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ZIP फाइल खोलते ही मोबाइल हो सकता है हैक, CEO बनकर भेजे जा रहे फर्जी मैसेज; 30 महीनों में 791 करोड़ की साइबर ठगी

साइबर अपराधी अब लोगों को निशाना बनाने के लिए एक नया तरीका अपना रहे हैं, जिसे CEO इम्पर्सनेशन स्कैम या बॉस ZIP फ्रॉड कहा जा रहा है। इस तरीके में ठग किसी कंपनी के सीईओ, डायरेक्टर या वरिष्ठ अधिकारी बनकर कर्मचारियों को व्हाट्सएप या ई-मेल के जरिए संदेश भेजते हैं। संदेश के साथ एक ZIP फाइल भी भेजी जाती है, जिसे डाउनलोड या ओपन करते ही मोबाइल या कंप्यूटर मालवेयर की चपेट में आ सकता है। गृह मंत्रालय ने इस तरह की साइबर ठगी को लेकर लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पिछले 30 महीनों में छत्तीसगढ़ में साइबर अपराधी करीब 791 करोड़ रुपये की ठगी कर चुके हैं। ZIP फाइल के जरिए कैसे होती है ठगी? साइबर एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ठग कर्मचारियों पर जल्दबाजी का दबाव बनाते हैं। वे सिक्योरिटी अपडेट, जरूरी दस्तावेज, पेमेंट अप्रूवल या अन्य आधिकारिक काम का बहाना बनाकर ZIP फाइल भेजते हैं। कई बार इस फाइल के अंदर EXE या DLL जैसी खतरनाक फाइलें छिपी होती हैं। यदि उपयोगकर्ता ऐसी फाइल को डाउनलोड या इंस्टॉल कर देता है, तो डिवाइस संक्रमित हो सकता है। इसके बाद साइबर अपराधी बैंकिंग ऐप, ओटीपी, पासवर्ड और अन्य संवेदनशील जानकारी तक पहुंच बनाने की कोशिश करते हैं। कई मामलों में वे संपर्क सूची में बदलाव कर अपने नंबर को वरिष्ठ अधिकारी के नाम से सेव कर देते हैं, जिससे कर्मचारी आसानी से उनके झांसे में आ जाते हैं और फर्जी निर्देशों पर पैसे ट्रांसफर कर देते हैं। बचाव के लिए क्या करें? साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी वरिष्ठ अधिकारी के नाम से आने वाले संदिग्ध संदेश या ZIP फाइल पर बिना पुष्टि किए भरोसा न करें। किसी भी भुगतान या जरूरी निर्देश का पालन करने से पहले संबंधित अधिकारी से फोन, वीडियो कॉल या व्यक्तिगत संपर्क के जरिए पुष्टि करें। साथ ही व्हाट्सएप पर टू-स्टेप वेरिफिकेशन जैसे सुरक्षा फीचर्स सक्रिय रखें और किसी भी अनजान ZIP, EXE या DLL फाइल को डाउनलोड या ओपन करने से बचें। पुलिस की कार्रवाई जारी रायपुर पुलिस ने हाल ही में 101 म्यूल अकाउंट धारकों को गिरफ्तार किया है। इन खातों का इस्तेमाल देशभर में करीब 1.57 करोड़ रुपये की साइबर ठगी के लिए किया गया था। इसके अलावा पुलिस ने एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय कॉल सेंटर गिरोह का भी खुलासा किया, जिसने अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाकर दो वर्षों में 50 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की। पुलिस लगातार साइबर अपराधियों के बैंक खातों को फ्रीज कर रही है और समय पर शिकायत मिलने पर पीड़ितों की रकम रोकने का प्रयास भी किया जा रहा है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ते साइबर अपराधों से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका लोगों में जागरूकता बढ़ाना है। साइबर ठगी होने पर तुरंत क्या करें?

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Cyber Crime, Raipur, State, Top News

छत्तीसगढ़ में मानसून का कहर: सरगुजा में आकाशीय बिजली से 3 की मौत, बिलासपुर में कार पर गिरा पेड़

छत्तीसगढ़ में मानसून अब पूरे प्रदेश में सक्रिय हो चुका है। लगातार हो रही बारिश के बीच कई जिलों से हादसों की खबरें सामने आई हैं। सरगुजा जिले के धौरपुर थाना क्षेत्र के डुमकी गांव में सोमवार शाम आकाशीय बिजली गिरने से दो बच्चों और एक युवक की मौत हो गई, जबकि एक 12 वर्षीय बच्ची गंभीर रूप से झुलस गई। जानकारी के अनुसार, बच्चे आम बीनने के लिए एक पेड़ के नीचे खड़े थे। इसी दौरान पास में मवेशी चरा रहा एक युवक भी वहां पहुंच गया। अचानक पेड़ पर बिजली गिरने से चारों उसकी चपेट में आ गए। हादसे में 5 वर्षीय सागर, 9 वर्षीय रानी और 36 वर्षीय राम साय की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि श्रद्धा (12) गंभीर रूप से घायल हो गई, जिसका इलाज जारी है। उधर, बिलासपुर में सोमवार शाम तेज आंधी और बारिश के कारण कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई। कलेक्टर बंगले के पास एक बड़ा पेड़ सड़क किनारे खड़ी कार पर गिर गया, जिससे वाहन क्षतिग्रस्त हो गया। हालांकि कार में मौजूद लोग सुरक्षित बच गए। पेड़ गिरने से बिजली के तार भी टूट गए, जिसके चलते आसपास के क्षेत्र में कुछ समय तक बिजली आपूर्ति बाधित रही। मौसम विभाग के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून ने 22 जून को दंतेवाड़ा से छत्तीसगढ़ में प्रवेश किया था। अब 30 जून तक मानसून पूरे प्रदेश में फैल चुका है। सरगुजा, सूरजपुर, बलरामपुर, कोरिया, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, जशपुर, कोरबा, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, बिलासपुर, मुंगेली, जांजगीर-चांपा, सक्ती, सारंगढ़-बिलाईगढ़ और रायगढ़ सहित उत्तर एवं उत्तर-पूर्व के 14 जिलों में भी मानसून पहुंच गया है। मौसम विभाग ने अगले चार दिनों तक प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में मध्यम से भारी बारिश की संभावना जताई है। साथ ही कई क्षेत्रों में गरज-चमक और आकाशीय बिजली गिरने की चेतावनी भी जारी की गई है। लोगों से खराब मौसम के दौरान खुले मैदान, पेड़ों के नीचे और बिजली के खंभों के आसपास खड़े होने से बचने की अपील की गई है। राजधानी रायपुर में मंगलवार को दिनभर बादल छाए रहने और गरज-चमक के साथ बारिश होने का अनुमान है। अधिकतम तापमान लगभग 35 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है। बारिश के आंकड़ों पर नजर डालें तो बस्तर संभाग में प्रदेश के अन्य हिस्सों की तुलना में बेहतर वर्षा हुई है, लेकिन वहां भी सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। वहीं मध्य छत्तीसगढ़ और कुछ अन्य जिलों में वर्षा की भारी कमी बनी हुई है। राजनांदगांव, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, बलौदाबाजार, सारंगढ़-बिलाईगढ़ और सक्ती जैसे जिलों में सामान्य से 80 से 95 प्रतिशत तक कम बारिश रिकॉर्ड की गई है। मौसम विभाग का मानना है कि आने वाले दिनों की बारिश से इस कमी में कुछ हद तक सुधार हो सकता है।

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Accident, Bilaspur, Raipur

रायपुर में RSS नेता इंद्रेश कुमार ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से की मुलाकात, राष्ट्र निर्माण समेत कई मुद्दों पर चर्चा

रायपुर में आयोजित “आपातकाल स्मृति दिवस” कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के वरिष्ठ प्रचारक इंद्रेश कुमार ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से मुख्यमंत्री निवास में मुलाकात की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने पुष्पगुच्छ और स्मृति-चिह्न भेंट कर उनका स्वागत किया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बताया कि मुलाकात के दौरान राष्ट्र निर्माण, सामाजिक समरसता, जनकल्याण और आपातकाल से जुड़े ऐतिहासिक अनुभवों पर विस्तार से चर्चा हुई। साथ ही लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा और समाजहित में किए गए कार्यों को लेकर भी विचार-विमर्श किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इंद्रेश कुमार का राष्ट्रहित के प्रति समर्पण और समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर चलने का दृष्टिकोण प्रेरणादायक है। उन्होंने कहा कि उनका मार्गदर्शन राष्ट्रसेवा के प्रति सरकार के संकल्प को और अधिक मजबूत करने में सहायक है। इंद्रेश कुमार रायपुर में आयोजित “आपातकाल स्मृति दिवस” कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में शामिल होने पहुंचे थे। इसी अवसर पर मुख्यमंत्री निवास में दोनों नेताओं की मुलाकात हुई, जिसमें विभिन्न सामाजिक और राष्ट्रीय विषयों पर चर्चा की गई।

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Political, Raipur

तलाक की सहमति के बाद पत्नी पर पिस्टल तानने का आरोप, पति और मामा गिरफ्तार

कोरबा में प्रेम विवाह के बाद पति-पत्नी के बीच बढ़ा विवाद एक गंभीर आपराधिक घटना में बदल गया। आपसी सहमति से तलाक की प्रक्रिया पूरी करने के कुछ ही समय बाद पति पर पत्नी के साथ मारपीट करने और उस पर पिस्टल तानकर जान से मारने की कोशिश करने का आरोप लगा है। मामले में पुलिस ने आरोपी पति और उसके मामा को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के अनुसार, सिविल लाइन थाना क्षेत्र की रहने वाली युवती ने नवंबर 2023 में बिलासपुर के मंगला अमन विहार निवासी सतीश कुमार से प्रेम विवाह किया था। शादी के कुछ समय बाद दोनों के बीच मतभेद बढ़ने लगे, जिसके चलते महिला अपने मायके लौट आई और दोनों अलग रहने लगे। शुक्रवार को सतीश कुमार अपने मामा जितेंद्र चंद्राकर के साथ पत्नी के घर पहुंचा। दोनों पक्षों के बीच बातचीत के दौरान आपसी सहमति से तलाक लेने का निर्णय हुआ। इसके बाद दोनों परिवार अधिवक्ता के पास पहुंचे, जहां तलाक से संबंधित दस्तावेज तैयार किए गए। दस्तावेज तैयार होने के बाद महिला अपने परिजनों के साथ घर लौट आई। आरोप है कि कुछ देर बाद सतीश कुमार अपने मामा के साथ दोबारा वहां पहुंचा और बातचीत के बहाने पत्नी को घर के बाहर बुलाया। बाहर आते ही उसने कथित तौर पर महिला के साथ मारपीट की और पिस्टल निकालकर उसकी कनपटी पर तान दी। घटना के दौरान परिजनों ने तुरंत हस्तक्षेप कर महिला को सुरक्षित बचा लिया। इसके बाद आरोपी मौके से फरार हो गए। पीड़िता के परिजनों ने सिविल लाइन थाना में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों की तलाश शुरू की। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी सतीश कुमार और उसके मामा जितेंद्र चंद्राकर को गिरफ्तार कर लिया है। दोनों के खिलाफ संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

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Crime, korba

बस्तर में जनसेवा को नई दिशा, सोनू सूद और माँ मातंगी दिव्य धाम मिलकर करेंगे सामाजिक कार्यों का विस्तार

बस्तर क्षेत्र में जनसेवा और सामाजिक कल्याण के कार्यों को नई गति देने के उद्देश्य से अभिनेता एवं समाजसेवी सोनू सूद और माँ मातंगी दिव्य धाम के बीच सहयोग को लेकर सकारात्मक चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने शिक्षा, स्वास्थ्य और जरूरतमंद लोगों की सहायता से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई। चर्चा के दौरान डॉ. प्रेमासाई महाराज ने सूद चैरिटी फाउंडेशन द्वारा देशभर में किए जा रहे जनसेवा कार्यों की सराहना की। उन्होंने बताया कि माँ मातंगी दिव्य धाम लंबे समय से बस्तर सहित विभिन्न क्षेत्रों में शिक्षा सहायता, अस्थमा से पीड़ित मरीजों के लिए निःशुल्क उपचार, आर्थिक सहयोग, गौसंरक्षण, आईटीबीपी के जवानों के लिए आध्यात्मिक मार्गदर्शन तथा अन्य सामाजिक और आध्यात्मिक सेवाएं संचालित कर रहा है। डॉ. प्रेमासाई महाराज ने बताया कि आने वाले समय में धाम की ओर से “माँ मातंगी शिक्षा रत्न” सम्मान शुरू किया जाएगा। इसके साथ ही धाम में आने वाले बच्चों के लिए प्रतिदिन एक घंटे की नैतिक शिक्षा और संस्कार कक्षाएं प्रारंभ करने की योजना है। इसका उद्देश्य बच्चों में शिक्षा के साथ अनुशासन, नैतिक मूल्यों और सेवा भावना का विकास करना है। बैठक में बस्तर के आदिवासी क्षेत्रों, युवाओं, विद्यार्थियों और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों तक जनसेवा गतिविधियों का दायरा बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। माँ मातंगी दिव्य धाम ने भरोसा दिलाया कि सूद चैरिटी फाउंडेशन की सामाजिक पहलों को क्षेत्र में हरसंभव सहयोग दिया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक जरूरतमंद लोगों तक सहायता पहुंचाई जा सके। सोनू सूद ने भी शिक्षा, स्वास्थ्य और समाज के वंचित वर्गों के उत्थान के लिए अपने सेवा कार्यों को लगातार जारी रखने की बात कही। उन्होंने कहा कि समाज की सेवा लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का सबसे प्रभावी माध्यम है। दोनों संस्थाओं ने भविष्य में साझा प्रयासों के माध्यम से बस्तर और अन्य क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, जनकल्याण और सामाजिक सहयोग से जुड़े विभिन्न अभियान चलाने का संकल्प व्यक्त किया, जिससे जरूरतमंद नागरिकों को व्यापक स्तर पर लाभ मिल सके।

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मानसून में बढ़ा गलघोंटू बीमारी का खतरा, पशुपालकों को समय पर टीकाकरण कराने की सलाह

रायपुर। मानसून के दौरान पशुओं में फैलने वाली गलघोंटू (हेमोरेजिक सेप्टीसीमिया-एचएस) बीमारी का खतरा बढ़ने लगा है। इसे देखते हुए पशुधन विकास विभाग ने प्रदेश के सभी पशुपालकों को सतर्क रहने और अपने पशुओं का समय पर टीकाकरण कराने की सलाह दी है। विभाग का कहना है कि समय पर वैक्सीनेशन और शुरुआती उपचार से इस गंभीर बीमारी से पशुओं की सुरक्षा की जा सकती है। पशुधन विकास विभाग के अनुसार गलघोंटू एक संक्रामक जीवाणुजनित रोग है, जो मुख्य रूप से गाय, भैंस और भेड़ों को प्रभावित करता है। मानसून के मौसम में नमी और अनुकूल वातावरण के कारण इसके फैलने की संभावना अधिक रहती है। यदि समय रहते उपचार नहीं किया जाए तो यह बीमारी पशुओं के लिए जानलेवा भी साबित हो सकती है। अधिकारियों ने बताया कि संक्रमित पशुओं में तेज बुखार, गले और जबड़े के नीचे सूजन, मुंह से अत्यधिक लार निकलना, नाक से स्राव, सांस लेने में कठिनाई और गले से घरघराहट जैसी आवाजें सुनाई देना प्रमुख लक्षण हैं। कई मामलों में पशु चारा खाना छोड़ देते हैं, दूध उत्पादन कम हो जाता है और गंभीर संक्रमण की स्थिति में उनकी मृत्यु भी हो सकती है। पशु चिकित्सा विभाग ने पशुपालकों से अपील की है कि यदि किसी पशु में ऐसे लक्षण दिखाई दें तो उसे तुरंत अन्य पशुओं से अलग रखें और बिना देरी किए नजदीकी पशु चिकित्सालय या पशु चिकित्सा अधिकारी से संपर्क करें। यदि किसी क्षेत्र में एक साथ कई पशुओं में बीमारी के लक्षण दिखाई दें तो इसकी सूचना तत्काल विभाग को देने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग ने कहा है कि मानसून के दौरान पशुधन को सुरक्षित रखने के लिए नियमित स्वास्थ्य जांच, समय पर टीकाकरण और शीघ्र उपचार सबसे प्रभावी उपाय हैं। इसी उद्देश्य से राज्यभर में निगरानी बढ़ाने और आवश्यक सतर्कता बरतने के निर्देश जारी किए गए हैं।

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Animal, Raipur

छत्तीसगढ़ में सिर्फ डायल-112 बनेगा इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबर, 100 से 1091 तक सभी सेवाएं होंगी एकीकृत

देशभर में आपातकालीन सेवाओं को अधिक सरल और प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। आने वाले समय में पुलिस, फायर ब्रिगेड, एंबुलेंस और अन्य सभी इमरजेंसी सेवाओं के लिए अलग-अलग हेल्पलाइन नंबरों की जगह केवल डायल-112 का इस्तेमाल किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को तीन महीने के भीतर 100, 101, 102, 108, 1033, 1091 समेत सभी आपातकालीन नंबरों को 112 में शामिल करने का निर्देश दिया है। साथ ही इस प्रक्रिया की प्रगति रिपोर्ट भी अदालत में प्रस्तुत करने को कहा गया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद छत्तीसगढ़ सरकार ने भी इस दिशा में तैयारी शुरू कर दी है। गृह विभाग के अधिकारियों ने हाल ही में बैठक कर सभी इमरजेंसी सेवाओं को एक ही प्लेटफॉर्म पर लाने की योजना पर चर्चा की। इसके लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जा रही है, ताकि सभी विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो सके। वर्तमान में प्रदेश में लगभग 400 डायल-112 वाहन और करीब 375 एंबुलेंस 108 सेवा के तहत संचालित हैं। अभी किसी मेडिकल आपात स्थिति की सूचना डायल-112 से 108 सेवा को भेजी जाती है, जबकि आग लगने जैसी घटनाओं की जानकारी अलग प्रणाली के माध्यम से फायर विभाग तक पहुंचती है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद सभी सूचनाएं एक ही सिस्टम के जरिए संबंधित विभाग तक पहुंचेंगी, जिससे प्रतिक्रिया का समय कम होगा और राहत कार्य तेजी से शुरू किया जा सकेगा। सुप्रीम कोर्ट ने 26 मई 2026 को सेव लाइफ फाउंडेशन बनाम भारत संघ मामले की सुनवाई के दौरान कहा था कि सड़क दुर्घटना के पीड़ितों को समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत जीवन के अधिकार का महत्वपूर्ण हिस्सा है। अदालत ने माना कि सहायता मिलने में देरी कई बार जानलेवा साबित होती है, इसलिए पूरे देश में एकीकृत आपातकालीन व्यवस्था आवश्यक है। छत्तीसगढ़ में डायल-112 सेवा की शुरुआत 15 अगस्त 2018 को “एक्के नंबर, सब्बो बर” अभियान के साथ हुई थी। बाद में इस सेवा का विस्तार राज्य के सभी 33 जिलों तक किया गया। वर्तमान में डायल-112 प्रतिदिन लगभग 10 हजार कॉल संभाल रहा है। 20 मई से 16 जून 2026 के बीच इस सेवा पर 3,06,264 कॉल प्राप्त हुईं, जिनमें 79,782 घटनाएं दर्ज की गईं। सुप्रीम Court ने अपने आदेश में यह भी निर्देश दिया है कि सड़क दुर्घटना के घायलों को कैशलेस इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई जाए, गुड सेमेरिटन कानून का प्रभावी पालन सुनिश्चित किया जाए, सभी एंबुलेंस में जीपीएस और व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग सिस्टम अनिवार्य हो, पैरामेडिकल कर्मचारियों को मानकीकृत प्रशिक्षण दिया जाए, ट्रॉमा सेंटरों की ग्रेडिंग की जाए और नई व्यवस्था की जानकारी लोगों तक पहुंचाने के लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाए।

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छत्तीसगढ़ में UCC लागू करने की तैयारी तेज, गोवा-उत्तराखंड मॉडल का होगा अध्ययन

छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की दिशा में राज्य सरकार ने प्रक्रिया तेज कर दी है। इसके लिए गठित उच्चस्तरीय समिति गोवा और उत्तराखंड में लागू यूसीसी के प्रावधानों का विस्तृत अध्ययन करेगी। साथ ही गुजरात, असम और मध्य प्रदेश में यूसीसी को लेकर बनी समितियों की रिपोर्ट और अनुभवों का भी विश्लेषण किया जाएगा, ताकि राज्य के लिए एक उपयुक्त मसौदा तैयार किया जा सके। समिति की अध्यक्षता पूर्व न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं। उनके साथ सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी शत्रुघ्न सिंह, एमके राउत, वरिष्ठ अधिवक्ता मोहन पवार और सेवानिवृत्त प्राचार्य ज्योति रानी सिंह सदस्य के रूप में शामिल हैं। अध्ययन के दौरान विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, संपत्ति के अधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े कानूनों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। गोवा और उत्तराखंड में लिव-इन संबंधों से जन्मे बच्चों को कानूनी अधिकार और संपत्ति में हिस्सेदारी देने जैसे प्रावधान मौजूद हैं। इन्हीं व्यवस्थाओं का मूल्यांकन कर छत्तीसगढ़ के लिए संभावित कानून तैयार किया जाएगा। राज्य में बड़ी आदिवासी आबादी को देखते हुए समिति यह भी जांच करेगी कि संविधान की पांचवीं और छठी अनुसूची के तहत संरक्षित जनजातीय परंपराओं, रीति-रिवाजों और प्रथागत कानूनों की सुरक्षा किस प्रकार सुनिश्चित की जा सकती है। उत्तराखंड की तरह छत्तीसगढ़ में भी अनुसूचित जनजातियों को यूसीसी के कुछ प्रावधानों से आंशिक या पूर्ण छूट देने की संभावना पर विचार किया जा सकता है। गोवा सिविल कोड के तहत पति-पत्नी को एक-दूसरे की संपत्ति में समान अधिकार प्राप्त हैं। तलाक की स्थिति में पत्नी को संपत्ति में बराबरी का हिस्सा मिल सकता है। माता-पिता की संपत्ति में बेटियों और बेटों को समान अधिकार दिए गए हैं। सामान्य रूप से एक से अधिक विवाह की अनुमति नहीं है, हालांकि हिंदू समुदाय से जुड़ा एक पुराना अपवाद कानून में मौजूद है, जिसे राज्य सरकार अब अप्रासंगिक मानती है और दशकों से इसका उपयोग नहीं हुआ है। वहीं उत्तराखंड यूसीसी कानून में सभी नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, गोद लेने और उत्तराधिकार संबंधी समान नियम बनाए गए हैं। बहुविवाह और एकतरफा तलाक पर रोक, विवाह का अनिवार्य पंजीकरण, लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीकरण, बेटा-बेटी को समान संपत्ति अधिकार और धर्मनिरपेक्ष गोद लेने की व्यवस्था इसके प्रमुख प्रावधान हैं। उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि संविधान निर्माताओं ने समान नागरिक संहिता का मार्ग पहले ही निर्धारित किया था और अब छत्तीसगढ़ भी उसी दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि समिति सभी वर्गों से चर्चा कर सुझावों के आधार पर मसौदा तैयार करेगी। दूसरी ओर, कांग्रेस ने इस पहल पर सवाल उठाए हैं। पूर्व मंत्री अमरजीत भगत का कहना है कि यूसीसी भारत जैसे विविधता वाले देश के लिए एक जटिल विषय है। उनके अनुसार यह सभी समुदायों के लिए समान रूप से उपयुक्त नहीं हो सकता और सरकार इसे राजनीतिक मुद्दे के रूप में आगे बढ़ा रही है।

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छत्तीसगढ़ में माइक्रो ब्रुअरी को मिली मंजूरी, अब स्थानीय स्तर पर मिलेगी फ्रेश क्राफ्ट बीयर

छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में माइक्रो ब्रुअरी खोलने की अनुमति दे दी है। इस फैसले के बाद अब प्रदेश में स्थानीय स्तर पर तैयार की जाने वाली फ्रेश क्राफ्ट बीयर उपलब्ध हो सकेगी। सरकार का कहना है कि इस नई व्यवस्था से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, होटल और रेस्टोरेंट उद्योग को बढ़ावा मिलेगा तथा राज्य के राजस्व में भी बढ़ोतरी होने की संभावना है। सरकार की मंजूरी के बाद अब माइक्रो ब्रुअरी स्थापित करने के लिए आबकारी विभाग लाइसेंस जारी करेगा। देश के कई राज्यों जैसे कर्नाटक, महाराष्ट्र, पंजाब, हरियाणा और गोवा में यह व्यवस्था पहले से लागू है। खासतौर पर बेंगलुरु अपनी क्राफ्ट बीयर संस्कृति के लिए काफी प्रसिद्ध माना जाता है। माइक्रो ब्रुअरी में सीमित मात्रा में बीयर तैयार की जाती है, जिसे मुख्य रूप से होटल और रेस्टोरेंट में परोसा जाता है। लाइसेंस प्राप्त करने के लिए आवेदक को 10 लाख रुपये की लाइसेंस फीस जमा करनी होगी और कम से कम 4 हजार वर्ग फीट भूमि उपलब्ध करानी होगी। क्राफ्ट बीयर पारंपरिक फैक्ट्री में बनने वाली बीयर से अलग होती है। इसे छोटे बैच में उच्च गुणवत्ता वाले माल्ट, हॉप्स और अन्य प्राकृतिक सामग्री से तैयार किया जाता है। इसी कारण इसका स्वाद अधिक ताज़ा और अलग-अलग फ्लेवर में उपलब्ध होता है। सरकार ने माइक्रो ब्रुअरी में बनने वाली क्राफ्ट बीयर पर 60 रुपये प्रति बल्क लीटर उत्पाद शुल्क निर्धारित किया है। वहीं एक गिलास क्राफ्ट बीयर की अनुमानित कीमत 250 से 300 रुपये के बीच हो सकती है।

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Chhattisgarh, Chhattisghar, GOVERNMENT

विधानसभा सत्र से पहले बड़ा प्रशासनिक फैसला, 17 जुलाई तक अधिकारी-कर्मचारियों की छुट्टियों पर रोक

छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिले में जिला प्रशासन ने सभी शासकीय अधिकारियों और कर्मचारियों की छुट्टियों पर अस्थायी रोक लगा दी है। जिला कलेक्टर संतन देवी जांगड़े ने आगामी विधानसभा मानसून सत्र को ध्यान में रखते हुए यह आदेश जारी किया है। प्रशासन के अनुसार, 13 जुलाई से 17 जुलाई 2026 तक चलने वाले विधानसभा सत्र के दौरान जिले से जुड़े मामलों की जानकारी और जवाब समय पर उपलब्ध कराने के लिए सभी अधिकारियों और कर्मचारियों का मुख्यालय में उपस्थित रहना आवश्यक होगा। इसी वजह से इस अवधि में सभी प्रकार के अवकाश तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिए गए हैं। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि इस दौरान बिना अनुमति कोई भी अधिकारी या कर्मचारी मुख्यालय नहीं छोड़ सकेगा। यदि किसी को अत्यंत आवश्यक या अपरिहार्य कारणों से अवकाश की जरूरत पड़ती है, तो उसे संबंधित विभागाध्यक्ष या कार्यालय प्रमुख से पूर्व लिखित स्वीकृति प्राप्त करनी होगी। जिला प्रशासन का कहना है कि विधानसभा सत्र के दौरान यदि जिले से संबंधित कोई प्रश्न उठता है, तो उसका समयबद्ध और तथ्यात्मक जवाब देने के लिए सभी विभागों का पूरी तरह तैयार रहना जरूरी है। इसी उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है।

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Chhattisgarh, raipur
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