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शराब घोटाला केस: जेल में बंद कवासी लखमा से मिलने पहुंचे PCC चीफ दीपक बैज

रायपुर। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दीपक बैज शुक्रवार को शराब घोटाले के मामले में जेल में बंद वरिष्ठ कांग्रेस नेता कवासी लखमा से मुलाकात करने पहुंचे। जेल में हुई इस मुलाकात के दौरान दीपक बैज ने लखमा की सेहत का हाल जाना और उनके स्वास्थ्य को लेकर जानकारी ली। उल्लेखनीय है कि कुछ महीने पहले ही कवासी लखमा की आंखों की सर्जरी हुई थी। दीपक बैज की यह मुलाकात ऐसे समय पर हुई है, जब कथित शराब घोटाले को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच लगातार जारी है और राजनीतिक हलकों में इस मामले को लेकर चर्चाएं तेज हैं। बस्तर के कद्दावर आदिवासी नेता हैं कवासी लखमा कवासी लखमा को बस्तर अंचल के सबसे प्रभावशाली और मजबूत आदिवासी नेताओं में गिना जाता है। वे सुकमा जिले की कोंटा विधानसभा सीट से छह बार विधायक चुने जा चुके हैं। वर्ष 2013 में हुए दरभा घाटी नक्सली हमले में वे उन नेताओं में शामिल थे, जो बाल-बाल बच गए थे। 2018 में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद कवासी लखमा को आबकारी मंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के 13 मंत्रियों में से केवल चार ही अपनी सीट बचा पाए थे, जिनमें कवासी लखमा भी शामिल रहे। क्या है छत्तीसगढ़ का कथित शराब घोटाला? छत्तीसगढ़ के कथित शराब घोटाले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा की जा रही है। ED ने इस मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) में FIR दर्ज कराई है, जिसमें करीब 3,200 करोड़ रुपए से अधिक के घोटाले का दावा किया गया है। FIR में राजनेताओं, आबकारी विभाग के अधिकारियों और कारोबारियों की भूमिका सामने आने की बात कही गई है। ED के मुताबिक, तत्कालीन भूपेश बघेल सरकार के कार्यकाल में IAS अधिकारी अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के तत्कालीन MD एपी त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के कथित सिंडिकेट के जरिए इस घोटाले को अंजाम दिया गया। फिलहाल मामले में ED की जांच जारी है और आने वाले दिनों में और बड़े खुलासों की संभावना जताई जा रही है।

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रायपुर में ऑनलाइन क्रिकेट सट्टा नेटवर्क का भंडाफोड़, 6 आरोपी गिरफ्तार; ₹37.50 लाख नकद व लग्जरी कारें जब्त

रायपुर। राजधानी रायपुर में पुलिस ने ऑनलाइन क्रिकेट सट्टा संचालित करने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। गंज थाना पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर 31 जनवरी 2026 की रात कार्रवाई करते हुए 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया। आरोपियों के पास से भारी मात्रा में नकदी, मोबाइल फोन और तीन लग्जरी कारें बरामद की गई हैं। पुलिस को सूचना मिली थी कि नागोराव गली अंडरब्रिज के पास कुछ लोग महिंद्रा थार और नेक्सा एक्सएल कारों में बैठकर मोबाइल के जरिए ऑनलाइन क्रिकेट सट्टा चला रहे हैं। सूचना की पुष्टि के बाद पुलिस टीम ने मौके पर घेराबंदी कर दो कारों में सवार 6 लोगों को हिरासत में लिया। गिरफ्तार आरोपियों में रखब देव पाहुजा, पीयूष जैन, जितेन्द्र कुमार कृपलानी उर्फ जित्तू, दीपक अग्रवाल, कमल राघवानी और सचिन जैन शामिल हैं। तलाशी में करोड़ों की संपत्ति जब्त पुलिस तलाशी के दौरान आरोपियों के कब्जे से ₹37.50 लाख नकद, 10 मोबाइल फोन, 2 महिंद्रा थार और 1 नेक्सा एक्सएल कार बरामद की गई। जब्त संपत्ति की कुल अनुमानित कीमत करीब ₹92.50 लाख बताई जा रही है। जांच में सामने आया कि आरोपी jmdbet777.com और Classic777.com जैसी ऑनलाइन सट्टा वेबसाइटों के माध्यम से मास्टर आईडी बनाकर क्रिकेट सट्टा चला रहे थे। पूछताछ के दौरान आरोपी कोई भी वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके। इन धाराओं में दर्ज हुआ मामला गंज थाना पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ छत्तीसगढ़ जुआ (प्रतिषेध) अधिनियम 2022 की धारा 7 और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 112(2) के तहत मामला दर्ज किया है। पूरी कार्रवाई की वीडियोग्राफी भी कराई गई है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह ऑनलाइन सट्टा नेटवर्क बड़े स्तर पर संचालित किया जा रहा था। फिलहाल आरोपियों के मोबाइल, डिजिटल लेन-देन और संपर्कों की गहन जांच जारी है। आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां व खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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रायपुर में लेट नाइट गश्त: पुलिस ने पकड़े 23 संदिग्ध, तलाशी में बरामद चाकू और तलवार

रायपुर: राजधानी में सुरक्षा कड़ी करने के लिए पुलिस ने देर रात विशेष अभियान चलाया। पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला के निर्देश पर शहर के सभी थाना क्षेत्रों में रात्रि गश्त बढ़ाई गई, ताकि अपराध को होने से पहले ही रोका जा सके। 28-29 जनवरी की रात अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (वेस्ट जोन) राहुल देव शर्मा और सहायक पुलिस आयुक्त कोतवाली दीपक मिश्रा के नेतृत्व में विभिन्न इलाकों में गश्त की गई। इस दौरान थाना प्रभारियों और पुलिस टीमों ने संदिग्ध व्यक्तियों की जांच की। 23 संदिग्ध पकड़े गए चेक पोस्ट और सघन जांच पुलिस अधिकारियों ने कहा कि शहर में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए रात्रि गश्त और सघन जांच अभियान लगातार जारी रहेगा।

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दुर्ग में पत्नी की जलाकर हत्या: 12 साल पुराने केस में पति को उम्रकैद, कोर्ट ने मौत की सजा से किया इनकार

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में पत्नी को जिंदा जलाने के सनसनीखेज मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। नेवई थाना क्षेत्र के इस 12 साल पुराने प्रकरण में सत्र न्यायालय ने आरोपी पति को आजीवन कारावास की सजा दी है। हालांकि, अदालत ने इसे “विरल से विरलतम” अपराध की श्रेणी में नहीं मानते हुए मृत्युदंड देने से इनकार कर दिया। घरेलू विवाद बना हत्या की वजह अभियोजन पक्ष के मुताबिक यह घटना 15 जनवरी 2012 की रात की है। नेवई के मिनीमाता पारा निवासी ममता (25) अपने पति घांसू उर्फ झांसूराम के साथ रहती थी। आरोपी अपनी पहली पत्नी सुमन का पक्ष लेता था, जिससे पति-पत्नी के बीच अक्सर विवाद होता रहता था। घटना की रात करीब 9:30 बजे आरोपी शराब के नशे में घर पहुंचा और ममता से गाली-गलौज करते हुए मारपीट शुरू कर दी। इसके बाद उसने जान से मारने की धमकी देते हुए एक प्लास्टिक बोतल में रखा मिट्टी का तेल ममता पर डाल दिया। आग लगाने के बाद भी नहीं रुका आरोपी अभियोजन के अनुसार, भय और तनाव की स्थिति में ममता ने खुद को आग लगा ली। इसके बावजूद आरोपी नहीं रुका और उसने जलती हुई पत्नी पर दोबारा केरोसिन डाल दिया, जिससे आग और तेज हो गई। ममता गंभीर रूप से झुलस गई। उसकी चीखें सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और पुलिस को सूचना दी। मरणासन्न बयान में पति पर लगाए आरोप घटना की जानकारी नेवई थाना को रात 9:40 बजे मिली, जिसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची और ममता को दुर्ग के शासकीय अस्पताल के बर्न यूनिट में भर्ती कराया गया। अगले दिन कार्यपालिक मजिस्ट्रेट डी.आर. मरकाम ने ममता का मरणासन्न कथन दर्ज किया। अपने बयान में ममता ने साफ कहा कि उसके पति ने जान से मारने की नीयत से उस पर मिट्टी का तेल डाला और आग लगने के बाद भी केरोसिन डालता रहा। इलाज के दौरान मौत, हत्या में बदला केस पहले पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धारा 307 (हत्या का प्रयास) के तहत मामला दर्ज किया था, लेकिन 22 जनवरी 2012 को इलाज के दौरान ममता की मौत हो गई। इसके बाद केस को धारा 302 (हत्या) में बदल दिया गया। पुलिस ने घटनास्थल से जले कपड़े, जली साड़ी और मिट्टी तेल की बोतल जब्त की। 12 साल फरार रहा आरोपी, 2024 में गिरफ्तारी घटना के बाद आरोपी फरार हो गया था। वर्ष 2014 में अदालत ने उसे फरार घोषित करते हुए स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी किया। करीब 12 साल बाद, 17 नवंबर 2024 को पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया। कोर्ट का निर्णय सत्र न्यायाधीश के. विनोद कुजूर ने गवाहों, साक्ष्यों और मरणासन्न बयान के आधार पर आरोपी को दोषी ठहराया। अदालत ने कहा कि अपराध बेहद गंभीर है, लेकिन इसे विरल से विरलतम श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। कोर्ट ने आरोपी घांसू उर्फ झांसूराम को आजीवन कारावास, ₹1000 का अर्थदंड और अर्थदंड नहीं देने पर 6 माह अतिरिक्त सश्रम कारावास की सजा सुनाई।

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मैं टोनही नहीं हूं 20–21 साल से इंसाफ की लड़ाई, कोई कोर्ट में भटक रही तो कोई समाज से जूझ रही

छत्तीसगढ़ में आज भी कई महिलाएं “टोनही” (डायन) का ठप्पा लगने के बाद अमानवीय यातनाएं झेलने को मजबूर हैं। किसी की आंखें फोड़ दी गईं, किसी को घर से बेदखल कर दिया गया, तो किसी को गांव से बहिष्कृत कर दिया गया। इन पीड़ित महिलाओं का संघर्ष केवल हमलावरों से नहीं, बल्कि समाज और व्यवस्था दोनों से है—और यह संघर्ष 20 से 21 सालों से जारी है। एक पीड़िता श्याम बाई जब अपने घर की खाट पर बैठी मिलीं, तो उन्होंने दर्द भरी आवाज में कहा—“मुझे टोनही कहकर मारा गया, पीटा गया। मेरी और मेरे पति की आंखें फोड़ दी गईं। घर छीन लिया गया, लेकिन आरोपी खुले घूम रहे हैं।” उनके गांव की दीवारों पर आज भी चेतावनी लिखी है—महिला को मारने पर जेल होगी, टोनही कहने पर 13 साल की सजा—लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। पुनर्वास को लेकर कोई ठोस व्यवस्था नहीं सामाजिक संगठनों का कहना है कि राज्य में टोनही पीड़ित महिलाओं के पुनर्वास के लिए अब तक कोई ठोस सरकारी नीति नहीं बनी है। इसी वजह से मांग उठ रही है कि कम से कम पीड़िताओं को न्याय के साथ जीवन दोबारा शुरू करने का अवसर मिले। प्रमुख मांगें: डराने वाले आंकड़े, हकीकत और भी भयावह ये तो सिर्फ दर्ज मामले हैं, असल संख्या इससे कहीं ज्यादा बताई जाती है। विशेषज्ञों की राय: मुआवजे का अलग प्रावधान जरूरी डॉ. दिनेश मिश्रा, अध्यक्ष, अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति, कहते हैं कि टोनही प्रताड़ना के सैकड़ों मामले सालों से अदालतों में लंबित हैं। पीड़िताएं सामाजिक बहिष्कार और आर्थिक तंगी झेल रही हैं, लेकिन मुआवजे और पुनर्वास को लेकर कोई स्पष्ट योजना नहीं है।उनका सवाल है—जब सड़क हादसे, करंट या सांप के काटने पर मुआवजा मिल सकता है, तो टोनही जैसे गंभीर अपराध में क्यों नहीं? वहीं गजेंद्र सोनकर, सरकारी वकील (रायपुर कोर्ट) बताते हैं कि कानून में अधिकतम 5 साल की सजा और जुर्माने का प्रावधान है, और जुर्माने से ही मुआवजा दिया जाता है। कानून सख्त है, लेकिन जागरूकता और प्रभावी क्रियान्वयन की भारी कमी है। 22 साल बाद भी इंसाफ अधूरा 17 नवंबर 2025 को रायपुर की अदालत ने गरियाबंद जिले के लचकेरा गांव की तीन पीड़ित महिलाओं को सूचना दी कि आरोपियों से वसूले गए जुर्माने से उन्हें 75-75 हजार रुपये मुआवजा मिलेगा। यह मामला 2003 का है, जब महिलाओं को निर्वस्त्र कर गांव में घुमाया गया, मारपीट की गई और अमानवीय यातनाएं दी गईं।22 साल बाद भी आरोपी बरी हैं और पीड़िताएं मुआवजे के लिए आज भी अदालतों के चक्कर काट रही हैं। क्या कहता है कानून? टोनही प्रताड़ना निवारण अधिनियम 2005 के तहत: छत्तीसगढ़ में मामलों की गंभीरता को देखते हुए अलग कानून तो बना, लेकिन उसका असर अब तक जमीन पर पूरी तरह नहीं दिखा।

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सुबह पुलिस की रेड, शाम को फिर नशे का कारोबार: 10 रुपये में बिक रहा गोगो पेपर, चिलम भी आसानी से उपलब्ध

राजधानी रायपुर में नशे के खिलाफ पुलिस द्वारा लगातार अभियान चलाए जाने के बावजूद अवैध कारोबार थमने का नाम नहीं ले रहा है। शहर के सेंट्रल, नॉर्थ और वेस्ट जोन के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में पुलिस की छापेमारी जारी है। अवैध शराब, गांजा, ड्रग्स और नशीली दवाइयों के तस्करों पर कार्रवाई की जा रही है, लेकिन इसके बावजूद नशे का सामान खुलेआम बिकता नजर आ रहा है। कई इलाकों में नशीले पदार्थ सरेआम बेचे जा रहे हैं, जबकि कुछ जगहों पर चोरी-छिपे पुड़िया बनाकर सप्लाई की जा रही है। तस्कर पुलिस की कार्रवाई से बचने के लिए अब होम डिलीवरी जैसे तरीकों का भी सहारा ले रहे हैं। कई इलाकों में आसानी से मिला गोगो पेपर पुलिस की सख्ती के बीच शाम के समय राजातालाब, सड्डू, डंगनिया, टिकरापारा और रायपुरा क्षेत्रों में नशे से जुड़ा सामान खरीदने की कोशिश की गई, जहां गोगो पेपर आसानी से उपलब्ध मिला। इसका इस्तेमाल गांजा पीने के साथ-साथ अन्य नशीले पदार्थों के सेवन में भी किया जा रहा है। बाजार में गोगो पेपर 10 से 25 रुपये तक में बेचा जा रहा है। पुलिस कार्रवाई के बाद बढ़ी कीमतें पुलिस की लगातार कार्रवाई के चलते पहले 10 रुपये में मिलने वाला गोगो पेपर अब 25 से 30 रुपये में बिकने लगा है। पहले पान ठेलों और दुकानों में गांजा लपेटकर गोगो दिया जाता था, लेकिन अब कार्रवाई के डर से केवल पेपर ही बेचा जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, गोगो बेचने वालों को पुलिस की रेड की जानकारी पहले ही मिल जाती है। पुलिस के पहुंचते ही दुकानें बंद कर दी जाती हैं और कार्रवाई खत्म होते ही फिर से खोल दी जाती हैं। चिलम और हुक्का सामान भी खुलेआम गोगो पेपर के अलावा कुम्हारों के पास आज भी मिट्टी की चिलम आसानी से मिल रही है। वहीं गोलबाजार क्षेत्र में चीनी मिट्टी और प्लास्टिक की चिलम भी खुलेआम बिक रही है। प्रतिबंध के बावजूद हुक्का का सामान और फ्लेवर भी कई दुकानों पर उपलब्ध है। रायपुर नॉर्थ जोन में बड़ी कार्रवाई, 9 दुकानें सील पुलिस कमिश्नरी सिस्टम लागू होने के बाद रायपुर में नशे के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी गई है। बुधवार सुबह रायपुर नॉर्थ जोन में पुलिस ने एक साथ कई स्थानों पर छापेमारी की। तलाशी के दौरान 9 दुकानों और पान ठेलों से गांजा सेवन में उपयोग होने वाला गोगो पेपर और हुक्का सामग्री बरामद की गई। पुलिस ने करीब 2 लाख रुपये मूल्य का सामान जब्त कर संबंधित दुकानों को सील कर दिया है। उरला-बीर्गांव और अन्य इलाकों में भी छापेमारी इसी तरह उरला-बीर्गांव क्षेत्र में पुलिस ने चार पान ठेलों और दुकानों पर कार्रवाई करते हुए गोगो पेपर जब्त किया। दुकानों को सील कर संचालकों पर कोटपा एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है। खमतराई, उरला समेत अन्य इलाकों में भी कार्रवाई जारी है। पुलिस का कहना है कि गोगो पेपर के जरिए गांजा सेवन और तस्करी को बढ़ावा मिल रहा है। नशेड़ी इसमें बीड़ी की तरह गांजा लपेटकर कश लगाते हैं। इसी वजह से पुलिस इस पर सख्ती से रोक लगाने में जुटी है।

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रायपुर: तिल्दा-नेवरा में गांजा तस्कर गिरफ्तार, 73 किलो गांजा समेत नकद और हथियार जब्त

रायपुर जिले के तिल्दा-नेवरा क्षेत्र में नशे के कारोबार पर रायपुर ग्रामीण पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कुख्यात गांजा तस्कर मधु मिश्रा को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपी के घर पर अचानक छापेमारी कर करीब 73 किलो गांजा, जिसकी अनुमानित कीमत 36 लाख रुपये बताई जा रही है, बरामद किया है। छापेमारी के दौरान पुलिस को 790 नग प्रतिबंधित नशीली गोलियां, एक चाकू, मोबाइल फोन और करीब 1 लाख 87 हजार रुपये नकद भी मिले हैं। यह कार्रवाई रायपुर ग्रामीण पुलिस द्वारा चलाए जा रहे विशेष नशा विरोधी अभियान के तहत की गई। जानकारी के अनुसार, रायपुर ग्रामीण पुलिस अधिकारियों के निर्देश पर बुधवार को तिल्दा-नेवरा इलाके में सक्रिय नशा तस्करों के खिलाफ सघन अभियान चलाया गया था। इसी दौरान पुलिस को मधु मिश्रा के घर से नशीले पदार्थों के भंडारण की सूचना मिली, जिसके बाद टीम ने सरप्राइज चेकिंग कर आरोपी को मौके पर ही दबोच लिया। पुलिस सूत्रों का कहना है कि आरोपी लंबे समय से इलाके में गांजा और नशीली गोलियों की तस्करी में लिप्त था। जब्त सामग्री को पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिया है और आरोपी से पूछताछ जारी है। मामले का औपचारिक खुलासा जल्द ही रायपुर ग्रामीण पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी करेंगे। एसपी श्वेता श्रीवास्तव सिन्हा के नेतृत्व में पहली बड़ी सफलता रायपुर में पुलिसिंग को और प्रभावी बनाने के लिए शहर और ग्रामीण क्षेत्र को अलग-अलग प्रशासनिक इकाइयों में बांटा गया है। ग्रामीण थानों की जिम्मेदारी एसपी श्वेता श्रीवास्तव सिन्हा को सौंपी गई है। कार्यभार संभालने के बाद यह उनके नेतृत्व में ग्रामीण पुलिस की पहली बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है। ग्रामीण पुलिस अधिकारियों ने साफ किया है कि नशे के कारोबार के खिलाफ आगे भी इसी तरह की सख्त कार्रवाइयां जारी रहेंगी।

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रायपुर के टेस्ट ट्यूब बेबी सेंटर के तार बच्चा चोर गिरोह से जुड़े?

डॉ. पहलाजानी समेत मेडिकल बोर्ड के डॉक्टरों पर FIR के आदेश, सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में होगी जांच रायपुर।छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में स्थित टेस्ट ट्यूब बेबी और सरोगेसी सेंटर से जुड़े एक बेहद संवेदनशील बच्चों की अदला-बदली मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने सेंटर के संचालक डॉ. नीरज पहलाजानी, मेडिकल बोर्ड में शामिल डॉक्टरों और अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच के निर्देश दिए हैं। अब इस पूरे मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में की जाएगी। यह मामला शंकर नगर स्थित पहलाजानी टेस्ट ट्यूब बेबी एंड सरोगेसी सेंटर (माता लक्ष्मी नर्सिंग होम) से जुड़ा है, जहां दो साल पहले एक महिला ने जुड़वा बच्चों को जन्म दिया था। क्या है पूरा मामला पीड़ित परिवार के अनुसार, 25 दिसंबर 2023 को महिला ने एक लड़का और एक लड़की को जन्म दिया था, लेकिन कुछ ही देर बाद अस्पताल प्रबंधन ने उन्हें दो लड़कियां सौंप दीं। इस पर परिवार को संदेह हुआ और शिकायत दर्ज कराई गई। मामला सामने आने के बाद कराई गई डीएनए जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि सौंपी गई दो बच्चियों में से एक बच्ची माता-पिता की जैविक संतान थी, जबकि दूसरी बच्ची का डीएनए किसी भी माता-पिता से मेल नहीं खाता था। इससे बच्चों की अदला-बदली की आशंका प्रमाणित हुई। प्रशासनिक जांच पर उठे सवाल पीड़ितों का आरोप है कि डीएनए रिपोर्ट सामने आने के बावजूद तत्कालीन अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। जब पीड़ित परिवार ने एफआईआर दर्ज कराने की मांग की, तो तत्कालीन सीएमएचओ ने मेडिकल बोर्ड के सदस्यों की अगुवाई में छह डॉक्टरों की एक नई टीम गठित कर दोबारा जांच कराई, जिसने अस्पताल प्रबंधन को क्लीन चिट दे दी। बच्चा चोर गिरोह से सांठगांठ के आरोप पीड़ितों ने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में रसूखदार डॉक्टरों और बच्चा चोर गिरोह की सांठगांठ हो सकती है। न्याय की तलाश में पीड़ित परिवार पहले हाईकोर्ट पहुंचा, लेकिन कानूनी कारणों से याचिका खारिज हो गई। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस मनमोहन की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए इसे गंभीर और विस्तृत जांच योग्य माना। कोर्ट ने मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट पर भी कड़े सवाल उठाए और रायपुर एसपी को निर्देश दिया कि अपीलकर्ताओं की शिकायत पर एफआईआर दर्ज कर निष्पक्ष जांच की जाए। पहले से विवादों में रहे हैं डॉ. पहलाजानी गौरतलब है कि डॉ. नीरज पहलाजानी पहले से ही ₹700 करोड़ के कोल लेवी घोटाले में जांच के दायरे में रह चुके हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उनसे कोल माफिया सूर्यकांत तिवारी के साथ कथित नकद लेनदेन को लेकर पूछताछ की थी। अब बच्चों की अदला-बदली जैसे गंभीर मामले में उनका नाम सामने आने से मामला और संवेदनशील हो गया है। सूत्रों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद रायपुर पुलिस जल्द ही आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर सकती है।

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कमिश्नरी सिस्टम के बाद रायपुर पुलिस का बड़ा एक्शन, अपराधियों को CSP ऑफिस में सख्त चेतावनी

रायपुर।रायपुर में कमिश्नरी सिस्टम लागू होने के बाद पुलिस ने अपराध नियंत्रण को लेकर सख्ती बढ़ा दी है। इसी कड़ी में आज खमतराई CSP कार्यालय में आदतन अपराधियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की गई। डिप्टी कमिश्नर मयंक गुज्जर के निर्देश पर खमतराई, उरला और गुढ़ियारी थाना क्षेत्र के आदतन अपराधियों को खमतराई CSP ऑफिस में पेश किया गया। इस दौरान CSP पूर्णिमा लामा, उरला थाना प्रभारी रोहित मालेकर, गुढ़ियारी थाना प्रभारी बी.एल. चंद्राकर और खमतराई थाना प्रभारी राजेश सिंह मौजूद रहे। खमतराई, उरला और गुढ़ियारी थाना क्षेत्र के आदतन अपराधियों को CSP ऑफिस में पेश किया गया। पुलिस अधिकारियों ने सभी अपराधियों को स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि वे दोबारा किसी भी आपराधिक गतिविधि में शामिल पाए गए, तो उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने कहा कि अब अपराध को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पुलिस ने अपराधियों को समाज की मुख्यधारा में लौटने, अपराध से दूर रहने और शांतिपूर्ण जीवन जीने की सलाह दी। साथ ही यह भी साफ किया गया कि कमिश्नरी सिस्टम के तहत पुलिस अब पहले से ज्यादा सख्ती और निगरानी के साथ काम कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की कार्रवाइयों से शहर में कानून-व्यवस्था मजबूत होगी और आम नागरिकों में सुरक्षा की भावना बढ़ेगी। रायपुर पुलिस ने भरोसा जताया है कि आने वाले दिनों में अपराध पर प्रभावी नियंत्रण देखने को मिलेगा।

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दुर्ग में महिला कांग्रेस कार्यकर्ता ने खुद को किया आग के हवाले, 95% झुलसी; कोर्ट के आदेश पर खाली कराया जा रहा था मकान

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले से एक बेहद चौंकाने वाली और दर्दनाक घटना सामने आई है। गुरुवार को महिला कांग्रेस कार्यकर्ता ने पुलिस और कोर्ट स्टाफ के सामने खुद पर केरोसिन डालकर आत्मदाह करने की कोशिश की, जिसमें वह गंभीर रूप से झुलस गई। पीड़िता को इलाज के लिए रायपुर रेफर किया गया है, जहां उसकी हालत नाजुक बनी हुई है। सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र की घटना यह मामला सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र के पचरीपारा इलाके का है। पीड़िता की पहचान शबाना निशा उर्फ रानी (37 वर्ष) के रूप में हुई है, जो यहां एक किराए के मकान में रहती थी। कोर्ट के आदेश पर पहुंची थी टीम जानकारी के अनुसार, मकान मालिक और किराएदार के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। मामला जिला न्यायालय तक पहुंचा, जहां से मकान मालिक के पक्ष में फैसला आया। कोर्ट के आदेश के बाद गुरुवार दोपहर करीब 2:30 बजे पुलिस और कोर्ट स्टाफ मकान खाली कराने पहुंचे थे। इसी दौरान शबाना निशा अचानक घर के अंदर गई और मिट्टी तेल डालकर खुद को आग लगा ली। आग लगते ही बाहर निकली, लोगों ने चादर से बुझाई प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, आग लगने के बाद शबाना जलती हालत में घर से बाहर निकली। स्थिति को देखकर पुलिस और कोर्ट स्टाफ पीछे हट गए। मौके पर मौजूद लोगों ने चादर की मदद से किसी तरह आग बुझाई, लेकिन तब तक वह करीब 95 प्रतिशत तक झुलस चुकी थी। जिला अस्पताल से रायपुर रेफर घटना के तुरंत बाद शबाना को जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसकी गंभीर हालत को देखते हुए रायपुर के डीकेएस अस्पताल रेफर किया गया। डॉक्टरों के अनुसार उसकी हालत बेहद नाजुक बनी हुई है। 40-45 साल से उसी मकान में रह रही थी पीड़िता के मामा लियाकत अली ने बताया कि शबाना बचपन से ही उस मकान में रह रही थी और करीब 40 से 45 वर्षों से किराएदार थी। पिछले कुछ महीनों से मकान खाली करने को लेकर उस पर दबाव बनाया जा रहा था। राजनीतिक पृष्ठभूमि भी रही शबाना निशा कांग्रेस पार्टी से जुड़ी रही हैं। उन्होंने पिछले दुर्ग नगर निगम चुनाव में वार्ड क्रमांक 28 (पचरीपारा) से कांग्रेस के टिकट पर पार्षद पद का चुनाव भी लड़ा था। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और घटना से जुड़े सभी पहलुओं को खंगाला जा रहा है।

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