Crime

33 फीट दूर चल रही बोरिंग बनी हादसे की वजह, मकान की पार्किंग का फर्श धमाके की तरह फटा; VIDEO वायरल

बिलासपुर। शहर के गोकुलधाम इलाके में एक रिहायशी मकान में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब पार्किंग का फर्श अचानक तेज धमाके के साथ फट गया। जमीन के नीचे से पानी का इतना तेज दबाव निकला कि टाइल्स उखड़ गईं और पानी फव्वारे की तरह बाहर आ गया। पूरी घटना CCTV कैमरे में कैद हो गई, जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। घटना के समय मकान मालिक विशाल शर्मा मौके पर मौजूद थे और बाल-बाल बच गए। विशाल शर्मा का कहना है कि यदि वे दो कदम आगे होते, तो उनकी जान जा सकती थी। 33 फीट दूर हो रही थी बोरिंग मकान मालिक के अनुसार, उनके घर से करीब 33 फीट दूर एक खाली प्लॉट में बोरिंग का काम चल रहा था। यह काम बिना किसी अनुमति और भू-तकनीकी (जियोलॉजिकल) सर्वे के कराया जा रहा था। 29 जनवरी को अचानक पार्किंग का फर्श उखड़ने लगा और तेज प्रेशर के साथ पानी बाहर निकल आया। तेज पानी के बहाव से मकान की पार्किंग क्षतिग्रस्त हो गई, छत में दरारें आ गईं और पंखा भी टूट गया। कुछ ही पलों में घर के अंदर पानी भर गया। मदद की जगह धमकी देने का आरोप पीड़ित विशाल शर्मा ने आरोप लगाया है कि बोर खनन करा रहे आरक्षक ध्रुव पांडेय से जब नुकसान की शिकायत की गई, तो मदद करने के बजाय उन्हें धमकाया गया। विशाल शर्मा ने पूरे मामले की जांच और नुकसान की भरपाई की मांग की है। कैसे हुआ हादसा? विशेषज्ञों के अनुसार, ड्रिलिंग के दौरान जमीन के नीचे मौजूद कन्फाइंड एक्वाइफर में छेद हो गया होगा। उच्च दबाव में भरा भूमिगत जल कमजोर परत या पहले से मौजूद दरारों के जरिए ऊपर की ओर निकल आया।संभावना यह भी जताई जा रही है कि किसी पुरानी या जंग लगी भूमिगत पाइपलाइन को नुकसान पहुंचा हो, जिससे पानी फव्वारे की तरह बाहर आया। एक्सपर्ट बोले – यह सामान्य तकनीकी प्रक्रिया का परिणाम जियो-हाइड्रोलॉजिस्ट एस.पी. पराते के मुताबिक, बोरिंग के दौरान एयर प्रेशर और बीट से खुदाई की जाती है। इस प्रक्रिया में अगर अंदर इंटर-कनेक्टेड पोर स्पेस या कमजोर जोन बन जाए, तो इस तरह की घटनाएं हो सकती हैं। प्रशासन से कार्रवाई की मांग घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है। मोहल्लेवासियों ने प्रशासन और नगर निगम से अवैध बोर खनन पर सख्त निगरानी, नियमों के पालन और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है, ताकि भविष्य में इस तरह के हादसों को रोका जा सके।

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रायपुर में एक ही रात तीन दुकानों में बड़ी चोरी, 7 लाख से ज्यादा नकदी ले उड़े चोर

मुंह ढककर पहुंचे आरोपी, CCTV फुटेज के सहारे पहचान में जुटी पुलिस राजधानी रायपुर के सिविल लाइन थाना क्षेत्र में शनिवार-रविवार की दरम्यानी रात चोरों ने एक के बाद एक तीन दुकानों को निशाना बनाते हुए 7 लाख रुपये से अधिक की नकदी चोरी कर ली। चोरों ने दुकानों के ताले और छप्पर तोड़कर भीतर घुसकर गल्लों में रखी रकम पर हाथ साफ किया। घटना की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। कपड़े की दुकान से ढाई लाख से ज्यादा की चोरी सिविल लाइन पुलिस के अनुसार, लाभांडी निवासी 70 वर्षीय शिव कुमार वर्मा की पंडरी इलाके में “लब-डब” नाम से कपड़ों की दुकान है। 31 जनवरी की रात करीब 10 बजे वे दुकान बंद कर घर चले गए थे।1 फरवरी की सुबह करीब 10 बजे जब उन्होंने दुकान खोली, तो गल्ले का दराज खुला मिला और उसमें रखी करीब 2 लाख 75 हजार रुपये की नकदी गायब थी। जांच में सामने आया कि चोर छप्पर की टिन शेड तोड़कर दुकान के भीतर दाखिल हुए थे। फर्नीचर और हार्डवेयर दुकान भी बनी निशाना इसी इलाके में स्थित “नोवा फर्नीचर” दुकान में भी चोरों ने छप्पर तोड़कर प्रवेश किया और गल्ले में रखे करीब 1 लाख 40 हजार रुपये चोरी कर लिए।वहीं तीसरी चोरी पास की “डिजाइनर सेनिटेशन एंड हार्डवेयर” दुकान में हुई, जहां से चोर लगभग 2 लाख 85 हजार रुपये नकद ले उड़े। तीनों दुकानों से कुल मिलाकर करीब 7 लाख रुपये की चोरी होना सामने आया है। CCTV में कैद हुई वारदात पीड़ित कारोबारियों की शिकायत के बाद पुलिस ने आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। रिकॉर्डिंग में साफ दिखाई दे रहा है कि आरोपी मुंह में कपड़ा बांधकर दुकानों में दाखिल होते हैं, चोरी की वारदात को अंजाम देते हैं और फिर फरार हो जाते हैं।पुलिस ने दुकानदारों के साथ-साथ दुकानों में काम करने वाले कर्मचारियों के भी बयान दर्ज किए हैं। पुलिस का दावा—जल्द होगी गिरफ्तारी पुलिस उपायुक्त मयंक गुर्जर ने बताया कि घटना की सूचना मिलने के बाद तत्काल मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। कुछ संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस का दावा है कि जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

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एक्स-बॉयफ्रेंड की धमकी से दहशत: रायपुर में युवती के घर में जबरन घुसा युवक, शादी का दबाव

रायपुर।राजधानी रायपुर के डीडी नगर थाना क्षेत्र में एक युवती को उसके पूर्व प्रेमी द्वारा जान से मारने की धमकी दिए जाने का मामला सामने आया है। आरोपी युवक ने रात के समय युवती के घर पहुंचकर जबरन प्रवेश किया, गाली-गलौच की और शादी के लिए दबाव बनाया। घटना के बाद पीड़िता ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। पीड़िता के अनुसार, उसका चंगोरा भाठा निवासी रितेश सिंह के साथ करीब तीन साल पहले प्रेम संबंध था। आपसी मतभेद और निजी कारणों के चलते उसने युवक से संपर्क पूरी तरह समाप्त कर दिया था। इसके बावजूद आरोपी युवक उसे लगातार परेशान करता रहा। रात में घर पहुंचकर किया हंगामा युवती ने पुलिस को बताया कि 30 जनवरी की रात करीब 9 बजे आरोपी उसके घर पहुंचा और जोर-जोर से दरवाजा खटखटाने लगा। दरवाजा खुलते ही वह जबरन घर में घुस गया और अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने लगा। इस दौरान उसने युवती पर शादी करने का दबाव बनाया और इनकार करने पर जान से मारने की धमकी दी। यह पूरी घटना परिवार के अन्य सदस्यों की मौजूदगी में हुई। अगले दिन दर्ज कराई शिकायत घटना के बाद युवती ने अपनी बड़ी बहन को इसकी जानकारी दी। रात अधिक होने के कारण वह तत्काल थाने नहीं जा सकी। इसके बाद 31 जनवरी 2026 को उसने डीडी नगर थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने शुरू की जांच डीडी नगर थाना पुलिस ने युवती की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी तथ्यों की जांच की जा रही है और वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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दुर्ग में ग्राफिक्स डिजाइनर ने की आत्महत्या, फेसबुक पोस्ट में पत्नी पर गंभीर आरोप; पुलिस जांच में जुटी

दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले से एक संवेदनशील मामला सामने आया है, जहां एक ग्राफिक्स डिजाइनर ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मौत से पहले युवक ने फेसबुक पर एक टेक्स्ट पोस्ट साझा किया, जिसमें उसने आत्महत्या के लिए अपनी पत्नी को जिम्मेदार ठहराया है। युवक ने पोस्ट में खुद को घरेलू हिंसा का शिकार बताते हुए अपनी गर्लफ्रेंड को बचाने के लिए यह कदम उठाने का दावा किया है। यह मामला जामुल थाना क्षेत्र का है। मृतक की पहचान भोज नारायण (36 वर्ष) के रूप में हुई है, जो भिलाई स्थित रुंगटा कॉलेज में सीनियर ग्राफिक्स डिजाइनर के पद पर कार्यरत था। फेसबुक पोस्ट में लगाए गए आरोप जानकारी के अनुसार, भोज नारायण ने 28 जनवरी को आत्महत्या की थी, लेकिन उसका फेसबुक पोस्ट और कथित सुसाइड नोट अब सामने आया है। पोस्ट में उसने लिखा है कि वह पत्नी से परेशान होकर आत्महत्या कर रहा है और इस मामले में उसके अन्य परिजनों की कोई भूमिका नहीं है। मृतक ने अपनी पोस्ट में यह भी दावा किया है कि उसकी पत्नी ने उसकी गर्लफ्रेंड पर जादू-टोना कराए जाने का शक जताया और खुद को लंबे समय से मानसिक व घरेलू उत्पीड़न का शिकार बताया। फेसबुक पोस्ट के साथ भोज ने एक ड्राइव लिंक भी साझा किया था, जिसमें पत्नी और कुछ अन्य लोगों से संबंधित चैट के स्क्रीनशॉट होने का दावा किया गया है। क्या है पूरा मामला भोज नारायण मूल रूप से गरियाबंद जिले के राजिम का रहने वाला था और भिलाई में किराए के मकान में रह रहा था। वह शादीशुदा था और उसकी एक बेटी भी है। पुलिस जांच में सामने आया है कि उसका एक महिला प्यून के साथ प्रेम संबंध था, जो स्वयं भी शादीशुदा थी। इस संबंध की जानकारी उसकी पत्नी को थी, जिसको लेकर पति-पत्नी के बीच विवाद होता रहता था। बताया जा रहा है कि कुछ समय पहले भोज अपनी गर्लफ्रेंड को बाहर लेकर गया था। बाद में लौटने पर घरेलू विवाद और बढ़ गया। पत्नी ने संबंध खत्म करने की बात कही, लेकिन भोज इसके लिए तैयार नहीं हुआ। 28 जनवरी को जब वह घर में अकेला था, उसी दौरान उसने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची, शव को नीचे उतारकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया। 29 जनवरी को पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। पहले दर्ज हुई थी गुमशुदगी रिपोर्ट पुलिस के मुताबिक, आत्महत्या से कुछ दिन पहले भोज नारायण घर से लापता हो गया था, जिसके बाद उसकी पत्नी ने थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जांच के दौरान उसके प्रेम संबंधों और आर्थिक तनाव की जानकारी सामने आई। बताया जा रहा है कि वह कर्ज के कारण भी मानसिक दबाव में था। पुलिस कर रही हर पहलू की जांच जामुल थाना प्रभारी रामेंद्र सिंह ने बताया कि मामले में मर्ग कायम कर लिया गया है। फेसबुक पोस्ट, मोबाइल डेटा, ड्राइव लिंक और परिजनों के बयान के आधार पर जांच की जा रही है। आत्महत्या के कारणों और लगाए गए आरोपों की सत्यता की पड़ताल की जा रही है। फिलहाल, किसी भी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज नहीं किया गया है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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शराब घोटाला केस: जेल में बंद कवासी लखमा से मिलने पहुंचे PCC चीफ दीपक बैज

रायपुर। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दीपक बैज शुक्रवार को शराब घोटाले के मामले में जेल में बंद वरिष्ठ कांग्रेस नेता कवासी लखमा से मुलाकात करने पहुंचे। जेल में हुई इस मुलाकात के दौरान दीपक बैज ने लखमा की सेहत का हाल जाना और उनके स्वास्थ्य को लेकर जानकारी ली। उल्लेखनीय है कि कुछ महीने पहले ही कवासी लखमा की आंखों की सर्जरी हुई थी। दीपक बैज की यह मुलाकात ऐसे समय पर हुई है, जब कथित शराब घोटाले को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच लगातार जारी है और राजनीतिक हलकों में इस मामले को लेकर चर्चाएं तेज हैं। बस्तर के कद्दावर आदिवासी नेता हैं कवासी लखमा कवासी लखमा को बस्तर अंचल के सबसे प्रभावशाली और मजबूत आदिवासी नेताओं में गिना जाता है। वे सुकमा जिले की कोंटा विधानसभा सीट से छह बार विधायक चुने जा चुके हैं। वर्ष 2013 में हुए दरभा घाटी नक्सली हमले में वे उन नेताओं में शामिल थे, जो बाल-बाल बच गए थे। 2018 में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद कवासी लखमा को आबकारी मंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के 13 मंत्रियों में से केवल चार ही अपनी सीट बचा पाए थे, जिनमें कवासी लखमा भी शामिल रहे। क्या है छत्तीसगढ़ का कथित शराब घोटाला? छत्तीसगढ़ के कथित शराब घोटाले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा की जा रही है। ED ने इस मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) में FIR दर्ज कराई है, जिसमें करीब 3,200 करोड़ रुपए से अधिक के घोटाले का दावा किया गया है। FIR में राजनेताओं, आबकारी विभाग के अधिकारियों और कारोबारियों की भूमिका सामने आने की बात कही गई है। ED के मुताबिक, तत्कालीन भूपेश बघेल सरकार के कार्यकाल में IAS अधिकारी अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के तत्कालीन MD एपी त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के कथित सिंडिकेट के जरिए इस घोटाले को अंजाम दिया गया। फिलहाल मामले में ED की जांच जारी है और आने वाले दिनों में और बड़े खुलासों की संभावना जताई जा रही है।

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रायपुर में ऑनलाइन क्रिकेट सट्टा नेटवर्क का भंडाफोड़, 6 आरोपी गिरफ्तार; ₹37.50 लाख नकद व लग्जरी कारें जब्त

रायपुर। राजधानी रायपुर में पुलिस ने ऑनलाइन क्रिकेट सट्टा संचालित करने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। गंज थाना पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर 31 जनवरी 2026 की रात कार्रवाई करते हुए 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया। आरोपियों के पास से भारी मात्रा में नकदी, मोबाइल फोन और तीन लग्जरी कारें बरामद की गई हैं। पुलिस को सूचना मिली थी कि नागोराव गली अंडरब्रिज के पास कुछ लोग महिंद्रा थार और नेक्सा एक्सएल कारों में बैठकर मोबाइल के जरिए ऑनलाइन क्रिकेट सट्टा चला रहे हैं। सूचना की पुष्टि के बाद पुलिस टीम ने मौके पर घेराबंदी कर दो कारों में सवार 6 लोगों को हिरासत में लिया। गिरफ्तार आरोपियों में रखब देव पाहुजा, पीयूष जैन, जितेन्द्र कुमार कृपलानी उर्फ जित्तू, दीपक अग्रवाल, कमल राघवानी और सचिन जैन शामिल हैं। तलाशी में करोड़ों की संपत्ति जब्त पुलिस तलाशी के दौरान आरोपियों के कब्जे से ₹37.50 लाख नकद, 10 मोबाइल फोन, 2 महिंद्रा थार और 1 नेक्सा एक्सएल कार बरामद की गई। जब्त संपत्ति की कुल अनुमानित कीमत करीब ₹92.50 लाख बताई जा रही है। जांच में सामने आया कि आरोपी jmdbet777.com और Classic777.com जैसी ऑनलाइन सट्टा वेबसाइटों के माध्यम से मास्टर आईडी बनाकर क्रिकेट सट्टा चला रहे थे। पूछताछ के दौरान आरोपी कोई भी वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके। इन धाराओं में दर्ज हुआ मामला गंज थाना पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ छत्तीसगढ़ जुआ (प्रतिषेध) अधिनियम 2022 की धारा 7 और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 112(2) के तहत मामला दर्ज किया है। पूरी कार्रवाई की वीडियोग्राफी भी कराई गई है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह ऑनलाइन सट्टा नेटवर्क बड़े स्तर पर संचालित किया जा रहा था। फिलहाल आरोपियों के मोबाइल, डिजिटल लेन-देन और संपर्कों की गहन जांच जारी है। आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां व खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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रायपुर में लेट नाइट गश्त: पुलिस ने पकड़े 23 संदिग्ध, तलाशी में बरामद चाकू और तलवार

रायपुर: राजधानी में सुरक्षा कड़ी करने के लिए पुलिस ने देर रात विशेष अभियान चलाया। पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला के निर्देश पर शहर के सभी थाना क्षेत्रों में रात्रि गश्त बढ़ाई गई, ताकि अपराध को होने से पहले ही रोका जा सके। 28-29 जनवरी की रात अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (वेस्ट जोन) राहुल देव शर्मा और सहायक पुलिस आयुक्त कोतवाली दीपक मिश्रा के नेतृत्व में विभिन्न इलाकों में गश्त की गई। इस दौरान थाना प्रभारियों और पुलिस टीमों ने संदिग्ध व्यक्तियों की जांच की। 23 संदिग्ध पकड़े गए चेक पोस्ट और सघन जांच पुलिस अधिकारियों ने कहा कि शहर में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए रात्रि गश्त और सघन जांच अभियान लगातार जारी रहेगा।

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दुर्ग में पत्नी की जलाकर हत्या: 12 साल पुराने केस में पति को उम्रकैद, कोर्ट ने मौत की सजा से किया इनकार

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में पत्नी को जिंदा जलाने के सनसनीखेज मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। नेवई थाना क्षेत्र के इस 12 साल पुराने प्रकरण में सत्र न्यायालय ने आरोपी पति को आजीवन कारावास की सजा दी है। हालांकि, अदालत ने इसे “विरल से विरलतम” अपराध की श्रेणी में नहीं मानते हुए मृत्युदंड देने से इनकार कर दिया। घरेलू विवाद बना हत्या की वजह अभियोजन पक्ष के मुताबिक यह घटना 15 जनवरी 2012 की रात की है। नेवई के मिनीमाता पारा निवासी ममता (25) अपने पति घांसू उर्फ झांसूराम के साथ रहती थी। आरोपी अपनी पहली पत्नी सुमन का पक्ष लेता था, जिससे पति-पत्नी के बीच अक्सर विवाद होता रहता था। घटना की रात करीब 9:30 बजे आरोपी शराब के नशे में घर पहुंचा और ममता से गाली-गलौज करते हुए मारपीट शुरू कर दी। इसके बाद उसने जान से मारने की धमकी देते हुए एक प्लास्टिक बोतल में रखा मिट्टी का तेल ममता पर डाल दिया। आग लगाने के बाद भी नहीं रुका आरोपी अभियोजन के अनुसार, भय और तनाव की स्थिति में ममता ने खुद को आग लगा ली। इसके बावजूद आरोपी नहीं रुका और उसने जलती हुई पत्नी पर दोबारा केरोसिन डाल दिया, जिससे आग और तेज हो गई। ममता गंभीर रूप से झुलस गई। उसकी चीखें सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और पुलिस को सूचना दी। मरणासन्न बयान में पति पर लगाए आरोप घटना की जानकारी नेवई थाना को रात 9:40 बजे मिली, जिसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची और ममता को दुर्ग के शासकीय अस्पताल के बर्न यूनिट में भर्ती कराया गया। अगले दिन कार्यपालिक मजिस्ट्रेट डी.आर. मरकाम ने ममता का मरणासन्न कथन दर्ज किया। अपने बयान में ममता ने साफ कहा कि उसके पति ने जान से मारने की नीयत से उस पर मिट्टी का तेल डाला और आग लगने के बाद भी केरोसिन डालता रहा। इलाज के दौरान मौत, हत्या में बदला केस पहले पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धारा 307 (हत्या का प्रयास) के तहत मामला दर्ज किया था, लेकिन 22 जनवरी 2012 को इलाज के दौरान ममता की मौत हो गई। इसके बाद केस को धारा 302 (हत्या) में बदल दिया गया। पुलिस ने घटनास्थल से जले कपड़े, जली साड़ी और मिट्टी तेल की बोतल जब्त की। 12 साल फरार रहा आरोपी, 2024 में गिरफ्तारी घटना के बाद आरोपी फरार हो गया था। वर्ष 2014 में अदालत ने उसे फरार घोषित करते हुए स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी किया। करीब 12 साल बाद, 17 नवंबर 2024 को पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया। कोर्ट का निर्णय सत्र न्यायाधीश के. विनोद कुजूर ने गवाहों, साक्ष्यों और मरणासन्न बयान के आधार पर आरोपी को दोषी ठहराया। अदालत ने कहा कि अपराध बेहद गंभीर है, लेकिन इसे विरल से विरलतम श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। कोर्ट ने आरोपी घांसू उर्फ झांसूराम को आजीवन कारावास, ₹1000 का अर्थदंड और अर्थदंड नहीं देने पर 6 माह अतिरिक्त सश्रम कारावास की सजा सुनाई।

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मैं टोनही नहीं हूं 20–21 साल से इंसाफ की लड़ाई, कोई कोर्ट में भटक रही तो कोई समाज से जूझ रही

छत्तीसगढ़ में आज भी कई महिलाएं “टोनही” (डायन) का ठप्पा लगने के बाद अमानवीय यातनाएं झेलने को मजबूर हैं। किसी की आंखें फोड़ दी गईं, किसी को घर से बेदखल कर दिया गया, तो किसी को गांव से बहिष्कृत कर दिया गया। इन पीड़ित महिलाओं का संघर्ष केवल हमलावरों से नहीं, बल्कि समाज और व्यवस्था दोनों से है—और यह संघर्ष 20 से 21 सालों से जारी है। एक पीड़िता श्याम बाई जब अपने घर की खाट पर बैठी मिलीं, तो उन्होंने दर्द भरी आवाज में कहा—“मुझे टोनही कहकर मारा गया, पीटा गया। मेरी और मेरे पति की आंखें फोड़ दी गईं। घर छीन लिया गया, लेकिन आरोपी खुले घूम रहे हैं।” उनके गांव की दीवारों पर आज भी चेतावनी लिखी है—महिला को मारने पर जेल होगी, टोनही कहने पर 13 साल की सजा—लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। पुनर्वास को लेकर कोई ठोस व्यवस्था नहीं सामाजिक संगठनों का कहना है कि राज्य में टोनही पीड़ित महिलाओं के पुनर्वास के लिए अब तक कोई ठोस सरकारी नीति नहीं बनी है। इसी वजह से मांग उठ रही है कि कम से कम पीड़िताओं को न्याय के साथ जीवन दोबारा शुरू करने का अवसर मिले। प्रमुख मांगें: डराने वाले आंकड़े, हकीकत और भी भयावह ये तो सिर्फ दर्ज मामले हैं, असल संख्या इससे कहीं ज्यादा बताई जाती है। विशेषज्ञों की राय: मुआवजे का अलग प्रावधान जरूरी डॉ. दिनेश मिश्रा, अध्यक्ष, अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति, कहते हैं कि टोनही प्रताड़ना के सैकड़ों मामले सालों से अदालतों में लंबित हैं। पीड़िताएं सामाजिक बहिष्कार और आर्थिक तंगी झेल रही हैं, लेकिन मुआवजे और पुनर्वास को लेकर कोई स्पष्ट योजना नहीं है।उनका सवाल है—जब सड़क हादसे, करंट या सांप के काटने पर मुआवजा मिल सकता है, तो टोनही जैसे गंभीर अपराध में क्यों नहीं? वहीं गजेंद्र सोनकर, सरकारी वकील (रायपुर कोर्ट) बताते हैं कि कानून में अधिकतम 5 साल की सजा और जुर्माने का प्रावधान है, और जुर्माने से ही मुआवजा दिया जाता है। कानून सख्त है, लेकिन जागरूकता और प्रभावी क्रियान्वयन की भारी कमी है। 22 साल बाद भी इंसाफ अधूरा 17 नवंबर 2025 को रायपुर की अदालत ने गरियाबंद जिले के लचकेरा गांव की तीन पीड़ित महिलाओं को सूचना दी कि आरोपियों से वसूले गए जुर्माने से उन्हें 75-75 हजार रुपये मुआवजा मिलेगा। यह मामला 2003 का है, जब महिलाओं को निर्वस्त्र कर गांव में घुमाया गया, मारपीट की गई और अमानवीय यातनाएं दी गईं।22 साल बाद भी आरोपी बरी हैं और पीड़िताएं मुआवजे के लिए आज भी अदालतों के चक्कर काट रही हैं। क्या कहता है कानून? टोनही प्रताड़ना निवारण अधिनियम 2005 के तहत: छत्तीसगढ़ में मामलों की गंभीरता को देखते हुए अलग कानून तो बना, लेकिन उसका असर अब तक जमीन पर पूरी तरह नहीं दिखा।

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सुबह पुलिस की रेड, शाम को फिर नशे का कारोबार: 10 रुपये में बिक रहा गोगो पेपर, चिलम भी आसानी से उपलब्ध

राजधानी रायपुर में नशे के खिलाफ पुलिस द्वारा लगातार अभियान चलाए जाने के बावजूद अवैध कारोबार थमने का नाम नहीं ले रहा है। शहर के सेंट्रल, नॉर्थ और वेस्ट जोन के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में पुलिस की छापेमारी जारी है। अवैध शराब, गांजा, ड्रग्स और नशीली दवाइयों के तस्करों पर कार्रवाई की जा रही है, लेकिन इसके बावजूद नशे का सामान खुलेआम बिकता नजर आ रहा है। कई इलाकों में नशीले पदार्थ सरेआम बेचे जा रहे हैं, जबकि कुछ जगहों पर चोरी-छिपे पुड़िया बनाकर सप्लाई की जा रही है। तस्कर पुलिस की कार्रवाई से बचने के लिए अब होम डिलीवरी जैसे तरीकों का भी सहारा ले रहे हैं। कई इलाकों में आसानी से मिला गोगो पेपर पुलिस की सख्ती के बीच शाम के समय राजातालाब, सड्डू, डंगनिया, टिकरापारा और रायपुरा क्षेत्रों में नशे से जुड़ा सामान खरीदने की कोशिश की गई, जहां गोगो पेपर आसानी से उपलब्ध मिला। इसका इस्तेमाल गांजा पीने के साथ-साथ अन्य नशीले पदार्थों के सेवन में भी किया जा रहा है। बाजार में गोगो पेपर 10 से 25 रुपये तक में बेचा जा रहा है। पुलिस कार्रवाई के बाद बढ़ी कीमतें पुलिस की लगातार कार्रवाई के चलते पहले 10 रुपये में मिलने वाला गोगो पेपर अब 25 से 30 रुपये में बिकने लगा है। पहले पान ठेलों और दुकानों में गांजा लपेटकर गोगो दिया जाता था, लेकिन अब कार्रवाई के डर से केवल पेपर ही बेचा जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, गोगो बेचने वालों को पुलिस की रेड की जानकारी पहले ही मिल जाती है। पुलिस के पहुंचते ही दुकानें बंद कर दी जाती हैं और कार्रवाई खत्म होते ही फिर से खोल दी जाती हैं। चिलम और हुक्का सामान भी खुलेआम गोगो पेपर के अलावा कुम्हारों के पास आज भी मिट्टी की चिलम आसानी से मिल रही है। वहीं गोलबाजार क्षेत्र में चीनी मिट्टी और प्लास्टिक की चिलम भी खुलेआम बिक रही है। प्रतिबंध के बावजूद हुक्का का सामान और फ्लेवर भी कई दुकानों पर उपलब्ध है। रायपुर नॉर्थ जोन में बड़ी कार्रवाई, 9 दुकानें सील पुलिस कमिश्नरी सिस्टम लागू होने के बाद रायपुर में नशे के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी गई है। बुधवार सुबह रायपुर नॉर्थ जोन में पुलिस ने एक साथ कई स्थानों पर छापेमारी की। तलाशी के दौरान 9 दुकानों और पान ठेलों से गांजा सेवन में उपयोग होने वाला गोगो पेपर और हुक्का सामग्री बरामद की गई। पुलिस ने करीब 2 लाख रुपये मूल्य का सामान जब्त कर संबंधित दुकानों को सील कर दिया है। उरला-बीर्गांव और अन्य इलाकों में भी छापेमारी इसी तरह उरला-बीर्गांव क्षेत्र में पुलिस ने चार पान ठेलों और दुकानों पर कार्रवाई करते हुए गोगो पेपर जब्त किया। दुकानों को सील कर संचालकों पर कोटपा एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है। खमतराई, उरला समेत अन्य इलाकों में भी कार्रवाई जारी है। पुलिस का कहना है कि गोगो पेपर के जरिए गांजा सेवन और तस्करी को बढ़ावा मिल रहा है। नशेड़ी इसमें बीड़ी की तरह गांजा लपेटकर कश लगाते हैं। इसी वजह से पुलिस इस पर सख्ती से रोक लगाने में जुटी है।

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