Bilaspur

बिलासपुर में खाद्य विभाग की कार्रवाई, 77 पेटी पानी जब्त

बिलासपुर में खाद्य एवं औषधि प्रशासन की टीम ने अशोक नगर स्थित सीमा ब्रेवरेज पर छापेमारी कर बड़ी कार्रवाई की। जांच के दौरान गलत लेबलिंग पाए जाने पर पानी की 77 पेटियां जब्त की गईं और फर्म को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। बोतलों पर एक्सपायरी डेट नहीं अधिकारियों के अनुसार, पैकेज्ड पानी की बोतलों पर न तो एक्सपायरी डेट सही तरीके से दर्ज थी और न ही लेबलिंग मानकों के अनुरूप थी। इस गंभीर अनियमितता के चलते विभाग ने कंपनी से स्पष्टीकरण मांगा है। आइसक्रीम का सैंपल भी जांच के लिए भेजा कार्रवाई के दौरान परिसर में रखी मेलोडी ब्रांड की आइसक्रीम का नमूना भी लिया गया, जिसे प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा गया है। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। नवरात्रि और गर्मी को देखते हुए अभियान तेज विभाग ने बताया कि नवरात्रि और बढ़ती गर्मी के मौसम में लोगों की सेहत को ध्यान में रखते हुए खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की जांच अभियान चलाया जा रहा है, ताकि मिलावटी या नियमों के विरुद्ध उत्पाद बाजार में न बिकें। पहले भी हुई थी बड़ी जब्ती इससे एक दिन पहले सीपत स्थित गंगोत्री मिनरल वाटर प्लांट पर भी कार्रवाई करते हुए हजारों बोतल और पाउच पैकेज्ड पानी जब्त किए गए थे। अधिकारियों की निगरानी में कार्रवाई यह पूरी कार्रवाई अभिहित अधिकारी आर. आर. देवांगन के निर्देशन में की गई, जिसमें वरिष्ठ खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की टीम शामिल रही।

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मान्यता बिना CBSE पढ़ाई का खुलासा: बिलासपुर में पेरेंट्स के हंगामे के बाद जांच कमेटी गठित

Bilaspur में बिना आधिकारिक मान्यता के CBSE पैटर्न पर पढ़ाई कराने का मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने जांच के लिए कमेटी बना दी है। आरोप है कि कई स्कूलों ने खुद को Central Board of Secondary Education से संबद्ध बताकर बच्चों को पूरे साल उसी कोर्स से पढ़ाया, लेकिन परीक्षा के समय 5वीं और 8वीं के छात्रों को Chhattisgarh Board of Secondary Education की परीक्षा देने के लिए बाध्य किया गया। इस मुद्दे पर अभिभावकों में भारी नाराजगी है। उनका कहना है कि प्रवेश के समय स्कूलों ने CBSE स्कूल होने का दावा किया था, जिस भरोसे उन्होंने बच्चों का दाखिला कराया। अब अचानक राज्य बोर्ड की परीक्षा दिलाने से बच्चों का भविष्य प्रभावित हो सकता है। बताया जा रहा है कि Brilliant Public School और Narayana e‑Techno School सहित कुछ स्कूलों में केवल 8वीं तक कक्षाएं संचालित हैं। CBSE से संबद्धता के लिए 12वीं तक स्कूल चलाना जरूरी होता है, इसलिए इन संस्थानों को मान्यता नहीं मिली। इसके बावजूद CBSE पैटर्न से पढ़ाई कराई जा रही थी। जब छात्रों पर राज्य बोर्ड की परीक्षा देने का दबाव बनाया गया तो अभिभावकों ने विरोध शुरू कर दिया। उन्होंने स्कूल प्रबंधन के साथ कलेक्ट्रेट का भी घेराव किया और शिकायत उच्च स्तर तक पहुंचाई। मामले के बढ़ने पर शिक्षा विभाग ने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की है, जिसे 7 दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषी स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। साथ ही अभिभावकों को सलाह दी गई है कि किसी भी स्कूल में दाखिला लेने से पहले उसकी मान्यता और संबद्धता की आधिकारिक जांच जरूर करें।

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Bilaspur में नाबालिग ने घर से चोरी कर थार खरीदने के लिए गहने चुराए, दोस्तों के साथ मिलकर बनाया प्लान

छत्तीसगढ़ के Bilaspur जिले में एक नाबालिग ने अपनी थार गाड़ी खरीदने के लिए अपने ही घर से गहने चोरी करवा डाले। आरोपी ने इस काम के लिए भारतीय सेना से रिटायर्ड जवान के बेटे को उकसाया और करीब 15 तोला सोना धीरे-धीरे पार करवा लिया। प्लान और चोरी मामला सरकंडा थाना क्षेत्र का है। बहतराई निवासी सेना के रिटायर्ड जवान सुशील कुमार शर्मा ने 14 मार्च को थाने में शिकायत दर्ज कराई। जांच में पता चला कि नाबालिग और उसके दोस्तों ने मिलकर अपने घर से जेवर चोरी करके उसे बेचने और उससे थार खरीदने की योजना बनाई थी। नकली और असली सोने की गड़बड़ी पूछताछ में पता चला कि दोस्तों ने असली जेवर लाने की बजाय नकली गहने दे दिए। नाबालिग को इसका पता नहीं चला और वे मिलकर गहनों को बेचने की तैयारी कर रहे थे। पैसे और धमकी सोने की बिक्री से प्राप्त रकम थार खरीदने के लिए पर्याप्त नहीं थी। जब पैसा खत्म हुआ, तब दोस्तों ने नाबालिग को फिर से गहने लाने के लिए दबाव डालना शुरू किया और मारपीट भी की। गहनों की बिक्री जांच में यह भी सामने आया कि चोरी के गहने को कोतवाली क्षेत्र के एक युवक के जरिए गांधी चौक के पास रहने वाले ज्वेलरी व्यापारी को बेचा गया। कुछ सोना गिरवी रखकर भी रुपए लिए गए। पुलिस ने इस मामले में महिला समेत दो अन्य खरीदारों को भी गिरफ्तार किया। पुलिस कार्रवाई पुलिस ने नाबालिग समेत पांच लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। सभी के कब्जे से करीब 15 लाख रुपए मूल्य के सोने-चांदी के गहने बरामद किए गए। परिवार ने खुलवाया राज नाबालिग के घरवालों को जेवर गायब होने की जानकारी मिलने पर उन्होंने पूछताछ की। तब पूरे प्लान का खुलासा हुआ और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई।

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Bilaspur, Chhattisgarh

तंत्र-मंत्र के चक्कर में व्यक्ति ने की आत्महत्या: पूजा कक्ष में गला काटकर दी जान, परिवार सदमे में

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में अंधविश्वास से जुड़ा एक दर्दनाक मामला सामने आया है, जहां एक व्यक्ति ने कथित तौर पर तंत्र-मंत्र के प्रभाव में आकर खुद का गला काटकर जान दे दी। घटना पचपेड़ी थाना क्षेत्र के ग्राम जोंधरा की है। जानकारी के अनुसार, 45 वर्षीय चंदन नट भीख मांगकर अपने परिवार का पालन-पोषण करता था। मंगलवार को वह रोज की तरह भीख मांगने गया और शाम करीब 6 बजे घर लौटा। घर आने के बाद उसने अपने बड़े भाई के साथ बैठकर बीड़ी पी और कुछ देर बातचीत की। भाई के जाने के बाद वह घर के अंदर बने पूजा कक्ष में चला गया। करीब एक घंटे बाद, शाम लगभग 7 बजे उसकी बहू किसी काम से पूजा कमरे की ओर गई। दरवाजा खोलते ही उसने चंदन को खून से लथपथ हालत में पड़ा देखा और घबराकर चिल्ला उठी। आवाज सुनकर परिवार के अन्य सदस्य भी मौके पर पहुंचे। परिजन उसे तुरंत अस्पताल ले गए, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इसके बाद घटना की सूचना पचपेड़ी पुलिस को दी गई। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची। मामले की गंभीरता को देखते हुए बिलासपुर से डॉग स्क्वॉड और फोरेंसिक टीम भी बुलाई गई। रात अधिक होने के कारण शव को घटनास्थल पर ही रखा गया और बुधवार सुबह विशेषज्ञों ने मौके का निरीक्षण किया। बाद में शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया। पुलिस के अनुसार, मृतक पूजा-पाठ में अधिक विश्वास करता था और घटना वाली रात वह एक चाकू खरीदकर घर लाया था। आशंका है कि उसी चाकू से उसने तंत्र-मंत्र के प्रभाव में आकर आत्महत्या की। बताया जा रहा है कि करीब चार महीने पहले भी उसने अपना हाथ काटकर जान देने की कोशिश की थी।

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Bilaspur, Chhattisghar

बिलासपुर में 130 पुलिसकर्मियों के तबादले, एसएसपी ने जारी किया ट्रांसफर आदेश

बिलासपुर: जिले में पुलिस व्यवस्था को बेहतर बनाने के उद्देश्य से एसएसपी रजनेश सिंह ने बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया है। जारी आदेश के तहत कुल 130 पुलिसकर्मियों का ट्रांसफर किया गया है। इनमें 3 सब-इंस्पेक्टर (SI), 10 असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (ASI), 23 प्रधान आरक्षक और 94 आरक्षक शामिल हैं। शिकायतों के बाद लिया गया फैसला बताया जा रहा है कि जिले के कई थानों में पदस्थ पुलिसकर्मियों के खिलाफ लगातार शिकायतें मिल रही थीं। इसी को ध्यान में रखते हुए एसएसपी ने पुलिस व्यवस्था में सुधार और अनुशासन बनाए रखने के लिए यह बड़ा तबादला आदेश जारी किया है। हटाए गए कुछ पुलिसकर्मियों को फिर से मिला थाना कई थानों में बदली गई पदस्थापना इस ट्रांसफर आदेश के तहत जिले के कई प्रमुख थानों और इकाइयों में पदस्थ पुलिसकर्मियों की नई नियुक्ति की गई है। इनमें सिविल लाइन, सरकंडा, सिटी कोतवाली, तोरवा, सकरी, रतनपुर, चकरभाठा, कोनी, हिर्री, तखतपुर और पचपेड़ी जैसे थाने शामिल हैं। सूत्रों के मुताबिक, कुछ पुलिसकर्मियों ने भी अपनी पदस्थापना बदलने के लिए आवेदन दिया था, जिसके आधार पर उन्हें दूसरे थानों में भेजा गया है। माना जा रहा है कि इस बदलाव से जिले में पुलिसिंग व्यवस्था और अधिक प्रभावी हो सकेगी।

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बिलासपुर के स्पंज आयरन प्लांट में हादसा: फर्नेस से गिरा पिघला लोहा, 4 मजदूर झुलसे

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में स्थित Nova Sponge Iron Plant में बड़ा औद्योगिक हादसा हो गया। प्लांट के फर्नेस सेक्शन में काम के दौरान अचानक पिघला हुआ लोहा मजदूरों पर गिर गया, जिससे चार मजदूर गंभीर रूप से झुलस गए। सभी घायलों को इलाज के लिए निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटना Bilha थाना क्षेत्र की है। जानकारी के मुताबिक सोमवार देर रात प्लांट में नाइट शिफ्ट के दौरान मजदूर काम कर रहे थे। रात करीब 1 बजे शिफ्ट बदलने के बाद बिल्हा के ग्राम भैंसबोड़ निवासी नरेंद्र कोसले, चंद्रहास और बिहार के धर्मवीर व विनय कुमार फर्नेस में पिघले आयरन को लैडर में डालने का काम कर रहे थे। इसी दौरान अचानक खौलता हुआ लोहा उनके ऊपर गिर गया। गर्म धातु की चपेट में आते ही चारों मजदूर गंभीर रूप से झुलस गए और दर्द से छटपटाते हुए गिर पड़े। साथी कर्मचारियों ने तुरंत उन्हें वहां से बाहर निकाला और प्लांट में मौजूद अधिकारी की कार से अस्पताल पहुंचाया। बाद में उन्हें प्रताप चौक स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों के अनुसार चारों मजदूर करीब 25 से 40 प्रतिशत तक झुलस गए हैं। घायल मजदूर विनय कुमार ने बताया कि काम के दौरान लैडर का रिंग कटने से अचानक पिघला हुआ लोहा उछलकर उन पर गिर गया। उस समय सभी मजदूर वहीं खड़े थे, जिससे चारों इसकी चपेट में आ गए। मजदूरों ने प्लांट प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि फर्नेस जैसे संवेदनशील क्षेत्र में भी उनसे बिना सुरक्षा किट के काम कराया जा रहा था। कर्मचारियों के मुताबिक उन्हें सुरक्षा जैकेट, चश्मा और ईयर प्लग जैसे जरूरी सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराए गए थे। हादसे के बाद प्लांट में काम करने वाले मजदूरों के बीच डर और चिंता का माहौल है। मामले की जानकारी मिलते ही पुलिस और औद्योगिक सुरक्षा विभाग ने जांच शुरू कर दी है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि हादसा तकनीकी खराबी के कारण हुआ या सुरक्षा मानकों की अनदेखी की वजह से। बताया जा रहा है कि जिले के कई औद्योगिक इकाइयों में पहले भी इस तरह के हादसे हो चुके हैं, जिससे फैक्ट्री सुरक्षा व्यवस्था पर फिर सवाल खड़े हो गए हैं।

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मिसिंग चिल्ड्रन रिपोर्ट: बच्चों के लापता होने के मामलों में छत्तीसगढ़ देश में छठवें स्थान पर

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की ‘मिसिंग चिल्ड्रन’ रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार बच्चों के लापता होने के मामलों में छत्तीसगढ़ देश में छठवें स्थान पर है। पिछले लगभग पांच वर्षों से राज्य लगातार इस सूची के टॉप-10 राज्यों में बना हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक जनवरी 2025 से जनवरी 2026 के बीच छत्तीसगढ़ में कुल 982 बच्चे लापता हुए। इनमें से 582 बच्चों को पुलिस और प्रशासन ने खोज लिया है, जबकि 400 से अधिक बच्चों का अब तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है। राज्य के कुछ जिलों में बच्चों के गायब होने के मामले अधिक सामने आए हैं। जांजगीर-चांपा इस सूची में पहले स्थान पर है। इसके बाद रायपुर, बिलासपुर, सक्ती, दुर्ग और बलौदाबाजार जिलों का नाम शामिल है। लापता बच्चों की तलाश के लिए पुलिस और प्रशासन द्वारा ‘ऑपरेशन मुस्कान’ अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत अब तक 559 बच्चों को सुरक्षित ढूंढकर उनके परिवारों तक पहुंचाया गया है। बरामद किए गए बच्चों में सबसे अधिक संख्या जांजगीर-चांपा जिले की बताई जा रही है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार रायपुर और बिलासपुर जैसे औद्योगिक और शहरी क्षेत्रों में प्रवासी परिवारों की संख्या अधिक है। कई बार उनके बच्चे परिवार से बिछड़ जाते हैं या बिना जानकारी दिए अन्य शहरों की ओर चले जाते हैं। इसके अलावा मानव तस्करी के गिरोह भी बच्चों के लापता होने का एक बड़ा कारण माने जा रहे हैं। जानकारी के मुताबिक तस्कर बच्चों को बड़े शहरों में अधिक पैसे या अन्य लालच देकर अपने साथ ले जाते हैं और उनसे मजदूरी या अन्य काम करवाते हैं। ऑपरेशन मुस्कान के दौरान रेस्क्यू किए गए बच्चों से पूछताछ में ऐसे मामलों का खुलासा भी हुआ है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 1 जनवरी 2025 से 31 जनवरी 2026 के बीच देशभर में कुल 33,577 बच्चे लापता हुए। इनमें से 7,777 बच्चों का अब तक कोई पता नहीं चल सका है, जबकि बाकी बच्चों को खोज लिया गया है। वहीं कुछ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों जैसे नगालैंड, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, त्रिपुरा, गुजरात, लक्षद्वीप और दादर एवं नगर हवेली में इस अवधि के दौरान बच्चों के लापता होने की कोई शिकायत दर्ज नहीं हुई है। रिपोर्ट के अनुसार लापता बच्चों में 14 से 17 वर्ष की आयु के किशोर-किशोरियों की संख्या अधिक है और इनमें लड़कियों की संख्या लड़कों के मुकाबले ज्यादा पाई गई है।

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बिलासपुर में पत्नी की हत्या कर फरार हुआ पति, बाथरूम में सिर पटककर की वारदात

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में एक व्यक्ति द्वारा अपनी पत्नी की हत्या करने का मामला सामने आया है। आरोपी पति ने घर के बाथरूम में पत्नी का सिर पटक दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद आरोपी फरार हो गया है। पुलिस उसकी तलाश में जुटी हुई है। जानकारी के अनुसार यह घटना बिलासपुर के नेहरू नगर इलाके की है। सिविल लाइन थाना पुलिस के मुताबिक MIG-33 नेहरू नगर में रहने वाली 37 वर्षीय पुष्पलता यादव की हत्या उसके पति युवराज यादव (43) ने की है। युवराज मूल रूप से कोटा क्षेत्र के मोहनभाठा का निवासी बताया जा रहा है। बताया जा रहा है कि घटना से पहले मकान मालकिन किराएदारों से घर खाली करने की बात कहने आई थी। इसी बात को लेकर पति-पत्नी के बीच विवाद शुरू हो गया। उस समय युवराज शराब के नशे में था और उसने पत्नी से गाली-गलौज शुरू कर दी। विवाद बढ़ने पर उसने पत्नी को घर के अंदर ले जाकर बाथरूम के पास उसका सिर दीवार से पटक दिया। हमले में पुष्पलता के सिर और चेहरे पर गंभीर चोटें आईं, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना को अंजाम देने के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया। घटना की सूचना मिलते ही सिविल लाइन थाना पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी। पुलिस ने आरोपी की गिरफ्तारी के लिए अलग-अलग टीमें बनाई हैं और उसकी तलाश की जा रही है। पुलिस के मुताबिक दंपति करीब एक महीने पहले ही इस किराए के मकान में रहने आए थे। पुष्पलता मजदूरी कर परिवार का खर्च चलाती थी, जबकि उसका पति शराब का आदी था और अक्सर उसके साथ विवाद करता था।

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बिलासपुर में ईरान के सुप्रीम लीडर की मौत पर जश्न, हिंदू नेता की आपत्तिजनक टिप्पणी पर FIR दर्ज

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में हिंदू संगठन के नेता ठाकुर राम सिंह के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। आरोप है कि राम सिंह ने ईरान के सुप्रीम लीडर आयत उल्लाह अली खामेनेई की मौत पर जश्न मनाया और मिठाइयां बांटी। साथ ही उन्होंने सोशल मीडिया पर मुस्लिम समुदाय के खिलाफ अपमानजनक और भड़काऊ टिप्पणियां कीं, जिसमें उन्हें देशद्रोही बताया गया और ईरान भेजने की बात कही गई। यह घटना सरकंडा थाना क्षेत्र की है। मामला सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो और पोस्ट के बाद उजागर हुआ। मुस्लिम समुदाय के लोगों ने इस पर गहरी नाराजगी जताई और पुलिस से कार्रवाई की मांग की। घटना का क्रम 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर आयत उल्लाह अली खामेनेई की मौत हुई। इस खबर के बाद बिलासपुर में ठाकुर राम सिंह ने जश्न मनाया और मिठाइयां बांटी। उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक वीडियो पोस्ट किया जिसमें उन्होंने खामेनेई के प्रति मातम मनाने वालों के खिलाफ आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया और भारतीय मुसलमानों को देशद्रोही करार देते हुए ईरान भेजने की बात कही। मुस्लिम समाज में नाराजगी राम सिंह के इस व्यवहार और पोस्ट के सामने आने के बाद मुस्लिम समाज में विरोध शुरू हो गया। बड़ी संख्या में लोग सरकंडा थाने पहुंचे और एफआईआर दर्ज करने की मांग की। लोगों का आरोप है कि राम सिंह की टिप्पणी से उनकी धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं और शहर की शांति भी प्रभावित हो सकती है। समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि बिलासपुर हमेशा से शांतिपूर्ण और भाईचारे वाला शहर रहा है। ऐसे भड़काऊ बयानों से हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच सौहार्द बिगड़ने की संभावना होती है। उन्होंने प्रशासन से इस तरह की किसी भी भड़काऊ टिप्पणी पर सख्त कार्रवाई की अपील की। पुलिस की कार्रवाई सरकंडा थाने की पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए ठाकुर राम सिंह के खिलाफ FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया पोस्ट की जांच की जा रही है और जांच के आधार पर उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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बलरामपुर में दुष्कर्म पीड़िता के परिवार का सामाजिक बहिष्कार, पंचायत ने रखीं अपमानजनक शर्तें

छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में दुष्कर्म पीड़िता को न्याय दिलाने के बजाय पंचायत द्वारा उसके परिवार के खिलाफ सामाजिक दंड सुनाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि पंचायत ने पीड़िता के परिवार को 12 साल तक समाज से अलग रखने का फैसला किया और कई अपमानजनक शर्तें भी रख दीं। यह मामला वाड्रफनगर विकासखंड के बसंतपुर थाना क्षेत्र के एक गांव का है। पीड़िता के परिजनों के अनुसार, पंचायत की बैठक में सरपंच और पंचों ने आरोपी युवक को सजा देने के बजाय पीड़िता के परिवार को ही दोषी ठहराते हुए उनके बहिष्कार का निर्णय लिया। पंचायत के कथित फैसले के मुताबिक, पीड़िता का परिवार अगले 12 वर्षों तक गांव के सामाजिक कार्यक्रमों, धार्मिक आयोजनों और अन्य सामुदायिक गतिविधियों में शामिल नहीं हो सकेगा। पंचायत की विवादित शर्तें परिजनों का आरोप है कि पंचायत ने समाज में दोबारा शामिल होने के लिए अपमानजनक शर्तें रखीं। सरपंच जवाहिर लाल के अनुसार, अगर परिवार समाज में वापस आना चाहता है तो उन्हें पूरे गांव के लोगों के पैर धोकर उसी पानी से स्नान करना होगा। इसके अलावा पूरे गांव को बकरा-भात और शराब का भोज देने की भी बात कही गई। पंचायत के इस फैसले से पीड़ित परिवार काफी डरा और परेशान है। उन्होंने इस मामले की शिकायत एसडीओपी कार्यालय में करते हुए प्रशासन से न्याय की मांग की है। फिलहाल पुलिस और प्रशासन मामले की जानकारी लेकर पंचायत को समझाने का प्रयास कर रहे हैं। सरपंच ने आरोपों से किया इनकार इस मामले में सरपंच जवाहिर लाल का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें पंचायत द्वारा परिवार के बहिष्कार की बात कही जा रही है। हालांकि वीडियो वायरल होने के बाद सरपंच ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि पंचायत ने ऐसा कोई फैसला नहीं लिया है और यह पंचायत को बदनाम करने की साजिश है। सात महीने की गर्भवती है पीड़िता जानकारी के अनुसार युवक और युवती एक ही गांव के रहने वाले हैं और पिछले करीब एक साल से दोनों के बीच संबंध थे। युवती का आरोप है कि युवक ने उससे शादी का वादा किया था, लेकिन बाद में शादी से इंकार करता रहा। इस दौरान युवती गर्भवती हो गई। जब युवती ने परिवार को इस बारे में बताया, तो परिजनों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। 18 फरवरी को बसंतपुर थाने में मामला दर्ज किया गया था। इसके बाद पुलिस ने 22 फरवरी को आरोपी युवक को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। बताया जा रहा है कि 25 फरवरी को गांव में पंचायत की बैठक हुई, जिसके बाद पीड़िता के परिवार के सामाजिक बहिष्कार की बात सामने आई। वाड्रफनगर एसडीएम नीरनिधि नंदेहा ने कहा कि मामले की जानकारी मिलने के बाद प्रशासन जांच कर रहा है और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

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