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NEET UG 2026 परीक्षा रद्द: पेपर लीक के आरोप के बाद NTA का बड़ा फैसला, छत्तीसगढ़ के 45 हजार छात्र फिर देंगे एग्जाम

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने 3 मई 2026 को आयोजित हुई NEET UG 2026 परीक्षा को रद्द कर दिया है। यह फैसला पेपर लीक के आरोप सामने आने के बाद लिया गया। अब देशभर के छात्रों को दोबारा परीक्षा देनी होगी। छत्तीसगढ़ में लगभग 45 हजार अभ्यर्थी इस परीक्षा में शामिल हुए थे। NTA ने बताया कि केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद परीक्षा रद्द करने का निर्णय लिया गया है। मामले की जांच अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपी जाएगी। नई परीक्षा तारीखों की घोषणा जल्द की जाएगी। छत्तीसगढ़ में इस बार NEET परीक्षा के लिए 19 केंद्र बनाए गए थे। इनमें रायपुर के करीब 9,200 छात्र शामिल थे। NTA ने स्पष्ट किया है कि छात्रों को दोबारा रजिस्ट्रेशन करने की जरूरत नहीं होगी। पुराने परीक्षा केंद्रों पर ही री-एग्जाम कराया जाएगा और नए एडमिट कार्ड जारी किए जाएंगे। परीक्षा फीस भी वापस की जाएगी। जांच में सामने आया है कि पेपर छपने से पहले ही कुछ सवाल कथित नकल गिरोह तक पहुंच गए थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बायोलॉजी के 90 और केमिस्ट्री के 35 सवाल पहले ही लीक हो चुके थे। इस मामले के तार राजस्थान के जयपुर से जुड़ रहे हैं। राजस्थान स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने जयपुर से मनीष नाम के एक व्यक्ति को हिरासत में लिया है, जिसे इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड माना जा रहा है। एजेंसियां उसके नेटवर्क और अन्य राज्यों में फैले कनेक्शन की जांच कर रही हैं। बताया जा रहा है कि लीक हुए सवालों को दूसरे प्रश्नों के साथ मिलाकर एक “क्वेश्चन बैंक” तैयार किया गया था, जिसे परीक्षा देने वाले छात्रों तक पहुंचाया गया। जांच में यह भी सामने आया कि बायोलॉजी के सभी 90 सवाल और केमिस्ट्री के 45 में से 35 सवाल हूबहू परीक्षा में आए। एजेंसियों ने कई छात्रों से पूछताछ की है। पूछताछ में पैसों के लेनदेन की बात भी सामने आई है। अब जांच एजेंसियां पूरे मनी ट्रेल की जांच कर रही हैं। NTA के अनुसार, 8 मई से ही मामले की जांच केंद्रीय एजेंसियों को सौंप दी गई थी। जांच रिपोर्ट के आधार पर परीक्षा दोबारा कराने का फैसला लिया गया है ताकि परीक्षा की पारदर्शिता बनी रहे। राजस्थान में परीक्षा के बाद कई छात्रों के पास हाथ से लिखे गए कथित “गेस पेपर” मिले थे, जिनके सवाल असली परीक्षा से मेल खा रहे थे। 10 मई को SOG ने देहरादून, सीकर और झुंझुनूं से 15 संदिग्धों को हिरासत में लिया था। जांच में यह भी सामने आया कि परीक्षा से दो दिन पहले ही करीब 600 नंबर के सवाल कुछ छात्रों तक पहुंच गए थे। विशेषज्ञों के मुताबिक, इतने बड़े स्तर पर सवालों का मैच होना सामान्य स्थिति नहीं माना जाता। यह पहला मौका नहीं है जब NTA विवादों में आया हो। इससे पहले 2024 में भी NEET UG परीक्षा पेपर लीक विवाद में घिरी थी। उस समय बिहार और झारखंड में जांच के बाद कई गिरफ्तारियां हुई थीं, हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने पूरी परीक्षा रद्द नहीं की थी।

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दुर्ग रेलवे स्टेशन पर बड़ा हादसा टला: चलती ट्रेन में चढ़ते समय फिसला यात्री, RPF जवान ने बचाई जान

दुर्ग रेलवे स्टेशन पर एक बड़ा रेल हादसा होते-होते टल गया। बरौनी-गोंदिया एक्सप्रेस में चढ़ने के दौरान एक यात्री का पैर फिसल गया और वह चलती ट्रेन तथा प्लेटफॉर्म के बीच फंस गया। घटना के बाद स्टेशन पर मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। जानकारी के अनुसार, रविवार रात बरौनी-गोंदिया एक्सप्रेस दुर्ग रेलवे स्टेशन से रवाना हो रही थी। इसी दौरान एक यात्री जल्दबाजी में चलती ट्रेन में चढ़ने की कोशिश कर रहा था। ट्रेन धीरे-धीरे गति पकड़ रही थी, तभी यात्री का संतुलन बिगड़ गया और वह प्लेटफॉर्म व ट्रेन के बीच बने गैप में फंस गया। बताया जा रहा है कि यात्री करीब 50 मीटर तक घसीटता चला गया। यह दृश्य देखकर प्लेटफॉर्म पर मौजूद लोगों की सांसें थम गईं और यात्रियों ने जोर-जोर से शोर मचाना शुरू कर दिया। इसी बीच ड्यूटी पर तैनात आरपीएफ के एएसआई Niranjan ने तुरंत स्थिति को समझा और बिना समय गंवाए दौड़कर यात्री को बाहर खींच लिया। उनकी सतर्कता और तेजी की वजह से बड़ा हादसा टल गया। घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें आरपीएफ जवान की तत्परता साफ दिखाई दे रही है। स्टेशन पर मौजूद लोगों ने जवान की बहादुरी और फुर्ती की सराहना की। रेलवे अधिकारियों ने यात्रियों से अपील की है कि चलती ट्रेन में चढ़ने या उतरने की कोशिश न करें, क्योंकि थोड़ी सी लापरवाही गंभीर हादसे का कारण बन सकती है।

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रायपुर में मानसून से पहले जलभराव: नाले का गंदा पानी घरों में घुसा, फाफाडीह अंडरब्रिज में फिसल रहीं गाड़ियां

रायपुर में मानसून शुरू होने से पहले ही जलभराव की समस्या ने नगर निगम की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। फाफाडीह इलाके के रमन मंदिर छहमुंहा नाले में कचरा जमा होने के कारण आसपास की बस्तियों में पानी भरने लगा है। स्थिति ऐसी हो गई कि गर्मी के मौसम में ही नाले का गंदा पानी लोगों के घरों और दुकानों तक पहुंच गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय से नालों की सफाई नहीं की गई है। थोड़ी बारिश और पानी के बहाव से ही चूनाभट्टी बस्ती, फाफाडीह अंडरब्रिज और पाठक नर्सिंग होम गली में जलभराव की स्थिति बन गई। कई घरों और दुकानों में पानी घुसने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। फाफाडीह अंडरब्रिज में तेज बहाव के कारण दोपहिया वाहन चालकों के फिसलने की घटनाएं भी सामने आईं। लोगों के मुताबिक कई वाहन चालक सड़क पर गिरकर घायल हो गए। वहीं पाठक नर्सिंग होम गली में जलभराव के चलते अस्पताल परिसर और आसपास के मकानों में भी पानी भर गया। मामले को लेकर कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने इलाके में धरना प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में Shrikumar Shankar Menon और Kuldeep Juneja भी शामिल रहे। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि स्थानीय पार्षद, महापौर और विधायक क्षेत्र की समस्याओं को लेकर गंभीर नहीं हैं। धरने के दौरान निगम अधिकारियों को मौके पर बुलाया गया। शिकायतों के बाद जोन कमिश्नर और स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंची, जिसके बाद पोकलेन मशीन की मदद से नाले की सफाई शुरू कराई गई। कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी कि अगर गर्मी में ही यह स्थिति है तो मानसून के दौरान हालात और खराब हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि यदि 24 घंटे के भीतर स्थायी जल निकासी व्यवस्था नहीं की गई, तो पहले जोन कार्यालय और बाद में नगर निगम मुख्यालय का घेराव किया जाएगा।

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बिलासपुर में आवारा कुत्ते का हमला: दो मासूम बच्चों की आंखों पर गंभीर चोट, सर्जरी से बचाई गई रोशनी

बिलासपुर जिले में आवारा कुत्ते के हमले में दो छोटे बच्चे गंभीर रूप से घायल हो गए। हमले में बच्चों के चेहरे, आंखों और पलकों पर गहरी चोटें आईं। दोनों का इलाज सिम्स अस्पताल में किया गया, जहां डॉक्टरों ने जटिल सर्जरी कर उनकी आंखों की रोशनी बचाई। डॉक्टरों ने इसे कैटेगरी-3 डॉग बाइट का मामला बताया है, जिसमें रेबीज संक्रमण का खतरा काफी अधिक रहता है। घटना बिल्हा विकासखंड के बटोरी गांव की है। बताया जा रहा है कि दो साल का एक लड़का और दो साल की एक बच्ची घर के बाहर खेल रहे थे, तभी एक आवारा कुत्ते ने अचानक उन पर हमला कर दिया। कुत्ते ने बच्चों के चेहरे और आंखों के आसपास बुरी तरह काट लिया। घटना के बाद परिजन तुरंत दोनों बच्चों को Chhattisgarh Institute of Medical Sciences लेकर पहुंचे। जांच में डॉक्टरों ने पाया कि बच्चों की पलकों और आंखों के आसपास गंभीर जख्म हैं। संक्रमण के खतरे को देखते हुए तत्काल घावों की सफाई की गई और बच्चों को एंटी-रेबीज वैक्सीन (ARV) तथा रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन (RIG) दिया गया। आंखों और पलकों को गंभीर नुकसान पहुंचने के कारण डॉक्टरों ने तुरंत ‘अर्जेंट लिड रिपेयर सर्जरी’ की। ऑपरेशन के दौरान क्षतिग्रस्त हिस्सों को सावधानीपूर्वक ठीक किया गया, ताकि आंखों की संरचना और रोशनी सुरक्षित रखी जा सके। फिलहाल दोनों बच्चों की हालत स्थिर बताई जा रही है और वे डॉक्टरों की निगरानी में हैं। इस जटिल इलाज में नेत्र रोग विशेषज्ञ Prabha Sonwani, Sanjay Choudhary, Aarti, Aniket के साथ निश्चेतना विभाग की Yasha Tiwari और Dropati समेत मेडिकल टीम शामिल रही। सिम्स के अधिष्ठाता Ramanesh Murti ने कहा कि कुत्ते के काटने जैसे मामलों में समय पर इलाज बेहद जरूरी होता है। थोड़ी भी लापरवाही मरीज की जान के लिए खतरा बन सकती है। वहीं मेडिकल सुपरिटेंडेंट Lakhan Singh ने लोगों से अपील की कि डॉग बाइट के मामलों में घरेलू इलाज या अंधविश्वास के बजाय तुरंत अस्पताल जाकर इलाज कराएं। विशेषज्ञों ने बताया कि रेबीज संक्रमित जानवर के काटने, खरोंच या लार के संपर्क से फैलने वाली बेहद खतरनाक बीमारी है। समय पर इलाज नहीं मिलने पर मरीज में पानी से डर लगना, सांस लेने में परेशानी, मानसिक भ्रम और लकवा जैसे गंभीर लक्षण दिखाई दे सकते हैं। इस घटना के बाद स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने नगर निगम और प्रशासन से आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या पर नियंत्रण, नसबंदी अभियान और रेबीज जागरूकता कार्यक्रम तेज करने की मांग की है। नगर निगम कमिश्नर Prakash Kumar Sarve ने बताया कि आवारा कुत्तों की नसबंदी के लिए घुरू-अमेरी क्षेत्र में सेंटर संचालित किया जा रहा है। पिछले साल इस अभियान पर करीब 80 लाख रुपए खर्च किए गए और 6100 कुत्तों की नसबंदी की गई। वहीं बीते दो महीनों में 680 आवारा कुत्तों की नसबंदी की जा चुकी है।

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सिक्किम की अनोखी पहल: बच्चे के जन्म पर 108 पेड़ लगाना अनिवार्य, सरकार देती है जमीन और पौधे

सिक्किम में पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए एक अनोखी पहल की जा रही है। यहां बच्चे के जन्म पर परिवारों को 108 पौधे लगाने होते हैं। खास बात यह है कि लोग इन पौधों की देखभाल अपने बच्चों की तरह कर रहे हैं। पौधों को पानी देना, खाद डालना और उनकी सुरक्षा करना परिवार की दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है। कई परिवार बच्चों का जन्मदिन भी इन पौधों के बीच मनाते हैं। यह पहल सिक्किम सरकार की ‘मेरो रुख, मेरो संतति’ योजना के तहत शुरू की गई है, जिसका अर्थ है “मेरा पेड़, मेरी संतान”। पर्यावरण संरक्षण के लिए इसे देश की अनोखी सरकारी योजनाओं में से एक माना जा रहा है। योजना के अनुसार, बच्चे के जन्म पर माता-पिता को 108 पौधे लगाने अनिवार्य हैं। जिन परिवारों के पास जमीन उपलब्ध है, वे अपने खेत या निजी भूमि पर पौधे लगाते हैं। वहीं जिनके पास जमीन नहीं है, उन्हें सरकार जमीन और पौधे उपलब्ध कराती है। इन पौधों में फलदार, औषधीय और अन्य उपयोगी प्रजातियां शामिल होती हैं। पौधों की देखभाल की जिम्मेदारी माता-पिता की होती है, जबकि सरकार निगरानी के लिए मॉनिटरिंग सिस्टम भी संचालित कर रही है। योजना के तहत पौधरोपण करने वाले परिवारों के बच्चों के नाम पर सरकार 18 वर्षों के लिए 10,800 रुपए की एफडी भी करती है। बच्चे बड़े होने पर इन पेड़ों की जिम्मेदारी उन्हें सौंप दी जाएगी। सिक्किम में भारी बारिश और प्राकृतिक आपदाओं के कारण कम होती हरियाली को देखते हुए फरवरी 2023 में यह योजना शुरू की गई थी। शुरुआत में 100 पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया था, जिसे बाद में बढ़ाकर 108 कर दिया गया, क्योंकि इसे शुभ अंक माना जाता है। अब तक इस योजना के तहत 9,653 परिवारों ने 10.42 लाख से ज्यादा पौधे लगाए हैं। इससे राज्य में हरियाली और वन क्षेत्र बढ़ाने में मदद मिल रही है। देश के अन्य राज्यों में भी पर्यावरण संरक्षण के लिए अलग-अलग योजनाएं चलाई जा रही हैं। छत्तीसगढ़ में ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत लाखों पौधे लगाए गए हैं, जबकि हिमाचल प्रदेश और गुजरात में भी जन्म और संस्कृति से जुड़े पौधरोपण कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। सिक्किम के मुख्यमंत्री Prem Singh Tamang ने कहा कि इस योजना से लोग पौधों को परिवार का हिस्सा मानकर उनकी देखभाल कर रहे हैं, जिससे राज्य में हरियाली लगातार बढ़ रही है। वहीं पूर्व प्रधान मुख्य वन संरक्षक Rakesh Chaturvedi का कहना है कि सरकारी योजनाओं में अक्सर बड़ी संख्या में पौधे सूख जाते हैं, लेकिन निजी देखभाल के कारण इस योजना में लगभग 90 प्रतिशत पौधे सुरक्षित और जीवित रह रहे हैं।

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रायपुर स्काईवॉक फिर विवादों में: 10 महीने बाद भी अधूरा निर्माण, लोगों को चढ़नी होंगी 100 सीढ़ियां

रायपुर का बहुचर्चित स्काईवॉक प्रोजेक्ट एक बार फिर चर्चा और विवाद का विषय बन गया है। 21 मई 2025 को दोबारा शुरू हुआ निर्माण कार्य 20 अप्रैल 2026 तक पूरा होना था, लेकिन तय समय बीतने के बावजूद प्रोजेक्ट अभी अधूरा है। मौके पर फिलहाल केवल सीढ़ियां लगाने का काम चल रहा है, जबकि लिफ्ट और एस्केलेटर अब तक शुरू नहीं हो पाए हैं। ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आया है कि स्काईवॉक का उपयोग करने वाले लोगों को लगभग 90 से 100 सीढ़ियां चढ़नी और उतरनी पड़ेंगी। रेरा ऑफिस की ओर से आने वाले लोगों को 50 से ज्यादा सीढ़ियां चढ़नी होंगी, जबकि मेकाहारा-सेंट्रल जेल रोड की ओर उतरने के लिए करीब 45 सीढ़ियां उतरनी पड़ेंगी। इसको लेकर आम लोगों में नाराजगी देखी जा रही है। कई लोगों का कहना है कि अधूरे और असुविधाजनक प्रोजेक्ट को हटाया जाना चाहिए। स्काईवॉक में कुल 12 एंट्री और एग्जिट पॉइंट बनाए जा रहे हैं। रेरा ऑफिस, कलेक्ट्रेट टाउन हॉल, घड़ी चौक, तहसील कार्यालय, जिला न्यायालय और सेंट्रल जेल के सामने सीढ़ियां लग चुकी हैं। वहीं डीकेएस अस्पताल, शहीद स्मारक मल्टीलेवल पार्किंग, पुराने जेल मुख्यालय और अंबेडकर अस्पताल के पास अभी काम बाकी है। करीब 8 साल से अधूरे पड़े इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए लोक निर्माण विभाग ने 37.75 करोड़ रुपए का टेंडर जारी किया था। PSA कंस्ट्रक्शन कंपनी को जिम्मेदारी दी गई, लेकिन 10 महीने बाद भी काम पूरा नहीं हो सका। शास्त्री चौक पर स्काईवॉक को मजबूती देने के लिए रोटरी बनाई जा रही है। इसके अलावा पिलरों पर गर्डर शिफ्ट करने और शेड लगाने का काम जारी है। अधिकारियों के मुताबिक, दिन में भारी ट्रैफिक होने की वजह से अधिकांश निर्माण कार्य रात में किया जा रहा है, जिससे देरी हो रही है। PWD के मुख्य अभियंता एस.के. कोरी ने बताया कि प्रोजेक्ट में 8 एस्केलेटर और 3 लिफ्ट लगाने की योजना है, लेकिन अब तक उनकी जगह तय नहीं हो सकी है। इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। कांग्रेस जिलाध्यक्ष श्री कुमार मेमन ने कहा कि स्काईवॉक “सफेद हाथी” बन चुका है और इसकी उपयोगिता बेहद कम है। उनका आरोप है कि यह प्रोजेक्ट पूर्व मंत्री राजेश मूणत की जिद का नतीजा है, जिस पर करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं। वहीं भाजपा प्रवक्ता अमित चिमनानी ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के कार्यकाल में गठित कमेटी के सर्वे में 67 फीसदी लोगों ने स्काईवॉक पूरा करने का समर्थन किया था। उन्होंने कहा कि इसे तोड़ना जनता के पैसे की बर्बादी होगी।

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रायपुर में डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन ठप, वेतन नहीं मिलने पर कर्मचारियों ने किया काम बंद

रायपुर में रविवार को डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित रही। कचरा उठाने वाली गाड़ियों के कर्मचारियों ने वेतन भुगतान नहीं होने के विरोध में काम बंद कर दिया, जिसके कारण शहर के कई इलाकों में घरों से कचरा नहीं उठ सका। कचरा कलेक्शन का जिम्मा संभाल रही रामकी ग्रुप के कर्मचारियों ने सुबह से ही गाड़ियां खड़ी कर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। दलदल सिवनी क्षेत्र में बड़ी संख्या में कचरा गाड़ियां खड़ी नजर आईं। कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें हर महीने 7 तारीख तक वेतन मिल जाता था, लेकिन इस बार अब तक भुगतान नहीं किया गया है। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि वेतन में देरी की समस्या लगातार बनी हुई है। उनका कहना है कि पहले भी कई बार भुगतान समय पर नहीं मिला, जिससे आर्थिक परेशानियां बढ़ती जा रही हैं। इसी वजह से मजबूर होकर काम बंद करना पड़ा। यह पहला मौका नहीं है जब सफाई व्यवस्था को लेकर रामकी ग्रुप और नगर निगम के बीच विवाद सामने आया हो। इससे पहले भी कर्मचारियों की हड़ताल के कारण शहर की सफाई व्यवस्था प्रभावित हुई थी। उस समय नगर निगम ने कंपनी पर करीब 18 लाख रुपए की कटौती और 5 लाख रुपए का जुर्माना लगाने के निर्देश दिए थे। पूर्व समीक्षा बैठक में महापौर मीनल चौबे ने कंपनी अधिकारियों को बुलाकर नाराजगी जताई थी। उन्होंने स्पष्ट कहा था कि शहर की सफाई व्यवस्था से किसी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा और भविष्य में इस तरह की स्थिति बनने पर अनुबंध की शर्तों के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। नगर निगम पहले ही यह साफ कर चुका है कि कंपनी को भुगतान कार्य की गुणवत्ता और संतोषजनक प्रदर्शन के आधार पर ही किया जाएगा। अधिकारियों को सफाई व्यवस्था प्रभावित होने की स्थिति में अनुबंध की समीक्षा के निर्देश भी दिए गए थे।

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प्रति एकड़ एक बोरी यूरिया-डीएपी देने के फैसले पर भड़का किसान संगठन, सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

खरीफ सीजन 2026-27 से पहले छत्तीसगढ़ में खाद वितरण को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। भारतीय किसान यूनियन ने राज्य सरकार की नई व्यवस्था का विरोध करते हुए आरोप लगाया है कि किसानों को पर्याप्त मात्रा में खाद नहीं मिल पाएगी और उन्हें निजी दुकानों पर निर्भर होना पड़ेगा। यूनियन के प्रदेश महासचिव तेजराम विद्रोही ने कहा कि सरकार ने सहकारी समितियों में खाद और नगद वितरण का अनुपात बदल दिया है। पहले किसानों को 40 प्रतिशत उर्वरक और 60 प्रतिशत नगद राशि दी जाती थी, जबकि अब इसे 30 प्रतिशत उर्वरक और 70 प्रतिशत नगद कर दिया गया है। उनका कहना है कि इस बदलाव से समितियों में खाद की उपलब्धता कम हो जाएगी। किसान संगठन का आरोप है कि खाद की कमी होने पर किसानों को निजी दुकानों से ज्यादा कीमत पर यूरिया और डीएपी खरीदनी पड़ेगी। साथ ही निजी विक्रेता किसानों पर अन्य उत्पाद खरीदने का दबाव भी बनाते हैं, जिससे आर्थिक बोझ बढ़ता है। तेजराम विद्रोही ने सरकार के प्रति एकड़ एक बोरी यूरिया और एक बोरी डीएपी देने के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि इससे फसल उत्पादन प्रभावित हो सकता है। उन्होंने दावा किया कि पिछले साल समय पर खाद नहीं मिलने की वजह से धान उत्पादन में लगभग 20 प्रतिशत तक गिरावट आई थी और इस बार स्थिति और गंभीर हो सकती है। किसान यूनियन ने सरकार की नीति को किसान विरोधी बताते हुए कहा कि सीमित खाद वितरण से उत्पादन घटेगा, जिससे समर्थन मूल्य पर धान खरीदी का दबाव भी कम हो जाएगा। संगठन ने सरकार से फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है।

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RTE एडमिशन पर हाईकोर्ट सख्त: 400 स्कूलों में एक भी आवेदन नहीं, सरकार से मांगा जवाब

Chhattisgarh High Court ने प्रदेश में शिक्षा के अधिकार (RTE) के तहत पहली कक्षा में एडमिशन की स्थिति को लेकर राज्य सरकार पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने उस रिपोर्ट पर हैरानी जताई, जिसमें बताया गया कि राज्य के करीब 400 स्कूलों में RTE के तहत एक भी आवेदन नहीं आया। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने शपथ पत्र पेश कर बताया कि 387 स्कूल ऐसे हैं जहां एडमिशन के लिए किसी भी अभिभावक ने आवेदन नहीं किया। वहीं 366 स्कूलों में सीटों के मुकाबले बेहद कम आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें कई बड़े और प्रतिष्ठित स्कूल भी शामिल बताए गए हैं। इस पर हाईकोर्ट ने सवाल उठाया कि क्या गरीब बच्चे बड़े स्कूलों में पढ़ना नहीं चाहते, या फिर कहीं सरकार वास्तविक स्थिति छिपाने की कोशिश तो नहीं कर रही। कोर्ट ने राज्य शासन को पूरी जानकारी शपथ पत्र के साथ पेश करने के निर्देश दिए हैं। मुख्य न्यायाधीश Ramesh Sinha की डिवीजन बेंच ने कहा कि RTE के तहत स्कूलों में 25 प्रतिशत सीटें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित हैं। ऐसे में यदि किसी स्कूल में सिर्फ एक-दो बच्चों के एडमिशन की जानकारी दी जा रही है, तो यह गंभीर सवाल खड़े करता है। कोर्ट ने शिक्षा विभाग से पूछा कि जब नया शैक्षणिक सत्र शुरू हो चुका है, तब गरीब बच्चों के दाखिले में देरी क्यों हो रही है। अदालत ने यह भी कहा कि प्रशासनिक लापरवाही के कारण हजारों बच्चों का भविष्य प्रभावित नहीं होना चाहिए। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि सभी स्कूलों में RTE के तहत आवंटित सीटों और हुए एडमिशन की जानकारी ऑनलाइन सार्वजनिक की जाए। साथ ही शिक्षा सचिव को 10 जुलाई तक विस्तृत शपथ पत्र के साथ जवाब दाखिल करने को कहा गया है।

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छत्तीसगढ़ में जमीन रिकॉर्ड पूरी तरह डिजिटल: रजिस्ट्री के साथ ही शुरू होगा नामांतरण, हर बदलाव पर मिलेगा SMS अलर्ट

Chhattisgarh में जमीन संबंधी व्यवस्थाओं को पूरी तरह डिजिटल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य गठन के बाद पहली बार जमीन के लगभग सभी रिकॉर्ड ऑनलाइन कर दिए गए हैं। 5 मई तक रायपुर समेत पूरे प्रदेश के गांवों के 5.87 करोड़ से अधिक खसरा रिकॉर्ड डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड किए जा चुके हैं। राज्य सरकार ने अब जमीन की रजिस्ट्री और नामांतरण प्रक्रिया को भी ऑनलाइन सिस्टम से जोड़ दिया है। नई व्यवस्था के तहत रजिस्ट्री होते ही नामांतरण की प्रक्रिया स्वतः शुरू हो जाएगी। इससे लोगों को तहसील और पटवारी कार्यालयों के बार-बार चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। सरकार ने रजिस्ट्री में दर्ज मोबाइल नंबर को जमीन रिकॉर्ड से लिंक किया है। ऐसे में रिकॉर्ड में किसी भी तरह की छेड़छाड़, बदलाव या संदिग्ध गतिविधि होने पर जमीन मालिक और संबंधित अधिकारियों को तुरंत एसएमएस अलर्ट मिलेगा। इससे फर्जीवाड़े और अवैध फेरबदल पर रोक लगाने में मदद मिलने की उम्मीद है। राजस्व विभाग के अनुसार प्रदेश के 20 हजार से ज्यादा गांवों का भूमि डेटा ऑनलाइन किया जा चुका है। 20,286 गांवों के खसरा रिकॉर्ड और 19,694 गांवों के नक्शों को स्कैन कर डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराया गया है। वहीं प्रधानमंत्री गति शक्ति योजना के तहत 18,959 गांवों के नक्शों की जियोरेफरेंसिंग भी पूरी कर ली गई है। नई तकनीक की मदद से जमीन का लोकेशन, सीमांकन और रिकॉर्ड ऑनलाइन देखा जा सकेगा। इसके अलावा राज्य के सभी 105 उप-पंजीयक कार्यालयों को तहसील कार्यालयों से ऑनलाइन जोड़ा गया है, जिससे जमीन से जुड़े मामलों का निपटारा तेज होगा। राज्य सरकार का दावा है कि अब लोग मोबाइल एप और ऑनलाइन पोर्टल के जरिए घर बैठे खसरा, बी-1 और अन्य दस्तावेज डाउनलोड कर सकेंगे। साथ ही जमीन पर बैंक लोन या गिरवी जैसी जानकारी भी पोर्टल पर उपलब्ध रहेगी, जिससे खरीदी-बिक्री में पारदर्शिता बढ़ेगी। राजस्व मंत्री Tank Ram Verma ने कहा कि डिजिटल इंडिया भू-अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम के तहत राजस्व व्यवस्था को पारदर्शी और पेपरलेस बनाया जा रहा है, ताकि लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें।

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