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महासमुंद विवाद पर सख्त कांग्रेस, बागी कार्यकर्ताओं की रिपोर्ट तलब

छत्तीसगढ़ के Mahasamund में कांग्रेस नेताओं के बीच हुए विवाद और मारपीट के बाद पार्टी हाईकमान सख्त हो गया है। घटना को गंभीरता से लेते हुए सभी जिलाध्यक्षों से नाराज और बागी कार्यकर्ताओं की रिपोर्ट मांगी गई है। साथ ही निर्देश दिए गए हैं कि भविष्य में किसी भी सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान ऐसी स्थिति न बने। अनुशासनहीनता पर कड़ी कार्रवाई के संकेत प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष Sushil Anand Shukla ने स्पष्ट कहा है कि घटना में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि पार्टी में अनुशासन सर्वोपरि है और इसे तोड़ने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। नाराज कार्यकर्ताओं की जानकारी जुटाई जा रही पार्टी संगठन स्तर पर जिलाध्यक्षों और पदाधिकारियों से उन कार्यकर्ताओं की सूची मांगी गई है जो नाराज हैं या बागी रुख अपना सकते हैं। हाल ही में हुए संगठनात्मक नियुक्तियों के बाद कई जगहों पर असंतोष सामने आया है, जिसे समय रहते नियंत्रित करने की कोशिश की जा रही है। प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद बढ़ा विवाद गुरुवार को जिला कांग्रेस कार्यालय में महंगाई के मुद्दे पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद विवाद शुरू हुआ। जिलाध्यक्ष द्वारिकाधीश यादव द्वारा कार्यक्रम किए जाने के बाद जिला उपाध्यक्ष विजय साव ने उन्हें सूचना न मिलने पर आपत्ति जताई। नोकझोंक से मारपीट तक पहुंचा मामला बहस धीरे-धीरे बढ़कर मारपीट में बदल गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विवाद के दौरान कुर्सियां और ग्लास फेंके गए और जमकर हंगामा हुआ। आरोप है कि विजय साव ने पूर्व कोषाध्यक्ष निर्मल जैन के साथ मारपीट की। पुलिस हस्तक्षेप और FIR दर्ज स्थिति बिगड़ने पर पुलिस को बुलाना पड़ा, जिसके बाद मामला शांत हुआ। घटना के बाद विजय साव के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। पार्टी अब इस पूरे मामले को अनुशासन से जोड़कर देख रही है और भविष्य में सख्त कार्रवाई के संकेत दे रही है।

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डीजे पर नाचने के विवाद में युवक पर जानलेवा हमला, 4 हिरासत में

छत्तीसगढ़ के Datrengi Village में शादी समारोह के दौरान डीजे पर नाचने को लेकर हुए मामूली विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। इस घटना में दो युवकों पर जानलेवा हमला किया गया, जिसके बाद पुलिस ने एक नाबालिग सहित चार आरोपियों को हिरासत में लिया है। जानकारी के अनुसार 27 मार्च को प्रार्थी अपने मित्र के साथ शादी कार्यक्रम में शामिल होने गांव पहुंचा था। परघनी के बाद सभी लोग समारोह स्थल की ओर जा रहे थे, तभी अंधेरे का फायदा उठाकर आरोपियों ने दुर्गेश केवट और करण निर्मलकर पर बांस के डंडों और अन्य भारी वस्तुओं से हमला कर दिया। इस हमले में दोनों युवक गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया। घटना के बाद 28 मार्च को Bhatapara Rural Police Station में मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई। पुलिस ने मौके का निरीक्षण कर गांव वालों से पूछताछ की और त्वरित कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों को हिरासत में लिया। पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि डीजे पर नाचने के दौरान हुए विवाद के चलते उन्होंने एकराय होकर बांस से हमला किया। गिरफ्तार आरोपियों में प्रेमलाल उर्फ बजरंगी वर्मा (22), कोहिनूर वर्मा (18), टुकेश्वर वर्मा (19) और एक विधि से संघर्षरत नाबालिग शामिल है।

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BHATAPARA, Chhattisgarh, Crime, Top News

मूंदगांव में सिलेंडर ब्लास्ट के बाद उजड़े परिवार को मिली मदद, उदयाचल परिवार ने बढ़ाया सहयोग

Moondgaon में 30 मार्च को हुए गैस सिलेंडर ब्लास्ट ने एक परिवार की जिंदगी पूरी तरह बदल दी। धमाका इतना जोरदार था कि आग ने पूरे घर को अपनी चपेट में ले लिया और सारा घरेलू सामान जलकर राख हो गया। इस हादसे में परिवार का मुखिया और एक पड़ोसी झुलस गए, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटना के बाद पीड़ित परिवार के सामने जीवन-यापन का संकट खड़ा हो गया। ऐसे में Udayachal Parivar ने मानवता का परिचय देते हुए तुरंत मदद पहुंचाई। संस्था के सदस्य 31 मार्च को मौके पर पहुंचे और परिवार को 15 दिनों का राशन, कपड़े, बर्तन, पलंग और अन्य जरूरी सामान उपलब्ध कराया। संस्था ने आश्वासन दिया है कि आगे भी जरूरत पड़ने पर हर संभव सहयोग किया जाएगा। इस सेवा कार्य के दौरान Dr. Pukhraj Bafna, उत्तमचंद जैन, राजेंद्र बाफना, अशोक मोदी, प्रकाश रंगारी, संतोष शुक्ला, गौरव साहू और ग्राम सरपंच भूमिका सिन्हा मौजूद रहे। संस्था के पीआरओ गुरदीप बग्गा ने बताया कि हादसे की जानकारी मिलते ही उदयाचल परिवार सबसे पहले सहायता के लिए पहुंचा और पीड़ितों को तत्काल राहत उपलब्ध कराई।

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रायगढ़ में सरकारी जमीन पर अवैध फ्लाई ऐश डंपिंग, पर्यावरण और खेतों को नुकसान

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में सरकारी जमीन पर उद्योगों से निकलने वाली फ्लाई ऐश की अवैध डंपिंग के आरोप सामने आए हैं। खरसिया ब्लॉक के नवापारा क्षेत्र में खसरा क्रमांक 311/1 की शासकीय भूमि पर सरडा एनर्जी कंपनी बिना अनुमति के नियमों का उल्लंघन करते हुए फ्लाई ऐश डंप कर रही है। इस अवैध गतिविधि से आसपास के खेत प्रभावित हो रहे हैं और क्षेत्र में प्रदूषण फैल रहा है। भाजपा युवा मंडल अध्यक्ष भोलू उरांव ने नायब तहसीलदार को लिखित शिकायत सौंपकर मामले में कार्रवाई की मांग की। आवेदन में यह भी कहा गया कि ट्रांसपोर्टर, उद्योग प्रबंधन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मिलीभगत की आशंका है और उच्च अधिकारियों को गुमराह करने के लिए गलत जानकारी दी जा रही है। भोलू उरांव ने मांग की कि सरकारी जमीन पर हो रही अवैध फ्लाई ऐश डंपिंग तुरंत रोकी जाए और आसपास की अन्य भूमि पर भी रोक लगाई जाए। साथ ही, संलिप्त उद्योग प्रबंधन, ट्रांसपोर्टर और अधिकारियों के खिलाफ पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई की जाए। उन्होंने बताया कि अवैध फ्लाई ऐश के परिवहन और खुले में डंपिंग से आवागमन में परेशानी हो रही है और सटी कृषि भूमि भी प्रभावित हो रही है। पहले भी शिकायत के बाद डंपिंग रोकी गई थी, लेकिन कुछ समय बाद यह गतिविधि फिर से शुरू हो गई।

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रायगढ़ में प्रशासन ने बाल विवाह रोका, दूल्हा निकला नाबालिग

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में नाबालिग लड़के की शादी रोक दी गई। शुक्रवार को बारात निकलने वाली थी, लेकिन प्रशासन की टीम समय रहते गांव पहुंच गई। दस्तावेजों की जांच में पता चला कि दूल्हा नाबालिग है। इसके बाद संयुक्त टीम ने विवाह रोक दिया और परिजनों ने बालक के बालिग होने तक शादी टालने का संकल्प लिया। यह आठ दिनों में बाल विवाह रोकने की दूसरी कार्रवाई है। रायगढ़ विकासखंड के एक गांव में नाबालिग बालक की शादी की तैयारी चल रही थी। बालक की आयु 20 साल 5 माह थी, जबकि विवाह के लिए कानूनी न्यूनतम आयु 21 साल है। टीम ने बालक और बालिका पक्ष दोनों के परिजनों को बाल विवाह के कानूनी दुष्परिणाम और कानून की जानकारी दी। मौके पर औपचारिक घोषणा पत्र और राजीनामा पत्र भरवाए गए। इस कार्रवाई में जिला बाल संरक्षण अधिकारी, परियोजना अधिकारी, पुलिसकर्मी, संरक्षण अधिकारी, विधिक सह परिवीक्षा अधिकारी, सेक्टर पर्यवेक्षक, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और ग्राम के सरपंच शामिल थे। जिला प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि बाल विवाह सामाजिक बुराई और कानूनी अपराध दोनों है। यदि कहीं बाल विवाह की जानकारी मिले, तो संबंधित विभाग या चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर तुरंत सूचना दें।

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रायपुर में ऑनलाइन जमीन डायवर्सन सिस्टम ठप, आवेदनकर्ता परेशान

राज्य सरकार ने दिसंबर 2025 में कृषि जमीन का लैंड यूज बदलने के लिए ऑनलाइन डायवर्सन पोर्टल लॉन्च किया था। राजधानी रायपुर समेत पूरे छत्तीसगढ़ में इस सिस्टम को लागू किया गया। इसके तहत ऑफलाइन आवेदन पूरी तरह बंद कर दिए गए हैं और सभी आवेदन पोर्टल के माध्यम से ही किए जाने हैं। लेकिन तीन महीनों में रायपुर में सिर्फ 16 आवेदन ही ऑनलाइन जमा हो पाए हैं, और इनमें से किसी को भी मंजूरी नहीं मिली है। इस वजह से जमीन मालिकों और खरीदारों में भारी परेशानी है। 2200 वर्गफीट से कम और बड़ी कृषि जमीन के डायवर्सन के लिए आवेदन जमा नहीं हो पा रहे हैं। तकनीकी खामियों और पोर्टल की खराब कार्यप्रणाली के कारण लोग लगातार असफल हो रहे हैं। तहसीलदार राममूर्ति दीवान के अनुसार, ऑफलाइन आवेदन अब स्वीकार नहीं किए जा रहे हैं। भुईंया वाट्सएप बोट से भी जानकारी नहीं मिल रही, जिससे लोग तहसीलों में बार-बार भटक रहे हैं। नए सिस्टम के नियमों के मुताबिक, एसडीएम को 15 दिन में आवेदन पर फैसला करना होता है, अन्यथा 16वें दिन ऑटोमेटिक मंजूरी मिलनी चाहिए। रायपुर में यह भी काम नहीं कर रहा है। द्वारका साहू लगातार एक माह से ऑनलाइन आवेदन कर रहे हैं लेकिन सफल नहीं हो पाए। कुशालपुर के प्रशांत दुबे ने ऑनलाइन और तहसील दोनों जगह कोशिश की, लेकिन कोई समाधान नहीं मिला। बोरियाखुर्द की तस्मीन बानो भी जमीन खरीदने के बाद ऑनलाइन आवेदन नहीं कर पाई। राज्य सरकार और तहसील प्रशासन को जल्द तकनीकी खामियों को दूर कर ऑनलाइन डायवर्सन प्रक्रिया को सुचारू रूप से लागू करने की आवश्यकता है, ताकि जमीन मालिकों को राहत मिल सके।

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दुर्ग में फर्जी स्वास्थ्य सचिव स्टाफ का सदस्य अस्पतालों से वसूली के आरोप में जांच

दुर्ग जिले में एक व्यक्ति ने खुद को स्वास्थ्य-परिवार कल्याण विभाग के सचिव के स्टाफ का अधिकारी बताकर अस्पताल संचालकों से पैसे की मांग की। मोहन नगर थाना क्षेत्र के गंगोत्री अस्पताल संचालक डॉ. ओम प्रकाश कराड़े ने 17 मार्च 2026 को इस संबंध में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के अनुसार आरोपी ने: जांच में पता चला कि अजय अग्रवाल नाम का कोई व्यक्ति स्वास्थ्य सचिव कार्यालय में कार्यरत नहीं है। इस मामले में मोहन नगर थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। भिलाई-3 थाने में भी इसी तरह का मामला दर्ज है, जिसमें चरौदा स्थित एएम हॉस्पिटल के संचालक को टारगेट बनाया गया। पुलिस मोबाइल नंबर और तकनीकी जानकारी के आधार पर आरोपी की पहचान और लोकेशन पता लगाने की कोशिश कर रही है। इस जांच के बाद पूरे वसूली नेटवर्क का खुलासा होने की संभावना है।

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छत्तीसगढ़ के चार IPS अधिकारी हैंद्राबाद में इंडक्शन ट्रेनिंग के लिए जाएंगे

त्तीसगढ़ डीजीपी ने चार जिलों में प्रभारी एसपी नियुक्त किए हैं, क्योंकि इन जिलों के कप्तान 6 अप्रैल से हैदराबाद स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल नेशनल पुलिस अकादमी (NPA) में इंडक्शन ट्रेनिंग में भाग लेंगे। इन अधिकारियों को उनके मूल कप्तानों की ट्रेनिंग समाप्त होने तक जिलों का लॉ एंड आर्डर संभालने की जिम्मेदारी दी गई है। इंडक्शन ट्रेनिंग की जानकारी: यह उच्च स्तरीय ट्रेनिंग पूरे देश के चुने हुए IPS अधिकारियों के लिए आयोजित की जाती है और उनके पेशेवर कौशल और नेतृत्व क्षमताओं को बढ़ाने में मदद करती है।

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अंबिकापुर में महिला की सिर कुचलकर हत्या, रेप की आशंका

अंबिकापुर में रिंग रोड किनारे एक अधेड़ महिला का खून से लथपथ शव मिला है। पुलिस ने शव कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में महिला के प्राइवेट पार्ट में प्लास्टिक की बोतल मिली है, जिससे रेप के बाद हत्या की आशंका जताई जा रही है। घटना कोतवाली थाना क्षेत्र के झोपड़ीनुमा मटन की दुकान के पास हुई। महिला के गले और चेहरे पर गंभीर चोटों के निशान पाए गए हैं। मृतका की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है। CCTV फुटेज में महिला किसी अन्य व्यक्ति के साथ दिखाई दी है, जिसकी जांच की जा रही है। एसएसपी राजेश अग्रवाल और एएसपी अमोलक सिंह के निर्देशन में फॉरेंसिक और डॉग स्क्वॉड टीम घटनास्थल का निरीक्षण कर रही है। शव का पंचनामा कर पोस्टमॉर्टम के लिए अस्पताल भेजा गया है। पुलिस आस-पास के लोगों से पूछताछ कर आरोपी की पहचान और गिरफ्तारी की कोशिश कर रही है।

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Ambikapur, Chhattisgarh, Crime, State, Top News

ट्रांसजेंडर समुदाय में आक्रोश: नए संशोधन बिल से पहचान और भविष्य पर संकट

Transgender Persons (Protection of Rights) Amendment Bill, 2026 के पास होने के बाद देशभर में ट्रांसजेंडर समुदाय में गहरी नाराजगी देखी जा रही है। Raipur सहित कई जगहों पर लोग इस कानून के खिलाफ विरोध जता रहे हैं। समुदाय का कहना है कि यह बिल उनकी पहचान, शिक्षा, रोजगार और रोजमर्रा की जिंदगी पर सीधा असर डाल सकता है। “पहचान ही खत्म हो रही है” रायपुर में रहने वाले अभिनव कुमार (बदला हुआ नाम) का कहना है कि इस नए कानून से उनकी पहचान पर ही सवाल खड़े हो गए हैं। उनका कहना है कि अगर उनकी पहचान को ही मान्यता नहीं मिलेगी, तो वे खुद को समाज में कैसे साबित करेंगे। उनका दर्द यह है कि वे न पूरी तरह पुरुष माने जा रहे हैं, न महिला — ऐसे में उनकी स्थिति क्या होगी, इसका कोई जवाब नहीं है। मेडिकल जांच और सख्त नियमों का विरोध समुदाय के लोगों का कहना है कि पहले जहां स्व-पहचान (self-identification) को मान्यता थी, अब इस संशोधन में मेडिकल जांच और सख्त प्रक्रिया को अनिवार्य बनाया जा रहा है। उनका मानना है कि यह उनकी गरिमा और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का उल्लंघन है। पढ़ाई और नौकरी पर खतरा अभिनव बताते हैं कि उनके दस्तावेजों में जेंडर मिसमैच होने के कारण उन्हें कई कॉलेजों में एडमिशन नहीं मिला। बड़ी मुश्किल से NALSA Judgment 2014 का हवाला देने के बाद उन्हें दाखिला मिला। अब उन्हें डर है कि नए कानून के लागू होने पर उनकी पढ़ाई भी खतरे में पड़ सकती है। नौकरी के क्षेत्र में भी उन्हें भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है। पहचान स्पष्ट न होने के कारण न निजी क्षेत्र में अवसर मिल रहे हैं, न सरकारी नौकरी में। सर्जरी के बाद भी असुरक्षा अभिनव ने अपनी पहचान के लिए काफी संघर्ष किया और करीब एक लाख रुपए खर्च कर सर्जरी करवाई। उनका कहना है कि सर्जरी के बाद उन्हें लगा था कि अब वे अपनी असली पहचान के साथ जी पाएंगे, लेकिन नए कानून के बाद फिर से सब कुछ अनिश्चित हो गया है। दस्तावेज रद्द होने का डर रायपुर की चांद किन्नर का कहना है कि इस बिल के कारण आधार कार्ड और राशन कार्ड जैसे जरूरी दस्तावेज भी रद्द होने का खतरा है। उनका सवाल है कि अगर ऐसा हुआ, तो वे जीवनयापन कैसे करेंगी। “सालों की मेहनत पलभर में खत्म” बॉबी फारिकार का कहना है कि उन्होंने सालों की मेहनत से अपनी पहचान और जीवन बनाया है, लेकिन अब उन्हें डर है कि यह सब कुछ एक झटके में खत्म हो सकता है। उन्होंने कहा कि अगर यह बिल वापस नहीं लिया गया, तो वे इसके खिलाफ आंदोलन जारी रखेंगे। सरकार का पक्ष इस मामले में छत्तीसगढ़ कॉलेज, रायपुर के विधि विशेषज्ञ डॉ. भूपेंद्र करवंदे का कहना है कि सरकार का उद्देश्य वास्तविक लाभार्थियों की पहचान करना है, ताकि जरूरतमंद लोगों तक सही लाभ पहुंच सके। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि मेडिकल सर्टिफिकेट को अनिवार्य करना स्व-पहचान के अधिकार को प्रभावित कर सकता है, जो 2014 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विपरीत है।

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