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रेरा कोर्ट नहीं, नियामक संस्था है: हाईकोर्ट ने कहा—शिकायत पर समय सीमा लागू नहीं

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) को अदालत की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता, बल्कि यह एक विशेष नियामक संस्था है। कोर्ट ने यह भी कहा कि रेरा में शिकायत दर्ज कराने के लिए कोई तय समय सीमा नहीं है, इसलिए देरी के आधार पर शिकायत को खारिज करना उचित नहीं है। यह मामला जगदलपुर निवासी निधि साव से जुड़ा है, जिन्होंने दुर्ग जिले के अमलेश्वर स्थित ग्रीन अर्थ सिटी परियोजना में एक फ्लैट बुक किया था। उन्होंने बिल्डर पर समय पर कब्जा नहीं देने और निर्माण की गुणवत्ता खराब होने का आरोप लगाया था। निधि साव ने पहले स्थानीय प्रशासन से शिकायत की, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने रेरा में याचिका दायर की। रेरा ने बिल्डर को दो महीने के भीतर निर्माण पूरा कर कब्जा देने का निर्देश दिया और साथ ही खरीदार को बकाया राशि जमा करने के लिए कहा। इस आदेश से असंतुष्ट होकर याचिकाकर्ता ने रेरा अपीलीय ट्रिब्यूनल में अपील की, लेकिन ट्रिब्यूनल ने सुनवाई करने के बजाय यह कहते हुए मामला खारिज कर दिया कि शिकायत देर से की गई है। इसके बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा, जहां जस्टिस बीडी गुरु की बेंच ने ट्रिब्यूनल के फैसले को निरस्त कर दिया। कोर्ट ने कहा कि रेरा कानून की धारा 31 में शिकायत दर्ज करने के लिए कोई समय सीमा निर्धारित नहीं है, इसलिए केवल देरी के आधार पर केस खारिज नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट ने मामले को वापस ट्रिब्यूनल को भेजते हुए निर्देश दिया कि अब इस पर नए सिरे से गुण-दोष के आधार पर सुनवाई की जाए, न कि तकनीकी आधार पर।

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डंगनिया टंकी में लापरवाही से 34 लाख लीटर पानी बर्बाद, डेढ़ लाख आबादी की सप्लाई ठप

रायपुर में पहले से जारी पानी संकट के बीच नगर निगम की बड़ी लापरवाही सामने आई है। डंगनिया स्थित पानी टंकी से बुधवार सुबह सप्लाई पूरी तरह प्रभावित रही, जिससे शहर के 10 से अधिक इलाकों में करीब 1.5 लाख लोगों को पानी नहीं मिल सका। जानकारी के मुताबिक, मंगलवार शाम सप्लाई के बाद टंकी का वॉल्व बंद किया गया था, लेकिन तकनीकी खराबी के कारण वह पूरी तरह बंद नहीं हो पाया। इसके चलते ओवरहेड टैंक भरने के बाद रातभर पानी बहता रहा और करीब 34 लाख लीटर पानी बर्बाद हो गया। घटना की जानकारी मिलते ही जल कार्य विभाग की टीम मौके पर पहुंची और वॉल्व की समस्या को ठीक किया गया। इसके बाद टंकी को दोबारा भरा गया और शाम तक पानी सप्लाई बहाल की गई। बताया जा रहा है कि डंगनिया टंकी शहर के कई घनी आबादी वाले इलाकों जैसे समता कॉलोनी, चौबे कॉलोनी, रोहिणीपुरम, कुशालपुर, सुंदरनगर, पुरानी बस्ती, कंकालीपारा, खो-खो पारा, अमरपुरी और भीमनगर में पानी सप्लाई का मुख्य स्रोत है। इससे पहले भाठागांव में भी मेन राइजिंग लाइन का वॉल्व खराब होने से पानी का फव्वारा फूट पड़ा था, जिसे करीब दो घंटे बाद ठीक किया गया था। जोन-5 के आयुक्त खीरसागर नायक ने कहा कि तकनीकी खराबी के कारण यह समस्या हुई, जिसे तुरंत सुधार लिया गया है। साथ ही वॉल्व की नियमित जांच के निर्देश दिए गए हैं। इधर, पानी संकट को लेकर शहर में असमानता की तस्वीर भी सामने आई है। जहां वीवीआईपी इलाकों में टैंकर से पर्याप्त पानी पहुंच रहा है, वहीं आम लोग पानी के लिए जूझ रहे हैं। महापौर मीनल चौबे ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों की बैठक की और स्पष्ट कहा कि पेयजल आपूर्ति में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने दो दिनों के भीतर व्यवस्था सुधारने के निर्देश भी दिए हैं। वहीं, नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने शहर में पानी के अवैध कारोबार का मुद्दा उठाया है। उनका कहना है कि कुछ इलाकों में बोर से पानी निकालकर बेचा जा रहा है, जिस पर सख्त कार्रवाई की जरूरत है।

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रायपुर में मॉल पार्किंग पर बड़ा फैसला, उपभोक्ता फोरम ने कहा—शुल्क वसूली अवैध

राजधानी रायपुर के जिला उपभोक्ता आयोग की अतिरिक्त बेंच ने मॉल पार्किंग शुल्क को लेकर एक अहम फैसला सुनाया है। आयोग ने साफ कहा है कि मॉल प्रबंधन ग्राहकों से पार्किंग के नाम पर पैसे नहीं ले सकता और इसे पूरी तरह नि:शुल्क करना होगा। यह मामला सिविल लाइन निवासी अजिनेश शुक्ला से जुड़ा है, जो 15 जून 2025 को अपनी कार से एक मॉल पहुंचे थे। वे केवल अपनी बुजुर्ग मां को छोड़ने गए थे, लेकिन इसके बावजूद उनसे 30 रुपये पार्किंग शुल्क लिया गया। इसे अनुचित व्यापार व्यवहार बताते हुए उन्होंने उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी। मामले की सुनवाई आयोग के अध्यक्ष प्रशांत कुंडू और सदस्य डॉ. आनंद वर्गीस की बेंच ने की। उन्होंने अपने फैसले में कहा कि किसी भी वाणिज्यिक भवन को निर्माण की अनुमति इस शर्त पर दी जाती है कि पार्किंग सुविधा आम जनता के लिए आवश्यक हिस्सा होगी। ऐसे में मॉल या बिल्डर इसके लिए अलग से शुल्क नहीं ले सकते। आयोग ने यह भी कहा कि मॉल का उद्देश्य ग्राहकों को सुविधाएं देना है, जबकि प्रबंधन पहले से ही दुकानों से किराया और मेंटेनेंस शुल्क लेता है। ऐसे में ग्राहकों पर अतिरिक्त पार्किंग शुल्क डालना गलत है। फोरम ने मॉल प्रबंधन को निर्देश दिया है कि दोपहिया और चारपहिया वाहनों के लिए पार्किंग पूरी तरह मुफ्त की जाए। साथ ही शिकायतकर्ता को मानसिक पीड़ा के लिए 50 हजार रुपये मुआवजा और 5 हजार रुपये कानूनी खर्च के रूप में देने का आदेश दिया गया है। यह राशि 45 दिनों के भीतर देनी होगी, अन्यथा 7% वार्षिक ब्याज भी देना पड़ेगा। हालांकि, इस फैसले के बाद भी शहर के कई मॉल में पार्किंग शुल्क वसूली जारी है। जांच के दौरान सामने आया कि कई जगह एंट्री पर पर्ची दी जाती है और बाहर निकलते समय शुल्क लिया जाता है। कुछ स्थानों पर एंट्री के समय ही पैसा वसूला जा रहा है, जिससे लोगों और कर्मचारियों के बीच बहस की स्थिति भी बन रही है।

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रायपुर में पानी संकट पर महापौर सख्त, 2 दिन में व्यवस्था सुधारने का अल्टीमेटम

गर्मी के बढ़ते असर के बीच रायपुर में पानी की किल्लत को लेकर नगर निगम ने सख्त रुख अपनाया है। महापौर मीनल चौबे ने जल विभाग और जल बोर्ड के अधिकारियों की बैठक लेकर पेयजल आपूर्ति व्यवस्था को दुरुस्त करने के निर्देश दिए। उन्होंने साफ कहा कि सप्लाई में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और गड़बड़ी मिलने पर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी। महापौर ने अधिकारियों को दो दिन के भीतर शहर की पानी सप्लाई व्यवस्था सुधारने का निर्देश दिया है। खासतौर पर तालाबों और अन्य जल स्रोतों के आसपास अधिक संख्या में हाइड्रेंट लगाने पर जोर दिया गया है, ताकि पानी की उपलब्धता बेहतर हो सके। उन्होंने अधिकारियों को नियमित रूप से फील्ड में उतरकर वार्डों का निरीक्षण करने के निर्देश दिए। टंकियों वाले क्षेत्रों में जाकर स्थिति का आकलन करने और मौके पर ही समस्याओं का समाधान करने को कहा गया है। महापौर ने यह भी निर्देश दिए कि पानी से जुड़ी शिकायतों का तुरंत समाधान किया जाए। जोन स्तर की टीमें मिलकर तेजी से काम करें, जिससे नागरिकों को राहत मिल सके। साथ ही, शहरवासियों से भी पानी का समझदारी से उपयोग करने और बर्बादी रोकने की अपील की गई है। बढ़ती गर्मी के कारण पानी की मांग में इजाफा हो रहा है, ऐसे में निगम व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सक्रिय हो गया है।

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15 किलो गांजा तस्करी मामले में युवक को 7 साल की सजा, 1 लाख का जुर्माना

शहर के गंज थाना क्षेत्र में गांजा तस्करी के एक मामले में अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए सख्त सजा सुनाई है। स्टेशन चौक गेट नंबर-2 के पास 15 किलो से अधिक गांजा के साथ पकड़े गए युवक को विशेष न्यायालय ने 7 साल के सश्रम कारावास और 1 लाख रुपये के जुर्माने की सजा दी है। पुलिस के अनुसार 21 जून 2024 को गंज थाना के सहायक उपनिरीक्षक शंकर साहू पेट्रोलिंग पर थे। इसी दौरान उन्हें मुखबिर से सूचना मिली कि दो युवक काले बैग में गांजा लेकर स्टेशन चौक के पास बेचने की फिराक में हैं। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर घेराबंदी की और दोनों संदिग्धों को पकड़ लिया। तलाशी के दौरान आरोपी विकास पांडे के पास से तीन पैकेट में कुल 15 किलो 70 ग्राम गांजा बरामद हुआ। पुलिस ने मौके पर ही गांजा की तौल कर उसे जब्त किया और सील कर लिया। पूछताछ के दौरान आरोपी कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका। जब्त किए गए नमूनों को जांच के लिए एफएसएल रायपुर भेजा गया, जहां रिपोर्ट में गांजा होने की पुष्टि हुई। इसके बाद पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर कोर्ट में चालान पेश किया। मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद विशेष न्यायाधीश (एनडीपीएस एक्ट) किरण थवाईत ने आरोपी को धारा 20(b)(ii)(B) के तहत दोषी पाया और 7 साल के सश्रम कारावास के साथ 1 लाख रुपये का अर्थदंड लगाया। जुर्माना नहीं भरने की स्थिति में आरोपी को 1 साल की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।

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छत्तीसगढ़ में कल से लू का अलर्ट, तापमान में 3 डिग्री तक बढ़ोतरी के आसार

प्रदेश में गर्मी लगातार तेज होती जा रही है और आने वाले दिनों में इसमें और बढ़ोतरी के संकेत मिल रहे हैं। मौसम विभाग के अनुसार पिछले 24 घंटों में तापमान में ज्यादा बदलाव नहीं हुआ, लेकिन अगले 24 घंटों में पारा 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है। इसके बाद करीब तीन दिनों तक तापमान स्थिर रहने की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग ने 24 अप्रैल से मध्य छत्तीसगढ़ के कई हिस्सों में लू चलने की चेतावनी दी है, जिसका असर अगले तीन दिनों तक देखा जा सकता है। इससे लोगों को तेज गर्मी और गर्म हवाओं का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में मौसम ने हल्का बदलाव भी दिखाया। जगदलपुर में बुधवार दोपहर बारिश के साथ ओलावृष्टि दर्ज की गई। तापमान के आंकड़ों पर नजर डालें तो दुर्ग में अधिकतम तापमान 43.2 डिग्री सेल्सियस रहा, जबकि जगदलपुर में न्यूनतम तापमान 20.5 डिग्री दर्ज किया गया। भीषण गर्मी को देखते हुए बिलासपुर में व्यापमं की प्रतियोगी परीक्षाओं के समय में बदलाव किया गया है। अब परीक्षाएं सुबह 10 बजे से आयोजित की जाएंगी, जो पहले दोपहर 12 बजे से होती थीं। 26 अप्रैल को मंडी बोर्ड उप निरीक्षक, 14 मई को एसएससी नर्सिंग और पीईटी, और 21 मई को पीपीएचटी परीक्षा नए समय के अनुसार आयोजित होंगी। मौसम में बदलाव का कारण ऊपरी वायुमंडल में चल रही तेज हवाएं हैं, जिन्हें सबट्रॉपिकल वेस्टर्ली जेट स्ट्रीम कहा जाता है। यह हवा जमीन से करीब 12.6 किलोमीटर ऊपर 90 से 110 नॉट की रफ्तार से बह रही है, जिसका असर मध्य और पूर्वोत्तर भारत के मौसम पर पड़ रहा है। मौसम विभाग के अनुसार अगले दो दिनों तक प्रदेश में मौसम शुष्क बना रहेगा। हालांकि, अलग-अलग स्थानों पर लू जैसी स्थिति बन सकती है। राजधानी रायपुर में आज आसमान साफ रहने का अनुमान है। यहां अधिकतम तापमान करीब 43 डिग्री और न्यूनतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना है।

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सूदखोरी और हथियार केस में वीरेंद्र तोमर का पलटवार, LIVE आकर लगाए साजिश के आरोप

सूदखोरी और अवैध हथियार रखने के मामले में जेल से बाहर आने के बाद आरोपी वीरेंद्र सिंह तोमर ने पहली बार सोशल मीडिया पर लाइव आकर अपनी सफाई दी। राजस्थान से किए गए इस LIVE में उन्होंने पूरे मामले को साजिश बताते हुए पुलिस कार्रवाई और राजनीतिक हस्तक्षेप पर गंभीर सवाल उठाए। LIVE के दौरान तोमर करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष शेखावत के साथ दिखाई दिए। इस दौरान उन्होंने सीधे तौर पर डिप्टी सीएम विजय शर्मा पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके खिलाफ की गई कार्रवाई राजनीतिक दबाव में की गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने खुद उनके घर में दस्तावेज और हथियार रखे, ताकि उन्हें फंसाया जा सके। तोमर ने दावा किया कि वे खारुन गंगा आरती का आयोजन करवा रहे थे, जिससे उनकी लोकप्रियता बढ़ रही थी और यही बात कुछ नेताओं और लोगों को पसंद नहीं आई। उन्होंने कहा कि इसी वजह से उन्हें निशाना बनाया गया। उन्होंने यह भी कहा कि उनके घर से बरामद बताए जा रहे हथियार और कागजात पूरी तरह से झूठे हैं और यह सब पहले से योजना बनाकर किया गया। उनके अनुसार, उन्हें बदनाम करने और खत्म करने की साजिश रची गई थी, जिसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। तोमर ने यह भी दावा किया कि जेल में रहते हुए उनकी जान को खतरा था। उन्होंने कहा कि अगर सच सामने नहीं आता तो उनकी हत्या तक हो सकती थी। इस LIVE वीडियो के सामने आने के बाद मामला फिर से चर्चा में आ गया है और सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। राजनीतिक माहौल भी गरमा गया है और पक्ष-विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए हैं। वीरेंद्र तोमर ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कोर्ट जाने की चेतावनी भी दी है। उनका कहना है कि हाल ही में उन्हें हत्या के एक मामले में अदालत से राहत मिली है और अब वे सूदखोरी और हथियार मामले में कार्रवाई करने वाले अधिकारियों के नाम सार्वजनिक कर कानूनी कदम उठाएंगे।

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रायपुर में ‘ज्ञान भारतम्’ सर्वे की समीक्षा, 31 मई तक पूरा करने का लक्ष्य

रायपुर स्थित मंत्रालय महानदी भवन में मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में ‘ज्ञान भारतम्’ राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण को लेकर समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिलों के कलेक्टर जुड़े और सर्वे की प्रगति पर विस्तार से चर्चा की गई। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि यह अभियान 31 मई तक हर स्थिति में पूरा किया जाए। उन्होंने इसे राज्य की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया। पांडुलिपियों की पहचान, उनका दस्तावेजीकरण, डिजिटलीकरण और संरक्षण को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए। इसके साथ ही सभी जिलों में समितियों का गठन, नोडल अधिकारियों की नियुक्ति और सर्वे टीमों को प्रशिक्षण देने पर विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि वे शासकीय संस्थानों, मंदिरों, मठों, पुस्तकालयों, कॉलेजों और निजी संस्थानों में संरक्षित पांडुलिपियों की सक्रिय रूप से खोज करें। मुख्य सचिव ने पारंपरिक समुदायों और पुरातात्विक क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देने की बात भी कही, जहां महत्वपूर्ण पांडुलिपियां मिलने की संभावना अधिक है। जनभागीदारी बढ़ाने के लिए बैठक में “पांडुलिपि ट्रेजर हंट” जैसे नवाचारों पर भी चर्चा हुई, जिससे आम लोगों को इस अभियान से जोड़ा जा सके। प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र देने और पत्रकारों, साहित्यकारों, इतिहासकारों तथा जनप्रतिनिधियों की भागीदारी सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया। अधिकारियों ने अभियान को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए अपने सुझाव भी साझा किए।

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छत्तीसगढ़ में BJP का जनआक्रोश महिला सम्मेलन शुरू, आरक्षण बिल को लेकर प्रदेशभर में विरोध

महिला आरक्षण बिल पारित न होने के विरोध में भारतीय जनता पार्टी ने छत्तीसगढ़ में चरणबद्ध कार्यक्रम शुरू किए हैं। रायपुर में जनआक्रोश रैली के बाद अब 23 और 24 अप्रैल को प्रदेशभर में जनआक्रोश महिला सम्मेलन आयोजित किए जा रहे हैं। इसके बाद 26 और 27 अप्रैल को मंडल स्तर पर पुतला दहन कार्यक्रम भी किए जाएंगे। भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष विभा अवस्थी के अनुसार, नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर प्रदेश की महिलाओं में नाराजगी है। इसी वजह से अलग-अलग चरणों में इन कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की गई है। महिला सम्मेलन के जरिए इस मुद्दे को व्यापक स्तर पर उठाया जाएगा। इससे पहले राजधानी रायपुर में भी भाजपा ने जनआक्रोश रैली निकाली थी, जो बलबीर जुनेजा इंडोर स्टेडियम से सुभाष स्टेडियम तक पहुंची। इस दौरान एक सभा का आयोजन भी किया गया, जिसमें मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय समेत कई नेता शामिल हुए। इसी बीच 27 अप्रैल को छत्तीसगढ़ विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र बुलाया गया है। इस सत्र में राज्य सरकार महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े 131वें संवैधानिक संशोधन विधेयक के पास नहीं होने के विरोध में निंदा प्रस्ताव पेश कर सकती है। इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस होने की संभावना है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का सपना विपक्ष के रवैये के कारण पूरा नहीं हो सका, जिसे लेकर वे दुख व्यक्त करते हैं। लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक पास नहीं हो पाया था। इसके पक्ष में 298 वोट पड़े, जबकि 230 सांसदों ने विरोध किया। बिल को पारित करने के लिए आवश्यक समर्थन नहीं मिल सका। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी इस मुद्दे पर देश से माफी मांगते हुए कहा कि महिलाओं को आरक्षण देने का प्रयास सफल नहीं हो पाया। उन्होंने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ पार्टियों ने राजनीतिक हितों को प्राथमिकता दी, जिसका असर महिलाओं के अधिकारों पर पड़ा।

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छत्तीसगढ़ से 18 समर स्पेशल ट्रेनें शुरू, यात्रियों को बड़ी राहत

गर्मी के मौसम में यात्रियों की बढ़ती भीड़ को संभालने के लिए रेलवे ने खास इंतजाम किए हैं। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के बिलासपुर जोन से 18 समर स्पेशल ट्रेनें चलाई जा रही हैं। इन ट्रेनों का संचालन 15 अप्रैल से शुरू होकर 15 जुलाई तक जारी रहेगा और इस दौरान ये कुल 88 फेरे लगाएंगी। देशभर में भी रेलवे ने बड़ा फैसला लेते हुए 908 समर स्पेशल ट्रेनों को मंजूरी दी है, जो मिलकर 18,262 फेरे संचालित करेंगी। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, बिलासपुर जोन की 18 ट्रेनों में से 13 पहले ही शुरू हो चुकी हैं, जबकि बाकी ट्रेनों को जल्द चरणबद्ध तरीके से चलाया जाएगा। ये स्पेशल ट्रेनें बिलासपुर-रायपुर, दुर्ग-गोंदिया, इतवारी-रायगढ़ और शहडोल जैसे प्रमुख रूट्स पर चलाई जाएंगी, जिससे लंबी दूरी के यात्रियों को काफी राहत मिलने की उम्मीद है। गर्मी को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने प्रमुख स्टेशनों जैसे बिलासपुर, रायपुर, दुर्ग, गोंदिया, इतवारी, रायगढ़ और शहडोल में अतिरिक्त सुविधाएं बढ़ाई हैं। इनमें अतिरिक्त टिकट काउंटर, पीने के पानी की बेहतर व्यवस्था, वेटिंग हॉल में सुधार, सफाई और सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया गया है। रेलवे का कहना है कि इन ट्रेनों के शुरू होने से यात्रियों की भीड़ कम होगी, वेटिंग लिस्ट घटेगी और कंफर्म टिकट मिलने की संभावना बढ़ेगी। इससे यात्रियों का सफर ज्यादा आसान और आरामदायक होगा।

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