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झारखंड शराब घोटाला मामले में IAS अनिल टुटेजा को अग्रिम जमानत, हाईकोर्ट ने लगाईं सख्त शर्तें

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कथित झारखंड शराब घोटाला मामले में निलंबित आईएएस अधिकारी Anil Tuteja को अग्रिम जमानत प्रदान की है। जस्टिस पी.पी. साहू की एकल पीठ ने उन्हें 50 हजार रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की दो जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है। अदालत ने जमानत देते हुए स्पष्ट किया है कि टुटेजा को जांच में पूरा सहयोग करना होगा और किसी भी गवाह को प्रभावित करने की कोशिश नहीं करनी होगी। कोर्ट ने यह भी कहा है कि यदि वे जांच में बाधा डालते हैं, तो जांच एजेंसी उनकी जमानत रद्द कराने के लिए स्वतंत्र होगी। हालांकि, इस राहत के बावजूद टुटेजा का जेल से बाहर आना फिलहाल आसान नहीं माना जा रहा है, क्योंकि हाल ही में छत्तीसगढ़ के चर्चित डीएमएफ और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उनकी जमानत याचिका खारिज हो चुकी है। आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने टुटेजा के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 और आईपीसी की धारा 420 व 120B के तहत मामला दर्ज किया है। आरोप है कि उन्होंने अन्य लोगों के साथ मिलकर झारखंड में छत्तीसगढ़ के आबकारी मॉडल की तर्ज पर अवैध शराब कारोबार के लिए एक सिंडिकेट तैयार किया। जांच एजेंसी के अनुसार, इस सिंडिकेट ने झारखंड की आबकारी नीति में बदलाव कर अपने पसंदीदा ठेकेदारों को फायदा पहुंचाया और अवैध रूप से करोड़ों रुपये का कमीशन अर्जित किया। टुटेजा ने गिरफ्तारी से बचने के लिए अग्रिम जमानत याचिका दायर करते हुए दावा किया था कि उन्हें लगातार अलग-अलग मामलों में फंसाकर जेल में रखने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि झारखंड पुलिस ने इस मामले में उन्हें आरोपी तक नहीं बनाया है। याचिका में यह भी उल्लेख किया गया कि पिछले पांच वर्षों में विभिन्न एजेंसियों द्वारा की गई छापेमारी में उनके पास से कोई अवैध संपत्ति बरामद नहीं हुई और न ही कोई ठोस डिजिटल या वित्तीय साक्ष्य मिला है। वहीं, राज्य सरकार ने जमानत का विरोध करते हुए टुटेजा को कई घोटालों का मास्टरमाइंड बताया और आरोप लगाया कि उन्होंने रायपुर में बैठकर झारखंड के अधिकारियों के साथ साजिश रची, जिससे सरकारी खजाने को नुकसान हुआ। हाईकोर्ट ने मामले के तथ्यों पर गौर करते हुए कहा कि टुटेजा पिछले दो वर्षों से न्यायिक हिरासत में हैं, इसके बावजूद जांच एजेंसी ने इस मामले में उनसे पूछताछ के लिए कोई विशेष प्रयास नहीं किया। साथ ही, झारखंड पुलिस द्वारा उन्हें आरोपी न बनाए जाने और अन्य आरोपियों को जमानत मिलने जैसे पहलुओं को भी ध्यान में रखा गया। इन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने उन्हें अग्रिम जमानत दी, लेकिन स्पष्ट किया कि जांच में सहयोग अनिवार्य होगा और किसी भी प्रकार की लापरवाही की स्थिति में जमानत रद्द की जा सकती है।

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पश्चिम बंगाल जीत में छत्तीसगढ़ भाजपा नेताओं की बड़ी भूमिका, 56 सीटों पर माइक्रो प्लानिंग से बदला समीकरण

देश के पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों के नतीजे सामने आने के बाद सबसे ज्यादा चर्चा पश्चिम बंगाल के परिणामों को लेकर हो रही है। भाजपा की जीत के साथ अब चुनावी रणनीति पर भी फोकस बढ़ गया है, जिसमें छत्तीसगढ़ के नेताओं की भूमिका अहम मानी जा रही है। पार्टी ने छत्तीसगढ़ के नेताओं को चुनाव के दौरान बड़ी जिम्मेदारियां सौंपी थीं। उन्हें 56 विधानसभा सीटों पर बूथ मैनेजमेंट से लेकर माइक्रो लेवल प्लानिंग तक का काम दिया गया था। कई सीटों पर उन्हें पूरी चुनावी कमान भी सौंपी गई थी, जहां उन्होंने संगठन को मजबूत करने और वोटिंग पैटर्न को साधने में काम किया। छत्तीसगढ़ भाजपा के संगठन महामंत्री पवन साय को इन 56 सीटों की जिम्मेदारी दी गई थी। उनका कार्य सिर्फ औपचारिक नहीं था, बल्कि बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करना और कार्यकर्ताओं के नेटवर्क को मजबूत बनाना था। चुनाव के दौरान उनकी रणनीति को अहम माना जा रहा है। इसके अलावा, क्लस्टर स्तर पर भी छत्तीसगढ़ के नेताओं को जिम्मेदारी दी गई थी। दुर्गापुर जिले के बर्धमान और दुर्गापुर लोकसभा क्षेत्रों की कमान पूर्व मंत्री राजेश मूणत और वरिष्ठ नेता शिवरतन शर्मा को सौंपी गई थी। उनके साथ समन्वय की जिम्मेदारी भूपेंद्र सवन्नी को दी गई थी। अन्य नेताओं में नीलू शर्मा, अनुराग सिंहदेव, हरपाल सिंह भाम्भरा और विश्व विजय सिंह तोमर को भी अलग-अलग सीटों पर तैनात किया गया था। इन सभी को चुनावी प्लानिंग, कैंपेनिंग और बूथ मैनेजमेंट के लिए माइक्रो स्तर पर काम करने के निर्देश दिए गए थे। कोलकाता क्लस्टर में पार्टी ने माइक्रो मैनेजमेंट के लिए विशेष टीम बनाई थी। इस टीम में भी छत्तीसगढ़ के नेताओं को शामिल किया गया और उन्हें समाज के अलग-अलग वर्गों तक पहुंच बनाने का काम सौंपा गया। इस टीम का नेतृत्व प्रदेश महामंत्री संजय श्रीवास्तव और सौरभ सिंह कर रहे थे। रणनीति के तहत व्यापारी, डॉक्टर, सीए, प्रोफेसर, कलाकार, मजदूर, रिक्शा चालक और मछली विक्रेताओं सहित विभिन्न वर्गों तक अलग-अलग तरीके से संपर्क किया गया। इसके साथ ही उन स्थानीय नेताओं को भी सक्रिय करने की कोशिश की गई, जो पहले चुनाव हार चुके थे, लेकिन जिनका जनाधार अभी भी मौजूद था। चुनावी प्रचार के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की रैलियों और सभाओं के समन्वय की जिम्मेदारी भी छत्तीसगढ़ के नेताओं को दी गई थी। इसमें डिप्टी सीएम विजय शर्मा, मंत्री केदार कश्यप, गजेन्द्र यादव और टंकराम वर्मा शामिल थे, जिन्होंने रैली प्रबंधन और स्थानीय समन्वय का काम संभाला। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, छत्तीसगढ़ के नेताओं को दी गई यह जिम्मेदारी संगठन में उनकी बढ़ती पकड़ और भरोसे को दर्शाती है। हालांकि, पार्टी की ओर से इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन जिस तरह से उन्हें बूथ से लेकर क्लस्टर और माइक्रो लेवल तक जिम्मेदारियां सौंपी गईं, उससे यह स्पष्ट होता है कि उन्हें चुनावी प्रबंधन के लिए सक्षम माना गया।

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बंगाल रुझानों पर CM साय की प्रतिक्रिया: “यह लोकतंत्र की जीत”, BJP के पक्ष में दिख रहे शुरुआती संकेत

छत्तीसगढ़ के Raipur से जुड़े दौरे के दौरान मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai ने पांच राज्यों के चुनावी रुझानों पर अपनी प्रतिक्रिया दी। सोमवार सुबह वे Balrampur स्थित भाजपा कार्यालय पहुंचे, जहां कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया। मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि शुरुआती रुझान Bharatiya Janata Party के पक्ष में नजर आ रहे हैं, जो जनता के विश्वास और सरकार के कामकाज का परिणाम है। पश्चिम बंगाल के रुझानों को लेकर उन्होंने खास तौर पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि यह लोकतंत्र की जीत है। उन्होंने संबंधित राज्यों के मतदाताओं को बधाई देते हुए कहा कि लोगों ने विकास, सुशासन और जनहित की नीतियों पर भरोसा जताया है। बताया गया कि मुख्यमंत्री साय रविवार को बलरामपुर प्रवास पर पहुंचे थे और रात्रि विश्राम के बाद सोमवार को पार्टी कार्यालय में कार्यकर्ताओं से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने संगठन से जुड़े मुद्दों और क्षेत्रीय विषयों पर भी चर्चा की। दौरे के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं में खासा उत्साह देखने को मिला। कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री अपने अगले तय कार्यक्रम के लिए रवाना हो गए।

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रायपुर में भीषण जल संकट: गिरता भूजल, कई वार्डों में सूखे नल, टैंकर के भरोसे शहर

छत्तीसगढ़ की राजधानी Raipur में इन दिनों गंभीर जल संकट की स्थिति बनी हुई है। लगातार गिरते भूजल स्तर और पाइपलाइन में लो-प्रेशर की समस्या के कारण शहर के कई इलाकों में नलों से पानी नहीं पहुंच रहा है, जिससे आम लोग काफी परेशान हैं। नगर निगम द्वारा जल आपूर्ति सुधारने के लिए अलग-अलग क्षेत्रों में काम किया जा रहा है। कुछ स्थानों पर पाइपलाइन के इंटर-कनेक्शन से राहत मिली है, लेकिन बढ़ती गर्मी और पानी की मांग ने हालात को और मुश्किल बना दिया है। कई वार्डों में अब पूरी तरह टैंकर के जरिए पानी पहुंचाया जा रहा है। स्थिति यह है कि मार्च से ही शहर के कई हिस्सों में टैंकर नियमित रूप से दौड़ रहे हैं। जहां पाइपलाइन के अंतिम छोर तक पानी नहीं पहुंच पा रहा, वहां भी टैंकर के जरिए सप्लाई की जा रही है। अब निजी सोसायटियों से भी पानी के लिए टैंकर की मांग बढ़ने लगी है, जो आने वाले दिनों में प्रशासन के लिए चुनौती बन सकती है। जोनवार हालात:जोन-1 के ठक्कर बापा वार्ड के गुलाब नगर, दीक्षानगर और विनायक विहार जैसे इलाके पूरी तरह टैंकर पर निर्भर हैं, जहां रोजाना कई ट्रिप में पानी पहुंचाया जा रहा है। जोन-3 में खम्हारडीह क्षेत्र की स्थिति बेहद खराब है। यहां करीब 30 हजार की आबादी में से अधिकांश लोग पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। कई जगह पाइपलाइन नहीं है और जहां है भी, वहां से पानी नहीं आ रहा। जोन-4 के रविशंकर शुक्ल और ब्राह्मण पारा वार्ड के कई हिस्सों में लो-प्रेशर के कारण जल आपूर्ति प्रभावित है। जोन-5 के चंगोराभाठा क्षेत्र के कई वार्डों में टेल एंड तक पानी नहीं पहुंच रहा, जिससे लोग परेशान हैं। जोन-6 में महामाया मंदिर वार्ड के कई मोहल्लों में आधे हिस्से तक ही पानी पहुंच पा रहा है। जोन-9 के मोवा, दलदल सिवनी, जोरा-लाभांडी, कचना और सड्‌डू जैसे इलाकों में भीषण जल संकट है। यहां भूजल स्तर काफी नीचे चला गया है और कई सोसायटियां टैंकर पर निर्भर हैं। कचना स्थित जीएडी कॉलोनी में हालात ऐसे हैं कि लोगों को टैंकर से पानी लाकर बाल्टी से ऊपर की मंजिलों तक पहुंचाना पड़ रहा है। बोरवेल की मोटर खराब होने से समस्या और बढ़ गई है, जबकि कई बार शिकायत के बावजूद समाधान नहीं हो पाया। नगर निगम का कहना है कि प्रभावित क्षेत्रों को पहले से चिन्हित किया गया है और लो-प्रेशर की समस्या दूर करने के लिए पाइपलाइन इंटर-कनेक्शन का काम जारी है। साथ ही टैंकरों के जरिए पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है।

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जनगणना के नाम पर ठगी का खतरा: फर्जी कर्मियों से रहें सावधान, जानिए कौन से सवाल सही और कौन से नहीं

देश में 1 अप्रैल 2026 से जनगणना का पहला चरण शुरू हो चुका है, जो 30 सितंबर 2026 तक चलेगा। इस दौरान घर-घर जाकर जानकारी जुटाई जा रही है, जिसमें हाउस लिस्टिंग और ऑनलाइन सेल्फ एन्यूमरेशन भी शामिल है। जनगणनाकर्मी लोगों से मकान, परिवार और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी जानकारी लेते हैं। हालांकि, इस प्रक्रिया के दौरान साइबर ठग और असामाजिक तत्व सक्रिय हो सकते हैं। रायपुर पुलिस ने चेतावनी दी है कि फर्जी जनगणनाकर्मी बनकर लोग आपकी निजी जानकारी हासिल करने की कोशिश कर सकते हैं। ये ठग कॉल, मैसेज या घर पहुंचकर खुद को सरकारी कर्मचारी बताते हैं और फर्जी लिंक या ऐप के जरिए डेटा चुराने की कोशिश करते हैं। कई मामलों में OTP, बैंक डिटेल्स, आधार नंबर जैसी संवेदनशील जानकारी मांगी जा सकती है, जो पूरी तरह से धोखाधड़ी का संकेत है। सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, जनगणनाकर्मी केवल सामान्य जानकारी ही पूछते हैं, जैसे: मकान से जुड़े सवाल:मकान नंबर, फर्श-दीवार-छत का मटेरियल, मकान का उपयोग, उसकी स्थिति आदि। परिवार से जुड़े सवाल:परिवार के सदस्यों की संख्या, मुखिया का नाम और जेंडर, सामाजिक वर्ग, घर किराए का है या खुद का, कुल कमरे और शादीशुदा जोड़ों की संख्या। सुविधाओं से जुड़े सवाल:पानी और बिजली का स्रोत, शौचालय और बाथरूम की उपलब्धता, रसोई और गैस कनेक्शन, खाना बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाला ईंधन। डिजिटल और सामान से जुड़े सवाल:घर में टीवी, मोबाइल, इंटरनेट, कंप्यूटर जैसी सुविधाएं हैं या नहीं। वाहन और अन्य जानकारी:साइकिल, बाइक, कार जैसी सुविधाएं और उपयोग किए जाने वाले अनाज की जानकारी, साथ ही मोबाइल नंबर। ध्यान रखें – ये सवाल कभी नहीं पूछे जाते:जनगणनाकर्मी आपकी बैंक डिटेल्स, OTP, पासवर्ड, एटीएम पिन, आधार से जुड़ी गोपनीय जानकारी या किसी भी प्रकार की वित्तीय जानकारी नहीं मांग सकते। पुलिस और प्रशासन की सलाह है कि किसी भी अजनबी पर तुरंत भरोसा न करें। यदि कोई व्यक्ति संदिग्ध लगे या जरूरत से ज्यादा निजी जानकारी मांगे, तो तुरंत सतर्क हो जाएं और इसकी सूचना स्थानीय पुलिस को दें। जनगणना में सही जानकारी देना हर नागरिक की जिम्मेदारी है, लेकिन अपनी निजी और वित्तीय सुरक्षा का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है।

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गैस के बाद पेट्रोल-डीजल भी होंगे महंगे? Deepak Baij का केंद्र पर निशाना

कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में भारी बढ़ोतरी के बाद छत्तीसगढ़ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष Deepak Baij ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उनका कहना है कि कांग्रेस ने पहले ही आशंका जताई थी कि पांच राज्यों के चुनाव खत्म होते ही महंगाई बढ़ेगी। बैज ने दावा किया कि फिलहाल सिर्फ गैस सिलेंडर के दाम बढ़े हैं, लेकिन आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी इजाफा हो सकता है, जिससे आम लोगों पर महंगाई का दबाव और बढ़ेगा। 1 मई से लागू नई दरों के अनुसार 19 किलो वाले कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत में 993 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। पहले इसकी कीमत 2175 रुपये थी, जो अब बढ़कर 3168 रुपये हो गई है। हर महीने की पहली तारीख को तेल कंपनियां कीमतों की समीक्षा करती हैं, जिसके आधार पर यह बदलाव किया गया है। यह लगातार चौथा महीना है जब कमर्शियल सिलेंडर महंगा हुआ है। हालांकि राहत की बात यह है कि घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में इस बार कोई बदलाव नहीं किया गया है। इस बढ़ोतरी का सीधा असर होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा संचालकों, चाय दुकानदारों और हलवाई जैसे छोटे व्यापारियों पर पड़ा है। उनका कहना है कि लागत बढ़ने से मुनाफा घटेगा और उन्हें खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ाने पड़ सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में वृद्धि का असर सिर्फ कारोबार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आम जनता के दैनिक खर्चों पर भी पड़ेगा। खाने-पीने की वस्तुओं के दाम बढ़ने की संभावना है, जिससे लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।

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खाने में छिपा ‘स्लो पॉइजन’: गुपचुप पानी से लेकर फलों-सब्जियों तक मिलावट का बड़ा खेल

भीषण गर्मी के इस मौसम में बाजारों में बिकने वाले कई खाद्य पदार्थ आपकी सेहत के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं। जिस गुपचुप के पानी को आप स्वादिष्ट समझकर पीते हैं या जो चमकदार आम आपको आकर्षित करता है, वही आपको बीमार कर सकता है। रायपुर के बाजारों में मुनाफा बढ़ाने के लिए कुछ दुकानदार खुलेआम मिलावटी चीजें बेच रहे हैं। जांच में सामने आया है कि गुपचुप के पानी में प्राकृतिक पुदीना-धनिया की जगह हानिकारक हरे केमिकल मिलाए जा रहे हैं। इसके अलावा गंदे पानी से बनी बर्फ और एक्सपायर्ड ब्रेड भी बेची जा रही है। सब्जियों को ताजा दिखाने के लिए कॉपर सल्फेट जैसे केमिकल का उपयोग किया जा रहा है, जबकि फलों को जल्दी पकाने के लिए कैल्शियम कार्बाइड का इस्तेमाल किया जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, ये मिलावटी पदार्थ शरीर के लिए बेहद नुकसानदायक हैं। लंबे समय तक इनके सेवन से लिवर और किडनी पर बुरा असर पड़ता है और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इनका असर तुरंत नहीं दिखता, लेकिन धीरे-धीरे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर देता है। फूड एंड ड्रग सेफ्टी विभाग ने ‘सही दवा, शुद्ध आहार’ अभियान के तहत मिलावटखोरों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। अब तक 1000 से अधिक दुकानों की जांच की जा चुकी है, जिसमें कई जगहों से खराब मैंगो पल्प, रंग मिले पेय पदार्थ और दूषित गुपचुप पानी जब्त कर नष्ट किया गया। राज्य के असिस्टेंट ड्रग कंट्रोलर के अनुसार, शहर के कई चाट और गुपचुप स्टॉल की जांच में मिलावट के मामले सामने आए हैं। एक दुकान पर गुपचुप के पानी में हरा रंग मिला पाया गया, जिसे मौके पर ही नष्ट कर दिया गया। इसके अलावा एक बेकरी से एक्सपायर्ड ब्रेड भी जब्त की गई। खाद्य विशेषज्ञों का कहना है कि मिलावट कई स्तरों पर हो रही है। दूध में पानी, डिटर्जेंट या सिंथेटिक पदार्थ मिलाए जाते हैं। मसालों में ईंट का चूरा और कृत्रिम रंग मिलाए जाते हैं। ठंडे पेय पदार्थों में सस्ते फ्लेवर और कृत्रिम रंग डाले जाते हैं। बर्फ भी कई बार अस्वच्छ पानी से तैयार की जाती है। मसालों में भी भारी मिलावट देखने को मिल रही है। हल्दी में लेड क्रोमेट, मिर्च पाउडर में नकली रंग, शहद में शुगर सिरप और घी में सस्ता तेल मिलाया जा रहा है। यहां तक कि आइसक्रीम में भी सिंथेटिक केमिकल पाए जा रहे हैं। प्रदेश में 27 अप्रैल से 11 मई तक विशेष जांच अभियान चलाया जा रहा है। इस दौरान दुकानदारों को खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम 2006 के नियमों का पालन करने के निर्देश दिए जा रहे हैं। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। डॉक्टरों की सलाह है कि लोग बाहर का खाना खाते समय सतर्क रहें और शक होने पर खाद्य पदार्थों से दूरी बनाए रखें।

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CGPSC मेंस परीक्षा 2025 की तारीख बदली, अब 6 से 9 जून के बीच होगी परीक्षा

छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग यानी Chhattisgarh Public Service Commission ने राज्य सेवा (मुख्य) परीक्षा 2025 की नई तारीखें जारी कर दी हैं। पहले यह परीक्षा 16 से 19 मई 2026 के बीच होनी थी, लेकिन अब इसे आगे बढ़ाकर 6, 7, 8 और 9 जून 2026 को आयोजित किया जाएगा। यह परीक्षा प्रदेश के पांच शहरों—Ambikapur, Bilaspur, Durg, Jagdalpur और Raipur—में आयोजित की जाएगी। परीक्षा का पूरा शेड्यूल इस तरह रहेगा: 6 जून (शनिवार)सुबह 9 बजे से 12 बजे — पेपर-1 (भाषा)दोपहर 2 बजे से 5 बजे — पेपर-2 (निबंध) 7 जून (रविवार)सुबह 9 बजे से 12 बजे — पेपर-3 (सामान्य अध्ययन-I)दोपहर 2 बजे से 5 बजे — पेपर-4 (सामान्य अध्ययन-II) 8 जून (सोमवार)सुबह 9 बजे से 12 बजे — पेपर-5 (सामान्य अध्ययन-III)दोपहर 2 बजे से 5 बजे — पेपर-6 (सामान्य अध्ययन-IV) 9 जून (मंगलवार)सुबह 9 बजे से 12 बजे — पेपर-7 (सामान्य अध्ययन-V) आयोग के अनुसार, परीक्षा के एडमिट कार्ड परीक्षा से करीब 10 दिन पहले जारी किए जाएंगे। उम्मीदवार इन्हें आधिकारिक वेबसाइट से डाउनलोड कर सकेंगे। यह भी साफ कर दिया गया है कि एडमिट कार्ड किसी को डाक या SMS के जरिए नहीं भेजे जाएंगे। सभी अभ्यर्थियों को खुद वेबसाइट पर जाकर अपना एडमिट कार्ड डाउनलोड करना होगा।

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रायपुर एयरपोर्ट के रनवे पर पहुंचा बंदर, लैंडिंग के दौरान पायलट की सूझबूझ से टला बड़ा हादसा

राजधानी Raipur के Swami Vivekananda Airport पर गुरुवार को एक बड़ा हादसा टल गया, जब अचानक एक बंदर रनवे पर पहुंच गया। यह घटना लखनऊ से रायपुर आ रही फ्लाइट की लैंडिंग के दौरान हुई। विमान में कुल 132 यात्री सवार थे। जानकारी के मुताबिक, फ्लाइट अपने निर्धारित समय पर एयरपोर्ट पहुंची थी और लैंडिंग के अंतिम चरण में थी। तभी पायलट ने रनवे पर एक बंदर को दौड़ते हुए देखा। लैंडिंग के दौरान विमान की रफ्तार तेज होती है और ऐसे में कोई भी रुकावट गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है। स्थिति को समझते हुए पायलट ने तुरंत ब्रेक लगाकर विमान की गति को नियंत्रित किया। अचानक ब्रेक लगने से यात्रियों को झटका लगा और कुछ देर के लिए विमान के अंदर घबराहट का माहौल बन गया। हालांकि, क्रू मेंबर्स ने स्थिति संभालते हुए यात्रियों को शांत कराया। घटना की सूचना मिलते ही एयर ट्रैफिक कंट्रोल और एयरपोर्ट प्रशासन सक्रिय हो गया। सुरक्षा कर्मियों, ग्राउंड स्टाफ और वन विभाग की टीम तुरंत रनवे पर पहुंची और बंदर को सुरक्षित तरीके से हटाया गया। इसके बाद पूरे रनवे की जांच की गई। विमान को सुरक्षित रूप से पार्किंग एरिया तक ले जाया गया, जहां सभी यात्रियों को सकुशल उतार लिया गया। इस घटना में किसी के घायल होने की खबर नहीं है। सुरक्षा के मद्देनजर कुछ समय के लिए उड़ानों का संचालन भी प्रभावित रहा। घटना के बाद एयरपोर्ट प्रबंधन ने मीडिया से दूरी बनाए रखी और इस मामले में अधिकृत बयान देने से बचता नजर आया।

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वन-टू-वन बैठक में विधायकों का रिपोर्ट कार्ड तैयार कर रहे सचिन पायलट, संगठन और क्षेत्र की ले रहे जानकारी

कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी Sachin Pilot इन दिनों विधायकों के साथ लगातार वन-टू-वन बैठकें कर रहे हैं। इस दौरान वे हर विधायक से करीब 15 मिनट तक व्यक्तिगत चर्चा कर संगठन की स्थिति और उनके विधानसभा क्षेत्र की जमीनी हकीकत की जानकारी ले रहे हैं। हालांकि विधानसभा चुनाव में अभी करीब ढाई साल का समय बाकी है, लेकिन पार्टी ने अभी से विधायकों के प्रदर्शन का आकलन शुरू कर दिया है। इस मैराथन बैठक में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष Deepak Baij और नेता प्रतिपक्ष Charan Das Mahant भी मौजूद हैं। विधायकों के साथ चर्चा पूरी होने के बाद सचिन पायलट नवनिर्वाचित जिला अध्यक्षों और ब्लॉक अध्यक्षों के साथ भी बैठक करेंगे। इसका उद्देश्य संगठन की जमीनी स्थिति को विस्तार से समझना और भविष्य की रणनीति तय करना है। बैठक के दौरान महिला सशक्तिकरण और 33 प्रतिशत आरक्षण से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। कांग्रेस विधायक Sangeeta Sinha ने बताया कि इस विषय को लेकर फैल रही गलतफहमियों को दूर करने पर जोर दिया गया। साथ ही यह भी समीक्षा की गई कि कार्यकर्ताओं तक इस मुद्दे की सही जानकारी पहुंच रही है या नहीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस 33 प्रतिशत आरक्षण के खिलाफ नहीं है, बल्कि इस विषय पर फैले भ्रम को खत्म करना जरूरी है। महिला कांग्रेस अध्यक्ष पद को लेकर चल रही चर्चाओं पर उन्होंने कहा कि पार्टी जो भी निर्णय लेगी, वह उन्हें स्वीकार होगा। फिलहाल इस पद के लिए उनकी दावेदारी को मजबूत माना जा रहा है। इससे पहले सचिन पायलट 17 मार्च को प्रदेश दौरे पर आए थे, जहां उन्होंने विधानसभा घेराव कार्यक्रम में हिस्सा लिया था। इस प्रदर्शन में पूरे प्रदेश से बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और नेता शामिल हुए थे, जिसे पार्टी ने सरकार के खिलाफ शक्ति प्रदर्शन के तौर पर पेश किया था।

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