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रायपुर में ट्रांसफॉर्मर में आग से हड़कंप, भारत माता स्कूल इलाके की बिजली सप्लाई ठप

राजधानी रायपुर के भारत माता स्कूल इलाके में 200 KVA के ट्रांसफॉर्मर में अचानक आग लगने से अफरा-तफरी मच गई। घटना के बाद पूरे इलाके की बिजली आपूर्ति बाधित हो गई। आग लगने के कारणों का अभी तक स्पष्ट पता नहीं चल सका है और तकनीकी टीम इसकी जांच में जुटी हुई है। घटना की जानकारी मिलते ही बिजली विभाग की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और हालात को नियंत्रित किया। ट्रांसफॉर्मर और उससे जुड़े उपकरणों की जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही बिजली सप्लाई बहाल करने के प्रयास किए जा रहे हैं। प्रारंभिक जांच में ओवरलोडिंग को संभावित कारण माना जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार गर्मियों में बिजली की मांग बढ़ने से ट्रांसफॉर्मर पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे ओवरहीटिंग और आग लगने जैसी घटनाएं हो सकती हैं। हालांकि, वास्तविक वजह जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगी। विशेषज्ञों के मुताबिक, 200 KVA का ट्रांसफॉर्मर अपनी निर्धारित क्षमता के अनुसार काम करता है, लेकिन यदि उस पर लगातार अधिक लोड डाला जाए तो उसका तापमान तेजी से बढ़ने लगता है। यदि कूलिंग या सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त न हो, तो आग लगने का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा ट्रांसफॉर्मर में आग लगने के अन्य कारणों में ऑयल का अधिक गर्म होना या खराब गुणवत्ता, आंतरिक खराबी, शॉर्ट सर्किट, कनेक्शन पॉइंट पर स्पार्किंग, वोल्टेज में उतार-चढ़ाव और समय पर रखरखाव न होना शामिल हैं। फिलहाल विभाग सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच कर रहा है।

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समीक्षा बैठक में डिप्टी सीएम अरुण साव का सख्त संदेश, अवैध प्लॉटिंग पर अफसरों पर भी कार्रवाई तय

छत्तीसगढ़ में नगर पंचायत क्षेत्रों में अवैध प्लॉटिंग, अतिक्रमण और अव्यवस्थित निर्माण को लेकर सरकार ने सख्त रुख अपना लिया है। मंगलवार को उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने नगर पंचायतों के कामकाज की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि इन गतिविधियों पर हर हाल में रोक लगाई जाए। बैठक में मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा गया कि यदि कहीं भी लापरवाही पाई गई, तो संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करते हुए सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही 31 मई तक नई संपत्तियों पर कर लगाने की प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए गए। उप मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को नई कार्य प्रणाली अपनाने और रोजाना सुबह अपने-अपने क्षेत्रों का निरीक्षण करने को कहा। क्षेत्रीय संयुक्त संचालकों को भी हर तिमाही सभी निकायों का निरीक्षण कर सीधे मुख्यालय को रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया जा सके। बरसात को ध्यान में रखते हुए 31 मई तक नालों और नालियों की सफाई पूरी करने के आदेश दिए गए हैं, ताकि जलभराव की समस्या न हो। इसके अलावा हर भवन में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सुनिश्चित करने, पाइपलाइन लीकेज सुधारने और सभी घरों तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने पर जोर दिया गया है। आने वाले 10 वर्षों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पेयजल योजनाएं तैयार करने के निर्देश भी दिए गए हैं। बैठक में निकाय कर्मचारियों को समय पर वेतन देने और बिजली बिल का नियमित भुगतान सुनिश्चित करने की बात कही गई। संपत्ति कर, जल कर और यूजर चार्ज की वसूली सख्ती से करने के निर्देश भी दिए गए। साथ ही एनर्जी ऑडिट कर अनावश्यक बिजली कनेक्शन हटाने की बात कही गई। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 के तहत स्वीकृत मकानों को एक साल के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि आवास स्वीकृति के एक सप्ताह के भीतर भवन निर्माण की अनुमति जारी करें और लाभार्थियों को योजना की पूरी जानकारी दें। सरकार ने साफ कर दिया है कि अब कागजी कार्यवाही के बजाय जमीनी स्तर पर काम दिखना चाहिए और सभी योजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए।

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छत्तीसगढ़ में 3 महीने तक सरकारी कर्मचारियों की छुट्टियों पर रोक, बिना अनुमति अवकाश पर सख्ती

छत्तीसगढ़ सरकार ने सरकारी कर्मचारियों की छुट्टियों को लेकर बड़ा फैसला लिया है। अगले तीन महीनों तक बिना पूर्व अनुमति किसी भी कर्मचारी को अवकाश पर जाने की अनुमति नहीं होगी। यह निर्णय जनगणना और सुशासन तिहार जैसे महत्वपूर्ण कार्यों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी निर्देशों में साफ कहा गया है कि बिना स्वीकृति के छुट्टी लेना गंभीर अनुशासनहीनता माना जाएगा। ऐसे मामलों में संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। निर्देशों के अनुसार, कोई भी कर्मचारी सक्षम अधिकारी की मंजूरी के बिना अवकाश पर नहीं जा सकेगा। यदि कोई बिना अनुमति अनुपस्थित पाया जाता है, तो इसे सेवा में बाधा मानते हुए अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। आपात स्थिति में भी कर्मचारियों को पहले फोन या अन्य डिजिटल माध्यम से सूचना देना अनिवार्य होगा। बाद में कार्यालय पहुंचकर इसकी लिखित पुष्टि करनी होगी। इसके अलावा, जो कर्मचारी लंबी छुट्टी पर जाना चाहते हैं, उन्हें पहले अपने कार्यभार को किसी अन्य अधिकारी या कर्मचारी को सौंपना जरूरी होगा। सरकार ने सभी विभागों, संभागायुक्तों और कलेक्टरों को इन निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। इस फैसले को प्रशासनिक कार्यों को सुचारू बनाए रखने और बड़े सरकारी कार्यक्रमों को समय पर पूरा करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

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फाइल दबाने पर गिरी गाज: बिलासपुर में 2 अधिकारी मुख्यालय अटैच, युवक के ‘बादाम विरोध’ के बाद कार्रवाई

बिलासपुर में फ्लैट के नामांतरण की फाइल लंबे समय तक लंबित रखने के मामले में दो अधिकारियों पर कार्रवाई की गई है। वीडियो वायरल होने के बाद जांच में लापरवाही सामने आने पर दोनों को तत्काल प्रभाव से मुख्यालय, नवा रायपुर अटैच कर दिया गया है। मामले के अनुसार, आवेदक तरुण साहू ने 17 मार्च 2025 को नाम ट्रांसफर के लिए आवेदन किया था। 11 नवंबर 2025 तक सभी प्रक्रियाएं पूरी कर पत्र भी जारी कर दिया गया, लेकिन इसके बावजूद फाइल आवेदक को नहीं सौंपी गई और दफ्तर में ही पड़ी रही। इस वजह से उसे करीब एक साल तक दफ्तर के चक्कर लगाने पड़े। फाइल नहीं मिलने से नाराज होकर युवक ने अनोखे तरीके से विरोध जताया। वह हाउसिंग बोर्ड कार्यालय आधा किलो बादाम लेकर पहुंचा और अधिकारियों से कहा कि “इसे खाइए, याददाश्त बढ़ेगी, जब फाइल याद आ जाए तो बता दीजिए।” इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। जांच के बाद विभाग ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए संपदा अधिकारी-कार्यपालन अभियंता एलपी बंजारे और एक अन्य संपदा प्रबंधक को मुख्यालय अटैच कर दिया। विभाग के आयुक्त ने कहा है कि आम लोगों के काम में देरी और लापरवाही बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इधर, वीडियो वायरल होने के बाद हाउसिंग बोर्ड कार्यालय की एक महिला अधिकारी समेत अन्य कर्मचारियों ने भी एसपी कार्यालय पहुंचकर युवक पर आरोप लगाए हैं। उन्होंने जातिगत टिप्पणी और अन्य आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की है। हालांकि फिलहाल इस शिकायत पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। पूरे मामले को लेकर सोशल मीडिया पर बहस जारी है। एक ओर विभागीय कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं, तो दूसरी ओर युवक ने भी अपना पक्ष रखते हुए वीडियो जारी किया है।

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दुर्ग में बिना हेलमेट चालकों पर कड़ा एक्शन, 4 महीनों में 23 हजार चालान

दुर्ग में सड़क हादसों पर लगाम लगाने के लिए यातायात पुलिस ने बिना हेलमेट दोपहिया चलाने वालों के खिलाफ सख्त अभियान चला रखा है। साल 2026 के शुरुआती चार महीनों में ही 23,088 वाहन चालकों पर कार्रवाई की गई है। पुलिस के मुताबिक, इन चालानों से अब तक कुल 1 करोड़ 15 लाख 44 हजार रुपए का जुर्माना वसूला गया है। यह आंकड़ा बताता है कि नियमों के उल्लंघन पर इस बार कार्रवाई पहले के मुकाबले काफी तेज हुई है। पिछले वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो साल 2023 में 1653 मामलों में 8.26 लाख रुपए, 2024 में 3961 मामलों में 19.80 लाख रुपए और 2025 में 2328 मामलों में 11.64 लाख रुपए का जुर्माना वसूला गया था। इससे साफ है कि 2026 में अभियान और ज्यादा सख्ती के साथ चलाया जा रहा है। हादसों के आंकड़े भी चिंताजनक हैं। साल 2025 में बिना हेलमेट सड़क हादसों में 230 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 2026 के पहले चार महीनों में ही 26 लोगों की जान जा चुकी है। पुलिस का कहना है कि हेलमेट पहनने से इनमें से कई जानें बचाई जा सकती थीं। यातायात विभाग का दावा है कि लगातार सख्ती के कारण लोगों में जागरूकता बढ़ी है और अब पहले की तुलना में ज्यादा लोग हेलमेट पहन रहे हैं। इसके बावजूद अभी भी कई लोग नियमों की अनदेखी कर रहे हैं, जिस पर पुलिस नजर बनाए हुए है। अधिकारियों के अनुसार, यह अभियान आगे भी जारी रहेगा। शहर के विभिन्न हिस्सों में रोजाना चेकिंग की जा रही है और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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गर्मी और शादी सीजन का असर, रायपुर से ट्रेनों में ‘नो रूम’… वेटिंग 150 पार

गर्मी की छुट्टियों और शादी के सीजन की वजह से रायपुर से चलने वाली लंबी दूरी की ट्रेनों में भारी भीड़ देखने को मिल रही है। मई तक ज्यादातर ट्रेनों में सीटें फुल हो चुकी हैं और वेटिंग लिस्ट 100 से 150 के पार पहुंच गई है। कई ट्रेनों में ‘नो रूम’ की स्थिति बन गई है, जिससे यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। रायपुर से मुंबई, दिल्ली और वाराणसी जाने वाली ट्रेनों में सबसे ज्यादा दबाव है। इन रूट्स पर कंफर्म टिकट मिलना लगभग नामुमकिन हो गया है। ऐसे में यात्रियों के लिए तत्काल टिकट ही आखिरी विकल्प बचता है, लेकिन वह भी राहत नहीं दे पा रहा है। रेलवे के आरक्षण काउंटर पर स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण है। मुख्य आरक्षण कार्यालय में सुबह से ही लंबी कतारें लग रही हैं। काउंटर खुलते ही कुछ ही मिनटों में तत्काल टिकट खत्म हो जा रहा है। कई यात्रियों को घंटों लाइन में खड़े रहने के बाद भी खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। लाइन में लगे यात्रियों का कहना है कि वे कई दिनों से लगातार प्रयास कर रहे हैं, लेकिन हर बार टिकट नहीं मिल पा रहा। छुट्टियों के चलते परिवार के साथ यात्रा करने की मजबूरी है, लेकिन कंफर्म टिकट मिलना मुश्किल हो गया है। हर साल गर्मी के मौसम में यात्रियों की संख्या बढ़ने से ट्रेनों में दबाव बढ़ता है। इस बार भी स्थिति कुछ ऐसी ही बनी हुई है। हालांकि रेलवे द्वारा समर स्पेशल ट्रेनें चलाई जा रही हैं, लेकिन बढ़ती मांग के सामने ये भी नाकाफी साबित हो रही हैं। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, जिन रूट्स पर यात्रियों की संख्या ज्यादा है, वहां सर्वे किया जा रहा है और जरूरत के अनुसार अतिरिक्त समर स्पेशल ट्रेनें चलाने की योजना बनाई जा रही है, ताकि यात्रियों को राहत मिल सके।

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महिला आरक्षण पर छत्तीसगढ़ में सियासी घमासान, साय सरकार बुलाएगी विशेष सत्रc

महिला आरक्षण बिल को लेकर छत्तीसगढ़ में राजनीति तेज हो गई है। विष्णुदेव साय की सरकार इस मुद्दे पर एक दिन का विशेष सत्र बुलाने की तैयारी में है। यह सत्र इसी महीने आयोजित हो सकता है, जिसमें विपक्ष के रुख के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाने की बात कही जा रही है। रायपुर में आयोजित जनआक्रोश रैली के दौरान मुख्यमंत्री साय ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि महिला आरक्षण के मुद्दे पर उनका रवैया निराशाजनक रहा है। इस रैली का आयोजन भाजपा महिला मोर्चा द्वारा किया गया था, जो बलबीर जुनेजा इंडोर स्टेडियम से शुरू होकर सुभाष स्टेडियम तक पहुंची, जहां सभा आयोजित हुई। विशेष सत्र बुलाने की प्रक्रिया के तहत पहले राज्य कैबिनेट इसकी मंजूरी देती है, जिसके बाद प्रस्ताव को राज्यपाल के पास भेजा जाता है। उनकी स्वीकृति मिलने के बाद ही विधानसभा सत्र आयोजित किया जाता है। महिला आरक्षण को लेकर भाजपा ने देशभर में विरोध प्रदर्शन की रणनीति बनाई है। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ में 20 अप्रैल से प्रदर्शन शुरू हो गए हैं, जो 27 अप्रैल तक जारी रहेंगे। 23 और 24 अप्रैल को प्रदेशभर में महिला सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे, जबकि 26 और 27 अप्रैल को मंडल स्तर पर पुतला दहन किया जाएगा। इससे पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री साय ने कहा था कि 33 प्रतिशत महिला आरक्षण विपक्ष के कारण पारित नहीं हो सका। उन्होंने विपक्षी दलों पर महिलाओं की उम्मीदों को तोड़ने का आरोप लगाया और कहा कि कुछ पार्टियां “फूट डालो और राज करो” की नीति पर काम कर रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि छत्तीसगढ़ में पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं को 57 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है, जबकि विधानसभा में भी महिलाओं की भागीदारी 21-22 प्रतिशत है। वहीं, नरेन्द्र मोदी ने देश को संबोधित करते हुए महिला आरक्षण बिल पास नहीं हो पाने पर महिलाओं से माफी मांगी। उन्होंने विपक्षी दलों पर आरोप लगाया कि उनकी राजनीति के कारण यह बिल पारित नहीं हो सका। लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान संशोधन बिल आवश्यक बहुमत नहीं जुटा सका। बिल के पक्ष में 298 वोट पड़े, जबकि 352 वोटों की जरूरत थी। इस प्रस्ताव में लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने और महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान शामिल था।

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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: पिता की हत्या के मामले में बेटे की सजा उम्रकैद से घटाकर 10 साल

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में पिता की हत्या के आरोप में सजा काट रहे बेटे को राहत देते हुए उसकी सजा कम कर दी है। अदालत ने उम्रकैद की सजा को घटाकर 10 साल कठोर कारावास में बदल दिया है। यह निर्णय छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच, जिसमें मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल शामिल थे, ने सुनाया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि यह घटना पूर्व नियोजित नहीं थी, बल्कि अचानक हुए विवाद और गुस्से में अंजाम दी गई। ऐसे मामलों में हत्या का स्पष्ट इरादा साबित नहीं होता, इसलिए इसे हत्या (IPC 302) के बजाय गैर-इरादतन हत्या (IPC 304 भाग-1) के तहत माना जाना चाहिए। दरअसल, यह मामला वर्ष 2020 का है, जो बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के रामचंद्रपुर थाना क्षेत्र के हरिहरपुर गांव का है। यहां लकड़ी रखने को लेकर पिता और बेटे के बीच विवाद हुआ था। इसी दौरान बेटे महात्मा यादव ने गुस्से में आकर अपने पिता जंगली यादव को पिकअप वाहन से कुचल दिया था। इस घटना में पिता गंभीर रूप से घायल हो गए थे और इलाज के दौरान करीब 9 दिन बाद उनकी मौत हो गई थी। घटना के बाद पुलिस ने आरोपी बेटे के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया था। जांच पूरी होने के बाद चार्जशीट पेश की गई और निचली अदालत ने ट्रायल के बाद आरोपी को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। हालांकि, आरोपी ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी। सुनवाई के दौरान अदालत ने सभी साक्ष्यों और परिस्थितियों का विश्लेषण किया। कोर्ट ने पाया कि घटना अचानक हुई थी और इसमें पूर्व योजना का कोई प्रमाण नहीं है। हालांकि, आरोपी को यह पता था कि उसका कृत्य जानलेवा हो सकता है। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने सजा में संशोधन करते हुए हत्या की धारा को बदल दिया और उम्रकैद की सजा को घटाकर 10 साल कर दिया। अदालत ने अपील को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए निर्देश दिया कि आरोपी को अब शेष सजा जेल में ही पूरी करनी होगी।

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कोरिया में अवैध कोयला खनन पर बड़ी कार्रवाई, सुरंगों को ब्लास्ट कर बंद करने की तैयारी

छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में अवैध कोयला खनन के खिलाफ प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए लगातार दूसरे दिन भी कार्रवाई जारी रखी। रायपुर से पहुंची सेंट्रल फ्लाइंग स्क्वॉड की टीम ने देवखोल और भालूमाड़ा क्षेत्रों का निरीक्षण किया और अवैध खनन स्थलों का चिन्हांकन किया। अधिकारियों ने इन सुरंगों को ब्लास्टिंग के जरिए स्थायी रूप से बंद करने के निर्देश दिए हैं। बताया जा रहा है कि इस मामले को सामने आने के बाद जिला स्तर पर गठित टास्क फोर्स ने पूरे इलाके में व्यापक निरीक्षण अभियान चलाया। हालांकि निरीक्षण के दौरान मौके पर कोयला या खनन सामग्री नहीं मिली, लेकिन अधिकारियों के अनुसार यहां पहले बड़े पैमाने पर अवैध खनन किया जाता रहा है। इससे एक दिन पहले शनिवार को भी संयुक्त टीम ने पटना तहसील के देवखोल जंगल क्षेत्र में सघन अभियान चलाया था। इस दौरान करीब 6 टन से अधिक अवैध कोयला जब्त किया गया था और कई सुरंगों को ध्वस्त किया गया, जिनका उपयोग लंबे समय से खनन के लिए किया जा रहा था। अभियान के दौरान टीम ने करीब 150 लंबी सुरंगों के भीतर जाकर जांच की। यहां से कोयले के साथ-साथ खनन में उपयोग होने वाले उपकरण जैसे फावड़ा, गेती, विद्युत पंप, पाइप और बड़ी मात्रा में बिजली के तार भी जब्त किए गए। यह दर्शाता है कि अवैध खनन संगठित तरीके से संचालित किया जा रहा था। रविवार को हुई कार्रवाई में कोरिया के अलावा सूरजपुर, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर और गौरेला-पेन्ड्रा-मरवाही जिलों के खनिज अधिकारी, पुलिस, वन विभाग और राजस्व विभाग की टीम भी शामिल रही। अधिकारियों ने बताया कि इस पूरे अभियान में विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बनाकर कार्रवाई की जा रही है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि चिन्हित सभी अवैध खनन स्थलों को ब्लास्टिंग कर बंद किया जाएगा, ताकि भविष्य में इनका दोबारा उपयोग न हो सके। इसके साथ ही इन क्षेत्रों में लगातार निगरानी और संयुक्त अभियान जारी रखने की योजना बनाई गई है। इस सख्त कार्रवाई के बाद अवैध खनन में शामिल लोगों में हड़कंप मच गया है। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में ऐसे अभियानों को और तेज किया जाएगा, ताकि अवैध गतिविधियों पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके।

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रायपुर में आज कई रास्तों पर ट्रैफिक डायवर्जन, बीजेपी की आक्रोश रैली के चलते असर

राजधानी रायपुर में आज भारतीय जनता पार्टी की आक्रोश रैली के कारण शहर के कई प्रमुख मार्गों पर यातायात प्रभावित रहेगा। ट्रैफिक पुलिस ने एडवाइजरी जारी करते हुए दोपहर 12 बजे से शाम 6 बजे तक लोगों से वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करने की अपील की है। रैली को देखते हुए शहर के भीड़भाड़ वाले इलाकों में विशेष व्यवस्था की गई है। यह रैली महिला आरक्षण (नारी शक्ति वंदन) बिल लोकसभा में पारित नहीं होने के विरोध में निकाली जा रही है। रैली की शुरुआत इंडोर स्टेडियम से होगी और यह गणेश मंदिर तिराहा, बुढ़ापारा बिजली ऑफिस चौक, महिला थाना चौक होते हुए सुभाष स्टेडियम पहुंचेगी, जहां आमसभा का आयोजन किया जाएगा। अनुमान है कि इस रैली में प्रदेशभर से 15 से 20 हजार कार्यकर्ता शामिल हो सकते हैं। ट्रैफिक पुलिस के अनुसार, बूढ़ेश्वर चौक से गणेश मंदिर तिराहा होते हुए बुढ़ापारा बिजली ऑफिस चौक, श्याम टॉकीज से गणेश मंदिर तिराहा, सदानी चौक और सदर बाजार, महिला थाना चौक से सुभाष स्टेडियम, कोतवाली चौक से सुभाष स्टेडियम, बंजारी चौक से सुभाष स्टेडियम, कालीबाड़ी चौक से कोतवाली चौक और आकाशवाणी चौक से नलघर चौक तक के मार्गों पर यातायात का दबाव रहेगा और आंशिक रूप से रास्ते बंद रह सकते हैं। लोगों की सुविधा के लिए ट्रैफिक पुलिस ने कुछ वैकल्पिक मार्ग भी सुझाए हैं। बूढ़ेश्वर चौक से कैलाशपुरी ढाल, पुलिस लाइन गेट होते हुए नेहरू नगर की ओर जाने का मार्ग खुला रहेगा। इसी तरह कालीबाड़ी से महिला थाना चौक, काली माता तिराहा और अंबेडकर चौक मार्ग का उपयोग किया जा सकता है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि रैली के दौरान ट्रैफिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त संख्या में जवान तैनात रहेंगे, लेकिन अनावश्यक रूप से इन मार्गों पर आने से बचना बेहतर होगा। महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन प्रस्ताव के लोकसभा में पारित नहीं होने के बाद भाजपा ने कांग्रेस के खिलाफ देशभर में विरोध प्रदर्शन की रणनीति बनाई है। इसी के तहत रायपुर में यह आक्रोश रैली आयोजित की जा रही है। इस आयोजन को देखते हुए शहरवासियों को सलाह दी गई है कि वे यात्रा से पहले मार्ग की स्थिति की जानकारी लेकर ही निकलें, ताकि किसी भी असुविधा से बचा जा सके।

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