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छत्तीसगढ़ ओपन स्कूल परीक्षा के लिए 10 अक्टूबर तक आवेदन, लेट फीस के साथ भी मिलेगा मौका

रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य ओपन स्कूल की नवंबर 2026 सत्र की 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं के लिए आवेदन प्रक्रिया चल रही है। हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी परीक्षा में शामिल होने वाले विद्यार्थी निर्धारित समय सीमा के भीतर प्रवेश एवं परीक्षा आवेदन जमा कर सकते हैं। सामान्य शुल्क के साथ आवेदन जमा करने की अंतिम तारीख 10 अक्टूबर 2026 निर्धारित की गई है। जो विद्यार्थी इस अवधि में आवेदन नहीं कर पाएंगे, उन्हें बाद में विलंब शुल्क के साथ फॉर्म भरने का अवसर दिया जाएगा। 500 रुपए लेट फीस के साथ 17 अक्टूबर तक आवेदन निर्धारित तारीख तक आवेदन नहीं कर पाने वाले परीक्षार्थी 13 अक्टूबर से 17 अक्टूबर 2026 तक विलंब शुल्क के साथ आवेदन कर सकेंगे। इस अवधि में फॉर्म जमा करने के लिए 500 रुपए अतिरिक्त विलंब शुल्क देना होगा। विद्यार्थियों को सलाह दी गई है कि वे अंतिम तारीख का इंतजार न करें और समय रहते आवेदन की प्रक्रिया पूरी कर लें। मान्यता प्राप्त अध्ययन केंद्र से मिलेगी जानकारी प्रवेश और परीक्षा आवेदन से संबंधित जानकारी के लिए विद्यार्थी अपने नजदीकी मान्यता प्राप्त अध्ययन केंद्र से संपर्क कर सकते हैं। यहां उन्हें आवेदन भरने की प्रक्रिया, आवश्यक दस्तावेज और परीक्षा से जुड़ी अन्य जरूरी जानकारी मिल सकेगी। वेबसाइट से प्राप्त कर सकते हैं आवेदन फॉर्म परीक्षा के लिए आवेदन फॉर्म छत्तीसगढ़ राज्य ओपन स्कूल की आधिकारिक वेबसाइट से डाउनलोड किए जा सकते हैं। फॉर्म में आवश्यक जानकारी भरने के बाद संबंधित दस्तावेज संलग्न कर उसे निर्धारित अध्ययन केंद्र में जमा करना होगा। विद्यार्थियों को आवेदन जमा करने से पहले फॉर्म में दर्ज जानकारी और जरूरी दस्तावेजों की जांच कर लेने की सलाह दी गई है।

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CM साय से लेकर पूरी कैबिनेट तक दिखा 80s Retro अंदाज, AI तस्वीरों ने सोशल मीडिया पर मचाई धूम

रायपुर। सोशल मीडिया पर इन दिनों 1980 के दशक की यादों को तस्वीरों के जरिए फिर से जीवंत करने वाला AI ट्रेंड तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। इस ट्रेंड में लोग अपनी मौजूदा तस्वीरों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से पुराने दौर के फैशन, हेयरस्टाइल और कैमरा इफेक्ट के साथ तैयार कर सोशल मीडिया पर साझा कर रहे हैं। अब इस वायरल ट्रेंड की झलक छत्तीसगढ़ की सियासत में भी देखने को मिल रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सहित प्रदेश सरकार के मंत्रियों ने अपनी तस्वीरों को 80 के दशक के रेट्रो अंदाज में बदलकर सोशल मीडिया पर शेयर किया है। इनमें डिप्टी सीएम अरुण साव और विजय शर्मा के साथ ओपी चौधरी, लक्ष्मी राजवाड़े, खुशवंत साहेब और कैबिनेट के अन्य मंत्री भी अलग-अलग रेट्रो लुक में नजर आ रहे हैं। AI से तैयार इन तस्वीरों में नेताओं के मौजूदा चेहरों को बरकरार रखते हुए उनके कपड़ों, बालों की स्टाइल, फोटो के रंग और बैकग्राउंड को पुराने दौर जैसा रूप दिया गया है। कई तस्वीरों में विंटेज कैमरा इफेक्ट और फिल्म ग्रेन का इस्तेमाल किया गया है, जिससे तस्वीरें 1980 के दशक में खींची गई फोटो जैसी दिखाई देती हैं। AI के जरिए कैसे तैयार हो रहा है 80s Retro Look? 1980s Retro AI ट्रेंड में सामान्य फोटो को AI इमेज टूल के जरिए पुराने जमाने की तस्वीर में बदला जाता है। इसके लिए यूजर अपनी फोटो अपलोड करने के बाद रेट्रो फैशन, पुराने कैमरा इफेक्ट, विंटेज कलर टोन और उस दौर के बैकग्राउंड जैसी जानकारी देकर तस्वीर तैयार कर सकता है। रेट्रो फोटो में डेनिम जैकेट, रंगीन शर्ट, पुराने जमाने की हेयरस्टाइल, स्टेटमेंट एक्सेसरीज, गर्म रोशनी और फिल्म ग्रेन जैसे इफेक्ट जोड़े जा सकते हैं। यही वजह है कि सामान्य तस्वीर भी देखने में कई दशक पुरानी फोटो जैसी लगने लगती है। नेताओं के बाद आम यूजर्स में भी बढ़ा क्रेज 80s Retro AI Trend का असर सिर्फ राजनीतिक हस्तियों तक सीमित नहीं है। सोशल मीडिया पर आम लोग, कलाकार और अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े चर्चित चेहरे भी अपनी तस्वीरों को रेट्रो अंदाज में तैयार कर रहे हैं। लोग अपनी व्यक्तिगत, पारिवारिक, कॉलेज और पुराने फिल्मी अंदाज वाली तस्वीरों को AI की मदद से नया रूप दे रहे हैं। पुराने दौर का फैशन और विंटेज फोटोग्राफी इफेक्ट इस ट्रेंड को सोशल मीडिया यूजर्स के बीच खासा आकर्षक बना रहा है। पहले भी कई AI और फोटो ट्रेंड हुए वायरल सोशल मीडिया पर इससे पहले भी कई फोटो ट्रेंड लोगों के बीच काफी लोकप्रिय रहे हैं। 2025 में AI की मदद से तस्वीरों को स्टूडियो घिबली जैसी एनीमेशन शैली में बदलने का ट्रेंड तेजी से वायरल हुआ था। वहीं जनवरी 2019 में शुरू हुआ 10 Years Challenge भी लंबे समय तक सोशल मीडिया पर चर्चा में रहा था, जिसमें लोग अपनी दस साल पुरानी और वर्तमान तस्वीरों को एक साथ साझा करते थे। 2026 में भी पुराने दौर और पुरानी यादों से जुड़े फोटो ट्रेंड सोशल मीडिया पर लगातार यूजर्स का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। 80s Retro AI Trend इसी सिलसिले की नई कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है।

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22 सितंबर से छत्तीसगढ़ में बसों के थम सकते हैं पहिए, किराया बढ़ाने की मांग पर महासंघ ने दी हड़ताल की चेतावनी

छत्तीसगढ़ में यात्री बसों का संचालन 22 सितंबर से प्रभावित हो सकता है। बस ऑपरेटरों ने यात्री किराया बढ़ाने समेत अपनी विभिन्न मांगों को लेकर प्रदेशव्यापी हड़ताल की चेतावनी दी है। छत्तीसगढ़ यातायात महासंघ ने कहा है कि मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो 22 सितंबर से प्रदेशभर में यात्री बसों का संचालन बंद कर दिया जाएगा। महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष अनवर अली के मुताबिक बस संचालक लंबे समय से किराया बढ़ाने और दूसरी समस्याओं को लेकर सरकार और परिवहन विभाग के सामने अपनी मांगें रखते रहे हैं। उनका दावा है कि पिछले करीब तीन साल से अधिकारियों और महासंघ के बीच मांगों को लेकर कोई बैठक नहीं हुई है। चार महीने पहले भेजा था किराया बढ़ाने का प्रस्ताव अनवर अली ने बताया कि यात्री बसों का किराया बढ़ाने समेत अन्य मांगों को लेकर करीब चार महीने पहले परिवहन विभाग को प्रस्ताव भेजा गया था। लेकिन अब तक इस पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। इससे बस संचालकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। ऑपरेटरों का कहना है कि डीजल समेत बस संचालन से जुड़े दूसरे खर्च लगातार बढ़ रहे हैं, जबकि यात्री किराए में लंबे समय से अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हुई है। ऐसे में वर्तमान किराए पर बसों का संचालन करना आर्थिक रूप से मुश्किल हो रहा है। बस ऑपरेटरों की 9 सूत्रीय मांगें महासंघ ने सरकार के सामने 9 सूत्रीय मांगें रखी हैं। इनमें यात्री किराए में बढ़ोतरी सबसे प्रमुख मांग है। इसके अलावा बसों में सिंगल स्लीपर सीट पर सिंगल टैक्स लागू करने और ई-बसों के संचालन को शहर की सीमा तक सीमित रखने की मांग की गई है। महासंघ ने ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट वाली बसों के ग्रामीण इलाकों और बस स्टैंड से संचालन पर भी रोक लगाने की मांग की है। VLTD शुल्क कम करने की मांग बस संचालकों ने स्टेज कैरिज बसों के समयचक्र में दो बसों के बीच उचित अंतर रखने की मांग भी की है। इसके साथ ही VLTD डिवाइस के रिन्यूअल शुल्क को कम करने और मैनुअल फिटनेस की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग रखी गई है। इसके अलावा दूसरे जिले या राज्य में बस संचालन के लिए परमिट पर दोबारा मंजूरी लेने की प्रक्रिया को सरल बनाने और सभी बसों के लिए ऑनलाइन परमिट की व्यवस्था शुरू करने की मांग की गई है। हड़ताल हुई तो यात्रियों की बढ़ सकती है परेशानी अगर महासंघ अपनी घोषणा के मुताबिक 22 सितंबर से बसों का संचालन बंद करता है, तो रोजाना यात्री बसों से सफर करने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। खासकर ग्रामीण और दूसरे जिलों के बीच नियमित बस सेवा पर इसका सीधा असर पड़ने की संभावना है। अब नजर इस बात पर है कि सरकार और परिवहन विभाग बस ऑपरेटरों की मांगों पर हड़ताल की तारीख से पहले क्या फैसला लेते हैं।

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रायपुर में गणेश प्रतिमाओं के स्वरूप पर विवाद, संत समाज और बजरंग दल ने दी आंदोलन की चेतावनी

रायपुर में गणेश उत्सव से पहले भगवान गणेश की प्रतिमाओं के स्वरूप को लेकर विवाद शुरू हो गया है। मोवा इलाके में 6 पैक्स और डायनासोर जैसे अलग-अलग आकार की गणेश प्रतिमाएं तैयार किए जाने को लेकर संत समाज और बजरंग दल ने आपत्ति जताई है। संगठनों का कहना है कि धार्मिक प्रतिमाएं तैयार करते समय परंपरागत स्वरूप और धार्मिक मान्यताओं का ध्यान रखा जाना चाहिए। संत समाज के प्रदेश अध्यक्ष स्वामी राजेश्वरानंद, छत्तीसगढ़ बजरंग दल के संयोजक भूषण साहू सहित अन्य सदस्य मोवा पहुंचे और वहां मूर्तिकारों की दुकानों पर तैयार की जा रही गणेश प्रतिमाओं का निरीक्षण किया। इस दौरान कुछ प्रतिमाओं के डिजाइन को लेकर मूर्तिकारों से बातचीत भी की गई। प्रतिमाओं के स्वरूप को लेकर जताई आपत्ति संत समाज और हिंदू संगठनों का कहना है कि भगवान गणेश की प्रतिमा श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ी होती है। इसलिए प्रतिमा निर्माण में नए प्रयोग किए जाने के दौरान धार्मिक भावनाओं और पारंपरिक स्वरूप का ध्यान रखना जरूरी है। संगठनों ने प्रशासन से मामले में आवश्यक कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि आपत्तिजनक स्वरूप वाली प्रतिमाओं पर रोक नहीं लगाई गई तो आंदोलन किया जाएगा। मूर्तिकारों ने बताया क्यों डिजाइन को लेकर बरत रहे सावधानी मूर्तिकारों के अनुसार आजकल कई ग्राहक AI से तैयार की गई तस्वीरों को देखकर गणेश प्रतिमा के डिजाइन की मांग करते हैं। हालांकि पिछले साल रायपुर में प्रतिमा के स्वरूप को लेकर हुए विवाद के बाद मूर्तिकार धार्मिक भावनाओं से जुड़े मामलों में अधिक सावधानी बरत रहे हैं। मूर्तिकार यशवंत ने बताया कि AI से तैयार तस्वीरें देखने में आकर्षक हो सकती हैं, लेकिन पूजा के लिए प्रतिमा बनाते समय धार्मिक मर्यादाओं का ध्यान रखना जरूरी है। इसी वजह से ऐसे डिजाइन तैयार करने से बचा जा रहा है, जिनसे भविष्य में विवाद की स्थिति बन सकती है। पिछले साल लाखे नगर में हुआ था विवाद रायपुर के लाखे नगर में पिछले साल गणेश प्रतिमा के स्वरूप को लेकर विवाद सामने आया था। हिंदू संगठनों ने प्रतिमा के डिजाइन पर आपत्ति जताई थी। इसके बाद विरोध प्रदर्शन हुआ और पुलिस में शिकायत भी की गई थी। इस घटना के बाद मूर्तिकारों के बीच धार्मिक प्रतिमाओं में प्रयोगात्मक और AI आधारित डिजाइन को लेकर सतर्कता बढ़ गई है। हिंदू संगठनों ने समितियों से की अपील हिंदू स्वाभिमान संगठन की प्रदेश अध्यक्ष विश्वादिनी पांडेय ने कहा कि मूर्तिकारों और गणेश उत्सव समितियों से अपील की गई है कि भगवान गणेश की प्रतिमा के लिए ऐसे डिजाइन का इस्तेमाल न किया जाए, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत होने की स्थिति बने। धार्मिक भावनाएं आहत होने पर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान सीनियर एडवोकेट विराट वर्मा के अनुसार, किसी धर्म, देवी-देवता या धार्मिक प्रतीक का जानबूझकर अपमान करने अथवा ऐसा कृत्य करने पर जिससे धार्मिक भावनाएं आहत हों, परिस्थितियों के अनुसार भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत कानूनी कार्रवाई हो सकती है। शिकायत मिलने पर पुलिस मामले की जांच करती है और प्रथम दृष्टया अपराध बनता पाए जाने पर FIR दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा सकती है। रायपुर में करीब 125 साल पुराना है सार्वजनिक गणेश उत्सव इतिहासकारों के अनुसार रायपुर में सार्वजनिक गणेश उत्सव की परंपरा करीब 125 साल पुरानी मानी जाती है। शुरुआती दौर में पुरानी बस्ती, गुढ़ियारी और बनियापारा जैसे इलाकों में सार्वजनिक रूप से गणेश प्रतिमाएं स्थापित की जाती थीं। इसके बाद गोलबाजार, सदर बाजार, रामसागरपारा समेत शहर के अन्य हिस्सों में भी गणेश उत्सव समितियों का विस्तार हुआ। समय के साथ गणेश उत्सव धार्मिक आयोजन के साथ सामाजिक एकजुटता और सार्वजनिक भागीदारी का भी प्रमुख माध्यम बन गया। इसी वजह से गणेश प्रतिमाओं के पारंपरिक स्वरूप को लेकर श्रद्धालुओं और विभिन्न संगठनों की भावनाएं जुड़ी हुई हैं।

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रायपुर में नो-एंट्री तोड़ने वाले भारी वाहनों पर कार्रवाई, 7 मालवाहक वाहनों पर चालान

रायपुर शहर में यातायात व्यवस्था को सुचारू और सुरक्षित बनाए रखने के लिए ट्रैफिक पुलिस ने नो-एंट्री और नो-पार्किंग नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया। डीसीपी ट्रैफिक डॉ. अर्चना झा के निर्देशन में हुई कार्रवाई के दौरान प्रतिबंधित समय में शहर में प्रवेश करने वाले 7 भारी मालवाहक वाहनों पर मोटर व्हीकल एक्ट के तहत कार्रवाई की गई। पुलिस के मुताबिक भारी वाहनों के शहर में प्रवेश के लिए समय और मार्ग निर्धारित किए गए हैं। इसके बावजूद कुछ वाहन चालक प्रतिबंधित समय में मुख्य सड़कों और अंदरूनी इलाकों में प्रवेश कर रहे थे। इसे देखते हुए तेलीबांधा और पचपेढ़ी नाका थाना क्षेत्रों में विशेष निगरानी की गई। जांच के दौरान नो-एंट्री नियम का उल्लंघन करने वाले 7 भारी मालवाहक वाहनों को पकड़ा गया। इनके चालकों के खिलाफ चालानी कार्रवाई करते हुए उन्हें यातायात नियमों का पालन करने की हिदायत दी गई। नो-पार्किंग में खड़े वाहनों पर भी कार्रवाई शहर के प्रमुख बाजारों, व्यस्त चौराहों और मुख्य मार्गों पर नो-पार्किंग में खड़े वाहनों के खिलाफ भी अभियान चलाया गया। सड़क पर आवागमन बाधित करने वाले दोपहिया और चारपहिया वाहनों को क्रेन और टोइंग वाहनों की मदद से हटाया गया। कार्रवाई के दौरान हटाए गए वाहनों को यातायात थाना परिसर भेजा गया और संबंधित वाहन चालकों के खिलाफ मोटर व्हीकल एक्ट के तहत चालानी कार्रवाई की गई। रात 12 बजे से सुबह 5 बजे तक भारी वाहनों को प्रवेश की अनुमति यातायात पुलिस के अनुसार रिंग रोड के अंदरूनी हिस्सों और प्रमुख बाजार क्षेत्रों में भारी मालवाहक वाहनों के प्रवेश का समय निर्धारित है। इन वाहनों को केवल रात 12 बजे से सुबह 5 बजे तक शहर के अंदर प्रवेश की अनुमति है। इसके अलावा निर्धारित समय के बाहर भारी वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा। CCTV और फील्ड टीम से निगरानी ट्रैफिक पुलिस ने बताया कि नो-एंट्री और नो-पार्किंग नियमों का उल्लंघन करने वालों पर CCTV कैमरों और फील्ड टीमों के जरिए लगातार नजर रखी जा रही है। प्रमुख चौराहों और संवेदनशील मार्गों पर आने वाले दिनों में भी जांच अभियान जारी रहेगा। पुलिस ने भारी वाहन चालकों, ट्रांसपोर्टरों और वाहन मालिकों से निर्धारित नो-एंट्री नियमों का पालन करने की अपील की है। वहीं आम नागरिकों और व्यवसायियों से भी वाहनों को केवल निर्धारित पार्किंग स्थलों पर खड़ा करने की अपील की गई है, ताकि शहर में जाम और यातायात अवरोध की स्थिति न बने।

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रायपुर में ई-रिक्शा और ऑटो के QR कोड सिस्टम को लेकर बड़ा फैसला, सितंबर तक पंजीयन रहेगा मुफ्त

रायपुर में ई-रिक्शा और ऑटो वाहनों की पहचान और यात्रियों की सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए QR कोड व्यवस्था को और प्रभावी किया जा रहा है। इसी सिलसिले में 8 सितंबर 2026 को रायपुर पुलिस कमिश्नरेट और ई-रिक्शा डीलर्स के बीच संयुक्त बैठक आयोजित की गई। अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त यातायात के कार्यालय स्थित सभागार में हुई बैठक में वाहनों और चालकों की जानकारी को QR कोड के माध्यम से व्यवस्थित एवं अपडेट रखने को लेकर चर्चा हुई। पुलिस अधिकारियों ने डीलर्स को वाहन और चालक से संबंधित जानकारी समय-समय पर अपडेट करने तथा पंजीयन व्यवस्था को मजबूत बनाने के निर्देश दिए। बैठक में फैसला लिया गया कि ई-रिक्शा की नई खरीदी और सर्विसिंग के दौरान वाहन मालिक या चालक से निर्धारित फॉर्म भरवाना जरूरी होगा। इससे वाहन और चालक की जानकारी रिकॉर्ड में अपडेट रखी जा सकेगी। इसके अलावा जिन ई-रिक्शा और ऑटो का अब तक पंजीयन नहीं हुआ है, उनके लिए पंजीयन पोर्टल दोबारा खोला जाएगा। वाहन मालिकों को पंजीयन पूरा करने का मौका दिया जाएगा। सबसे अहम निर्णय के तहत सितंबर 2026 तक ई-रिक्शा और ऑटो का पंजीयन निशुल्क रखा गया है। पुलिस ने वाहन मालिकों और चालकों से अपील की है कि वे तय समय सीमा के भीतर अपना पंजीयन पूरा करा लें। बैठक में अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त यातायात राम कुमार बर्मन, सहायक पुलिस आयुक्त रमेश येरेवार, सहायक पुलिस आयुक्त यातायात सतीश ठाकुर, कमल पांडेय, ई-रिक्शा एवं ऑटो संघ के अध्यक्ष सुरेश तिवारी सहित करीब 25 डीलर्स मौजूद रहे। पुलिस के अनुसार QR कोड व्यवस्था का उद्देश्य यात्रियों को वाहन और चालक से जुड़ी जरूरी जानकारी आसानी से उपलब्ध कराना है। इससे नागरिक सुरक्षा बढ़ाने के साथ-साथ रायपुर की यातायात व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद मिलेगी।

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बिलासपुर में सरकारी जमीन पर बने दो मंजिला मकान पर चला बुलडोजर, 3 नोटिस के बाद निगम की कार्रवाई

बिलासपुर में सरकारी जमीन पर किए गए कथित अवैध कब्जे के खिलाफ नगर निगम ने बड़ी कार्रवाई की है। अरपा पार बंधवापारा स्थित सतबहिनया मंदिर के पास सरकारी जमीन पर बने दो मंजिला मकान को नगर निगम की टीम ने बुलडोजर चलाकर ढहा दिया। नगर निगम के अनुसार, मकान मालिक रंजीत कश्यप को निर्माण से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए तीन बार नोटिस जारी किया गया था। तय समय के भीतर आवश्यक दस्तावेज पेश नहीं किए गए और नोटिस का संतोषजनक जवाब भी नहीं मिला। इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया पूरी कर निगम ने निर्माण हटाने की कार्रवाई की। जोन कमिश्नर रंजना अग्रवाल के मुताबिक, सतबहिनया मंदिर बंधवापारा क्षेत्र में सरकारी जमीन पर दो मंजिला मकान का निर्माण किया गया था। निगम की ओर से लगातार नोटिस देकर जमीन और निर्माण से जुड़े दस्तावेज मांगे गए, लेकिन दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए। नगर निगम कमिश्नर प्रकाश कुमार सर्वे के निर्देश पर जोन क्रमांक-8 और अतिक्रमण शाखा की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची। टीम ने बुलडोजर की मदद से दो मंजिला निर्माण को पूरी तरह ढहा दिया और जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराया। नगर निगम अधिकारियों ने कहा कि सरकारी जमीन या निगम की संपत्ति पर अवैध कब्जा और बिना अनुमति निर्माण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। शहर में ऐसे मामलों की जांच कर नियमों के अनुसार कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। निगम ने अधिकारियों को सरकारी जमीन पर होने वाले अवैध निर्माण और अतिक्रमण की निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, जांच के दौरान सामने आने वाले अन्य मामलों में भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

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रायपुर सेंट्रल जेल में 10 कैदियों ने बनाई 500 गणेश प्रतिमाएं, विसर्जन के बाद उगेंगे पौधे

रायपुर केंद्रीय जेल के 10 बंदियों ने गणेशोत्सव के लिए 500 इको फ्रेंडली गणेश प्रतिमाएं तैयार की हैं। करीब 1 से 2 फीट ऊंची इन प्रतिमाओं को आम लोगों की खरीदारी के लिए रखा जाएगा। इनकी खासियत है कि इन्हें प्राकृतिक मिट्टी और रंगों से तैयार किया गया है और इनमें तुलसी समेत अलग-अलग पौधों के बीज भी डाले गए हैं। गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन के बाद जब मिट्टी जमीन में मिलेगी, तो इनमें मौजूद बीज अंकुरित होकर पौधों का रूप ले सकेंगे। इस पहल के जरिए गणेशोत्सव के बाद भी पर्यावरण संरक्षण और हरियाली का संदेश लोगों तक पहुंचाने की कोशिश की गई है। जेल में बंद 10 कैदियों ने अलग-अलग डिजाइन की इन प्रतिमाओं को तैयार किया है। जेल प्रबंधन के मुताबिक, इस काम के जरिए बंदियों को नई स्किल सीखने और अपनी रचनात्मकता दिखाने का अवसर मिला। साथ ही उन्हें सकारात्मक सोच और समाज के लिए उपयोगी गतिविधियों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इन प्रतिमाओं को बनाने में प्राकृतिक मिट्टी और पर्यावरण के अनुकूल रंगों का इस्तेमाल किया गया है। प्रतिमाओं में तुलसी सहित विभिन्न पौधों के बीज शामिल किए गए हैं, ताकि विसर्जन के बाद पर्यावरण को नुकसान कम हो और हरियाली को बढ़ावा मिले। जेल अधीक्षक योगेश सिंह क्षत्री ने बताया कि केंद्रीय जेल में बंदियों को लगातार स्किल डेवलपमेंट और प्रोडक्शन से जुड़े कार्यों से जोड़ा जा रहा है। इसी कड़ी में बीज वाली गणेश प्रतिमाएं तैयार की गई हैं। उन्होंने कहा कि इस पहल के जरिए आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने का प्रयास किया गया है।

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रायपुर में चाकूबाजों के खिलाफ पुलिस का अभियान, 24 घंटे में 5 आरोपी गिरफ्तार

रायपुर पुलिस कमिश्नरेट के सेंट्रल जोन में चाकूबाजी और आपराधिक गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए पुलिस ने विशेष अभियान चलाया। प्रशिक्षु DSP अमित कोसमा के नेतृत्व में गोलबाजार, गंज और मौदहापारा थाना क्षेत्रों में सघन चेकिंग और विजिबल पुलिसिंग की गई। अभियान के दौरान 7 और 8 सितंबर 2026 को पुलिस ने आर्म्स एक्ट के 5 मामलों में 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों के कब्जे से अलग-अलग स्थानों से धारदार चाकू बरामद किए गए। सभी के खिलाफ आर्म्स एक्ट की धारा 25 और 27 के तहत अपराध दर्ज किया गया। आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में केंद्रीय जेल भेज दिया गया। गंज थाना पुलिस ने नितेश सोनी और अशोक भाण्डेकर को गिरफ्तार किया। नितेश के कब्जे से तेलघानी नाका ओवरब्रिज के नीचे और अशोक के पास से नहरपारा क्षेत्र में स्टील का धारदार चाकू बरामद किया गया। मौदहापारा थाना पुलिस ने धन्नू साहू, रविन्द्र साठे और मनोज यादव को गिरफ्तार किया। इनके कब्जे से मेकाहारा अस्पताल रोड और आसपास के इलाकों से लोहे के धारदार चाकू बरामद किए गए। इसके अलावा थाना गोलबाजार में क्षेत्र के लिस्टेड गुंडा-बदमाशों की परेड भी कराई गई। पुलिस ने उनकी वर्तमान गतिविधियों और आचरण की जानकारी ली और अपराध से दूर रहने की सख्त समझाइश दी। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, सेंट्रल जोन में विजिबल पुलिसिंग, संदिग्धों की चेकिंग और आपराधिक तत्वों की धरपकड़ का अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा।

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छत्तीसगढ़ में प्राइवेट स्कूलों की मान्यता के नियम बदले, Essentiality Certificate की अनिवार्यता खत्म

छत्तीसगढ़ में प्राइवेट स्कूल खोलने और मान्यता लेने के नियमों में बड़ा बदलाव किया गया है। छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल ने 7 सितंबर 2026 को नई गाइडलाइन जारी की है, जो शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू होगी। इससे पहले स्कूलों के लिए 2018 के नियम लागू थे। नई गाइडलाइन के तहत अब प्राइवेट स्कूल खोलने के लिए Essentiality Certificate यानी अनिवार्यता प्रमाण पत्र जरूरी नहीं होगा। न्यूनतम Corpus Fund की अनिवार्यता भी खत्म कर दी गई है। हालांकि स्कूल संचालकों को Self Certification देना होगा। इसमें बिल्डिंग की सुरक्षा, लैब, लाइब्रेरी, खेल मैदान, योग्य शिक्षकों और बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी सुविधाओं की जानकारी देनी होगी। गलत जानकारी देने पर मान्यता निलंबित या रद्द की जा सकती है और जुर्माना भी लगाया जा सकता है। नए नियमों के मुताबिक एक क्लासरूम में अधिकतम 45 बच्चे बैठ सकेंगे। कम से कम 300 वर्गफीट के कमरे में प्रत्येक बच्चे के लिए 6 वर्गफीट जगह जरूरी होगी। हाईस्कूल के लिए कम से कम 7 क्लासरूम और मल्टीस्टोरी बिल्डिंग के लिए Structural Safety Certificate जरूरी होगा। स्कूल की मान्यता के लिए ऑनलाइन आवेदन करना होगा। बिना मान्यता कक्षा 9वीं से 12वीं तक संचालित नहीं की जा सकेगी। हिंदी और इंग्लिश मीडियम के लिए अलग जमीन, बिल्डिंग, प्रिंसिपल और शिक्षकों की व्यवस्था करनी होगी। स्कूल में साफ पेयजल, अलग-अलग टॉयलेट, CCTV, पर्याप्त फर्नीचर और बच्चों की सुरक्षा के जरूरी इंतजाम अनिवार्य होंगे। स्कूल बसों का हर साल तकनीकी निरीक्षण और ड्राइवर-कंडक्टर का हेल्थ चेकअप भी जरूरी होगा। नई गाइडलाइन में स्कूल के नाम को लेकर भी नियम तय किए गए हैं। निजी स्कूल National, International, Navodaya, Eklavya, Kendriya, PM Shri, Swami Atmanand और Swami Vivekananda Utkrisht जैसे शब्दों का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। मंडल ने स्पष्ट किया है कि ये स्कूलों के लिए न्यूनतम मानक हैं। नियमों का पालन नहीं करने वाले स्कूलों की अगले वर्ष मान्यता पर विचार नहीं किया जाएगा।

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