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बिलासपुर में पेट्रोल-डीजल संकट, 13 पंप ड्राई; कई जगह 40-50 लीटर की लिमिट तय

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में पेट्रोल-डीजल की किल्लत ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। शहर और आउटर इलाकों में करीब 13 पेट्रोल पंप पूरी तरह ड्राई हो चुके हैं, जबकि कई जगह ईंधन की भारी कमी देखने को मिल रही है। सबसे ज्यादा असर एचपीसीएल के पंपों पर पड़ा है, वहीं बीपीसीएल के कई पंपों में भी पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति प्रभावित हुई है। आईओसीएल के कुछ पंपों को अपेक्षाकृत जल्दी सप्लाई मिल रही है, लेकिन स्थिति अभी भी सामान्य नहीं है। बिलासपुर-कोरबा रूट के उसलापुर, कोनी, सेंदरी, सकरी और घुटकू जैसे इलाकों में कई पंपों से लोग बिना ईंधन लिए लौटने को मजबूर हैं। कई जगह “नो स्टॉक” के बोर्ड लगा दिए गए हैं। बुधवार को टैंकर नहीं पहुंचने के कारण हालात और बिगड़ गए। जिन पंपों में थोड़ा बहुत स्टॉक बचा है, वहां भी अब सीमित मात्रा में ही पेट्रोल-डीजल दिया जा रहा है। कई जगह बाइक चालकों को केवल 200 रुपए तक और कार चालकों को 1000 रुपए तक ही ईंधन दिया जा रहा है। वहीं कुछ पंपों पर 40 से 50 लीटर की सीमा तय कर दी गई है। स्थिति को देखते हुए लोगों में घबराहट भी देखने को मिल रही है और कई वाहन चालक पहले ही अपनी टंकियां फुल करवा रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में भी पंप संचालकों ने बिक्री पर रोक लगाकर सीमित मात्रा में ही ईंधन देना शुरू कर दिया है। हालांकि प्रशासन का कहना है कि जिले में अभी करीब पांच दिन का स्टॉक मौजूद है और जल्द ही स्थिति सामान्य हो सकती है। फूड कंट्रोलर के अनुसार, 9 पंपों का भुगतान हो चुका है और वहां सप्लाई जल्द बहाल होगी। वहीं कलेक्टर ने तेल कंपनियों और पेट्रोल पंप एसोसिएशन की बैठक बुलाई है ताकि सप्लाई व्यवस्था को ठीक किया जा सके। प्रशासन और पेट्रोल पंप संचालकों का दावा है कि एक-दो दिन में स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है, लेकिन फिलहाल लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

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31 मई को होगी GD कॉन्स्टेबल भर्ती परीक्षा, रायपुर के बंगोली में बना परीक्षा केंद्र

कर्मचारी चयन आयोग (SSC) की ओर से GD कॉन्स्टेबल भर्ती परीक्षा 31 मई 2026 को आयोजित की जाएगी। यह परीक्षा Central Armed Police Forces (CAPFs), SSF और Assam Rifles में Rifleman (GD) के पदों के लिए कंप्यूटर आधारित मोड में ली जाएगी। इस परीक्षा को लेकर रायपुर जिले में भी तैयारियां तेज कर दी गई हैं। जिले में परीक्षा का आयोजन प्रोफेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, स्टेट हाईवे-7, विधानसभा रोड स्थित मुरा बंगोली परीक्षा केंद्र में किया जाएगा। प्रशासन की ओर से परीक्षा को सुचारू और शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं शुरू कर दी गई हैं। परीक्षा केंद्र पर सुरक्षा, बैठने की व्यवस्था और अन्य जरूरी सुविधाओं को लेकर संबंधित विभागों को निर्देश जारी किए गए हैं। इसके साथ ही परीक्षा के संचालन और निगरानी के लिए अतिरिक्त तहसीलदार खरोरा सूर्यकांत कुम्भकार को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। उनकी जिम्मेदारी परीक्षा के दौरान सभी व्यवस्थाओं पर नजर रखना और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को रोकना होगी। प्रशासन ने अभ्यर्थियों से अपील की है कि वे समय से पहले परीक्षा केंद्र पहुंचें और अपने साथ सभी आवश्यक दस्तावेज अवश्य लेकर आएं। देर से पहुंचने वाले उम्मीदवारों को परीक्षा में शामिल होने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। यह परीक्षा देशभर में बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के लिए आयोजित की जा रही है, जिसमें सुरक्षा बलों में भर्ती का महत्वपूर्ण अवसर मिलेगा। रायपुर में भी इस परीक्षा को लेकर उम्मीदवारों में उत्साह देखा जा रहा है। फिलहाल प्रशासन पूरी तैयारी के साथ परीक्षा के सफल आयोजन में जुटा हुआ है।

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बिरगांव नगर निगम की सफाई व्यवस्था पर सवाल, खराब सफाई मशीन का वीडियो वायरल

छत्तीसगढ़ के रायपुर स्थित बिरगांव नगर निगम की सफाई व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें नगर निगम की सफाई गाड़ी की खराब और लापरवाह स्थिति सामने आती दिख रही है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि सफाई मशीन का पानी टैंकर सही तरीके से काम नहीं कर रहा है। इसके अलावा मशीन का ब्रश सिस्टम भी बंद स्थिति में नजर आ रहा है। वहीं पीछे लगा वाइपर सिस्टम बिना पानी के सड़क पर सफाई करने के बजाय धूल को और अधिक फैला रहा है, जिससे सड़क की स्थिति और खराब होती दिखाई दे रही है। इस वीडियो के सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी देखने को मिल रही है। लोगों का कहना है कि यह सफाई मशीन केवल नाम की सफाई कर रही है, जबकि वास्तविकता में यह व्यवस्था की गंभीर लापरवाही को उजागर करती है। नागरिकों ने आरोप लगाया है कि नगर निगम की ओर से सफाई व्यवस्था पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है, जिससे शहर की स्वच्छता प्रभावित हो रही है। वहीं इस पूरे मामले पर अब तक बिरगांव नगर निगम की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या बयान सामने नहीं आया है। इससे लोगों की नाराजगी और भी बढ़ती जा रही है। फिलहाल यह वीडियो चर्चा का विषय बना हुआ है और प्रशासन पर सवाल उठ रहे हैं कि क्या शहर की सफाई व्यवस्था वास्तव में ठीक से काम कर रही है या फिर यह सिर्फ कागजों तक सीमित रह गई है। हम इस खबर पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और जैसे ही कोई आधिकारिक अपडेट आता है, उसे सबसे पहले आपके सामने रखा जाएगा।

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दुर्ग में LLB फर्स्ट सेमेस्टर रिजल्ट पर बवाल: हिंदी में उत्तर लिखने पर फेल करने का आरोप, यूनिवर्सिटी घेरकर छात्रों का विरोध

दुर्ग स्थित हेमचंद यादव विश्वविद्यालय में LLB फर्स्ट सेमेस्टर के खराब परिणाम को लेकर छात्रों का आक्रोश फूट पड़ा। मंगलवार को बड़ी संख्या में छात्रों ने विश्वविद्यालय परिसर का घेराव कर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। छात्रों का आरोप है कि लीगल लैंग्वेज विषय में अचानक नियम बदल दिए गए और हिंदी में उत्तर लिखने वाले विद्यार्थियों को फेल कर दिया गया, जिससे सैकड़ों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है। जारी परिणाम के अनुसार 417 छात्रों में से केवल 101 छात्र ही सफल हो पाए हैं। 230 छात्रों को पूरक परीक्षा में रखा गया है, जबकि 77 छात्र पूरी तरह अनुत्तीर्ण घोषित किए गए हैं। छात्रों का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में फेल होने का मुख्य कारण केवल एक विषय है। छात्रों ने दावा किया कि पहले इसी विषय में हिंदी में उत्तर लिखने पर भी अंक दिए जाते थे, लेकिन इस बार केवल अंग्रेजी में लिखे उत्तरों का ही मूल्यांकन किया गया, जिसकी कोई पूर्व सूचना नहीं दी गई। वहीं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजय तिवारी ने कहा कि बार काउंसिल के नियमों के अनुसार लीगल लैंग्वेज विषय में उत्तर अंग्रेजी में देना अनिवार्य था और उसी आधार पर मूल्यांकन किया गया है। छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि यदि परीक्षा प्रक्रिया में कोई बदलाव किया गया था तो इसकी जानकारी पहले दी जानी चाहिए थी, ताकि विद्यार्थी उसी अनुसार तैयारी कर सकें। छात्रों ने मांग की है कि उत्तर पुस्तिकाओं की दोबारा जांच कराई जाए और जिन विद्यार्थियों को कम अंक मिले हैं उन्हें न्याय दिया जाए। साथ ही पुनर्मूल्यांकन की सुविधा फिर से शुरू करने की भी मांग की गई है। इसी तरह धनरसायन सिंह गुरुल महाविद्यालय में भी परिणाम को लेकर नाराजगी देखी गई, जहां 56 में से 50 छात्रों को एक विषय में पूरक की स्थिति में रखा गया है। छात्रों का कहना है कि चारों संबद्ध कॉलेजों में यही स्थिति बनी है, जिससे बड़ी संख्या में विद्यार्थी प्रभावित हुए हैं। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। विश्वविद्यालय प्रशासन ने यह परिणाम देर से जारी किया है, जबकि छात्रों का कहना है कि परीक्षा के बाद तय समय सीमा के भीतर परिणाम घोषित नहीं किया गया, जिससे मानसिक दबाव और बढ़ गया है। अब सेकंड सेमेस्टर की परीक्षा नजदीक होने से छात्रों की चिंता और बढ़ गई है।

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ग्रामीण सेवा नहीं करने वाले 43 डॉक्टरों से 17 करोड़ की वसूली करेगी सरकार

राज्य के ग्रामीण इलाकों में नियुक्ति मिलने के बावजूद ज्वाइन नहीं करने वाले 43 डॉक्टरों पर अब स्वास्थ्य विभाग सख्त कार्रवाई करने जा रहा है। इनमें 15 एमबीबीएस डॉक्टर और 28 विशेषज्ञ डॉक्टर शामिल हैं। विभाग इन डॉक्टरों से कुल 17 करोड़ 75 लाख रुपए की पेनल्टी वसूलने की तैयारी कर रहा है। स्वास्थ्य संचालनालय ने मंगलवार से कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने अधिकारियों को इस मामले में कड़े कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। दरअसल, एमबीबीएस और पीजी की पढ़ाई पूरी करने के बाद डॉक्टरों के लिए दो साल तक ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा देना अनिवार्य होता है। इसके लिए पढ़ाई के दौरान डॉक्टरों से बांड भरवाया जाता है। एमबीबीएस छात्रों के लिए 25 लाख रुपए और पीजी छात्रों के लिए 50 लाख रुपए का बांड तय किया गया है। बांड में साफ तौर पर उल्लेख होता है कि यदि डॉक्टर पढ़ाई पूरी होने के बाद तय अवधि तक ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा नहीं देंगे तो उनसे बांड की राशि वसूली जाएगी। स्वास्थ्य विभाग ने 2025 में 655 मेडिकल ऑफिसर्स और 155 विशेषज्ञ डॉक्टरों की ग्रामीण क्षेत्रों में संविदा नियुक्ति के आदेश जारी किए थे। इन डॉक्टरों को दो साल की सेवा के लिए पदस्थ किया गया था। जब विभाग ने दिसंबर 2025 में ज्वाइन नहीं करने वाले डॉक्टरों को नोटिस भेजना शुरू किया, तब 54 डॉक्टरों ने जल्दबाजी में अपनी ज्वाइनिंग दे दी। इनमें 37 यूजी और 17 पीजी डॉक्टर शामिल थे। इन डॉक्टरों ने मेडिकल सर्टिफिकेट और ज्वाइनिंग दस्तावेज जमा कर दिए, जिसके बाद उनके खिलाफ कार्रवाई रोक दी गई। हालांकि 43 डॉक्टरों ने नोटिस का जवाब देने के बावजूद अपनी पोस्टिंग वाली जगह पर ज्वाइन नहीं किया। कई डॉक्टरों ने ग्रामीण इलाकों में सुविधाओं की कमी, बुजुर्ग माता-पिता की जिम्मेदारी और छोटे बच्चों की पढ़ाई जैसी वजहें बताईं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बांड भरते समय डॉक्टरों को पहले ही स्पष्ट कर दिया जाता है कि उनकी नियुक्ति ग्रामीण क्षेत्रों में की जाएगी। इसके बावजूद बांड स्वीकार करने के बाद सेवा नहीं देना नियमों का उल्लंघन है। अब विभाग ने इन डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई के लिए संबंधित जिलों के कलेक्टरों को भी सूचना भेज दी है।

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छत्तीसगढ़ BJP कोर कमेटी में बड़ा बदलाव: ओपी चौधरी, विजय शर्मा और अमर अग्रवाल शामिल, कई वरिष्ठ नेता बैठक से दूर

छत्तीसगढ़ भाजपा संगठन में बड़ा बदलाव किया गया है। पार्टी की कोर कमेटी का पुनर्गठन करते हुए कई नए चेहरों को शामिल किया गया है, जबकि कुछ पुराने सदस्यों की भूमिका को लेकर सवाल उठने लगे हैं। नई सूची में मंत्री ओपी चौधरी, डिप्टी सीएम विजय शर्मा और पूर्व मंत्री व विधायक अमर अग्रवाल को कोर कमेटी में जगह दी गई है। इसके साथ ही संगठनात्मक ढांचे में महत्वपूर्ण फेरबदल माना जा रहा है। हालांकि कोर कमेटी की हालिया बैठक में पूर्व मंत्री पुन्नूलाल मोहले, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, रामविचार नेताम, विक्रम उसेंडी, रेणुका सिंह, बृजमोहन अग्रवाल और गौरीशंकर अग्रवाल जैसे कई वरिष्ठ नेता शामिल नहीं हुए। उनकी अनुपस्थिति के बाद राजनीतिक गलियारों में उनके भविष्य को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। भाजपा प्रदेश महामंत्री यशवंत जैन ने कोर ग्रुप के पुनर्गठन की पुष्टि की है। वहीं पार्टी के अंदर इसे संगठन को नई दिशा देने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है। इससे पहले प्रदेश पदाधिकारियों की बैठक में संगठन को बूथ और ग्रामीण स्तर तक मजबूत करने, आगामी रणनीति और विभिन्न कार्यक्रमों की रूपरेखा पर चर्चा की गई थी। बैठक में राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश, क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल, प्रदेश अध्यक्ष किरण देव और प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। अब प्रदेश कार्यसमिति की बैठक पर भी सभी की नजरें टिकी हैं, जहां आगामी रणनीति और संगठनात्मक दिशा को लेकर अहम फैसले लिए जा सकते हैं। सूत्रों के अनुसार, भाजपा में यह बदलाव सिर्फ संगठन तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि सत्ता और संगठन दोनों स्तरों पर बड़े पुनर्गठन की तैयारी के संकेत मिल रहे हैं। कुछ नेताओं को राष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदारी मिलने की भी चर्चाएं हैं। इसके साथ ही मंत्रिमंडल और संगठन में भविष्य में और बदलाव की संभावनाएं भी जताई जा रही हैं, जिससे छत्तीसगढ़ भाजपा की राजनीतिक रणनीति नए मोड़ पर जाती दिख रही है।

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रायपुर: बम बनाने की सामग्री मामले में आरोपी गिरफ्तार, महापौर से रिश्तेदारी की चर्चा

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में बम बनाने से जुड़ी संदिग्ध सामग्री मिलने के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए आरोपी विनय देवांगन को गिरफ्तार किया है। आरोपी को खमतराई थाना क्षेत्र के रावाभाठा इलाके से पकड़ा गया है। जानकारी के अनुसार, 7 मई को रावाभाठा इलाके में एक संदिग्ध युवक के पास पिस्टल और बम निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री मिलने की सूचना पुलिस को मिली थी। सूचना के बाद पुलिस और बम निरोधक दस्ता (BDDS) मौके पर पहुंचा और जांच शुरू की गई। जांच के दौरान टीम को लो एक्सप्लोसिव क्षमता वाली सामग्री, बैटरी, दो केमिकल की बोतलें, तार और डेटोनेटर बरामद हुए थे। मामले के सामने आने के बाद आरोपी फरार हो गया था, जिसकी पुलिस लगातार तलाश कर रही थी। अब उसे गिरफ्तार कर लिया गया है और पूछताछ जारी है। पुलिस यह जानने का प्रयास कर रही है कि आरोपी की मंशा क्या थी और क्या इस घटना में अन्य लोग भी शामिल हैं। आरोपी विनय देवांगन को लेकर यह भी जानकारी सामने आई है कि वह बीरगांव नगर निगम के महापौर और एक पार्षद का रिश्तेदार है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहन जांच कर रही है।

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बिलासपुर में पुलिस की सख्ती: हुड़दंगियों और तीन सवारी बाइकर्स पर कार्रवाई, 513 लोग गिरफ्तार

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में पुलिस ने देर रात सड़कों पर उपद्रव करने वाले बदमाशों और नियम तोड़ने वाले बाइकर्स के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की। तीन सवारी बैठाकर बाइक चलाने, बिना नंबर प्लेट के घूमने और शराब पीकर वाहन चलाने वालों को पकड़कर सख्त चेतावनी दी गई। कार्रवाई के दौरान कई युवकों से उठक-बैठक भी कराई गई और उन्हें दोबारा गलती न करने की हिदायत दी गई। इस पूरी कार्रवाई का वीडियो भी सामने आया है। जिले में लगातार बढ़ रही चाकूबाजी और असामाजिक गतिविधियों को देखते हुए पुलिस ने विशेष अभियान शुरू किया है। देर रात सार्वजनिक स्थानों पर हुड़दंग मचाने और लोगों में डर का माहौल बनाने वालों पर लगातार नजर रखी जा रही है। सोमवार रात एएसपी पंकज पटेल और सीएसपी निमितेश सिंह के नेतृत्व में पुलिस टीम ने कई इलाकों में जांच अभियान चलाया। इस दौरान कुछ संदिग्ध युवकों के पास से हथियार भी बरामद किए गए। पुलिस को सिरगिट्टी क्षेत्र के अंडरब्रिज के पास शराबखोरी और बदमाशों के जमावड़े की लगातार शिकायत मिल रही थी। इसके बाद पुलिस ने इलाके में घेराबंदी कर चेकिंग अभियान चलाया। अलग-अलग स्थानों पर जवान तैनात किए गए थे ताकि भागने की कोशिश करने वालों को तुरंत पकड़ा जा सके। कार्रवाई के दौरान 7 बाइक जब्त की गईं और 12 युवकों के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की गई। पुलिस को देखकर भागने की कोशिश कर रहे कई युवकों को दौड़ाकर पकड़ा गया। एसएसपी रजनेश सिंह के निर्देश पर अप्रैल 2026 से 12 मई 2026 तक जिलेभर में चलाए गए विशेष अभियान में कुल 513 लोगों के खिलाफ वैधानिक और प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की गई है। पुलिस का फोकस खासतौर पर चाकू लेकर घूमने वाले, सार्वजनिक स्थानों पर डर फैलाने वाले और कानून व्यवस्था बिगाड़ने वाले लोगों पर रहा। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक सिविल लाइन थाना क्षेत्र में धारा 151 के तहत 55, धारा 107/116 के तहत 76 और आर्म्स एक्ट के 11 मामलों में कार्रवाई हुई। वहीं सरकंडा थाना क्षेत्र में धारा 107/116 के तहत सबसे ज्यादा 130 मामले दर्ज किए गए। कोतवाली थाना क्षेत्र में धारा 151 के 21 और धारा 107/116 के 93 मामलों में कार्रवाई हुई। तोरवा थाना क्षेत्र में चाकूबाजी के 2 मामले सामने आए, जबकि सिरगिट्टी और चकरभाठा क्षेत्रों में भी आर्म्स एक्ट और प्रतिबंधात्मक धाराओं के तहत कार्रवाई की गई। पुलिस का कहना है कि सार्वजनिक स्थानों पर हथियार लेकर घूमने और अशांति फैलाने वालों के खिलाफ आगे भी अभियान जारी रहेगा।

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रायपुर नगर निगम में 2.23 करोड़ के टैंकर टेंडर पर विवाद: नेता प्रतिपक्ष ने लगाया घोटाले और मिलीभगत का आरोप

राजधानी रायपुर में गर्मी के दौरान पानी सप्लाई के लिए जारी किए गए टैंकर टेंडर को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। रायपुर नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष Akash Tiwari ने टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी और अधिकारियों-ठेकेदारों की मिलीभगत का आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि पिछले कई वर्षों से कुछ चुनिंदा फर्मों को ही लगातार काम दिया जा रहा है। आकाश तिवारी ने कहा कि नगर निगम हर साल वार्डों में पानी सप्लाई के लिए टैंकर टेंडर जारी करता है, लेकिन प्रक्रिया में पारदर्शिता दिखाई नहीं देती। उनका आरोप है कि पिछले वर्ष जिन छह फर्मों को टेंडर मिला था, इस बार भी उन्हीं कंपनियों को काम सौंपा गया है। नेता प्रतिपक्ष ने जिन फर्मों का नाम लिया उनमें मेसर्स केशव प्रसाद पांडे, प्रज्ञा कंस्ट्रक्शन, परिमल कश्यप, अरविंद सिंह ठाकुर, प्रवीण दीक्षित और रफीक अहमद शामिल हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि हर साल यही फर्में कैसे चयनित हो जाती हैं। तिवारी ने आरोप लगाया कि निविदा की शर्तें भी ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने के हिसाब से तय की जाती हैं। उन्होंने कहा कि सभी निविदा दाताओं के रेट और तारीखों का एक जैसा होना संदेह पैदा करता है। उन्होंने दावा किया कि पिछले साल लगभग 1 करोड़ रुपए का टेंडर जारी किया गया था, लेकिन बाद में टैंकर संचालन के नाम पर करीब 2.06 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया। उनका कहना है कि टेंडर राशि कम रखी जाती है और बाद में भुगतान बढ़ा दिया जाता है, जिससे पूरे मामले पर सवाल खड़े होते हैं। नेता प्रतिपक्ष ने टैंकरों में GPS सिस्टम नहीं लगाए जाने पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि बिना GPS मॉनिटरिंग के यह पता लगाना मुश्किल है कि टैंकरों ने वास्तव में कहां और कितनी पानी सप्लाई की। आकाश तिवारी ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि यदि अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत साबित होती है तो सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि नगर निगम की टेंडर प्रक्रिया भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रही है।

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हमर अस्पताल में एक्सपायरी दवाओं की सप्लाई का आरोप: कांग्रेस ने सरकार और CGMSC पर उठाए सवाल

रायपुर के गुढ़ियारी स्थित हमर अस्पताल में एक्सपायरी और कम अवधि वाली दवाइयों की सप्लाई को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस नेता Vikas Upadhyay ने अस्पताल और CGMSC वेयरहाउस का निरीक्षण करने के बाद दावा किया कि वहां बड़ी मात्रा में संदिग्ध दवाइयां मिली हैं। उन्होंने इस मामले में FIR दर्ज कराने और प्रदेशभर में जांच की मांग की है। विकास उपाध्याय ने आरोप लगाया कि सरकारी अस्पतालों में ऐसी दवाइयां पहुंचाई जा रही हैं जिनकी एक्सपायरी डेट नजदीक है या जो उपयोग के लिए सुरक्षित नहीं हैं। उनका कहना है कि इससे मरीजों की जान को खतरा हो सकता है और यदि पूरे प्रदेश में जांच की जाए तो कई और मामले सामने आ सकते हैं। कांग्रेस नेता ने दावा किया कि जिन दवाइयों पर सवाल उठ रहे हैं उनमें नवजात शिशुओं और बच्चों को दी जाने वाली दवाइयां भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि कम अवधि या एक्सपायरी दवाओं का उपयोग गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इससे पहले CGMSC के जरिए सप्लाई की गई कैल्शियम दवाओं, मेडिकल किट, दस्ताने, सिरिंज और अन्य सर्जिकल सामग्री की गुणवत्ता पर भी सवाल उठ चुके हैं। कांग्रेस ने सरकार और दवा सप्लाई एजेंसियों पर मिलीभगत का आरोप लगाते हुए कहा कि कुछ कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए टेंडर दिए जा रहे हैं। विकास उपाध्याय ने दावा किया कि कुछ कंपनियों में भाजपा नेताओं और उनके परिजनों की भूमिका होने के कारण कार्रवाई नहीं की जा रही है। हालांकि इस मामले पर सरकार या CGMSC की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। कांग्रेस ने राजधानी रायपुर समेत प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में दवाइयों की गुणवत्ता की जांच कराने की मांग की है। साथ ही संबंधित अधिकारियों और कंपनियों के खिलाफ FIR दर्ज करने की बात कही है।

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