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बिलासपुर गौधाम में अव्यवस्था: 10×26 शेड में 205 मवेशी, हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

बिलासपुर जिले के तखतपुर ब्लॉक के लाखासार स्थित गौधाम में गंभीर अव्यवस्थाएं सामने आई हैं। यहां महज 10×26 फीट के छोटे से शेड में 200 से अधिक मवेशियों को रखा गया है, जिससे उनके बैठने तक की जगह नहीं बची है। इस मामले को लेकर Chhattisgarh High Court ने राज्य सरकार से शपथपत्र के माध्यम से जवाब मांगा है। जानकारी के अनुसार, इस गौधाम का उद्घाटन 14 मार्च को मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai ने किया था। करीब 25 एकड़ में बने इस परिसर में पशु संरक्षण और विकास के लिए कई घोषणाएं भी की गई थीं, जिनमें प्रशिक्षण भवन, काऊ कैचर और पशु एम्बुलेंस शामिल हैं। हालांकि, जमीनी हकीकत इन दावों से अलग नजर आ रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, छोटे से शेड में 205 मवेशियों को ठूंसकर रखा गया है, जबकि पशु चिकित्सकों के अनुसार एक मवेशी के लिए कम से कम 30 से 40 वर्गफुट जगह आवश्यक होती है। इस स्थिति में पशुओं के बीमार होने और संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ गया है। गौधाम में चारा और पानी की भी कमी बताई जा रही है। पशुओं के लिए पर्याप्त चारा उपलब्ध नहीं है और पूरे परिसर की देखरेख केवल एक चौकीदार के भरोसे है, जिसे सीमित वेतन पर 24 घंटे ड्यूटी करनी पड़ रही है। इसके अलावा, नवजात बछड़ों को उनकी मां से अलग रखने की बात भी सामने आई है, जो पशु कल्याण के लिहाज से गंभीर चिंता का विषय है। स्थानीय लोगों का कहना है कि गौधाम का उद्देश्य सड़कों से मवेशियों को हटाना था, लेकिन अब भी आसपास की सड़कों पर बड़ी संख्या में मवेशी घूमते नजर आते हैं। इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश Ramesh Sinha और न्यायमूर्ति Ravindra Kumar Agrawal की खंडपीठ में हुई। अगली सुनवाई 14 मई को निर्धारित की गई है।

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छत्तीसगढ़ में पीजी कोर्स में भी लागू होगी NEP, पाठ्यक्रम में जुड़ेगी भारतीय ज्ञान परंपरा

छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। स्नातक (यूजी) के बाद अब स्नातकोत्तर (पीजी) पाठ्यक्रमों में भी राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) लागू करने की तैयारी तेज हो गई है। राज्य का उच्च शिक्षा विभाग इस दिशा में तेजी से काम कर रहा है और नए पाठ्यक्रम में भारतीय ज्ञान परंपरा को भी शामिल किया जाएगा। पिछले शैक्षणिक सत्र में रायपुर के साइंस कॉलेज जैसे स्वायत्त संस्थानों और विश्वविद्यालयों के पीजी कोर्स में NEP लागू किया जा चुका है। इसके सकारात्मक परिणाम सामने आने के बाद अब इसे प्रदेश के अन्य शासकीय और निजी कॉलेजों में भी विस्तार देने की योजना बनाई जा रही है। नई शिक्षा व्यवस्था के तहत पीजी पाठ्यक्रमों को अधिक लचीला और रोजगारपरक बनाया जाएगा। इसमें मल्टीडिसिप्लिनरी शिक्षा, क्रेडिट आधारित सिस्टम और फ्लेक्सिबल एंट्री-एग्जिट जैसे प्रावधान शामिल होंगे। उच्च शिक्षा विभाग के अनुसार, प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। इसके लिए पाठ्यक्रमों में बदलाव, शिक्षकों का प्रशिक्षण और प्रशासनिक तैयारियां की जा रही हैं। वर्तमान में प्रदेश में 9 शासकीय विश्वविद्यालय हैं, जिनसे सैकड़ों शासकीय और निजी कॉलेज संबद्ध हैं, जिनमें ऑटोनोमस कॉलेज भी शामिल हैं। 7 मई को होगी अहम समीक्षा बैठक:उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा 7 मई को विभागीय समीक्षा बैठक लेंगे। इस बैठक में पीजी पाठ्यक्रमों में NEP लागू करने सहित 17 प्रमुख मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। बैठक में शिक्षक भर्ती, शैक्षणिक कैलेंडर और कॉलेजों में ऑनलाइन उपस्थिति जैसे विषय भी शामिल होंगे। क्या है भारतीय ज्ञान परंपरा:भारतीय ज्ञान परंपरा भारत की प्राचीन बौद्धिक धरोहर है, जिसमें गणित, खगोल विज्ञान, आयुर्वेद, दर्शन और धातु विज्ञान जैसे विषय शामिल हैं। इसका उद्देश्य पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक शिक्षा के साथ जोड़ना है, ताकि छात्र अपनी जड़ों से जुड़ सकें और समकालीन चुनौतियों का समाधान खोज सकें। यूजीसी के दिशा-निर्देशों के तहत इसे पीजी पाठ्यक्रम में शामिल करने का मकसद छात्रों में नैतिक मूल्यों का विकास करना और उन्हें प्राचीन भारतीय ज्ञान से परिचित कराना है। इसके जरिए छात्र कौटिल्य के अर्थशास्त्र से लेकर वैदिक गणित जैसे विषयों का व्यावहारिक ज्ञान हासिल कर सकेंगे।

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खमतराई ब्रिज के पास पानी चोरी पर निगम की सख्त कार्रवाई, अवैध कनेक्शन काटे

रायपुर में खमतराई ब्रिज के पास पानी की चोरी के मामले में नगर निगम ने कड़ी कार्रवाई की है। महापौर मीनल चौबे, जल कार्य विभाग अध्यक्ष संतोष सीमा साहू और आयुक्त विश्वदीप के निर्देश पर जल कार्य विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर अवैध नल कनेक्शनों को हटाया। यह कार्रवाई रावणभाठा फिल्टर प्लांट की टीम और नगर निगम जोन क्रमांक 2 के अधिकारियों के संयुक्त प्रयास से की गई। जांच के दौरान पाया गया कि राइजिंग मेन पाइप लाइन से गैरकानूनी तरीके से पानी लिया जा रहा था, जिसे तत्काल प्रभाव से बंद किया गया। कार्रवाई के दौरान जोन 2 के जोन कमिश्नर संतोष पाण्डेय, कार्यपालन अभियंता नर सिंह फरेन्द्र, पी.डी. धृतलहरे, सहायक अभियंता योगेन्द्र कुमार देवांगन सहित जल विभाग के अन्य अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे। निगम ने साफ किया है कि पानी चोरी के मामलों में आगे भी सख्त कदम उठाए जाएंगे।

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रायपुर में 136 पुलिसकर्मियों के तबादले, 2 SI समेत ASI और जवानों की बड़े स्तर पर बदली

Raipur पुलिस कमिश्नरेट में प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से बड़े पैमाने पर तबादले किए गए हैं। पुलिस कमिश्नर कार्यालय द्वारा जारी आदेश के तहत कुल 136 पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित किया गया है। जारी सूची के अनुसार, इस तबादला आदेश में 2 सब-इंस्पेक्टर (SI), 16 असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (ASI) और 118 हेड कांस्टेबल व कांस्टेबल शामिल हैं। सभी को अलग-अलग थानों और इकाइयों में नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। पुलिस विभाग के अनुसार, यह फेरबदल कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने और कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से किया गया है। आदेश जारी होते ही इसे तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। इस बड़े पैमाने के तबादले के बाद पुलिस विभाग में हलचल तेज हो गई है और नए पदस्थापना के अनुसार जिम्मेदारियां संभालने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।

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झारखंड शराब घोटाला मामले में IAS अनिल टुटेजा को अग्रिम जमानत, हाईकोर्ट ने लगाईं सख्त शर्तें

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कथित झारखंड शराब घोटाला मामले में निलंबित आईएएस अधिकारी Anil Tuteja को अग्रिम जमानत प्रदान की है। जस्टिस पी.पी. साहू की एकल पीठ ने उन्हें 50 हजार रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की दो जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है। अदालत ने जमानत देते हुए स्पष्ट किया है कि टुटेजा को जांच में पूरा सहयोग करना होगा और किसी भी गवाह को प्रभावित करने की कोशिश नहीं करनी होगी। कोर्ट ने यह भी कहा है कि यदि वे जांच में बाधा डालते हैं, तो जांच एजेंसी उनकी जमानत रद्द कराने के लिए स्वतंत्र होगी। हालांकि, इस राहत के बावजूद टुटेजा का जेल से बाहर आना फिलहाल आसान नहीं माना जा रहा है, क्योंकि हाल ही में छत्तीसगढ़ के चर्चित डीएमएफ और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उनकी जमानत याचिका खारिज हो चुकी है। आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने टुटेजा के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 और आईपीसी की धारा 420 व 120B के तहत मामला दर्ज किया है। आरोप है कि उन्होंने अन्य लोगों के साथ मिलकर झारखंड में छत्तीसगढ़ के आबकारी मॉडल की तर्ज पर अवैध शराब कारोबार के लिए एक सिंडिकेट तैयार किया। जांच एजेंसी के अनुसार, इस सिंडिकेट ने झारखंड की आबकारी नीति में बदलाव कर अपने पसंदीदा ठेकेदारों को फायदा पहुंचाया और अवैध रूप से करोड़ों रुपये का कमीशन अर्जित किया। टुटेजा ने गिरफ्तारी से बचने के लिए अग्रिम जमानत याचिका दायर करते हुए दावा किया था कि उन्हें लगातार अलग-अलग मामलों में फंसाकर जेल में रखने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि झारखंड पुलिस ने इस मामले में उन्हें आरोपी तक नहीं बनाया है। याचिका में यह भी उल्लेख किया गया कि पिछले पांच वर्षों में विभिन्न एजेंसियों द्वारा की गई छापेमारी में उनके पास से कोई अवैध संपत्ति बरामद नहीं हुई और न ही कोई ठोस डिजिटल या वित्तीय साक्ष्य मिला है। वहीं, राज्य सरकार ने जमानत का विरोध करते हुए टुटेजा को कई घोटालों का मास्टरमाइंड बताया और आरोप लगाया कि उन्होंने रायपुर में बैठकर झारखंड के अधिकारियों के साथ साजिश रची, जिससे सरकारी खजाने को नुकसान हुआ। हाईकोर्ट ने मामले के तथ्यों पर गौर करते हुए कहा कि टुटेजा पिछले दो वर्षों से न्यायिक हिरासत में हैं, इसके बावजूद जांच एजेंसी ने इस मामले में उनसे पूछताछ के लिए कोई विशेष प्रयास नहीं किया। साथ ही, झारखंड पुलिस द्वारा उन्हें आरोपी न बनाए जाने और अन्य आरोपियों को जमानत मिलने जैसे पहलुओं को भी ध्यान में रखा गया। इन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने उन्हें अग्रिम जमानत दी, लेकिन स्पष्ट किया कि जांच में सहयोग अनिवार्य होगा और किसी भी प्रकार की लापरवाही की स्थिति में जमानत रद्द की जा सकती है।

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पश्चिम बंगाल जीत में छत्तीसगढ़ भाजपा नेताओं की बड़ी भूमिका, 56 सीटों पर माइक्रो प्लानिंग से बदला समीकरण

देश के पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों के नतीजे सामने आने के बाद सबसे ज्यादा चर्चा पश्चिम बंगाल के परिणामों को लेकर हो रही है। भाजपा की जीत के साथ अब चुनावी रणनीति पर भी फोकस बढ़ गया है, जिसमें छत्तीसगढ़ के नेताओं की भूमिका अहम मानी जा रही है। पार्टी ने छत्तीसगढ़ के नेताओं को चुनाव के दौरान बड़ी जिम्मेदारियां सौंपी थीं। उन्हें 56 विधानसभा सीटों पर बूथ मैनेजमेंट से लेकर माइक्रो लेवल प्लानिंग तक का काम दिया गया था। कई सीटों पर उन्हें पूरी चुनावी कमान भी सौंपी गई थी, जहां उन्होंने संगठन को मजबूत करने और वोटिंग पैटर्न को साधने में काम किया। छत्तीसगढ़ भाजपा के संगठन महामंत्री पवन साय को इन 56 सीटों की जिम्मेदारी दी गई थी। उनका कार्य सिर्फ औपचारिक नहीं था, बल्कि बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करना और कार्यकर्ताओं के नेटवर्क को मजबूत बनाना था। चुनाव के दौरान उनकी रणनीति को अहम माना जा रहा है। इसके अलावा, क्लस्टर स्तर पर भी छत्तीसगढ़ के नेताओं को जिम्मेदारी दी गई थी। दुर्गापुर जिले के बर्धमान और दुर्गापुर लोकसभा क्षेत्रों की कमान पूर्व मंत्री राजेश मूणत और वरिष्ठ नेता शिवरतन शर्मा को सौंपी गई थी। उनके साथ समन्वय की जिम्मेदारी भूपेंद्र सवन्नी को दी गई थी। अन्य नेताओं में नीलू शर्मा, अनुराग सिंहदेव, हरपाल सिंह भाम्भरा और विश्व विजय सिंह तोमर को भी अलग-अलग सीटों पर तैनात किया गया था। इन सभी को चुनावी प्लानिंग, कैंपेनिंग और बूथ मैनेजमेंट के लिए माइक्रो स्तर पर काम करने के निर्देश दिए गए थे। कोलकाता क्लस्टर में पार्टी ने माइक्रो मैनेजमेंट के लिए विशेष टीम बनाई थी। इस टीम में भी छत्तीसगढ़ के नेताओं को शामिल किया गया और उन्हें समाज के अलग-अलग वर्गों तक पहुंच बनाने का काम सौंपा गया। इस टीम का नेतृत्व प्रदेश महामंत्री संजय श्रीवास्तव और सौरभ सिंह कर रहे थे। रणनीति के तहत व्यापारी, डॉक्टर, सीए, प्रोफेसर, कलाकार, मजदूर, रिक्शा चालक और मछली विक्रेताओं सहित विभिन्न वर्गों तक अलग-अलग तरीके से संपर्क किया गया। इसके साथ ही उन स्थानीय नेताओं को भी सक्रिय करने की कोशिश की गई, जो पहले चुनाव हार चुके थे, लेकिन जिनका जनाधार अभी भी मौजूद था। चुनावी प्रचार के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की रैलियों और सभाओं के समन्वय की जिम्मेदारी भी छत्तीसगढ़ के नेताओं को दी गई थी। इसमें डिप्टी सीएम विजय शर्मा, मंत्री केदार कश्यप, गजेन्द्र यादव और टंकराम वर्मा शामिल थे, जिन्होंने रैली प्रबंधन और स्थानीय समन्वय का काम संभाला। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, छत्तीसगढ़ के नेताओं को दी गई यह जिम्मेदारी संगठन में उनकी बढ़ती पकड़ और भरोसे को दर्शाती है। हालांकि, पार्टी की ओर से इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन जिस तरह से उन्हें बूथ से लेकर क्लस्टर और माइक्रो लेवल तक जिम्मेदारियां सौंपी गईं, उससे यह स्पष्ट होता है कि उन्हें चुनावी प्रबंधन के लिए सक्षम माना गया।

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बंगाल रुझानों पर CM साय की प्रतिक्रिया: “यह लोकतंत्र की जीत”, BJP के पक्ष में दिख रहे शुरुआती संकेत

छत्तीसगढ़ के Raipur से जुड़े दौरे के दौरान मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai ने पांच राज्यों के चुनावी रुझानों पर अपनी प्रतिक्रिया दी। सोमवार सुबह वे Balrampur स्थित भाजपा कार्यालय पहुंचे, जहां कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया। मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि शुरुआती रुझान Bharatiya Janata Party के पक्ष में नजर आ रहे हैं, जो जनता के विश्वास और सरकार के कामकाज का परिणाम है। पश्चिम बंगाल के रुझानों को लेकर उन्होंने खास तौर पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि यह लोकतंत्र की जीत है। उन्होंने संबंधित राज्यों के मतदाताओं को बधाई देते हुए कहा कि लोगों ने विकास, सुशासन और जनहित की नीतियों पर भरोसा जताया है। बताया गया कि मुख्यमंत्री साय रविवार को बलरामपुर प्रवास पर पहुंचे थे और रात्रि विश्राम के बाद सोमवार को पार्टी कार्यालय में कार्यकर्ताओं से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने संगठन से जुड़े मुद्दों और क्षेत्रीय विषयों पर भी चर्चा की। दौरे के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं में खासा उत्साह देखने को मिला। कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री अपने अगले तय कार्यक्रम के लिए रवाना हो गए।

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रायपुर में भीषण जल संकट: गिरता भूजल, कई वार्डों में सूखे नल, टैंकर के भरोसे शहर

छत्तीसगढ़ की राजधानी Raipur में इन दिनों गंभीर जल संकट की स्थिति बनी हुई है। लगातार गिरते भूजल स्तर और पाइपलाइन में लो-प्रेशर की समस्या के कारण शहर के कई इलाकों में नलों से पानी नहीं पहुंच रहा है, जिससे आम लोग काफी परेशान हैं। नगर निगम द्वारा जल आपूर्ति सुधारने के लिए अलग-अलग क्षेत्रों में काम किया जा रहा है। कुछ स्थानों पर पाइपलाइन के इंटर-कनेक्शन से राहत मिली है, लेकिन बढ़ती गर्मी और पानी की मांग ने हालात को और मुश्किल बना दिया है। कई वार्डों में अब पूरी तरह टैंकर के जरिए पानी पहुंचाया जा रहा है। स्थिति यह है कि मार्च से ही शहर के कई हिस्सों में टैंकर नियमित रूप से दौड़ रहे हैं। जहां पाइपलाइन के अंतिम छोर तक पानी नहीं पहुंच पा रहा, वहां भी टैंकर के जरिए सप्लाई की जा रही है। अब निजी सोसायटियों से भी पानी के लिए टैंकर की मांग बढ़ने लगी है, जो आने वाले दिनों में प्रशासन के लिए चुनौती बन सकती है। जोनवार हालात:जोन-1 के ठक्कर बापा वार्ड के गुलाब नगर, दीक्षानगर और विनायक विहार जैसे इलाके पूरी तरह टैंकर पर निर्भर हैं, जहां रोजाना कई ट्रिप में पानी पहुंचाया जा रहा है। जोन-3 में खम्हारडीह क्षेत्र की स्थिति बेहद खराब है। यहां करीब 30 हजार की आबादी में से अधिकांश लोग पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। कई जगह पाइपलाइन नहीं है और जहां है भी, वहां से पानी नहीं आ रहा। जोन-4 के रविशंकर शुक्ल और ब्राह्मण पारा वार्ड के कई हिस्सों में लो-प्रेशर के कारण जल आपूर्ति प्रभावित है। जोन-5 के चंगोराभाठा क्षेत्र के कई वार्डों में टेल एंड तक पानी नहीं पहुंच रहा, जिससे लोग परेशान हैं। जोन-6 में महामाया मंदिर वार्ड के कई मोहल्लों में आधे हिस्से तक ही पानी पहुंच पा रहा है। जोन-9 के मोवा, दलदल सिवनी, जोरा-लाभांडी, कचना और सड्‌डू जैसे इलाकों में भीषण जल संकट है। यहां भूजल स्तर काफी नीचे चला गया है और कई सोसायटियां टैंकर पर निर्भर हैं। कचना स्थित जीएडी कॉलोनी में हालात ऐसे हैं कि लोगों को टैंकर से पानी लाकर बाल्टी से ऊपर की मंजिलों तक पहुंचाना पड़ रहा है। बोरवेल की मोटर खराब होने से समस्या और बढ़ गई है, जबकि कई बार शिकायत के बावजूद समाधान नहीं हो पाया। नगर निगम का कहना है कि प्रभावित क्षेत्रों को पहले से चिन्हित किया गया है और लो-प्रेशर की समस्या दूर करने के लिए पाइपलाइन इंटर-कनेक्शन का काम जारी है। साथ ही टैंकरों के जरिए पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है।

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जनगणना के नाम पर ठगी का खतरा: फर्जी कर्मियों से रहें सावधान, जानिए कौन से सवाल सही और कौन से नहीं

देश में 1 अप्रैल 2026 से जनगणना का पहला चरण शुरू हो चुका है, जो 30 सितंबर 2026 तक चलेगा। इस दौरान घर-घर जाकर जानकारी जुटाई जा रही है, जिसमें हाउस लिस्टिंग और ऑनलाइन सेल्फ एन्यूमरेशन भी शामिल है। जनगणनाकर्मी लोगों से मकान, परिवार और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी जानकारी लेते हैं। हालांकि, इस प्रक्रिया के दौरान साइबर ठग और असामाजिक तत्व सक्रिय हो सकते हैं। रायपुर पुलिस ने चेतावनी दी है कि फर्जी जनगणनाकर्मी बनकर लोग आपकी निजी जानकारी हासिल करने की कोशिश कर सकते हैं। ये ठग कॉल, मैसेज या घर पहुंचकर खुद को सरकारी कर्मचारी बताते हैं और फर्जी लिंक या ऐप के जरिए डेटा चुराने की कोशिश करते हैं। कई मामलों में OTP, बैंक डिटेल्स, आधार नंबर जैसी संवेदनशील जानकारी मांगी जा सकती है, जो पूरी तरह से धोखाधड़ी का संकेत है। सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, जनगणनाकर्मी केवल सामान्य जानकारी ही पूछते हैं, जैसे: मकान से जुड़े सवाल:मकान नंबर, फर्श-दीवार-छत का मटेरियल, मकान का उपयोग, उसकी स्थिति आदि। परिवार से जुड़े सवाल:परिवार के सदस्यों की संख्या, मुखिया का नाम और जेंडर, सामाजिक वर्ग, घर किराए का है या खुद का, कुल कमरे और शादीशुदा जोड़ों की संख्या। सुविधाओं से जुड़े सवाल:पानी और बिजली का स्रोत, शौचालय और बाथरूम की उपलब्धता, रसोई और गैस कनेक्शन, खाना बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाला ईंधन। डिजिटल और सामान से जुड़े सवाल:घर में टीवी, मोबाइल, इंटरनेट, कंप्यूटर जैसी सुविधाएं हैं या नहीं। वाहन और अन्य जानकारी:साइकिल, बाइक, कार जैसी सुविधाएं और उपयोग किए जाने वाले अनाज की जानकारी, साथ ही मोबाइल नंबर। ध्यान रखें – ये सवाल कभी नहीं पूछे जाते:जनगणनाकर्मी आपकी बैंक डिटेल्स, OTP, पासवर्ड, एटीएम पिन, आधार से जुड़ी गोपनीय जानकारी या किसी भी प्रकार की वित्तीय जानकारी नहीं मांग सकते। पुलिस और प्रशासन की सलाह है कि किसी भी अजनबी पर तुरंत भरोसा न करें। यदि कोई व्यक्ति संदिग्ध लगे या जरूरत से ज्यादा निजी जानकारी मांगे, तो तुरंत सतर्क हो जाएं और इसकी सूचना स्थानीय पुलिस को दें। जनगणना में सही जानकारी देना हर नागरिक की जिम्मेदारी है, लेकिन अपनी निजी और वित्तीय सुरक्षा का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है।

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गैस के बाद पेट्रोल-डीजल भी होंगे महंगे? Deepak Baij का केंद्र पर निशाना

कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में भारी बढ़ोतरी के बाद छत्तीसगढ़ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष Deepak Baij ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उनका कहना है कि कांग्रेस ने पहले ही आशंका जताई थी कि पांच राज्यों के चुनाव खत्म होते ही महंगाई बढ़ेगी। बैज ने दावा किया कि फिलहाल सिर्फ गैस सिलेंडर के दाम बढ़े हैं, लेकिन आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी इजाफा हो सकता है, जिससे आम लोगों पर महंगाई का दबाव और बढ़ेगा। 1 मई से लागू नई दरों के अनुसार 19 किलो वाले कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत में 993 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। पहले इसकी कीमत 2175 रुपये थी, जो अब बढ़कर 3168 रुपये हो गई है। हर महीने की पहली तारीख को तेल कंपनियां कीमतों की समीक्षा करती हैं, जिसके आधार पर यह बदलाव किया गया है। यह लगातार चौथा महीना है जब कमर्शियल सिलेंडर महंगा हुआ है। हालांकि राहत की बात यह है कि घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में इस बार कोई बदलाव नहीं किया गया है। इस बढ़ोतरी का सीधा असर होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा संचालकों, चाय दुकानदारों और हलवाई जैसे छोटे व्यापारियों पर पड़ा है। उनका कहना है कि लागत बढ़ने से मुनाफा घटेगा और उन्हें खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ाने पड़ सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में वृद्धि का असर सिर्फ कारोबार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आम जनता के दैनिक खर्चों पर भी पड़ेगा। खाने-पीने की वस्तुओं के दाम बढ़ने की संभावना है, जिससे लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।

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