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महासमुंद में सड़क सुरक्षा को लेकर सख्त हुए कलेक्टर, हेलमेट और ओवरलोड वाहनों पर कार्रवाई के निर्देश

महासमुंद कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में सड़क सुरक्षा समिति की बैठक लेकर अधिकारियों को कई अहम निर्देश दिए। बैठक में सड़क दुर्घटनाओं को कम करने, यातायात व्यवस्था बेहतर बनाने और लोगों में जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया गया। कलेक्टर ने स्कूलों के माध्यम से विद्यार्थियों और पालकों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक करने की बात कही। उन्होंने यातायात विभाग को हेलमेट नहीं पहनने और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर प्रभावी ई-चालान कार्रवाई करने के निर्देश दिए। रात्रि के समय सड़कों पर घूमने वाले मवेशियों से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए एनएचआई, पशुपालन विभाग, यातायात विभाग और नगरीय निकायों को संयुक्त अभियान चलाने को कहा गया। साथ ही पशु मालिकों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए। बैठक में दुर्घटना संभावित ब्लैक स्पॉट चिन्हित कर वहां सुधार कार्य करने, ओवरलोड वाहनों पर सख्ती से कार्रवाई करने और यातायात व्यवस्था को और मजबूत बनाने पर भी चर्चा हुई।

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सुशासन तिहार में दिव्यांग महिला को मिली ट्राइसाइकिल, खोमीन कल्लो के जीवन में लौटी नई उम्मीद

मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के ग्राम पंचायत हांडीटोला की रहने वाली दिव्यांग महिला खोमीन कल्लो को सुशासन तिहार 2026 के दौरान ट्राइसाइकिल मिलने से बड़ी राहत मिली है। समाज कल्याण विभाग की ओर से मिली इस सहायता ने उनके जीवन में आत्मनिर्भरता की नई उम्मीद जगाई है। 30 वर्षीय खोमीन कल्लो बौनापन और 40 प्रतिशत दिव्यांगता से प्रभावित हैं। उन्हें रोजमर्रा के काम करने और एक जगह से दूसरी जगह आने-जाने में काफी परेशानी होती थी। छोटे-छोटे कामों के लिए भी उन्हें दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था। ग्राम पंचायत हांडीटोला में आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर के दौरान समाज कल्याण विभाग ने उन्हें ट्राइसाइकिल प्रदान की। ट्राइसाइकिल मिलने के बाद अब वे अपने जरूरी काम खुद कर पा रही हैं और आसपास आसानी से आ-जा सकती हैं। खोमीन कल्लो ने कहा कि अब उन्हें हर काम के लिए किसी का इंतजार नहीं करना पड़ता। इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा है और वे पहले से ज्यादा आत्मनिर्भर महसूस कर रही हैं। उन्होंने शासन, जिला प्रशासन और समाज कल्याण विभाग का आभार जताते हुए कहा कि यह मदद उनके लिए नई जिंदगी जैसी है।

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राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा का तहसील ऑफिस में औचक निरीक्षण, अधिकारियों को लगाई कड़ी फटकार

रायपुर तहसील कार्यालय में राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने अचानक पहुंचकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने आम लोगों की समस्याएं सुनीं और अधिकारियों की कार्यशैली पर नाराजगी जताई। एक महिला की शिकायत सुनने के बाद मंत्री अधिकारियों पर भड़क गए और कहा कि “जनता की सेवा के लिए बैठे हो, कुर्सियां तोड़ने के लिए नहीं।” महिला ने मंत्री को बताया कि वह पिछले एक महीने से अपनी रजिस्ट्री रिकॉर्ड में सुधार कराने के लिए तहसील कार्यालय के चक्कर लगा रही है, लेकिन अब तक उसकी समस्या का समाधान नहीं हुआ। महिला के अनुसार ऑनलाइन रिकॉर्ड में उसके मकान का नाम किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर दर्ज हो गया है। रिकॉर्ड सुधार के लिए वह लगातार पटवारी और अधिकारियों के पास जा रही है, लेकिन हर बार उसे टाल दिया जाता है। महिला ने यह भी बताया कि उसके ससुर की तबीयत खराब है और वे दफ्तर आने की स्थिति में नहीं हैं, इसके बावजूद उन्हें बार-बार बुलाया जा रहा है। शिकायत सुनने के बाद मंत्री टंकराम वर्मा ने मौके पर मौजूद अधिकारियों से जवाब मांगा और लापरवाही पर कड़ी नाराजगी जताई। मंत्री ने अधिकारियों को फटकार लगाते हुए कहा कि वे “सांप की तरह बैठे रहते हैं” और समय पर जनता की समस्याओं का निराकरण नहीं करते। मंत्री की सख्ती के बाद अधिकारियों ने तुरंत महिला की शिकायत पर कार्रवाई शुरू कर दी। इससे पहले भी मंत्री टंकराम वर्मा राजस्व विभाग की लापरवाही पर सख्त रुख अपना चुके हैं। कुछ दिन पहले तिल्दा-नेवरा में आयोजित सुशासन तिहार के समाधान शिविर में उन्होंने मंच से ही बिलाड़ी के पटवारी को निलंबित करने के निर्देश दिए थे। ग्रामीणों ने शिकायत की थी कि एक छोटे किसान को जमीन रिकॉर्ड सुधार के लिए कई दिनों तक परेशान किया गया और उसकी जमीन रिकॉर्ड में ‘निरंक’ दिखा दी गई थी। तिल्दा-नेवरा में आयोजित शिविर के दौरान मंत्री ने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा था कि जनता की समस्याओं में लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अतिक्रमण, अपराध और लंबित मामलों पर समयसीमा में कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए थे। राजस्व मंत्री ने सरकारी जमीनों पर बढ़ते अतिक्रमण को लेकर भी सख्त रुख अपनाया था। उन्होंने तहसीलदार को एक सप्ताह के भीतर अतिक्रमण चिन्हित कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे और समयसीमा में कार्रवाई नहीं होने पर निलंबन की चेतावनी दी थी। वहीं, बढ़ते अपराधों को लेकर मंत्री ने पुलिस विभाग को भी फटकार लगाई थी। उन्होंने नेवरा थाना क्षेत्र में लगातार बढ़ रही चोरी और अन्य वारदातों पर नाराजगी जताते हुए कानून व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए थे। इससे पहले आरंग क्षेत्र में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान रायपुर सांसद Brijmohan Agrawal ने भी नायब तहसीलदार को सार्वजनिक रूप से फटकार लगाई थी। उन्होंने अधिकारियों पर लोगों से पैसे मांगने और शिकायतों को गंभीरता से नहीं लेने के आरोपों पर नाराजगी जताई थी।

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छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में बड़ा फैसला, रिटायर्ड IAS निरंजन दास को सुप्रीम कोर्ट से जमानत

छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले मामले में सुप्रीम कोर्ट ने रिटायर्ड IAS अधिकारी निरंजन दास को जमानत दे दी है। निरंजन दास पूर्व आबकारी आयुक्त रह चुके हैं और जांच एजेंसियों के मुताबिक वे कथित सिंडिकेट के अहम सदस्य माने जा रहे थे। उन पर आबकारी नीति तैयार करने और शराब कारोबार से जुड़े फैसलों में प्रभावशाली भूमिका निभाने का आरोप है। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान बताया गया कि निरंजन दास ने आबकारी नीति तैयार करने में अहम भूमिका निभाई थी, जिससे कुछ लोगों को कथित रूप से फायदा पहुंचाया गया। जांच एजेंसियों के अनुसार किस जिले में कौन अधिकारी तैनात होगा, किस ब्रांड की शराब बिकेगी और सप्लाई व्यवस्था कैसी होगी, इन फैसलों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका थी। जांच में यह भी दावा किया गया कि उन्हें 30 करोड़ रुपए से ज्यादा का कमीशन मिला। यह मामला सोमवार को चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ में सुना गया। कोर्ट ने कहा कि इस मामले के कई सह-आरोपी पहले ही जमानत पर बाहर हैं और ट्रायल पूरा होने में लंबा समय लग सकता है। इसी आधार पर निरंजन दास को भी जमानत दी गई। हालांकि कोर्ट ने शर्त रखी है कि निरंजन दास को छत्तीसगढ़ राज्य से बाहर रहना होगा। वे केवल जांच और अदालत में पेशी के लिए ही राज्य में प्रवेश कर सकेंगे। वहीं, कारोबारी अनवर ढेबर ने भी छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CSMCL) से जुड़े भ्रष्टाचार और अवैध कमीशन मामले में सुप्रीम कोर्ट में जमानत याचिका दाखिल की है। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका स्वीकार करते हुए राज्य सरकार से 3 जून तक जवाब मांगा है। इससे पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट 13 मई को उनकी जमानत याचिका खारिज कर चुका था। जांच एजेंसियों के मुताबिक, कथित शराब घोटाले को तत्कालीन आबकारी सिस्टम और कारोबारी नेटवर्क के जरिए संचालित किया गया। ED और EOW की जांच में दावा किया गया है कि डिस्टलरी संचालकों से प्रति पेटी शराब पर कमीशन लिया जाता था और नकली होलोग्राम के जरिए अवैध शराब सरकारी दुकानों तक पहुंचाई जाती थी। जांच में यह भी सामने आया कि प्रदेश के 15 जिलों को शराब खपाने के लिए चिन्हित किया गया था। आरोप है कि नकली होलोग्राम लगी शराब बिना शुल्क के सरकारी दुकानों तक पहुंचाई जाती थी और इस पूरे नेटवर्क में कई अधिकारियों और कारोबारियों की भूमिका रही। बताया जा रहा है कि अब तक शराब, कोयला, DMF और अन्य आर्थिक घोटालों से जुड़े मामलों में कई बड़े अधिकारियों और कारोबारियों को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल चुकी है। इनमें रिटायर्ड IAS अनिल टुटेजा, निलंबित IAS रानू साहू, समीर विश्नोई, पूर्व मंत्री कवासी लखमा और अन्य नाम शामिल हैं। इन सभी को राज्य से बाहर रहने जैसी शर्तों के साथ राहत दी गई है।

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रायपुर में सड़क चौड़ीकरण अभियान तेज, गोगांव मार्ग से हटाए गए 17 अवैध निर्माण

रायपुर नगर निगम ने शहर में सड़क चौड़ीकरण और नाली निर्माण कार्य को लेकर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई तेज कर दी है। इसी क्रम में गोगांव अंडरब्रिज से गोगांव पानी टंकी तक प्रस्तावित सड़क चौड़ीकरण कार्य में बाधा बन रहे अवैध निर्माणों को हटाया गया। निगम की टीम ने अभियान चलाकर करीब 17 छोटी और बड़ी दुकानों समेत कई अस्थायी कब्जों को हटाया। नगर निगम के अनुसार इस मार्ग पर 15वें वित्त आयोग मद से सड़क चौड़ीकरण और नाली निर्माण कार्य स्वीकृत किया गया है। लेकिन सड़क किनारे बनी दीवारें, पाटा, सीढ़ियां, ठेले और गुमटियां निर्माण कार्य में रुकावट पैदा कर रही थीं। इसके बाद निगम प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की। कार्रवाई के दौरान नगर निगम जोन-1 की टीम और अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। इस अभियान में कार्यपालन अभियंता द्रोणी कुमार पैकरा, सहायक अभियंता शरद देशमुख और शैलेंद्र पटेल, उप अभियंता अर्जिता दीवान, अंकिता सोनवर्षा और इम्तियाज अहमद सहित अन्य कर्मचारी शामिल रहे। इससे पहले नगर निगम ने गोंदवारा क्षेत्र में होटल पैराडाइज से गोंदवारा अंडरब्रिज तक भी अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की थी। उस दौरान करीब 20 अवैध कब्जे हटाए गए थे और 15 अवैध पाटों को तोड़ा गया था। निगम अधिकारियों का कहना है कि सड़क किनारे किए गए अवैध कब्जों को हटाने से यातायात व्यवस्था बेहतर होगी और लोगों को आने-जाने में राहत मिलेगी। साथ ही नालियों पर बने अवैध पाटों को हटाने से सफाई कार्य में भी आसानी होगी, जिससे जलभराव और गंदगी जैसी समस्याओं पर नियंत्रण पाया जा सकेगा। नगर निगम आयुक्त संबित मिश्रा के निर्देश पर चलाए जा रहे इस अभियान के तहत शहर में आगे भी अवैध कब्जों और यातायात बाधाओं के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी।

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दंतेवाड़ा में सरकारी नौकरी का मौका, स्टाफ नर्स समेत 23 पदों पर भर्ती शुरू

दंतेवाड़ा जिले में स्वास्थ्य विभाग के तहत विभिन्न पदों पर भर्ती निकाली गई है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) दंतेवाड़ा ने स्टाफ नर्स, चिकित्सा अधिकारी, फिजियोथेरेपिस्ट, फार्मासिस्ट और अन्य पदों सहित कुल 23 रिक्तियों के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। भर्ती प्रक्रिया के तहत चिकित्सा अधिकारी (RBSK) के 6 पद, दंत शल्य चिकित्सक का 1 पद, फिजियोथेरेपिस्ट के 4 पद, फार्मासिस्ट का 1 पद, स्टाफ नर्स (SNCU) के 5 पद, तकनीकी सहायक का 1 पद, सचिव सहायक का 1 पद और सुरक्षा गार्ड के 4 पद शामिल हैं। ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 21 अप्रैल से शुरू हो चुकी है। इच्छुक उम्मीदवार 4 जून 2026 तक आवेदन कर सकते हैं। आवेदन CMHO दंतेवाड़ा की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से किए जाएंगे। इन पदों के लिए अलग-अलग शैक्षणिक योग्यता निर्धारित की गई है। अभ्यर्थियों के पास संबंधित विषय में डिग्री, डिप्लोमा या पंजीकरण प्रमाणपत्र होना आवश्यक है। कुछ पदों के लिए बीएससी नर्सिंग, जीएनएम, बीपीटी, बीडीएस, फार्मेसी डिग्री या कंप्यूटर डिप्लोमा मांगा गया है। उम्मीदवारों की न्यूनतम आयु 18 से 21 वर्ष और अधिकतम आयु 40 से 70 वर्ष तक निर्धारित की गई है। आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को नियमानुसार आयु सीमा में छूट मिलेगी। चयन प्रक्रिया में स्क्रीनिंग, इंटरव्यू, स्किल टेस्ट और दस्तावेज सत्यापन शामिल रहेगा। चयनित अभ्यर्थियों को पद के अनुसार 10 हजार से 27 हजार रुपए प्रतिमाह वेतन दिया जाएगा। आवेदन शुल्क सामान्य वर्ग के लिए 300 रुपए, ओबीसी वर्ग के लिए 200 रुपए और एससी, एसटी, दिव्यांग तथा महिला उम्मीदवारों के लिए 100 रुपए तय किया गया है। अधिक जानकारी और आवेदन के लिए उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर भर्ती से जुड़ी अधिसूचना देख सकते हैं।

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मरीन ड्राइव की गंदगी पर प्रशासन सख्त, 15 दिन में जलकुंभी हटाने के निर्देश

रायपुर के तेलीबांधा मरीन ड्राइव में बढ़ती गंदगी और अव्यवस्था को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। उत्तर विधानसभा क्षेत्र के विधायक पुरंदर मिश्रा ने मरीन ड्राइव पहुंचकर क्षेत्र का निरीक्षण किया और तालाब किनारे फैली गंदगी पर नाराजगी जताई। निरीक्षण के दौरान विधायक ने निगम अधिकारियों को निर्देश दिए कि देवार डेरा क्षेत्र का तकनीकी सर्वे जल्द कराया जाए और वहां रह रहे लोगों के पुनर्वास की व्यवस्था करते हुए नियमानुसार कार्रवाई की जाए। उन्होंने क्षेत्र को व्यवस्थित और साफ-सुथरा बनाए रखने पर जोर दिया। वहीं नगर निगम आयुक्त संबित मिश्रा ने तेलीबांधा तालाब की सफाई व्यवस्था की समीक्षा की। उन्होंने सफाई कार्य में लापरवाही पर ठेकेदार को फटकार लगाते हुए अगले 15 दिनों के भीतर तालाब से जलकुंभी हटाने के निर्देश दिए। आयुक्त ने कहा कि तालाब की नियमित सफाई और निगरानी सुनिश्चित की जाए ताकि मरीन ड्राइव क्षेत्र में स्वच्छता बनी रहे और लोगों को बेहतर वातावरण मिल सके। नगर निगम ने मरीन ड्राइव क्षेत्र के दुकानदारों को भी सख्त निर्देश जारी किए हैं। सभी दुकानों में डस्टबिन रखना अनिवार्य किया गया है और गीले व सूखे कचरे को अलग-अलग रखने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि यदि कोई दुकानदार तालाब में कचरा फेंकता हुआ पाया गया या नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ जुर्माने सहित कार्रवाई की जाएगी। निरीक्षण के दौरान नगर निवेशक आभाष मिश्रा, जोन-3 कमिश्नर प्रीति सिंह, कार्यपालन अभियंता आशुतोष सिंह समेत नगर निगम के कई अधिकारी मौजूद रहे।

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रेलवे स्टेशन के पास अवैध स्टॉल पर रेलवे की कार्रवाई, यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए किया सील

रायपुर रेलवे मंडल ने मुख्य रेलवे स्टेशन के प्रवेश द्वार और एक्सप्रेस-वे के पास रेलवे सीमा से लगे क्षेत्र में संचालित एक अवैध स्टॉल पर कार्रवाई करते हुए उसे सील कर दिया। रेलवे प्रशासन के अनुसार, इस स्टॉल की वजह से यात्रियों की आवाजाही प्रभावित हो रही थी और सुरक्षा संबंधी समस्याएं भी सामने आ रही थीं। बिना अनुमति संचालित हो रहा था स्टॉल वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक अवधेश कुमार त्रिवेदी के निर्देश पर वाणिज्य विभाग की टीम ने मौके का निरीक्षण किया। जांच के दौरान पाया गया कि स्टॉल पूरी तरह अवैध रूप से संचालित किया जा रहा था। इसके लिए न तो रेलवे प्रशासन से अनुमति ली गई थी और न ही रायपुर नगर निगम से कोई स्वीकृति प्राप्त की गई थी। रेलवे अधिकारियों ने बताया कि स्टॉल राज्य सरकार की भूमि पर रेलवे क्षेत्र से सटाकर लगाया गया था, जिससे स्टेशन परिसर की व्यवस्था और यातायात प्रभावित हो रहा था। शाम और रात में बढ़ रही थीं समस्याएं रेलवे प्रशासन के मुताबिक, शाम और रात के समय यह स्थान असामाजिक गतिविधियों का केंद्र बनता जा रहा था। यात्रियों को आने-जाने में परेशानी हो रही थी। साथ ही आसपास फैली गंदगी, कचरा और बचा हुआ भोजन स्वच्छता व्यवस्था को भी प्रभावित कर रहा था। देर रात संदिग्ध गतिविधियों और सुरक्षा शिकायतों के बाद रेलवे ने तत्काल कार्रवाई करते हुए स्टॉल को सील कर दिया। नगर निगम से मांगी सख्त कार्रवाई रेलवे प्रशासन ने रायपुर नगर निगम और राज्य सरकार को पत्र भेजकर मामले में आवश्यक कानूनी कार्रवाई करने का अनुरोध किया है। इसके साथ ही फाफाडीह प्रवेश द्वार से स्टेशन तक के पूरे क्षेत्र में अवैध स्टॉल हटाने, दोबारा अतिक्रमण रोकने और नियमित निगरानी सुनिश्चित करने की मांग की गई है। रेलवे ने संयुक्त निरीक्षण, स्वच्छता व्यवस्था और यात्रियों की सुरक्षा बनाए रखने के लिए नगर निगम से सहयोग भी मांगा है।

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बिजली कटौती पर कांग्रेस का हमला तेज, BJP नेताओं के घर घेराव की चेतावनी

रायपुर में लगातार हो रही बिजली कटौती को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। कांग्रेस ने बिजली व्यवस्था को लेकर सीधा विरोध जताते हुए CSPDCL कार्यालय पहुंचकर अधिकारियों से बैठक की और जल्द सुधार नहीं होने पर बड़े आंदोलन की चेतावनी दी। शहर कांग्रेस अध्यक्ष Shreekumar Shankar Menon के नेतृत्व में कांग्रेस के ब्लॉक अध्यक्षों और वरिष्ठ नेताओं ने CSPDCL अधिकारी संजीव सिंह तथा शहर के सभी जोन के कार्यपालन अभियंताओं से मुलाकात की। बैठक में शहर के विभिन्न इलाकों में बार-बार हो रही बिजली कटौती, लो-वोल्टेज और अव्यवस्थित आपूर्ति का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि भीषण गर्मी के बीच लगातार बिजली गुल होने से आम जनता परेशान है। यदि जल्द सुधार नहीं हुआ तो कांग्रेस भाजपा के सांसदों, विधायकों और पदाधिकारियों के घर जाकर धरना देगी। इससे पहले भी बिजली कटौती के मुद्दे पर कांग्रेस ने डगनिया स्थित बिजली कार्यालय के बाहर धरना प्रदर्शन किया था। उस दौरान पूर्व विधायक Vikas Upadhyay के नेतृत्व में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग शामिल हुए थे। प्रदर्शन के दौरान लोगों ने बिजली विभाग के खिलाफ नारेबाजी करते हुए नियमित आपूर्ति की मांग की थी। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि बिजली संकट से लोगों का जनजीवन प्रभावित हो रहा है और सरकार इस समस्या को गंभीरता से नहीं ले रही है। पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि हालात नहीं सुधरे तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। बैठक में पूर्व मंत्री Satyanarayan Sharma, पूर्व महापौर Pramod Dubey, पूर्व विधायक Kuldeep Juneja और शिव सिंह ठाकुर सहित कई कांग्रेस नेता मौजूद रहे।

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पुलिस लाइन में 541 जवानों की जनरल परेड, एसपी ने लिया अनुशासन और फिटनेस का निरीक्षण

पुलिस लाइन में आयोजित जनरल परेड में जिले के विभिन्न थाना, शाखा और इकाइयों से कुल 541 अधिकारी और जवान शामिल हुए। परेड के दौरान पुलिस अधीक्षक ने जवानों की वर्दी, अनुशासन, शारीरिक दक्षता, टर्न आउट और परेड संचालन का बारीकी से निरीक्षण किया। उन्होंने सभी अधिकारियों और जवानों को अनुशासन, समय पालन, फिटनेस और कर्तव्यनिष्ठा बनाए रखने के निर्देश दिए। इस दौरान उन्होंने कानून व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने तथा आम जनता के साथ संवेदनशील और सौहार्दपूर्ण व्यवहार अपनाने पर जोर दिया। पुलिस अधीक्षक ने ड्यूटी के दौरान सतर्क रहने, नियमित शारीरिक प्रशिक्षण करने और बेहतर समन्वय व टीम भावना के साथ कार्य करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि पुलिस बल की कार्यक्षमता और शारीरिक फिटनेस बनाए रखने के लिए नियमित परेड और प्रशिक्षण बेहद जरूरी है। इस अवसर पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक Akshay Sabadra, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक Sushil Nayak, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक Aishwarya Chandraakar सहित जिले के सभी उप पुलिस अधीक्षक, थाना प्रभारी, रक्षित निरीक्षक और अन्य पुलिस अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे।

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