Crime

रायपुर: तिल्दा-नेवरा में गांजा तस्कर गिरफ्तार, 73 किलो गांजा समेत नकद और हथियार जब्त

रायपुर जिले के तिल्दा-नेवरा क्षेत्र में नशे के कारोबार पर रायपुर ग्रामीण पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कुख्यात गांजा तस्कर मधु मिश्रा को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपी के घर पर अचानक छापेमारी कर करीब 73 किलो गांजा, जिसकी अनुमानित कीमत 36 लाख रुपये बताई जा रही है, बरामद किया है। छापेमारी के दौरान पुलिस को 790 नग प्रतिबंधित नशीली गोलियां, एक चाकू, मोबाइल फोन और करीब 1 लाख 87 हजार रुपये नकद भी मिले हैं। यह कार्रवाई रायपुर ग्रामीण पुलिस द्वारा चलाए जा रहे विशेष नशा विरोधी अभियान के तहत की गई। जानकारी के अनुसार, रायपुर ग्रामीण पुलिस अधिकारियों के निर्देश पर बुधवार को तिल्दा-नेवरा इलाके में सक्रिय नशा तस्करों के खिलाफ सघन अभियान चलाया गया था। इसी दौरान पुलिस को मधु मिश्रा के घर से नशीले पदार्थों के भंडारण की सूचना मिली, जिसके बाद टीम ने सरप्राइज चेकिंग कर आरोपी को मौके पर ही दबोच लिया। पुलिस सूत्रों का कहना है कि आरोपी लंबे समय से इलाके में गांजा और नशीली गोलियों की तस्करी में लिप्त था। जब्त सामग्री को पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिया है और आरोपी से पूछताछ जारी है। मामले का औपचारिक खुलासा जल्द ही रायपुर ग्रामीण पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी करेंगे। एसपी श्वेता श्रीवास्तव सिन्हा के नेतृत्व में पहली बड़ी सफलता रायपुर में पुलिसिंग को और प्रभावी बनाने के लिए शहर और ग्रामीण क्षेत्र को अलग-अलग प्रशासनिक इकाइयों में बांटा गया है। ग्रामीण थानों की जिम्मेदारी एसपी श्वेता श्रीवास्तव सिन्हा को सौंपी गई है। कार्यभार संभालने के बाद यह उनके नेतृत्व में ग्रामीण पुलिस की पहली बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है। ग्रामीण पुलिस अधिकारियों ने साफ किया है कि नशे के कारोबार के खिलाफ आगे भी इसी तरह की सख्त कार्रवाइयां जारी रहेंगी।

रायपुर: तिल्दा-नेवरा में गांजा तस्कर गिरफ्तार, 73 किलो गांजा समेत नकद और हथियार जब्त Read Post »

Chhattisgarh, Crime, Raipur, Top News

रायपुर के टेस्ट ट्यूब बेबी सेंटर के तार बच्चा चोर गिरोह से जुड़े?

डॉ. पहलाजानी समेत मेडिकल बोर्ड के डॉक्टरों पर FIR के आदेश, सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में होगी जांच रायपुर।छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में स्थित टेस्ट ट्यूब बेबी और सरोगेसी सेंटर से जुड़े एक बेहद संवेदनशील बच्चों की अदला-बदली मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने सेंटर के संचालक डॉ. नीरज पहलाजानी, मेडिकल बोर्ड में शामिल डॉक्टरों और अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच के निर्देश दिए हैं। अब इस पूरे मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में की जाएगी। यह मामला शंकर नगर स्थित पहलाजानी टेस्ट ट्यूब बेबी एंड सरोगेसी सेंटर (माता लक्ष्मी नर्सिंग होम) से जुड़ा है, जहां दो साल पहले एक महिला ने जुड़वा बच्चों को जन्म दिया था। क्या है पूरा मामला पीड़ित परिवार के अनुसार, 25 दिसंबर 2023 को महिला ने एक लड़का और एक लड़की को जन्म दिया था, लेकिन कुछ ही देर बाद अस्पताल प्रबंधन ने उन्हें दो लड़कियां सौंप दीं। इस पर परिवार को संदेह हुआ और शिकायत दर्ज कराई गई। मामला सामने आने के बाद कराई गई डीएनए जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि सौंपी गई दो बच्चियों में से एक बच्ची माता-पिता की जैविक संतान थी, जबकि दूसरी बच्ची का डीएनए किसी भी माता-पिता से मेल नहीं खाता था। इससे बच्चों की अदला-बदली की आशंका प्रमाणित हुई। प्रशासनिक जांच पर उठे सवाल पीड़ितों का आरोप है कि डीएनए रिपोर्ट सामने आने के बावजूद तत्कालीन अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। जब पीड़ित परिवार ने एफआईआर दर्ज कराने की मांग की, तो तत्कालीन सीएमएचओ ने मेडिकल बोर्ड के सदस्यों की अगुवाई में छह डॉक्टरों की एक नई टीम गठित कर दोबारा जांच कराई, जिसने अस्पताल प्रबंधन को क्लीन चिट दे दी। बच्चा चोर गिरोह से सांठगांठ के आरोप पीड़ितों ने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में रसूखदार डॉक्टरों और बच्चा चोर गिरोह की सांठगांठ हो सकती है। न्याय की तलाश में पीड़ित परिवार पहले हाईकोर्ट पहुंचा, लेकिन कानूनी कारणों से याचिका खारिज हो गई। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस मनमोहन की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए इसे गंभीर और विस्तृत जांच योग्य माना। कोर्ट ने मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट पर भी कड़े सवाल उठाए और रायपुर एसपी को निर्देश दिया कि अपीलकर्ताओं की शिकायत पर एफआईआर दर्ज कर निष्पक्ष जांच की जाए। पहले से विवादों में रहे हैं डॉ. पहलाजानी गौरतलब है कि डॉ. नीरज पहलाजानी पहले से ही ₹700 करोड़ के कोल लेवी घोटाले में जांच के दायरे में रह चुके हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उनसे कोल माफिया सूर्यकांत तिवारी के साथ कथित नकद लेनदेन को लेकर पूछताछ की थी। अब बच्चों की अदला-बदली जैसे गंभीर मामले में उनका नाम सामने आने से मामला और संवेदनशील हो गया है। सूत्रों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद रायपुर पुलिस जल्द ही आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर सकती है।

रायपुर के टेस्ट ट्यूब बेबी सेंटर के तार बच्चा चोर गिरोह से जुड़े? Read Post »

Chhattisgarh, Crime, Health, Raipur, Top News

कमिश्नरी सिस्टम के बाद रायपुर पुलिस का बड़ा एक्शन, अपराधियों को CSP ऑफिस में सख्त चेतावनी

रायपुर।रायपुर में कमिश्नरी सिस्टम लागू होने के बाद पुलिस ने अपराध नियंत्रण को लेकर सख्ती बढ़ा दी है। इसी कड़ी में आज खमतराई CSP कार्यालय में आदतन अपराधियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की गई। डिप्टी कमिश्नर मयंक गुज्जर के निर्देश पर खमतराई, उरला और गुढ़ियारी थाना क्षेत्र के आदतन अपराधियों को खमतराई CSP ऑफिस में पेश किया गया। इस दौरान CSP पूर्णिमा लामा, उरला थाना प्रभारी रोहित मालेकर, गुढ़ियारी थाना प्रभारी बी.एल. चंद्राकर और खमतराई थाना प्रभारी राजेश सिंह मौजूद रहे। खमतराई, उरला और गुढ़ियारी थाना क्षेत्र के आदतन अपराधियों को CSP ऑफिस में पेश किया गया। पुलिस अधिकारियों ने सभी अपराधियों को स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि वे दोबारा किसी भी आपराधिक गतिविधि में शामिल पाए गए, तो उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने कहा कि अब अपराध को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पुलिस ने अपराधियों को समाज की मुख्यधारा में लौटने, अपराध से दूर रहने और शांतिपूर्ण जीवन जीने की सलाह दी। साथ ही यह भी साफ किया गया कि कमिश्नरी सिस्टम के तहत पुलिस अब पहले से ज्यादा सख्ती और निगरानी के साथ काम कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की कार्रवाइयों से शहर में कानून-व्यवस्था मजबूत होगी और आम नागरिकों में सुरक्षा की भावना बढ़ेगी। रायपुर पुलिस ने भरोसा जताया है कि आने वाले दिनों में अपराध पर प्रभावी नियंत्रण देखने को मिलेगा।

कमिश्नरी सिस्टम के बाद रायपुर पुलिस का बड़ा एक्शन, अपराधियों को CSP ऑफिस में सख्त चेतावनी Read Post »

Chhattisgarh, Crime, Education, Political, Raipur, Top News

दुर्ग में महिला कांग्रेस कार्यकर्ता ने खुद को किया आग के हवाले, 95% झुलसी; कोर्ट के आदेश पर खाली कराया जा रहा था मकान

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले से एक बेहद चौंकाने वाली और दर्दनाक घटना सामने आई है। गुरुवार को महिला कांग्रेस कार्यकर्ता ने पुलिस और कोर्ट स्टाफ के सामने खुद पर केरोसिन डालकर आत्मदाह करने की कोशिश की, जिसमें वह गंभीर रूप से झुलस गई। पीड़िता को इलाज के लिए रायपुर रेफर किया गया है, जहां उसकी हालत नाजुक बनी हुई है। सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र की घटना यह मामला सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र के पचरीपारा इलाके का है। पीड़िता की पहचान शबाना निशा उर्फ रानी (37 वर्ष) के रूप में हुई है, जो यहां एक किराए के मकान में रहती थी। कोर्ट के आदेश पर पहुंची थी टीम जानकारी के अनुसार, मकान मालिक और किराएदार के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। मामला जिला न्यायालय तक पहुंचा, जहां से मकान मालिक के पक्ष में फैसला आया। कोर्ट के आदेश के बाद गुरुवार दोपहर करीब 2:30 बजे पुलिस और कोर्ट स्टाफ मकान खाली कराने पहुंचे थे। इसी दौरान शबाना निशा अचानक घर के अंदर गई और मिट्टी तेल डालकर खुद को आग लगा ली। आग लगते ही बाहर निकली, लोगों ने चादर से बुझाई प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, आग लगने के बाद शबाना जलती हालत में घर से बाहर निकली। स्थिति को देखकर पुलिस और कोर्ट स्टाफ पीछे हट गए। मौके पर मौजूद लोगों ने चादर की मदद से किसी तरह आग बुझाई, लेकिन तब तक वह करीब 95 प्रतिशत तक झुलस चुकी थी। जिला अस्पताल से रायपुर रेफर घटना के तुरंत बाद शबाना को जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसकी गंभीर हालत को देखते हुए रायपुर के डीकेएस अस्पताल रेफर किया गया। डॉक्टरों के अनुसार उसकी हालत बेहद नाजुक बनी हुई है। 40-45 साल से उसी मकान में रह रही थी पीड़िता के मामा लियाकत अली ने बताया कि शबाना बचपन से ही उस मकान में रह रही थी और करीब 40 से 45 वर्षों से किराएदार थी। पिछले कुछ महीनों से मकान खाली करने को लेकर उस पर दबाव बनाया जा रहा था। राजनीतिक पृष्ठभूमि भी रही शबाना निशा कांग्रेस पार्टी से जुड़ी रही हैं। उन्होंने पिछले दुर्ग नगर निगम चुनाव में वार्ड क्रमांक 28 (पचरीपारा) से कांग्रेस के टिकट पर पार्षद पद का चुनाव भी लड़ा था। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और घटना से जुड़े सभी पहलुओं को खंगाला जा रहा है।

दुर्ग में महिला कांग्रेस कार्यकर्ता ने खुद को किया आग के हवाले, 95% झुलसी; कोर्ट के आदेश पर खाली कराया जा रहा था मकान Read Post »

Bhilai / Durg, Chhattisgarh, Crime

रायपुर में जमीन सौदे में 20 लाख की ठगी: दो बहनों पर बैंककर्मी से धोखाधड़ी का आरोप

राजधानी रायपुर में जमीन बिक्री के नाम पर 20 लाख रुपए की ठगी का मामला सामने आया है। एक बैंककर्मी ने आरोप लगाया है कि बैरन बाजार स्थित भूखंड को बेचने का सौदा कर दो सगी बहनों ने एडवांस राशि ले ली, लेकिन तय समय के भीतर रजिस्ट्री नहीं कराई। पीड़ित का यह भी आरोप है कि अब उसे झूठे मामलों में फंसाने की धमकी दी जा रही है। यह मामला सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र का है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर धोखाधड़ी का केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जमीन सौदे का पूरा घटनाक्रम फाफाडीह स्थित स्टेट बैंक कॉलोनी निवासी बैंककर्मी विजय पटेल (44 वर्ष) ने पुलिस को बताया कि बैरन बाजार की रहने वाली शहनाज खान और शफिका खान से उन्होंने जमीन खरीदने का सौदा किया था। दोनों पक्षों के बीच बैरन बाजार रायपुर स्थित भूखंड क्रमांक 16/05 और 18/05 (कुल रकबा लगभग 2604 वर्गफुट) को 1 करोड़ 40 लाख रुपए में बेचने का एग्रीमेंट हुआ था। 20 लाख बयाना, फिर टालमटोल एग्रीमेंट के तहत 18 जुलाई 2025 को पीड़ित ने 20 लाख रुपए बयाना दिया था। इसमें 15 लाख रुपए नकद और 5 लाख रुपए चेक के माध्यम से दिए गए। समझौते के अनुसार तीन महीने के भीतर रजिस्ट्री कराना अनिवार्य था, लेकिन तय समय बीतने के बाद भी आरोपियों ने रजिस्ट्री नहीं कराई। पीड़ित का आरोप है कि वह लगातार संपर्क करता रहा, लेकिन हर बार उसे अलग-अलग बहानों से टाल दिया गया। कानूनी नोटिस के बाद भी नहीं पहुंचे रजिस्ट्री ऑफिस शक गहराने पर पीड़ित ने अपने वकील के माध्यम से 8 अक्टूबर 2025 को कानूनी नोटिस भेजा और 14 अक्टूबर को रजिस्ट्री कार्यालय में उपस्थित रहने की सूचना दी। तय तारीख को पीड़ित रजिस्ट्री ऑफिस पहुंचा, लेकिन आरोपी वहां नहीं आए। इस संबंध में फोटो और अन्य सबूत भी शिकायतकर्ता के पास मौजूद हैं। झूठे केस में फंसाने का आरोप पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया है कि शहनाज खान का बेटा सदफ रजिस्ट्री नहीं कराना चाहता और उल्टा उसे झूठे मामलों में फंसाने की धमकी दे रहा है। पुलिस ने दर्ज किया मामला कोतवाली थाना प्रभारी सतीश सिंह ने बताया कि बैंककर्मी की शिकायत पर दोनों महिलाओं के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया है। पूरे प्रकरण की जांच की जा रही है और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

रायपुर में जमीन सौदे में 20 लाख की ठगी: दो बहनों पर बैंककर्मी से धोखाधड़ी का आरोप Read Post »

Chhattisgarh, Crime, Raipur, Top News, Uncategorized

रायपुर: नरैय्या तालाब के पास पेड़ से लटकी मिली युवती की लाश, पुलिस जांच में जुटी

राजधानी रायपुर के कोतवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत नरैय्या तालाब के पास शुक्रवार सुबह एक सनसनीखेज घटना सामने आई। मॉर्निंग वॉक पर निकले लोगों ने तालाब के पास एक पेड़ से लटकी युवती की लाश देखी, जिसके बाद तुरंत पुलिस को सूचना दी गई। सूचना मिलते ही कोतवाली थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू की। प्रारंभिक जांच में मृतका की उम्र लगभग 30 से 35 वर्ष के बीच बताई जा रही है, हालांकि अब तक उसकी पहचान नहीं हो सकी है। शिनाख्त के प्रयास जारी पुलिस मृत युवती की पहचान के लिए आसपास के इलाकों में पूछताछ कर रही है। साथ ही थानों में दर्ज गुमशुदगी की रिपोर्टों को भी खंगाला जा रहा है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि महिला कौन थी और यहां कैसे पहुंची। CCTV फुटेज खंगाल रही पुलिस घटनास्थल और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को खंगाला जा रहा है। पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि युवती मौके पर अकेली आई थी या किसी अन्य व्यक्ति के साथ। आत्महत्या या हत्या, दोनों एंगल से जांच फिलहाल पुलिस आत्महत्या और हत्या, दोनों पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच कर रही है। शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है और रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के कारणों की पुष्टि हो सकेगी। इलाके में फैली दहशत इस घटना के बाद नरैय्या तालाब और आसपास के क्षेत्र में दहशत का माहौल है। पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि यदि किसी को मृत महिला के बारे में कोई भी जानकारी हो, तो तुरंत कोतवाली थाना पुलिस को सूचित करें।

रायपुर: नरैय्या तालाब के पास पेड़ से लटकी मिली युवती की लाश, पुलिस जांच में जुटी Read Post »

Chhattisghar, Crime, Top News

बिरयानी ऑर्डर से इनकार पर जोमैटो डिलीवरी बॉय ने दी जान से मारने की धमकी

फोन पर गाली-गलौज, 6 बार कॉल कर किया परेशान; पीड़ित ठेकेदार थाने पहुंचा राजधानी रायपुर के सिविल लाइन थाना क्षेत्र में ऑनलाइन फूड डिलीवरी से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। बिरयानी का पार्सल लेने से मना करने पर कथित जोमैटो डिलीवरी बॉय ने एक ठेकेदार को न सिर्फ फोन पर गालियां दीं, बल्कि घर में घुसकर जान से मारने की धमकी तक दे डाली। पीड़ित ठेकेदार ललित प्रजापति ने मामले की शिकायत थाने में दर्ज कराई है। पुलिस ने अज्ञात मोबाइल नंबर धारक के खिलाफ अपराध पंजीबद्ध कर जांच शुरू कर दी है। कैसे शुरू हुआ विवाद ललित प्रजापति ने पुलिस को बताया कि 21 जनवरी 2026 को दोपहर करीब 1:30 बजे वह अपने घर पर मौजूद थे। इसी दौरान एक अज्ञात नंबर से उन्हें लगातार 3 से 4 बार कॉल आए। कॉल करने वाले युवक ने खुद को जोमैटो डिलीवरी कर्मी बताते हुए कहा कि उनके नाम से बिरयानी का ऑर्डर आया है और पार्सल कहां देना है। ललित ने साफ कहा कि उन्होंने कोई फूड ऑर्डर नहीं किया है और इसे रॉन्ग नंबर बताते हुए कॉल काट दिया। गाली-गलौज और धमकी का आरोप कुछ समय बाद जब ठेकेदार घर के बाहर स्थित चाहत मेडिकल स्टोर पर सामान खरीद रहे थे, उसी नंबर से फिर कॉल आया। भुगतान में व्यस्त होने के कारण उन्होंने अपने परिचित दीपक ग्वाल से फोन स्पीकर पर उठाने को कहा। स्पीकर पर बात शुरू होते ही डिलीवरी बॉय ने दोबारा ऑर्डर की बात दोहराई। मना करने पर उसने अशब्द भाषा का प्रयोग करते हुए गालियां दीं और घर में घुसकर जान से मारने की धमकी दी। घटना से भयभीत ठेकेदार सीधे थाने पहुंचे और लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने दर्ज किया केस सिविल लाइन थाना पुलिस ने बताया कि पीड़ित की शिकायत पर आरोपी मोबाइल नंबर धारक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। मोबाइल नंबर के आधार पर कथित डिलीवरी बॉय की पहचान और तलाश की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही आरोपी को पकड़कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

बिरयानी ऑर्डर से इनकार पर जोमैटो डिलीवरी बॉय ने दी जान से मारने की धमकी Read Post »

Chhattisgarh, Crime, Raipur, Top News

CGMSC घोटाला: डायसिस इंडिया के मार्केटिंग हेड कुंजल शर्मा गिरफ्तार, 27 जनवरी तक पुलिस रिमांड

सरकार को तीन गुना महंगे रिएजेंट सप्लाई कराने का आरोप, साजिश की परतें खुलीं छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CGMSC) से जुड़े बहुचर्चित घोटाले में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने एक और बड़ी कार्रवाई की है। नवी मुंबई स्थित डायसिस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के मार्केटिंग हेड कुंजल शर्मा को 21 जनवरी 2026 को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार आरोपी को 22 जनवरी को विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम), रायपुर में पेश किया गया, जहां अदालत ने उसे 27 जनवरी 2026 तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। अब तक 9 से ज्यादा आरोपी गिरफ्त में CGMSC घोटाले में इससे पहले 18 जनवरी 2026 को ACB/EOW ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया था। वहीं, इससे पूर्व मोक्षित कॉर्पोरेशन, दुर्ग के संचालक शशांक चोपड़ा समेत पांच अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। अब तक जिन प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, उनमें इन सभी पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए टेंडर प्रक्रिया में हेरफेर करने का आरोप है। 27 जनवरी तक पुलिस रिमांड गिरफ्तार आरोपियों को 19 जनवरी को स्पेशल कोर्ट में पेश किया गया था, जहां से उन्हें भी 27 जनवरी तक पुलिस रिमांड पर भेजा गया है। ACB/EOW का कहना है कि जनहित से जुड़ी ‘हमर लैब योजना’ में हुए सरकारी धन के दुरुपयोग से जुड़े हर पहलू की गहन जांच जारी है। कंपनी पॉलिसी दरकिनार कर बढ़ाई गई कीमतें जांच में यह सामने आया है कि डायसिस इंडिया ने अपने रिएजेंट्स और कंज्यूमेबल्स के लिए पहले से निश्चित एमआरपी तय कर रखी थी। इसके बावजूद कुंजल शर्मा ने जानबूझकर कंपनी की नीति को नजरअंदाज किया और मोक्षित कॉर्पोरेशन को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए अधिक कीमतें प्रस्तावित कीं। शशांक चोपड़ा के साथ साजिश का आरोप ACB की जांच के अनुसार कुंजल शर्मा ने मोक्षित कॉर्पोरेशन के संचालक शशांक चोपड़ा के साथ मिलकर षड्यंत्र रचा। तय एमआरपी से कहीं अधिक दरों और शर्तों को अनधिकृत रूप से CGMSC को भेजा गया, जिससे टेंडर प्रक्रिया प्रभावित हुई और मोक्षित कॉर्पोरेशन की ऊंची दरों को मंजूरी मिल गई। तीन गुना तक महंगे दामों पर सप्लाई जांच में यह भी सामने आया है कि मोक्षित कॉर्पोरेशन ने वास्तविक एमआरपी से तीन गुना तक महंगे दामों पर रिएजेंट्स और कंज्यूमेबल्स की आपूर्ति की। इससे राज्य सरकार के खजाने को भारी नुकसान हुआ और निजी कंपनियों को करोड़ों का अनुचित लाभ मिला। हमर लैब योजना की गहन जांच जारी ACB/EOW ने स्पष्ट किया है कि हमर लैब योजना के अंतर्गत हुई खरीद प्रक्रिया, भुगतान और आपूर्ति से जुड़े सभी दस्तावेजों की जांच की जा रही है। साक्ष्यों के आधार पर आगे और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं। क्या है पूरा CGMSC घोटाला? CGMSC घोटाले में अधिकारियों और कारोबारियों की मिलीभगत से सरकार को करीब 411 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया। आरोप है कि IAS और IFS अधिकारियों की सांठगांठ से महज 27 दिनों में 750 करोड़ रुपये की खरीदी कर ली गई। इस मामले में मोक्षित कॉर्पोरेशन के डायरेक्टर शशांक चोपड़ा फिलहाल 23 जनवरी तक ED की कस्टोडियल रिमांड पर है। 8 रुपये की चीज 2352 में, 5 लाख की मशीन 17 लाख में खरीदी जांच में सामने आया है कि इसके अलावा CGMSC ने 300 करोड़ रुपये के रिएजेंट्स की खरीद की। शिकायत से खुला घोटाले का राज दिसंबर 2024 में पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर ने CGMSC में अनियमितताओं की शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय, केंद्रीय गृह मंत्रालय, CBI और ED से की थी। इसके बाद केंद्र से निर्देश मिलने पर EOW ने FIR दर्ज कर जांच शुरू की। जांच के बाद श्री शारदा इंडस्ट्रीज बंद EOW की जांच के घेरे में आने के बाद श्री शारदा इंडस्ट्रीज ने अपना कारोबार बंद कर दिया। कंपनी की वेबसाइट पर फर्म की स्थिति अस्थायी रूप से बंद दर्शाई जा रही है। यह कंपनी ग्राम तर्रा, तहसील धरसींवा, रायपुर में स्थित थी। कैसे मिलता था टेंडर? EOW की रिपोर्ट के अनुसार CGMSC अधिकारियों ने मोक्षित कॉर्पोरेशन को 27 दिनों में 750 करोड़ रुपये का काम दिया। जरूरत न होने के बावजूद मेडिकल किट और मशीनों की खरीदी की गई।मोक्षित कॉर्पोरेशन और श्री शारदा इंडस्ट्रीज ने कार्टेल बनाकर टेंडर कोडिंग की, जबकि CGMSC अधिकारियों ने शर्तें इस तरह तय कीं कि दूसरी कंपनियां टेंडर से बाहर हो जाएं। 27 जनवरी 2025 को हुई थी बड़ी रेड 27 जनवरी 2025 को EOW की टीम ने रायपुर, दुर्ग और हरियाणा के पंचकुला में एक साथ छापेमारी की थी। इस दौरान मोक्षित कॉर्पोरेशन और उससे जुड़े 16 ठिकानों से अहम दस्तावेज जब्त किए गए। जरूरत न होते हुए भी 300 करोड़ की खरीदी जांच में सामने आया कि कांग्रेस शासनकाल में जनवरी 2022 से अक्टूबर 2023 के बीच जरूरत से ज्यादा रिएजेंट खरीदे गए। 200 से अधिक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में रिएजेंट भेजे गए, जहां न मशीन थी, न तकनीशियन।रीएजेंट की एक्सपायरी केवल 2–3 महीने शेष थी, जिससे बचाव के लिए CGMSC 600 फ्रिज खरीदने की तैयारी में था।

CGMSC घोटाला: डायसिस इंडिया के मार्केटिंग हेड कुंजल शर्मा गिरफ्तार, 27 जनवरी तक पुलिस रिमांड Read Post »

Chhattisgarh, Crime, Health, Raipur, Top News

रायगढ़ में अवैध कबाड़ कारोबार पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई, जिलेभर में एक साथ छापेमारी

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में अवैध कबाड़ कारोबार के खिलाफ पुलिस ने व्यापक अभियान शुरू किया है। जिले के सभी थाना क्षेत्रों में एक साथ कार्रवाई करते हुए पुलिस ने बड़े और छोटे कबाड़ कारोबारियों के दुकानों और गोदामों पर छापेमारी की। इस दौरान लाखों रुपये मूल्य के अवैध कबाड़ के जब्त किए जाने की सूचना है। बुधवार सुबह से चल रही कार्रवाई प्राप्त जानकारी के अनुसार, बुधवार सुबह सभी थाना क्षेत्रों की पुलिस टीमों ने अपने-अपने इलाके में कबाड़ कारोबार से जुड़े ठिकानों पर दबिश दी। पुलिस की यह कार्रवाई जिलेभर में एक साथ की जा रही है, जिससे अवैध कारोबारियों में हड़कंप मच गया है। बताया जा रहा है कि शहर का सबसे बड़ा कबाड़ गोदाम गढ़उमरिया रोड क्षेत्र में स्थित है, जहां पुलिस की टीम सुबह पहुंची और विस्तृत जांच शुरू की। वाहनों के पार्ट्स और लोहे का सामान बरामद छापेमारी के दौरान पुलिस ने कबाड़ स्थलों से पुराने मोटरसाइकिल और साइकिल, सरिया, भारी मात्रा में लोहा और कई महंगी गाड़ियों के पार्ट्स बरामद किए हैं। जब्त सामान के वैध दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है। हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि कुल कितने मूल्य का अवैध कबाड़ जब्त किया गया है। पुलिस की कार्रवाई फिलहाल जारी है और आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है। अपराध नियंत्रण के निर्देश के बाद हुई कार्रवाई गौरतलब है कि दो दिन पहले सोमवार को पुलिस अधीक्षक ने जिले के सभी थाना और चौकी प्रभारियों की क्राइम मीटिंग ली थी। इस बैठक में बढ़ते अपराधों पर नियंत्रण के लिए सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए गए थे। माना जा रहा है कि उसी के तहत बुधवार को जिलेभर में एक साथ यह बड़ी कार्रवाई की गई है।

रायगढ़ में अवैध कबाड़ कारोबार पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई, जिलेभर में एक साथ छापेमारी Read Post »

Chhattisgarh, Crime, Raigarh, Top News

भिलाई में हरिओम इंगोट्स एंड पावर लिमिटेड पर जीएसटी की कार्रवाई दूसरे दिन भी जारी

दुर्ग जिले के भिलाई में स्थित हरिओम इंगोट्स एंड पावर लिमिटेड कंपनी पर जीएसटी विभाग की जांच दूसरे दिन भी लगातार जारी रही। मंगलवार देर रात तक विभागीय अधिकारियों की टीम कंपनी परिसर में मौजूद रही और बीते पांच वर्षों से जुड़े वित्तीय दस्तावेजों की गहन पड़ताल की गई। यह कार्रवाई टैक्स चोरी की आशंका को लेकर शुरू की गई है। भिलाई के लाइट इंडस्ट्रियल एरिया में स्थित कंपनी के स्टॉक, उत्पादन, बिक्री और आयात-निर्यात से संबंधित रिकॉर्ड की बारीकी से जांच की जा रही है। सोमवार शाम शुरू हुई जांच, दो दिन चली कार्रवाई जानकारी के अनुसार, जीएसटी विभाग की 7 से 8 अधिकारियों की टीम सोमवार शाम करीब 4 बजे कंपनी परिसर में जांच के लिए पहुंची थी। इसके बाद से लगातार दस्तावेजों का सत्यापन किया जा रहा है, जो दूसरे दिन भी देर रात तक चलता रहा। कंपनी में तीन निदेशक बताए जा रहे हैं, जिनमें संदीप अग्रवाल, संतोष अग्रवाल और भगवानदास अग्रवाल शामिल हैं। बताया जा रहा है कि कंपनी का संबंध पूर्व साडा अध्यक्ष सत्यनारायण अग्रवाल के परिवार से है, हालांकि कंपनी के कर्मचारियों का कहना है कि वे वर्तमान में परिसर में नहीं आ रहे हैं। बिल, रिटर्न और इनवॉइस की बारीकी से जांच जांच के दौरान विभागीय अधिकारी कंपनी के बिल, जीएसटी रिटर्न, इनवॉइस और अन्य लेखा दस्तावेजों का मिलान कर रहे हैं। खासतौर पर टैक्स भुगतान, इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) और संभावित अनियमितताओं से जुड़े रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार कंपनी का सालाना टर्नओवर लगभग 400 से 500 करोड़ रुपए के बीच बताया जा रहा है। महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश से जुड़े लेनदेन भी जांच के दायरे में कंपनी का व्यावसायिक लेनदेन महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश तक फैला हुआ है। इसी वजह से दोनों राज्यों से जुड़े ट्रांजेक्शन और दस्तावेजों का भी मिलान किया जा रहा है। विभाग का फोकस इस बात पर है कि कहीं गलत तरीके से इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा तो नहीं किया गया या टैक्स भुगतान में कोई गड़बड़ी तो नहीं है। रिकॉर्ड के मूल्यांकन के बाद सामने आएगी स्थिति जांच के दौरान टैक्स जमा करने से संबंधित कई दस्तावेज सामने आए हैं, जिनका अन्य रिकॉर्ड से मिलान किया जा रहा है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, सभी दस्तावेजों की जांच और मूल्यांकन पूरा होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि टैक्स चोरी हुई है या नहीं और यदि हुई है तो उसकी वास्तविक राशि कितनी है।

भिलाई में हरिओम इंगोट्स एंड पावर लिमिटेड पर जीएसटी की कार्रवाई दूसरे दिन भी जारी Read Post »

Bhilai / Durg, Chhattisgarh, Crime, Top News
Scroll to Top