December 2025

छत्तीसगढ़ में स्कूल रिजल्ट सिस्टम में बड़ा बदलाव: तिमाही-छमाही के अंक अब बनाएंगे फाइनल रिजल्ट

छत्तीसगढ़ शिक्षा विभाग ने स्कूलों में छात्र मूल्यांकन प्रणाली में बड़ा बदलाव किया है। नई व्यवस्था के तहत अब छात्र केवल मुख्य परीक्षा के आधार पर नहीं बल्कि पूरे साल की पढ़ाई के आधार पर वार्षिक परिणाम तय होंगे। तिमाही और छमाही परीक्षा के अंक होंगे फाइनल रिजल्ट में शामिल नई प्रणाली के अनुसार तिमाही और छमाही परीक्षाओं के अंक सीधे वार्षिक परिणाम में जुड़ेंगे। इससे अब तक औपचारिकता बन चुकी तिमाही-छमाही परीक्षाओं का महत्व बढ़ जाएगा। हालांकि, यह बदलाव कक्षा 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाओं पर लागू नहीं होगा। इस फैसले से प्रदेश के लगभग 45 लाख छात्र प्रभावित होंगे। शिक्षा विभाग का मानना है कि इससे न केवल छात्रों में पढ़ाई के प्रति गंभीरता बढ़ेगी, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता में भी सुधार होगा। फाइनल रिजल्ट कैसे तैयार होगा 9वीं और 11वीं के लिए प्रस्ताव तैयार शिक्षा विभाग ने कक्षा 9वीं और 11वीं के छात्रों के लिए भी इसी तरह की व्यवस्था लागू करने का प्रस्ताव माध्यमिक शिक्षा मंडल को भेजा है। प्रस्ताव पर जल्द निर्णय होने की संभावना है। सालभर पढ़ाई और बेहतर गुणवत्ता विभाग का कहना है कि इस बदलाव से छात्र पूरे साल नियमित पढ़ाई करेंगे और शिक्षक भी सिलेबस समय पर पूरा कराने और छात्रों की प्रगति पर लगातार नजर रखने के लिए जिम्मेदार होंगे। शिक्षा विभाग के अनुसार यह कदम शिक्षा प्रणाली को पारदर्शी, प्रभावी और मजबूत बनाने की दिशा में अहम साबित होगा और बच्चों की पढ़ाई की गुणवत्ता में सुधार करेगा।

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6 माह की गर्भवती रेप पीड़िता को गर्भपात की अनुमति, हाईकोर्ट ने कहा— पीड़िता को अपने भविष्य का निर्णय लेने का अधिकार

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने दुष्कर्म की शिकार एक नाबालिग किशोरी को गर्भपात कराने की अनुमति प्रदान की है। जस्टिस पी.पी. साहू ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए शीतकालीन अवकाश के दौरान विशेष सुनवाई कर यह महत्वपूर्ण आदेश पारित किया। कोर्ट ने मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर रायपुर स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर मेमोरियल अस्पताल और पं. जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज को निर्देश दिया है कि 23 दिसंबर को विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में पीड़िता का सुरक्षित गर्भपात कराया जाए। साथ ही अदालत ने भ्रूण का डीएनए सैंपल सुरक्षित रखने के निर्देश भी दिए हैं। शादी का झांसा देकर किया गया दुष्कर्म मामला रायपुर जिले का है, जहां 16 वर्षीय नाबालिग लड़की को आरोपी युवक ने प्रेम जाल में फंसाकर शादी का वादा किया और उसके साथ दुष्कर्म किया। परिजनों को तब शक हुआ जब किशोरी के पेट का आकार असामान्य रूप से बढ़ने लगा। पूछताछ करने पर पीड़िता ने आपबीती बताई। इसके बाद परिजन उसे चिकित्सक के पास ले गए, जहां जांच में सामने आया कि किशोरी करीब 25 सप्ताह (6 महीने) की गर्भवती है। मेडिकल रिपोर्ट के बाद कोर्ट पहुंचा मामला पीड़िता की ओर से परिजनों के माध्यम से हाईकोर्ट में गर्भपात की अनुमति के लिए याचिका दाखिल की गई। कोर्ट ने 19 दिसंबर को बीआर अंबेडकर अस्पताल और जेएनएम मेडिकल कॉलेज को मेडिकल रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। मेडिकल बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि गर्भपात की प्रक्रिया से पीड़िता को कोई गंभीर चिकित्सकीय खतरा नहीं है। अवकाश में भी हुई सुनवाई, कोर्ट ने दी राहत रिपोर्ट आने के बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने शीतकालीन अवकाश के बावजूद विशेष बेंच गठित कर सुनवाई की। सुनवाई के बाद अदालत ने याचिका स्वीकार करते हुए गर्भपात की अनुमति प्रदान कर दी। हाईकोर्ट की टिप्पणी— पीड़िता को मिले निर्णय की स्वतंत्रता हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि दुष्कर्म पीड़िता को यह अधिकार और स्वतंत्रता मिलनी चाहिए कि वह स्वयं तय करे कि गर्भावस्था को जारी रखना है या समाप्त करना है। अदालत ने इसे पीड़िता के जीवन और भविष्य से जुड़ा महत्वपूर्ण निर्णय बताया। विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में होगा गर्भपात कोर्ट ने निर्देश दिया है कि गर्भपात की प्रक्रिया मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (MTP) एक्ट, 1971 के तहत की जाए। यह प्रक्रिया दो पंजीकृत चिकित्सकों और विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में संपन्न होगी। इसके साथ ही, भविष्य की जांच और ट्रायल को ध्यान में रखते हुए भ्रूण का डीएनए सैंपल सुरक्षित रखने के निर्देश दिए गए हैं। पीड़िता को निर्धारित तिथि पर अस्पताल में उपस्थित होकर सभी औपचारिकताएं पूरी करने को कहा गया है।

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रायपुर में खेत से मिला अज्ञात युवक का अधजला शव, हत्या कर पहचान मिटाने की आशंका

राजधानी रायपुर के विधानसभा थाना क्षेत्र के छपोरा गांव में उस समय सनसनी फैल गई, जब एक खेत में अज्ञात युवक का अधजला शव बरामद हुआ। ग्रामीणों ने खेत में जली हुई अवस्था में शव देखा, जिसके बाद तत्काल पुलिस को सूचना दी गई। सूचना मिलते ही विधानसभा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल को घेराबंदी कर सुरक्षित कर लिया। पुलिस के अनुसार, शव की हालत बेहद खराब है, जिससे मृतक की पहचान फिलहाल संभव नहीं हो सकी है। हत्या के बाद शव जलाने की आशंका प्रारंभिक जांच में पुलिस को आशंका है कि युवक की हत्या किसी अन्य स्थान पर की गई और बाद में पहचान छुपाने के उद्देश्य से शव को खेत में लाकर जलाने की कोशिश की गई है। घटनास्थल पर मिले साक्ष्य भी इस ओर इशारा कर रहे हैं। फोरेंसिक टीम जांच में जुटी मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने फोरेंसिक टीम को मौके पर बुलाया है। टीम द्वारा साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। इसके साथ ही आसपास के गांवों और थाना क्षेत्रों में गुमशुदा व्यक्तियों की जानकारी खंगाली जा रही है, ताकि मृतक की पहचान की जा सके। जांच जारी, हर पहलू पर नजर पुलिस का कहना है कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और फोरेंसिक जांच के बाद ही मौत के कारणों और घटना की पूरी सच्चाई सामने आ सकेगी। फिलहाल मामला दर्ज कर लिया गया है और हर एंगल से जांच जारी है।

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निजी यूनिवर्सिटी की चौथी मंजिल से गिरने से विदेशी छात्र की मौत, गर्लफ्रेंड-बॉयफ्रेंड पर धक्का देने का आरोप

रायपुर के मंदिर हसौद थाना क्षेत्र स्थित एक निजी विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले विदेशी छात्र की संदिग्ध हालात में मौत हो गई। छात्र की मौत यूनिवर्सिटी की चार मंजिला इमारत से गिरने के कारण हुई है। मृतक छात्र की पहचान सैम के रूप में हुई है, जो लाइबेरिया का निवासी था और विश्वविद्यालय में एमबीए सेकेंड ईयर का छात्र था। घटना के पीछे आपसी विवाद की बात सामने आई है। आरोप है कि एक विदेशी मूल की छात्रा से कहासुनी के बाद उसके बॉयफ्रेंड के साथ मिलकर सैम को इमारत की चौथी मंजिल से नीचे फेंक दिया गया। विवाद के बाद गिरा छात्र, मौके पर मौत जानकारी के अनुसार, मंगलवार को यूनिवर्सिटी परिसर की चार मंजिला बिल्डिंग से एक छात्र के गिरने की सूचना मिली। जब छात्र को देखा गया, तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। गंभीर चोटों के निशान शरीर के कई हिस्सों पर पाए गए। सूचना मिलते ही मंदिर हसौद थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। पुलिस जांच में सामने आया है कि मृतक छात्र सैम और एक विदेशी छात्रा के बीच किसी बात को लेकर विवाद हुआ था। इसी दौरान छात्रा का बॉयफ्रेंड भी वहां पहुंच गया। कहासुनी बढ़ने के बाद सैम चौथी मंजिल से नीचे गिर गया। हालांकि, परिजनों और साथियों का आरोप है कि उसे जानबूझकर नीचे धकेला गया। दो आरोपी गिरफ्तार, दो ने किया आत्मसमर्पण मामले में पुलिस ने साउथ सूडान निवासी नोई कोंडेट और उसकी गर्लफ्रेंड फेथ को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पूछताछ के बाद दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस के मुताबिक, इस घटना में कुल चार लोगों की भूमिका सामने आई है। इनमें से दो अन्य आरोपियों ने भिलाई में सरेंडर किया है, जिन्हें लेने के लिए रायपुर पुलिस की टीम रवाना हो चुकी है। हर एंगल से जांच जारी मंदिर हसौद थाना प्रभारी आशीष यादव ने बताया कि प्रारंभिक जांच में मौत की वजह ऊंचाई से गिरना प्रतीत हो रही है, लेकिन यह दुर्घटना थी या हत्या—इस बिंदु पर जांच जारी है। पुलिस छात्रों के बयान, सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर मामले की तह तक जाने का प्रयास कर रही है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा।

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ऑपरेटर्स की मनमानी: नेशनल परमिट बसों में फ्लाइट जैसा किराया सिस्टम, आधे घंटे में बदल रहे रेट

राजधानी रायपुर के भाठागांव बस स्टैंड से संचालित नेशनल परमिट बसों के यात्रियों को इन दिनों गंभीर परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इन बसों का किराया किसी तय सरकारी नियम या फॉर्मूले पर नहीं, बल्कि बस मालिकों और ऑपरेटर्स की मनमर्जी पर निर्भर है। हालात ऐसे हैं कि फ्लाइट टिकट की तरह बसों का किराया हर आधे घंटे में घट-बढ़ रहा है। यात्रियों की संख्या बढ़ते ही किराया अचानक बढ़ा दिया जाता है और सीटें खाली रहने पर रेट कम कर दिए जाते हैं। ऑपरेटर्स लगातार ऑनलाइन बुकिंग स्टेटस पर नजर रखते हैं। इसी वजह से एक ही रूट पर अलग-अलग ऑपरेटरों की बसों में कुछ घंटों के भीतर ही 150 से 300 रुपये तक का अंतर देखने को मिल रहा है। खासकर नेशनल परमिट और टूरिस्ट परमिट पर चलने वाली बसों में यह उतार-चढ़ाव सबसे ज्यादा है। यात्रियों का कहना है कि उन्हें टिकट लेते वक्त यह अंदाजा ही नहीं होता कि अगली बस में किराया कितना होगा। परिवहन विभाग की मजबूरी परिवहन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि दूसरे राज्यों में जाने वाली कई बसें ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट के तहत चलती हैं। इन बसों के किराए पर राज्य सरकार का कोई सीधा नियंत्रण नहीं होता। विभाग केवल सुरक्षा मानकों, दस्तावेजों और नियमों का पालन सुनिश्चित करता है। यदि टूरिस्ट परमिट वाली बसें रास्ते में सवारी चढ़ाने या उतारने के दौरान पकड़ी जाती हैं, तो उन पर कार्रवाई की जाती है, लेकिन किराया तय करना राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। बस मालिकों का तर्क, विशेषज्ञों की आपत्ति बस ऑपरेटरों का दावा है कि डीजल-पेट्रोल की कीमतें, मौसम, ट्रैफिक और यात्रियों की संख्या के आधार पर किराया बदलना मजबूरी है। उनका कहना है कि भीड़ ज्यादा होने पर किराया बढ़ाया जाता है और बस खाली रहने पर रेट घटा दिए जाते हैं। हालांकि परिवहन विशेषज्ञ इस तर्क से सहमत नहीं हैं। उनका मानना है कि बार-बार और बिना नियम के किराया बदलना यात्रियों के साथ खुली मनमानी है, जिसे किसी भी तरह जायज नहीं ठहराया जा सकता। तीन महीने का होता है टूरिस्ट परमिट परिवहन विभाग के अनुसार, टूरिस्ट परमिट की बसों को करीब 90 हजार रुपये फीस देकर केवल तीन महीने के लिए परमिट मिलता है। इन बसों का उपयोग आमतौर पर शादी, टूर या अनुबंधित यात्राओं के लिए किया जाता है। इनके किराए का निर्धारण अधिकतर दिल्ली स्तर से होता है। भाठागांव बस स्टैंड पर किराए की खुली लूट प्रदेश के सबसे बड़े अंतरराज्यीय बस अड्डे भाठागांव में स्थिति और भी चौंकाने वाली है। यहां हैदराबाद, बेंगलुरु, पुणे, मुंबई, इंदौर, उज्जैन जैसे शहरों के लिए खड़ी बसों में एक ही समय पर अलग-अलग किराए वसूले जा रहे हैं। कहीं पुणे का किराया 1600 रुपये बताया जा रहा है, तो कुछ ही मिनट बाद दूसरी बस के लिए वही किराया 1900 या 2200 रुपये हो जाता है। इसी तरह बेंगलुरु और प्रतापगढ़ जैसे रूटों पर भी सैकड़ों रुपये का फर्क सामने आ रहा है। प्रदेश में बस किराए के तय नियम राज्य में स्टेज कैरिज बसों के लिए किराया पहले से निर्धारित है— नियम क्या कहता है? नियमों के मुताबिक, टूरिस्ट परमिट वाली बसें केवल अनुबंधित या पर्यटन यात्रियों को ही ले जा सकती हैं। ये नियमित इंटरस्टेट या सामान्य बस सेवाओं की तरह सवारी नहीं उठा सकतीं। इसके बावजूद, भाठागांव बस स्टैंड पर चल रही व्यवस्था यात्रियों के लिए परेशानी और जेब पर सीधा असर डाल रही है। अब सवाल यह है कि आखिर इस मनमानी पर लगाम कौन लगाएगा?

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रातों-रात बनी करोड़ों की सड़क, सुबह ही उधड़ गई

अंबिकापुर में NH-43 पर घटिया मरम्मत का खुलासा, वीडियो वायरल होने के बाद सब इंजीनियर निलंबित छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां नेशनल हाईवे-43 पर करोड़ों रुपये की लागत से की गई सड़क मरम्मत महज एक रात भी नहीं टिक पाई। 20 दिसंबर की रात किए गए बीटी पैच रिपेयरिंग का काम अगली सुबह उखड़ गया, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। वीडियो सामने आने के बाद निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठे और मामले में कार्रवाई करते हुए नेशनल हाईवे विभाग ने संबंधित सब इंजीनियर को सस्पेंड कर दिया है। कचरा गाड़ी में भरकर हटाया गया उखड़ा मटेरियल जानकारी के अनुसार, अंबिकापुर के सदर रोड पर शनिवार देर रात बीटी पैच रिपेयरिंग कराई गई थी। सुबह होते-होते करीब 7 मीटर सड़क उखड़ गई। हालात ऐसे थे कि निगम के कर्मचारियों को बेलचे से मटेरियल समेटकर कचरा वाहन में भरकर ले जाना पड़ा। स्थानीय लोगों ने इस पूरी प्रक्रिया का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाल दिया, जिसके बाद मामला तूल पकड़ गया। 6 करोड़ की योजना में केवल 600 मीटर का काम नेशनल हाईवे-43 पर कुल 12 किलोमीटर सड़क मरम्मत के लिए लगभग 6 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इसमें से करीब 600 मीटर हिस्से में रिपेयरिंग की गई थी, लेकिन उसी में से 7 मीटर सड़क पूरी तरह से खराब हो गई। जांच रिपोर्ट के बाद गिरी कार्रवाई की गाज घटिया कार्य को लेकर बिलासपुर स्थित नेशनल हाईवे के अधीक्षण अभियंता ने प्रतिवेदन और फोटो मुख्य अभियंता, रायपुर को भेजे थे। रिपोर्ट के आधार पर गुणवत्ता में लापरवाही बरतने के आरोप में सब इंजीनियर नवीन सिन्हा को निलंबित कर दिया गया। साथ ही उनका मुख्यालय एसई कार्यालय, बिलासपुर कर दिया गया है। ठंड और तकनीकी खराबी बताई गई वजह नेशनल हाईवे के एसडीओ निखिल लकड़ा ने सफाई देते हुए बताया कि सदर रोड शहर का अत्यंत व्यस्त मार्ग है, इसलिए दिन में काम संभव नहीं था। रात में कार्य के दौरान रोलर में तकनीकी खराबी आ गई, जिससे मटेरियल ठंडा हो गया और सही ढंग से कंम्पेक्शन नहीं हो सका। इसी कारण 7 मीटर सड़क को हटवाया गया और बाद में दोबारा निर्माण कराया गया। कलेक्टर ने दिए गुणवत्ता पर सख्ती के निर्देश सरगुजा कलेक्टर अजीत वसंत ने कहा कि नेशनल हाईवे के अधिकारियों को सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं। तकनीकी कारणों से जो हिस्सा खराब हुआ था, उसे दोबारा बनवा दिया गया है।

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रायपुर में बांग्लादेशी–रोहिंग्या घुसपैठ की आशंका पर पुलिस का सर्च ऑपरेशन

ऑपरेशन समाधान’ के तहत 1,000 से अधिक लोगों की जांच, 100 संदिग्धों पर कड़ी नजर राजधानी रायपुर में अवैध घुसपैठ की आशंका को लेकर पुलिस ने मंगलवार तड़के बड़ा सर्च अभियान चलाया। ‘ऑपरेशन समाधान’ के तहत दूसरे राज्यों से आए करीब 1,000 से ज्यादा लोगों की पहचान और दस्तावेजों की जांच की गई। यह कार्रवाई संभावित बांग्लादेशी नागरिकों और रोहिंग्या घुसपैठियों की तलाश के लिए की गई। प्राथमिक जांच में लगभग 100 ऐसे लोग सामने आए, जिनके पास वैध दस्तावेज नहीं मिले। पुलिस का कहना है कि ये लोग पश्चिम बंगाल या बांग्लादेश सीमा से जुड़े इलाकों के बताए जा रहे हैं। संदेहियों के मोबाइल नंबरों और डिजिटल गतिविधियों की तकनीकी जांच भी शुरू कर दी गई है। शहर के कई इलाकों में रह रहे संदिग्ध पुलिस के अनुसार, जिन संदिग्धों की पहचान हुई है, वे मोवा, खमतराई, टिकरापारा, उरला और सिविल लाइन थाना क्षेत्रों में रह रहे हैं। इनमें से कई लोग ऑटो चालक और दैनिक मजदूरी जैसे कार्यों से जुड़े हुए हैं। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि इन सभी पर निरंतर निगरानी रखी जाएगी। निवास अवधि को लेकर अस्पष्ट जानकारी पूछताछ के दौरान अधिकतर संदिग्ध यह स्पष्ट नहीं कर सके कि वे कब और किस परिस्थिति में रायपुर आए। अधिकांश ने केवल पिछले एक–दो वर्षों में शहर में आने की बात कही, जिससे पुलिस की शंका और गहरी हो गई है। सुबह 4 बजे से चला सघन अभियान यह अभियान एसएसपी डॉ. लाल उम्मेद सिंह के निर्देश पर सुबह करीब 4 बजे शुरू किया गया। सीएसपी स्तर के अधिकारियों की अगुवाई में पुलिस टीमों ने बीट-वाइज कार्रवाई करते हुए संदिग्धों को चिन्हित किया। पूछताछ के बाद उन्हें पुलिस लाइन लाकर दस्तावेजों की गहन जांच की गई। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी।

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रायपुर में गांजा तस्करी पर बड़ा प्रहार: 1.5 करोड़ की अवैध संपत्ति जब्त, 13 प्लॉट सील

छत्तीसगढ़ में नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ पुलिस की सख्ती लगातार जारी है। इसी कड़ी में रायपुर पुलिस ने गांजा तस्करी से जुड़े एक बड़े मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए डेढ़ करोड़ रुपये की अचल संपत्ति जब्त की है। यह कार्रवाई सफेमा (SAFEMA) अधिनियम के तहत की गई है। खरोरा थाना क्षेत्र के गांजा तस्कर राकेश वर्मा पर यह कार्रवाई हुई है, जो पिछले 7 महीनों से पुलिस की पकड़ से बाहर था। जांच में सामने आया कि आरोपी ने नशे की कमाई से अपने और परिवार के सदस्यों के नाम पर संपत्तियां खरीदी थीं। 27 किलो गांजा बरामद होने के बाद खुला पूरा नेटवर्क 20 मई 2025 को एसीसीयू और खरोरा पुलिस की संयुक्त टीम ने छड़िया गांव में छापा मारकर मोहन सिंह कोशले को गिरफ्तार किया था। मौके से पुलिस ने 27.894 किलोग्राम गांजा बरामद किया, जिसकी कीमत करीब 4.18 लाख रुपये आंकी गई। छापेमारी की भनक लगते ही मोहन का साथी राकेश वर्मा मौके से फरार हो गया था। पूछताछ में मोहन ने खुलासा किया कि बरामद गांजा खपरीडीह खुर्द निवासी राकेश वर्मा का था। नशे की कमाई से खरीदी गई जमीनें, कोर्ट ने दिया जब्ती का आदेश पुलिस जांच में यह स्पष्ट हुआ कि आरोपी ने गांजा तस्करी से अर्जित धन से कई प्लॉट खरीदे थे, जिन्हें परिजनों के नाम दर्ज कराया गया। दस्तावेजी सबूतों के आधार पर पुलिस ने जब्ती का प्रस्ताव सफेमा कोर्ट, मुंबई भेजा। मामले की सुनवाई के बाद सफेमा कोर्ट ने संपत्तियों को जब्त करने का आदेश जारी किया। 13 प्लॉट जब्त, तलाश जारी कोर्ट के निर्देश पर खरोरा थाना क्षेत्र के ग्राम खपरीडीह खुर्द में स्थित राकेश वर्मा और उसके परिवार के नाम दर्ज कुल 13 प्लॉट जब्त कर लिए गए हैं। इन संपत्तियों की अनुमानित कीमत करीब 1.5 करोड़ रुपये बताई जा रही है। फिलहाल आरोपी राकेश वर्मा फरार है, जिसकी तलाश में पुलिस टीमें लगातार दबिश दे रही हैं। खरोरा थाना प्रभारी ने गांजा तस्कर के खिलाफ सफेमा के तहत कार्रवाई की पुष्टि की है।

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कुख्यात गैंगस्टर मयंक सिंह को रायपुर लाएगी पुलिस, 24 दिसंबर को कोर्ट में पेशी

कारोबारी के ऑफिस पर फायरिंग का आरोप, अमन साव और लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े तार झारखंड के कुख्यात अपराधी मयंक सिंह को छत्तीसगढ़ पुलिस जल्द रायपुर लेकर आएगी। रायपुर कोर्ट के आदेश पर उसके खिलाफ प्रोडक्शन वारंट जारी किया गया है, जिसके तहत 24 दिसंबर को उसे कोर्ट में पेश किया जाएगा। फिलहाल मयंक सिंह झारखंड की जेल में न्यायिक हिरासत में बंद है। मयंक सिंह अमन साव गैंग का सक्रिय सदस्य बताया जाता है। उस पर रायपुर के कोयला कंस्ट्रक्शन कारोबारी प्रहलाद राय और पीआर ग्रुप के संचालक के कार्यालय पर फायरिंग करवाने का गंभीर आरोप है। छत्तीसगढ़ में उसके खिलाफ पहले से ही कई आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिसके चलते पुलिस उसे राज्य के लिए अहम आरोपी मान रही है। कारोबारी कार्यालय पर हुई थी फायरिंग जुलाई 2024 में रायपुर स्थित कारोबारी कार्यालय पर बाइक सवार बदमाश ने दो राउंड फायरिंग की थी। घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया था। एक गोली हवा में चलाई गई थी, जबकि दूसरी गोली कार्यालय के बाहर खड़ी कार पर लगी थी। जांच में सामने आया कि इस पूरी वारदात की साजिश मयंक सिंह ने रची थी। लॉरेंस बिश्नोई से जुड़ाव की चर्चा पुलिस सूत्रों के मुताबिक, मयंक सिंह गैंगस्टर अमन साव का करीबी रहा है। इसके साथ ही उसके लॉरेंस बिश्नोई गैंग से भी संपर्क बताए जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि वह लॉरेंस बिश्नोई का बचपन का दोस्त है। हाल ही में मयंक सिंह को इंटरपोल की मदद से अजरबैजान से भारत प्रत्यर्पित किया गया। यह झारखंड का पहला मामला है, जब किसी गैंगस्टर को विदेश से वापस लाया गया हो। रांची एयरपोर्ट से जेल तक उसे बख्तरबंद वाहन में कड़ी सुरक्षा के बीच ले जाया गया था। 45 से ज्यादा संगीन मामले दर्ज पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, मयंक सिंह पर हत्या, रंगदारी, धमकी, फायरिंग और आपराधिक षड्यंत्र जैसे 45 से अधिक गंभीर मामले दर्ज हैं। वह लंबे समय तक विदेश में रहकर अपने गैंग नेटवर्क को संचालित कर रहा था। जांच में यह भी सामने आया है कि उसने उद्योगपतियों, कारोबारियों और नेताओं से रंगदारी मांगी थी। राजस्थान में एक कांग्रेस विधायक और पूर्व मंत्री से भी उसने रंगदारी की मांग की थी। डंकी रूट से विदेश गया था पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मयंक सिंह डंकी रूट के जरिए भारत से बाहर गया था। सिंगापुर, ईरान और मेक्सिको होते हुए वह अमेरिका पहुंचा, जहां से वह अमन साव गैंग की गतिविधियों को अंजाम देता रहा। अब प्रत्यर्पण के बाद पुलिस उससे अमन साव और लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े नेटवर्क, फंडिंग और साजिशों को लेकर अहम जानकारी जुटाने की तैयारी में है। मीडिया को भेजा था धमकी भरा ई-मेल 16 जून 2024 को कोल और कंस्ट्रक्शन कारोबारियों पर हमले की साजिश में शामिल आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद मयंक सिंह ने छत्तीसगढ़ की मीडिया को धमकी भरा ई-मेल भेजा था। इसमें उसने गिरफ्तारी को साजिश करार दिया और बदला लेने की चेतावनी दी थी। ई-मेल में उसने कहा था कि कारोबारियों के परिवार से एक सदस्य को निशाना बनाया जाएगा। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए रायपुर एसएसपी ने जांच के निर्देश दिए थे।

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DSP कल्पना–कारोबारी विवाद की जांच में नया मोड़, जांच अधिकारी का तबादला

दंतेवाड़ा में पदस्थ डीएसपी कल्पना वर्मा और रायपुर के कारोबारी दीपक टंडन के बीच चल रहे विवाद की जांच के दौरान बड़ा प्रशासनिक फैसला सामने आया है। मामले की जांच कर रहे एएसपी कीर्तन राठौर का तबादला कर दिया गया है। उन्हें अब राजनांदगांव में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के निर्देश पर एएसपी कीर्तन राठौर इस संवेदनशील मामले की जांच कर रहे थे। तबादले से पहले उन्होंने डीएसपी कल्पना वर्मा और कारोबारी दीपक टंडन—दोनों के अलग-अलग बयान दर्ज किए थे। जांच के बाद उनकी रिपोर्ट दो से तीन दिनों में सीनियर अधिकारियों को सौंपे जाने की तैयारी थी, लेकिन उससे पहले ही उनका ट्रांसफर हो गया। कारोबारी ने लगाए गंभीर आरोप, डिजिटल सबूत सौंपे बयान के दौरान कारोबारी दीपक टंडन ने आरोप लगाया कि डीएसपी कल्पना वर्मा ने उन्हें प्रेम संबंध का झांसा देकर करोड़ों रुपये लिए। उन्होंने यह भी दावा किया कि महादेव सट्टा मामले से जुड़े काम को लेकर विवाद हुआ। कारोबारी ने अपने आरोपों के समर्थन में डिजिटल साक्ष्य भी जांच अधिकारी को सौंपे हैं। डीएसपी कल्पना वर्मा ने लगाए पलटवार के आरोप वहीं डीएसपी कल्पना वर्मा ने सोमवार, 22 दिसंबर को एएसपी कार्यालय पहुंचकर करीब दो घंटे तक अपना बयान दर्ज कराया। उन्होंने कारोबारी पर परिजनों के पैसे नहीं लौटाने और जानबूझकर उनकी छवि खराब करने का आरोप लगाया है। विवाद की पृष्ठभूमि इस पूरे मामले की शुरुआत 10 दिसंबर को हुई, जब कारोबारी दीपक टंडन ने मीडिया के सामने बयान देकर आरोप लगाया कि डीएसपी कल्पना वर्मा ने उन्हें भावनात्मक रूप से फंसाकर करोड़ों रुपये लिए और अब पत्नी को छोड़ने का दबाव बना रही हैं। मामला सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसके बाद डीएसपी कल्पना वर्मा ने आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कारोबारी पर बदनाम करने का आरोप लगाया और कानूनी कार्रवाई की बात कही। इसके बाद कारोबारी दीपक टंडन के खिलाफ अलग-अलग मामलों में केस दर्ज होने और वारंट जारी होने की जानकारी सामने आई। इसी दौरान कारोबारी से मारपीट का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। इसके बाद दीपक टंडन ने आईजी और डीजीपी को शिकायत भेजी, जिसमें डीएसपी कल्पना वर्मा और महादेव सट्टा नेटवर्क का उल्लेख किया गया। पहली बार 22 दिसंबर को दर्ज हुए बयान शिकायत के बाद डीएसपी कल्पना वर्मा पहली बार 22 दिसंबर को एसएसपी कार्यालय पहुंचीं और जांच अधिकारी के समक्ष अपना बयान दर्ज कराया। इसके बाद कारोबारी दीपक टंडन ने भी एसएसपी कार्यालय पहुंचकर अपना पक्ष रखा। कैसे शुरू हुई दोस्ती जानकारी के मुताबिक, वर्ष 2021 में जब डीएसपी कल्पना वर्मा महासमुंद में पदस्थ थीं, तब वे अपने कुछ सहयोगियों के साथ कारोबारी टंडन के होटल पहुंची थीं। कल्पना के एक बैचमेट और टंडन के बीच पहले से जान-पहचान थी, जिसके जरिए दोनों की मुलाकात हुई। इसके बाद फोन नंबरों का आदान-प्रदान हुआ और संपर्क बढ़ता गया। आरोप है कि इसके बाद दोनों के बीच मुलाकातें बढ़ीं और साथ घूमने-फिरने व छोटे टूर पर जाने का सिलसिला शुरू हुआ। चेक बाउंस केस भी विवाद में शामिल कारोबारी दीपक टंडन का दावा है कि एक डील के तहत उनकी पत्नी के खाते से भुगतान होना था, लेकिन बाद में सौदा पूरा नहीं हो पाया। जब उन्होंने अपने पैसे वापस मांगे, तो दूसरे पक्ष ने चेक देने से इनकार कर दिया। इसके कुछ दिनों बाद उनकी पत्नी के खिलाफ चेक बाउंस का केस दर्ज करा दिया गया। टंडन का आरोप है कि इसी दौरान उन्हें यह एहसास हुआ कि उनके साथ ठगी की गई है। उन्होंने दावा किया कि डीएसपी कल्पना वर्मा को उन्होंने दो करोड़ रुपये से अधिक की रकम और सामान दिया है।

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