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छत्तीसगढ़ में वन्यजीवों का बढ़ा खतरा: हाथियों ने 8 मकान तोड़े, बाघ और तेंदुए की मौजूदगी से कई जिलों में अलर्ट

छत्तीसगढ़ के कई जिलों में वन्यजीवों की गतिविधियां बढ़ने से वन विभाग ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ वन मंडल में हाथियों के झुंड ने पिछले दो दिनों में कई गांवों में भारी नुकसान पहुंचाया है। वहीं बस्तर के जगदलपुर क्षेत्र में बाघ की मौजूदगी और कांकेर में तेंदुए की गतिविधियों ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। दो रातों में 8 मकानों को पहुंचाया नुकसान धरमजयगढ़ वन मंडल के कापू रेंज की लिप्ती बीट अंतर्गत चितामाड़ा, पखनाकोट और कमरई गांवों में हाथियों का दल आबादी तक पहुंच गया। सोमवार रात हाथियों ने कई ग्रामीणों के मकानों को क्षतिग्रस्त कर दिया, जबकि मंगलवार रात भी पखनाकोट में दो और मकानों को नुकसान पहुंचाया। इसके अलावा तीन किसानों की धान की फसल और नर्सरी (थरहा) भी हाथियों ने रौंद दी। घटना की जानकारी मिलने के बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और नुकसान का सर्वे शुरू कर मुआवजा प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है। रायगढ़ जिले में 135 हाथी सक्रिय वन विभाग के अनुसार, इस समय रायगढ़ जिले में कुल 135 हाथी अलग-अलग समूहों में विचरण कर रहे हैं। इनमें 114 हाथी धरमजयगढ़ वन मंडल में और 21 हाथी रायगढ़ वन मंडल में सक्रिय हैं। विभाग लगातार हाथियों की निगरानी कर रहा है और ग्रामीणों से जंगल या हाथियों के नजदीक न जाने की अपील की है। जगदलपुर में फिर दिखे बाघ के निशान बस्तर के कुरंदी गांव में करीब 30 वर्ष बाद बाघ की मौजूदगी के संकेत मिले हैं। खेतों के पास जंगल में बड़े आकार के ताजा पंजों के निशान मिलने के बाद ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। एहतियात के तौर पर लोग शाम के बाद घरों से कम निकल रहे हैं और मवेशियों को सुरक्षित स्थानों पर बांध रहे हैं। कांकेर में वन विभाग को चुनौती दे रहा तेंदुआ कांकेर जिले के ढेकलावन और गट्टागुड़ूम गांवों में तेंदुए की गतिविधियां बनी हुई हैं। वन विभाग ने उसे पकड़ने के लिए पिंजरे और कैमरे लगाए हैं, लेकिन तेंदुआ अब तक पिंजरे से दूर बना हुआ है। कैमरों में उसकी मौजूदगी सीमित बार दर्ज हुई है, जिससे उसे पकड़ना वन विभाग के लिए चुनौती बना हुआ है। वन विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों के लोगों से सतर्क रहने, रात के समय अनावश्यक रूप से बाहर न निकलने और किसी भी वन्यजीव की सूचना तुरंत विभाग को देने की अपील की है।

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, Wildlife, RAIGARH, State, Top News

रामगोपाल अग्रवाल 17 जुलाई तक EOW रिमांड पर, शराब-कोल लेवी और कस्टम मिलिंग मामलों में होगी पूछताछ

छत्तीसगढ़ के चर्चित कथित शराब, कोल लेवी और कस्टम मिलिंग मामलों में आरोपी पूर्व प्रदेश कांग्रेस कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल ने लगभग तीन वर्ष बाद रायपुर स्थित आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) कार्यालय में आत्मसमर्पण किया। गुरुवार को मेडिकल परीक्षण के बाद उन्हें अदालत में पेश किया गया, जहां कोर्ट ने उन्हें 17 जुलाई तक EOW की कस्टोडियल रिमांड पर भेज दिया। EOW की ओर से लंबी रिमांड की मांग की गई थी, लेकिन दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने 9 दिन की कस्टोडियल रिमांड मंजूर की। इस अवधि में जांच एजेंसी विभिन्न मामलों में उनसे पूछताछ करेगी। EOW के आरोप क्या हैं? जांच एजेंसी का दावा है कि कथित कोल लेवी घोटाले की जांच के दौरान जब्त की गई एक डायरी में कांग्रेस भवन के नाम पर करोड़ों रुपये के लेन-देन का उल्लेख मिला है। EOW का आरोप है कि यह राशि रामगोपाल अग्रवाल के माध्यम से राजीव भवन तक पहुंचाई गई थी। एजेंसी अब धन के स्रोत, लेन-देन, संबंधित व्यक्तियों और धन के उपयोग की जांच कर रही है। इसके अलावा EOW का यह भी दावा है कि कथित शराब घोटाले में अनवर ढेबर और उसके सहयोगियों द्वारा तथा कस्टम मिलिंग मामले में रोशन चंद्राकर के माध्यम से भी करोड़ों रुपये रामगोपाल अग्रवाल तक पहुंचाए गए। बेटे से भी हुई पूछताछ जांच के दौरान EOW ने रामगोपाल अग्रवाल के बेटे वैभव अग्रवाल से भी दो दिनों तक पूछताछ की। अधिकारियों ने उनसे पिछले तीन वर्षों के दौरान रामगोपाल अग्रवाल के ठिकानों, आर्थिक लेन-देन और कथित संपर्कों से जुड़े कई सवाल पूछे। एजेंसी का कहना है कि जांच तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है। कांग्रेस ने उठाए सवाल कांग्रेस ने इस कार्रवाई को राजनीतिक प्रेरित बताते हुए जांच एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाया है। पार्टी ने इसके विरोध में प्रदेशभर में प्रदर्शन करने की घोषणा की है। इस बीच पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पुत्र चैतन्य बघेल भी गिरफ्तारी के विरोध में अदालत पहुंचे। हालांकि उन्होंने मीडिया से बातचीत में मामले पर कोई टिप्पणी करने से इनकार करते हुए कहा कि वह स्वयं भी इस प्रकरण में आरोपी हैं, इसलिए कुछ कहना उचित नहीं होगा। किन मामलों में जांच? रामगोपाल अग्रवाल का नाम कथित 3,200 करोड़ रुपये के शराब घोटाले, लगभग 540 करोड़ रुपये के कोल लेवी मामले और 127 करोड़ रुपये के कस्टम मिलिंग प्रोत्साहन घोटाले की जांच में सामने आया है। जांच एजेंसियां इन मामलों में कथित धन के प्रवाह, लाभार्थियों और वित्तीय नेटवर्क की जांच कर रही हैं। हालांकि, इन सभी मामलों में जांच अभी जारी है और आरोपों की न्यायिक पुष्टि होना बाकी है। अंतिम निर्णय न्यायालय की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा।

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Political, Raipur

छत्तीसगढ़ में 2027 से बदलेगा स्कूलों का शैक्षणिक सत्र, पहली कक्षा में प्रवेश के लिए न्यूनतम उम्र 6 वर्ष अनिवार्य

छत्तीसगढ़ सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप स्कूल शिक्षा व्यवस्था में अहम बदलाव करने का निर्णय लिया है। नए नियमों के अनुसार वर्ष 2027 से प्रदेश के सभी स्कूलों में पहली कक्षा में प्रवेश के लिए बच्चे की न्यूनतम आयु 6 वर्ष निर्धारित की गई है। इस संबंध में स्कूल शिक्षा विभाग ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए हैं। इसके साथ ही वर्ष 2027 से राज्य में नया शैक्षणिक सत्र 1 अप्रैल से शुरू होगा। पहले जहां स्कूल 16 जून से खुलते थे, वहीं अब अप्रैल के पहले दिन से प्रवेश प्रक्रिया और शैक्षणिक गतिविधियां शुरू हो जाएंगी। इस दौरान विद्यार्थियों को किताबें, यूनिफॉर्म और पात्र छात्रों को साइकिल भी उपलब्ध कराई जाएगी। इसके बाद 1 मई से 15 जून तक ग्रीष्मकालीन अवकाश रहेगा। शैक्षणिक सत्र में होगा बदलाव नई व्यवस्था के तहत पूरे प्रदेश में शैक्षणिक सत्र 1 अप्रैल से 31 मार्च तक संचालित होगा। यह प्रणाली केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के शैक्षणिक कैलेंडर के अनुरूप लागू की जाएगी, जिससे सीजी बोर्ड और सीबीएसई स्कूलों के बीच सत्र का अंतर समाप्त हो सके। बदलाव की वजह वर्तमान व्यवस्था में स्कूल जून के मध्य में खुलते हैं और शुरुआती कई सप्ताह तक प्रवेश, पुस्तक वितरण, यूनिफॉर्म और अन्य योजनाओं का लाभ देने की प्रक्रिया चलती रहती है। इससे नियमित पढ़ाई देर से शुरू होती है और कई स्कूलों में जुलाई तक पढ़ाई प्रभावित रहती है। शिक्षा विभाग का मानना है कि नए कैलेंडर से विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए अधिक समय मिलेगा, पाठ्यक्रम समय पर पूरा होगा और बोर्ड परीक्षाओं के परिणामों में भी सुधार देखने को मिलेगा। आयु सीमा में विशेष छूट यदि कोई बच्चा 1 अप्रैल तक निर्धारित 6 वर्ष की आयु पूरी नहीं करता, लेकिन 1 जुलाई तक उसकी आयु 6 वर्ष हो जाती है, तो उसे अधिकतम तीन महीने की विशेष छूट देकर पहली कक्षा में प्रवेश दिया जा सकेगा। सभी स्कूलों में लागू होगा नियम नई आयु सीमा और शैक्षणिक सत्र की व्यवस्था सरकारी, निजी तथा अनुदान प्राप्त सभी स्कूलों पर समान रूप से लागू होगी। शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम के तहत निजी स्कूलों में 25 प्रतिशत आरक्षित सीटों पर होने वाले प्रवेश भी इसी नियम के अनुसार किए जाएंगे। इन विद्यार्थियों को मिलेगी छूट जो छात्र किसी मान्यता प्राप्त विद्यालय की प्री-प्राइमरी या केजी शिक्षा पूरी करके पहली कक्षा में प्रवेश ले रहे हैं, उन पर नई आयु सीमा लागू नहीं होगी। ऐसे मामलों में विद्यालय द्वारा जारी टीसी, अंकसूची या स्कोर कार्ड में दर्ज जन्मतिथि के आधार पर प्रवेश दिया जाएगा। शिक्षा विभाग का उद्देश्य स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह के अनुसार इन बदलावों का उद्देश्य प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाना है। उनका कहना है कि नई व्यवस्था से विद्यार्थियों को समय पर किताबें और अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई जा सकेगी तथा सत्र की शुरुआत से ही नियमित पढ़ाई सुनिश्चित होगी।

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Education, GOVERNMENT, Raipur

रायपुर में PHE ठेकेदारों का नीर भवन के बाहर प्रदर्शन, लंबित भुगतान को लेकर विभाग के खिलाफ नारेबाजी

रायपुर में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) विभाग के मुख्यालय नीर भवन के बाहर सोमवार को ठेकेदारों ने बकाया भुगतान की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। बारिश के बीच बड़ी संख्या में पहुंचे ठेकेदारों ने विभागीय अधिकारियों के खिलाफ नारेबाजी करते हुए जल्द भुगतान की मांग उठाई। प्रदर्शन कर रहे ठेकेदारों का कहना है कि उन्होंने विभाग के लिए ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पेयजल योजनाओं सहित कई निर्माण कार्य तय समय पर पूरे किए हैं, लेकिन लंबे समय से उनके बिलों का भुगतान नहीं किया जा रहा। कई बार अधिकारियों से मुलाकात और लिखित आवेदन देने के बावजूद केवल आश्वासन मिला, जबकि भुगतान अब तक लंबित है। ठेकेदारों का आरोप है कि भुगतान में देरी के कारण वे गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं। कर्मचारियों को समय पर वेतन देना, बैंक की किस्तें चुकाना, मशीनों का किराया और निर्माण सामग्री सप्लायर्स का बकाया भुगतान करना मुश्किल हो गया है। उनका कहना है कि कई छोटे और मध्यम ठेकेदार नए काम लेने की स्थिति में भी नहीं बचे हैं। प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए। यातायात प्रभावित न हो, इसके लिए सुभाष स्टेडियम से कटोरा तालाब जाने वाले मार्ग पर रूट डायवर्ट किया गया। इस संबंध में ट्रैफिक पुलिस ने पहले ही एडवाइजरी जारी कर दी थी और मौके पर अतिरिक्त पुलिस बल भी तैनात किया गया।

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GOVERNMENT, protest, Raipur

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती पर CM विष्णुदेव साय ने दी श्रद्धांजलि, मुख्यमंत्री निवास में पुष्प अर्पित कर किया नमन

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रख्यात शिक्षाविद, राष्ट्रवादी विचारक और भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री निवास में आयोजित कार्यक्रम के दौरान सीएम साय ने डॉ. मुखर्जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का संपूर्ण जीवन राष्ट्र की एकता, अखंडता, सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रीय स्वाभिमान की रक्षा के लिए समर्पित रहा। मुख्यमंत्री ने अपने आधिकारिक X पोस्ट में लिखा कि डॉ. मुखर्जी के आदर्श और विचार विकसित, सशक्त और अखंड भारत के निर्माण के लिए हमेशा प्रेरणा देते रहेंगे। उन्होंने कहा कि देश के प्रति उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा और आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करता रहेगा।

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Political, Raipur

रायपुर में एक्सपायरी मिल्क पाउडर का मामला: नवजात की मौत के बाद मेडिकल स्टोर पर गंभीर आरोप, पुलिस जांच शुरू

रायपुर में एक्सपायरी मिल्क पाउडर बेचने के आरोप के बाद एक नवजात बच्ची की मौत का मामला सामने आया है। परिजनों ने मेडिकल स्टोर संचालक के खिलाफ शिकायत दर्ज कराते हुए कार्रवाई की मांग की है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और संबंधित विभागों को भी जांच के लिए पत्र भेजा गया है। जानकारी के अनुसार, चंद्रशेखर कन्नोजे की पत्नी डागेश्वरी कन्नोजे ने 29 जून को जुड़वा बच्चियों को जन्म दिया था। मां का दूध पर्याप्त मात्रा में नहीं आने पर डॉक्टर ने शिशुओं के लिए मिल्क पाउडर लेने की सलाह दी। इसके बाद 30 जून को परिजनों ने मेकाहारा गेट के पास स्थित एक मेडिकल स्टोर से मिल्क पाउडर खरीदा। परिजनों का आरोप है कि उसी मिल्क पाउडर से तैयार दूध पिलाने के बाद एक बच्ची की तबीयत 4 जुलाई को अचानक बिगड़ गई। उसे गंभीर हालत में अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। परिवार का दावा है कि अस्पताल में जांच के दौरान मिल्क पाउडर के डिब्बे पर अंकित एक्सपायरी डेट सामने आई, जिसके बाद उन्हें संदेह हुआ कि बच्ची की तबीयत खराब होने का कारण यही उत्पाद हो सकता है। शिकायत के अनुसार, जब परिजन मेडिकल स्टोर पहुंचे और विरोध दर्ज कराया, तो स्टोर कर्मचारियों ने उनके पास मौजूद मिल्क पाउडर का डिब्बा लेकर उसकी जगह दूसरा डिब्बा दे दिया। इसके बाद परिवार ने मौदहापारा थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई। सहायक पुलिस आयुक्त दीपक मिश्रा ने बताया कि मेडिकल स्टोर संचालक को सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने का नोटिस दिया गया है। साथ ही मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) कार्यालय को जांच के लिए पत्र भेजा गया है। सभी संबंधित पक्षों को बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, एक्सपायरी डेट के बाद डेयरी उत्पादों में बैक्टीरिया विकसित होने का खतरा बढ़ जाता है, जिससे फूड पॉइजनिंग, संक्रमण और पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए किसी भी खाद्य उत्पाद को खरीदने से पहले उसकी एक्सपायरी डेट और पैकेजिंग की जांच करना जरूरी है। साथ ही खरीदारी का बिल सुरक्षित रखना चाहिए, ताकि आवश्यकता पड़ने पर कानूनी प्रक्रिया में उसका उपयोग किया जा सके।

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Crime, Raipur

छत्तीसगढ़ में अंतरधार्मिक निकाह के लिए वक्फ बोर्ड की अनुमति अनिवार्य, अगस्त 2026 से लागू होंगे नए नियम

छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड ने निकाह प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से नई व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। प्रस्तावित नियमों के तहत यदि कोई मुस्लिम युवक या युवती किसी गैर-मुस्लिम से निकाह करना चाहता है, तो पहले वक्फ बोर्ड से अनुमति लेना आवश्यक होगा। यह नई व्यवस्था अगस्त 2026 से पूरे प्रदेश में लागू की जाएगी। बोर्ड के अनुसार, अंतरधार्मिक निकाह से पहले दोनों पक्षों की सहमति, पहचान संबंधी दस्तावेज और सभी कानूनी औपचारिकताओं की जांच की जाएगी। यदि आवश्यक हुआ तो धर्म परिवर्तन से जुड़े दस्तावेजों का भी सत्यापन किया जाएगा। सभी प्रक्रियाएं पूरी होने और बोर्ड की अनुमति मिलने के बाद ही निकाह कराया जा सकेगा। नई व्यवस्था के तहत प्रदेश में निकाह कराने वाले सभी मौलानाओं का पंजीयन भी अनिवार्य किया जाएगा। केवल पंजीकृत मौलाना ही निकाह संपन्न करा सकेंगे। यदि कोई मौलाना बिना आवश्यक अनुमति के अंतरधार्मिक निकाह कराता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। वक्फ बोर्ड का कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य निकाह प्रक्रिया का रिकॉर्ड सुरक्षित रखना, फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल को रोकना और भविष्य में उत्पन्न होने वाले कानूनी विवादों को कम करना है। इसके तहत हर निकाह का रिकॉर्ड बोर्ड के पास सुरक्षित रहेगा और प्रमाणपत्र भी बोर्ड की ओर से जारी किया जाएगा। साथ ही निकाहनामा एक समान प्रारूप में तैयार किया जाएगा। वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष सलीम राज ने बताया कि वर्तमान में कई स्थानों पर बिना किसी केंद्रीय रिकॉर्ड के निकाह कराए जाते हैं, जिससे बाद में पहचान, वैवाहिक स्थिति और सरकारी दस्तावेजों से जुड़े विवाद सामने आते हैं। उनका कहना है कि नई व्यवस्था से सरकारी दस्तावेज बनवाने की प्रक्रिया भी अधिक सरल होगी। बोर्ड के पदाधिकारियों के अनुसार, आदिवासी क्षेत्रों से महिलाओं को बहला-फुसलाकर विवाह करने और संपत्ति विवाद से जुड़ी कुछ शिकायतें मिली हैं। इन्हीं मामलों को ध्यान में रखते हुए अंतरधार्मिक निकाह की निगरानी बढ़ाने और सभी निकाह का रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का निर्णय लिया गया है। बोर्ड का कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य किसी धर्म विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि निकाह प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और कानूनी रूप से व्यवस्थित बनाना है।

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Chhattisghar, State, Top News

खरसिया में बारिश के बीच नदी से अवैध रेत खनन, ट्रैक्टर उतारकर बालू निकासी का वीडियो वायरल

खरसिया क्षेत्र में बारिश के मौसम के बीच अवैध रेत खनन का मामला सामने आया है। मुड़ागांव इलाके में नदी के बीच ट्रैक्टर उतारकर रेत निकालने और उसके परिवहन का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो सामने आने के बाद प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। जानकारी के अनुसार, रानीगुड़ा और लेब्रा घाट क्षेत्र में कुछ लोग नदी के भीतर ट्रैक्टर चलाकर बालू निकालते दिखाई दे रहे हैं। वायरल वीडियो में कथित तौर पर नदी की धारा के बीच से खुलेआम रेत का उत्खनन किया जा रहा है। बरसात के मौसम में इस तरह की गतिविधि सुरक्षा की दृष्टि से भी बेहद जोखिम भरी मानी जा रही है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के दौरान नदी का जलस्तर लगातार बढ़ता रहता है। ऐसे में ट्रैक्टर के फंसने या तेज बहाव में बह जाने जैसी दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। इसके बावजूद अवैध रेत निकासी का काम जारी है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि क्षेत्र में लंबे समय से अवैध रेत खनन हो रहा है, लेकिन शिकायतों के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। उनका कहना है कि इसी वजह से रेत तस्करों के हौसले बुलंद हैं। मामले के वायरल होने के बाद प्रशासन ने जांच शुरू करने की बात कही है। अधिकारियों के अनुसार, वीडियो की जांच कर अवैध रेत खनन में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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रायपुर: सरकारी स्कूल में घुसकर हंगामा, मारपीट और तोड़फोड़, कई लोगों पर केस दर्ज

रायपुर के डीडी नगर थाना क्षेत्र स्थित शासकीय पंडित गिरजा शंकर मिश्र हायर सेकेंडरी स्कूल, धरसीवा में स्कूल परिसर के भीतर हंगामा, मारपीट और तोड़फोड़ का मामला सामने आया है। घटना को लेकर स्कूल प्राचार्य की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शिकायत के अनुसार, 3 जुलाई 2026 को दोपहर करीब 12 से 1 बजे के बीच कुछ लोग अपने अन्य साथियों के साथ स्कूल परिसर में पहुंचे। उस समय स्कूल में प्रवेशोत्सव कार्यक्रम चल रहा था। आरोप है कि समूह ने कार्यक्रम के दौरान नारेबाजी शुरू कर दी और परिसर में हंगामा किया। स्कूल प्रशासन ने उन्हें परिसर से बाहर जाने के लिए कहा, लेकिन आरोप है कि उन्होंने बात नहीं मानी और विवाद बढ़ा दिया। शिकायत में यह भी कहा गया है कि आरोपियों ने स्कूल में लगे अग्निशमन यंत्र को उखाड़ने का प्रयास किया, कर्मचारियों के साथ धक्का-मुक्की की और रोकने पर शिक्षकों व स्टाफ से मारपीट की। महिला कर्मचारियों के साथ भी कथित तौर पर अभद्र व्यवहार और अन्य कर्मचारियों को धमकी देने के आरोप लगाए गए हैं। प्राचार्य का कहना है कि इस घटना से स्कूल का शैक्षणिक माहौल प्रभावित हुआ और शासकीय कार्य में बाधा पहुंची। शिकायत के आधार पर पुलिस ने संबंधित आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है। घटनास्थल पर मौजूद शिक्षकों, कर्मचारियों और अन्य प्रत्यक्षदर्शियों के बयान लिए जा रहे हैं। जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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Raipur

बिलासपुर में पेड़ के नीचे लग रहा सरकारी स्कूल, भवन के लिए 11.48 लाख मंजूर फिर भी नहीं शुरू हुआ निर्माण

बिलासपुर जिले के तखतपुर विधानसभा क्षेत्र के ग्राम घुटकू में शिक्षा व्यवस्था की बदहाल तस्वीर सामने आई है। स्टेशनपारा स्थित शासकीय प्राथमिक स्कूल का अपना भवन नहीं होने के कारण बच्चों की पढ़ाई इन दिनों पीपल के पेड़ के नीचे कराई जा रही है। जानकारी के अनुसार, स्कूल का पुराना भवन जर्जर होने के बाद पिछले करीब पांच वर्षों से कक्षाएं एक निजी मकान में संचालित की जा रही थीं। हाल ही में मकान मालिक ने निजी जरूरत का हवाला देते हुए भवन खाली करा लिया, जिसके बाद स्कूल के पास कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं बची। ऐसे में शिक्षक खुले आसमान के नीचे बच्चों की कक्षाएं लेने को मजबूर हैं। बताया जा रहा है कि स्कूल भवन निर्माण के लिए 11.48 लाख रुपये की स्वीकृति पहले ही मिल चुकी है, लेकिन अब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है। स्कूल में शौचालय, रसोईघर और अन्य मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव है, जिससे विद्यार्थियों और शिक्षकों दोनों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्कूल की शिक्षिका खगेश्वरी दुबे ने बताया कि तेज धूप, बारिश या पेड़ से कीड़े गिरने की स्थिति में कक्षाएं रोकनी पड़ती हैं। उन्होंने यह भी बताया कि शौचालय नहीं होने के कारण छात्राओं और महिला शिक्षकों को खुले में जाने के लिए मजबूर होना पड़ता है। वहीं, मध्याह्न भोजन भी रसोइया के घर में तैयार किया जा रहा है। ग्रामीणों और अभिभावकों ने इस स्थिति को लेकर प्रशासन पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जब भवन निर्माण के लिए राशि स्वीकृत हो चुकी है, तो निर्माण कार्य में देरी क्यों हो रही है। अव्यवस्थाओं के कारण स्कूल में नए प्रवेश भी प्रभावित हुए हैं। पहली और दूसरी कक्षा में नए दाखिले नहीं हुए हैं, जबकि स्कूल में कार्यरत दो शिक्षकों में से एक इसी महीने सेवानिवृत्त होने वाले हैं। ग्राम पंचायत के सरपंच का कहना है कि बारिश का मौसम समाप्त होने के बाद भवन निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा।

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Bilaspur
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