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चलती 108 एम्बुलेंस बनी प्रसूति कक्ष, ईएमटी और पायलट की सतर्कता से महिला ने दिया स्वस्थ बच्ची को जन्म

चलती 108 एम्बुलेंस बनी प्रसूति कक्ष, ईएमटी और पायलट की सतर्कता से महिला ने दिया स्वस्थ बच्ची को जन्म राजनांदगांव जिले में 108 संजीवनी एक्सप्रेस एक बार फिर जीवनरक्षक साबित हुई। अस्पताल ले जाते समय एक गर्भवती महिला को अचानक तेज प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एम्बुलेंस में मौजूद ईएमटी और पायलट ने बिना घबराए अपनी ट्रेनिंग और सूझबूझ का परिचय दिया और चलते सफर के बीच ही सुरक्षित प्रसव कराया। मां और नवजात दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं। जानकारी के अनुसार, ग्राम खजरी निवासी राधिका यादव को प्रसव पीड़ा होने पर उनके पति सुदर्शन यादव ने सुबह करीब 7:30 बजे घुमका सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया था। जांच के बाद डॉक्टरों ने बेहतर उपचार के लिए उन्हें राजनांदगांव मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर कर दिया। राधिका को 108 संजीवनी एक्सप्रेस से मेडिकल कॉलेज ले जाया जा रहा था। इसी दौरान ग्राम डूमरडीह के पास उनकी प्रसव पीड़ा अचानक बेहद तेज हो गई। हालात को देखते हुए ईएमटी ललिता बघेल ने तुरंत एम्बुलेंस रुकवाने के निर्देश दिए। पायलट छगन साहू ने वाहन सुरक्षित स्थान पर रोका, जिसके बाद ईएमटी ने पूरी सावधानी और मेडिकल प्रोटोकॉल का पालन करते हुए एम्बुलेंस के भीतर ही सफल प्रसव कराया। राधिका यादव ने एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया। सुरक्षित प्रसव के बाद मां और नवजात को आगे के उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। दोनों की हालत सामान्य बताई जा रही है। इस मानवीय और साहसिक कार्य के लिए परिजनों ने 108 संजीवनी एक्सप्रेस की टीम का आभार जताया। उनका कहना है कि यदि एम्बुलेंस स्टाफ ने समय रहते सही निर्णय नहीं लिया होता, तो स्थिति गंभीर हो सकती थी।

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Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए बड़ी राहत! खाद खरीदने पर टोकन व्यवस्था खत्म | जानें नया नियम

छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए राहत भरी खबर! खाद खरीदने के लिए अब टोकन लेने की जरूरत नहीं होगी राज्य सरकार ने सहकारी समितियों और प्राथमिक कृषि साख समितियों (सोसायटियों) से रासायनिक खाद वितरण की टोकन व्यवस्था समाप्त कर दी है। अब किसान बिना किसी ई-टोकन या पूर्व पंजीकरण के सीधे खाद प्राप्त कर सकेंगे। कृषि विभाग ने इस संबंध में नए दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। अब किसानों को खाद का वितरण टोकन के बजाय उनकी कृषि भूमि के रकबे के आधार पर किया जाएगा, ताकि हर किसान को उसकी जरूरत के अनुसार खाद मिल सके। साथ ही छोटे और सीमांत किसानों को प्राथमिकता देते हुए उन्हें एक ही बार में आवश्यक मात्रा में खाद उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का कहना है कि खरीफ सीजन को देखते हुए पर्याप्त मात्रा में यूरिया, डीएपी और अन्य रासायनिक खाद का भंडारण पहले ही कर लिया गया है। पहले खाद की सीमित उपलब्धता के कारण तीन चरणों में टोकन व्यवस्था लागू की गई थी, जिससे वितरण को व्यवस्थित किया जा सके। इस फैसले पर केंद्रीय मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि जब प्रदेश में खाद की कमी थी, तब सभी किसानों तक समान रूप से खाद पहुंचाने के लिए टोकन व्यवस्था लागू की गई थी। अब पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध होने के कारण इस व्यवस्था की जरूरत नहीं रही। उन्होंने कहा कि नए निर्णय से किसानों को बार-बार समितियों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और वे एक ही बार में अपनी आवश्यकता के अनुसार खाद प्राप्त कर सकेंगे।

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Chhattisgarh

अबूझमाड़ में राजस्व सर्वे के बीच बढ़ी जंगलों की कटाई, सरकारी पट्टे की उम्मीद में साफ किए जा रहे वन क्षेत्र

छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ क्षेत्र में पहली बार हो रहे राजस्व सर्वे के बीच बड़े पैमाने पर जंगलों की कटाई का मामला सामने आया है। दावा किया जा रहा है कि सरकारी भूमि पट्टे मिलने की संभावना को देखते हुए कई स्थानों पर वन क्षेत्र साफ किए जा रहे हैं, ताकि जमीन पर कब्जे और दावे को मजबूत किया जा सके। पहली बार हो रहा राजस्व सर्वे आजादी के बाद पहली बार अबूझमाड़ क्षेत्र का राजस्व सर्वे कराया जा रहा है। बताया जा रहा है कि सर्वे के बाद पात्र लोगों को भूमि अधिकार और पट्टे दिए जा सकते हैं। इसी को लेकर क्षेत्र में यह धारणा फैल गई है कि अधिक जमीन पर कब्जा दिखाने से भविष्य में उसका लाभ मिल सकता है। कई गांवों में दिखी पेड़ों की कटाई जांच के दौरान नारायणपुर, ओरछा, इरकभट्टी, कच्चापाल, कोडलियार, पदमकोट, कुतुल और नेलांगूर सहित कई गांवों के आसपास बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई और जंगल जलाने की घटनाएं सामने आईं। कई स्थानों पर पेड़ों को पहले आंशिक रूप से काटकर सूखने के लिए छोड़ दिया जाता है, बाद में उन्हें गिराकर या जलाकर जमीन खाली की जा रही है। स्थानीय और लौटे हुए लोग भी कर रहे हैं कब्जे की तैयारी जानकारी के अनुसार, जंगल साफ करने वालों में स्थानीय आदिवासियों के साथ वे लोग भी शामिल हैं, जो नक्सल हिंसा, रोजगार या अन्य कारणों से वर्षों पहले गांव छोड़ चुके थे और अब वापस लौट रहे हैं। आरोप है कि कुछ लोग अधिक जमीन पर दावा मजबूत करने के लिए बड़े पैमाने पर वन क्षेत्र साफ कर रहे हैं। नक्सल प्रभाव कम होने के बाद बढ़ी गतिविधियां अबूझमाड़ लंबे समय तक नक्सल प्रभावित क्षेत्र रहा, जहां सुरक्षा कारणों से विकास कार्य सीमित थे। हाल के वर्षों में सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ने और नए कैंप स्थापित होने के बाद इलाके में सरकारी गतिविधियां तेज हुई हैं। इसके साथ ही जंगलों की कटाई की घटनाओं में भी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। पर्यावरण संरक्षण को लेकर उठी चिंता पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोगों ने इस मामले को गंभीर बताते हुए राज्य सरकार का ध्यान आकर्षित किया है। उनका कहना है कि अबूझमाड़ का बड़ा हिस्सा वन क्षेत्र की श्रेणी में आता है और यहां अनियंत्रित कटाई से जैव विविधता और पर्यावरण को नुकसान पहुंच सकता है। वन विभाग ने शुरू किए रोकथाम के प्रयास वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, अबूझमाड़ क्षेत्र के बेहतर प्रबंधन के लिए नए वन परिक्षेत्र के गठन का प्रस्ताव सरकार को भेजा गया है। इसके अलावा जंगलों की निगरानी और अवैध कटाई रोकने के लिए करीब 30 स्थानों पर स्थानीय युवाओं की नियुक्ति की गई है। अधिकारियों का कहना है कि वन संरक्षण के लिए आगे भी सख्त कदम उठाए जाएंगे।

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Raipur

बिलासपुर में विवाहिता की संदिग्ध मौत, मायके पक्ष ने लगाया हत्या का आरोप; पति ने कहा- पत्नी ने की आत्महत्या

बिलासपुर के सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र में 28 वर्षीय विवाहिता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। घटना के बाद मायके पक्ष ने पति और ससुराल वालों पर हत्या का आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग की है। वहीं पति का दावा है कि उसकी पत्नी ने फांसी लगाकर आत्महत्या की थी। पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है। शादी के बाद से प्रताड़ना का आरोप मृतका अदिति मौर्य मूल रूप से उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले की रहने वाली थीं। उनकी शादी वर्ष 2019 में बिलासपुर निवासी रविकांत मौर्य से हुई थी। दोनों की 13 महीने की एक बेटी भी है। मायके पक्ष का आरोप है कि शादी के कुछ समय बाद से ही अदिति को पति और ससुराल पक्ष द्वारा मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था। परिजनों का कहना है कि अदिति कई बार फोन पर अपने साथ होने वाली मारपीट और उत्पीड़न की जानकारी देती थी। हाल के दिनों में परिवार का उससे संपर्क भी नहीं हो पा रहा था और फोन पर बात कराने से भी मना किया जाता था। दूसरी महिला से संबंध को लेकर होता था विवाद मृतका के भाई का आरोप है कि रविकांत मौर्य का दूसरी महिला से संबंध था। उनका दावा है कि कुछ दिन पहले अदिति ने पति के मोबाइल में हुई चैट का वीडियो रिकॉर्ड कर अपनी बड़ी बहन को भेजा था। इसके बाद पति-पत्नी के बीच विवाद और बढ़ गया था। 23 जून को मारपीट का आरोप, फिर मिली मौत की सूचना परिजनों का आरोप है कि 23 जून को भी अदिति के साथ मारपीट की गई थी। इसके बाद जब उन्होंने ससुराल पक्ष से संपर्क किया तो पहले विवाद की जानकारी दी गई और कुछ समय बाद बताया गया कि अदिति की मौत हो गई है तथा उसे अस्पताल ले जाया गया है। परिवार के सदस्य उत्तर प्रदेश से बिलासपुर पहुंचे, जहां उन्हें अस्पताल में अदिति की मौत की जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने पति, सास-ससुर, ननद और नंदोई पर हत्या का आरोप लगाया। पति का दावा- फांसी लगाने की कोशिश की पुलिस को दिए गए बयान में पति रविकांत मौर्य ने बताया कि वह अपनी बेटी के साथ ऊपर के कमरे में था, जबकि अदिति नीचे थी। नीचे आने पर उसने पत्नी को बेड पर पड़ा देखा। उसके अनुसार अदिति ने सिल्क की साड़ी से फांसी लगाने का प्रयास किया था, लेकिन फंदा खुलने के कारण वह नीचे गिर गई। शरीर पर चोट के निशान मिलने का दावा मायके पक्ष का कहना है कि अदिति के हाथ, गर्दन, पैर और कान पर चोट के निशान थे। उनका आरोप है कि घटनास्थल पर ऐसी परिस्थितियां नहीं थीं, जिनसे आत्महत्या की पुष्टि हो सके। इसी आधार पर उन्होंने पुलिस से हत्या की आशंका जताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। एफएसएल टीम ने जुटाए साक्ष्य घटना की सूचना मिलते ही सिटी कोतवाली पुलिस और एफएसएल टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने पंचनामा कार्रवाई के बाद शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। एफएसएल टीम ने घटनास्थल से आवश्यक साक्ष्य एकत्र किए हैं। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बाद होगी आगे की कार्रवाई एडिशनल एसपी सिटी पंकज पटेल ने बताया कि मामले की जांच जारी है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और एफएसएल जांच के आधार पर मौत के कारणों का पता लगाया जाएगा। पुलिस सभी पहलुओं और परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी.

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बिलासपुर में चाकू की नोक पर युवक का अपहरण, गांजा केस में फंसाने की धमकी देकर मांगी 50 हजार की फिरौती

बिलासपुर में युवक के अपहरण और फिरौती मांगने के एक सनसनीखेज मामले का पुलिस ने खुलासा किया है। आरोपियों ने चाकू की नोक पर युवक का अपहरण कर उसे जंगल ले जाकर झूठे गांजा मामले में फंसाने की साजिश रची। इसके बाद परिवार से 50 हजार रुपये की फिरौती की मांग की गई। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए गिरोह के एक आरोपी और एक नाबालिग को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि दो अन्य आरोपी अभी फरार हैं। काम के बहाने घर से बुलाकर किया अपहरण पुलिस के अनुसार, रतनपुर थाना क्षेत्र के कलमीटार स्थित भेलवापारा निवासी 21 वर्षीय घनश्याम पाटले बुधवार दोपहर अपने घर के आंगन में मौजूद था। इसी दौरान इशांत सारथी, सोम रजक, निखिल रजक उर्फ एलियन और उनके साथियों ने उसे काम का बहाना बनाकर बाहर बुलाया। बाहर निकलते ही आरोपियों ने उसके गले पर चाकू रख दिया और जबरन बाइक पर बैठाकर कोरबा-भांवर के जंगल की ओर ले गए। गांजा के साथ फोटो खींचकर रची साजिश जंगल में आरोपियों ने एक कागज पर गांजा रखकर पीड़ित के साथ उसकी तस्वीर खींची। इसके बाद उसे धमकी दी गई कि यदि उनकी बात नहीं मानी तो उसे झूठे एनडीपीएस मामले में फंसा दिया जाएगा। डर के माहौल में आरोपियों ने युवक से उसकी मां को फोन करवाया। परिवार से मांगी 50 हजार रुपये की फिरौती आरोपियों के दबाव में युवक ने अपनी मां से कहा कि वह गांजे के साथ पकड़ा गया है और मामले से बचने के लिए 50 हजार रुपये की जरूरत है। इसके बाद आरोपियों ने परिजनों को रकम लेकर पहले महामाया मंदिर बाईपास स्थित बादल महल के पास बुलाया, लेकिन बाद में लगातार अपनी लोकेशन बदलते रहे। पुलिस ने पीछा कर दबोचा पीड़ित के जीजा को पूरे घटनाक्रम पर शक हुआ और उन्होंने तुरंत रतनपुर पुलिस को सूचना दी। थाना प्रभारी के नेतृत्व में पुलिस टीम सादे कपड़ों में आरोपियों का पीछा करती रही। जब आरोपी फिरौती की रकम लेने के लिए लोकेशन बदल रहे थे, तभी पुलिस ने घेराबंदी कर इशांत सारथी और एक नाबालिग को पकड़ लिया। दो आरोपी अब भी फरार कार्रवाई के दौरान सोम रजक और यश नामक आरोपी मौके से फरार हो गए। पुलिस उनकी तलाश में लगातार दबिश दे रही है। गिरफ्तार आरोपी इशांत सारथी को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया है, जबकि नाबालिग को बाल संप्रेक्षण गृह भेजा गया है। पुलिस मामले की आगे की जांच कर रही है।

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Bilaspur, Crime

रायपुर मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों की कमी और गहराई, प्रोफेसर बनने के बाद 17 शिक्षकों का हुआ तबादला

रायपुर के सरकारी मेडिकल कॉलेज में शिक्षकों की कमी लगातार बनी हुई है। हाल ही में 21 डॉक्टरों को प्रोफेसर पद पर पदोन्नत किया गया, लेकिन इनमें से 17 डॉक्टरों का विभिन्न सरकारी मेडिकल कॉलेजों में तबादला कर दिया गया। इससे पहले से स्टाफ की कमी से जूझ रहे मेडिकल कॉलेज पर अतिरिक्त दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। 417 में से 166 पद अब भी खाली मेडिकल कॉलेज में शिक्षकों के कुल 417 स्वीकृत पद हैं, जिनमें से 166 पद अभी भी रिक्त हैं। वर्तमान में 251 डॉक्टर शिक्षण कार्य कर रहे हैं। इनमें 156 नियमित और 95 संविदा पर कार्यरत हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि शिक्षकों की कमी का सीधा असर मेडिकल छात्रों की पढ़ाई और पीजी सीटों की संख्या पर पड़ता है। पहले भी घट चुकी हैं पीजी सीटें शिक्षकों की कमी का असर पहले भी देखने को मिला है। वर्ष 2025 में सर्जरी विभाग में पर्याप्त फैकल्टी नहीं होने के कारण पीजी की दो सीटें कम करनी पड़ी थीं। ऐसे में यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो भविष्य में अन्य विभाग भी प्रभावित हो सकते हैं। प्रदेशभर के मेडिकल कॉलेजों में भी स्टाफ की कमी केवल रायपुर ही नहीं, बल्कि प्रदेश के सभी सरकारी मेडिकल और डेंटल कॉलेज भी फैकल्टी की कमी से जूझ रहे हैं। राज्य के 10 सरकारी मेडिकल कॉलेज और एक सरकारी डेंटल कॉलेज में कुल 1,934 स्वीकृत शिक्षकों के पद हैं, जिनमें से 985 पद खाली हैं। यानी लगभग 51 प्रतिशत पदों पर अब भी नियुक्तियां नहीं हो सकी हैं। सुपरस्पेशलिटी अस्पतालों में भी डॉक्टरों की कमी रायपुर के डीकेएस सुपरस्पेशलिटी अस्पताल और बिलासपुर के सुपरस्पेशलिटी अस्पताल की स्थिति भी चिंताजनक है। दोनों संस्थानों में कुल 139 स्वीकृत पदों में से 81 पद खाली हैं, जिससे मरीजों को विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने में भी चुनौतियां सामने आ रही हैं। ढाई साल में 100 से अधिक डॉक्टरों ने छोड़ी नौकरी नियमित भर्ती प्रक्रिया लंबे समय से लंबित रहने के कारण कई डॉक्टर सरकारी सेवा छोड़ चुके हैं। पिछले करीब ढाई वर्षों में आंबेडकर अस्पताल और डीकेएस अस्पताल से 100 से अधिक डॉक्टर इस्तीफा दे चुके हैं। इनमें से कई डॉक्टर बेहतर अवसर मिलने पर मध्यप्रदेश, राजस्थान और अन्य राज्यों के मेडिकल संस्थानों में कार्यरत हो गए। इन विभागों के डॉक्टरों का हुआ तबादला पदोन्नति के बाद जिन डॉक्टरों का तबादला किया गया है, वे फॉरेंसिक मेडिसिन, फार्माकोलॉजी, एनाटॉमी, माइक्रोबायोलॉजी, मेडिसिन, गायनिक, ईएनटी, सर्जरी, दंत रोग, एनेस्थीसिया, चर्म रोग और रेडियोथेरेपी विभाग से जुड़े हैं। इनकी नई पदस्थापना कवर्धा, जांजगीर-चांपा, दंतेवाड़ा, मनेंद्रगढ़, महासमुंद, दुर्ग, कांकेर और बिलासपुर के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में की गई है.

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GOVERNMENT, Raipur, State, Top News

रायपुर में कोचिंग सेंटर्स की सुरक्षा जांच तेज, कई संस्थानों को नोटिस; फायर सेफ्टी और इमरजेंसी व्यवस्था में मिली खामियां

रायपुर में कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था की जांच लगातार दूसरे दिन भी जारी रही। नगर निगम, अग्निशमन विभाग और अन्य संबंधित विभागों की संयुक्त टीम ने शहर के कई प्रमुख कोचिंग सेंटरों का औचक निरीक्षण किया। जांच के दौरान फायर सेफ्टी, वेंटिलेशन, लिफ्ट सुरक्षा और इमरजेंसी एग्जिट जैसी व्यवस्थाओं में कई कमियां सामने आने पर संबंधित संचालकों को नोटिस जारी किए गए। प्रमुख कोचिंग संस्थानों का हुआ निरीक्षण निरीक्षण के दौरान एलन, अनअकादमी, विद्यापीठ, आरसीसी और अकादजा कोचिंग संस्थानों की जांच की गई। अधिकारियों ने पाया कि एलन, अनअकादमी और विद्यापीठ की कुछ कक्षाओं में निर्धारित क्षमता से अधिक विद्यार्थियों को बैठाया जा रहा था। इसके अलावा कई स्थानों पर वेंटिलेशन व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं मिली। वहीं आरसीसी और अकादजा में फायर सेफ्टी, प्रवेश और निकास मार्ग, वेंटिलेशन तथा अन्य सुरक्षा मानकों में कई कमियां पाई गईं। अधिकारियों ने इन संस्थानों को एक सप्ताह के भीतर सभी खामियां दूर करने के निर्देश दिए हैं। तीन कोचिंग सेंटरों को जारी किया गया नोटिस नगर निगम के जोन-3 की टीम ने चाणक्य, इम्पैक्ट और क्लेट कोचिंग सेंटर का निरीक्षण किया। आनंद नगर स्थित चाणक्य कोचिंग सेंटर में संचालक फायर ऑडिट प्रमाणपत्र प्रस्तुत नहीं कर सके। इसके अलावा इमरजेंसी एग्जिट के सामने फर्नीचर रखा मिला, जिसे सुरक्षा नियमों का उल्लंघन माना गया। इस पर संचालक को नोटिस जारी किया गया। शंकर नगर के गीतांजलि नगर स्थित इम्पैक्ट कोचिंग सेंटर में फायर सेफ्टी सिस्टम पर्याप्त नहीं पाया गया। अधिकारियों ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए तत्काल सुधार के निर्देश दिए। इसी तरह शंकर नगर सेक्टर-1 स्थित क्लेट कोचिंग सेंटर में लिफ्ट का अलार्म सिस्टम बंद मिला। साथ ही लिफ्ट संचालन व्यवस्था भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं पाई गई। इस मामले में भी संचालक को नोटिस जारी कर निर्धारित समय के भीतर जवाब मांगा गया है। अन्य कोचिंग संस्थानों की भी हुई जांच निरीक्षण अभियान के तहत नगर निगम के विभिन्न जोनों में कृतविद्या, उड़ान, फुदान और दिल्ली आईएएस अकादमी स्टडी पॉइंट सहित अन्य कोचिंग संस्थानों की भी जांच की गई। अधिकारियों ने सभी संस्थानों को सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन करने और आवश्यक व्यवस्थाएं दुरुस्त रखने के निर्देश दिए। सुरक्षा नियमों के पालन पर रहेगा विशेष जोर हाल के समय में देशभर में कोचिंग संस्थानों में हुई दुर्घटनाओं के बाद प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सख्ती बढ़ा दी है। अधिकारियों का कहना है कि जिन संस्थानों में फायर सेफ्टी और अन्य आवश्यक सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जाएगा, उनके खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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Raipur

छत्तीसगढ़ में UCC लागू करने की दिशा में बड़ा कदम, सरकार ने बनाई 5 सदस्यीय हाई लेवल कमेटी

छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code – UCC) लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है। यह समिति यूसीसी का प्रारूप तैयार करने के साथ-साथ विभिन्न पक्षों का अध्ययन कर सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा 25 जून को जारी आदेश के अनुसार, समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई करेंगी। समिति में शत्रुघ्न सिंह, एम.के. राउत, मोहन पवार और ज्योति रानी सिंह को सदस्य बनाया गया है। किन विषयों पर करेगी अध्ययन समिति राज्य में लागू विभिन्न व्यक्तिगत कानूनों (पर्सनल लॉ) का अध्ययन करेगी। इसके अंतर्गत विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, दत्तक ग्रहण तथा अन्य नागरिक मामलों से जुड़े मौजूदा कानूनी प्रावधानों की समीक्षा की जाएगी। अध्ययन के आधार पर समान नागरिक संहिता का मसौदा तैयार किया जाएगा। आम जनता और विशेषज्ञों से भी लिए जाएंगे सुझाव सरकार ने समिति को निर्देश दिया है कि वह नागरिकों, सामाजिक संगठनों, विधि विशेषज्ञों और अन्य संबंधित पक्षों से सुझाव प्राप्त करे। इसके अलावा उन राज्यों के अनुभवों का भी अध्ययन किया जाएगा, जहां यूसीसी लागू हो चुकी है या इस दिशा में ठोस पहल की गई है। रिपोर्ट मिलने के बाद सरकार करेगी फैसला समिति अपनी विस्तृत रिपोर्ट और यूसीसी का ड्राफ्ट राज्य सरकार को सौंपेगी। इसके साथ आवश्यक विधायी और प्रशासनिक सुझाव भी दिए जाएंगे। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि सरकार सभी पहलुओं पर व्यापक विचार-विमर्श और अध्ययन के बाद आगे की प्रक्रिया तय करेगी। यूसीसी लागू होने पर क्या बदलेगा यदि राज्य में समान नागरिक संहिता लागू होती है तो विवाह, तलाक, संपत्ति का उत्तराधिकार, गोद लेने और भरण-पोषण जैसे मामलों में सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून लागू होगा। वर्तमान में अलग-अलग धर्मों के लोग अपने-अपने पर्सनल लॉ के अनुसार इन मामलों का पालन करते हैं। सरकार का कहना है कि यूसीसी का उद्देश्य नागरिकों के लिए समान कानूनी व्यवस्था सुनिश्चित करना, विभिन्न व्यक्तिगत कानूनों के कारण होने वाली असमानताओं को कम करना तथा महिलाओं को समान अधिकार प्रदान करना है। किन राज्यों में लागू है यूसीसी उत्तराखंड देश का पहला राज्य है जहां समान नागरिक संहिता लागू की जा चुकी है। इसके अलावा गुजरात और असम ने भी यूसीसी से संबंधित विधेयक पारित किए हैं। वहीं गोवा में पुर्तगाली शासनकाल से लागू गोवा सिविल कोड आज भी प्रभावी है, हालांकि इसमें कुछ विशेष प्रावधान होने के कारण इसे पूर्ण आधुनिक यूसीसी नहीं माना जाता। छत्तीसगढ़ में गठित यह समिति राज्य में यूसीसी लागू करने की दिशा में शुरुआती और महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। समिति की रिपोर्ट के आधार पर सरकार आगे की कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया तय करेगी।

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11 हजार वोल्ट की बिजली लाइन पर चढ़कर सो गया नशे में धुत युवक, घंटों बंद रही बिजली सप्लाई

उत्तर प्रदेश के महाराजगंज जिले से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां नशे की हालत में एक युवक बिजली के खंभे पर चढ़ गया और 11 हजार वोल्ट की हाई-टेंशन लाइन के पास जाकर आराम से सो गया। घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया और लोगों की भीड़ मौके पर जमा हो गई। जानकारी के अनुसार, युवक नशे में था और अचानक बिजली के खंभे पर चढ़कर हाई-टेंशन लाइन तक पहुंच गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बिजली विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों को तुरंत सूचना दी गई। किसी भी संभावित हादसे से बचने के लिए अधिकारियों ने पूरी लाइन की बिजली सप्लाई बंद कर दी। बताया जा रहा है कि युवक काफी देर तक वहीं सोता रहा, जबकि नीचे खड़े अधिकारी और बिजली विभाग के कर्मचारी उसकी सुरक्षा को लेकर चिंतित रहे। घंटों की मशक्कत के बाद जब युवक को होश आया, तब अधिकारियों ने उसे सुरक्षित नीचे उतरने के लिए समझाया। आखिरकार वह बिना किसी नुकसान के नीचे उतर आया। युवक के सुरक्षित नीचे आने के बाद बिजली आपूर्ति दोबारा बहाल की गई। इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिस पर लोग तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। गौरतलब है कि कुछ महीने पहले उत्तर प्रदेश के भदोही जिले में भी एक नशे में धुत व्यक्ति हाई-टेंशन ट्रांसमिशन टावर पर चढ़ गया था। उस दौरान भी बिजली विभाग को सप्लाई बंद कर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाना पड़ा था। विशेषज्ञों का कहना है कि हाई-टेंशन बिजली लाइनों के आसपास इस तरह की लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है। समय रहते बिजली विभाग और प्रशासन की सतर्कता के कारण इस बार एक बड़ा हादसा टल गया।

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अहमदाबाद एयरपोर्ट पर टला बड़ा हादसा, टैक्सीवे पर आमने-सामने आए एयर इंडिया और इंडिगो के विमान

गुजरात के अहमदाबाद एयरपोर्ट पर मंगलवार शाम एक संभावित बड़ा विमान हादसा टल गया, जब एयर इंडिया और इंडिगो के दो विमान टैक्सीवे पर कुछ समय के लिए आमने-सामने आ गए। एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई से स्थिति को तुरंत संभाल लिया गया, जिससे किसी भी प्रकार की दुर्घटना नहीं हुई। जानकारी के अनुसार, मुंबई से अहमदाबाद पहुंची एयर इंडिया की फ्लाइट AI2493 लैंडिंग के बाद टैक्सीिंग कर रही थी। इसी दौरान विमान निर्धारित मार्ग से भटककर गलत दिशा में मुड़ गया और टेकऑफ की तैयारी कर रही इंडिगो की फ्लाइट के सामने पहुंच गया। घटना शाम करीब 7:59 बजे की बताई जा रही है। जैसे ही स्थिति की जानकारी ATC को मिली, तत्काल आवश्यक निर्देश जारी किए गए और दोनों विमानों को सुरक्षित दूरी पर नियंत्रित कर लिया गया। एयर इंडिया ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि टैक्सीिंग के दौरान विमान अनजाने में गलत दिशा में मुड़ गया था। हालांकि इस दौरान यात्रियों और चालक दल की सुरक्षा पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। बाद में विमान को सुरक्षित रूप से टो कर पार्किंग बे तक पहुंचाया गया। एयरलाइन ने बताया कि घटना की जानकारी संबंधित नियामक एजेंसियों को दे दी गई है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि संचालन के दौरान यह चूक कैसे हुई और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं। घटना के बाद एयरपोर्ट संचालन और विमान सुरक्षा प्रबंधन को लेकर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि पूरी स्थिति नियंत्रण में थी और समय रहते हस्तक्षेप कर किसी भी संभावित खतरे को टाल दिया गया।

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