October 2025

शराबबंदी और पेंशन की मांग पर छत्तीसगढ़ में ड्राइवरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल, प्रदेशभर में परिवहन ठप

छत्तीसगढ़ में ड्राइवर महासंगठन ने अपनी 9 सूत्रीय मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। राज्य के लगभग 3 लाख ड्राइवरों ने वाहन स्टेयरिंग छोड़ दिया है, जिससे ट्रक, बस, टैक्सी और ऑटो सड़कों पर खड़े हैं। कई हाईवे और मुख्य मार्गों पर लंबा जाम लग गया है, जिससे माल ढुलाई और यात्री परिवहन दोनों प्रभावित हुए हैं। संगठन ने पहले ही चेतावनी दी थी कि अगर उनकी मांगें 25 अक्टूबर तक पूरी नहीं की गईं, तो व्यापक हड़ताल और चक्काजाम किया जाएगा। अब यह चेतावनी सड़कों पर दिख रही है। महासंघ का कहना है कि वर्षों से उनकी मांगों को नजरअंदाज किया गया। शराबबंदी मुख्य मांग ड्राइवर महासंघ की सबसे अहम मांग राज्य में पूर्ण शराबबंदी लागू करना है। उनका दावा है कि सड़क हादसों में अक्सर ड्राइवरों पर गलत आरोप लगाए जाते हैं, जबकि असली वजह शराब और सड़क सुरक्षा की कमी होती है। संगठन का कहना है कि शराबबंदी से सड़क हादसे घटेंगे और ड्राइवरों की प्रतिष्ठा भी सुधरेगी। अन्य प्रमुख मांगें संगठन की अन्य मांगों में शामिल हैं: सड़कों पर जाम, व्यापार प्रभावित रायपुर के रायपुरा और भाठागांव बस स्टैंड के पास ड्राइवरों का प्रदर्शन जारी है। राजधानी के साथ ही राजनांदगांव, खैरागढ़ और कबीरधाम जिलों में भी व्यावसायिक वाहन सड़कों पर खड़े कर दिए गए हैं, जिससे व्यापार और आम लोगों को परेशानी हो रही है। पुलिस और प्रशासन ने जाम को नियंत्रित करने के लिए मौके पर निगरानी बढ़ा दी है।

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कोरबा में ड्राइवरों का NH पर चक्काजाम: शराबबंदी और सुरक्षा कानून समेत 11 मांगों को लेकर आंदोलन, दोनों ओर वाहनों की लगी कतारें

छत्तीसगढ़ ड्राइवर महासंघ ने अपनी 11 सूत्रीय मांगों को लेकर शुक्रवार से अनिश्चितकालीन चक्काजाम शुरू कर दिया है। आंदोलन के पहले दिन ही कोरबा जिले के पाली क्षेत्र के डुमरकछार में ड्राइवरों ने राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) पर यातायात रोक दिया, जिससे दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। सुबह से ही ट्रक, बस और मालवाहक वाहनों को सड़क पर खड़ा कर दिया गया, जिसके कारण कोरबा, कटघोरा, पाली और बिलासपुर रोड पर घंटों तक यातायात बाधित रहा। इस जाम का असर आवश्यक सेवाओं पर भी दिखा और यात्रियों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी। स्थिति को संभालने के लिए प्रशासन और पुलिस बल मौके पर तैनात किए गए हैं। अधिकारी लगातार प्रदर्शनकारियों से बात करने की कोशिश कर रहे हैं। ड्राइवर महासंघ के पदाधिकारियों ने कहा कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। महासंघ की प्रमुख मांगों में शामिल हैं — महासंघ ने कहा कि ओडिशा सरकार ने ड्राइवरों की सुरक्षा और कल्याण के लिए जो कदम उठाए हैं, वैसे ही प्रावधान छत्तीसगढ़ में भी लागू किए जाने चाहिए। आंदोलन से पहले जिला और ब्लॉक स्तर पर ड्राइवर संघ ने वाहनों पर पैम्फलेट चिपकाकर और सभाएं आयोजित कर लोगों को आंदोलन के बारे में जागरूक किया था।

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दुर्ग में 16 चाकूबाज गिरफ्तार: धारदार हथियारों के साथ पुलिस ने पकड़ा, 24 घंटे में बड़ी कार्रवाई

दुर्ग जिले में लगातार बढ़ रही चाकूबाजी और असामाजिक घटनाओं पर रोक लगाने के लिए पुलिस ने विशेष अभियान चलाया। इस कार्रवाई में बीते 24 घंटों के भीतर 16 आरोपियों को धारदार हथियारों के साथ गिरफ्तार किया गया है। सभी के खिलाफ आर्म्स एक्ट की धारा 25 और 27 के तहत केस दर्ज कर जेल भेज दिया गया है। इसके अलावा पुलिस ने जिले में 22 असामाजिक तत्वों पर प्रतिबंधात्मक कार्रवाई भी की है, ताकि भविष्य में किसी तरह की वारदात को रोका जा सके। जानकारी के अनुसार, थाना पद्मनाभपुर पुलिस ने पोटिया चौक से मोह. एजाज, सिविल लाइन से इम्तियाज अहमद खान, सुभाष नगर से मोहित ध्रुव और आदर्श नगर से संजय साहू को पकड़ा। सभी के पास से चाकू और अन्य हथियार जब्त किए गए। वहीं, सुपेला थाना पुलिस ने एक नाबालिग, टुनटुन चौहान और श्याम तांडी को अलग-अलग इलाकों से गिरफ्तार किया। इनसे भी धारदार हथियार बरामद किए गए। थाना दुर्ग कोतवाली पुलिस ने निखिल तांडी, विजय ढीमर और भूपेंद्र साहू को पकड़ा, जबकि भिलाई नगर थाना पुलिस ने सोहेब खान और नासिर कुरैशी को गिरफ्तार किया। इनके अलावा वैशाली नगर पुलिस ने आकाश दीप विश्वास और शाहबाज खान, तथा नंदिनी नगर थाना पुलिस ने प्रदीप और पीयूष साहू को हथियारों के साथ गिरफ्तार किया। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, यह कार्रवाई जिले में चलाए जा रहे एंटी-क्राइम अभियान का हिस्सा है। इससे पहले भी 6 आरोपियों को इसी तरह पकड़ा गया था। अब तक कुल 22 आरोपी जेल भेजे जा चुके हैं। पुलिस ने साफ कहा है कि चाकूबाजी, गुंडागर्दी और असामाजिक गतिविधियों में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। यह अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा।

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रायपुर VIP चौक में बस से टकराई बाइक, युवक की मौके पर मौत: ड्राइवर हिरासत में, गलत तरीके से खड़ी थी बस

रायपुर के वीआईपी चौक में शनिवार सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसा हुआ। यहां खड़ी कांकेर रोडवेज की बस से बाइक सवार युवक की टक्कर हो गई, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। मृतक की पहचान महासमुंद निवासी ईश्वर साहू के रूप में हुई है। मामला तेलीबांधा थाना क्षेत्र का है। जानकारी के अनुसार, सुबह करीब 5:30 बजे ईश्वर साहू अपनी बाइक (CG07BT4836) से महासमुंद की ओर जा रहे थे। इसी दौरान कांकेर रोडवेज प्राइवेट लिमिटेड की बस (CG04PB8100) सड़क किनारे गलत तरीके से खड़ी थी। तेज रफ्तार में जा रहे बाइक सवार की बस से टक्कर हो गई, जिससे उसका सिर फट गया और मौके पर ही मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और बस चालक को हिरासत में लिया। थाना प्रभारी नरेंद्र मिश्रा ने बताया कि ड्राइवर ने लापरवाहीपूर्वक बस खड़ी की थी, जिसके कारण यह हादसा हुआ। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और आगे की जांच जारी है। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई थी। राहगीरों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। बीते कुछ महीनों में रायपुर और आसपास के इलाकों में सड़क हादसों की संख्या लगातार बढ़ रही है। केवल चार महीनों में 78 से ज्यादा दुर्घटनाएं दर्ज की गई हैं, जिनमें 28 लोगों की मौत हो चुकी है। अधिकतर हादसों की वजह तेज रफ्तार, लापरवाही और गलत पार्किंग बताई जा रही है।

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9 साल की बच्ची की आंख से दिमाग तक घुसी घंटी: रायपुर डीकेएस अस्पताल में 4 घंटे चला ऑपरेशन, डॉक्टरों ने बचाई आंख और जान

रायपुर के डीकेएस सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में डॉक्टरों ने दिवाली की रात एक चमत्कारिक सर्जरी की। बिलासपुर की 9 साल की काव्या की आंख से होते हुए दिमाग तक घुसी घंटी का हैंडल डॉक्टरों ने सावधानीपूर्वक निकालकर न सिर्फ उसकी जान बचाई, बल्कि उसकी आंख की रोशनी भी बरकरार रखी। घटना बिलासपुर के सिविल लाइन इलाके की है। दिवाली के दिन खेलते-खेलते काव्या मुंह के बल गिर गई। जिस घंटी से वह खेल रही थी, उसका ऊपरी सिरा बाईं आंख में घुसकर सीधा दिमाग तक जा पहुंचा। बच्ची की चीख सुनकर परिजन दौड़े और उसे तुरंत सिम्स बिलासपुर ले गए। जांच में पता चला कि घंटी की नुकीली नोक आंख की हड्डी पार कर दिमाग में लगभग 5 सेंटीमीटर तक फंसी हुई है। स्थिति गंभीर थी, इसलिए डॉक्टरों ने तुरंत रायपुर के डीकेएस अस्पताल रेफर कर दिया। दिवाली की रात इमरजेंसी में न्यूरोसर्जन डॉ. राजीव साहू और उनकी टीम—डॉ. लवलेश राठौड़, डॉ. नमन चंद्राकर, डॉ. प्रांजल मिश्रा और डॉ. देवश्री—ने 4 घंटे तक चले ऑपरेशन में बच्ची को बचाने की जद्दोजहद की। ऑपरेशन एंडोस्कोपिक तकनीक से किया गया ताकि दिमाग के ऊत्तकों को नुकसान न पहुंचे। भौंह के ऊपर से छोटा चीरा लगाकर डॉक्टरों ने धीरे-धीरे घंटी का हिस्सा बाहर निकाला। सर्जरी के बाद जब बच्ची ने दोनों आंखों से साफ देखा और मुस्कुराई, तो ओटी में मौजूद सभी डॉक्टरों ने राहत की सांस ली। डॉक्टरों के अनुसार, यह प्रदेश में अपनी तरह का पहला केस है, जिसमें आंख के रास्ते दिमाग तक घुसे मेटल ऑब्जेक्ट को सफलतापूर्वक निकाला गया। बच्ची फिलहाल सुरक्षित है और अस्पताल में निगरानी में है।

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बिलासपुर में जवाली नाले पर निगम की कार्रवाई, भेदभाव के आरोपों से घिरा प्रशासन

बिलासपुर नगर निगम ने दिवाली के बाद एक बार फिर अवैध कब्जों के खिलाफ अभियान शुरू किया है। शनिवार (25 अक्टूबर) को जवाली नाले के पास बने कई दुकानों और मकानों पर बुलडोजर चलाया गया। इस दौरान स्थानीय लोगों और व्यापारियों ने निगम अधिकारियों पर पक्षपातपूर्ण कार्रवाई का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल केवल सरकारी जमीन पर किए गए कब्जों को हटाया जा रहा है, जबकि अवैध निर्माणों के खिलाफ अलग से नोटिस जारी कर आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं, स्थानीय लोगों का आरोप है कि निगम छोटे व्यापारियों पर सख्ती कर रहा है, जबकि बड़े कब्जाधारियों पर कार्रवाई टाल दी गई है। जानकारी के मुताबिक, निगम ने करीब छह महीने पहले जवाली नाले के पास नजूल भूमि पर हुए अवैध निर्माणों की जांच कराई थी। तब 44 लोगों को नोटिस भेजे गए थे। बावजूद इसके, एक व्यापारी द्वारा बिना अनुमति के चार मंजिला कमर्शियल कॉम्प्लेक्स बना लिया गया, जिस पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। एक महीने पहले भी निगम ने जवाली पुल के पास अवैध निर्माण पर बुलडोजर चलाया था, लेकिन राजनीतिक दबाव के चलते कार्रवाई रोक दी गई थी। इस मामले में व्यापारी वर्ग ने निगम पर सिंधी समाज को निशाना बनाने का आरोप लगाया था, जिस पर मेयर पूजा विधानी ने अफसरों को फटकार लगाई थी। अब दिवाली के बाद अतिक्रमण शाखा फिर से सक्रिय हुई है और चिन्हित कब्जों पर कार्रवाई शुरू की गई है। भवन शाखा प्रभारी अनुपम तिवारी ने कहा कि सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा हटाने की कार्रवाई की जा रही है, जबकि अन्य अवैध निर्माणों को नोटिस भेजने की प्रक्रिया जारी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बड़े बिल्डरों और व्यापारियों के खिलाफ निगम की चुप्पी भ्रष्टाचार और पक्षपात की ओर इशारा करती है।

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रायपुर में बढ़ते अपराधों पर लगेगा लगाम, नवंबर से लागू होगी पुलिस कमिश्नरी प्रणाली

रायपुर में बढ़ती आबादी और तेजी से बढ़ते अपराधों को देखते हुए अब पुलिस कमिश्नरी प्रणाली लागू करने की तैयारी पूरी कर ली गई है। राजधानी में पिछले पांच सालों में अपराध के मामलों में लगभग दो गुना बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वर्ष 2020 में जहां 8,461 मामले दर्ज हुए थे, वहीं 2024 में यह संख्या बढ़कर 17 हजार से अधिक हो गई है। सूत्रों के अनुसार, नई प्रणाली लागू होने से पुलिस को अधिक अधिकार मिलेंगे और प्रशासनिक स्तर पर त्वरित निर्णय लिए जा सकेंगे। अब तक अधिकांश प्रतिबंधात्मक कार्रवाईयों पर जिला प्रशासन की मंजूरी लेनी पड़ती थी, जिससे समय लगता था। कमिश्नरी प्रणाली से इस प्रक्रिया में तेजी आएगी और कानून व्यवस्था बेहतर होने की उम्मीद है। चार जोन में बंटेगा रायपुर, हर जोन में एसपी स्तर के अधिकारीरायपुर को चार जोनों में विभाजित करने की तैयारी चल रही है — रायपुर उत्तर, रायपुर दक्षिण, रायपुर पश्चिम और नवा रायपुर। पुलिस कमिश्नर (सीपी) के अधीन एडिशनल सीपी और ज्वाइंट सीपी जैसे वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी रहेंगे। हर जोन में एसपी स्तर के अधिकारी नियुक्त किए जाएंगे, जिनके अधीन एएसपी, डीएसपी और टीआई रहेंगे। कमिश्नरी में लॉ एंड ऑर्डर, क्राइम, और साइबर क्राइम के लिए अलग-अलग विंग बनाए जाएंगे। अधिकारियों की पोस्टिंग और मुख्यालय तय करने की प्रक्रिया फिलहाल जारी है। बढ़ती जनसंख्या के हिसाब से जरूरी सुधारराजधानी रायपुर की आबादी अब करीब 25 लाख के आसपास पहुंच चुकी है। वर्तमान में जिले में 3,805 पुलिसकर्मी स्वीकृत हैं, जिनमें लगभग 800 पद खाली हैं। नई प्रणाली लागू होने के बाद बल की संख्या 5,000 तक बढ़ाई जाएगी ताकि शहर की सुरक्षा को और मजबूत किया जा सके। पुराने अनुभवी अफसरों की वापसी संभवकमिश्नरी प्रणाली के पहले प्रयोग के रूप में रायपुर में उन अनुभवी अधिकारियों को तैनात करने की योजना है जो पहले यहां कार्य कर चुके हैं। कई आईपीएस और डीएसपी स्तर के अफसरों ने भी राजधानी में दोबारा काम करने की इच्छा जताई है। हालांकि, अफसरों की पोस्टिंग को लेकर विभाग के भीतर खींचतान की खबरें भी सामने आई हैं। पुलिस कमिश्नरी प्रणाली को 1 नवंबर से लागू करने का लक्ष्य रखा गया है। कमिश्नर कार्यालय के लिए पुराने पुलिस मुख्यालय या शंकर नगर स्थित आईजी ऑफिस को संभावित स्थान माना जा रहा है।

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छत्तीसगढ़ में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, सीएम की नाराजगी के बाद तीन जिलों के एसपी बदले — IPS अंकिता शर्मा बनीं राजनांदगांव की नई एसपी

छत्तीसगढ़ में कलेक्टर-आईजी-एसपी कॉन्फ्रेंस के बाद पुलिस विभाग में बड़ा reshuffle किया गया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की नाराजगी के बाद सरकार ने तीन जिलों के पुलिस अधीक्षकों को हटा दिया है। शुक्रवार को गृह (पुलिस) विभाग ने सात आईपीएस अधिकारियों के तबादले और नई पदस्थापना के आदेश जारी किए। जारी आदेश के अनुसार, राजनांदगांव के एसपी मोहित गर्ग को उनके पद से हटाकर सहायक पुलिस महानिरीक्षक, पुलिस मुख्यालय नवा रायपुर में पदस्थ किया गया है। वहीं शक्ति जिले की एसपी अंकिता शर्मा को राजनांदगांव की नई पुलिस अधीक्षक नियुक्त किया गया है। मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के एसपी चंद्रमोहन सिंह को भी स्थानांतरित कर निदेशक, ट्रेनिंग, ऑपरेशन, अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएं, नगर सेना एवं नागरिक सुरक्षा मुख्यालय भेजा गया है। उनकी जगह सहायक पुलिस महानिरीक्षक रतना सिंह को जिले की कमान सौंपी गई है। इसी तरह कोंडागांव के एसपी यदुवली अक्षय कुमार को हटाकर एआईजी, पुलिस मुख्यालय, नवा रायपुर पदस्थ किया गया है। उनके स्थान पर 13वीं वाहिनी सशस्त्र बल, बांगो (कोरबा) के सेनानी पंकज चंद्रा को नया एसपी बनाया गया है। शक्ति जिले की जिम्मेदारी अब 4वीं वाहिनी, छसबल माना के सेनानी प्रफुल्ल ठाकुर को दी गई है। गृह विभाग ने सभी अधिकारियों को तुरंत प्रभाव से अपने नए पदों पर कार्यभार संभालने के निर्देश दिए हैं। खराब प्रदर्शन पर सीएम की सख्ती का असर13 अक्टूबर को हुई कलेक्टर-आईजी-एसपी कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और गृहमंत्री विजय शर्मा ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था, नशा नियंत्रण, सड़क सुरक्षा और साइबर अपराधों पर समीक्षा की थी। इस दौरान कुछ जिलों की पुलिस व्यवस्था को लेकर सीएम ने नाराजगी जताई थी और खराब प्रदर्शन वाले कप्तानों को फटकार लगाई थी। उसी के बाद से तबादले की अटकलें तेज थीं। अब इन तबादलों को उसी सख्ती का परिणाम माना जा रहा है।

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रायपुर के अंबेडकर अस्पताल में तीन दिनों में दो चोरियां, कैंसर विभाग की सेवाएं ठप

रायपुर स्थित डॉ. आंबेडकर अस्पताल में दीवाली के बाद से ही सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ खड़े हुए हैं। अस्पताल में तीन दिनों के भीतर दो चोरी की घटनाएं हुईं। 20 अक्टूबर को कैंसर विभाग से लगभग 20 मीटर तांबे की तार चोरी हो गई, जिससे एयर कंडीशनिंग और रेडिएशन थेरेपी प्रभावित हुई। इसके दो दिन बाद यानी 23 अक्टूबर को चोरों ने विभाग में लगे टीवी का ताला तोड़कर उसे उठा लिया। इस चोरी के कारण कैंसर मरीजों की ‘सेकाई’ प्रक्रिया रोक दी गई है, जिससे उनका उपचार बाधित हो गया है। यह स्थिति गंभीर मरीजों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है। चोरी की घटनाओं का विवरण अस्पताल प्रबंधन ने बताया कि तार चोरी होने से रेडिएशन उपचार में तापमान नियंत्रित नहीं हो पा रहा है, जिससे सेकाई सेवा चार दिनों से बंद है। यह घटना अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़ा करती है। मरीजों और परिजनों की चिंता कैंसर विभाग में रोजाना बड़ी संख्या में गंभीर मरीज इलाज के लिए आते हैं। सेकाई बंद होने के कारण कई मरीजों का उपचार स्थगित करना पड़ा। परिजनों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि सुरक्षा में चूक के कारण मरीजों की जिंदगी खतरे में पड़ गई। सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल अस्पताल में हाई-टेक सीसीटीवी कैमरे और सुरक्षा कर्मियों की तैनाती के बावजूद चोरी हुई। अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि चोरी किसने और कैसे की।

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दुर्ग में हनुमान जी की तस्वीर लेकर तालाब में कूदा युवक, 24 घंटे बाद मिला शव

दुर्ग शहर के चंडी तालाब में 22 अक्टूबर की शाम एक युवक हनुमान जी की फोटो लेकर तालाब में कूद गया। गहरे पानी में जाने के कारण उसकी मौत हो गई। युवक की पहचान 18 वर्षीय शिवम यादव के रूप में हुई है। वह पेशे से पेंटर था और पिछले कुछ दिनों से मानसिक रूप से परेशान बताया जा रहा था। मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि शिवम कुछ बोलते हुए तालाब के किनारे खड़ा था और फिर अचानक पानी में कूद गया। आसपास के लोगों ने काफी देर तक उसे बाहर आने का इंतजार किया, लेकिन जब वह बाहर नहीं आया तो पुलिस को सूचना दी गई। सूचना मिलने पर दुर्ग कोतवाली पुलिस और गोताखोरों की टीम मौके पर पहुंची और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। घंटों की तलाश के बावजूद उसे नहीं पाया जा सका। अगले दिन यानी 23 अक्टूबर की शाम करीब 4 बजे तालाब से उसका शव बरामद किया गया। एडिशनल एसपी सुखनंदन राठौर ने बताया कि शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया और बाद में परिजनों को सौंप दिया गया। मामला मर्ग कायम कर जांच के तहत रखा गया है। परिजनों ने कहा कि शिवम पिछले कुछ दिनों से मानसिक रूप से परेशान था और अक्सर भगवान की तस्वीरें लेकर बैठा रहता था। घटना वाले दिन भी वह घर से हनुमान जी की फोटो लेकर निकला और तालाब किनारे काफी देर तक कुछ बोलता रहा।

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