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यूपी में बदला मौसम: मुजफ्फरनगर में ओले, बिजनौर में आंधी से पेड़ गिरे; सहारनपुर में 2 की मौत, 43 जिलों में बारिश का अलर्ट

उत्तर प्रदेश में मौसम ने अचानक करवट ले ली है। मुजफ्फरनगर में देर रात तेज बारिश के साथ कई इलाकों में ओलावृष्टि हुई, जबकि बिजनौर में तेज आंधी के कारण पेड़, बिजली के खंभे और होर्डिंग्स गिर गए। सहारनपुर में आंधी के दौरान टीन शेड गिरने से पूर्व प्रधान समेत दो लोगों की मौत हो गई। मौसम विभाग ने वाराणसी सहित राज्य के 43 जिलों में हल्की बारिश और 17 जिलों में ओले गिरने की चेतावनी जारी की है। कई स्थानों पर तेज हवाएं चलने की भी संभावना है। विभाग के अनुसार पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी और सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के कारण मौसम में यह बदलाव आया है, जिससे तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। रविवार को भी नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ और अयोध्या समेत कई शहरों में तेज हवा के साथ हल्की बारिश हुई थी। लखनऊ में धूलभरी आंधी चली, जबकि हरदोई और सीतापुर में बिजली गिरने से दो लोगों की मौत हो गई और तीन लोग झुलस गए। तेज हवा, बारिश और ओलों का असर खेती पर भी पड़ा है। कई इलाकों में खेतों में खड़ी फसलें झुक गई हैं, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। हालांकि मौसम ठंडा होने से लोगों को गर्मी से कुछ राहत मिली। पिछले 24 घंटों में बांदा सबसे गर्म शहर रहा, जहां अधिकतम तापमान 38.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। सहारनपुर हादसा सहारनपुर के सरसावा क्षेत्र में देर रात तेज आंधी और बारिश के दौरान सड़क किनारे बना टीन शेड गिर गया। इसके नीचे दबने से भटपुरा के पूर्व प्रधान जयपाल सैनी और नवादा निवासी रामकेश सैनी की मौके पर ही मौत हो गई। दोनों उत्तराखंड से एक कार्यक्रम में शामिल होकर बाइक से लौट रहे थे और खराब मौसम से बचने के लिए शेड के नीचे रुके थे। फसलों को नुकसान बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से गेहूं सहित कई फसलें प्रभावित हुई हैं। किसानों के अनुसार इस समय फसल पकने की अवस्था में है, ऐसे में तेज हवा से बालियां झुक जाती हैं और दानों के खराब होने का खतरा बढ़ जाता है। कृषि विशेषज्ञों ने भी अधिक नमी के कारण रोग लगने की आशंका जताई है, हालांकि हल्की बारिश कुछ फसलों के लिए लाभकारी हो सकती है। प्रशासन सतर्क मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों में जाकर नुकसान का आकलन करने और किसानों से सीधे संवाद करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि जिन क्षेत्रों में फसलों को नुकसान हुआ है, वहां किसानों को समय पर राहत और मुआवजा दिया जाए। मार्च में जल्दी बढ़ रही गर्मी विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम का पैटर्न बदल रहा है और गर्मी पहले की तुलना में जल्दी शुरू हो रही है। हाल ही में बांदा में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था, जो सामान्य से अधिक है। मौसम विभाग ने इस वर्ष कुछ क्षेत्रों में लंबे समय तक हीटवेव चलने की संभावना भी जताई है।

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फरवरी में थोक महंगाई 12 महीने के उच्च स्तर पर, रोजमर्रा का सामान और खाद्य वस्तुएं महंगी

फरवरी 2026 में थोक महंगाई दर (WPI) बढ़कर 2.13% पर पहुंच गई, जो पिछले 12 महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है। इससे पहले जनवरी में यह 1.81% और दिसंबर में 0.83% थी। कॉमर्स मंत्रालय ने 16 मार्च को ये आंकड़े जारी किए। विशेषज्ञों के मुताबिक यदि अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच तनाव लंबा चलता है तो कच्चे तेल की कीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती हैं। इससे पेट्रोल और डीजल महंगे होंगे, परिवहन लागत बढ़ेगी और फल-सब्जियों समेत रोजाना इस्तेमाल की वस्तुओं की कीमतों पर असर पड़ेगा। फरवरी में आवश्यक वस्तुओं (प्राइमरी आर्टिकल्स) की महंगाई 2.21% से बढ़कर 3.27% हो गई। खाद्य पदार्थों की महंगाई दर भी माइनस 1.41% से बढ़कर 1.85% हो गई। फ्यूल और पावर सेक्टर में महंगाई अभी भी नकारात्मक रही, हालांकि इसमें हल्का सुधार दर्ज किया गया। मैन्युफैक्चरिंग उत्पादों की महंगाई दर भी बढ़कर 2.92% पर पहुंच गई। थोक महंगाई तीन मुख्य वर्गों से मिलकर बनती है—प्राइमरी आर्टिकल्स, फ्यूल एंड पावर और मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स। इनमें सबसे अधिक हिस्सेदारी मैन्युफैक्चर्ड उत्पादों की होती है। इसी दौरान खुदरा महंगाई (CPI) भी फरवरी में बढ़कर 3.21% हो गई, जो जनवरी में 2.74% थी। जब थोक कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं तो कंपनियां इसका बोझ उपभोक्ताओं पर डाल देती हैं, जिससे बाजार में सामान महंगा हो जाता है। भारत में महंगाई दो तरीकों से मापी जाती है—खुदरा महंगाई (CPI), जो आम उपभोक्ताओं द्वारा चुकाई जाने वाली कीमतों पर आधारित होती है, और थोक महंगाई (WPI), जो थोक बाजार में व्यापारियों के बीच होने वाले लेन-देन की कीमतों को दर्शाती है।

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भारत में सोना-चांदी सस्ता: दो दिनों में बड़ी गिरावट, जानिए वजह

लगातार दूसरे कारोबारी दिन सोना और चांदी की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार 24 कैरेट सोना (10 ग्राम) लगभग ₹1,963 घटकर करीब ₹1.56 लाख पर आ गया है। इससे पहले 13 मार्च को इसकी कीमत ₹1.58 लाख थी। वहीं चांदी की कीमत भी तेजी से गिरी है। एक किलो चांदी करीब ₹7,695 घटकर ₹2.53 लाख पर पहुंच गई, जबकि शुक्रवार को यह ₹2.60 लाख प्रति किलो थी। पिछले दो कारोबारी दिनों में सोना लगभग ₹3,800 और चांदी ₹15,000 से अधिक सस्ती हुई है। गिरावट की मुख्य वजहें अलग-अलग शहरों में दाम क्यों बदलते हैं? ऑल टाइम हाई से भारी गिरावट इस साल जनवरी में सोना लगभग ₹1.76 लाख प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया था, जो अब काफी नीचे आ चुका है। चांदी भी अपने उच्चतम स्तर ₹3.86 लाख प्रति किलो से गिरकर काफी सस्ती हो गई है। एक्सपर्ट की सलाह कमोडिटी विशेषज्ञों के अनुसार फिलहाल सोना-चांदी में निवेश से बचना बेहतर हो सकता है, क्योंकि कीमतों में आगे और गिरावट संभव है। अनुमान है कि सोना ₹1.50 लाख और चांदी ₹2.50 लाख तक आ सकती है। सोना खरीदते समय ध्यान रखें असली चांदी पहचानने के आसान तरीके भारतीय घरों में सोने का बड़ा भंडार रिपोर्ट के अनुसार भारतीय परिवारों के पास लगभग 34,600 टन सोना मौजूद है, जिसकी कुल कीमत देश की GDP से भी अधिक आंकी गई है।

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Chhattisgarh High Court ने बिना मान्यता वाले स्कूलों द्वारा एडमिशन के विज्ञापन जारी करने के मामले में कड़ा रुख दिखाया है

अदालत ने स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को इस संबंध में व्यक्तिगत शपथपत्र (पर्सनल एफिडेविट) दाखिल करने का निर्देश दिया है। साथ ही संबंधित स्कूल को भी मामले में पक्षकार बनाकर नोटिस जारी किया गया है। यह सुनवाई मुख्य न्यायाधीश Ramesh Sinha और न्यायमूर्ति Ravindra Kumar Agrawal की डिवीजन बेंच में हुई। मामला जनहित याचिका (WPPIL No. 22/2016) से जुड़ा है, जिसमें इंटरवीनर विकास तिवारी द्वारा उठाए गए मुद्दों पर सुनवाई की गई। शिकायतों पर कार्रवाई न होने पर नाराजगी 📄 सुनवाई के दौरान बताया गया कि 5 फरवरी 2026 को लोक शिक्षण संचालनालय ने दुर्ग, रायपुर और बिलासपुर के जिला शिक्षा अधिकारियों को शिकायतों पर एक सप्ताह में कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इस पर कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को अगली सुनवाई तक कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया। बिना मान्यता के एडमिशन प्रक्रिया पर सवाल 🎓 अदालत के सामने एक पत्रिका में प्रकाशित प्रवेश विज्ञापन भी पेश किया गया, जिसमें सत्र 2026–27 के लिए कई निजी स्कूलों में एडमिशन शुरू होने की जानकारी दी गई थी। याचिका में दावा किया गया कि ये स्कूल आवश्यक मान्यता के बिना ही संचालित हो रहे हैं और फिर भी प्रवेश प्रक्रिया चला रहे हैं, जो अदालत के पूर्व आदेशों का उल्लंघन हो सकता है। किन स्कूलों का हुआ उल्लेख 🏫 विज्ञापन में तुलसी कृष्णा किड्स एकेडमी (मोवा) और कृष्णा किड्स एकेडमी की शंकर नगर, न्यू राजेंद्र नगर, सुंदर नगर और शैलेंद्र नगर स्थित शाखाओं का नाम सामने आया। अदालत ने Krishna Public School, Tulsi को भी मामले में पक्षकार बनाते हुए नोटिस जारी करने का आदेश दिया है। शिक्षा सचिव से मांगा जवाब ⏳ डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया कि बिना मान्यता के स्कूलों द्वारा प्रवेश विज्ञापन देना अदालत के आदेशों की अवमानना की श्रेणी में आ सकता है। इसलिए स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को व्यक्तिगत रूप से जवाब दाखिल करने के लिए कहा गया है। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 24 मार्च 2026 तय की है, जिसमें विभाग को अब तक की कार्रवाई और अपना पक्ष प्रस्तुत करना होगा।

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ओवरब्रिज हादसे में मौत के बाद अर्थी रखकर चक्काजाम: हत्या का केस दर्ज करने की मांग

बीना के खुरई ओवरब्रिज पर देर रात हुए सड़क हादसे में एक व्यक्ति की मौत के बाद लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। तेज रफ्तार कार ने सड़क किनारे टहल रहे दो लोगों को टक्कर मार दी, जिसमें गुलाब चंद जैन की मौके पर ही जान चली गई, जबकि दूसरा व्यक्ति घायल हो गया। अर्थी रखकर किया विरोध घटना से आक्रोशित परिजन और जैन समाज के लोग मृतक की अर्थी लेकर सर्वोदय चौराहा पहुंचे और सड़क पर रखकर चक्काजाम कर दिया। इस विरोध के चलते कुछ समय के लिए शहर का यातायात पूरी तरह प्रभावित रहा। ओवरब्रिज की सुरक्षा पर सवाल समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि ओवरब्रिज पर पैदल चलने वालों के लिए फुटपाथ नहीं है और भारी वाहनों की आवाजाही भी नियंत्रित नहीं है, जिसके कारण अक्सर हादसे होते रहते हैं। प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाने की मांग की। हत्या का केस दर्ज करने की मांग लोगों की मुख्य मांग थी कि कार चालक के खिलाफ केवल दुर्घटना नहीं, बल्कि हत्या का मामला दर्ज किया जाए। उनका आरोप है कि तेज रफ्तार और लापरवाही के कारण यह हादसा हुआ। पुलिस ने समझाकर खुलवाया जाम सूचना मिलने पर थाना प्रभारी अनूप यादव पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर जाम हटवाया, जिसके बाद यातायात फिर से सामान्य हो सका। पुलिस के अनुसार, दुर्घटना में शामिल कार को जब्त कर लिया गया है और मामले की जांच जारी है। यदि जांच में जानबूझकर टक्कर मारने के प्रमाण मिलते हैं तो आरोपी पर और सख्त धाराएं लगाई जाएंगी।

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यूपी बोर्ड की नई मार्कशीट 2026: न फटेगी, न पानी से खराब होगी, 16 सुरक्षा फीचर शामिल

उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UP Board) ने 2026 की परीक्षाओं के बाद जारी होने वाली मार्कशीट में बड़े बदलाव करने का फैसला किया है। 10वीं और 12वीं के लाखों छात्रों को इस बार पहले से ज्यादा सुरक्षित और टिकाऊ मार्कशीट मिलेगी। बोर्ड की परीक्षाएं 12 मार्च 2026 को समाप्त हो चुकी हैं और अब परिणाम के साथ नई तकनीक वाली मार्कशीट जारी की जाएगी। पानी और फटने से सुरक्षित नई मार्कशीट विशेष मजबूत सामग्री पर तैयार की जाएगी, जिससे यह आसानी से फटेगी नहीं और भीगने पर भी खराब नहीं होगी। इसका उद्देश्य दस्तावेज को लंबे समय तक सुरक्षित रखना है। 16 नए सुरक्षा फीचर इस बार मार्कशीट में करीब 16 प्रकार के सुरक्षा फीचर जोड़े जा रहे हैं। इनमें कुछ फीचर सामान्य तौर पर दिखाई देंगे, जबकि कुछ ऐसे होंगे जिन्हें केवल विशेष उपकरण या जांच के माध्यम से ही देखा जा सकेगा। इससे नकली मार्कशीट बनाना बेहद कठिन हो जाएगा। होलोग्राम और कोडिंग मार्कशीट पर विशेष होलोग्राम, कोडिंग और सुरक्षा चिह्न शामिल किए जाएंगे, जिससे उसकी सत्यता आसानी से जांची जा सकेगी। छेड़छाड़ करना होगा मुश्किल नई डिजाइन में ओवरराइटिंग या किसी भी तरह की फेरबदल की कोशिश तुरंत पकड़ में आ सकेगी। इससे फर्जी प्रमाण पत्र के मामलों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। बदलाव का उद्देश्य बोर्ड का मानना है कि नई व्यवस्था से छात्रों के दस्तावेज सुरक्षित रहेंगे और नौकरी, प्रवेश या अन्य प्रक्रियाओं में सत्यापन आसान होगा।

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आरटीई सीट निर्धारण में गड़बड़ी: अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में हिंदी के आधार पर भर दी सीटें, 11 अधिकारियों को नोटिस

राजधानी रायपुर में आरटीई (Right to Education) कोटे की सीटों को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। निजी स्कूलों में सीट निर्धारण प्रक्रिया में अनियमितता पाए जाने पर जिला शिक्षा अधिकारी ने 11 स्कूलों के नोडल अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। जांच में पाया गया कि कई स्कूलों में वास्तविक छात्र संख्या और माध्यम (हिंदी/अंग्रेजी) के अनुसार सीटें तय नहीं की गईं। कुछ स्कूल अंग्रेजी माध्यम के होने के बावजूद हिंदी माध्यम के आधार पर सीटें सुरक्षित कर दी गईं। क्या है मुख्य गड़बड़ी जिला शिक्षा कार्यालय के अनुसार, सीट प्रोटेक्शन प्रक्रिया में गलत आधार अपनाया गया। कई मामलों में छात्र संख्या कम या ज्यादा होने के बावजूद सीटें पुराने आंकड़ों के अनुसार भर दी गईं। बाद में समीक्षा के बाद संशोधित सूची जारी की गई और संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया। डीईओ हिमांशु भारतीय ने बताया कि जहां-जहां त्रुटियां मिली हैं, वहां जिम्मेदार अधिकारियों को नोटिस देकर जवाब तलब किया गया है। जिन क्षेत्रों के स्कूलों में मामला सामने आया मामला मंदिर हसौद, उरला, फुंडहर, रामनगर बस्ती, पारसदा, अमलीडीह और अन्य इलाकों के निजी स्कूलों से जुड़ा है। मंदिर हसौद और उरला क्षेत्र के कई स्कूलों में माध्यम के आधार पर गलत सीट निर्धारण पाया गया। सीट संख्या में भी बदलाव जांच के बाद कई स्कूलों में सीट संख्या भी बदली गई। उदाहरण के तौर पर कहीं 26 सीटों के स्थान पर 30, 86 के स्थान पर 89 और 12 के स्थान पर 13 सीटें तय की गईं। प्रमुख स्कूल जहां त्रुटियां मिलीं आरटीई सीटों को लेकर पहले से विवाद प्रदेश में आरटीई कोटे की सीटों की संख्या कम होने को लेकर पहले से ही अभिभावकों में नाराजगी बनी हुई है। ऐसे में सीट निर्धारण में गड़बड़ी का मामला सामने आने से विवाद और बढ़ सकता है।

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महुआ बीनने के लिए जंगलों में लगाई जा रही आग, हर साल झुलस रही छत्तीसगढ़ की हरियाली

छत्तीसगढ़ में गर्मियों के दौरान जंगलों में आग की घटनाएं तेजी से बढ़ जाती हैं। ताजा मामला बलरामपुर जिले के लमना चोटिया गांव के पास का है, जहां बिलासपुर-अंबिकापुर मार्ग के आसपास पहाड़ियों पर महुआ के फूल बीनने के लिए जंगल में आग लगा दी गई। स्थानीय लोगों द्वारा सूखी पत्तियां जलाई जाती हैं ताकि जमीन पर गिरे महुआ के फूल साफ दिखाई दें और उन्हें आसानी से इकट्ठा किया जा सके। लेकिन इस प्रक्रिया से हर साल जंगलों को भारी नुकसान पहुंचता है। वन्यजीव और जैव विविधता पर खतरा वन विभाग और सैटेलाइट निगरानी के अनुसार, ऐसी आग से न केवल पेड़-पौधे नष्ट होते हैं बल्कि छोटे जीव-जंतु, पक्षी और संपूर्ण जैव विविधता पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। सरगुजा संभाग के कई पहाड़ी क्षेत्रों में हर वर्ष बड़े इलाके इस आग की चपेट में आ जाते हैं। मार्च से मई के बीच बढ़ते हैं मामले गर्मी के मौसम में, खासकर मार्च से मई के बीच जंगल की आग की घटनाएं सबसे ज्यादा सामने आती हैं। राज्य में हर साल औसतन 2000 से 2500 दावानल की घटनाएं दर्ज होती हैं, जिनमें अधिकांश आग मानव गतिविधियों के कारण लगती है। इस साल भी बढ़े फायर अलर्ट प्रदेश में इस वर्ष अब तक करीब 205 स्थानों पर जंगल में आग के अलर्ट दर्ज किए जा चुके हैं, जो आने वाले महीनों में स्थिति और गंभीर होने की आशंका को दर्शाते हैं।

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22,466 करोड़ का स्कूल शिक्षा बजट पास: पहली कक्षा से योग-वैदिक गणित, खेल पीरियड अनिवार्य, मार्कशीट डिजिटल

राज्य सरकार ने स्कूल शिक्षा विभाग के लिए 22,466 करोड़ रुपये का बजट पारित कर दिया है। विधानसभा में इसे ध्वनिमत से मंजूरी मिली। सरकार का कहना है कि यह बजट शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक, समावेशी और गुणवत्तापूर्ण बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने बताया कि अब सरकारी स्कूलों में पहली कक्षा से ही योग की पढ़ाई शुरू होगी और वैदिक गणित को भी पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा। इसके साथ ही हर स्कूल में अंतिम पीरियड खेल गतिविधियों के लिए अनिवार्य होगा। पीएम श्री योजना के तहत आधुनिक स्कूल पीएम श्री योजना के अंतर्गत स्कूलों को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा। इसके लिए बजट में 250 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा गया है। इन स्कूलों में स्मार्ट क्लास, डिजिटल लाइब्रेरी, आधुनिक लैब, खेल सुविधाएं, ग्रीन कैंपस और करियर काउंसिलिंग जैसी व्यवस्थाएं विकसित की जाएंगी। शिक्षकों को भी उच्च शिक्षण संस्थानों से प्रशिक्षण दिया जाएगा। 150 उत्कृष्ट विद्यालयों की स्थापना ग्रामीण क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने के लिए 150 स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट विद्यालय स्थापित किए जाएंगे। इसके लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। ये स्कूल प्रत्येक ब्लॉक के ग्रामीण इलाकों में संचालित होंगे। नवा रायपुर में बनेगा प्रशासनिक भवन नवा रायपुर में शिक्षा विभाग का आधुनिक प्रशासनिक कॉम्पोजिट भवन बनाया जाएगा। इसके लिए प्रारंभिक तौर पर 5.90 करोड़ रुपये रखे गए हैं। यहां लोक शिक्षण संचालनालय, समग्र शिक्षा, संस्कृत विद्या मंडल, मदरसा बोर्ड और माध्यमिक शिक्षा मंडल जैसे कार्यालय संचालित होंगे। दस्तावेज होंगे पूरी तरह डिजिटल छात्रों की मार्कशीट, ट्रांसफर सर्टिफिकेट (TC) और अन्य शैक्षणिक दस्तावेज ऑनलाइन उपलब्ध कराए जाएंगे। प्रत्येक दस्तावेज पर क्यूआर कोड और यूनिक आईडी होगी, जिससे उसकी डिजिटल सत्यता तुरंत जांची जा सकेगी। तीसरी कक्षा की परीक्षा टैबलेट पर देशभर में बुनियादी साक्षरता और गणना क्षमता मापने के लिए तीसरी कक्षा के छात्रों की परीक्षा अब टैबलेट पर ली जाएगी। पहले यह परीक्षा ओएमआर शीट पर होती थी। यह सर्वे सीबीएसई द्वारा कराया जा रहा है, जिसमें तकनीकी मार्गदर्शन एनसीईआरटी की इकाई परख दे रही है। इस अभियान में देश के 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लगभग 776 जिलों के 10 हजार से अधिक स्कूल और एक लाख से ज्यादा छात्र शामिल होंगे। स्कूलों के लिए निर्देश जिन स्कूलों का चयन किया गया है, उन्हें सर्वे की निर्धारित तारीख पर विद्यालय खुला रखना और छात्रों की उपस्थिति सुनिश्चित करना अनिवार्य होगा। सर्वे टीम को प्रशासनिक और तकनीकी सहयोग भी देना होगा।

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दंगों के बाद बेघर 15 परिवार: 40 दिन से राहत शिविर में जिंदगी, बच्चों की पढ़ाई और भविष्य पर संकट

छत्तीसगढ़ के खपरी दूधकईया गांव में 1 फरवरी की रात हुए हिंसक घटनाक्रम के बाद 15 परिवारों के 52 लोग पिछले 40 दिनों से घर से दूर शरण लेने को मजबूर हैं। ये सभी लोग फिलहाल बैजनाथपारा स्थित मुस्लिम हॉल में रह रहे हैं और राहत पर निर्भर जीवन जी रहे हैं। दंगों में इनके घर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए, जिससे बिजली-पानी की व्यवस्था खत्म हो गई और वापस लौटना संभव नहीं हो पा रहा है। सुरक्षा में रायपुर लाए गए घटना के बाद प्रशासन ने भारी सुरक्षा के बीच प्रभावित परिवारों को गांव से निकालकर रायपुर पहुंचाया। बड़ी संख्या में लोगों को एक साथ रखने के लिए समाज के हॉल में ठहराया गया, जहां किराया नहीं लिया जा रहा है। मदद पर चल रही जिंदगी राहत शिविर में रह रहे परिवारों को भोजन, कपड़े और जरूरी सामान सामाजिक संगठनों व आम लोगों की मदद से मिल रहा है। अलग-अलग धर्म और समुदाय के लोग सहायता के लिए आगे आए हैं। फिर भी लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यह मदद कब तक मिलेगी और वे अपने घर कब लौट पाएंगे। जीवनभर की कमाई खत्म प्रभावित लोगों का कहना है कि दंगों में उनकी जमा-पूंजी, जेवर और जरूरी सामान चोरी या नष्ट हो गया। कई परिवारों के आधार कार्ड और जमीन से जुड़े दस्तावेज भी जल गए, जिससे पहचान और भविष्य दोनों संकट में पड़ गए हैं। उनका आरोप है कि अब तक मुआवजे को लेकर कोई स्पष्ट आश्वासन नहीं मिला है। बच्चों की पढ़ाई ठप राहत शिविर में रह रहे बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह प्रभावित हुई है। कई छात्र-छात्राओं की वार्षिक परीक्षाएं छूट गईं क्योंकि उन्हें अचानक गांव छोड़ना पड़ा। किताबें, बैग और स्कूल ड्रेस जल जाने से वे पढ़ाई जारी नहीं रख पा रहे हैं। बच्चों का कहना है कि पूरे साल की मेहनत बेकार हो गई और उन्हें नहीं पता कि वे अगली कक्षा में कैसे पहुंचेंगे। घर वापसी को लेकर अनिश्चितता हॉल में रह रही महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग मानसिक तनाव में हैं। वे दिनभर एक-दूसरे को ढांढस बंधाते हैं, लेकिन भविष्य को लेकर चिंता लगातार बनी हुई है।

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