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रायपुर में धरना-प्रदर्शन पर दो महीने की रोक: तूता स्थल बंद, वैकल्पिक जगह का फैसला नहीं

रायपुर में धरना-प्रदर्शन पर अस्थायी प्रतिबंध लगा दिया गया है। नवा रायपुर के तूता धरना स्थल पर अगले दो महीने तक किसी भी प्रकार के धरना, प्रदर्शन या सभा की अनुमति नहीं होगी। यह फैसला स्थल के रखरखाव और सुधार कार्य के कारण लिया गया है। कलेक्टर ने जारी किया आदेश जिला कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने आदेश जारी किया है कि अगली सूचना तक तूता धरना स्थल पर कोई भी धरना-प्रदर्शन नहीं किया जा सकेगा।नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने बताया कि यह कार्य लगभग दो महीने तक चलेगा और इस दौरान स्थल को नगर विकास प्राधिकरण के अधीन रखा जाएगा। वैकल्पिक धरना स्थल तय नहीं धरना-प्रदर्शन के लिए फिलहाल किसी वैकल्पिक स्थल की घोषणा नहीं की गई है। इसके चलते राजनीतिक दल, सामाजिक संगठन और आंदोलनकारी फिलहाल प्रदर्शन स्थल उपलब्ध न होने की स्थिति में हैं। तूता धरना स्थल का महत्व तूता धरना स्थल नवा रायपुर के राज्योत्सव मैदान के सामने स्थित है और राज्य स्तर पर संगठनों और राजनीतिक आंदोलनों के लिए आरक्षित माना जाता है। पिछले वर्षों में यहां कई बड़े राजनीतिक और सामाजिक आंदोलन हुए हैं।

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रायपुर में शुरू हुई जनगणना की तैयारी: वार्ड 52 बना देश का ट्रायल जोन, हर घर को दिया जा रहा यूनिक नंबर

रायपुर नगर निगम का वार्ड क्रमांक 52 (डॉ. राजेन्द्र प्रसाद वार्ड) अब देश के लिए जनगणना का ट्रायल जोन बन गया है। केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय और जनगणना निदेशालय के निर्देश पर यहां प्री-टेस्ट जनगणना का काम चल रहा है। यह प्रक्रिया आने वाली राष्ट्रीय जनगणना की तैयारी के तौर पर की जा रही है। निगरानी में हो रहा काम जनगणना निदेशालय के अधिकारी हीरेन्द्र सिंहा ने खुद रायपुर पहुंचकर प्रोजेक्ट का निरीक्षण किया। नगर निगम आयुक्त विश्वदीप, जोन कमिश्नर विवेकानंद दुबे, और नोडल अधिकारी योगेश यदु भी इस निरीक्षण के दौरान मौजूद रहे। 8000 घरों में से 2500 की नंबरिंग पूरी नगर निगम की राजस्व और नगर निवेश विभाग की टीम ने वार्ड के लगभग 8000 भवनों की सूचीबद्धता और नंबरिंग का काम शुरू किया है। अब तक 2500 से अधिक भवनों को यूनिक नंबर दिए जा चुके हैं। यह काम निर्धारित समयसीमा में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। जनता से सहयोग की अपील नगर निगम ने वार्ड 52 के नागरिकों से अपील की है कि वे जनगणना टीम का पूरा सहयोग करें। अधिकारियों ने बताया कि भवनों की पहचान और नंबरिंग का कार्य पूरी सुरक्षा और सरकारी दिशा-निर्देशों के तहत किया जा रहा है। क्या है प्री-टेस्ट जनगणना? प्री-टेस्ट जनगणना एक ट्रायल प्रक्रिया है, जिसमें सीमित क्षेत्र में घरों की गिनती, मैपिंग और डेटा कलेक्शन किया जाता है। इसका उद्देश्य असली जनगणना के दौरान आने वाली तकनीकी और प्रायोगिक चुनौतियों की पहचान करना और उन्हें दूर करना होता है।

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रायपुर में पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू करने की तैयारी अंतिम चरण में, चार अफसर रेस में – 1 नवंबर से लागू होने की संभावना

रायपुर। राजधानी रायपुर में पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू करने की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। गृह विभाग ने इस व्यवस्था से जुड़ी लगभग सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। दिवाली के बाद होने वाली राज्य कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव पर अंतिम मुहर लग सकती है। अगर सब कुछ तय योजना के अनुसार हुआ, तो 1 नवंबर से रायपुर में पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू हो जाएगा। गृह विभाग ने कुछ समय पहले पुलिस मुख्यालय (PHQ) से रिपोर्ट मांगी थी, जिसके बाद एडीजी प्रदीप गुप्ता की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति गठित की गई। इसमें आईजी अजय यादव, आईजी अमरेश मिश्रा, डीआईजी ओपी पाल, एसपी अभिषेक मीणा और एसपी संतोष सिंह सदस्य थे। समिति ने विभिन्न राज्यों में लागू कमिश्नरी सिस्टम का अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट गृह विभाग को सौंप दी है। रिपोर्ट के अनुसार, रायपुर के पुलिस कमिश्नर पद के लिए चार सीनियर आईपीएस अधिकारी दावेदारी में हैं। इसी तरह एडिशनल पुलिस कमिश्नर के लिए भी चार नामों पर चर्चा चल रही है। ⚖️ कमेटी के सुझाव और विकल्प एडीजी प्रदीप गुप्ता की कमेटी ने कमिश्नर की रैंक को लेकर तीन विकल्प सुझाए हैं —1️⃣ एडीजी रैंक के अधिकारी को पुलिस कमिश्नर बनाया जाए।2️⃣ आईजी रैंक के अधिकारी को जिम्मेदारी दी जाए।3️⃣ डीआईजी रैंक के अधिकारी को नियुक्त किया जाए। कैबिनेट बैठक में तय किया जाएगा कि इनमें से कौन-सा विकल्प अपनाया जाए। इसके साथ ही, शीर्ष पद के अनुसार जॉइंट कमिश्नर, डिप्टी कमिश्नर और एसीपी के पदों की संख्या भी तय होगी। शुरुआती प्रस्ताव के अनुसार, इस नई प्रणाली में 60 से अधिक अधिकारी काम करेंगे। 🌐 इन राज्यों की स्टडी की गई ओडिशा, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक के पुलिस कमिश्नर सिस्टम का अध्ययन किया गया है। 🔍 कमिश्नर प्रणाली से पुलिस को मिलेंगे अधिक अधिकार इस व्यवस्था में पुलिस को कलेक्टर जैसी कुछ प्रशासनिक शक्तियां मिलेंगी। कमिश्नर को मजिस्ट्रेट की तरह प्रतिबंधात्मक आदेश जारी करने, गुंडा एक्ट, रासुका और अन्य कानूनों के तहत कार्रवाई करने का अधिकार होगा। इसके अलावा होटल, बार, हथियारों के लाइसेंस, धरना-प्रदर्शन की अनुमति और दंगे-झगड़ों में फौरन कार्रवाई जैसे निर्णय पुलिस स्तर पर ही लिए जा सकेंगे। 🏢 पुलिस कमिश्नरेट संरचना (Structure) इस सिस्टम में प्रमुख पद होंगे – पुलिस कमिश्नर (CP), संयुक्त पुलिस आयुक्त (Jt. CP), अपर पुलिस आयुक्त (Addl. CP), पुलिस उपायुक्त (DCP), सहायक पुलिस आयुक्त (ACP), पुलिस निरीक्षक (PI/SHO), उप-निरीक्षक (SI) और कॉन्स्टेबल। 🗺️ अन्य राज्यों में उदाहरण राजस्थान में एसीपी को कुछ मामलों में न्यायिक अधिकार प्राप्त हैं।महाराष्ट्र में पुलिस कमिश्नर को जुलूस, आतिशबाजी, सार्वजनिक कार्यक्रमों की अनुमति देने का अधिकार है।उत्तर प्रदेश के लखनऊ, कानपुर और वाराणसी में पुलिस को प्रशासनिक और एहतियाती कार्रवाई के 14 एक्ट्स के तहत अधिकार दिए गए हैं।

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छत्तीसगढ़ में महिला कैदियों के साथ जेल में रह रहे 60 बच्चे, प्रभावित हो रहा उनका बचपन

छत्तीसगढ़ की जेलों में 60 महिला कैदी अपने बच्चों के साथ बंद हैं। नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो (NCRB) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, राज्य इस मामले में देश में छठे स्थान पर है। नियम के अनुसार, जेल में छह साल से छोटे बच्चों को अपनी मां के साथ रखा जाता है, जिससे ये बच्चे भी जेल की परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि देश में सबसे ज्यादा उत्तर प्रदेश में 311, उसके बाद पश्चिम बंगाल में 170, बिहार में 167, मध्य प्रदेश में 126 और झारखंड में 84 महिला कैदी अपने बच्चों के साथ बंद हैं। छत्तीसगढ़ में 60 महिला कैदी बच्चों के साथ जेल में हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, जेल का वातावरण बच्चों के मानसिक, शारीरिक और सामाजिक विकास के लिए चुनौतीपूर्ण है। बाल अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि बच्चों के लिए सुरक्षित पालन-पोषण, शिक्षा और खेल की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। हालांकि कुछ जेलों में आंगनबाड़ी और प्राथमिक शिक्षा की सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं, फिर भी यह पर्याप्त नहीं है। NCRB के आंकड़ों के अनुसार, 2023 तक भारत में कुल 1,318 महिला कैदी अपने 1,492 बच्चों के साथ जेल में थीं। इनमें से 1,049 महिलाएं विचाराधीन बंदी थीं, जिनके साथ 1,191 बच्चे जेल में थे, जबकि 249 महिला कैदियों को दोष सिद्ध किया जा चुका था और वे अपने 272 बच्चों के साथ जेल में थीं। बाल अधिकार विशेषज्ञ सुनील श्रीवास्तव का कहना है कि सरकार को महिला कैदियों के बच्चों के लिए वैकल्पिक देखभाल और शिक्षा की ठोस व्यवस्था करनी चाहिए, ताकि उनका बचपन जेल की सलाखों में न गुजरे और वे समाज की मुख्यधारा से कट न जाएं।

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कोरबा: हितग्राहियों को नहीं मिली NTPC क्षतिपूर्ति राशि, नाराज ग्रामीण एसडीएम ऑफिस पहुंचे

कोरबा। एनटीपीसी की क्षतिपूर्ति राशि के भुगतान में देरी को लेकर राखड़ प्रभावित धनरास गांव के सैकड़ों ग्रामीण, जिनमें महिलाएं भी शामिल थीं, ने एसडीएम कार्यालय के सामने प्रदर्शन किया और राजस्व विभाग के खिलाफ नारेबाजी की। ग्रामीणों का आरोप है कि एनटीपीसी ने एक साल की क्षतिपूर्ति राशि दो महीने पहले राजस्व विभाग को दे दी थी, लेकिन यह राशि अब तक प्रभावितों के खातों में नहीं पहुंची। पहले यह राशि सीधे ग्राम पंचायत के खाते में जमा होती थी, लेकिन इस बार विभाग में अटकी हुई है। दीपावली से पहले भुगतान की मांग ग्रामीणों ने त्योहार से पहले राशि जारी करने की मांग की। उनका कहना है कि मुआवज़ा न मिलने से गांव में आर्थिक संकट पैदा हो गया है। ग्रामीण शशि कुमार ने बताया कि पहले यह राशि सरपंच और पंच के माध्यम से प्रभावित लोगों में बांटी जाती थी। अब यह सीधे प्रभावितों के बैंक खाते में भेजी जा रही है, लेकिन इस बार उन्हें राशि नहीं मिली। प्रदूषण और बीमारियों का खामियाजा ग्रामीणों ने यह भी कहा कि एनटीपीसी द्वारा डंप की गई राखड़ के कारण होने वाले प्रदूषण और बीमारियों का खामियाजा वे भुगत रहे हैं। यही राशि उनके इलाज और रोजमर्रा के खर्चों में उपयोग होती है। प्रभावितों को लगभग 6–7 हजार रुपए मिलते हैं। एसडीएम ने दी जानकारी कटघोरा एसडीएम तन्मय खन्ना ने बताया कि अब तक 1100 से अधिक लोगों के बैंक विवरण जमा हो चुके हैं और सिस्टम में एंट्री में समय लग रहा है। उन्होंने आश्वासन दिया कि सभी विवरण दीपावली से पहले बैंक खातों में डाले जाएंगे। एसडीएम ने कहा कि उन्होंने एनटीपीसी प्रबंधन और तहसीलदार से बात की है और शीघ्र भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

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रायपुर में दिवाली की तैयारियों ने बढ़ाया ट्रैफिक का दबाव

रायपुर। धनतेरस (18 अक्टूबर) से शुरू होने वाले दिवाली पर्व को लेकर राजधानी सज-धज कर तैयार है। बाजारों में खरीदारी का माहौल देखने को मिल रहा है, जिससे सड़कें भीड़-भाड़ और ट्रैफिक जाम से प्रभावित हो रही हैं। राजधानी के सभी प्रमुख बाजारों में दुपहिया और चार पहिया वाहनों की संख्या बढ़ गई है। खासतौर पर एमजी रोड, राम सागर पारा, जीई रोड, आमापारा, पुरानी बस्ती, लाखे नगर, शंकर नगर, समता कॉलोनी, संतोषी नगर, पंडरी, गोलबाजार, मालवीय रोड, सदर बाजार, कंकाली पारा रोड, बूढ़ापारा और नालंदा परिसर में सुबह से शाम तक सड़कें जाम जैसी स्थिति में हैं। पुलिस ने किया ट्रैफिक प्रबंध और पार्किंग की सुविधा सुनिश्चित राजधानी पुलिस ने इन व्यस्त बाजारों के आसपास विशेष पार्किंग स्थल चिन्हित किए हैं। प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे बाजार में पहुंचने पर निर्धारित पार्किंग का ही उपयोग करें, ताकि ट्रैफिक का दबाव कम किया जा सके और खरीदारी का माहौल सुचारू रहे।

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बिलासपुर में महिला का अधजला शव मिला: दोनों पैर साड़ी से बंधे, हत्या के बाद जलाने का शक, पुलिस जांच में जुटी

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में एक महिला का अधजला शव मिला है। यह शव रतनपुर के खूंटाघाट डैम के पास झाड़ियों में पड़ा पाया गया। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार यह घटना लगभग एक हफ्ते पुरानी है। शव के दोनों पैर साड़ी से बंधे हुए मिले हैं, जिससे पुलिस को हत्या के बाद शव जलाने की आशंका जताई जा रही है। फिलहाल महिला की पहचान नहीं हो पाई है। घटना स्थल और सूचना यह मामला रतनपुर थाना क्षेत्र का है। डैम के पास से आने वाली बदबू के कारण स्थानीय ग्रामीणों ने पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने पाया कि महिला का शव झाड़ियों के नीचे पड़ा था और उसके पैरों को साड़ी से बांधकर जलाया गया था। साड़ी पैरों से चिपकी हुई मिली। फोरेंसिक जांच और हत्या की संभावना पुलिस ने हत्या की संभावना को ध्यान में रखते हुए फोरेंसिक टीम को बुलाया। प्रारंभिक जांच में शव के केवल 10 प्रतिशत अंग ही बरामद हुए हैं; बाकी 90 प्रतिशत अंग डिस्पोज़ हो चुके हैं। शव के यह हालात यह संकेत देते हैं कि महिला की पहचान और सबूत मिटाने के लिए शव जलाया गया। स्थानीय हालात और पहचान में दिक्कत खूंटाघाट डैम एक पिकनिक स्पॉट है और आसपास जंगल से घिरा हुआ है। घटना स्थल मुख्य सड़क से दूर होने के कारण किसी भी सुराग का पता लगाना कठिन हो गया। आसपास के लोगों और स्थानीय थानों में गुमशुदगी के रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। पुलिस की कार्रवाई पुलिस ने हत्या की आशंका के आधार पर संदिग्धों और इलाके में आने-जाने वाले लोगों से पूछताछ शुरू कर दी है। मौके पर कोई ऐसा सामान नहीं मिला जिससे महिला या हत्यारों की पहचान की जा सके। शव की स्थिति और चुनौतियां शव के अधिकांश हिस्से कुत्तों द्वारा इधर-उधर बिखरे पाए गए। पंचनामा तैयार कर शव के बचे हुए हिस्सों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया। इस वजह से आसपास के लोग भी महिला की पहचान नहीं कर सके। हत्या और साक्ष्य मिटाने का शक पुलिस का अनुमान है कि महिला की हत्या के बाद शव को जंगल में फेंककर जलाया गया। पैरों का साड़ी से बंधा होना और अधजला शव यही संकेत दे रहा है। महिला की पहचान करना अब पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।

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छत्तीसगढ़ बना देश का सबसे तेज़ ई-ऑफिस रोलआउट करने वाला राज्यएक साल में मंत्रालय से ब्लॉक तक पहुंची सुविधा, नोटिंग बाद में नहीं बदली जा सकती, अगले साल तक हर गांव में लागू होगी

छत्तीसगढ़ ने ई-गवर्नेंस के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। राज्य अब देश का सबसे तेज़ डिजिटल परिवर्तन करने वाला राज्य बन गया है। केवल एक साल में ई-ऑफिस प्रणाली सचिवालय से लेकर तहसील और ब्लॉक स्तर तक पूरी तरह लागू हो चुकी है। अगले साल तक इसे गांवों तक भी पहुँचाया जाएगा। ई-ऑफिस प्रणाली की मदद से हर फाइल की स्थिति ऑनलाइन ट्रैक की जा सकती है। अब किसी भी स्तर पर फाइल अटकने या विलंब होने का खतरा नहीं है। सभी अधिकारी और कर्मचारी फाइल की प्रगति देख सकते हैं। इस प्रणाली में किसी भी अधिकारी द्वारा की गई नोटिंग को बाद में बदला नहीं जा सकता। सभी डेटा को मल्टीपल सर्वर पर सुरक्षित रखा गया है, जिससे सर्वर फेल होने या तकनीकी समस्या आने पर भी डेटा सुरक्षित रहता है। कागज से क्लाउड की ओर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि ई-ऑफिस ने शासन में ई-गवर्नेंस को संपूर्ण डिजिटल, पारदर्शी और जवाबदेह बनाया है। अब हर फाइल का रिकॉर्ड डिजिटल रूप में सुरक्षित है। ई-ऑफिस ने सरकारी कामकाज को कागज से क्लाउड की दिशा में अग्रसर किया है। इससे पारदर्शिता, गति और विश्वास में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। अब एक ही दिन में निपट रही फाइलें सचिवालय में लगभग 1.15 लाख फाइलें, विभागाध्यक्ष कार्यालयों में 73,969 फाइलें, और जिला कार्यालयों में 32,000 फाइलें अब ई-ऑफिस से संचालित हो चुकी हैं। ई-ऑफिस लागू होने के बाद फाइलों के निपटान का औसत समय हफ्तों से घटकर केवल एक दिन रह गया है। फाइलों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने की आवश्यकता समाप्त हो गई है। इस बदलाव से डीज़ल और वाहन खर्च में बचत हुई है और समय का अधिकतम उपयोग संभव हो पाया है। अब वह फाइल जो पहले हफ्तों में निपटती थी, अब एक ही दिन में निपट जाती है। साथ ही, ऑटो-अप्रूवल मैकेनिज़्म की सुविधा के चलते रूटीन फाइलें स्वचालित रूप से अप्रूव हो जाती हैं।

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सख्ती: मैजिक बॉक्स से की जाएगी मिलावट की तुरंत पहचान, खराब तेल और मिठाई को मौके पर नष्ट किया जाएगा35 टीमों और 8 मोबाइल टेस्टिंग लैब्स के साथ चौकसी, शिकायत के लिए हेल्पलाइन: 9340597097

त्योहारी सीजन में खाने-पीने की चीजों में मिलावट रोकने के लिए प्रदेशभर में खाद्य विभाग की बड़ी कार्रवाई शुरू हो गई है। पहली बार मैजिक बॉक्स तकनीक का उपयोग करके बाजारों में ऑन-स्पॉट जांच की जा रही है। इस अभियान के लिए विभाग ने 35 से अधिक टीमों और 8 मोबाइल टेस्टिंग लैब्स को सक्रिय किया है। खाद्य विभाग का लक्ष्य इस बार 1200 से अधिक सैंपल जांचना है, जो अब तक का सबसे बड़ा अभियान है। हर टीम को प्रतिदिन लगभग 20 सैंपल जांचने का टारगेट दिया गया है। मोबाइल वैन की मदद से दुकानों और बाजारों में जाकर मिलावटी सामान को तुरंत जब्त और नष्ट किया जाएगा। त्योहारी सीजन में मिलावट रोकने के लिए खाद्य विभाग ने हेल्पलाइन नंबर 9340597097 जारी किया है। इस नंबर पर सप्ताह के सातों दिन, 24 घंटे शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। कंट्रोल रूम से यह भी मॉनिटर किया जा रहा है कि शिकायतों का समाधान सही समय पर हो रहा है या नहीं। मैजिक बॉक्स क्या है मैजिक बॉक्स एक पोर्टेबल किट है, जो खाद्य सामग्री में मिलावट की पहचान करती है। इसके जरिए मिठाई में कृत्रिम रंग, तेल में हानिकारक रसायन, दूध में डिटर्जेंट या स्टार्च जैसी मिलावट तुरंत पकड़ी जा सकती है। एक यूनिट तीन जिले कवर करेगी प्रत्येक मोबाइल यूनिट को तीन जिलों का कवरेज दिया गया है। छोटे जिलों के लिए एक यूनिट रखी गई है। उदाहरण के लिए: बाजारों में लगातार कार्रवाई प्रदेशभर में 35 से अधिक टीमें लगातार जांच कर रही हैं। हर छोटे-बड़े बाजार में जाकर मिलावटी उत्पादों पर तुरंत कार्रवाई की जा रही है।— दीपक अग्रवाल, फूड एंड ड्रग कंट्रोलर

सख्ती: मैजिक बॉक्स से की जाएगी मिलावट की तुरंत पहचान, खराब तेल और मिठाई को मौके पर नष्ट किया जाएगा35 टीमों और 8 मोबाइल टेस्टिंग लैब्स के साथ चौकसी, शिकायत के लिए हेल्पलाइन: 9340597097 Read Post »

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छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण का नया तरीका: महिला प्रचारकों की रणनीति

छत्तीसगढ़ के शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में धर्मांतरण के तरीकों में बदलाव देखा गया है। अब मिशनरी संगठन महिलाओं और बच्चियों को सीधे लक्ष्य बना रहे हैं। इसमें महिला प्रचारक पहले अपनी पहचान छिपाकर, बीमारियों और अंधविश्वास से जूझ रही महिलाओं से नजदीकी बढ़ाती हैं, फिर उन्हें “चंगाई सभा” में लेकर जाती हैं और मसीही धर्म अपनाने के लिए प्रोत्साहित करती हैं। सरकार की कार्रवाई:मंगलवार को डिप्टी सीएम और गृह मंत्री विजय शर्मा ने इस मामले को गंभीरता से लिया और कहा कि इसे रोकने के लिए कठोर एक्ट लाने की योजना है। प्रचार का तरीका:कोरबा और जांजगीर जिलों में जांच के दौरान पता चला कि चंगाई सभा के जरिए महिलाओं और बच्चियों को ईसाई बनाया जा रहा है। धर्मांतरण के बाद भी कई महिलाएं अपना नाम और हुलिया नहीं बदलतीं, लेकिन गुप्त रूप से धर्म प्रचार में सहयोग करती हैं। महिलाओं को प्रार्थना और उपचार के नाम पर चर्च तक लाया जाता है। अधिकांश मामलों में बीमारी या शारीरिक कष्ट का समाधान और 20% मामलों में जादू-टोना जैसे अंधविश्वास का इलाज करने का दावा किया जाता है। एलोपैथिक उपचार किया जाता है, लेकिन इसे प्रभु की कृपा के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। बच्चियों का प्रशिक्षण:मजदूर वर्ग की 3 साल या उससे अधिक उम्र की बच्चियों को चर्च के छात्रावास में रखा जाता है, जहां उन्हें पढ़ाई के साथ धर्म प्रचारक बनने की ट्रेनिंग दी जाती है। वे बाइबिल के वचन कंठस्थ करके चर्च में सुनाती हैं। पास्टर बाबूलाल का दावा:कोथारी के पास्टर बाबूलाल मिरी का कहना है कि वे प्रभु की कृपा से हर रोग और परेशानी का इलाज करते हैं। जायदाद, जादू-टोना जैसी समस्याओं से भी मुक्ति दिलाते हैं। धर्मांतरण में नाम बदलने की बाध्यता समाप्त:सरकार को वास्तविक आंकड़ा न पता चले और आरक्षण का लाभ महिलाओं को मिलता रहे, इसके लिए मिशनरी अब नाम और सरनेम बदलने की आवश्यकता नहीं रखते। धर्म बदलने के बावजूद हिंदू नाम वाले लोग भी ईसाई धर्म का प्रचार कर सकते हैं। इस नई रणनीति में मुख्य रूप से महिलाएं, युवतियां और बच्चियां शामिल हैं, जो बीमारी, अंधविश्वास और सामाजिक परेशानियों का हवाला देकर धर्म परिवर्तन के जाल में फंस रही हैं।

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