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दुर्ग में बारिश से खेतों में सड़ रही धान की फसल, किसानों की बढ़ी चिंता – जलभराव और कीट प्रकोप से बढ़ा खर्च

दुर्ग जिले में मौसम की अनिश्चितता और अक्टूबर तक जारी बारिश ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। पकने की स्थिति में पहुंच चुकी धान की फसल अब खेतों में गिरने और सड़ने लगी है। कई इलाकों में खेतों में जलभराव की स्थिति बन गई है, जिससे उत्पादन और गुणवत्ता दोनों पर असर पड़ रहा है। दुर्ग, पाटन, धमधा, अहिवारा और भिलाई-3 के ग्रामीण क्षेत्रों में किसान फसल बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। अक्टूबर के आखिरी हफ्ते तक जारी बारिश और तेज हवाओं के कारण खेतों में धान की बालियां झुककर सड़ने लगी हैं। मौसम की मार और कीटों का कहर पाटन क्षेत्र के किसान अशोक चौधरी बताते हैं कि पहले कम बारिश से कीट प्रकोप (तना छेदक) बढ़ा, और अब अधिक नमी से फसल सड़ रही है। उन्होंने बताया कि इस बार दवा और कीटनाशकों पर खर्च लगभग दोगुना हो गया है। कृषि विभाग के अनुसार, जिले में इस साल अक्टूबर में औसत से अधिक बारिश दर्ज की गई है। लगातार नमी और हवा के दबाव से लंबी किस्म की धान झुककर गिर गई है, और जिन खेतों में पानी नहीं निकाला जा सका, वहां सड़न की स्थिति बन गई है। बढ़ा हार्वेस्टिंग खर्च खेतों में पानी भरे होने के कारण पारंपरिक टायर हार्वेस्टर काम नहीं कर पा रहे हैं। किसान अब चेन माउंटेड हार्वेस्टर का सहारा ले रहे हैं, जिसका खर्च 4 हजार रुपये प्रति एकड़ तक पहुंच गया है, जबकि पहले यह 2500 रुपये था। इससे किसानों पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है। नुकसान की आशंका, लेकिन उम्मीद बाकी हनोदा गांव के किसान लोकेश चंद्राकर ने बताया कि अगर आने वाले दिनों में मौसम साफ रहा तो कुछ फसलें अभी बचाई जा सकती हैं। कृषि अधिकारियों ने किसानों को सलाह दी है कि वे खेतों से पानी निकालने और जल्द कटाई शुरू करने की व्यवस्था करें। दुर्ग जिले में करीब 60 प्रतिशत क्षेत्र धान उत्पादन के तहत आता है। लेकिन इस साल मौसम की अनिश्चितता, कीट प्रकोप और बढ़ते खर्चों के चलते किसानों की चिंताएं दोगुनी हो गई हैं।

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बिलासपुर: कांग्रेस नेता पर ताबड़तोड़ फायरिंग, CCTV में कैद हुई वारदात – 14 राउंड गोलियां चलीं, बाल-बाल बचे नीतेश सिंह

बिलासपुर जिले के मस्तूरी में मंगलवार रात कांग्रेस नेता और जनपद पंचायत उपाध्यक्ष नीतेश सिंह पर नकाबपोश बदमाशों ने गोलियां चला दीं। यह पूरी वारदात CCTV कैमरे में रिकॉर्ड हुई है। वीडियो में बाइक सवार दो शूटरों को करीब 14 राउंड फायरिंग करते देखा जा सकता है। हमले के दौरान नीतेश सिंह के दफ्तर में बैठे दो लोग—पूर्व सरपंच चंद्रकांत सिंह और रिश्तेदार राजकुमार सिंह (राजू)—गंभीर रूप से घायल हो गए। जवाबी फायरिंग के बाद आरोपी फरार हो गए। पुलिस ने तुरंत नाकेबंदी की, लेकिन अभी तक हमलावरों का कोई सुराग नहीं मिला है। एक हफ्ते पहले मिली थी चेतावनी सूत्रों के मुताबिक, नीतेश सिंह को करीबियों ने एक हफ्ते पहले ही सतर्क किया था कि उन पर हमला हो सकता है, लेकिन उन्होंने इसे नजरअंदाज कर दिया। पुलिस को शक है कि वारदात राजनीतिक वर्चस्व या पुरानी रंजिश से जुड़ी हो सकती है। संजू त्रिपाठी हत्याकांड जैसी साजिश यह हमला तीन साल पहले हुए कांग्रेस नेता संजू त्रिपाठी हत्याकांड की याद दिलाता है। संजू की तरह ही नीतेश को भी निशाना बनाकर गोलियां दागी गईं। पुलिस इसे सुपारी किलिंग का मामला मानते हुए हर एंगल से जांच कर रही है। पुलिस जांच जारी पुलिस ने अब तक छह संदिग्धों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। रूट पर लगे CCTV कैमरों के फुटेज खंगाले जा रहे हैं। वहीं, अफसरों का कहना है कि जल्द ही शूटरों और साजिशकर्ताओं तक पहुंच बना ली जाएगी।

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अमित जोगी ने पीएम मोदी से की पीएम आवास योजना में CBI जांच की मांग, बोले– गरीबों के हक पर हो रहा डाका

जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के अध्यक्ष अमित जोगी ने प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है।उन्होंने योजना में हो रही अनियमितताओं और फर्जीवाड़े की जांच CBI से कराने की मांग की है। अमित जोगी का कहना है कि केंद्र सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ को ग्रामीण आवासों के लिए सबसे अधिक आवंटन मिलने के बावजूद, फर्जी बैंक खातों, रिश्वतखोरी और अवैध निर्माण के कारण योजना का असली लाभ गरीबों तक नहीं पहुंच पा रहा।उन्होंने कहा कि यह विरोध किसी राजनीतिक मकसद से नहीं, बल्कि वंचितों की आवाज़ को प्रधानमंत्री तक पहुंचाने का प्रयास है। जोगी ने लगाए गंभीर आरोप जोगी ने दावा किया कि कई जिलों में अधिकारी और “आवास मित्र” पुराने मकानों को नया पीएमएवाई घर दिखाकर रिश्वत वसूल रहे हैं।कहीं पर पुराने मकानों की दूसरी मंजिल बनवाकर उसे नया आवास बताया जा रहा है, जो नियमों के खिलाफ है।गरीबों की जगह गैर-पात्र लोगों को फंड जारी किए जा रहे हैं और मजदूरी भुगतान के नाम पर फर्जी खातों में राशि ट्रांसफर की जा रही है। भगवानू नायक बोले– राज्यस्तरीय जांच पर्याप्त नहीं पार्टी के मुख्य प्रवक्ता भगवानू नायक ने कहा कि इस घोटाले की गहराई इतनी ज्यादा है कि राज्य स्तर की जांच से सच्चाई सामने नहीं आ सकती।यह मामला न सिर्फ गरीबों के हक से जुड़ा है बल्कि केंद्र सरकार की योजना की साख पर भी सवाल खड़े करता है।उन्होंने कहा कि निष्पक्ष और पारदर्शी CBI जांच ही एकमात्र रास्ता है जिससे असली लाभार्थियों को न्याय मिल सके।

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नवा रायपुर में ब्रह्मकुमारी संस्थान का ‘शांति शिखर’ तैयार: दान से बना राजस्थानी महल जैसा मेडिटेशन सेंटर, PM मोदी करेंगे लोकार्पण

नवा रायपुर के सेक्टर-20 में ब्रह्मकुमारी संस्थान का भव्य ‘शांति शिखर – एकेडमी फॉर ए पीसफुल वर्ल्ड’ बनकर तैयार है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 1 नवंबर को इस अनोखे मेडिटेशन सेंटर का उद्घाटन करेंगे। करीब 1.5 एकड़ क्षेत्र में फैला यह पांच मंजिला भवन राजस्थानी महल की शैली में तैयार किया गया है। इसकी पूरी लागत दान से जुटाई गई है। भवन निर्माण में जोधपुर के पिंक स्टोन का उपयोग हुआ है, जिसके लिए 150 से अधिक ट्रकों में पत्थर मंगवाए गए थे। इस इमारत में ऑडिटोरियम, मेडिटेशन हॉल, सेमिनार हॉल, लाइब्रेरी, डाइनिंग एरिया और अतिथियों के लिए ठहरने की व्यवस्था की गई है। इसकी ऊंचाई 105 फीट, चौड़ाई 150 फीट और लंबाई 225 फीट है। यह छत्तीसगढ़ की पहली इमारत है जिसमें प्रेस टेंसाइल बीम (PT-BM) तकनीक का उपयोग हुआ है — जो आमतौर पर बड़े पुलों के निर्माण में अपनाई जाती है। भवन में भविष्य में दो मंजिलें और जोड़ी जा सकती हैं। भवन का डिजाइन कर्नाटक के आर्किटेक्ट शरण पाटिल और जबलपुर के सौरभ सोनी ने तैयार किया है। जबकि कला कार्य राजस्थान के हरकिशन प्रजापति और स्टील स्ट्रक्चर डिज़ाइन मुंबई के प्रशांत ने किया है। रायपुर संचालिका ब्रह्मकुमारी सविता दीदी ने बताया कि इस भवन के निर्माण में प्रदेशभर के 50 सेवा केंद्रों और 500 उप सेवा केंद्रों के सदस्यों ने सहयोग दिया। हर सदस्य ने 2018 से रोज़ाना कम से कम एक रुपए का दान दिया। 1 नवंबर को होने वाले उद्घाटन समारोह में राज्यपाल रामेन डेका, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, राजयोगिनी जयंती, राजयोगी मृत्युंजय समेत देशभर से ब्रह्मकुमारी संस्था से जुड़े सदस्य शामिल होंगे।

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बिलासपुर में भाजपा-कांग्रेस नेता समेत 14 जुआरी गिरफ्तार, 2.17 लाख रुपये जब्त

बिलासपुर में बड़े होटलों के साथ अब मैरिज हॉल भी जुआ का अड्डा बन गया है। शुक्रवार की रात पुलिस ने महाराणा प्रताप चौक स्थित जीनस पैलेस में दबिश देकर भाजपा और कांग्रेस के नेताओं सहित 14 रसूखदार जुआरियों को गिरफ्तार किया। उनके पास से कुल 2 लाख 17 हजार रुपए बरामद किए गए। 🔹 गिरफ्तारी का मामला सिविल लाइन थाना प्रभारी सुम्मत साहू के अनुसार, मैरिज हॉल में जुआ चलने की सूचना मिलने पर पुलिस टीम ने पहली मंजिल के रूम नंबर 1 में तलाशी ली। इस दौरान भाजपा जिला उपाध्यक्ष संतोष कौशिक, मंडल अध्यक्ष नैन साहू और कांग्रेस पार्षद मुन्ना श्रीवास सहित कुल 14 लोग रंगे हाथ पकड़े गए। आरोपियों के खिलाफ जुआ एक्ट के तहत कार्रवाई की गई। 🔹 मैरिज हॉल संचालक पर कोई कार्रवाई नहीं पुलिस ने केवल जुआरियों के खिलाफ कार्रवाई की। हॉल संचालक से पूछताछ नहीं की गई और उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। 🔹 पहचान छिपाने की कोशिश नाकाम शुरुआत में पुलिस ने राजनीतिक दबाव के कारण आरोपियों की पहचान सार्वजनिक नहीं की। आमतौर पर इस तरह की रेड के बाद फोटो और नाम जारी किए जाते हैं, लेकिन इस मामले में शुक्रवार को गिरफ्तारी के बाद प्रेस रिलीज नहीं दी गई। हालांकि, शनिवार रात पकड़े गए जुआरियों की जानकारी सार्वजनिक की गई। 🔹 गिरफ्तार नेताओं और अन्य जुआरियों की सूची

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राज्योत्सव 2025: पीएम मोदी अब केवल 1 दिन के लिए रायपुर आएंगे, कार्यक्रम में बदलाव

छत्तीसगढ़ राज्य के 25वें स्थापना दिवस के अवसर पर रायपुर में होने वाले राज्योत्सव के उद्घाटन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दौरा अब एक दिन का ही रहेगा। पहले उनका दो दिवसीय दौरा तय था, लेकिन बिहार चुनाव की व्यस्तताओं के कारण कार्यक्रम घटाकर 1 नवंबर कर दिया गया है। 🔹 पीएम मोदी का revised schedule 🔹 5 दिन तक चलेगा राज्योत्सव इस वर्ष राज्योत्सव 1 नवंबर से 5 नवंबर तक नवा रायपुर में आयोजित किया जाएगा। पहले यह आयोजन 3 दिन का होता था, लेकिन इस बार इसे 5 दिन का भव्य आयोजन बनाने का निर्णय लिया गया है। समापन समारोह में उपराष्ट्रपति भी शामिल होंगे। 🔹 तैयारी और जिम्मेदारी मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अधिकारियों के साथ कार्यक्रम की तैयारियों का जायजा लिया।राज्य सरकार ने 6 नोडल अफसर नियुक्त किए हैं, जिनकी जिम्मेदारी विभिन्न कार्यक्रमों और उद्घाटनों की देखरेख करना है। 🔹 स्थानीय अवकाश राज्य स्थापना दिवस 1 नवंबर को स्कूल-कॉलेज और सरकारी कार्यालयों में अवकाश रहेगा। हालांकि बैंक, कोषालय और वित्तीय संस्थानों पर यह अवकाश लागू नहीं होगा। 🔹 ऐतिहासिक महत्व प्रधानमंत्री मोदी का छत्तीसगढ़ के साथ पुराना और भावनात्मक जुड़ाव है। उन्होंने बार-बार कहा है कि यह राज्य देश के विकास की नई ऊर्जा का केंद्र बनेगा। राज्य गठन की 25वीं वर्षगांठ पर उनकी उपस्थिति को ऐतिहासिक क्षण माना जा रहा है।

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छत्तीसगढ़ में 10 दवाओं में बड़ी गड़बड़ी, 9 अमानक और 1 नकली पाई गई

केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर 2025 में देशभर में 112 दवाओं के सैंपल क्वालिटी टेस्ट में फेल पाए गए, जबकि एक दवा नकली निकली। इस सूची में छत्तीसगढ़ की 10 दवाएं शामिल हैं, जिनमें 9 दवाएं मानक गुणवत्ता (NSQ) पर खरी नहीं उतरीं और 1 दवा नकली (Spurious) पाई गई। 🔹 अमानक और नकली दवाओं का विवरण छत्तीसगढ़ में फेल पाई गई दवाओं में आम घरेलू दवाएं भी शामिल हैं, जैसे: अमानक दवाओं में डिज़ॉल्यूशन टेस्ट और Assay टेस्ट में खामी पाई गई, यानी दवा शरीर में सही ढंग से असर नहीं कर रही थी या सक्रिय तत्व निर्धारित मात्रा से कम था। नकली फंगल क्रीम मामले में कंपनी ने किसी असली ब्रांड का नाम इस्तेमाल किया था और उसके पास लाइसेंस नहीं था। 🔹 दवाओं की खपत और कारोबार 🔹 NSQ यानी “Not of Standard Quality” एक दवा को NSQ तभी माना जाता है जब वह किसी निर्धारित क्वालिटी मानक पर फेल हो। यह जांच विशेष बैच पर होती है। एक बैच फेल होने का मतलब यह नहीं कि पूरे ब्रांड की दवा खराब है। 🔹 प्रशासन का कहना राज्य के खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने बताया कि केंद्र से नोटिफिकेशन अभी तक उन्हें नहीं मिला है। CDSCO हर महीने देशभर की दवाओं का क्वालिटी चेक करता है और फेल या नकली दवाओं की सूची अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित करता है। 🔹 इन दवाओं से बचने के उपाय इस रिपोर्ट से स्पष्ट होता है कि बाज़ार में बिकने वाली हर दवा पर भरोसा नहीं किया जा सकता और सही सावधानी बेहद जरूरी है।

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छत्तीसगढ़ के नवा रायपुर में देश का पहला डिजिटल ट्राइबल म्यूजियम तैयार हो गया है — यह म्यूजियम भारत की आदिवासी विरासत, स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान और शौर्य गाथाओं को आधुनिक तकनीक के ज़रिए जीवंत रूप में पेश करता है।

1 नवंबर को राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस संग्रहालय का उद्घाटन करेंगे। करीब 9.75 एकड़ में फैले इस म्यूजियम का निर्माण लगभग 3 साल 5 महीने में हुआ है और इस पर 50 करोड़ रुपये की लागत आई है। 🔸 डिजिटल तकनीक से सजी 14 गैलरी म्यूजियम में कुल 14 गैलरी बनाई गई हैं — जिनमें 12 आदिवासी विद्रोह और 2 सत्याग्रहों की कहानी प्रदर्शित की गई है।यहां डिजिटल स्क्रीन, ऑडियो-विजुअल डिस्प्ले, और प्रोजेक्शन मैपिंग के माध्यम से आदिवासी नायकों की वीरता को दिखाया गया है।लोग QR कोड स्कैन कर हर गाथा को हिन्दी और अंग्रेजी में सुन और देख सकते हैं। 🔸 प्रमुख विद्रोह और नायक हल्बा, सरगुजा, भोपालपट्नम, परलकोट, तारापुर, मुरिया, रानी चौरिस, भूमकाल, सोनाखान विद्रोह, झंडा और जंगल सत्याग्रह जैसे आंदोलनों को यहां जीवंत झांकी के रूप में दिखाया गया है।संग्रहालय में वीर नारायण सिंह, बिरसा मुंडा, रानी गाइडलो, वीर गुंडाधुर, गैंद सिंह, सुकदेव पातर जैसे महान नायकों की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं। 🔸 साल वृक्ष की प्रतीकात्मक झांकी मुख्य प्रवेश द्वार पर 1400 वर्ष पुराने साल वृक्ष की प्रतिकृति बनाई गई है, जिसकी पत्तियों पर 14 विद्रोहों का संक्षिप्त वर्णन अंकित है।बाहर की दीवारों पर वीर नारायण सिंह से जुड़े ऐतिहासिक दस्तावेज — जैसे जेल रिकॉर्ड और सजा के आदेश की प्रतियां — प्रदर्शित की गई हैं। 🔸 सभी के लिए सुविधाएं यहां सीनियर सिटिज़न और दिव्यांग जनों के लिए रैंप और आराम क्षेत्र बनाए गए हैं। परिसर में एक तालाब, सेल्फी पॉइंट्स, और कैफेटेरिया भी है। 🔸 प्रवेश शुल्क जल्द तय होगा यह म्यूजियम आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान परिसर, नवा रायपुर में स्थित है।भविष्य में यहां प्रवेश के लिए टिकट लेना अनिवार्य होगा, हालांकि अभी तक प्रवेश शुल्क का निर्धारण नहीं हुआ है।टिकट काउंटर और चेक प्वाइंट की व्यवस्था पहले से तैयार कर ली गई है। यह संग्रहालय न सिर्फ छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय है — जो भारत के आदिवासी नायकों की अमर गाथाओं को डिजिटल युग में नई पहचान देगा।

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रायपुर में वक्फ बोर्ड ने तीन हिंदू परिवारों को भेजा नोटिस, मजार की जमीन पर अवैध कब्जा का आरोप

रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में वक्फ बोर्ड ने तीन हिंदू परिवारों को नोटिस भेजकर उनके मजार की जमीन पर अवैध कब्जा करने का आरोप लगाया है। इस कदम के बाद परिवारों में हड़कंप मच गया है। नोटिस में जमीन और खसरा विवरण नोटिस में कहा गया है कि परिवार जिस जमीन पर रह रहे हैं, वह मजार ए शरीफ खाकी शाह साहब की दरगाह की वक्फ संपत्ति है। इसमें खसरा नंबर 1888, रकबा 0.101 हेक्टेयर का जिक्र है। नोटिस में परिवारों से वैध दस्तावेज और जवाब मांगा गया है। अगर वे समय पर जवाब नहीं देंगे, तो उनके खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। परिवारों की आपत्ति नोटिस मिलने के बाद प्रभावित परिवारों में चिंता का माहौल है। जिनके घर नोटिस भेजे गए हैं, उनमें डॉक्टर एस एन जौहरी, अरविंद अग्रवाल और राजेश शामिल हैं। राजेश ने बताया कि उन्होंने यह जमीन 2007 में खरीदी थी और तब से अपने परिवार के साथ रह रहे हैं। उनका दावा है कि नोटिस में उल्लिखित खसरा नंबर उनकी जमीन से अलग है। उन्होंने अपने वकील की मदद से वक्फ बोर्ड को जवाब भेजा है और सही खसरा नंबर की जानकारी भी मांगी है। किराया देकर रह सकते हैं वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष सलीम रजा ने बताया कि नोटिस नियम के अनुसार जारी किया गया है। यदि परिवारों द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज सही पाए जाते हैं, तो उन्हें 1 से 3 महीने का समय दिया जाएगा। इस दौरान वे जमीन पर तय किराया देकर रह सकते हैं। कानूनी प्रक्रिया जारी वक्फ बोर्ड और परिवारों के बीच यह विवाद अब कानूनी प्रक्रिया के तहत सुलझाया जाएगा। परिवार अपने दस्तावेजों के आधार पर वैधता साबित करने की कोशिश कर रहे हैं।

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धान खरीदी से पहले सहकारी कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा — 3 नवंबर से अनिश्चितकालीन आंदोलन की चेतावनी

छत्तीसगढ़ में इस साल 15 नवंबर से धान खरीदी शुरू होने जा रही है, लेकिन इससे पहले ही राज्य सरकार के लिए बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। सहकारी समिति कर्मचारी महासंघ और धान खरीदी ऑपरेटर संघ ने सरकार के खिलाफ तीन नवंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी दी है। संघ ने आरोप लगाया है कि सरकार ने उनकी चार सूत्रीय मांगों को पूरा करने का पिछले साल आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। कर्मचारियों का कहना है कि अगर इस बार भी उनकी मांगों पर निर्णय नहीं लिया गया, तो वे धान खरीदी सीजन का पूर्ण बहिष्कार करेंगे। 24 अक्टूबर से शुरू होगा चरणबद्ध आंदोलन:कर्मचारी महासंघ ने आंदोलन की रूपरेखा जारी करते हुए बताया — कर्मचारी बोले — भविष्य से जुड़ी हैं हमारी मांगें:संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि यह आंदोलन सिर्फ वेतन या भत्तों के लिए नहीं, बल्कि लगभग 15,000 सहकारी समिति कर्मचारियों और 39 उपार्जन केंद्रों के संविदा कंप्यूटर ऑपरेटरों के भविष्य से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि सरकार की निष्क्रियता के कारण कर्मचारियों में गहरा आक्रोश है। अगर हड़ताल शुरू होती है, तो इसका सीधा असर धान उपार्जन प्रक्रिया पर पड़ेगा, जिसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी। पिछले वर्ष भी मिला था आश्वासन:संघ नेताओं ने बताया कि बीते वर्ष भी धान खरीदी से पहले आंदोलन किया गया था। उस समय शासन ने उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई का वादा किया था, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। कर्मचारी और ऑपरेटरों ने किया खरीदी का बहिष्कार करने का ऐलान:संघ के नेताओं ने साफ कहा है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे धान खरीदी में भाग नहीं लेंगे। इस स्थिति में धान खरीदी केंद्रों पर असर दिखना तय माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह हड़ताल लंबी चली, तो इससे प्रदेश के लाखों किसानों को नुकसान हो सकता है, क्योंकि धान खरीदी छत्तीसगढ़ की कृषि अर्थव्यवस्था की रीढ़ है।

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