Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ में रविवार को ही क्यों बढ़ते हैं हिंदू-ईसाई टकराव?

पिछले 5 साल में 200 से ज्यादा विवाद, 19 जिले प्रभावित, बस्तर बना हॉटस्पॉट छत्तीसगढ़ में हिंदू और ईसाई समुदाय के बीच टकराव की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। इन घटनाओं में एक समान पैटर्न देखने को मिलता है—धर्मांतरण, मतांतरण और प्रार्थना सभाएं। खास बात यह है कि अधिकांश विवाद रविवार के दिन ही होते हैं। इसी आशंका को देखते हुए पुलिस और प्रशासन शुक्रवार व शनिवार से ही हाई अलर्ट पर रहता है। भास्कर डिजिटल की पड़ताल में सामने आया कि बीते 5 वर्षों में प्रदेश में हिंदू-ईसाई समुदायों के बीच 200 से अधिक विवाद दर्ज किए गए हैं। इन मामलों में 60 से ज्यादा FIR हुई हैं। सबसे ज्यादा टकराव बस्तर संभाग सहित 19 जिलों में देखने को मिला है। इन घटनाओं में कांकेर में शव दफनाने को लेकर हिंसा, दुर्ग रेलवे स्टेशन से मिशनरी सिस्टर्स की गिरफ्तारी, रायपुर में धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोप, बिलासपुर में प्रार्थना सभा की आड़ में धर्मांतरण जैसे कई मामले शामिल हैं। किन जिलों में सबसे ज्यादा विवाद छत्तीसगढ़ में ईसाई समाज की गतिविधियां 19 जिलों में अधिक सक्रिय बताई जाती हैं। इन इलाकों में चर्च और प्रार्थना सभाएं संचालित होती हैं, जिनमें कुछ पंजीकृत हैं तो कई घरों से संचालित हो रही हैं। इसी को लेकर धर्मांतरण और मतांतरण के आरोपों पर विवाद की स्थिति बनती है। सबसे ज्यादा तनाव बस्तर संभाग में देखने को मिला है। बस्तर, कोंडागांव, नारायणपुर, कांकेर और सुकमा जिले धर्मांतरण और अंतिम संस्कार (दफनाने) से जुड़े विवादों के प्रमुख केंद्र रहे हैं। इसके अलावा कोरबा, बलरामपुर, महासमुंद, दुर्ग और बिलासपुर में भी बार-बार टकराव हुआ है। वहीं सरगुजा और सूरजपुर में अपेक्षाकृत कम विवाद सामने आए हैं। रविवार को ही क्यों होती हैं घटनाएं दरअसल, रविवार को ईसाई समुदाय की प्रार्थना सभाएं आयोजित होती हैं। इनमें यीशु मसीह की आराधना, धार्मिक उपदेश और कथाएं सुनाई जाती हैं। इन सभाओं में कई बार हिंदू समुदाय के लोगों को भी आमंत्रित किया जाता है। अनेक मामलों में जब हिंदू संगठनों को इन सभाओं में धर्मांतरण की आशंका होती है, तो वे विरोध दर्ज कराने पहुंचते हैं। इसी दौरान दोनों पक्ष आमने-सामने आ जाते हैं और तनाव की स्थिति बन जाती है। कई बार पुलिस को अतिरिक्त बल तैनात कर हालात संभालने पड़ते हैं। वरिष्ठ पत्रकार की राय वरिष्ठ पत्रकार सुनील कुमार का कहना है कि हर रविवार को स्वतः दो समुदायों के बीच टकराव होना कहना सही नहीं है। उनके अनुसार, कुछ आक्रामक समूहों द्वारा दूसरे समुदायों की प्रार्थना सभाओं पर हमले की घटनाएं सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को स्वयं कानून के तहत कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि हालात न बिगड़ें। पिछले वर्षों की प्रमुख घटनाएं पिछले कुछ वर्षों में दुर्ग, रायपुर, बिलासपुर, कोरबा, बालोद और कांकेर जैसे जिलों में धर्मांतरण, प्रार्थना सभा, अवैध चर्च और अंतिम संस्कार को लेकर कई बड़े विवाद हुए। कई मामलों में पुलिस ने गिरफ्तारी की, FIR दर्ज हुई और प्रशासनिक कार्रवाई भी की गई। धर्मांतरण और मतांतरण क्या है धर्मांतरण का अर्थ है एक धर्म छोड़कर किसी अन्य धर्म को अपनाना। छत्तीसगढ़ में इसके लिए जिला प्रशासन को पूर्व सूचना देना अनिवार्य है।मतांतरण में व्यक्ति अपने विश्वास और आस्था में बदलाव करता है, लेकिन इसका सरकारी रिकॉर्ड आवश्यक नहीं होता। छत्तीसगढ़ का धार्मिक स्वतंत्रता कानून प्रदेश में छत्तीसगढ़ धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम, 1968 लागू है। इसके तहत जबरन, प्रलोभन या धोखे से धर्मांतरण कराना अपराध है। राज्य सरकार इसे और सख्त करने के लिए नया मसौदा तैयार कर रही है, जिसमें धर्म परिवर्तन से पहले और बाद में घोषणा और सत्यापन की प्रक्रिया को अनिवार्य किया जाएगा। राजनीतिक दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र राज्य की 90 विधानसभा सीटों में से 19 सीटों पर ईसाई मतदाताओं की भूमिका अहम मानी जाती है। जशपुर जैसे जिलों में चुनावी परिणामों पर ईसाई मतदाताओं का प्रभाव निर्णायक माना जाता है।

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छत्तीसगढ़ में ब्यूटी पार्लर में तहसीलदारों पर हमला, सिर में लगी गंभीर चोटें

कोरबा जिले के कुसमुंडा थाना क्षेत्र में मंगलवार रात दो तहसीलदारों को कुछ युवकों ने बुरी तरह पीट दिया। जानकारी के अनुसार हरदीबाजार तहसीलदार अभिजीत राजभानू और दीपका तहसीलदार अमित केरकेटा ब्यूटी पार्लर में मसाज कराने गए थे। तभी उनके ड्राइवर और कुछ नशे में युवकों के बीच पार्किंग को लेकर विवाद हो गया। विवाद बढ़ने के बाद तहसीलदारों ने उन्हें समझाने की कोशिश की, लेकिन युवकों ने आक्रामक होकर दोनों को पिट दिया। इस हमले में तहसीलदारों के सिर में गंभीर चोटें आईं और उनकी शर्ट खून से लाल हो गई। घायलों का इलाज निजी अस्पताल में चल रहा है। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर 4 युवकों को हिरासत में ले लिया है। हिरासत में लिए गए आरोपियों में पुनेश, बबन, डिंपल और हितेश सारथी शामिल हैं। मुख्य आरोपी हितेश सारथी पहले से ही आदतन अपराधियों की सूची में है और उसके खिलाफ कई मामले दर्ज हैं। कुसमुंडा थाना प्रभारी युवराज सिंह तिवारी ने बताया कि बाकि आरोपियों की तलाश जारी है और जल्द उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा। पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है और FIR दर्ज कर दी गई है।

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हाईकोर्ट वकील की संदिग्ध मौत पर उठे सवाल: बिलासपुर में अधिवक्ताओं ने कलेक्टर-एसएसपी से की मुलाकात, स्पेशल जांच टीम की मांग

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में हाईकोर्ट के अधिवक्ता राहुल अग्रवाल की संदिग्ध मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस इसे आत्महत्या या हादसा बता रही है, लेकिन परिजन और वकील साथी इसे संदिग्ध मृत्यु मान रहे हैं। सोमवार को अधिवक्ताओं ने कलेक्टर और एसएसपी से मिलकर विशेष जांच टीम (Special Investigation Team) बनाने की मांग की। वकीलों ने कहा कि राहुल अग्रवाल एक होनहार अधिवक्ता थे। घटना की रात करीब 1 बजे वे अपने सहयोगी वकील के घर से निकले थे, लेकिन घर नहीं पहुंचे। कुछ घंटे बाद उनकी बाइक पुराने अरपा पुल के पास खड़ी मिली, जबकि राहुल लापता थे। 22 घंटे बाद मिला शव, शरीर पर चोट के निशान करीब 22 घंटे बाद राहुल का शव अरपा नदी में मिला। शरीर पर कई चोटों के निशान पाए गए, जिससे यह मामला और अधिक संदिग्ध हो गया। अधिवक्ताओं का कहना है कि यह सामान्य दुर्घटना नहीं हो सकती — संभव है कि राहुल की मौत किसी अप्राकृतिक या आपराधिक कारण से हुई हो। निष्पक्ष जांच और साक्ष्यों की पड़ताल की मांग अधिवक्ताओं ने कलेक्टर संजय अग्रवाल और एसएसपी रजनेश सिंह से मुलाकात के दौरान कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए स्पेशल टीम गठित की जाए। उन्होंने मांग की कि सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल लोकेशन, कॉल डिटेल्स और घटनास्थल से मिले सभी साक्ष्यों की गहराई से जांच हो। वकीलों ने यह भी कहा कि जांच में लापरवाही से न केवल मृतक के परिवार को न्याय नहीं मिलेगा, बल्कि कानून व्यवस्था पर भी सवाल उठेंगे। जानिए पूरा घटनाक्रम भाटापारा निवासी राहुल अग्रवाल (30) पिता सुरेश अग्रवाल, पिछले 7-8 साल से मंगला के ग्रीन गार्डन कॉलोनी में रह रहे थे। गुरुवार को वे रोज की तरह हाईकोर्ट में पेशी के बाद अपने दोस्तों मुकेश राठिया और अभिषेक आचार्य से मिले। तीनों ने पहले ट्रांसपोर्ट नगर में पार्टी की, फिर मुकेश के मोपका स्थित घर पहुंचे। देर रात तक सब साथ थे, लेकिन अगले दिन सुबह तक राहुल अपने घर नहीं लौटे। अगले दिन उनकी बाइक पुल के पास मिली और 22 घंटे बाद उनका शव नदी से बरामद किया गया। अब अधिवक्ताओं और परिवार का कहना है कि घटना के पीछे साजिश की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।

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रायपुर में ड्रिंक एंड ड्राइव का मामला: ब्रीथ एनालाइजर में 61 एमजी शराब, कोर्ट ने लगाया ₹60 हजार का जुर्माना

रायपुर। राजधानी रायपुर में देर रात नशे में डीजे वाहन चलाना एक चालक को महंगा पड़ गया। पुलिस की कार्रवाई में चालक की सांस की जांच के दौरान 61 एमजी शराब पाए जाने पर अदालत ने चालक और वाहन स्वामी दोनों पर कुल ₹60 हजार का जुर्माना लगाया है। घटना लाखे नगर चौक की है, जहां पुलिस की पेट्रोलिंग टीम ने एक माजदा डीजे वाहन को लहराते हुए चलते देखा। रोकने पर चालक की हालत संदिग्ध लगी, जिसके बाद ब्रीथ एनालाइजर टेस्ट किया गया। रिपोर्ट में शराब की मात्रा कानूनी सीमा से कहीं अधिक पाई गई। वाहन में अवैध मॉडिफिकेशन भी पाया गया पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि वाहन को बिना अनुमति मॉडिफाई किया गया था। डीजे सिस्टम को गाड़ी की बॉडी के बाहर वेल्डिंग से फिट किया गया था। इतना ही नहीं, वाहन का फिटनेस सर्टिफिकेट और प्रदूषण प्रमाणपत्र भी समाप्त हो चुका था। पुलिस ने चालक गोपीराम मनहरे और वाहन स्वामी बीना कौशिक के खिलाफ मोटरयान अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर कोर्ट में पेश किया। सुनवाई के दौरान अदालत ने चालक पर ₹55 हजार और वाहन स्वामी पर ₹5 हजार का जुर्माना लगाया। पुलिस की चेतावनी रायपुर पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे नशे में वाहन न चलाएं। पुलिस ने कहा कि शराब के नशे में गाड़ी चलाना सड़क हादसों का बड़ा कारण है। साथ ही, बिना अनुमति वाहन में तकनीकी बदलाव या असुरक्षित डीजे फिटिंग करवाना भी कानूनी अपराध है।

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रायपुर में आधी रात धरना: अनुकंपा नियुक्ति की मांग को लेकर शिक्षाकर्मियों के परिजन बैठे कलेक्ट्रेट के बाहर

रायपुर। राजधानी रायपुर में शनिवार देर रात अनुकंपा नियुक्ति संघ की महिलाएं कलेक्ट्रेट परिसर के बाहर धरने पर बैठ गईं। यह प्रदर्शन रात करीब 11 बजे से शुरू हुआ और देर रात तक चलता रहा। धरने में शामिल महिलाएं उन दिवंगत शिक्षाकर्मियों के परिवार से हैं, जिनकी मृत्यु के बाद भी उनके परिजनों को अब तक अनुकंपा नियुक्ति नहीं दी गई है। धरने पर बैठी महिलाओं का कहना है कि चुनाव के दौरान भाजपा ने वादा किया था कि सत्ता में आने के बाद सभी पात्र परिजनों को जल्द अनुकंपा नियुक्ति दी जाएगी। लेकिन सरकार बने महीनों बीत जाने के बावजूद अब तक प्रक्रिया शुरू नहीं की गई है। बताया जा रहा है कि पूरे प्रदेश में लगभग 1200 दिवंगत शिक्षाकर्मियों के परिजन इस नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं। मुख्यमंत्री से हुई थी मुलाकात अक्टूबर में अनुकंपा नियुक्ति संघ का प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से मिला था। उस दौरान मुख्यमंत्री ने जल्द प्रक्रिया शुरू करने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। धरने पर बैठी महिलाओं ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द निर्णय नहीं लिया गया, तो प्रदेशभर में आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

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SIR को लेकर BJP की रणनीतिक बैठक आज: शिव प्रकाश रायपुर में लेंगे बैठक, CM, मंत्री, सांसद और विधायक रहेंगे मौजूद

रायपुर। छत्तीसगढ़ में मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया की शुरुआत के अगले ही दिन बीजेपी ने इस पर रणनीति बनाने के लिए अहम बैठक बुलाई है। बैठक बुधवार को रायपुर स्थित कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में आयोजित होगी। इसमें पार्टी के राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री और प्रदेश प्रभारी शिव प्रकाश शामिल होंगे। बैठक में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, राज्य सरकार के सभी मंत्री, सांसद, विधायक, जिलाध्यक्ष और वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहेंगे। पार्टी का मुख्य उद्देश्य SIR प्रक्रिया की जानकारी कार्यकर्ताओं तक पहुंचाना और मतदाता सत्यापन अभियान में जनता की सहायता के लिए कार्यकर्ताओं को तैयार करना है। कांग्रेस भ्रम फैला रही, BJP करेगी जवाबी जनजागरण भाजपा के प्रदेश महामंत्री नवीन मार्कंडेय ने बताया कि कांग्रेस, SIR प्रक्रिया को लेकर जनता में गलतफहमियां फैला रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा जनता को सही जानकारी देगी और कांग्रेस के दुष्प्रचार का जवाब देगी।मार्कंडेय के अनुसार, “देश के 12 राज्यों में चुनाव आयोग ने SIR प्रक्रिया लागू की है, और भाजपा इस पूरे अभियान में जनता की मदद के लिए सक्रिय भूमिका निभाएगी।” शिव प्रकाश देंगे दिशा-निर्देश पार्टी सूत्रों के मुताबिक, बैठक में शिव प्रकाश विस्तार से बताएंगे कि SIR सर्वे के दौरान कार्यकर्ताओं को मतदाताओं के नाम जोड़ने, त्रुटियां सुधारने और डुप्लीकेट नाम हटाने में कैसे सहयोग करना है।इसके अलावा, पार्टी जल्द ही एक राज्यव्यापी जनजागरण अभियान शुरू करेगी ताकि हर पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची में जोड़ा जा सके। नेताओं को सौंपी जाएगी जिम्मेदारी बीजेपी SIR के प्रति जन-जागरूकता फैलाने की जिम्मेदारी अपने मंत्री, सांसद और विधायकों को देगी। पार्टी नेताओं को जनता के बीच जाकर SIR प्रक्रिया के फायदे और उद्देश्य समझाने का निर्देश दिया जाएगा।शिव प्रकाश बुधवार सुबह दिल्ली से रायपुर पहुंचेंगे और दोपहर में प्रदेश पदाधिकारियों के साथ बैठक कर आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा तय करेंगे।

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उपभोक्ता आयोग के लेखा अधिकारी पर लाखों के गबन का आरोप: 9 साल बाद खुलासा, अधीक्षक की शिकायत पर FIR दर्ज

रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता आयोग कार्यालय में पदस्थ एक पूर्व लेखा अधिकारी पर सरकारी धन के गबन का मामला सामने आया है। आरोपी अधिकारी ने वर्ष 2017 में विभागीय राशि में हेराफेरी करते हुए लगभग 3 लाख 98 हजार 553 रुपए का गबन किया था। करीब 9 साल बाद इस वित्तीय अनियमितता का खुलासा हुआ, जिसके बाद अब देवेंद्र नगर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज किया है। 2017 में किया गया था गबन पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, आरोपी का नाम विनोद साहू है, जो उस समय राज्य उपभोक्ता आयोग में लेखा प्रभारी के पद पर पदस्थ था।जांच में यह सामने आया कि उसने 7 सितंबर 2017 को विभागीय खातों से रकम निकालकर अपने निजी बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी थी। इस लेन-देन को उसने विभागीय भुगतान के रूप में दर्ज किया था ताकि गड़बड़ी का पता न चले। अधीक्षक की शिकायत पर मामला दर्ज उपभोक्ता आयोग के अधीक्षक जे.आर. निराला ने इस पूरे मामले की शिकायत देवेंद्र नगर थाने में दर्ज कराई। अधीक्षक ने बताया कि जब विभागीय खातों की जांच कराई गई, तब ट्रांजेक्शन में गड़बड़ी पाई गई। इसके बाद एक आंतरिक जांच समिति का गठन किया गया, जिसने सभी तथ्यों की पुष्टि की। जांच समिति ने पाई गड़बड़ी सही समिति की रिपोर्ट में पाया गया कि आरोपी ने कई किश्तों में सरकारी राशि को अपने व्यक्तिगत खाते में ट्रांसफर किया है। जांच के निष्कर्षों के आधार पर अधीक्षक ने आरोपी के खिलाफ अमानत में ख्यानत और धोखाधड़ी (धारा 406, 420 IPC) के तहत कार्रवाई की मांग की। पुलिस ने अधीक्षक की शिकायत पर FIR दर्ज कर ली है और आगे की जांच शुरू कर दी गई है। फिलहाल आरोपी की भूमिका और अन्य संबंधित वित्तीय लेन-देन की जांच की जा रही है।

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छत्तीसगढ़ में आज से वोटर लिस्ट वेरिफिकेशन की शुरुआत: 27 हजार BLO घर-घर करेंगे सर्वे, 95% मतदाताओं को नहीं दिखाने पड़ेंगे दस्तावेज

त्तीसगढ़ में मंगलवार से वोटर लिस्ट सत्यापन अभियान (Special Intensive Revision – SIR) की शुरुआत हो गई है। बिहार मॉडल पर चलने वाली इस प्रक्रिया के तहत प्रदेश में मतदाता सूची को अपडेट किया जाएगा। इसमें नए वोटरों के नाम जोड़े जाएंगे और गलत या निष्क्रिय नाम हटाए जाएंगे। राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (CEO) यशवंत कुमार ने बताया कि सत्यापन अभियान 4 नवंबर से 4 दिसंबर 2025 तक चलेगा। इस दौरान प्रदेश के 27,199 बूथ स्तर अधिकारी (BLO) घर-घर जाकर मतदाताओं की जानकारी की जांच करेंगे। सिर्फ 5% लोगों को ही दिखाने होंगे दस्तावेज सीईओ के अनुसार, लगभग 94-95% मतदाताओं का डेटा पहले से मौजूद है, इसलिए केवल 5-6% लोगों को ही पहचान संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत करने की आवश्यकता होगी। जिन मतदाताओं का नाम 2003 के SIR में था, उन्हें दोबारा दस्तावेज देने की जरूरत नहीं है। अगर किसी मतदाता को सत्यापन में कोई दिक्कत आती है तो वह हेल्पलाइन नंबर 1950 पर कॉल कर सहायता प्राप्त कर सकता है। BLO तीन बार जाएंगे घर हर BLO अपने क्षेत्र में प्रत्येक परिवार से संपर्क करेगा और आवश्यकता होने पर तीन बार तक घर जाएगा। वे प्रत्येक परिवार से गणना प्रपत्र फॉर्म भरवाएंगे, जिसमें मतदाता की व्यक्तिगत जानकारी और पात्रता की पुष्टि होगी। 9 दिसंबर को मसौदा सूची जारी होगी सत्यापन कार्य पूरा होने के बाद 9 दिसंबर 2025 को मसौदा मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी।इसके बाद 8 जनवरी 2026 तक लोग अपने नाम में सुधार या किसी त्रुटि पर आपत्ति दर्ज करा सकेंगे।अंतिम मतदाता सूची 7 फरवरी 2026 को जारी होगी, जो आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों के लिए आधार बनेगी। 71% वोटरों का मिलान पूरा अब तक राज्य के 71% मतदाताओं का डेटा सत्यापित किया जा चुका है। सीईओ ने बताया कि एन्यूमरेशन फेज पूरा होते-होते यह आंकड़ा 94 से 95% तक पहुंचने की उम्मीद है।उन्होंने यह भी बताया कि 2003 के बाद कई मतदाता अपने निवास स्थान बदल चुके हैं, विशेषकर विवाहित महिलाएं, जिनका अब नए केंद्रों से डेटा मिलान किया जा रहा है। मतदाताओं की संख्या 2.11 करोड़ 1 जनवरी 2025 तक छत्तीसगढ़ में कुल 2 करोड़ 11 लाख 5 हजार 391 मतदाता हैं। इनमें राज्य में लिंगानुपात 1024 है, जो राष्ट्रीय औसत से अधिक है। SIR सत्यापन के लिए मान्य दस्तावेज मतदाता सत्यापन के दौरान नीचे दिए गए दस्तावेजों में से कोई भी मान्य होगा – राजनीतिक दलों से सहयोग की अपील सीईओ यशवंत कुमार ने राजनीतिक दलों से अपील की है कि वे अपने बूथ स्तरीय एजेंट (BLA) के माध्यम से आयोग की टीम को सहयोग करें ताकि पात्र नागरिकों के नाम जोड़े जा सकें और मृत या स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाए जा सकें।

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छत्तीसगढ़ में महिला कैदियों के साथ जेल में रह रहे 60 बच्चे, प्रभावित हो रहा उनका बचपन

छत्तीसगढ़ की जेलों में 60 महिला कैदी अपने बच्चों के साथ बंद हैं। नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो (NCRB) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, राज्य इस मामले में देश में छठे स्थान पर है। नियम के अनुसार, जेल में छह साल से छोटे बच्चों को अपनी मां के साथ रखा जाता है, जिससे ये बच्चे भी जेल की परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि देश में सबसे ज्यादा उत्तर प्रदेश में 311, उसके बाद पश्चिम बंगाल में 170, बिहार में 167, मध्य प्रदेश में 126 और झारखंड में 84 महिला कैदी अपने बच्चों के साथ बंद हैं। छत्तीसगढ़ में 60 महिला कैदी बच्चों के साथ जेल में हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, जेल का वातावरण बच्चों के मानसिक, शारीरिक और सामाजिक विकास के लिए चुनौतीपूर्ण है। बाल अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि बच्चों के लिए सुरक्षित पालन-पोषण, शिक्षा और खेल की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। हालांकि कुछ जेलों में आंगनबाड़ी और प्राथमिक शिक्षा की सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं, फिर भी यह पर्याप्त नहीं है। NCRB के आंकड़ों के अनुसार, 2023 तक भारत में कुल 1,318 महिला कैदी अपने 1,492 बच्चों के साथ जेल में थीं। इनमें से 1,049 महिलाएं विचाराधीन बंदी थीं, जिनके साथ 1,191 बच्चे जेल में थे, जबकि 249 महिला कैदियों को दोष सिद्ध किया जा चुका था और वे अपने 272 बच्चों के साथ जेल में थीं। बाल अधिकार विशेषज्ञ सुनील श्रीवास्तव का कहना है कि सरकार को महिला कैदियों के बच्चों के लिए वैकल्पिक देखभाल और शिक्षा की ठोस व्यवस्था करनी चाहिए, ताकि उनका बचपन जेल की सलाखों में न गुजरे और वे समाज की मुख्यधारा से कट न जाएं।

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बिलासपुर में महिला का अधजला शव मिला: दोनों पैर साड़ी से बंधे, हत्या के बाद जलाने का शक, पुलिस जांच में जुटी

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में एक महिला का अधजला शव मिला है। यह शव रतनपुर के खूंटाघाट डैम के पास झाड़ियों में पड़ा पाया गया। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार यह घटना लगभग एक हफ्ते पुरानी है। शव के दोनों पैर साड़ी से बंधे हुए मिले हैं, जिससे पुलिस को हत्या के बाद शव जलाने की आशंका जताई जा रही है। फिलहाल महिला की पहचान नहीं हो पाई है। घटना स्थल और सूचना यह मामला रतनपुर थाना क्षेत्र का है। डैम के पास से आने वाली बदबू के कारण स्थानीय ग्रामीणों ने पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने पाया कि महिला का शव झाड़ियों के नीचे पड़ा था और उसके पैरों को साड़ी से बांधकर जलाया गया था। साड़ी पैरों से चिपकी हुई मिली। फोरेंसिक जांच और हत्या की संभावना पुलिस ने हत्या की संभावना को ध्यान में रखते हुए फोरेंसिक टीम को बुलाया। प्रारंभिक जांच में शव के केवल 10 प्रतिशत अंग ही बरामद हुए हैं; बाकी 90 प्रतिशत अंग डिस्पोज़ हो चुके हैं। शव के यह हालात यह संकेत देते हैं कि महिला की पहचान और सबूत मिटाने के लिए शव जलाया गया। स्थानीय हालात और पहचान में दिक्कत खूंटाघाट डैम एक पिकनिक स्पॉट है और आसपास जंगल से घिरा हुआ है। घटना स्थल मुख्य सड़क से दूर होने के कारण किसी भी सुराग का पता लगाना कठिन हो गया। आसपास के लोगों और स्थानीय थानों में गुमशुदगी के रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। पुलिस की कार्रवाई पुलिस ने हत्या की आशंका के आधार पर संदिग्धों और इलाके में आने-जाने वाले लोगों से पूछताछ शुरू कर दी है। मौके पर कोई ऐसा सामान नहीं मिला जिससे महिला या हत्यारों की पहचान की जा सके। शव की स्थिति और चुनौतियां शव के अधिकांश हिस्से कुत्तों द्वारा इधर-उधर बिखरे पाए गए। पंचनामा तैयार कर शव के बचे हुए हिस्सों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया। इस वजह से आसपास के लोग भी महिला की पहचान नहीं कर सके। हत्या और साक्ष्य मिटाने का शक पुलिस का अनुमान है कि महिला की हत्या के बाद शव को जंगल में फेंककर जलाया गया। पैरों का साड़ी से बंधा होना और अधजला शव यही संकेत दे रहा है। महिला की पहचान करना अब पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।

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