Religion

मावली माता के ऐतिहासिक मंदिर में उमड़ी आस्था, दूर-दूर से पहुंच रहे श्रद्धालु

बासंती चैत्र नवरात्र के अवसर पर भाटापारा नगर और आसपास का पूरा क्षेत्र भक्ति में डूबा हुआ है। सुबह से लेकर देर रात तक श्रद्धालु माता की पूजा-अर्चना में लगे हुए हैं। नगर के प्राचीन मंदिरों में विशेष उत्साह देखा जा रहा है। शीतला माता मंदिर में दिनभर लगी रहती है भीड़ मातादेवालय वार्ड स्थित शीतला माता मंदिर में सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें लग जाती हैं। दिनभर पूजा, आरती और भजन-कीर्तन का आयोजन होता है, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हो रहे हैं। मावली माता मंदिर सिंगारपुर बना आस्था का केंद्र क्षेत्र के ऐतिहासिक मावली माता मंदिर में इस बार प्रदेशभर से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। यहां कुल 7,341 ज्योति कलश प्रज्ज्वलित किए गए हैं, जिनमें 190 आजीवन ज्योति कलश और 7,151 सामान्य ज्योति कलश शामिल हैं। 500 वर्ष से अधिक पुराना मंदिर करीब 500 वर्ष से भी अधिक प्राचीन इस मंदिर में देशभर से भक्त अपनी मनोकामनाओं के लिए ज्योति जलाते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से की गई प्रार्थना माता मावली अवश्य पूरी करती हैं, इसी विश्वास के कारण हर वर्ष यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। दो किलोमीटर लंबी कतार में दर्शन मंदिर में दर्शन के लिए भक्तों को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। कई श्रद्धालु लगभग दो किलोमीटर लंबी लाइन में लगकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। प्रशासन और मंदिर समिति द्वारा भीड़ को नियंत्रित करने के लिए व्यवस्था की गई है।

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नवरात्र के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा, दंतेश्वरी मंदिर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

चैत्र नवरात्र के तीसरे दिन शनिवार को मां चंद्रघंटा की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। दंतेश्वरी मंदिर में सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं। दूर-दराज से पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं ने माता के दरबार में दर्शन कर सुख, समृद्धि और शांति की कामना की। मंदिर परिसर जयकारों से गूंजता रहा। मां चंद्रघंटा की पूजा का विशेष महत्व धार्मिक मान्यता के अनुसार मां चंद्रघंटा की आराधना से भय का नाश होता है तथा साहस, मानसिक शांति और आत्मविश्वास की प्राप्ति होती है। इसी विश्वास के साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे और माता के चरणों में माथा टेककर आशीर्वाद लिया। मनोकामना ज्योति से जगमगाया मंदिर परिसर नवरात्र के अवसर पर मंदिर में हजारों श्रद्धालुओं द्वारा मनोकामना ज्योति प्रज्वलित की जा रही है। दीपों की रोशनी से पूरा परिसर आलोकित हो उठा है। भक्त अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए माता से प्रार्थना कर रहे हैं। सुबह की आरती से लेकर देर रात तक दर्शन के लिए लंबी कतार बनी रहती है। भीड़ नियंत्रण के लिए विशेष इंतजाम श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए मंदिर समिति ने विशेष व्यवस्था की है। परिसर में डोम शेड और अतिरिक्त टेंट लगाए गए हैं, ताकि धूप या बारिश से भक्तों को परेशानी न हो। सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्वयंसेवक भी तैनात हैं। बारिश से मिली राहत, मौसम रहा सुहावना पिछले दो दिनों से हो रही बारिश के कारण तापमान में गिरावट आई है, जिससे श्रद्धालुओं को लंबी कतारों में खड़े होने में राहत मिली। शनिवार को दिनभर बादल छाए रहने से दर्शन के लिए पहुंचे लोगों को मौसम अनुकूल मिला। आस्था का प्रमुख केंद्र बना दंतेवाड़ा इन दिनों दंतेवाड़ा स्थित दंतेश्वरी मंदिर श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है। एक ओर भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है, वहीं प्रशासन और मंदिर समिति द्वारा सुचारु व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है। अगले दिनों में विशेष पूजा कार्यक्रम नवरात्र के आगामी दिनों में भी विशेष पूजा-अर्चना जारी रहेगी। पंचमी तिथि पर मां स्कंदमाता के स्वरूप की विशेष पूजा की जाएगी, जिसमें विधिवत हवन और भोग अर्पित किया जाएगा। धार्मिक मान्यता है कि मां स्कंदमाता की उपासना से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और साधक को ज्ञान तथा शक्ति की प्राप्ति होती है।

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राजनांदगांव धर्मांतरण मामले में फरार आरोपी डेविड चाको गिरफ्तार

छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में अवैध धर्मांतरण से जुड़े मामले में मुख्य आरोपी डेविड चाको (55) को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। उस पर लोगों को लालच देकर धर्म परिवर्तन कराने और बिना अनुमति के आश्रम संचालित करने का आरोप है। प्रार्थना सभा की आड़ में जुटाए जाते थे लोग मामला लालबाग थाना क्षेत्र की सुकुलदेहन चौकी का है। 8 जनवरी को मिली शिकायत के बाद पुलिस ने जांच शुरू की। जांच में सामने आया कि आरोपी अपने घर पर प्रार्थना सभाएं आयोजित कर लोगों को बुलाता था और उन्हें विभिन्न तरह के प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित करता था। पुलिस के अनुसार, आश्रम बिना वैधानिक अनुमति के संचालित किया जा रहा था और वहां नाबालिग बच्चों को भी रखा गया था। आरोपी पिछले करीब दो महीनों से फरार था, जिसे धर्मापुर क्षेत्र से पकड़ा गया। प्रचार सामग्री और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त छापेमारी के दौरान पुलिस ने बड़ी मात्रा में धार्मिक प्रचार से जुड़ी सामग्री और इलेक्ट्रॉनिक सामान बरामद किया। इनमें लैपटॉप, मोबाइल फोन, सोलर प्रोजेक्टर, चर्च से संबंधित रजिस्टर, सदस्य सूची, आवेदन फॉर्म और प्रशिक्षण दस्तावेज शामिल हैं। इसके अलावा भविष्य में धर्मांतरण की योजनाओं से जुड़े संदिग्ध दस्तावेज और पुस्तकें भी जब्त की गई हैं। विदेशी फंडिंग की भी जांच पुलिस को शक है कि इस गतिविधि में विदेशी फंडिंग का इस्तेमाल हो सकता है। इस दिशा में आरोपी के बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन की जांच की जा रही है ताकि नेटवर्क की पूरी कड़ियों का पता लगाया जा सके। धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम के तहत केस दर्ज डेविड चाको के खिलाफ छत्तीसगढ़ धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम की धारा 3, 4 और 5 के साथ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 299 के तहत मामला दर्ज किया गया है। 21 मार्च को गिरफ्तारी के बाद उसे न्यायालय में पेश किया गया, जहां से पुलिस ने रिमांड की मांग की है। मामले में अन्य सहयोगियों की भूमिका की भी जांच जारी है। पहले भी विवादों में रहा आरोपी पुलिस के अनुसार आरोपी पहले भी धर्मांतरण और प्रार्थना सभाओं को लेकर विवादों में रहा है। नेहरू नगर स्थित उसके निवास पर विरोध के बाद उसने अपनी गतिविधियां धर्मापुर के एक निजी भवन में स्थानांतरित कर दी थीं। वह स्वयं को एक चर्च संगठन का प्रतिनिधि बताकर कार्यक्रम संचालित करता था। केरल का रहने वाला, अंतरराष्ट्रीय संपर्कों की जांच जांच में सामने आया है कि डेविड चाको मूल रूप से केरल के एर्नाकुलम जिले का निवासी है और कई वर्षों से राजनांदगांव में रह रहा था। पुलिस को जानकारी मिली है कि वह वर्ष का कुछ समय भारत और कुछ समय विदेश में बिताता था, जिसके चलते उसके अंतरराष्ट्रीय संपर्कों की भी पड़ताल की जा रही है। डिजिटल रिकॉर्ड और तस्वीरों में वह धार्मिक सभाओं में उपदेश देते तथा जलस्रोतों में बपतिस्मा कराते हुए दिखाई दिया है, जिससे उसके सक्रिय प्रचार कार्यों की पुष्टि होती है।

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बिरगांव के गाज़ी नगर जामा मस्जिद में अदा हुई ईद की नमाज़, समाजसेवक पंकज शर्मा व महापौर नंदलाल देवांगन रहे शामिल

बिरगांव के गाज़ी नगर स्थित जामा मस्जिद में ईद की नमाज़ बड़े ही अकीदत, श्रद्धा और शांति के साथ अदा की गई। सुबह से ही नमाज़ियों का मस्जिद परिसर में पहुंचना शुरू हो गया था और देखते ही देखते भारी संख्या में लोग नमाज़ के लिए जुट गए। नमाज़ अदा करने के बाद लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाकर ईद की मुबारकबाद दी तथा अमन-चैन, भाईचारे और खुशहाली की दुआ मांगी। इस दौरान पूरा इलाका ईद की खुशियों और उत्साह से सराबोर नजर आया। इस अवसर पर समाजसेवक पंकज शर्मा, बिरगांव नगर निगम के महापौर नंदलाल देवांगन, वार्ड 28 के पार्षद इकराम अहमद तथा वार्ड 29 के पार्षद मोहम्मद रियाज़ भी उपस्थित रहे। सभी जनप्रतिनिधियों ने मुस्लिम समुदाय के लोगों को ईद की शुभकामनाएं दीं और कहा कि ईद का त्योहार प्रेम, सद्भाव और एकता का प्रतीक है, जो समाज को जोड़ने का संदेश देता है। ईद के मौके पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों, बुजुर्गों, युवाओं और बच्चों ने मिलकर त्योहार की खुशियां साझा कीं। लोगों ने एक-दूसरे के घर जाकर मुबारकबाद दी और मिठाइयों का आदान-प्रदान किया। यह पावन पर्व आपसी प्रेम, सौहार्द और इंसानियत का संदेश देता है, जिसे पूरे उत्साह और भाईचारे के साथ मनाया गया।

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धर्मांतरण पर सख्त कानून: छत्तीसगढ़ में आजीवन कारावास तक की सजा, शादी के लिए धर्म बदलना भी अवैध

छत्तीसगढ़ विधानसभा ने “धर्म स्वतंत्रता विधेयक, 2026” को पास कर दिया है, जिसके तहत अवैध धर्मांतरण कराने पर कड़े दंड का प्रावधान किया गया है। सरकार का कहना है कि यह कानून बल, प्रलोभन, धोखाधड़ी या गलत जानकारी देकर कराए जाने वाले धर्मांतरण को रोकने के लिए लाया गया है। \ नए कानून के अनुसार, अवैध तरीके से धर्मांतरण कराने पर दोषी व्यक्ति को 7 से 10 साल तक की जेल और कम से कम 5 लाख रुपये जुर्माना होगा। यदि पीड़ित नाबालिग, महिला, अनुसूचित जाति, जनजाति या अन्य पिछड़ा वर्ग से है, तो सजा 10 से 20 साल तक और न्यूनतम जुर्माना 10 लाख रुपये होगा। सामूहिक धर्मांतरण के मामलों में सजा और भी कठोर है—10 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की जेल और कम से कम 25 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। अगर कोई व्यक्ति पहले भी ऐसे मामले में दोषी ठहराया जा चुका है और दोबारा अपराध करता है, तो उसे सीधे उम्रकैद हो सकती है। कानून में यह भी प्रावधान है कि स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करने वाले व्यक्ति को 60 दिन पहले जिला कलेक्टर को आवेदन देना होगा। धार्मिक अनुष्ठान कराने वाले पादरी, मौलवी या पुजारी को भी पूर्व सूचना देना अनिवार्य होगा। बिना अनुमति धर्मांतरण कराना अवैध माना जाएगा और तुरंत गिरफ्तारी हो सकती है। शादी के लिए धर्म बदलने पर भी सख्ती की गई है। यदि विवाह केवल धर्म परिवर्तन के उद्देश्य से किया गया पाया गया, तो अदालत उसे शून्य घोषित कर सकती है। सरकार ने विदेशी फंडिंग और संस्थाओं की भूमिका पर भी निगरानी कड़ी कर दी है। दोषी पाए जाने पर संस्था का पंजीकरण रद्द किया जा सकता है। मामलों की सुनवाई के लिए प्रत्येक जिले में विशेष अदालतें बनाई जाएंगी, ताकि छह महीने के भीतर फैसला हो सके।

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छत्तीसगढ़ में RSS का महा अभियान: 30 लाख से ज्यादा परिवारों तक पहुंचा संघ, संगठन में भी होगा बड़ा बदलाव

Rashtriya Swayamsevak Sangh ने अपने शताब्दी वर्ष के मौके पर Chhattisgarh में अब तक का सबसे बड़ा ‘गृह संपर्क अभियान’ पूरा करने का दावा किया है। इस अभियान के दौरान स्वयंसेवकों ने करीब 30.55 लाख परिवारों तक पहुंच बनाकर सीधे संवाद किया, जिससे संगठन की जमीनी पकड़ और मजबूत हुई है। संघ के अनुसार, प्रदेश भर में 2,034 बड़े कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें लगभग 9 लाख से अधिक लोगों ने भाग लिया। उल्लेखनीय बात यह रही कि इन कार्यक्रमों में महिलाओं की भागीदारी पुरुषों से ज्यादा रही। संपर्क अभियान के तहत 13 हजार से अधिक गांवों और 600 से ज्यादा शहरी बस्तियों को कवर किया गया। संगठन ने भविष्य में निर्णय प्रक्रिया को तेज और प्रभावी बनाने के लिए अपने ढांचे में बदलाव की भी घोषणा की है। मार्च 2027 से मौजूदा प्रांत व्यवस्था की जगह संभाग आधारित संरचना लागू की जाएगी, जिसके तहत देश को 9 क्षेत्रों और 85 संभागों में विभाजित किया जाएगा। संघ के कार्य विस्तार की बात करें तो प्रदेश के सभी 34 जिलों में 2,000 से अधिक शाखाएं नियमित रूप से संचालित हो रही हैं। इनमें बड़ी संख्या विद्यार्थी और महाविद्यालयीन शाखाओं की है, जो युवाओं के बढ़ते जुड़ाव को दर्शाती है। राजधानी Raipur में भी संघ की गतिविधियां तेजी से बढ़ी हैं, जहां सैकड़ों बस्तियों में शाखाएं सक्रिय बताई जा रही हैं। युवा वर्ग को जोड़ने के लिए ‘युवा संगम’ कार्यक्रम भी आयोजित किए गए, जिनमें 23 हजार से अधिक युवाओं ने हिस्सा लिया। इन कार्यक्रमों में राष्ट्र निर्माण, उद्यमिता और सामाजिक विषयों पर चर्चा की गई। शताब्दी वर्ष के दौरान संघ ने ‘पंच परिवर्तन’—कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी, नागरिक कर्तव्य और सामाजिक समरसता—को समाज में व्यवहारिक रूप से अपनाने का लक्ष्य रखा है।

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बिलासपुर में ईरान के सुप्रीम लीडर की मौत पर जश्न, हिंदू नेता की आपत्तिजनक टिप्पणी पर FIR दर्ज

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में हिंदू संगठन के नेता ठाकुर राम सिंह के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। आरोप है कि राम सिंह ने ईरान के सुप्रीम लीडर आयत उल्लाह अली खामेनेई की मौत पर जश्न मनाया और मिठाइयां बांटी। साथ ही उन्होंने सोशल मीडिया पर मुस्लिम समुदाय के खिलाफ अपमानजनक और भड़काऊ टिप्पणियां कीं, जिसमें उन्हें देशद्रोही बताया गया और ईरान भेजने की बात कही गई। यह घटना सरकंडा थाना क्षेत्र की है। मामला सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो और पोस्ट के बाद उजागर हुआ। मुस्लिम समुदाय के लोगों ने इस पर गहरी नाराजगी जताई और पुलिस से कार्रवाई की मांग की। घटना का क्रम 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर आयत उल्लाह अली खामेनेई की मौत हुई। इस खबर के बाद बिलासपुर में ठाकुर राम सिंह ने जश्न मनाया और मिठाइयां बांटी। उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक वीडियो पोस्ट किया जिसमें उन्होंने खामेनेई के प्रति मातम मनाने वालों के खिलाफ आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया और भारतीय मुसलमानों को देशद्रोही करार देते हुए ईरान भेजने की बात कही। मुस्लिम समाज में नाराजगी राम सिंह के इस व्यवहार और पोस्ट के सामने आने के बाद मुस्लिम समाज में विरोध शुरू हो गया। बड़ी संख्या में लोग सरकंडा थाने पहुंचे और एफआईआर दर्ज करने की मांग की। लोगों का आरोप है कि राम सिंह की टिप्पणी से उनकी धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं और शहर की शांति भी प्रभावित हो सकती है। समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि बिलासपुर हमेशा से शांतिपूर्ण और भाईचारे वाला शहर रहा है। ऐसे भड़काऊ बयानों से हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच सौहार्द बिगड़ने की संभावना होती है। उन्होंने प्रशासन से इस तरह की किसी भी भड़काऊ टिप्पणी पर सख्त कार्रवाई की अपील की। पुलिस की कार्रवाई सरकंडा थाने की पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए ठाकुर राम सिंह के खिलाफ FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया पोस्ट की जांच की जा रही है और जांच के आधार पर उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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बलरामपुर में दुष्कर्म पीड़िता के परिवार का सामाजिक बहिष्कार, पंचायत ने रखीं अपमानजनक शर्तें

छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में दुष्कर्म पीड़िता को न्याय दिलाने के बजाय पंचायत द्वारा उसके परिवार के खिलाफ सामाजिक दंड सुनाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि पंचायत ने पीड़िता के परिवार को 12 साल तक समाज से अलग रखने का फैसला किया और कई अपमानजनक शर्तें भी रख दीं। यह मामला वाड्रफनगर विकासखंड के बसंतपुर थाना क्षेत्र के एक गांव का है। पीड़िता के परिजनों के अनुसार, पंचायत की बैठक में सरपंच और पंचों ने आरोपी युवक को सजा देने के बजाय पीड़िता के परिवार को ही दोषी ठहराते हुए उनके बहिष्कार का निर्णय लिया। पंचायत के कथित फैसले के मुताबिक, पीड़िता का परिवार अगले 12 वर्षों तक गांव के सामाजिक कार्यक्रमों, धार्मिक आयोजनों और अन्य सामुदायिक गतिविधियों में शामिल नहीं हो सकेगा। पंचायत की विवादित शर्तें परिजनों का आरोप है कि पंचायत ने समाज में दोबारा शामिल होने के लिए अपमानजनक शर्तें रखीं। सरपंच जवाहिर लाल के अनुसार, अगर परिवार समाज में वापस आना चाहता है तो उन्हें पूरे गांव के लोगों के पैर धोकर उसी पानी से स्नान करना होगा। इसके अलावा पूरे गांव को बकरा-भात और शराब का भोज देने की भी बात कही गई। पंचायत के इस फैसले से पीड़ित परिवार काफी डरा और परेशान है। उन्होंने इस मामले की शिकायत एसडीओपी कार्यालय में करते हुए प्रशासन से न्याय की मांग की है। फिलहाल पुलिस और प्रशासन मामले की जानकारी लेकर पंचायत को समझाने का प्रयास कर रहे हैं। सरपंच ने आरोपों से किया इनकार इस मामले में सरपंच जवाहिर लाल का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें पंचायत द्वारा परिवार के बहिष्कार की बात कही जा रही है। हालांकि वीडियो वायरल होने के बाद सरपंच ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि पंचायत ने ऐसा कोई फैसला नहीं लिया है और यह पंचायत को बदनाम करने की साजिश है। सात महीने की गर्भवती है पीड़िता जानकारी के अनुसार युवक और युवती एक ही गांव के रहने वाले हैं और पिछले करीब एक साल से दोनों के बीच संबंध थे। युवती का आरोप है कि युवक ने उससे शादी का वादा किया था, लेकिन बाद में शादी से इंकार करता रहा। इस दौरान युवती गर्भवती हो गई। जब युवती ने परिवार को इस बारे में बताया, तो परिजनों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। 18 फरवरी को बसंतपुर थाने में मामला दर्ज किया गया था। इसके बाद पुलिस ने 22 फरवरी को आरोपी युवक को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। बताया जा रहा है कि 25 फरवरी को गांव में पंचायत की बैठक हुई, जिसके बाद पीड़िता के परिवार के सामाजिक बहिष्कार की बात सामने आई। वाड्रफनगर एसडीएम नीरनिधि नंदेहा ने कहा कि मामले की जानकारी मिलने के बाद प्रशासन जांच कर रहा है और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

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होली 2026: चेहरे से रंग हटाने के लिए बेस्ट घरेलू नुस्खे, केमिकल रंगों से बचें

होली और होलिका दहन के साथ ही पूरे राज्य में त्योहार की शुरुआत हो जाएगी। इस दौरान उत्साह में कई लोग केमिकल रंगों का इस्तेमाल करते हैं, जो त्वचा के लिए हानिकारक हो सकते हैं। रंग जल्दी निकलने की जल्दी में लोग कई बार डीटर्जेंट या अन्य हार्श केमिकल्स का इस्तेमाल करते हैं, जो त्वचा को नुकसान पहुंचा सकते हैं। खासकर बीपी और शुगर के मरीज अपने रंग खेलने में सतर्क रहें। होली खेलने से पहले और बाद में कुछ सावधानियों को अपनाना जरूरी है: इसके साथ ही, घरेलू उपाय जैसे बेसन-दही, हल्का नारियल तेल, और गुलाब जल का इस्तेमाल रंग हटाने में सबसे सुरक्षित और प्रभावी तरीका है। इस तरह सावधानी बरतकर आप खुशियों का रंग बनाए रख सकते हैं और त्वचा को नुकसान से बचा सकते हैं।

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होली से पहले नशे में वाहन चलाने वालों पर पुलिस की सख्त कार्रवाई, 130 वाहन जब्त

होली पर्व से पहले राजधानी में शराब के नशे में वाहन चलाने वालों के खिलाफ पुलिस ने व्यापक अभियान चलाया। इस दौरान 130 वाहन चालकों की गाड़ियां जब्त की गईं और कई चालक कार्रवाई के बाद पैदल ही घर लौटते नजर आए। पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला के निर्देश पर, पुलिस उपायुक्त यातायात एवं प्रोटोकॉल विकास कुमार के मार्गदर्शन में शहरभर में कुल 42 चेकिंग पॉइंट स्थापित किए गए। अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त विवेक शुक्ला और दौलत राम पोर्ते के नेतृत्व में सहायक पुलिस आयुक्तों की टीम ने शाम से देर रात तक वाहन चालकों की सघन जांच की। सभी चेकिंग पॉइंट पर ब्रीथ एनालाइजर मशीन से वाहन चालकों की जांच की गई। जांच के दौरान 130 वाहन चालक शराब के नशे में वाहन चलाते पाए गए। कार्रवाई में 39 कार, 73 मोटरसाइकिल, 3 ट्रक और 15 टाटा एस पिकअप व ई-रिक्शा जब्त किए गए। सभी के खिलाफ मोटरयान अधिनियम की धारा 185 के तहत कानूनी कार्रवाई की गई। जब्त वाहन यातायात मुख्यालय और संबंधित थानों में सुरक्षित रखे गए हैं। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि ये मामले होली के बाद न्यायालय में प्रस्तुत किए जाएंगे। शराब पीकर वाहन चलाने पर प्रत्येक मामले में 10,000 से 15,000 रुपए तक जुर्माना लगाया जा सकता है। पुलिस ने चेतावनी दी है कि होली तक विशेष रूप से रात के समय चेकिंग जारी रहेगी और नशे में वाहन चलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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