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राजनांदगांव में पहली बारिश में धंसा 26 करोड़ का रेलवे ओवरब्रिज, विधानसभा अध्यक्ष ने रेल मंत्री से मांगी जांच

छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में प्रधानमंत्री गति शक्ति योजना के तहत निर्मित लगभग 26 करोड़ रुपये के रेलवे ओवरब्रिज में पहली ही बारिश के बाद गंभीर निर्माण संबंधी खामियां सामने आई हैं। जून में लोकार्पण के कुछ समय बाद हुई बारिश में ओवरब्रिज की सड़क धंस गई और उस पर बड़ी दरारें दिखाई देने लगीं। मामले को गंभीर मानते हुए विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखकर पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। बारिश के बाद सड़क में आई बड़ी दरारें डोंगरगढ़-राजनांदगांव रेलखंड पर बने इस ओवरब्रिज में 4 और 5 जुलाई की बारिश के बाद करीब 60 से 70 फीट लंबी तथा 15 से 20 सेंटीमीटर चौड़ी दरारें दिखाई दीं। सड़क का एक हिस्सा धंसने से ओवरब्रिज की संरचना पर सवाल उठने लगे हैं। निर्माण सामग्री को लेकर आरोप स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि टेंडर की शर्तों के अनुसार बेस में उच्च गुणवत्ता की मुरुम का उपयोग किया जाना था, लेकिन उसकी जगह साधारण मिट्टी का इस्तेमाल किया गया। आरोप है कि बारिश के कारण मिट्टी बैठने से सड़क धंस गई। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही होगी। गुणवत्ता जांच पर भी उठे सवाल मामले में निर्माण सामग्री की गुणवत्ता जांच और तकनीकी परीक्षण की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं। आरोप है कि पर्याप्त परीक्षण के बिना ही ओवरब्रिज को यातायात के लिए खोल दिया गया था। अस्थायी मरम्मत के बाद भी जारी है आवाजाही प्रशासन ने फिलहाल दरारों को सीमेंट से भरकर अस्थायी मरम्मत की है। इसके बावजूद ओवरब्रिज से भारी वाहनों का आवागमन जारी है, जिससे स्थानीय लोगों में सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है। रेल मंत्री से की गई प्रमुख मांगें डॉ. रमन सिंह ने अपने पत्र में पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने, निर्माण एजेंसी, ठेकेदार, कंसल्टेंट और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने तथा तकनीकी सुरक्षा परीक्षण के बाद आवश्यक मरम्मत या पुनर्निर्माण कराने की मांग की है।

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छत्तीसगढ़ में वन्यजीवों का बढ़ा खतरा: हाथियों ने 8 मकान तोड़े, बाघ और तेंदुए की मौजूदगी से कई जिलों में अलर्ट

छत्तीसगढ़ के कई जिलों में वन्यजीवों की गतिविधियां बढ़ने से वन विभाग ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ वन मंडल में हाथियों के झुंड ने पिछले दो दिनों में कई गांवों में भारी नुकसान पहुंचाया है। वहीं बस्तर के जगदलपुर क्षेत्र में बाघ की मौजूदगी और कांकेर में तेंदुए की गतिविधियों ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। दो रातों में 8 मकानों को पहुंचाया नुकसान धरमजयगढ़ वन मंडल के कापू रेंज की लिप्ती बीट अंतर्गत चितामाड़ा, पखनाकोट और कमरई गांवों में हाथियों का दल आबादी तक पहुंच गया। सोमवार रात हाथियों ने कई ग्रामीणों के मकानों को क्षतिग्रस्त कर दिया, जबकि मंगलवार रात भी पखनाकोट में दो और मकानों को नुकसान पहुंचाया। इसके अलावा तीन किसानों की धान की फसल और नर्सरी (थरहा) भी हाथियों ने रौंद दी। घटना की जानकारी मिलने के बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और नुकसान का सर्वे शुरू कर मुआवजा प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है। रायगढ़ जिले में 135 हाथी सक्रिय वन विभाग के अनुसार, इस समय रायगढ़ जिले में कुल 135 हाथी अलग-अलग समूहों में विचरण कर रहे हैं। इनमें 114 हाथी धरमजयगढ़ वन मंडल में और 21 हाथी रायगढ़ वन मंडल में सक्रिय हैं। विभाग लगातार हाथियों की निगरानी कर रहा है और ग्रामीणों से जंगल या हाथियों के नजदीक न जाने की अपील की है। जगदलपुर में फिर दिखे बाघ के निशान बस्तर के कुरंदी गांव में करीब 30 वर्ष बाद बाघ की मौजूदगी के संकेत मिले हैं। खेतों के पास जंगल में बड़े आकार के ताजा पंजों के निशान मिलने के बाद ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। एहतियात के तौर पर लोग शाम के बाद घरों से कम निकल रहे हैं और मवेशियों को सुरक्षित स्थानों पर बांध रहे हैं। कांकेर में वन विभाग को चुनौती दे रहा तेंदुआ कांकेर जिले के ढेकलावन और गट्टागुड़ूम गांवों में तेंदुए की गतिविधियां बनी हुई हैं। वन विभाग ने उसे पकड़ने के लिए पिंजरे और कैमरे लगाए हैं, लेकिन तेंदुआ अब तक पिंजरे से दूर बना हुआ है। कैमरों में उसकी मौजूदगी सीमित बार दर्ज हुई है, जिससे उसे पकड़ना वन विभाग के लिए चुनौती बना हुआ है। वन विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों के लोगों से सतर्क रहने, रात के समय अनावश्यक रूप से बाहर न निकलने और किसी भी वन्यजीव की सूचना तुरंत विभाग को देने की अपील की है।

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छत्तीसगढ़ में अंतरधार्मिक निकाह के लिए वक्फ बोर्ड की अनुमति अनिवार्य, अगस्त 2026 से लागू होंगे नए नियम

छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड ने निकाह प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से नई व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। प्रस्तावित नियमों के तहत यदि कोई मुस्लिम युवक या युवती किसी गैर-मुस्लिम से निकाह करना चाहता है, तो पहले वक्फ बोर्ड से अनुमति लेना आवश्यक होगा। यह नई व्यवस्था अगस्त 2026 से पूरे प्रदेश में लागू की जाएगी। बोर्ड के अनुसार, अंतरधार्मिक निकाह से पहले दोनों पक्षों की सहमति, पहचान संबंधी दस्तावेज और सभी कानूनी औपचारिकताओं की जांच की जाएगी। यदि आवश्यक हुआ तो धर्म परिवर्तन से जुड़े दस्तावेजों का भी सत्यापन किया जाएगा। सभी प्रक्रियाएं पूरी होने और बोर्ड की अनुमति मिलने के बाद ही निकाह कराया जा सकेगा। नई व्यवस्था के तहत प्रदेश में निकाह कराने वाले सभी मौलानाओं का पंजीयन भी अनिवार्य किया जाएगा। केवल पंजीकृत मौलाना ही निकाह संपन्न करा सकेंगे। यदि कोई मौलाना बिना आवश्यक अनुमति के अंतरधार्मिक निकाह कराता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। वक्फ बोर्ड का कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य निकाह प्रक्रिया का रिकॉर्ड सुरक्षित रखना, फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल को रोकना और भविष्य में उत्पन्न होने वाले कानूनी विवादों को कम करना है। इसके तहत हर निकाह का रिकॉर्ड बोर्ड के पास सुरक्षित रहेगा और प्रमाणपत्र भी बोर्ड की ओर से जारी किया जाएगा। साथ ही निकाहनामा एक समान प्रारूप में तैयार किया जाएगा। वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष सलीम राज ने बताया कि वर्तमान में कई स्थानों पर बिना किसी केंद्रीय रिकॉर्ड के निकाह कराए जाते हैं, जिससे बाद में पहचान, वैवाहिक स्थिति और सरकारी दस्तावेजों से जुड़े विवाद सामने आते हैं। उनका कहना है कि नई व्यवस्था से सरकारी दस्तावेज बनवाने की प्रक्रिया भी अधिक सरल होगी। बोर्ड के पदाधिकारियों के अनुसार, आदिवासी क्षेत्रों से महिलाओं को बहला-फुसलाकर विवाह करने और संपत्ति विवाद से जुड़ी कुछ शिकायतें मिली हैं। इन्हीं मामलों को ध्यान में रखते हुए अंतरधार्मिक निकाह की निगरानी बढ़ाने और सभी निकाह का रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का निर्णय लिया गया है। बोर्ड का कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य किसी धर्म विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि निकाह प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और कानूनी रूप से व्यवस्थित बनाना है।

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OBC छात्रों के लिए गोगांव खेल परिसर में प्रवेश का मौका, 6 जुलाई तक करें आवेदन

अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के छात्र-छात्राओं के लिए खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने का सुनहरा अवसर है। गोगांव स्थित खेल परिसर में प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो गई है। इच्छुक अभ्यर्थी 6 जुलाई तक आवेदन कर सकते हैं, जबकि चयन के लिए 7 जुलाई को शारीरिक दक्षता परीक्षा आयोजित की जाएगी। यह प्रवेश प्रक्रिया उन OBC विद्यार्थियों के लिए है, जो खेल प्रतिभा को निखारना चाहते हैं और नियमित प्रशिक्षण प्राप्त करना चाहते हैं। चयनित खिलाड़ियों को खेल परिसर में प्रशिक्षण और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों को निर्धारित तिथि तक सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ आवेदन जमा करना होगा। शारीरिक दक्षता परीक्षा में प्रदर्शन के आधार पर अंतिम चयन किया जाएगा।

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स्कूलों में मंत्रोच्चार के खिलाफ याचिका खारिज, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सबूत के साथ दोबारा आने की दी छूट

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य के स्कूलों में मंत्रोच्चार कराए जाने से जुड़े सरकारी आदेश को चुनौती देने वाली याचिका फिलहाल खारिज कर दी है। अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है, जिससे यह साबित हो सके कि संबंधित आदेश का स्कूलों में वास्तव में पालन किया जा रहा है। यह याचिका पूर्व वक्फ बोर्ड अध्यक्ष अब्दुल सलमान रिज़वी की ओर से दायर की गई थी। याचिका में राज्य सरकार के आदेश को संविधान के विरुद्ध बताते हुए उसे निरस्त करने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता डॉ. अमीर खान के अनुसार, हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने कहा कि केवल आदेश जारी होने के आधार पर हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता। जब तक यह साबित न हो कि आदेश लागू किया जा रहा है, तब तक अदालत राहत देने का आधार नहीं मान सकती। हालांकि, अदालत ने याचिकाकर्ता को भविष्य में दोबारा याचिका दायर करने की अनुमति दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि किसी स्कूल में आदेश के पालन के ठोस साक्ष्य, जैसे वीडियो, फोटो या अन्य दस्तावेज उपलब्ध हों, तो उन्हें रिकॉर्ड के साथ नई याचिका दाखिल की जा सकती है। फिलहाल इस फैसले के बाद स्कूलों में मंत्रोच्चार से जुड़े सरकारी आदेश पर कानूनी रोक नहीं लगी है। हालांकि, यदि भविष्य में आदेश के क्रियान्वयन के प्रमाण सामने आते हैं, तो यह मामला फिर से न्यायालय के समक्ष लाया जा सकता है.

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रायगढ़ में प्रोफेसर पर युवती का गंभीर आरोप, सेक्स के लिए दबाव बताकर मंगेतर संग की मारपीट, VIDEO वायरल

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले से एक प्रोफेसर पर गंभीर आरोपों का मामला सामने आया है। एक युवती ने शासकीय महाविद्यालय के प्रोफेसर रेमन भार्गव पर लंबे समय से अश्लील संदेश भेजने और शारीरिक संबंध बनाने का दबाव डालने का आरोप लगाया है। आरोपों से नाराज युवती अपने मंगेतर के साथ प्रोफेसर के घर पहुंची, जहां दोनों के बीच तीखी बहस हुई। विवाद के दौरान युवती ने प्रोफेसर का कॉलर पकड़कर थप्पड़ मार दिए। इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। युवती का कहना है कि प्रोफेसर पिछले करीब डेढ़ साल से व्हाट्सएप और टेलीग्राम के माध्यम से आपत्तिजनक संदेश भेज रहे थे। उसने आरोप लगाया कि कई बार संबंध बनाने के लिए दबाव भी बनाया गया। लगातार मानसिक रूप से परेशान होने के बाद उसने इस मामले की शिकायत पुलिस में दर्ज कराई। बताया जा रहा है कि 1 जुलाई को युवती अपने होने वाले पति के साथ प्रोफेसर के निवास पर पहुंची थी। वहीं दोनों पक्षों के बीच विवाद बढ़ गया और मारपीट की स्थिति बन गई। वायरल वीडियो में युवती प्रोफेसर से नाराजगी जाहिर करते हुए कहती दिखाई दे रही है कि उसकी शादी होने वाली है और उसके साथ गलत व्यवहार किया गया। वीडियो में प्रोफेसर की पत्नी भी माफी मांगती नजर आ रही हैं। युवती ने यह भी दावा किया कि प्रोफेसर ने अन्य लड़कियों को भी परेशान किया है। उसने कहा कि यदि किसी और छात्रा या युवती के साथ भी ऐसा हुआ है तो वे सामने आएं, ताकि मामले में आगे कानूनी कार्रवाई की जा सके। उसका कहना है कि यदि उसे न्याय नहीं मिला तो वह कानूनी लड़ाई जारी रखेगी। इस मामले पर शासकीय कॉलेज कुंजारा के प्राचार्य एमएल पटेल ने कहा कि यह कॉलेज परिसर से जुड़ा मामला नहीं है, बल्कि दोनों पक्षों का निजी विवाद है। कॉलेज प्रशासन को पहले कोई लिखित शिकायत नहीं मिली थी। शिकायत मिलने पर नियमानुसार उच्च अधिकारियों को जानकारी दी जाती। वहीं, लैलूंगा थाना प्रभारी गिरधारी साव ने बताया कि युवती ने प्रोफेसर के खिलाफ शिकायत दी थी, लेकिन बाद में दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया। समझौते के बाद पुलिस ने मामले में आगे कोई कार्रवाई नहीं की। नोट: इस मामले में लगाए गए आरोप युवती के बयान पर आधारित हैं। पुलिस के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच समझौता होने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई नहीं की गई।

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छत्तीसगढ़ के 16 हजार कोटवारों का सरकार को अल्टीमेटम, 15 अगस्त तक मांगें पूरी नहीं हुईं तो होगा प्रदेशव्यापी आंदोलन

छत्तीसगढ़ के कोटवारों ने अपनी विभिन्न लंबित मांगों को लेकर सरकार को अंतिम चेतावनी दी है। कोटवार एसोसिएशन ऑफ छत्तीसगढ़ ने कहा है कि यदि 15 अगस्त तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो 16 हजार से अधिक कोटवार पूरे प्रदेश में आंदोलन शुरू करेंगे। संघ के प्रदेश अध्यक्ष प्रेम किशोर बाघ ने बताया कि कई बार शासन और प्रशासन का ध्यान इस मुद्दे की ओर आकर्षित कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। उनका कहना है कि दशकों से राजस्व विभाग से जुड़े महत्वपूर्ण कार्य करने के बावजूद कोटवारों को नियमित कर्मचारी का दर्जा, पर्याप्त मानदेय और सामाजिक सुरक्षा जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। संघ का आरोप है कि वर्तमान में मिलने वाला पारिश्रमिक बेहद कम है, जिससे कोटवारों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा नियुक्ति प्रक्रिया में अनियमितता, झूठी शिकायतों के आधार पर कार्रवाई और सेवा के दौरान परिवार के सदस्यों को प्राथमिकता नहीं दिए जाने जैसी समस्याएं भी लगातार बनी हुई हैं। कोटवार संघ की प्रमुख मांगों में राजस्व विभाग के अधीन नियमितीकरण, न्यूनतम 15 हजार रुपये मासिक मानदेय, नियुक्ति में परिवार के योग्य सदस्य को प्राथमिकता, बेबुनियाद शिकायतों पर कार्रवाई रोकना, बेगार प्रथा समाप्त करना तथा नगर निगम और नगरपालिका क्षेत्रों में कोटवारों की नियुक्ति पर लगे प्रतिबंध को हटाना शामिल है। संघ ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समय सीमा तक मांगें पूरी नहीं होती हैं, तो प्रदेशभर के करीब 16 हजार कोटवार एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन करेंगे और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर अपने अधिकारों की मांग करेंगे।

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छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में कम अंक वाले छात्रों को प्रवेश से इनकार? शिक्षक संघ ने सरकार से की हस्तक्षेप की मांग

छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में कम अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को प्रवेश नहीं दिए जाने के आरोप सामने आए हैं। इस मुद्दे को लेकर शिक्षक संघ ने मुख्यमंत्री और स्कूल शिक्षा मंत्री को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। शिक्षक संघ का कहना है कि बोर्ड परीक्षा के कमजोर परिणामों के बाद कई प्राचार्यों के तबादले और प्रशासनिक कार्रवाई की गई है। इसी दबाव के कारण कुछ स्कूल अब कम अंक लाने वाले विद्यार्थियों का दाखिला लेने से बच रहे हैं। संघ के अनुसार, कुछ सरकारी स्कूल पिछले वर्ष के बोर्ड परीक्षा परिणाम के आधार पर छात्रों का चयन कर रहे हैं। इससे कम अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को प्रवेश से वंचित किया जा रहा है, जबकि सरकारी स्कूल सभी छात्रों के लिए खुले होने चाहिए। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि बेहतर परीक्षा परिणाम दिखाने के दबाव का असर शिक्षा व्यवस्था पर पड़ रहा है। संघ का दावा है कि कार्रवाई के डर से कुछ स्थानों पर बोर्ड परीक्षाओं में नकल जैसी शिकायतें भी सामने आई हैं। उनका कहना है कि केवल अच्छे रिजल्ट पर जोर देने से शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य प्रभावित हो रहा है। शिक्षक संघ ने यह भी सवाल उठाया कि राज्य सरकार एक ओर स्कूल छोड़ने वाले बच्चों (ड्रॉपआउट) की संख्या कम करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है, वहीं दूसरी ओर यदि पढ़ने के इच्छुक छात्रों को ही प्रवेश नहीं मिलेगा तो यह लक्ष्य हासिल करना मुश्किल हो जाएगा। संघ ने सरकार से मांग की है कि सभी सरकारी स्कूलों को स्पष्ट निर्देश जारी किए जाएं ताकि हर पात्र विद्यार्थी को बिना किसी भेदभाव के प्रवेश मिल सके और किसी भी छात्र को केवल कम अंक होने के आधार पर दाखिले से वंचित न किया जाए।

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नकटी गांव में बुलडोजर कार्रवाई के बाद खुले आसमान तले गुजरी विस्थापितों की रात, सांसद के आश्वासन पर उठे सवाल

रायपुर के नकटी गांव में सोमवार तड़के हुई बुलडोजर कार्रवाई के बाद कई परिवारों को पूरी रात खुले आसमान के नीचे गुजारनी पड़ी। प्रभावित लोगों का आरोप है कि सुबह करीब 4 बजे पहले इलाके की बिजली बंद कर दी गई और उसके बाद प्रशासन ने मकानों को हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी। इस अभियान में करीब 80 घरों को ध्वस्त किया गया, जिससे महिलाएं, बुजुर्ग और छोटे बच्चे बेघर हो गए। देर रात कांग्रेस नेता विकास उपाध्याय प्रभावित परिवारों से मिलने पहुंचे। लोगों ने उन्हें बताया कि पुनर्वास के नाम पर बड़े परिवारों को केवल एक कमरा दिया जा रहा है। उनका कहना है कि जिन मकानों का आवंटन किया जा रहा है, वहां बिजली, पानी और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं भी पर्याप्त नहीं हैं, जिससे वहां रहना मुश्किल होगा। ग्रामीणों ने यह भी दावा किया कि दो दिन पहले वे रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल से मिले थे। उनका कहना है कि सांसद ने आश्वासन दिया था कि बारिश के मौसम में किसी भी घर को नहीं तोड़ा जाएगा और प्रशासन के साथ बातचीत कर समाधान निकाला जाएगा। कार्रवाई होने के बाद प्रभावित परिवारों ने इस आश्वासन पर सवाल उठाते हुए नाराजगी जताई। कार्रवाई के दौरान कई भावुक तस्वीरें सामने आईं। कोई अपने घर का सामान मलबे के बीच समेटता नजर आया तो कोई टूटे हुए मकान के पास परिवार के साथ बैठा रहा। कई लोग पूरे दिन अपने घरों के अवशेषों के पास ही डटे रहे। प्रशासन का कहना है कि प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अधिकारियों के अनुसार, नया रायपुर के सेक्टर-30 स्थित ईडब्ल्यूएस मकानों में विस्थापित परिवारों को बसाने के लिए आवंटन की कार्रवाई जारी है। इस पूरे मामले पर पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने बरसात से ठीक पहले की गई इस कार्रवाई को असंवेदनशील बताते हुए इसकी आलोचना की और सरकार के फैसले पर सवाल उठाए। वहीं कांग्रेस नेता विकास उपाध्याय ने आरोप लगाया कि विधायक आवास परियोजना के लिए 95 से अधिक परिवारों को बेघर किया गया है। उन्होंने कहा कि लोगों को पहले आश्वासन दिया गया था कि बारिश के दौरान कोई कार्रवाई नहीं होगी, लेकिन इसके बावजूद मकान तोड़ दिए गए। बुलडोजर कार्रवाई से प्रभावित बच्चों ने भी अपनी पीड़ा साझा की। उनका कहना था कि सुबह से घर में खाना नहीं बन पाया था और वे भूखे-प्यासे थे। इसी दौरान प्रशासन और पुलिस की टीम पहुंची और मकानों को तोड़ने की कार्रवाई शुरू कर दी। कार्रवाई के बीच एक ओर जहां लोगों के घर गिराए जा रहे थे, वहीं दूसरी ओर प्रशासन की ओर से मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों और प्रभावित लोगों को नाश्ते के पैकेट भी वितरित किए गए। पूरे घटनाक्रम के बाद नकटी गांव का माहौल देर रात तक तनावपूर्ण बना रहा।

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ZIP फाइल खोलते ही मोबाइल हो सकता है हैक, CEO बनकर भेजे जा रहे फर्जी मैसेज; 30 महीनों में 791 करोड़ की साइबर ठगी

साइबर अपराधी अब लोगों को निशाना बनाने के लिए एक नया तरीका अपना रहे हैं, जिसे CEO इम्पर्सनेशन स्कैम या बॉस ZIP फ्रॉड कहा जा रहा है। इस तरीके में ठग किसी कंपनी के सीईओ, डायरेक्टर या वरिष्ठ अधिकारी बनकर कर्मचारियों को व्हाट्सएप या ई-मेल के जरिए संदेश भेजते हैं। संदेश के साथ एक ZIP फाइल भी भेजी जाती है, जिसे डाउनलोड या ओपन करते ही मोबाइल या कंप्यूटर मालवेयर की चपेट में आ सकता है। गृह मंत्रालय ने इस तरह की साइबर ठगी को लेकर लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पिछले 30 महीनों में छत्तीसगढ़ में साइबर अपराधी करीब 791 करोड़ रुपये की ठगी कर चुके हैं। ZIP फाइल के जरिए कैसे होती है ठगी? साइबर एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ठग कर्मचारियों पर जल्दबाजी का दबाव बनाते हैं। वे सिक्योरिटी अपडेट, जरूरी दस्तावेज, पेमेंट अप्रूवल या अन्य आधिकारिक काम का बहाना बनाकर ZIP फाइल भेजते हैं। कई बार इस फाइल के अंदर EXE या DLL जैसी खतरनाक फाइलें छिपी होती हैं। यदि उपयोगकर्ता ऐसी फाइल को डाउनलोड या इंस्टॉल कर देता है, तो डिवाइस संक्रमित हो सकता है। इसके बाद साइबर अपराधी बैंकिंग ऐप, ओटीपी, पासवर्ड और अन्य संवेदनशील जानकारी तक पहुंच बनाने की कोशिश करते हैं। कई मामलों में वे संपर्क सूची में बदलाव कर अपने नंबर को वरिष्ठ अधिकारी के नाम से सेव कर देते हैं, जिससे कर्मचारी आसानी से उनके झांसे में आ जाते हैं और फर्जी निर्देशों पर पैसे ट्रांसफर कर देते हैं। बचाव के लिए क्या करें? साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी वरिष्ठ अधिकारी के नाम से आने वाले संदिग्ध संदेश या ZIP फाइल पर बिना पुष्टि किए भरोसा न करें। किसी भी भुगतान या जरूरी निर्देश का पालन करने से पहले संबंधित अधिकारी से फोन, वीडियो कॉल या व्यक्तिगत संपर्क के जरिए पुष्टि करें। साथ ही व्हाट्सएप पर टू-स्टेप वेरिफिकेशन जैसे सुरक्षा फीचर्स सक्रिय रखें और किसी भी अनजान ZIP, EXE या DLL फाइल को डाउनलोड या ओपन करने से बचें। पुलिस की कार्रवाई जारी रायपुर पुलिस ने हाल ही में 101 म्यूल अकाउंट धारकों को गिरफ्तार किया है। इन खातों का इस्तेमाल देशभर में करीब 1.57 करोड़ रुपये की साइबर ठगी के लिए किया गया था। इसके अलावा पुलिस ने एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय कॉल सेंटर गिरोह का भी खुलासा किया, जिसने अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाकर दो वर्षों में 50 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की। पुलिस लगातार साइबर अपराधियों के बैंक खातों को फ्रीज कर रही है और समय पर शिकायत मिलने पर पीड़ितों की रकम रोकने का प्रयास भी किया जा रहा है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ते साइबर अपराधों से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका लोगों में जागरूकता बढ़ाना है। साइबर ठगी होने पर तुरंत क्या करें?

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