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छत्तीसगढ़ में बढ़ी गर्मी, राजनांदगांव में पारा 40 डिग्री पार, बस्तर में मौसम बदलने के संकेत

छत्तीसगढ़ में गर्मी ने तेजी पकड़ ली है और कई जिलों में तापमान सामान्य से काफी ऊपर पहुंच गया है। प्रदेश में अधिकतम तापमान सामान्य से लगभग 3 से 5 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया जा रहा है। पिछले 24 घंटों में सबसे अधिक तापमान राजनांदगांव में 40.5°C रिकॉर्ड किया गया, जबकि सबसे कम न्यूनतम तापमान अंबिकापुर में 14.5°C दर्ज हुआ। अगले 24 घंटे का अनुमान मौसम विभाग के अनुसार अगले 24 घंटों में तापमान में ज्यादा बदलाव की संभावना नहीं है। इसके बाद प्रदेश में 3 से 5 डिग्री तक गिरावट आ सकती है, जिससे लोगों को कुछ राहत मिल सकती है। बस्तर में आंधी-बारिश का अलर्ट मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि आने वाले दो दिनों में प्रदेश के कुछ हिस्सों में मौसम करवट ले सकता है। खासकर बस्तर संभाग में गरज-चमक के साथ हल्की बारिश, तेज हवा और बादल छाने की संभावना है। हवा की गति 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है। पिछले 24 घंटे में मौसम रहा शुष्क प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में बीते 24 घंटे के दौरान मौसम पूरी तरह शुष्क रहा और कहीं भी उल्लेखनीय बारिश दर्ज नहीं की गई।

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कोरबा में मैकेनिक ने वीडियो बनाकर दी जान: पुलिस की धमकी से डरने की बात, जांच में आया नया सच

छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में एक युवक द्वारा आत्महत्या से पहले बनाया गया वीडियो सामने आया है। वीडियो में युवक ने खुद को पुलिस की प्रताड़ना और गाली-गलौज से परेशान बताया था। हालांकि पुलिस जांच में मामले ने नया मोड़ ले लिया है। जांच में क्या सामने आया पुलिस के अनुसार, युवक का रूम पार्टनर अपनी प्रेमिका के साथ घर से चला गया था। इसके बाद युवती के भाई सचिन खरे ने पुलिसकर्मी बनकर मृतक सनत कश्यप (लगभग 21 वर्ष) को फोन किया। फोन पर उसे धमकाया गया और थाने आने के लिए कहा गया। इससे वह गंभीर तनाव में आ गया और बाद में उसने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। सुसाइड से पहले वीडियो में क्या कहा सनत ने वीडियो में कहा था कि उसे परिवार से कोई समस्या नहीं है, लेकिन जांजगीर-चांपा के पंतोरा थाना से फोन कर गालियां दी गईं और थाने बुलाया गया। उसने यह भी कहा कि रूम पार्टनर को भगाने में उसका कोई हाथ नहीं है और वह बेहद तनाव में है। पूरा घटनाक्रम मृतक सनत कश्यप जांजगीर-चांपा जिले के चोरभट्टी गांव का रहने वाला था और उरगा क्षेत्र के पास स्थित एक ऑटोमोबाइल वर्कशॉप में मैकेनिक के रूप में काम करता था। कंपनी द्वारा दिए गए कमरे में वह अपने साथी धीरेंद्र पाटले के साथ रहता था। बताया गया कि धीरेंद्र एक युवती के साथ चला गया, जिसके बाद युवती के परिवार ने शिकायत दर्ज कराई। युवती के भाई ने धीरेंद्र के दोस्त सनत को ही जिम्मेदार मानते हुए पुलिस बनकर फोन किया और धमकाया। फोन कॉल के बाद सनत घबरा गया, उसने वीडियो रिकॉर्ड किया और बाद में आत्महत्या कर ली। जांच में आरोपी ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया है। इस मामले में पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 204 (छद्म प्रतिरूपण) के तहत मामला दर्ज किया है। परिवार में सबसे छोटा था सनत चार भाइयों में सबसे छोटा था। घटना की सूचना मिलते ही परिजन कोरबा पहुंचे, जहां घर में शोक का माहौल है।

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रायपुर के औद्योगिक इलाकों में छापा: 7 नाबालिग बाल श्रमिक मुक्त, चार संस्थानों पर मामला दर्ज

राजधानी रायपुर के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में बाल श्रम के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए पुलिस और एनजीओ की संयुक्त टीम ने सात नाबालिग बच्चों को काम से मुक्त कराया है। उरला, सिलतरा और खमतराई स्थित कारखानों में छापेमारी कर इन बच्चों को रेस्क्यू किया गया, जहां उनसे उम्र से कहीं अधिक कठिन और जोखिम भरे काम कराए जा रहे थे। जांच के दौरान सामने आया कि बच्चों से भारी मशीनों और रसायनों के बीच वेल्डिंग, लोडिंग और पैकिंग जैसे काम कराए जा रहे थे। जिन संस्थानों पर कार्रवाई हुई, उनमें सोनी प्लाईवुड इंडस्ट्री, शैमरॉक ओवरसीज प्राइवेट लिमिटेड, इंद्राक्षी पाली प्लास्टर एलएलपी प्लांट तथा सन लॉजिस्टिक एंड डिस्ट्रीब्यूटर शामिल हैं। पुलिस ने कंपनी संचालकों के साथ एक ठेकेदार के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की है। शिकायतों के बाद हुई कार्रवाई एसोसिएशन फॉर वॉलंटरी एक्शन छत्तीसगढ़ (AVA) के अनुसार इन इलाकों में नाबालिगों से काम कराए जाने की लगातार शिकायतें मिल रही थीं। सूचना मिलने के बाद पुलिस के साथ संयुक्त टीम ने चार अलग-अलग स्थानों पर छापा मारा। कार्रवाई में उरला से तीन और खमतराई से चार बच्चों को मुक्त कराया गया। कुछ बच्चों से उद्योगों के अलावा बेकरी में भी काम कराया जा रहा था। मेडिकल जांच के बाद बाल गृह भेजे गए रेस्क्यू किए गए सभी बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया और फिर उन्हें बाल कल्याण समिति के सामने पेश किया गया। फिलहाल बच्चों को सुरक्षित बाल गृह में रखा गया है, जहां उनकी काउंसलिंग की जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक बच्चों के परिवारों से संपर्क स्थापित किया जा रहा है और आगे भी ऐसे अभियान जारी रहेंगे। पहले भी सामने आ चुका है बड़ा मामला रायपुर में बाल मजदूरी का यह पहला मामला नहीं है। करीब पांच महीने पहले खरोरा स्थित मोजो मशरूम फैक्ट्री से 109 नाबालिगों को मुक्त कराया गया था। उस कार्रवाई में 68 लड़कियां और 41 लड़के शामिल थे। हालांकि उस मामले में अब तक ठोस कार्रवाई न होने की बात सामने आ रही है। प्रशासन का कहना है कि शहर को बाल श्रम मुक्त बनाने के लिए निगरानी और छापेमारी अभियान लगातार जारी रहेंगे।

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रायगढ़ में बकाया किराया न चुकाने पर निगम की कार्रवाई, कबीर चौक की दुकान सील

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ शहर में बकाया कर और किराया नहीं चुकाने वाले दुकानदारों के खिलाफ नगर निगम ने सख्त रुख अपनाना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में कबीर चौक स्थित एक दुकान को निगम की राजस्व टीम ने सील कर दिया। निगम अधिकारियों के अनुसार दुकान संचालक पर करीब 87 हजार रुपये से अधिक का किराया बकाया था। कई बार नोटिस जारी कर भुगतान करने को कहा गया, लेकिन राशि जमा नहीं होने पर यह कार्रवाई की गई। राजस्व विभाग की टीम मौके पर पहुंची और नियमानुसार दुकान को बंद कर सील कर दिया। अधिकारियों का कहना है कि शहर के अन्य बड़े बकायादारों की भी पहचान की जा रही है और जरूरत पड़ने पर उनके खिलाफ भी इसी तरह की कार्रवाई की जाएगी। राजस्व बढ़ाने के उद्देश्य से नगर निगम ने टैक्स वसूली अभियान तेज कर दिया है। नागरिकों की सुविधा के लिए अब छुट्टी के दिनों में भी राजस्व कार्यालय खुला रहेगा, जहां लोग संपत्ति कर, जलकर, यूजर चार्ज, दुकान किराया समेत अन्य देय राशि जमा कर सकेंगे। महापौर ने भी नागरिकों से अपील की है कि वे समय पर करों का भुगतान करें, ताकि शहर के विकास कार्य बाधित न हों। निगम कमिश्नर ने चेतावनी दी है कि बकाया नहीं चुकाने वालों के खिलाफ आगे भी सीलिंग और अन्य कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।

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दुर्ग में वाहन चेकिंग के दौरान हंगामा, जिला पंचायत सदस्य के पति पर पुलिस से दुर्व्यवहार का आरोप

दुर्ग जिले में वाहन जांच के दौरान बुधवार रात उस समय विवाद की स्थिति बन गई जब एक जिला पंचायत सदस्य के पति ने पुलिस कार्रवाई में हस्तक्षेप करते हुए हंगामा किया। आरोप है कि उन्होंने पुलिसकर्मियों से अभद्रता की, धमकी दी और नशे में पकड़े गए चालक को छुड़ाने की कोशिश की। इस पूरी घटना का वीडियो भी सामने आया है, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। मामला पुलगांव थाना क्षेत्र का है, जहां यातायात पुलिस रात के समय चेकिंग अभियान चला रही थी। इसी दौरान एक कार चालक को रोका गया, जो शराब के नशे में वाहन चलाता पाया गया। पुलिस टीम ब्रीथ एनालाइजर से जांच कर आगे की कार्रवाई की तैयारी कर रही थी। बताया जा रहा है कि इसी बीच स्थानीय निवासी विक्की मिश्रा अपनी पत्नी के साथ मौके पर पहुंचे और पुलिस कार्रवाई रोकने का प्रयास किया। उन्होंने स्वयं को जनप्रतिनिधि से जुड़ा बताते हुए चालक को छोड़ने की मांग की, जिससे पुलिस और उनके बीच बहस शुरू हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार विवाद बढ़ते-बढ़ते गाली-गलौज और धक्का-मुक्की तक पहुंच गया। पुलिस का आरोप है कि इस दौरान ड्यूटी पर तैनात एक जवान को धमकी भी दी गई। हंगामे के बीच नशे में पकड़े गए चालक को वाहन सहित मौके से जाने दिया गया, जिसके कारण नियमानुसार कार्रवाई पूरी नहीं हो सकी। यातायात प्रभारी की शिकायत पर संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है और वायरल वीडियो के आधार पर भी साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।

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बिलासपुर में LPG की जमाखोरी का भंडाफोड़, किचन केयर व किराना स्टोर से 126 सिलेंडर जब्त

बिलासपुर में गैस सिलेंडरों की कथित किल्लत के बीच कालाबाजारी और जमाखोरी का बड़ा मामला सामने आया है। जिला प्रशासन की टीम ने कोनी और सिरगिट्टी क्षेत्र में छापेमारी कर किचन केयर और किराना दुकानों से कुल 126 घरेलू गैस सिलेंडर बरामद किए हैं। कार्रवाई के दौरान सिलेंडरों से गैस निकालने वाले उपकरण भी मिले, जिसके बाद संबंधित लोगों के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। कलेक्टर संजय अग्रवाल के निर्देश पर खाद्य विभाग की टीम लगातार दूसरे दिन भी कार्रवाई करती रही। इससे पहले एक अन्य छापे में 72 सिलेंडर जब्त किए जा चुके थे। प्रशासन का कहना है कि जिले में गैस की कमी नहीं है, लेकिन तकनीकी समस्याओं के कारण बुकिंग और वितरण प्रभावित होने से लोगों को परेशानी हो रही है। कोनी क्षेत्र में एक मकान से 55 खाली घरेलू सिलेंडर बरामद हुए। जांच में पता चला कि यह मकान सुनील सोनवानी का है, जिसे एक किचन केयर संचालक को किराए पर दिया गया था। स्थानीय लोगों के अनुसार इस अवैध कारोबार में परिवार के अन्य सदस्य भी शामिल हो सकते हैं। वहीं सिरगिट्टी के बन्नाक चौक स्थित एक दुकान से खाली सिलेंडर और गैस निकालने के उपकरण मिले। टीम को वहां वजन मशीन और विशेष यंत्र भी मिला, जिसका उपयोग सिलेंडर से गैस निकालने में किया जाता है। देर शाम एक बंद दुकान में छापेमारी के दौरान 61 सिलेंडर और बरामद किए गए, जिनमें घरेलू, व्यावसायिक और छोटे सिलेंडर शामिल थे। यह दुकान एक प्राथमिक स्कूल के पास स्थित है, जिससे सुरक्षा को लेकर भी गंभीर खतरा बना हुआ था। सभी सिलेंडरों को जब्त कर संबंधित प्रतिष्ठानों को सील कर दिया गया है। अधिकारियों के अनुसार मामले की विस्तृत जांच की जा रही है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत, बकाया बिल पर पेनल्टी माफ और मूल राशि में 75% तक छूट

छत्तीसगढ़ में लंबे समय से बिजली बिल बकाया रखने वाले उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए सरकार ने नई समाधान योजना शुरू की है। इस योजना के तहत बकाया बिल पर लगे जुर्माने को पूरी तरह माफ किया जाएगा, जबकि मूल बिल की राशि में भी 75 प्रतिशत तक छूट दी जाएगी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य पुराने बकायादार उपभोक्ताओं को राहत देना और उनके बिजली कनेक्शन फिर से बहाल करना है। अधिकारियों के अनुसार बकाया राशि जमा करने के बाद उपभोक्ताओं को 200 यूनिट तक बिजली बिल हाफ योजना का लाभ भी मिलने लगेगा, जो पहले बकाया होने के कारण नहीं मिल पाता था। योजना का लाभ लेने के लिए उपभोक्ताओं को 30 जून तक पंजीयन कराना होगा। इसके लिए ‘मोर बिजली’ मोबाइल एप या नजदीकी बिजली वितरण केंद्रों में आवेदन किया जा सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी विशेष शिविर लगाकर लोगों को योजना से जोड़ा जाएगा। अधिकारियों ने उदाहरण देते हुए बताया कि यदि किसी उपभोक्ता का मूल बिल 10 हजार रुपये है और जुर्माना बढ़कर 40 हजार हो गया है, तो योजना के तहत 40 हजार रुपये का पूरा जुर्माना समाप्त हो जाएगा। वहीं मूल राशि भी घटकर लगभग 2500 रुपये तक रह सकती है। भुगतान करने के बाद उपभोक्ता का बिजली कनेक्शन पुनः चालू कर दिया जाएगा। जनप्रतिनिधियों का कहना है कि यह योजना आम लोगों, खासकर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए काफी राहतभरी साबित होगी।

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छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज गरमाएंगे कई मुद्दे, प्रश्नकाल में गौवंश से फ्लाईऐश तक उठेंगे सवाल

छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज का दिन राजनीतिक और जनहित के मुद्दों के लिहाज से काफी अहम रहने वाला है। सदन की कार्यवाही की शुरुआत अविभाजित मध्यप्रदेश की पूर्व विधायक मंगलीबाई रावटे को श्रद्धांजलि देकर की जाएगी। इसके बाद प्रश्नकाल में विभिन्न विभागों से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होगी। प्रश्नकाल के दौरान कृषि, पशुपालन, आदिम जाति कल्याण, आवास एवं पर्यावरण तथा पर्यटन विभाग से जुड़े सवाल उठाए जाएंगे। साथ ही सदन में कुल 77 ध्यानाकर्षण प्रस्ताव भी सूचीबद्ध हैं, जिनमें कानून-व्यवस्था, उद्योगों में सुरक्षा, सामाजिक और विकास से जुड़े मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगा जाएगा। इन प्रस्तावों में बलौदाबाजार जिले के बकुलाही स्थित इस्पात संयंत्र में मजदूरों की मौत का मामला भी शामिल है। इस घटना में सुरक्षा मानकों की अनदेखी के आरोपों पर सरकार से कार्रवाई और जांच की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की जाएगी। प्रदेश में बढ़ती चाकूबाजी की घटनाओं को लेकर भी सदन में चर्चा होने की संभावना है। विधायक इस मुद्दे पर सरकार से अपराध नियंत्रण के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी मांग सकते हैं। इसके अलावा राज्य में गौवंश की स्थिति, कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम, पशुधन विकास योजनाओं और मंडी निधि से बने सामुदायिक भवनों की प्रगति पर भी सवाल उठेंगे। मंदिरों के जीर्णोद्धार और धार्मिक स्थलों के संरक्षण से जुड़े मुद्दे भी चर्चा का हिस्सा बनेंगे। रायपुर विकास प्राधिकरण और हाउसिंग बोर्ड की कॉलोनियों को नगर निगम सीमा में शामिल करने का विषय भी सदन में उठेगा, जो इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को शहरी सुविधाएं उपलब्ध कराने से जुड़ा है। उद्योगों से निकलने वाले फ्लाईऐश के प्रबंधन, मछली पालन योजनाओं और उत्पादन बढ़ाने के प्रयासों पर भी सरकार से जवाब मांगा जाएगा। इसके साथ ही विभिन्न मंत्रियों के विभागों की योजनाओं और उनके क्रियान्वयन पर भी चर्चा होने की संभावना है। कुल मिलाकर आज का प्रश्नकाल कई अहम मुद्दों पर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस का साक्षी बन सकता है।

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रायपुर में ड्रिंक एंड ड्राइव पर सख्ती, 3 महीने में 949 चालकों पर कार्रवाई

राजधानी रायपुर में पुलिस कमिश्नरेट लागू होने के बाद शराब पीकर वाहन चलाने वालों के खिलाफ अभियान तेज कर दिया गया है। शहर के विभिन्न इलाकों में यातायात पुलिस द्वारा नियमित चेकिंग की जा रही है, जिसके तहत जनवरी से मार्च के बीच अब तक 949 चालकों पर कार्रवाई की गई है। आंकड़ों के अनुसार जनवरी में 130, फरवरी में 279 और मार्च में अब तक 540 लोगों को नशे की हालत में वाहन चलाते पकड़ा गया। पुलिस का कहना है कि सड़क दुर्घटनाओं को कम करने और यातायात को सुरक्षित बनाने के लिए यह विशेष अभियान चलाया जा रहा है। हाल ही में 11 मार्च की रात फुंडहर चौक, टेमरी चौक, ऊर्जा पार्क रोड, ऐश्वर्या बाजार और विधानसभा रोड सहित कई स्थानों पर चेकिंग अभियान चलाया गया। इस दौरान 58 चालक शराब के नशे में वाहन चलाते पाए गए, जिनके खिलाफ मोटर व्हीकल एक्ट के तहत चालान कर उन्हें न्यायालय में पेश किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक रायपुर में हर साल ड्रिंक एंड ड्राइव के कारण बड़ी संख्या में सड़क हादसे होते हैं। अनुमान है कि प्रतिवर्ष 1800 से 2000 दुर्घटनाएं नशे में वाहन चलाने की वजह से दर्ज होती हैं, जिनमें 600 से अधिक लोगों की जान चली जाती है। वर्ष 2025 में ही ऐसे 1523 मामलों में कार्रवाई की गई थी और 680 ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित किए गए थे। मोटर वाहन अधिनियम 2019 के अनुसार शराब पीकर वाहन चलाते पकड़े जाने पर 10 हजार रुपये तक का जुर्माना, लाइसेंस निलंबन और जेल की सजा का प्रावधान है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि इस अपराध के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल जुर्माना लगाने से समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होगी। इसके लिए लोगों में जागरूकता, जिम्मेदारी और सख्त निगरानी भी उतनी ही जरूरी है।

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प्रदेश में 7 लाख से ज्यादा एक्सपायर रजिस्ट्रेशन वाले वाहन सड़कों पर, मालिकों का रिकॉर्ड भी अधूरा

प्रदेश में बड़ी संख्या में ऐसे वाहन सड़कों पर चल रहे हैं, जिनकी वैधता अवधि समाप्त हो चुकी है। आंकड़ों के अनुसार 15 वर्ष की आयु पूरी कर चुके 7 लाख से अधिक कार और दोपहिया वाहन बिना रिन्यूअल, फिटनेस और बीमा के ही उपयोग में लाए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि ये वाहन वर्ष 2005 से 2010 के बीच खरीदे गए थे। उस समय ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन सिस्टम लागू नहीं था, जिसके कारण परिवहन विभाग के रिकॉर्ड में कई वाहन मालिकों की पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं है। नाम-पते अधूरे हैं और मोबाइल नंबर भी दर्ज नहीं हैं। इससे ट्रैफिक नियम उल्लंघन होने पर भी कैमरों के जरिए चालान जारी करना मुश्किल हो रहा है। नियमों के अनुसार 15 साल पुराने वाहनों का या तो दोबारा रजिस्ट्रेशन कराना होता है या उन्हें स्क्रैप घोषित करना होता है। रजिस्ट्रेशन से पहले वाहन की फिटनेस जांच भी अनिवार्य होती है, लेकिन अधिकांश वाहन मालिकों ने यह प्रक्रिया पूरी नहीं कराई। जानकारी के मुताबिक 2005 से 2010 के बीच करीब 8 लाख वाहन खरीदे गए थे, जिनमें से केवल लगभग 1 लाख वाहनों का ही नवीनीकरण कराया गया है। बाकी करीब 7 लाख वाहन अब भी सड़कों पर चल रहे हैं। पिछले पांच वर्षों में केवल कुछ ही वाहनों को आधिकारिक रूप से कबाड़ घोषित किया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे पुराने और बिना रिकॉर्ड वाले वाहनों का इस्तेमाल अपराध में भी किया जा सकता है, क्योंकि नंबर प्लेट से मालिक की पहचान करना कठिन होता है। हाल ही में एक आपराधिक मामले में आरोपी इसी तरह की एक्सपायर रजिस्ट्रेशन वाली बाइक का उपयोग करते हुए फरार हुआ था। सरकार अब ऐसे वाहनों के लिए समय सीमा तय करने की तैयारी में है। निर्धारित अवधि के बाद जिन वाहनों का नवीनीकरण नहीं कराया जाएगा, उन्हें रिकॉर्ड से हटाकर जब्त कर सीधे स्क्रैप किया जा सकता है।

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