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बिरगांव के गाज़ी नगर जामा मस्जिद में अदा हुई ईद की नमाज़, समाजसेवक पंकज शर्मा व महापौर नंदलाल देवांगन रहे शामिल

बिरगांव के गाज़ी नगर स्थित जामा मस्जिद में ईद की नमाज़ बड़े ही अकीदत, श्रद्धा और शांति के साथ अदा की गई। सुबह से ही नमाज़ियों का मस्जिद परिसर में पहुंचना शुरू हो गया था और देखते ही देखते भारी संख्या में लोग नमाज़ के लिए जुट गए। नमाज़ अदा करने के बाद लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाकर ईद की मुबारकबाद दी तथा अमन-चैन, भाईचारे और खुशहाली की दुआ मांगी। इस दौरान पूरा इलाका ईद की खुशियों और उत्साह से सराबोर नजर आया। इस अवसर पर समाजसेवक पंकज शर्मा, बिरगांव नगर निगम के महापौर नंदलाल देवांगन, वार्ड 28 के पार्षद इकराम अहमद तथा वार्ड 29 के पार्षद मोहम्मद रियाज़ भी उपस्थित रहे। सभी जनप्रतिनिधियों ने मुस्लिम समुदाय के लोगों को ईद की शुभकामनाएं दीं और कहा कि ईद का त्योहार प्रेम, सद्भाव और एकता का प्रतीक है, जो समाज को जोड़ने का संदेश देता है। ईद के मौके पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों, बुजुर्गों, युवाओं और बच्चों ने मिलकर त्योहार की खुशियां साझा कीं। लोगों ने एक-दूसरे के घर जाकर मुबारकबाद दी और मिठाइयों का आदान-प्रदान किया। यह पावन पर्व आपसी प्रेम, सौहार्द और इंसानियत का संदेश देता है, जिसे पूरे उत्साह और भाईचारे के साथ मनाया गया।

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पंडरी बाजार में फिर लौटा जाम का संकट: सील खुलते ही सड़कों पर खड़ी गाड़ियां, पार्किंग व्यवस्था का वादा अधूरा

शर्तों के साथ खुलीं 19 दुकानें, लेकिन सड़क पर ही पार्किंग से बिगड़ी ट्रैफिक व्यवस्था; नियम तोड़ने पर दोबारा कार्रवाई की चेतावनी राजधानी के सबसे व्यस्त कपड़ा बाजार पंडरी में एक बार फिर ट्रैफिक जाम की पुरानी समस्या लौट आई है। मुख्य सड़क की ओर खुलने वाली 19 दुकानों की सील हटते ही ग्राहकों की गाड़ियां फिर सड़क पर खड़ी होने लगी हैं, जबकि सील हटाने की प्रमुख शर्त यह थी कि दुकानदार अपने ग्राहकों के लिए अलग से पार्किंग की व्यवस्था करेंगे। (विस्तार से) पंडरी कपड़ा बाजार की मुख्य सड़क से लगी 19 दुकानों में अवैध रूप से लगाए गए शटर को हटाने के बाद नगर निगम ने इन्हें शर्तों के साथ खोला था, लेकिन दुकानें खुलते ही स्थिति पहले जैसी हो गई है। ग्राहक अब फिर से अपनी गाड़ियां सीधे दुकानों के सामने मुख्य सड़क पर खड़ी कर रहे हैं, जिससे पूरे दिन ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी रहती है। यह मार्ग देवेंद्रनगर, फाफाडीह सहित आसपास की कई कॉलोनियों को जोड़ने वाला प्रमुख रास्ता है, जहां प्रतिदिन लगभग 50 हजार से अधिक लोग आवाजाही करते हैं। पीक आवर्स में यहां वाहन रेंगते हुए नजर आते हैं। थोक बाजार के रूप में हुआ था विकास पंडरी कपड़ा मार्केट को आरडीए ने 1980 के दशक में थोक बाजार के रूप में विकसित किया था। उस समय स्वीकृत नक्शे के अनुसार दुकानों के दरवाजे अंदर की ओर खुलते थे और पूरा बाजार कवर संरचना में था। लेकिन वर्ष 2000 के बाद मुख्य सड़क से लगी दुकानों के कारोबारियों ने पीछे की दीवार तोड़कर सड़क की ओर शटर लगा लिए और वहीं से दुकान संचालित करना शुरू कर दिया। इसके कारण ग्राहक सड़क पर ही वाहन खड़ा करने लगे और मुख्य मार्ग संकरा हो गया। शपथ पत्र के बावजूद नियमों का उल्लंघन पहले हुई कार्रवाई के दौरान दुकानदारों ने लिखित शपथ पत्र दिया था कि मुख्य सड़क की ओर केवल शो-केस लगाए जाएंगे और वहां से दुकान संचालित नहीं होगी। इसके बावजूद दुकानदार इस शर्त का पालन नहीं कर रहे हैं और सड़क की ओर से ही व्यापार जारी है। 3 जून 2025 को सील, 10 महीने बाद खुलीं दुकानें लगातार शिकायतों के बाद नगर निगम ने 3 जून 2025 को इन 19 दुकानों को सील कर दिया था। लगभग 10 महीनों तक सड़क की ओर के दरवाजे बंद रहे। इसके बाद व्यापारी जनप्रतिनिधियों और व्यापारिक संगठनों की मदद से सील हटवाने के प्रयास करते रहे। 12 मार्च को महापौर, विधायक और निगम आयुक्त की मौजूदगी में बैठक हुई, जिसमें दुकानदारों ने अपने ग्राहकों के लिए पार्किंग की व्यवस्था करने पर सहमति दी। इसी आधार पर अगले दिन दुकानों की सील हटा दी गई। जनप्रतिनिधियों के बयान सहमति के आधार पर खोली गई दुकानें विधायक पुरंदर मिश्रा ने कहा कि पार्किंग व्यवस्था को लेकर दुकानदारों से सहमति बनने के बाद ही दुकानें खोली गई हैं। यदि शर्तों का पालन नहीं होता है तो निगम दोबारा कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है। नियमों का उल्लंघन हुआ तो फिर होगी कार्रवाई महापौर मीनल चौबे ने स्पष्ट कहा कि सील हटाने के साथ यह शर्त रखी गई थी कि सड़क पर जाम नहीं लगने दिया जाएगा। यदि शर्तों का उल्लंघन होता है तो नगर निगम फिर से सख्त कार्रवाई करेगा। निष्कर्ष पंडरी बाजार की दुकानों से सील हटाने के बाद ट्रैफिक व्यवस्था फिर से बिगड़ती दिखाई दे रही है। यदि जल्द पार्किंग की व्यवस्था नहीं की गई तो हजारों लोगों को रोजाना जाम की समस्या से जूझना पड़ेगा और प्रशासन को दोबारा कठोर कदम उठाने पड़ सकते हैं।

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विधानसभा में बड़ा खुलासा: 665 खतरनाक अपशिष्ट फैलाने वाले उद्योग सक्रिय, OPS पर भी गरमाई बहस

प्रदेश में 665 खतरनाक उद्योगों का संचालन, 2.91 लाख कर्मचारियों ने चुना OPS — बजट सत्र के आखिरी दिन सदन में गूंजे कई बड़े मुद्दे विधानसभा के बजट सत्र के अंतिम दिन प्रश्नकाल के दौरान पर्यावरण, कर्मचारियों की पेंशन और स्वास्थ्य से जुड़े गंभीर मुद्दों पर तीखी बहस देखने को मिली। सरकार ने पहली बार खुलासा किया कि प्रदेश में सैकड़ों ऐसे उद्योग चल रहे हैं जो खतरनाक अपशिष्ट उत्पन्न करते हैं। साथ ही OPS बनाम NPS पर भी आंकड़े सामने आए, जिससे कर्मचारियों से जुड़े सवालों को नई दिशा मिली। ⚖️ पूरी खबर (विस्तार से) विधानसभा बजट सत्र के आखिरी दिन प्रश्नकाल में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सत्ता और विपक्ष आमने-सामने दिखाई दिए। नेता प्रतिपक्ष द्वारा प्रदेश में खतरनाक अपशिष्ट पैदा करने वाले उद्योगों की संख्या और नियंत्रण व्यवस्था पर सवाल उठाया गया। 665 खतरनाक अपशिष्ट उत्पन्न करने वाले उद्योग संचालित सरकार की ओर से जवाब देते हुए मंत्री ओपी चौधरी ने बताया कि प्रदेश में कुल 665 औद्योगिक इकाइयाँ ऐसी हैं जो खतरनाक अपशिष्ट उत्पन्न करती हैं। उन्होंने कहा कि इन उद्योगों की निगरानी के लिए कदम उठाए जा रहे हैं और अभी तक 19 उद्योगों में ऑनलाइन एमिशन मॉनिटरिंग सिस्टम लगाया गया है। यह सिस्टम उद्योगों द्वारा अपने खर्च पर स्थापित किया जाता है और प्रदूषण पर लगातार निगरानी रखी जाती है। 🌫️ इस मुद्दे पर सदन में हल्की नोकझोंक भी देखने को मिली, क्योंकि विपक्ष ने निगरानी व्यवस्था को पर्याप्त नहीं बताया। छातिम (सप्तपर्णी) वृक्ष पर रोक नहीं भाजपा विधायक द्वारा छातिम वृक्ष के दुष्प्रभावों को लेकर सवाल पूछा गया कि क्या इसके रोपण पर प्रतिबंध लगाया गया है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि: ➡️ छातिम वृक्ष के रोपण पर फिलहाल कोई रोक नहीं➡️ इसे हटाने की भी कोई योजना नहीं यह पेड़ अक्टूबर में फूलता है और इसकी तेज गंध व परागकण कई लोगों में एलर्जी और सांस की समस्या पैदा करते हैं। OPS बनाम NPS: 2.91 लाख कर्मचारियों ने चुना OPS सरकारी कर्मचारियों की पेंशन व्यवस्था भी चर्चा का प्रमुख विषय रही। सरकार ने बताया कि: ➡️ कुल 2,91,797 अधिकारी-कर्मचारियों ने NPS छोड़कर OPS का विकल्प चुना➡️ पेंशन योजना निर्धारित नियमों के अनुसार संचालित की जा रही है इस मुद्दे पर भी सदन में तीखी बहस हुई क्योंकि OPS वित्तीय बोझ से जुड़ा बड़ा विषय माना जाता है। छातिम (सप्तपर्णी) वृक्ष: फायदे और नुकसान संभावित नुकसान औषधीय महत्व निष्कर्ष बजट सत्र के अंतिम दिन सदन में पर्यावरण प्रदूषण, स्वास्थ्य, पेड़-पौधों के प्रभाव और कर्मचारियों की पेंशन जैसे जनहित के मुद्दे प्रमुख रूप से सामने आए। सरकार ने आंकड़े तो दिए, लेकिन कई सवाल अभी भी जवाब की प्रतीक्षा में हैं।

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बिरगांव (रायपुर) में LPG गैस महंगाई के खिलाफ आम आदमी पार्टी का अनोखा विरोध, सिलेंडर की निकाली शवयात्रा

छत्तीसगढ़ की राजधानी Raipur से लगे Birgaon क्षेत्र में आज Aam Aadmi Party (AAP) ने बढ़ती LPG गैस कीमतों, सिलेंडर की कमी और कथित कालाबाजारी के विरोध में अनोखा प्रदर्शन किया। पार्टी कार्यकर्ताओं ने गैस सिलेंडर की प्रतीकात्मक “शवयात्रा” निकालकर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने कहा कि लगातार बढ़ती रसोई गैस कीमतों से आम आदमी का घर चलाना मुश्किल होता जा रहा है। गरीब और मध्यम वर्ग पर महंगाई का सीधा असर पड़ रहा है, जिससे परिवारों का मासिक बजट बिगड़ गया है। AAP नेताओं का आरोप है कि कई जगहों पर LPG सिलेंडर की उपलब्धता भी समस्या बनी हुई है और कालाबाजारी की शिकायतें सामने आ रही हैं। इसी के विरोध में यह प्रतीकात्मक शवयात्रा निकालकर सरकार का ध्यान आम जनता की परेशानियों की ओर आकर्षित करने की कोशिश की गई। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता और स्थानीय लोग शामिल हुए। रैली के दौरान “महंगाई वापस लो” और “सस्ती गैस दो” जैसे नारे लगाए गए। 🚩 राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बढ़ती महंगाई देशभर में एक बड़ा मुद्दा बनती जा रही है और विभिन्न राजनीतिक दल इस पर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहे हैं। फिलहाल यह देखना दिलचस्प होगा कि इस विरोध प्रदर्शन के बाद प्रशासन या सरकार की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने आती है या नहीं।

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धर्मांतरण पर सख्त कानून: छत्तीसगढ़ में आजीवन कारावास तक की सजा, शादी के लिए धर्म बदलना भी अवैध

छत्तीसगढ़ विधानसभा ने “धर्म स्वतंत्रता विधेयक, 2026” को पास कर दिया है, जिसके तहत अवैध धर्मांतरण कराने पर कड़े दंड का प्रावधान किया गया है। सरकार का कहना है कि यह कानून बल, प्रलोभन, धोखाधड़ी या गलत जानकारी देकर कराए जाने वाले धर्मांतरण को रोकने के लिए लाया गया है। \ नए कानून के अनुसार, अवैध तरीके से धर्मांतरण कराने पर दोषी व्यक्ति को 7 से 10 साल तक की जेल और कम से कम 5 लाख रुपये जुर्माना होगा। यदि पीड़ित नाबालिग, महिला, अनुसूचित जाति, जनजाति या अन्य पिछड़ा वर्ग से है, तो सजा 10 से 20 साल तक और न्यूनतम जुर्माना 10 लाख रुपये होगा। सामूहिक धर्मांतरण के मामलों में सजा और भी कठोर है—10 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की जेल और कम से कम 25 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। अगर कोई व्यक्ति पहले भी ऐसे मामले में दोषी ठहराया जा चुका है और दोबारा अपराध करता है, तो उसे सीधे उम्रकैद हो सकती है। कानून में यह भी प्रावधान है कि स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करने वाले व्यक्ति को 60 दिन पहले जिला कलेक्टर को आवेदन देना होगा। धार्मिक अनुष्ठान कराने वाले पादरी, मौलवी या पुजारी को भी पूर्व सूचना देना अनिवार्य होगा। बिना अनुमति धर्मांतरण कराना अवैध माना जाएगा और तुरंत गिरफ्तारी हो सकती है। शादी के लिए धर्म बदलने पर भी सख्ती की गई है। यदि विवाह केवल धर्म परिवर्तन के उद्देश्य से किया गया पाया गया, तो अदालत उसे शून्य घोषित कर सकती है। सरकार ने विदेशी फंडिंग और संस्थाओं की भूमिका पर भी निगरानी कड़ी कर दी है। दोषी पाए जाने पर संस्था का पंजीकरण रद्द किया जा सकता है। मामलों की सुनवाई के लिए प्रत्येक जिले में विशेष अदालतें बनाई जाएंगी, ताकि छह महीने के भीतर फैसला हो सके।

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छत्तीसगढ़ में RSS का महा अभियान: 30 लाख से ज्यादा परिवारों तक पहुंचा संघ, संगठन में भी होगा बड़ा बदलाव

Rashtriya Swayamsevak Sangh ने अपने शताब्दी वर्ष के मौके पर Chhattisgarh में अब तक का सबसे बड़ा ‘गृह संपर्क अभियान’ पूरा करने का दावा किया है। इस अभियान के दौरान स्वयंसेवकों ने करीब 30.55 लाख परिवारों तक पहुंच बनाकर सीधे संवाद किया, जिससे संगठन की जमीनी पकड़ और मजबूत हुई है। संघ के अनुसार, प्रदेश भर में 2,034 बड़े कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें लगभग 9 लाख से अधिक लोगों ने भाग लिया। उल्लेखनीय बात यह रही कि इन कार्यक्रमों में महिलाओं की भागीदारी पुरुषों से ज्यादा रही। संपर्क अभियान के तहत 13 हजार से अधिक गांवों और 600 से ज्यादा शहरी बस्तियों को कवर किया गया। संगठन ने भविष्य में निर्णय प्रक्रिया को तेज और प्रभावी बनाने के लिए अपने ढांचे में बदलाव की भी घोषणा की है। मार्च 2027 से मौजूदा प्रांत व्यवस्था की जगह संभाग आधारित संरचना लागू की जाएगी, जिसके तहत देश को 9 क्षेत्रों और 85 संभागों में विभाजित किया जाएगा। संघ के कार्य विस्तार की बात करें तो प्रदेश के सभी 34 जिलों में 2,000 से अधिक शाखाएं नियमित रूप से संचालित हो रही हैं। इनमें बड़ी संख्या विद्यार्थी और महाविद्यालयीन शाखाओं की है, जो युवाओं के बढ़ते जुड़ाव को दर्शाती है। राजधानी Raipur में भी संघ की गतिविधियां तेजी से बढ़ी हैं, जहां सैकड़ों बस्तियों में शाखाएं सक्रिय बताई जा रही हैं। युवा वर्ग को जोड़ने के लिए ‘युवा संगम’ कार्यक्रम भी आयोजित किए गए, जिनमें 23 हजार से अधिक युवाओं ने हिस्सा लिया। इन कार्यक्रमों में राष्ट्र निर्माण, उद्यमिता और सामाजिक विषयों पर चर्चा की गई। शताब्दी वर्ष के दौरान संघ ने ‘पंच परिवर्तन’—कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी, नागरिक कर्तव्य और सामाजिक समरसता—को समाज में व्यवहारिक रूप से अपनाने का लक्ष्य रखा है।

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19 लाख वोटर नाम कटने के आरोप पर विधानसभा में हंगामा, विपक्ष का वॉकआउट

Chhattisgarh विधानसभा के सत्र में SIR से जुड़े मुद्दे पर भारी हंगामा देखने को मिला। नेता प्रतिपक्ष Charandas Mahant ने आरोप लगाया कि प्रदेश में लगभग 19 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं और इस गंभीर मामले पर तत्काल चर्चा कराई जाए। उन्होंने इसे प्रदेश के नागरिकों के अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बताया। इस पर भाजपा विधायक Ajay Chandrakar ने कड़ा विरोध करते हुए कहा कि यह जनहित या राज्यहित का विषय नहीं, बल्कि निर्वाचन से संबंधित मामला है और इसे सदन में नहीं उठाया जाना चाहिए। इस बयान के बाद पक्ष-विपक्ष के बीच तीखी बहस शुरू हो गई और माहौल गरमा गया। विपक्ष के अन्य विधायकों ने आरोप लगाया कि बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं और इसकी जांच जरूरी है। वहीं सत्ता पक्ष ने कहा कि प्रदेश में सब कुछ सामान्य है और विपक्ष के पास मुद्दों की कमी है। आखिरकार आसंदी ने यह कहते हुए स्थगन प्रस्ताव खारिज कर दिया कि यह मामला भारत निर्वाचन आयोग के अधिकार क्षेत्र में आता है। निर्णय से नाराज विपक्षी सदस्य नारेबाजी करते हुए सदन से बाहर निकल गए और वॉकआउट कर दिया। इससे पहले सदन में छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 को प्रमुख विधायी कार्य के रूप में पेश करने की तैयारी की गई। इसके अलावा वीरता पदक प्राप्तकर्ताओं को मिलने वाली सुविधाओं, आयुष्मान योजना में कथित अनियमितता और अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी जैसे मुद्दों पर भी सवाल-जवाब हुए।

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Narendra Modi का बयान: अविश्वास प्रस्ताव निजी स्वार्थ से प्रेरित

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने Om Birla के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव को निजी स्वार्थ से प्रेरित बताया है। उन्होंने स्पीकर को लिखे पत्र में कहा कि कुछ लोग लोकतांत्रिक संस्थाओं को संकीर्ण दायरे में सीमित करना चाहते हैं। यह पत्र विपक्ष द्वारा स्पीकर को पद से हटाने के प्रस्ताव के खारिज होने के कुछ दिन बाद लिखा गया। प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रस्ताव गिरने के बाद स्पीकर का वक्तव्य लोकतांत्रिक मर्यादा की परिपक्व व्याख्या था और इससे यह स्पष्ट हुआ कि प्रस्ताव के पीछे अहंकार और निजी हित काम कर रहे थे। प्रस्ताव 11 मार्च को खारिज कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्ष ने लोकसभा में स्पीकर को हटाने के लिए प्रस्ताव पेश किया था, जिसे 11 मार्च को ध्वनिमत से खारिज कर दिया गया। विपक्ष के 119 सांसदों ने आरोप लगाया था कि स्पीकर सदन की कार्यवाही चलाने में पक्षपात कर रहे हैं और विपक्ष को पर्याप्त समय नहीं दिया जा रहा। स्पीकर का सांसदों को पत्र Om Birla ने भी सभी सांसदों को पत्र लिखकर संसद की गरिमा बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि संसद में उठने वाली हर आवाज देश के 140 करोड़ लोगों की उम्मीदों का प्रतिनिधित्व करती है। उन्होंने चिंता जताई कि कुछ सदस्य संसद के भीतर और बाहर उसके सम्मान को ठेस पहुंचा रहे हैं। बिरला ने सभी दलों से उच्च नैतिक आचरण बनाए रखने और आत्ममंथन करने की अपील की। प्रस्ताव लंबित रहने तक नहीं की अध्यक्षता अविश्वास प्रस्ताव लंबित रहने के दौरान ओम बिरला ने संसदीय परंपरा का हवाला देते हुए सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता से स्वयं को अलग रखा था। इस दौरान कार्यवाही पैनल ऑफ चेयरपर्सन के सदस्य संचालित कर रहे थे। प्रस्ताव खारिज होने के बाद उन्होंने फिर से सदन की अध्यक्षता संभाल ली। सरकार का जवाब Amit Shah ने प्रस्ताव पर सरकार की ओर से जवाब देते हुए कहा कि 18वीं लोकसभा में कांग्रेस सांसदों को भाजपा की तुलना में लगभग दोगुना समय मिला। इसके बावजूद विपक्ष द्वारा बोलने का मौका न मिलने का आरोप लगाया जा रहा है।

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रायपुर के औद्योगिक इलाकों में छापा: 7 नाबालिग बाल श्रमिक मुक्त, चार संस्थानों पर मामला दर्ज

राजधानी रायपुर के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में बाल श्रम के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए पुलिस और एनजीओ की संयुक्त टीम ने सात नाबालिग बच्चों को काम से मुक्त कराया है। उरला, सिलतरा और खमतराई स्थित कारखानों में छापेमारी कर इन बच्चों को रेस्क्यू किया गया, जहां उनसे उम्र से कहीं अधिक कठिन और जोखिम भरे काम कराए जा रहे थे। जांच के दौरान सामने आया कि बच्चों से भारी मशीनों और रसायनों के बीच वेल्डिंग, लोडिंग और पैकिंग जैसे काम कराए जा रहे थे। जिन संस्थानों पर कार्रवाई हुई, उनमें सोनी प्लाईवुड इंडस्ट्री, शैमरॉक ओवरसीज प्राइवेट लिमिटेड, इंद्राक्षी पाली प्लास्टर एलएलपी प्लांट तथा सन लॉजिस्टिक एंड डिस्ट्रीब्यूटर शामिल हैं। पुलिस ने कंपनी संचालकों के साथ एक ठेकेदार के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की है। शिकायतों के बाद हुई कार्रवाई एसोसिएशन फॉर वॉलंटरी एक्शन छत्तीसगढ़ (AVA) के अनुसार इन इलाकों में नाबालिगों से काम कराए जाने की लगातार शिकायतें मिल रही थीं। सूचना मिलने के बाद पुलिस के साथ संयुक्त टीम ने चार अलग-अलग स्थानों पर छापा मारा। कार्रवाई में उरला से तीन और खमतराई से चार बच्चों को मुक्त कराया गया। कुछ बच्चों से उद्योगों के अलावा बेकरी में भी काम कराया जा रहा था। मेडिकल जांच के बाद बाल गृह भेजे गए रेस्क्यू किए गए सभी बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया और फिर उन्हें बाल कल्याण समिति के सामने पेश किया गया। फिलहाल बच्चों को सुरक्षित बाल गृह में रखा गया है, जहां उनकी काउंसलिंग की जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक बच्चों के परिवारों से संपर्क स्थापित किया जा रहा है और आगे भी ऐसे अभियान जारी रहेंगे। पहले भी सामने आ चुका है बड़ा मामला रायपुर में बाल मजदूरी का यह पहला मामला नहीं है। करीब पांच महीने पहले खरोरा स्थित मोजो मशरूम फैक्ट्री से 109 नाबालिगों को मुक्त कराया गया था। उस कार्रवाई में 68 लड़कियां और 41 लड़के शामिल थे। हालांकि उस मामले में अब तक ठोस कार्रवाई न होने की बात सामने आ रही है। प्रशासन का कहना है कि शहर को बाल श्रम मुक्त बनाने के लिए निगरानी और छापेमारी अभियान लगातार जारी रहेंगे।

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गैस सिलेंडर की कीमत बढ़ने पर रायपुर में कांग्रेस का प्रदर्शन, घड़ी चौक पर किया विरोध

रसोई गैस की कीमतों में हाल ही में हुई बढ़ोतरी के विरोध में सोमवार को रायपुर में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। राजधानी के घड़ी चौक पर आयोजित इस विरोध प्रदर्शन में कई कांग्रेसी नेता हाथों में गैस सिलेंडर लेकर सड़क पर उतरे और केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि गैस सिलेंडर की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से आम लोगों पर महंगाई का बोझ बढ़ता जा रहा है। पार्टी के अनुसार घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 60 रुपए और व्यावसायिक सिलेंडर में 110 रुपए प्रति सिलेंडर की वृद्धि की गई है, जिससे आम उपभोक्ताओं और छोटे कारोबारियों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ रहा है। तेल कंपनियों के कार्यालयों के घेराव की चेतावनी कांग्रेस ने इस मूल्य वृद्धि के विरोध में सरकारी तेल कंपनियों के कार्यालयों का घेराव करने का भी ऐलान किया है। पार्टी नेताओं ने कहा कि अगर सरकार जल्द ही यह फैसला वापस नहीं लेती है तो पूरे प्रदेश में चरणबद्ध तरीके से आंदोलन तेज किया जाएगा। बड़ी संख्या में शामिल हुए पार्टी नेता और कार्यकर्ता प्रदर्शन के लिए प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से पार्टी के सभी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को घड़ी चौक पहुंचने का आह्वान किया गया था। इसके बाद प्रदेश और शहर स्तर के कई वरिष्ठ नेता और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए। कार्यक्रम में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सदस्य, वरिष्ठ नेता, सांसद और पूर्व सांसद, विधायक और पूर्व विधायक, पार्षद और पूर्व पार्षद, नेता प्रतिपक्ष तथा पूर्व नेता प्रतिपक्ष सहित पार्टी के कई पदाधिकारी मौजूद रहे। विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि भी हुए शामिल इस प्रदर्शन में महिला कांग्रेस, युवा कांग्रेस, एनएसयूआई, सेवादल, किसान कांग्रेस, अल्पसंख्यक विभाग, विधि विभाग, अनुसूचित जाति-जनजाति विभाग, पिछड़ा वर्ग विभाग और झुग्गी-झोपड़ी प्रकोष्ठ समेत कई संगठनों के पदाधिकारी भी शामिल हुए। इसके अलावा मंडल अध्यक्ष, बूथ अध्यक्ष, सेक्टर और जोन अध्यक्ष समेत बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता घड़ी चौक पर एकत्रित हुए। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि यदि गैस सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी वापस नहीं ली गई तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।

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