपोथर्मिया के 400 से ज्यादा मामले सामने आए हैं। डॉक्टरों के मुताबिक नवजात और छोटे बच्चों का शरीर जल्दी ठंडा हो जाता है, जिससे उन्हें NICU और SNCU तक में भर्ती कराना पड़ रहा है। 🤒 अस्पतालों की OPD में बढ़ी भीड़ ठंड के चलते वायरल फीवर, सर्दी-खांसी और सांस से जुड़ी बीमारियों के मरीज बढ़ गए हैं। अंबेडकर अस्पताल की ओपीडी में रोजाना 2000 से अधिक मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं, जिनमें मेडिसिन, पीडियाट्रिक और चेस्ट विभाग में सबसे ज्यादा भीड़ है। 🧊 क्या है हाइपोथर्मिया? हाइपोथर्मिया एक गंभीर और जानलेवा स्थिति है, जिसमें शरीर का तापमान सामान्य 37 डिग्री सेल्सियस से नीचे चला जाता है। डॉक्टरों के अनुसार ठंडी हवा या पानी के संपर्क में आने से शरीर तेजी से गर्मी खो देता है। अगर समय पर इलाज न मिले तो यह स्थिति घातक साबित हो सकती है। 🔥 नगर निगम ने जलवाए अलाव शीतलहर के बढ़ते असर को देखते हुए रायपुर नगर निगम ने शहर के 12 से अधिक स्थानों पर अलाव जलाने की व्यवस्था की है। मेयर मीनल चौबे और निगम कमिश्नर विश्वदीप के निर्देश पर अधिकारियों को रात में फील्ड में रहकर व्यवस्थाओं की निगरानी करने को कहा गया है। 🦟 बदलते मौसम में मलेरिया का खतरा मौसम विशेषज्ञों के अनुसार दिन में अधिक और रात में कम तापमान मलेरिया फैलाने वाले मच्छरों के लिए अनुकूल स्थिति बनाता है। अगले कुछ दिनों में ग्रामीण और जंगल क्षेत्रों में मलेरिया का खतरा बढ़ सकता है। स्वास्थ्य विभाग ने मच्छरदानी के उपयोग, पानी जमा न होने देने और समय पर जांच कराने की सलाह दी है। 🛡️ ठंड से बचाव के उपाय डॉक्टरों का कहना है कि ठंड के मौसम में भाप लेना, नमक-पानी से गरारे करना, विटामिन-C युक्त आहार, अदरक-तुलसी की चाय और गर्म कपड़ों का इस्तेमाल बेहद जरूरी है। इससे इम्यूनिटी मजबूत होती है और सर्दी-जुकाम व वायरल संक्रमण से बचाव होता है।

छत्तीसगढ़ में कड़ाके की ठंड का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। Read Post »

Bhilai / Durg, Bijapur, Bilaspur, Chhattisgarh, Kanker, Raigarh, Raipur, State, Sukma, Top News, Wealth

रायपुर हिट एंड रन मामला: रेणुका सिंह के बेटे की कार से बाइक सवार को टक्कर, गिरफ्तारी के बाद मिली जमानत

रायपुर हिट एंड रन मामला: रेणुका सिंह के बेटे की कार से बाइक सवार को टक्कर, गिरफ्तारी के बाद मिली जमानत छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में हिट एंड रन का एक हाई-प्रोफाइल मामला सामने आया है। बीजेपी विधायक और पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री रेणुका सिंह के बेटे बलवंत सिंह पर बाइक सवार युवक को कार से टक्कर मारकर गंभीर रूप से घायल करने का आरोप है। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया, लेकिन थाने से ही उसे जमानत मिल गई। हादसे में घायल युवक की हालत नाजुक बताई जा रही है। यह घटना तेलीबांधा थाना क्षेत्र के अग्रसेन धाम चौक के पास 5 जनवरी की देर रात करीब 1:15 बजे हुई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, तेज रफ्तार कार ने बाइक सवार को जोरदार टक्कर मारी, जिसके बाद आरोपी मौके से फरार हो गया। घायल युवक की हालत गंभीर हादसे में घायल युवक की पहचान त्रिभुवन सिंह ठाकुर (34) के रूप में हुई है, जो डीजे और इवेंट से जुड़ा काम करता है। वह काम खत्म कर सेरीखेड़ी से बाइक से तेलीबांधा लौट रहा था। टक्कर इतनी भीषण थी कि वह सड़क पर दूर जा गिरा और गंभीर रूप से घायल हो गया। मौके पर मौजूद लोगों ने तत्काल पुलिस को सूचना दी और घायल को एम्बुलेंस के जरिए अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसका इलाज जारी है। कार छोड़कर फरार हुआ आरोपी पुलिस जब घटनास्थल पर पहुंची, तो वहां दुर्घटनाग्रस्त कार मौजूद थी, लेकिन चालक फरार था। जांच में सामने आया कि कार (CG 04 PC 0853) बलवंत सिंह चला रहा था। वाहन मालिक जयप्रकाश उपाध्याय, निवासी रामानुज नगर, कुशालपुर (सरगुजा) के नाम पर कार रजिस्टर्ड है, जिसने नोटिस के जवाब में पुष्टि की कि घटना के समय वाहन बलवंत सिंह के पास था। पीड़ित के भाई राज नारायण सिंह की शिकायत पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 281 और 125(a) के तहत मामला दर्ज कर वाहन को जब्त कर लिया। गिरफ्तारी के बाद तुरंत मिली जमानत पुलिस ने 6 जनवरी की रात आरोपी बलवंत सिंह (33) को गिरफ्तार किया। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह जोरा मॉल से तेलीबांधा की ओर लौट रहा था, तभी अचानक बाइक सामने आने से कार का संतुलन बिगड़ गया और हादसा हो गया। गिरफ्तारी के कुछ समय बाद ही आरोपी को थाने से जमानत दे दी गई। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है। सड़क हादसों के बढ़ते आंकड़े चिंता का विषय छत्तीसगढ़ में सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली मौतों की संख्या लगातार बढ़ रही है। सड़क सुरक्षा से जुड़े सरकारी आंकड़ों के अनुसार— राष्ट्रीय स्तर पर भी स्थिति चिंताजनक है। 2023 में सबसे ज्यादा सड़क दुर्घटनाएं तमिलनाडु में दर्ज की गईं, जबकि सबसे अधिक मौतें उत्तर प्रदेश में हुईं। सड़क हादसों के प्रमुख कारण हादसों से बचाव के उपाय

रायपुर हिट एंड रन मामला: रेणुका सिंह के बेटे की कार से बाइक सवार को टक्कर, गिरफ्तारी के बाद मिली जमानत Read Post »

Accident, Chhattisgarh, Crime, Political, Raipur, State, Top News

बिलासपुर के मोपका सब स्टेशन में भीषण आग, आधे शहर की बिजली आपूर्ति ठप, मची अफरा-तफरी

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर शहर में सोमवार को उस वक्त हड़कंप मच गया, जब मोपका क्षेत्र स्थित शहर के सबसे बड़े और पुराने बिजली सब स्टेशन में अचानक भीषण आग लग गई। आग इतनी तेज थी कि उसकी लपटें दूर-दूर तक दिखाई दीं। घटना के चलते शहर के बड़े हिस्से की बिजली सप्लाई बंद कर दी गई, जिससे आधे शहर में ब्लैकआउट की स्थिति बन गई। आग की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग बुझाने का प्रयास शुरू किया गया। बिजली विभाग के अधिकारी और प्रशासनिक अमला भी मौके पर मौजूद है। राहत की बात यह रही कि अब तक किसी तरह की जनहानि की सूचना नहीं मिली है। आग से प्रभावित हुई बिजली आपूर्ति प्राप्त जानकारी के अनुसार, करीब 25 साल पुराना यह सब स्टेशन 480 मेगावॉट क्षमता का है। इसमें से लगभग 320 मेगावॉट बिजली बिलासपुर शहर के बड़े हिस्से को सप्लाई की जाती है। आग लगते ही सुरक्षा के मद्देनजर बिजली आपूर्ति पूरी तरह बंद कर दी गई, जिससे आवासीय इलाकों, बाजारों और व्यावसायिक क्षेत्रों में अचानक अंधेरा छा गया। बिजली गुल होने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। दुकानों में काम ठप हो गया, वहीं घरों में भी अफरा-तफरी का माहौल देखा गया। शॉर्ट सर्किट से आग लगने की आशंका फिलहाल आग लगने के सटीक कारणों का पता नहीं चल पाया है। शुरुआती जांच में शॉर्ट सर्किट से आग लगने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, बिजली विभाग और प्रशासन की विस्तृत जांच के बाद ही वास्तविक कारणों की पुष्टि हो सकेगी। अधिकारियों के मुताबिक, आग पर पूरी तरह काबू पाने के बाद नुकसान का आकलन किया जाएगा और जल्द से जल्द बिजली आपूर्ति बहाल करने के प्रयास किए जाएंगे।

बिलासपुर के मोपका सब स्टेशन में भीषण आग, आधे शहर की बिजली आपूर्ति ठप, मची अफरा-तफरी Read Post »

Accident, Bilaspur, Chhattisgarh, State

रायपुर सेंट्रल जेल पहुंचे भूपेश बघेल, बोले– अगर मेरे हाथ में होता तो बेटा जेल ही नहीं जाता

छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल शुक्रवार को रायपुर सेंट्रल जेल पहुंचे, जहां उन्होंने शराब घोटाले के मामले में बंद पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा से मुलाकात की। जेल से बाहर निकलने के बाद मीडिया से चर्चा करते हुए भूपेश बघेल ने जांच एजेंसियों और भाजपा पर तीखा हमला बोला। बघेल ने आरोप लगाया कि केंद्रीय जांच एजेंसियां राजनीतिक दबाव में काम कर रही हैं। उन्होंने अपने बेटे चैतन्य बघेल की जमानत को लेकर उठ रहे सवालों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कुछ लोग यह भ्रम फैला रहे हैं कि उन्होंने अपने बेटे को जेल से छुड़वा लिया, जबकि हकीकत यह है कि उसे अदालत से जमानत मिली है। पूर्व सीएम ने कहा, “अगर मेरे हाथ में होता, तो मेरा बेटा जेल जाता ही नहीं। कोर्ट ने जांच एजेंसियों को कड़ी फटकार लगाई, तभी जाकर उसे जमानत मिली।” कवासी लखमा को लंबे समय तक जेल में रखने की कोशिश भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि कवासी लखमा को जानबूझकर लंबे समय तक जेल में रखने की साजिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सुप्रीम कोर्ट में समय पर जवाब दाखिल नहीं किया, जिससे मामले का फैसला टल गया। उन्होंने दावा किया कि यदि एजेंसी समय पर जवाब पेश करती, तो 17 दिसंबर को ही निर्णय आ सकता था। लेकिन जवाब रोका गया ताकि लखमा को जेल में रखा जा सके। भाजपा नेताओं पर निशाना साधते हुए भूपेश बघेल ने कहा कि उनके बयानों से सच्चाई सामने आ रही है। उन्होंने सवाल किया कि जब कवासी लखमा को निर्दोष बताया जा रहा है, तो फिर EOW और ED की कार्रवाई क्यों जारी है। साथ ही भाजपा नेताओं को “घड़ियाली आंसू” न बहाने की सलाह दी। कौन हैं कवासी लखमा कवासी लखमा बस्तर अंचल के प्रमुख आदिवासी नेताओं में गिने जाते हैं। वे सुकमा जिले की कोंटा विधानसभा सीट से छह बार विधायक रह चुके हैं। 2013 के दरभा घाटी नक्सली हमले में वे उन नेताओं में शामिल थे, जो जीवित बच पाए थे। 2018 में कांग्रेस सरकार बनने के बाद उन्हें आबकारी मंत्री बनाया गया था। 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस सरकार के मंत्रियों में से गिने-चुने नेता ही अपनी सीट बचा पाए, जिनमें कवासी लखमा भी शामिल रहे। क्या है छत्तीसगढ़ शराब घोटाला छत्तीसगढ़ शराब घोटाले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) कर रहा है। एजेंसी का दावा है कि करीब 3,200 करोड़ रुपये से अधिक का घोटाला हुआ है। इस मामले में एसीबी में दर्ज FIR में राजनेताओं, आबकारी विभाग के अधिकारियों और कारोबारियों के नाम शामिल हैं। ED के अनुसार, पूर्ववर्ती भूपेश सरकार के कार्यकाल में IAS अधिकारी अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के तत्कालीन एमडी एपी त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के कथित सिंडिकेट के जरिए इस घोटाले को अंजाम दिया गया।

रायपुर सेंट्रल जेल पहुंचे भूपेश बघेल, बोले– अगर मेरे हाथ में होता तो बेटा जेल ही नहीं जाता Read Post »

Bhilai / Durg, Bilaspur, Chhattisgarh, Political, Raigarh, Raipur, State

कानपुर-वाराणसी मॉडल पर रायपुर में लागू होगा पुलिस कमिश्नरी सिस्टम, एक जिले में दोहरी पुलिस व्यवस्था की तैयारी

छत्तीसगढ़ में पहली बार राजधानी रायपुर में पुलिस कमिश्नरी सिस्टम लागू होने जा रहा है। प्रस्तावित योजना के अनुसार यह व्यवस्था 23 जनवरी से प्रभावी हो सकती है। इसे लेकर गृह विभाग द्वारा विस्तृत ब्लू प्रिंट तैयार किया जा रहा है। मंत्री परिषद की बैठक के बाद सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक, नगरीय निकाय क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले 22 शहरी थानों में पुलिस कमिश्नरी सिस्टम लागू किया जाएगा। वहीं, ग्रामीण इलाकों के 15 थानों के लिए अलग से ग्रामीण पुलिस अधीक्षक (SP) की नियुक्ति की जाएगी। इस तरह एक ही जिले में दो अलग-अलग पुलिस व्यवस्थाएं लागू होंगी। यह मॉडल पहले उत्तर प्रदेश के कानपुर और वाराणसी में लागू किया गया था, लेकिन वहां इसे व्यावहारिक कठिनाइयों और समन्वय की कमी के चलते असफल माना गया। बाद में यूपी सरकार ने पूरे जिले में एक समान कमिश्नरी सिस्टम लागू कर दिया था। अब इसी मॉडल को रायपुर में लागू करने की तैयारी को लेकर प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि दोहरी पुलिस व्यवस्था से अपराध नियंत्रण, वीआईपी सुरक्षा और जांच प्रक्रिया में कई तरह की जटिलताएं सामने आ सकती हैं। शहरी-ग्रामीण विभाजन से सामने आ सकती हैं ये समस्याएं 1. वीआईपी मूवमेंट में बढ़ेगी जटिलताअगर कमिश्नरी सिस्टम केवल शहरी क्षेत्र तक सीमित रहता है, तो पुराने रायपुर से नवा रायपुर के बीच वीआईपी मूवमेंट के दौरान दो अलग-अलग कारकेड लगाने पड़ेंगे। नगर निगम सीमा तक कमिश्नरी पुलिस और उसके आगे ग्रामीण पुलिस द्वारा सुरक्षा संभालने की व्यवस्था करनी होगी। 2. प्रमुख संस्थानों की सुरक्षा बंटेगी दो हिस्सों मेंइस प्रस्तावित सिस्टम में एयरपोर्ट ग्रामीण एसपी के अधिकार क्षेत्र में रहेगा। वहीं सिविल लाइन स्थित मुख्यमंत्री निवास, राजभवन और मंत्री बंगलों की सुरक्षा पुलिस कमिश्नर के जिम्मे होगी। दूसरी ओर, नवा रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास, विधानसभा, मंत्रालय और सचिवालय की सुरक्षा ग्रामीण एसपी के अधीन रहेगी। 3. अपराध की जांच में सीमा विवादहत्या, लूट, डकैती जैसी गंभीर वारदातों में शहरी और ग्रामीण सीमा को लेकर विवाद की स्थिति बन सकती है। सीमावर्ती इलाकों में घटना होने पर जांच एजेंसी तय करने में देरी और आपसी समन्वय की समस्या उत्पन्न हो सकती है। साथ ही ट्रांसफर, पोस्टिंग और प्रशासनिक अनुमतियों के लिए शासन स्तर पर निर्भरता बढ़ेगी। क्या कहते हैं एक्सपर्ट उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी ओपी सिंह के अनुसार, कमिश्नरी सिस्टम तभी प्रभावी होता है जब पूरे जिले में एक समान व्यवस्था लागू हो। पुलिस कमिश्नर को धारा 144 लागू करने, हथियार लाइसेंस, जिला बदर और आबकारी से जुड़े अधिकार मिलने चाहिए। उनका मानना है कि आईजी या एडीजी रैंक के अधिकारियों को ही पुलिस कमिश्नर बनाया जाना चाहिए, ताकि अनुभव के आधार पर बेहतर निर्णय लिए जा सकें। एक शहर, दो पुलिसिंग पर सवाल स्थानीय विशेषज्ञों और पत्रकारों का कहना है कि एक ही शहर में दो तरह की पुलिसिंग व्यवस्था प्रशासनिक भ्रम और जवाबदेही का संकट पैदा कर सकती है। नवा रायपुर जैसे आधुनिक और विकसित क्षेत्र को ग्रामीण श्रेणी में रखना व्यावहारिक रूप से उचित नहीं माना जा रहा। विशेषज्ञों का तर्क है कि जब राजधानी, कलेक्टर और प्रशासनिक ढांचा एक है, तो पुलिस व्यवस्था भी एक समान होनी चाहिए। अन्यथा पुलिस सुधार के नाम पर यह व्यवस्था आधा-अधूरा प्रयोग साबित हो सकती है। भारत में पुलिसिंग के दो प्रमुख मॉडल भारत में पुलिस व्यवस्था मुख्य रूप से दो प्रणालियों पर आधारित है—सुपरिटेंडेंट सिस्टम, जो छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में लागू होता है, जहां कानून-व्यवस्था के अधिकार जिला मजिस्ट्रेट के पास होते हैं।वहीं कमिश्नरेट सिस्टम बड़े शहरों में लागू होता है, जिसमें पुलिस कमिश्नर को मजिस्ट्रियल पावर भी दी जाती है और वे सीधे कानून-व्यवस्था पर नियंत्रण रखते हैं।

कानपुर-वाराणसी मॉडल पर रायपुर में लागू होगा पुलिस कमिश्नरी सिस्टम, एक जिले में दोहरी पुलिस व्यवस्था की तैयारी Read Post »

Chhattisgarh, Education, Political, Raipur, State, Top News

रायपुर सेंट्रल जेल में विचाराधीन कैदी की मौत, फांसी लगाने का आरोप; जेल के बाहर परिजनों और समाज का धरना

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित सेंट्रल जेल में एक विचाराधीन कैदी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है। मृतक की पहचान सुनील महानंद (30) के रूप में हुई है, जो पॉक्सो प्रकरण में 11 नवंबर 2025 से जेल में बंद था। घटना की जानकारी मिलते ही मृतक की पत्नी ललिता महानंद जेल परिसर के बाहर बेहोश हो गईं। इसके बाद परिजन, समाज के लोग और कांग्रेस से जुड़े कार्यकर्ता जेल के बाहर धरने पर बैठ गए और जेल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना का आरोप परिजनों का आरोप है कि सुनील महानंद को जेल में लगातार मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था। उनका कहना है कि वह कई बार फोन और मुलाकात के दौरान अपनी परेशानी बता चुका था। इसी के विरोध में परिजनों और समाज के लोगों ने जेल के बाहर प्रदर्शन करते हुए जेलर पर कार्रवाई की मांग की और पुलिस-प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। कैसे हुई घटना? प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, रविवार शाम करीब 6:45 बजे सुनील महानंद जेल परिसर में टहलते हुए पीपल के पेड़ के पास पहुंचा। वहां उसने गमछे से फंदा बनाकर पेड़ की टहनी पर फांसी लगा ली। मौके पर मौजूद जेल प्रहरी ने उसे तुरंत नीचे उतारा। उस समय उसकी सांसें चल रही थीं। इसके बाद उसे तत्काल मेकाहारा अस्पताल ले जाया गया, लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसकी मौत हो गई। यह पूरी घटना जेल में लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हुई है। फुटेज में कैदी को फांसी लगाते हुए देखा गया है, जिसके आधार पर पुलिस फिलहाल इसे आत्महत्या का मामला मान रही है। बिना सूचना दिए भेजा गया शव? परिजनों ने आरोप लगाया है कि घटना के बाद बिना जानकारी दिए शव को चोरी-छिपे मॉर्चुरी भेज दिया गया। उन्हें इस घटना की सूचना काफी देर बाद दी गई। परिजनों का कहना है कि यदि समय रहते उन्हें जानकारी दी जाती, तो वे मौके पर पहुंच सकते थे। उन्होंने जेल प्रशासन पर जानबूझकर सूचना देने में देरी करने का आरोप लगाया है। सामान और पैसे छीनने के आरोप मृतक के परिजनों ने बताया कि सुनील पिछले दो महीनों से जेल में बंद था और वे नियमित रूप से उससे मिलने जाते थे। सुनील ने उन्हें बताया था कि जेल में उसके कपड़े, खाने-पीने का सामान और पैसे छीन लिए जाते थे। परिजनों का दावा है कि उन्होंने उसे स्वेटर, कपड़े और खाने का सामान दिया था, जो उसे नहीं मिलता था। इसके अलावा पेटीएम के जरिए भेजी गई राशि भी उसे नहीं दी गई। जेल प्रशासन का पक्ष इस मामले पर जेल अधीक्षक योगेश सिंह क्षत्री ने बताया कि घटना की न्यायिक जांच कराई जाएगी। जांच पूरी होने के बाद विस्तृत रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजी जाएगी। फिलहाल मामले ने तूल पकड़ लिया है और जेल प्रशासन की भूमिका पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

रायपुर सेंट्रल जेल में विचाराधीन कैदी की मौत, फांसी लगाने का आरोप; जेल के बाहर परिजनों और समाज का धरना Read Post »

Accident, Chhattisgarh, Crime, Raipur, State, Top News

रायपुर: मांगों को लेकर सड़क पर उतरीं बिहान योजना की महिलाएं, मंत्री से मुलाकात तक धरना जारी रखने का ऐलान

रायपुर में एनआरएलएम (बिहान योजना) से जुड़ी महिलाएं अपनी लंबित मांगों को लेकर सड़क पर उतर आईं। प्रदेश के विभिन्न जिलों से राजधानी पहुंचीं सैकड़ों महिलाएं राजीव गांधी चौक पर धरने पर बैठ गईं। प्रदर्शन कर रही महिलाओं ने साफ शब्दों में कहा है कि जब तक संबंधित विभाग के मंत्री से सीधी बातचीत नहीं होती, वे सड़क से नहीं हटेंगी। महिलाएं अपनी 7 सूत्रीय मांगों को लेकर पिछले कई घंटों से प्रदर्शन कर रही हैं। उनका कहना है कि वे वर्षों से सरकार की योजनाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने का काम कर रही हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें न तो उचित मानदेय मिल रहा है और न ही नौकरी की कोई सुरक्षा दी गई है। बेहद कम मानदेय, बढ़ता आर्थिक दबाव धरने में शामिल महिलाओं ने बताया कि उन्हें वर्तमान में मात्र 1910 रुपए मासिक मानदेय दिया जा रहा है, जो मौजूदा महंगाई के दौर में बेहद अपर्याप्त है। महिलाओं का कहना है कि इतनी कम राशि में न तो परिवार का खर्च चल पाता है और न ही काम से जुड़े जरूरी खर्च पूरे हो पाते हैं। उन्होंने मांग की कि उनका मानदेय छत्तीसगढ़ शासन के न्यूनतम वेतन अधिनियम के अनुरूप बढ़ाया जाए। महिलाओं ने यह भी कहा कि पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र में इसी तरह कार्यरत महिलाओं को 6000 रुपए प्रतिमाह दिए जाते हैं, जिसमें केंद्र और राज्य सरकार की समान हिस्सेदारी होती है। ऐसे में छत्तीसगढ़ में बेहद कम मानदेय देना उनके साथ अन्याय है। निजी संसाधनों से कराया जा रहा सरकारी काम बिहान योजना से जुड़ी महिलाओं ने आरोप लगाया कि उनसे लगातार ऑनलाइन कार्य कराया जा रहा है, लेकिन इसके लिए न तो सरकारी मोबाइल उपलब्ध कराया गया है और न ही इंटरनेट खर्च दिया जाता है। महिलाएं अपने निजी मोबाइल और स्वयं के पैसे से रिचार्ज कर सरकारी काम करने को मजबूर हैं। उन्होंने सभी कैडर को सरकारी मोबाइल या मोबाइल-इंटरनेट भत्ता देने की मांग की। यात्रा और बैठक भत्ते की भी मांग प्रदर्शनकारी महिलाओं का कहना है कि उन्हें नियमित रूप से मीटिंग, प्रशिक्षण और फील्ड विजिट के लिए बुलाया जाता है, लेकिन इसके बदले न तो यात्रा भत्ता दिया जाता है और न ही कोई मीटिंग या दैनिक भत्ता मिलता है, जिससे आर्थिक बोझ लगातार बढ़ रहा है। जबरन हटाने और भुगतान में देरी के आरोप महिलाओं ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कई जगहों पर वर्षों से काम कर रही सक्रिय महिलाओं को जबरदस्ती काम से हटाया जा रहा है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि कई ब्लॉकों में मानदेय 5 से 6 महीने देरी से मिलता है और कई बार बिना कारण राशि काट ली जाती है। महिलाओं की मांग है कि मानदेय हर महीने समय पर और सीधे बैंक खाते में दिया जाए। नियमितीकरण और नियुक्ति पत्र की मांग प्रदर्शन कर रही महिलाओं का कहना है कि लंबे समय से सेवा देने के बावजूद उन्हें आज तक नियुक्ति पत्र नहीं दिया गया है। उन्होंने अपने नियमितीकरण की भी मांग की है। महिलाओं ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही मंत्री स्तर पर बातचीत नहीं हुई और मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।

रायपुर: मांगों को लेकर सड़क पर उतरीं बिहान योजना की महिलाएं, मंत्री से मुलाकात तक धरना जारी रखने का ऐलान Read Post »

Chhattisgarh, Political, Raipur, State, Top News
Scroll to Top