Chhattisgarh

रायपुर में सड़क किनारे मेटाडोर दुकानदारों का होगा सत्यापन, बिना पहचान वालों पर कार्रवाई की तैयारी

छत्तीसगढ़ की राजधानी Raipur में सड़क किनारे और मेटाडोर व अन्य वाहनों में सामान बेचने वाले दुकानदारों का अब व्यापक सत्यापन किया जाएगा। नगर निगम ने ऐसे सभी व्यापारियों का रिकॉर्ड तैयार करने का निर्णय लिया है ताकि शहर में अवैध या बिना पहचान वाले कारोबार पर नियंत्रण लगाया जा सके। इस संबंध में महापौर Minel Choubey ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि टाउन प्लानिंग विभाग की टीम शहरभर में अभियान चलाकर ऐसे सभी दुकानदारों की पहचान और पंजीयन सुनिश्चित करे। इसमें दुकानदार का नाम, स्थायी पता, पहचान पत्र और रायपुर में रहने की स्थिति दर्ज की जाएगी। नगर निगम ने साफ किया है कि जिन लोगों के पास वैध पहचान पत्र और निगम में पंजीयन नहीं होगा, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए वार्ड और जोन स्तर पर सर्वे शुरू किया जाएगा और आधार कार्ड, वोटर आईडी और पैन कार्ड जैसे दस्तावेजों की जांच की जाएगी। महापौर ने कहा कि इस कदम का उद्देश्य शहर की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना और स्थानीय व्यापारियों के हितों की रक्षा करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो लोग वैध रूप से व्यापार कर रहे हैं, उन्हें किसी तरह की परेशानी नहीं होगी, लेकिन बिना पहचान के कारोबार करने वालों पर सख्त निगरानी रखी जाएगी। नगर निगम ने यह भी बताया कि सड़क किनारे और वाहनों से होने वाले व्यापार की वजह से कई जगह ट्रैफिक जाम की समस्या उत्पन्न होती है। इस अभियान के जरिए यातायात व्यवस्था सुधारने पर भी ध्यान दिया जाएगा। प्रशासन ने आम लोगों से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी नगर निगम को दें ताकि शहर में व्यवस्था और सुरक्षा को बेहतर बनाया जा सके।

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स्मार्ट मीटर और बिजली कटौती के खिलाफ आंदोलन की तैयारी में कांग्रेस, सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

छत्तीसगढ़ में स्मार्ट मीटर और लगातार बिजली आपूर्ति में बाधा को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। कांग्रेस ने राज्य सरकार के खिलाफ बड़े आंदोलन के संकेत दिए हैं। पार्टी का कहना है कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद उपभोक्ताओं के बिजली बिलों में अचानक बढ़ोतरी हुई है, जिससे आम जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष Deepak Baij ने आरोप लगाया कि कई उपभोक्ताओं को इस महीने सामान्य से दो से तीन गुना तक ज्यादा बिजली बिल मिला है। उन्होंने कहा कि स्मार्ट मीटर वास्तविक खपत से अधिक रीडिंग दिखा रहे हैं, जिससे लोगों में असंतोष बढ़ रहा है। कांग्रेस ने मांग की है कि उत्तर प्रदेश की तरह छत्तीसगढ़ में भी स्मार्ट मीटर को हटाने पर विचार किया जाए। कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर राज्यव्यापी आंदोलन की घोषणा की है। पार्टी का कहना है कि वह गांव-गांव और शहरों में जाकर लोगों को जागरूक करेगी और सरकार के खिलाफ जन आंदोलन खड़ा करेगी। इसके साथ ही प्रदेश में हो रही अघोषित बिजली कटौती को लेकर भी कांग्रेस ने सरकार को घेरा है। पार्टी का आरोप है कि गर्मी के मौसम में शहरों से लेकर ग्रामीण इलाकों तक घंटों बिजली गुल रहती है, जिससे आमजन परेशान हैं। दीपक बैज ने कहा कि पहले छत्तीसगढ़ को बिजली सरप्लस राज्य माना जाता था, लेकिन अब स्थिति बिगड़ चुकी है। रात के समय बिजली कटौती और लो वोल्टेज की समस्या और अधिक गंभीर हो जाती है। कांग्रेस का कहना है कि जनता पहले से ही बढ़े हुए बिजली बिलों और महंगी दरों से परेशान है, और ऊपर से लगातार बिजली कटौती ने हालात और खराब कर दिए हैं।

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दुर्ग में दिल दहला देने वाली घटना: माता-पिता फंदे पर लटके मिले, दो बच्चों की शव बिस्तर पर बरामद

छत्तीसगढ़ के Durg जिले में शुक्रवार को एक ही परिवार के चार लोगों की मौत से इलाके में सनसनी फैल गई। मोहन नगर थाना क्षेत्र स्थित एक मकान में पति-पत्नी के शव फांसी के फंदे से लटके मिले, जबकि उनके दो बच्चों के शव बिस्तर पर पड़े मिले। शुरुआती जांच में आशंका जताई जा रही है कि दंपती ने पहले बच्चों की हत्या की और बाद में आत्महत्या कर ली। जानकारी के अनुसार गोविंद साहू (45) और उनकी पत्नी चंचल साहू (40) के शव कमरे में फंदे से लटके मिले। वहीं बेटी दृष्टि साहू (13) और बेटे यशांत साहू (11) के शव बिस्तर पर पाए गए। घटना की जानकारी परिवार के सदस्यों को तब हुई जब सुबह काफी देर तक कमरे से कोई जवाब नहीं मिला। दरवाजा खोलने पर सभी के शव अंदर मिले, जिसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस मौके पर पहुंची और जांच के दौरान कमरे से एक सुसाइड नोट बरामद किया गया। शुरुआती जानकारी के मुताबिक नोट में आर्थिक तंगी और पारिवारिक विवाद का जिक्र किया गया है। बताया जा रहा है कि परिवार हाल ही में तिरुपति बालाजी दर्शन से वापस लौटा था। जांच में बच्चों के गले पर निशान भी पाए गए हैं। हालांकि उनकी मौत किन परिस्थितियों में हुई, इसका खुलासा पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगा। सभी शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया गया है। पुलिस के अनुसार गोविंद साहू एक निजी कंपनी में काम करता था। आसपास के लोगों और परिजनों से पूछताछ में परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने की बात सामने आई है। फिलहाल पुलिस मोबाइल कॉल डिटेल, सुसाइड नोट और अन्य सबूतों की जांच कर रही है ताकि घटना की वास्तविक वजह का पता लगाया जा सके।

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जगदलपुर में अमित शाह की बड़ी बैठक: 4 राज्यों के मुख्यमंत्रियों संग नक्सलवाद, विकास और कनेक्टिविटी पर मंथन

बस्तर के जगदलपुर में पहली बार मध्य क्षेत्रीय परिषद की 26वीं बैठक आयोजित की जा रही है। केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah की अध्यक्षता में हो रही इस अहम बैठक में Chhattisgarh, Madhya Pradesh, Uttarakhand और Uttar Pradesh के मुख्यमंत्री शामिल हुए हैं। बैठक में नक्सल उन्मूलन, राज्यों के बीच बेहतर इंटेलिजेंस साझा करने, आदिवासी कल्याण, डिजिटल प्रशासन और क्षेत्रीय विकास जैसे मुद्दों पर चर्चा की जा रही है। इसके साथ ही रेल और सड़क नेटवर्क को मजबूत बनाने पर भी जोर दिया गया है, ताकि बस्तर जैसे दूरस्थ क्षेत्रों को देश के अन्य हिस्सों से बेहतर तरीके से जोड़ा जा सके। बस्तर की नई पहचान दिखाने की कोशिश कभी नक्सल हिंसा के कारण सुर्खियों में रहने वाला बस्तर अब विकास और प्रशासनिक गतिविधियों के केंद्र के रूप में पेश किया जा रहा है। केंद्र सरकार द्वारा यहां इतनी बड़ी बैठक आयोजित करना केवल प्रशासनिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक रणनीतिक और राजनीतिक संदेश भी माना जा रहा है। जिस क्षेत्र में पहले सुरक्षा कारणों से बड़े नेताओं के दौरे सीमित रहते थे, वहां अब एक साथ कई राज्यों के मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री मौजूद हैं। इसे सरकार नक्सल विरोधी अभियानों की सफलता और बदलते हालात के संकेत के रूप में देख रही है। नक्सलवाद पर सख्त रुख गृह मंत्री अमित शाह पहले भी कई बार कह चुके हैं कि केंद्र सरकार नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ रही है। हाल के महीनों में बस्तर संभाग में सुरक्षाबलों ने कई बड़े अभियान चलाए, जिनमें कई नक्सली कमांडर मारे गए या गिरफ्तार किए गए। सरकार का दावा है कि 31 मार्च 2026 तक बस्तर को नक्सलवाद मुक्त घोषित कर दिया गया है। अब फोकस विकास योजनाओं और स्थायी शांति स्थापित करने पर रखा जा रहा है। विकास और राज्यों के समन्वय पर चर्चा बैठक में राज्यों के बीच कानून व्यवस्था, सीमा विवाद, बिजली, जल संसाधन, परिवहन और आंतरिक सुरक्षा जैसे विषयों पर भी विचार-विमर्श हो रहा है। विशेष रूप से नक्सल प्रभावित इलाकों में संयुक्त रणनीति और बेहतर समन्वय को प्राथमिकता दी जा रही है। बस्तर को पर्यटन और निवेश केंद्र बनाने की तैयारी सरकार अब बस्तर को केवल संघर्ष वाले क्षेत्र के रूप में नहीं, बल्कि पर्यटन, निवेश और विकास के नए केंद्र के रूप में स्थापित करना चाहती है। माना जा रहा है कि बैठक के बाद गृह मंत्री की प्रेस कॉन्फ्रेंस में बस्तर को लेकर केंद्र सरकार का आगे का विजन भी सामने आ सकता है। गुंडाधुर की धरती को मिलेगा नया स्वरूप बस्तर दौरे के दौरान अमित शाह ने कहा कि पिछले 50 वर्षों में बस्तर को जो नुकसान हुआ, उसकी भरपाई आने वाले कुछ वर्षों में की जाएगी। उन्होंने कहा कि जब तक बस्तर पूरी तरह विकसित नहीं होगा, तब तक सरकार का संकल्प अधूरा रहेगा। उन्होंने अमर शहीद Gunda Dhur को याद करते हुए कहा कि इसी धरती से अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष की शुरुआत हुई थी। शाह ने कहा कि पहले यहां हिंसा, स्कूलों पर हमले और आम लोगों में डर का माहौल था, लेकिन अब सरकार ने कड़े कदम उठाकर हालात बदल दिए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि बस्तर की इस ऐतिहासिक धरती को भविष्य में एक प्रमुख तीर्थस्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। कांग्रेस ने उठाए खर्च पर सवाल इस बैठक को लेकर Deepak Baij ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जब वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा उपलब्ध है, तब इस बैठक को वर्चुअल तरीके से भी आयोजित किया जा सकता था। उन्होंने आरोप लगाया कि अलग-अलग विशेष विमानों से नेताओं के आने-जाने में लाखों रुपए खर्च होंगे और ईंधन की भी खपत बढ़ेगी। उनके अनुसार, यह बैठक ऑनलाइन माध्यम से भी की जा सकती थी।

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गरियाबंद में अतिक्रमण हटाने पहुंची वन टीम पर हमला, डिप्टी डायरेक्टर से धक्का-मुक्की

छत्तीसगढ़ के Gariaband जिले से एक गंभीर घटना सामने आई है, जहां अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के लिए पहुंची वन विभाग की टीम पर स्थानीय लोगों ने हमला कर दिया। जानकारी के अनुसार, उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के कोर जोन स्थित सीतानदी रेंज के जैतपुरी गांव में वन विभाग द्वारा अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई की जा रही थी। इसी कार्रवाई के तहत करीब 166 अतिक्रमणकारियों के खिलाफ केस दर्ज किया गया था। इसी सिलसिले में वन विभाग के उपनिदेशक वरुण जैन अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे थे। कार्रवाई के दौरान स्थिति अचानक तनावपूर्ण हो गई और कुछ अतिक्रमणकारियों ने टीम पर विरोध करते हुए धक्का-मुक्की और हाथापाई शुरू कर दी। घटना के बाद मौके पर पुलिस बल को बुलाया गया और स्थिति को नियंत्रित किया गया। बताया जा रहा है कि पूरी घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें वन अधिकारियों और स्थानीय लोगों के बीच विवाद और धक्का-मुक्की दिखाई दे रही है। यह मामला उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व क्षेत्र के भीतर अवैध अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई से जुड़ा हुआ है।

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रायपुर में डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन बंद, भुगतान विवाद के बीच रामकी कंपनी ने रोका काम

छत्तीसगढ़ की राजधानी Raipur में सफाई व्यवस्था प्रभावित हो गई है। शहर के कई इलाकों में डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन बंद होने से लोग परेशान नजर आए। सुबह से कई मोहल्लों में लोग घरों के बाहर कचरे के डस्टबिन लेकर गाड़ियों का इंतजार करते रहे, लेकिन कचरा उठाने वाली गाड़ियां नहीं पहुंचीं। जानकारी के मुताबिक, शहर की सफाई व्यवस्था संभाल रही DSW Ramky ने काम अस्थायी रूप से रोक दिया है। कंपनी का आरोप है कि Raipur Municipal Corporation की ओर से मार्च 2025 से अब तक करीब 78 करोड़ रुपए का भुगतान नहीं किया गया है। कंपनी का कहना है कि लगातार बढ़ते खर्च और अधूरे भुगतान के कारण संचालन करना मुश्किल हो गया है। इधर, कंपनी के ड्राइवर भी वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर हड़ताल पर चले गए हैं। कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से वेतन वृद्धि की मांग की जा रही थी, लेकिन इस पर कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया। इसी वजह से काम बंद करने का निर्णय लिया गया। रायपुर और नवा रायपुर क्षेत्र से हर दिन लगभग 750 टन कचरा निकलता है, जिसे संकरी स्थित प्रोसेसिंग प्लांट तक पहुंचाया जाता है। इस पूरी व्यवस्था में सैकड़ों वाहन और बड़ी संख्या में कर्मचारी लगे हुए हैं। कंपनी के अनुसार फिलहाल 269 वाहन और करीब 800 कर्मचारी इस काम में जुड़े हैं। सफाई व्यवस्था बाधित होने से नगर निगम के सामने नई चुनौती खड़ी हो सकती है। यदि स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो शहर में कचरे का ढेर लगने का खतरा बढ़ सकता है। साथ ही पुराने डंपिंग यार्ड के लगभग भर जाने से कचरा निपटान की समस्या और गंभीर हो सकती है। बताया जा रहा है कि रामकी कंपनी वर्ष 2018 से PPP मॉडल के तहत शहर की सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट व्यवस्था संभाल रही है। नगर निगम और कंपनी के बीच 15 वर्षों का अनुबंध है। हालांकि फिलहाल भुगतान और संचालन को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद की स्थिति बनी हुई है। इस मामले में Meenal Choubey ने कहा है कि कंपनी अधिकारियों के साथ लगातार बातचीत की जा रही है और जल्द ही समस्या का समाधान निकाल लिया जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन सेवा जल्द दोबारा शुरू कर दी जाएगी।

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रायपुर में पेट्रोल 103.58 रुपए लीटर पहुंचा, पेट्रोल पंपों पर लगी लंबी कतारें; प्रशासन बोला- घबराहट में लोग करवा रहे फुल टैंक

छत्तीसगढ़ की राजधानी Raipur में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद कई पेट्रोल पंपों पर भारी भीड़ देखने को मिली। शहर में पेट्रोल की कीमत बढ़कर 103.58 रुपए प्रति लीटर और डीजल 96.57 रुपए प्रति लीटर हो गया है। कीमत बढ़ने के बाद सुबह से ही कई फ्यूल स्टेशनों पर वाहनों की लंबी लाइनें लगी रहीं। प्रशासन के मुताबिक, ईंधन की कमी नहीं है, लेकिन अफवाहों और कीमतों में बढ़ोतरी की खबर के कारण लोग सामान्य से ज्यादा पेट्रोल-डीजल भरवा रहे हैं। कई वाहन चालक टैंक फुल कराने के लिए पेट्रोल पंपों पर पहुंच रहे हैं, जिससे अचानक दबाव बढ़ गया है। छत्तीसगढ़ के अन्य शहरों में भी पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़े हैं। बिलासपुर में पेट्रोल 104.26 रुपए और डीजल 97.25 रुपए प्रति लीटर बिक रहा है। अंबिकापुर में पेट्रोल 104.60 रुपए और डीजल 97.66 रुपए, रायगढ़ में पेट्रोल 104.53 रुपए और डीजल 97.52 रुपए, जबकि जगदलपुर में पेट्रोल 105.22 रुपए और डीजल 98.22 रुपए प्रति लीटर पहुंच गया है। स्थिति को देखते हुए Raipur District Administration ने पेट्रोल पंप संचालकों और तेल कंपनियों के अधिकारियों के साथ बैठक की। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि शहर में पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। सप्लाई व्यवस्था को बनाए रखने के लिए कलेक्टर ने डिपो से 24 घंटे ईंधन सप्लाई जारी रखने के निर्देश दिए हैं। पहले टैंकरों की एंट्री तय समय तक सीमित थी, लेकिन अब लगातार सप्लाई सुनिश्चित करने का फैसला लिया गया है ताकि पेट्रोल पंपों पर भीड़ कम हो सके। हालांकि, शहर के कुछ लोगों का कहना है कि कुछ पेट्रोल पंपों पर ईंधन उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें लंबी लाइन में लगना पड़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि डीजल की कीमत बढ़ने का असर आने वाले दिनों में रोजमर्रा की चीजों पर भी पड़ सकता है। ट्रांसपोर्ट महंगा होने से सब्जियां, फल, राशन और अन्य सामानों की कीमतें बढ़ सकती हैं। इसके अलावा खेती, बस, ऑटो और स्कूल वाहनों के किराए पर भी असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह मानी जा रही है। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ने के बाद क्रूड ऑयल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं, जिसके कारण तेल कंपनियों पर दबाव बढ़ा और कीमतों में इजाफा किया गया।

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रायपुर नगर निगम विशेष सामान्य सभा में हंगामा, काले कपड़ों में पहुंचे महापौर और पार्षद, कांग्रेस पर लगाए तीखे आरोप

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर नगर निगम की विशेष सामान्य सभा में बुधवार को राजनीतिक माहौल पूरी तरह गरमा गया। बैठक के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के पार्षदों के बीच जमकर बहस और नोकझोंक देखने को मिली। बैठक की शुरुआत से पहले ही विवाद की स्थिति बन गई, जब विपक्षी पार्षदों ने शहर में बढ़ते जल संकट के मुद्दे पर चर्चा की मांग की। हालांकि सभापति ने स्पष्ट किया कि इस विषय पर दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन पाने के कारण इसे एजेंडे में शामिल नहीं किया जाएगा। यह विशेष सभा महिला सशक्तिकरण से जुड़े जनजागरूकता अभियान के तहत बुलाई गई थी, लेकिन इससे पहले ही राजनीतिक माहौल गर्म हो गया। भाजपा पार्षदों ने सभा से पहले कांग्रेस के खिलाफ नारेबाजी करते हुए “कांग्रेस शर्म करो” के नारे लगाए और कांग्रेस पर महिला विरोधी होने का आरोप लगाया। विरोध स्वरूप महापौर और भाजपा पार्षद काले कपड़े पहनकर बैठक में पहुंचे, जिससे माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया। सभा में दोनों पक्षों के सभी पार्षद उपस्थित रहे और हंगामे के बीच बैठक की कार्यवाही जारी रही। स्थिति को देखते हुए नगर निगम परिसर में अतिरिक्त पुलिस बल भी तैनात किया गया। पिछली बैठक का संदर्भ:इससे पहले 9 अप्रैल को हुई सामान्य सभा में 14 एजेंडों पर चर्चा की गई थी। उस बैठक में सिटी कोतवाली चौक का नाम बदलकर “जैन स्तंभ” रखने के प्रस्ताव पर तीखी बहस हुई थी, जिसे बाद में विपक्ष के विरोध के चलते निरस्त कर दिया गया था। अन्य प्रस्ताव बहुमत से पारित हुए थे, जबकि दुकानों के व्यवस्थापन से जुड़े मुद्दे पर शासन से मार्गदर्शन लेने का निर्णय लिया गया था।

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छत्तीसगढ़ में रविवार को ही क्यों बढ़ते हैं हिंदू-ईसाई टकराव?

पिछले 5 साल में 200 से ज्यादा विवाद, 19 जिले प्रभावित, बस्तर बना हॉटस्पॉट छत्तीसगढ़ में हिंदू और ईसाई समुदाय के बीच टकराव की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। इन घटनाओं में एक समान पैटर्न देखने को मिलता है—धर्मांतरण, मतांतरण और प्रार्थना सभाएं। खास बात यह है कि अधिकांश विवाद रविवार के दिन ही होते हैं। इसी आशंका को देखते हुए पुलिस और प्रशासन शुक्रवार व शनिवार से ही हाई अलर्ट पर रहता है। भास्कर डिजिटल की पड़ताल में सामने आया कि बीते 5 वर्षों में प्रदेश में हिंदू-ईसाई समुदायों के बीच 200 से अधिक विवाद दर्ज किए गए हैं। इन मामलों में 60 से ज्यादा FIR हुई हैं। सबसे ज्यादा टकराव बस्तर संभाग सहित 19 जिलों में देखने को मिला है। इन घटनाओं में कांकेर में शव दफनाने को लेकर हिंसा, दुर्ग रेलवे स्टेशन से मिशनरी सिस्टर्स की गिरफ्तारी, रायपुर में धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोप, बिलासपुर में प्रार्थना सभा की आड़ में धर्मांतरण जैसे कई मामले शामिल हैं। किन जिलों में सबसे ज्यादा विवाद छत्तीसगढ़ में ईसाई समाज की गतिविधियां 19 जिलों में अधिक सक्रिय बताई जाती हैं। इन इलाकों में चर्च और प्रार्थना सभाएं संचालित होती हैं, जिनमें कुछ पंजीकृत हैं तो कई घरों से संचालित हो रही हैं। इसी को लेकर धर्मांतरण और मतांतरण के आरोपों पर विवाद की स्थिति बनती है। सबसे ज्यादा तनाव बस्तर संभाग में देखने को मिला है। बस्तर, कोंडागांव, नारायणपुर, कांकेर और सुकमा जिले धर्मांतरण और अंतिम संस्कार (दफनाने) से जुड़े विवादों के प्रमुख केंद्र रहे हैं। इसके अलावा कोरबा, बलरामपुर, महासमुंद, दुर्ग और बिलासपुर में भी बार-बार टकराव हुआ है। वहीं सरगुजा और सूरजपुर में अपेक्षाकृत कम विवाद सामने आए हैं। रविवार को ही क्यों होती हैं घटनाएं दरअसल, रविवार को ईसाई समुदाय की प्रार्थना सभाएं आयोजित होती हैं। इनमें यीशु मसीह की आराधना, धार्मिक उपदेश और कथाएं सुनाई जाती हैं। इन सभाओं में कई बार हिंदू समुदाय के लोगों को भी आमंत्रित किया जाता है। अनेक मामलों में जब हिंदू संगठनों को इन सभाओं में धर्मांतरण की आशंका होती है, तो वे विरोध दर्ज कराने पहुंचते हैं। इसी दौरान दोनों पक्ष आमने-सामने आ जाते हैं और तनाव की स्थिति बन जाती है। कई बार पुलिस को अतिरिक्त बल तैनात कर हालात संभालने पड़ते हैं। वरिष्ठ पत्रकार की राय वरिष्ठ पत्रकार सुनील कुमार का कहना है कि हर रविवार को स्वतः दो समुदायों के बीच टकराव होना कहना सही नहीं है। उनके अनुसार, कुछ आक्रामक समूहों द्वारा दूसरे समुदायों की प्रार्थना सभाओं पर हमले की घटनाएं सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को स्वयं कानून के तहत कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि हालात न बिगड़ें। पिछले वर्षों की प्रमुख घटनाएं पिछले कुछ वर्षों में दुर्ग, रायपुर, बिलासपुर, कोरबा, बालोद और कांकेर जैसे जिलों में धर्मांतरण, प्रार्थना सभा, अवैध चर्च और अंतिम संस्कार को लेकर कई बड़े विवाद हुए। कई मामलों में पुलिस ने गिरफ्तारी की, FIR दर्ज हुई और प्रशासनिक कार्रवाई भी की गई। धर्मांतरण और मतांतरण क्या है धर्मांतरण का अर्थ है एक धर्म छोड़कर किसी अन्य धर्म को अपनाना। छत्तीसगढ़ में इसके लिए जिला प्रशासन को पूर्व सूचना देना अनिवार्य है।मतांतरण में व्यक्ति अपने विश्वास और आस्था में बदलाव करता है, लेकिन इसका सरकारी रिकॉर्ड आवश्यक नहीं होता। छत्तीसगढ़ का धार्मिक स्वतंत्रता कानून प्रदेश में छत्तीसगढ़ धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम, 1968 लागू है। इसके तहत जबरन, प्रलोभन या धोखे से धर्मांतरण कराना अपराध है। राज्य सरकार इसे और सख्त करने के लिए नया मसौदा तैयार कर रही है, जिसमें धर्म परिवर्तन से पहले और बाद में घोषणा और सत्यापन की प्रक्रिया को अनिवार्य किया जाएगा। राजनीतिक दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र राज्य की 90 विधानसभा सीटों में से 19 सीटों पर ईसाई मतदाताओं की भूमिका अहम मानी जाती है। जशपुर जैसे जिलों में चुनावी परिणामों पर ईसाई मतदाताओं का प्रभाव निर्णायक माना जाता है।

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छत्तीसगढ़ में ब्यूटी पार्लर में तहसीलदारों पर हमला, सिर में लगी गंभीर चोटें

कोरबा जिले के कुसमुंडा थाना क्षेत्र में मंगलवार रात दो तहसीलदारों को कुछ युवकों ने बुरी तरह पीट दिया। जानकारी के अनुसार हरदीबाजार तहसीलदार अभिजीत राजभानू और दीपका तहसीलदार अमित केरकेटा ब्यूटी पार्लर में मसाज कराने गए थे। तभी उनके ड्राइवर और कुछ नशे में युवकों के बीच पार्किंग को लेकर विवाद हो गया। विवाद बढ़ने के बाद तहसीलदारों ने उन्हें समझाने की कोशिश की, लेकिन युवकों ने आक्रामक होकर दोनों को पिट दिया। इस हमले में तहसीलदारों के सिर में गंभीर चोटें आईं और उनकी शर्ट खून से लाल हो गई। घायलों का इलाज निजी अस्पताल में चल रहा है। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर 4 युवकों को हिरासत में ले लिया है। हिरासत में लिए गए आरोपियों में पुनेश, बबन, डिंपल और हितेश सारथी शामिल हैं। मुख्य आरोपी हितेश सारथी पहले से ही आदतन अपराधियों की सूची में है और उसके खिलाफ कई मामले दर्ज हैं। कुसमुंडा थाना प्रभारी युवराज सिंह तिवारी ने बताया कि बाकि आरोपियों की तलाश जारी है और जल्द उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा। पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है और FIR दर्ज कर दी गई है।

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