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बिरगांव में लव साहू पर जानलेवा हमला, आरोपी गिरफ़्तार कर सड़क पर निकाला गया जुलूस

रायपुर। राजधानी के बिरगांव क्षेत्र में 25 मई की रात एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई, जहाँ स्थानीय निवासी लव साहू पर चाकू से जानलेवा हमला किया गया। यह हमला भनपुरी और बिरगांव के दो युवकों ने आपसी रंजिश के चलते किया। पीड़ित लव साहू को गंभीर हालत में NKD अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उसकी स्थिति नाजुक बताई है। जानकारी के अनुसार, आरोपी रेहान खान (पिता अब्दुल रियाज खान, उम्र 21 वर्ष, निवासी बाजार चौक, भनपुरी, थाना खमतराई) और जुबेर अली उर्फ लक्की अली (पिता स्व. जाकिर अली, उम्र 25 वर्ष, निवासी गाजीनगर, थाना उरला) के खिलाफ क्रमशः अपराध क्रमांक 102/25 एवं 103/25 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 190, 191(3), 109(1), 25, 27 एवं आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। उरला थाना प्रभारी बी.एल. चंद्राकर ने बताया कि दोनों आरोपियों को पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए गिरफ़्तार कर लिया। उन्हें गैर-जमानती धाराओं में जेल भेज दिया गया है। इस कड़ी कार्रवाई के तहत दोनों आरोपियों का जुलूस बिरगांव की सड़कों पर निकाला गया, ताकि समाज में यह संदेश जाए कि अपराध करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। घटना के बाद लव साहू को रात 2:20 मिनट पर NKD अस्पताल लाया गया। डॉक्टर रतन नाग ने न्यूज़22 भारत से बातचीत में बताया कि लव साहू के शरीर पर 4-5 गंभीर घाव हैं और पेट की आँतें बाहर आ गई थीं। उन्हें 72 घंटे के लिए ICU में रखा गया है और उनकी हालत अब भी चिंताजनक बनी हुई है। बिरगांव ही नहीं, पूरे रायपुर में लगातार चाकूबाजी की घटनाएं सामने आ रही हैं, जिससे आम नागरिकों में भय का माहौल है। पुलिस प्रशासन ने सख्त रवैया अपनाते हुए ऐसे मामलों पर तुरंत कार्रवाई का भरोसा दिलाया है।

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Birgaon

74 साल के बुजुर्ग ने 20 साल बाद लौटकर पत्नी की गला दबाकर हत्या, खुद थाने पहुंचकर दिया जुर्म कबूल

रायपुर के बेलटुकरी गांव में 74 वर्षीय बुजुर्ग ने अपनी 71 वर्षीय पत्नी की हत्या कर दी। हत्या के बाद आरोपी खुद गंज थाने पहुंचा और पुलिस को घटना की जानकारी दी। मृतका का नाम शांति धीवर और आरोपी पति का नाम बिषरू धीवर बताया गया है। पुलिस को सूचना मिलते ही खरोरा थाने की टीम तुरंत रायपुर रवाना हुई और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार, बिषरू धीवर ने अपनी पत्नी शांति धीवर का गला दबाकर हत्या की है। घटना के बाद आरोपी सीधे पुलिस के पास जाकर खुद को सौंप गया। स्थानीय लोगों के मुताबिक, बिषरू धीवर 20 सालों से गांव से दूर था और करीब एक माह पहले ही वापस आया था। घर में पति-पत्नी के अलावा उनका 45 वर्षीय बेटा भी रहता है, जिसकी पत्नी पहले ही छोड़कर जा चुकी है। घटना के समय घर में केवल पति-पत्नी मौजूद थे। पुलिस की शुरुआती जांच में यह प्रतीत होता है कि महिला की हत्या तकिए से चेहरा दबाकर और गला दबाकर की गई है। खरोरा थाना प्रभारी दीपक पासवान ने बताया कि मामले की जांच अभी जारी है।

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Raipur

अनजान नंबर पर क्लिक कर दो प्रोफेसरों ने गंवाए 90 हजार रुपये, साइबर ठगी का शिकार हुए बीआईटी के स्टाफ

बीआईटी के प्राचार्य, डीन और कई प्रोफेसरों को साइबर ठगों ने अपना निशाना बनाया है। शुक्रवार को कॉलेज के कई स्टाफ के मोबाइल पर एक अनजान नंबर से कॉल और मैसेज आए, जिन्हें क्लिक करने से कुल दो प्रोफेसर 90 हजार रुपये की ठगी का शिकार हो गए। बताया जा रहा है कि गुरुवार दोपहर को ब्ल्यू डॉट नाम के एक नंबर से कॉल आया, जिसमें पार्सल आने की बात कही गई लेकिन पता न मिलने की बात कही गई। इसके बाद भेजे गए लिंक को जब दो प्रोफेसरों ने क्लिक किया तो उनके मोबाइल में गड़बड़ी होने लगी और उनका व्हाट्सऐप बंद हो गया। इसके बाद प्रोफेसर अभिजित दास और हीना मिश्रा ने सोच कर कि उनके साथी रुपए मांग रहे हैं, गूगल पे के जरिए 45-45 हजार रुपये साइबर ठगों के अकाउंट में भेज दिए। बीआईटी के डीन संतोष सार ने बताया कि कॉलेज के कई स्टाफ को इस ब्लू डॉट नंबर से ऐसे कॉल आए, जिसमें प्रोफेसर मौसम शर्मा, अभिजित दास, हीना मिश्रा, अनुपम अग्रवाल, अभिषेक वर्मा, सुनील और सक्सेना के मोबाइल को हैक कर लिया गया है। ठगी की शिकायत संबंधित अधिकारियों को 1930 नंबर पर दर्ज कराई गई है। साइबर एक्सपर्ट्स ने इस घटना को गंभीर बताया है और लोगों से सतर्क रहने की अपील की है कि वे अनजान नंबर या लिंक पर कभी क्लिक न करें, खासकर जब उन्हें संदिग्ध संदेश आए।

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Bhilai / Durg

रजिस्ट्री में जुड़ी 10 नई सुविधाएं, लेकिन स्वत: नामांतरण में अभी भी देरी

राजस्व विभाग ने रजिस्ट्री की प्रक्रिया को सरल और डिजिटल बनाने के लिए 10 नई सुविधाएं लागू की हैं। इनमें सबसे अहम सुविधा है “स्वतः नामांतरण”, जिसके तहत रजिस्ट्री पूरी होते ही संबंधित खरीदार का नाम राजस्व रिकॉर्ड में खुद-ब-खुद दर्ज हो जाना चाहिए। इससे पहले तक नामांतरण के लिए पटवारी और तहसील कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे, जिससे कई बार महीनों की देरी होती थी। हालांकि इस नई सुविधा के बावजूद जिले के लोगों को इसका लाभ तुरंत नहीं मिल पा रहा है। पिछले एक सप्ताह में हुई कई रजिस्ट्री के मामलों में स्वत: नामांतरण नहीं हो पाया है, जिससे पक्षकारों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अधिकारियों के अनुसार, नई प्रणाली में तकनीकी बदलाव किए जा रहे हैं और सर्वर अपग्रेड हो रहा है, जिस कारण शुरुआती दिनों में कुछ दिक्कतें आ रही हैं। लेकिन जल्द ही सभी समस्याएं दूर हो जाएंगी और यह सुविधा आम नागरिकों के लिए पूरी तरह सुगम हो जाएगी। इस सुविधा से भविष्य में नागरिकों को न सिर्फ समय और पैसे की बचत होगी, बल्कि फर्जीवाड़े के मामलों में भी कमी आएगी। पहले रजिस्ट्री के बाद संपत्ति को नामांतरण से पहले किसी और को बेचने जैसे धोखाधड़ी के मामले सामने आते थे। लेकिन अब रजिस्ट्री के साथ ही स्वत: नाम दर्ज हो जाने से यह खतरा कम हो जाएगा। जांजगीर में पेंडिंग हैं दर्जनों नामांतरणजांजगीर जिले के उप पंजीयक कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, पिछले सप्ताह डिजिटल सिग्नेचर की अनुपलब्धता के कारण नामांतरण की प्रक्रिया रुकी हुई थी। हालांकि अब शुक्रवार से प्रक्रिया फिर से शुरू हो गई है और सभी लंबित नामांतरण जल्द ही पूरे कर लिए जाएंगे। नई 10 सुविधाएं इस प्रकार हैं: इन बदलावों के बाद उम्मीद है कि आम जनता को रजिस्ट्री और नामांतरण जैसी प्रक्रियाओं में बड़ी राहत मिलेगी और भ्रष्टाचार व धोखाधड़ी पर अंकुश लगेगा।

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जशपुर में छह सड़कों के निर्माण को मिली मंजूरी, 18 करोड़ से अधिक की लागत से सुधरेगा आवागमन

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल पर जशपुर जिले में आवागमन को आसान बनाने के लिए छह प्रमुख सड़कों के निर्माण कार्यों को 18 करोड़ 46 लाख 87 हजार रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति मिल गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन सड़कों के निर्माण से जिले के नागरिकों को स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली, पानी के साथ-साथ यातायात की भी बेहतर सुविधा मिलेगी। इन परियोजनाओं की मंजूरी से क्षेत्र में विकास की गति तेज होगी और लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी में सुधार आएगा। इन सड़कों को मिली स्वीकृतिराज्य शासन द्वारा वर्ष 2024-25 के बजट में शामिल जशपुर जिले की विभिन्न सड़कों के निर्माण हेतु निम्नलिखित परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है: दो और सड़कों को 7 करोड़ से अधिक की स्वीकृतिइसके अतिरिक्त, जिले की दो अन्य महत्वपूर्ण सड़कों के निर्माण के लिए भी राज्य शासन से 7 करोड़ 65 लाख 41 हजार रुपये की मंजूरी प्राप्त हुई है। जनता में खुशी की लहरइन विकास कार्यों से जिले में आवागमन की सुविधा अत्यधिक सुगम हो जाएगी। मुख्यमंत्री के प्रयासों से मिली इन स्वीकृतियों से जशपुर के नागरिकों में प्रसन्नता की लहर है, और विकास की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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गरीब मां की बेबसी: जन्म प्रमाण पत्र में सुधार के लिए घूस देनी पड़ी, चावल बेचकर जुटाए पैसे

कोरबा, छत्तीसगढ़।जिले के पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड के बंजारी गांव की रहने वाली एक गरीब महिला, अमिषा धनुहार, इन दिनों अपने बच्चे के जन्म प्रमाण पत्र में हुई गलती को सुधारवाने के लिए परेशान है। दुर्भाग्यवश, उसे यह काम बिना रिश्वत दिए मुमकिन नहीं लग रहा। अमिषा के पास इतने पैसे नहीं थे कि वह कर्मचारी की मांग पूरी कर सके, इसलिए उसने सरकारी राशन की दुकान से मिले चावल बेचकर 500 रुपये इकट्ठा किए ताकि वह कर्मचारी को रिश्वत दे सके। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें अमिषा अपनी आपबीती सुनाते हुए रो पड़ती है। वीडियो में उसकी आंखों से बहते आंसू उसकी बेबसी बयां कर रहे हैं। जानकारी के अनुसार, अमिषा ने अपने 10 महीने के बेटे का जन्म प्रमाण पत्र बनवाया था, लेकिन उसमें कुछ त्रुटि रह गई। जब वह इसे ठीक करवाने बंजारी के उप-स्वास्थ्य केंद्र पहुंची, तो वहां मौजूद महिला कर्मचारी ने उससे 500 रुपये की मांग की और साफ कहा कि जब तक पैसे नहीं दिए जाएंगे, प्रमाण पत्र नहीं सुधारा जाएगा। अमिषा का कहना है कि जब उसने बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र पहली बार बनवाया था, तब भी उसे 500 रुपये घूस देने पड़े थे। अब फिर से उसी प्रक्रिया से गुजरना पड़ रहा है। यह सब बताते हुए महिला खुद को संभाल नहीं पाई और भावुक हो गई। वीडियो में उसकी पीड़ा स्पष्ट दिखाई देती है। इस घटना ने एक बार फिर सरकारी व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार को उजागर किया है, जहां एक जरूरतमंद मां को अपने बच्चे का बुनियादी दस्तावेज पाने के लिए रिश्वत देने और घर का राशन तक बेचना पड़ रहा है।

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मेडिकल कॉलेज अस्पताल में युवक की संदिग्ध मौत, परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया

रायगढ़ के मेडिकल कॉलेज अस्पताल में पेट दर्द की शिकायत के साथ भर्ती हुए 24 वर्षीय अनिकेत यादव की मौत हो गई। घटना के बाद मृतक के परिजनों ने डॉक्टरों पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। परिजनों का कहना है कि समय पर उचित इलाज नहीं मिलने की वजह से अनिकेत की जान चली गई। मिली जानकारी के अनुसार, अनिकेत को गुरुवार को अचानक पेट में तेज दर्द हुआ, जिसके बाद उसे मेडिकल कॉलेज अस्पताल लाया गया। प्रारंभिक जांच के बाद डॉक्टरों ने खून की जांच कराई, जिसकी रिपोर्ट दोपहर तक आई। इसके बाद डॉक्टरों ने सोनोग्राफी कराने की सलाह दी, लेकिन उस समय अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट मौजूद नहीं था। लंबे इंतजार के बावजूद सोनोग्राफी नहीं हो पाई। स्थिति बिगड़ने पर अनिकेत को कोरबा के एक निजी सेंटर में सीटी स्कैन के लिए रेफर किया गया। वहीं, तबीयत और खराब होने पर उसे फिर मेडिकल कॉलेज अस्पताल लाया गया। अनिकेत को सांस लेने में परेशानी हो रही थी, लेकिन परिजनों के बार-बार आग्रह के बावजूद उसे समय पर ऑक्सीजन बेड उपलब्ध नहीं कराया गया। परिजनों का आरोप है कि डॉक्टरों ने ऑक्सीजन देने का आश्वासन तो दिया, लेकिन इंतजार करते-करते अनिकेत ने दम तोड़ दिया। इस घटना से नाराज परिजनों ने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया और डॉक्टरों पर गंभीर आरोप लगाए। मामला बढ़ता देख अस्पताल प्रबंधन ने घटना की जांच के आदेश दिए हैं। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि मृतक के शव का पोस्टमार्टम कराया गया है और रिपोर्ट आने के बाद मौत के कारणों की पुष्टि की जाएगी। जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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सोलर प्रोजेक्ट के नाम पर 1.50 करोड़ की ठगी, कारोबारी के साथ धोखाधड़ी करने वाला आरोपी बिहार से गिरफ्तार

भिलाई। सोलर स्ट्रीट लाइट प्रोजेक्ट में मोटे मुनाफे का लालच देकर कारोबारी से 1.50 करोड़ रुपये की ठगी करने वाले आरोपी को पुलिस ने बिहार से गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी की पहचान मुंबई स्थित संजीवीटी इंटरप्राइजेस लिमिटेड के संचालक प्रेमजीत शर्मा के रूप में हुई है। इस मामले की शिकायत भिलाई के दिघवा निवासी जसमिंदर सिंह ने दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि प्रेमजीत शर्मा ने नेपाल में सोलर स्ट्रीट लाइट लगाने के प्रोजेक्ट में निवेश करने का प्रस्ताव दिया और बड़े मुनाफे का भरोसा दिलाया। इस झांसे में आकर जसमिंदर सिंह ने 1 करोड़ 50 लाख रुपये निवेश कर दिए। हालांकि, निवेश के बाद आरोपी ने नेपाल में भारी बारिश के कारण प्रोजेक्ट बंद हो जाने की बात कही और नया अनुबंध नाइजीरिया में होने का दावा किया। लेकिन जब नाइजीरिया प्रोजेक्ट के दस्तावेजों की जांच हुई, तो वे भी फर्जी निकले। शिकायत की पुष्टि के बाद स्मृति नगर चौकी प्रभारी गुरविंदर सिंह संधु अपनी टीम के साथ बिहार पहुंचे और आरोपी प्रेमजीत शर्मा को गिरफ्तार कर लिया। एएसपी पद्मश्री तंवर ने बताया कि आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया गया है और आगे की जांच जारी है।

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Bhilai / Durg

रायपुर में दर्ज हुआ कोरोना का पहला मामला: एक खौफनाक दौर की शुरुआत

रायपुर, छत्तीसगढ़ — साल 2020 में जब पूरी दुनिया सामान्य जीवन जी रही थी, किसी ने भी नहीं सोचा था कि कुछ ही दिनों में हर गली, हर घर और हर देश पर एक अदृश्य खतरा मंडराने लगेगा। यही वह समय था जब रायपुर में कोरोना वायरस (COVID-19) का पहला मामला सामने आया। यह एक ऐसा क्षण था जिसने न सिर्फ शहर बल्कि पूरे राज्य की चिंता और भय को जन्म दिया। कोरोना वायरस की शुरुआत चीन के वुहान शहर से हुई थी, लेकिन इसकी भयावहता जल्द ही अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को पार करते हुए भारत में भी फैल गई। जब रायपुर में पहला संक्रमित मरीज मिला, तब तक देशभर में यह महामारी चिंता का विषय बन चुकी थी। लेकिन जैसे ही इस वायरस ने छत्तीसगढ़ में दस्तक दी, लोगों की चिंता और डर कई गुना बढ़ गया। रायपुर में संक्रमित मरीज की पुष्टि होते ही स्वास्थ्य विभाग ने हाई अलर्ट घोषित कर दिया। जिले भर में सघन संपर्क ट्रेसिंग, सैंपल कलेक्शन और क्वारंटीन की व्यवस्था शुरू हो गई। शहर की गलियों में सन्नाटा पसर गया, मास्क पहनना और सोशल डिस्टेंसिंग अनिवार्य कर दिया गया। अस्पतालों में बेड की संख्या बढ़ाई गई, ऑक्सीजन सिलेंडर और वेंटिलेटर्स का इंतज़ाम किया गया। हर व्यक्ति के मन में बस एक ही डर था—कहीं अगला नंबर हमारा न हो। ऐसा पहली बार हुआ था कि किसी अदृश्य दुश्मन ने पूरे समाज को ठहरने पर मजबूर कर दिया। न स्कूल खुले, न मंदिरों की घंटियाँ बजीं, न बाज़ारों में रौनक रही। यह वो समय था जब हम सबने मिलकर अपनों को बचाने की लड़ाई लड़ी। समाचार चैनलों, अखबारों और सोशल मीडिया पर केवल एक ही शब्द गूंज रहा था—”कोरोना”। लोग टीवी से चिपके रहे, हर अपडेट पर नज़र रखते हुए। लेकिन इस सब के बीच जो सबसे ज्यादा प्रभावित हुए, वो थे मजदूर, छोटे दुकानदार और बुज़ुर्ग लोग। कई परिवारों ने अपनों को खोया, और कुछ ने कभी न भरने वाला खालीपन पाया। इस घटना ने न केवल मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर की असलियत उजागर की, बल्कि यह भी बताया कि जब संकट आता है, तो समाज में एकजुटता और संवेदनशीलता की कितनी ज़रूरत होती है। आज भले ही हम उस भयावह समय से निकल चुके हैं, लेकिन वो डर, वो सन्नाटा और वो संघर्ष कभी भुलाए नहीं जा सकते। रायपुर में मिला पहला कोरोना मरीज उस इतिहास की पहली स्याही थी, जिसने आने वाले कई अध्यायों को लिखा।

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BSNL सिम फ्रॉड का खुलासा: फ्रेंचाइजी संचालक ने 25+ सिम गलत हाथों में सौंपे, जांच में जुटी पुलिस

बीएसएनएल की फ्रेंचाइजी लेकर मोबाइल सिम कार्ड में बड़े स्तर पर फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। सरायपाली निवासी साहिल साहू, जिसने “जीएस मार्केटिंग” के नाम से बीएसएनएल की फ्रेंचाइजी ली थी, उस पर आरोप है कि उसने कई सिम कार्ड ऐसे लोगों को बेचे जिनके नाम पर वे जारी नहीं किए गए थे। जांच में सामने आया है कि 2 से 16 मई 2025 के बीच जारी किए गए 25 से अधिक सिम कार्ड्स वास्तविक ग्राहकों को न देकर उत्तरप्रदेश के लखनऊ निवासी एक व्यक्ति को सौंप दिए गए। शिकायत मिलने पर बीएसएनएल ने आंतरिक जांच की और फिर तेलीबांधा थाना पुलिस में मामला दर्ज करवाया। धोखाधड़ी का केस दर्ज, पूछताछ जारी पुलिस ने आरोपी साहिल साहू को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। फिलहाल यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इन सिम कार्ड्स का इस्तेमाल किन गतिविधियों में किया गया। आशंका जताई जा रही है कि इनका उपयोग ऑनलाइन सट्टेबाजी, साइबर ठगी और म्यूल बैंक खातों के संचालन जैसे अवैध कार्यों में किया जा सकता है। सिम पोर्टिंग से खुली पोल जिन लोगों को उत्तरप्रदेश में सिम बेचे गए थे, उनमें से कई ने सिम को दूसरी टेलीकॉम कंपनियों में पोर्ट करा दिया, जिससे इस पूरे घोटाले का पता चला। बीएसएनएल ने इस संबंध में टेलीकॉम मंत्रालय को भी जानकारी दे दी है और सिम के दुरुपयोग से संबंधित डेटा एकत्र किया जा रहा है। ऑनलाइन अपराधों में सिम की भूमिका पर चिंता विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की फर्जी सिम कार्ड की मदद से अपराधी डिजिटल धोखाधड़ी, नकली बैंकिंग गतिविधियों और अवैध सट्टेबाजी नेटवर्क को चला सकते हैं। पुलिस मामले की गहन जांच कर रही है और जल्द ही इसमें और खुलासे होने की संभावना है।

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Raipur
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