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छत्तीसगढ़ में माइक्रो ब्रुअरी को मिली मंजूरी, अब स्थानीय स्तर पर मिलेगी फ्रेश क्राफ्ट बीयर

छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में माइक्रो ब्रुअरी खोलने की अनुमति दे दी है। इस फैसले के बाद अब प्रदेश में स्थानीय स्तर पर तैयार की जाने वाली फ्रेश क्राफ्ट बीयर उपलब्ध हो सकेगी। सरकार का कहना है कि इस नई व्यवस्था से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, होटल और रेस्टोरेंट उद्योग को बढ़ावा मिलेगा तथा राज्य के राजस्व में भी बढ़ोतरी होने की संभावना है। सरकार की मंजूरी के बाद अब माइक्रो ब्रुअरी स्थापित करने के लिए आबकारी विभाग लाइसेंस जारी करेगा। देश के कई राज्यों जैसे कर्नाटक, महाराष्ट्र, पंजाब, हरियाणा और गोवा में यह व्यवस्था पहले से लागू है। खासतौर पर बेंगलुरु अपनी क्राफ्ट बीयर संस्कृति के लिए काफी प्रसिद्ध माना जाता है। माइक्रो ब्रुअरी में सीमित मात्रा में बीयर तैयार की जाती है, जिसे मुख्य रूप से होटल और रेस्टोरेंट में परोसा जाता है। लाइसेंस प्राप्त करने के लिए आवेदक को 10 लाख रुपये की लाइसेंस फीस जमा करनी होगी और कम से कम 4 हजार वर्ग फीट भूमि उपलब्ध करानी होगी। क्राफ्ट बीयर पारंपरिक फैक्ट्री में बनने वाली बीयर से अलग होती है। इसे छोटे बैच में उच्च गुणवत्ता वाले माल्ट, हॉप्स और अन्य प्राकृतिक सामग्री से तैयार किया जाता है। इसी कारण इसका स्वाद अधिक ताज़ा और अलग-अलग फ्लेवर में उपलब्ध होता है। सरकार ने माइक्रो ब्रुअरी में बनने वाली क्राफ्ट बीयर पर 60 रुपये प्रति बल्क लीटर उत्पाद शुल्क निर्धारित किया है। वहीं एक गिलास क्राफ्ट बीयर की अनुमानित कीमत 250 से 300 रुपये के बीच हो सकती है।

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रायपुर मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों की कमी और गहराई, प्रोफेसर बनने के बाद 17 शिक्षकों का हुआ तबादला

रायपुर के सरकारी मेडिकल कॉलेज में शिक्षकों की कमी लगातार बनी हुई है। हाल ही में 21 डॉक्टरों को प्रोफेसर पद पर पदोन्नत किया गया, लेकिन इनमें से 17 डॉक्टरों का विभिन्न सरकारी मेडिकल कॉलेजों में तबादला कर दिया गया। इससे पहले से स्टाफ की कमी से जूझ रहे मेडिकल कॉलेज पर अतिरिक्त दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। 417 में से 166 पद अब भी खाली मेडिकल कॉलेज में शिक्षकों के कुल 417 स्वीकृत पद हैं, जिनमें से 166 पद अभी भी रिक्त हैं। वर्तमान में 251 डॉक्टर शिक्षण कार्य कर रहे हैं। इनमें 156 नियमित और 95 संविदा पर कार्यरत हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि शिक्षकों की कमी का सीधा असर मेडिकल छात्रों की पढ़ाई और पीजी सीटों की संख्या पर पड़ता है। पहले भी घट चुकी हैं पीजी सीटें शिक्षकों की कमी का असर पहले भी देखने को मिला है। वर्ष 2025 में सर्जरी विभाग में पर्याप्त फैकल्टी नहीं होने के कारण पीजी की दो सीटें कम करनी पड़ी थीं। ऐसे में यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो भविष्य में अन्य विभाग भी प्रभावित हो सकते हैं। प्रदेशभर के मेडिकल कॉलेजों में भी स्टाफ की कमी केवल रायपुर ही नहीं, बल्कि प्रदेश के सभी सरकारी मेडिकल और डेंटल कॉलेज भी फैकल्टी की कमी से जूझ रहे हैं। राज्य के 10 सरकारी मेडिकल कॉलेज और एक सरकारी डेंटल कॉलेज में कुल 1,934 स्वीकृत शिक्षकों के पद हैं, जिनमें से 985 पद खाली हैं। यानी लगभग 51 प्रतिशत पदों पर अब भी नियुक्तियां नहीं हो सकी हैं। सुपरस्पेशलिटी अस्पतालों में भी डॉक्टरों की कमी रायपुर के डीकेएस सुपरस्पेशलिटी अस्पताल और बिलासपुर के सुपरस्पेशलिटी अस्पताल की स्थिति भी चिंताजनक है। दोनों संस्थानों में कुल 139 स्वीकृत पदों में से 81 पद खाली हैं, जिससे मरीजों को विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने में भी चुनौतियां सामने आ रही हैं। ढाई साल में 100 से अधिक डॉक्टरों ने छोड़ी नौकरी नियमित भर्ती प्रक्रिया लंबे समय से लंबित रहने के कारण कई डॉक्टर सरकारी सेवा छोड़ चुके हैं। पिछले करीब ढाई वर्षों में आंबेडकर अस्पताल और डीकेएस अस्पताल से 100 से अधिक डॉक्टर इस्तीफा दे चुके हैं। इनमें से कई डॉक्टर बेहतर अवसर मिलने पर मध्यप्रदेश, राजस्थान और अन्य राज्यों के मेडिकल संस्थानों में कार्यरत हो गए। इन विभागों के डॉक्टरों का हुआ तबादला पदोन्नति के बाद जिन डॉक्टरों का तबादला किया गया है, वे फॉरेंसिक मेडिसिन, फार्माकोलॉजी, एनाटॉमी, माइक्रोबायोलॉजी, मेडिसिन, गायनिक, ईएनटी, सर्जरी, दंत रोग, एनेस्थीसिया, चर्म रोग और रेडियोथेरेपी विभाग से जुड़े हैं। इनकी नई पदस्थापना कवर्धा, जांजगीर-चांपा, दंतेवाड़ा, मनेंद्रगढ़, महासमुंद, दुर्ग, कांकेर और बिलासपुर के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में की गई है.

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छत्तीसगढ़ में UCC लागू करने की दिशा में बड़ा कदम, सरकार ने बनाई 5 सदस्यीय हाई लेवल कमेटी

छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code – UCC) लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है। यह समिति यूसीसी का प्रारूप तैयार करने के साथ-साथ विभिन्न पक्षों का अध्ययन कर सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा 25 जून को जारी आदेश के अनुसार, समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई करेंगी। समिति में शत्रुघ्न सिंह, एम.के. राउत, मोहन पवार और ज्योति रानी सिंह को सदस्य बनाया गया है। किन विषयों पर करेगी अध्ययन समिति राज्य में लागू विभिन्न व्यक्तिगत कानूनों (पर्सनल लॉ) का अध्ययन करेगी। इसके अंतर्गत विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, दत्तक ग्रहण तथा अन्य नागरिक मामलों से जुड़े मौजूदा कानूनी प्रावधानों की समीक्षा की जाएगी। अध्ययन के आधार पर समान नागरिक संहिता का मसौदा तैयार किया जाएगा। आम जनता और विशेषज्ञों से भी लिए जाएंगे सुझाव सरकार ने समिति को निर्देश दिया है कि वह नागरिकों, सामाजिक संगठनों, विधि विशेषज्ञों और अन्य संबंधित पक्षों से सुझाव प्राप्त करे। इसके अलावा उन राज्यों के अनुभवों का भी अध्ययन किया जाएगा, जहां यूसीसी लागू हो चुकी है या इस दिशा में ठोस पहल की गई है। रिपोर्ट मिलने के बाद सरकार करेगी फैसला समिति अपनी विस्तृत रिपोर्ट और यूसीसी का ड्राफ्ट राज्य सरकार को सौंपेगी। इसके साथ आवश्यक विधायी और प्रशासनिक सुझाव भी दिए जाएंगे। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि सरकार सभी पहलुओं पर व्यापक विचार-विमर्श और अध्ययन के बाद आगे की प्रक्रिया तय करेगी। यूसीसी लागू होने पर क्या बदलेगा यदि राज्य में समान नागरिक संहिता लागू होती है तो विवाह, तलाक, संपत्ति का उत्तराधिकार, गोद लेने और भरण-पोषण जैसे मामलों में सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून लागू होगा। वर्तमान में अलग-अलग धर्मों के लोग अपने-अपने पर्सनल लॉ के अनुसार इन मामलों का पालन करते हैं। सरकार का कहना है कि यूसीसी का उद्देश्य नागरिकों के लिए समान कानूनी व्यवस्था सुनिश्चित करना, विभिन्न व्यक्तिगत कानूनों के कारण होने वाली असमानताओं को कम करना तथा महिलाओं को समान अधिकार प्रदान करना है। किन राज्यों में लागू है यूसीसी उत्तराखंड देश का पहला राज्य है जहां समान नागरिक संहिता लागू की जा चुकी है। इसके अलावा गुजरात और असम ने भी यूसीसी से संबंधित विधेयक पारित किए हैं। वहीं गोवा में पुर्तगाली शासनकाल से लागू गोवा सिविल कोड आज भी प्रभावी है, हालांकि इसमें कुछ विशेष प्रावधान होने के कारण इसे पूर्ण आधुनिक यूसीसी नहीं माना जाता। छत्तीसगढ़ में गठित यह समिति राज्य में यूसीसी लागू करने की दिशा में शुरुआती और महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। समिति की रिपोर्ट के आधार पर सरकार आगे की कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया तय करेगी।

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CBSE का बड़ा फैसला: अब छात्र रीजनल ऑफिस में जाकर कर सकेंगे उत्तर पुस्तिका की जांच

सीबीएसई ने बोर्ड परीक्षा के परिणामों को लेकर छात्रों की शंकाओं को दूर करने के लिए एक नई व्यवस्था शुरू की है। अब ऐसे छात्र, जिन्होंने अंकों के वेरिफिकेशन के लिए आवेदन किया था लेकिन जांच के बाद भी उनके अंकों में कोई बदलाव नहीं हुआ, वे अपनी उत्तर पुस्तिका की फिजिकल जांच करवा सकेंगे। बोर्ड द्वारा जारी आधिकारिक सूचना के अनुसार, यह सुविधा केवल उन विद्यार्थियों को मिलेगी जिनके वेरिफिकेशन रिजल्ट में “नो चेंज” आया है। ऐसे छात्र सीबीएसई के क्षेत्रीय कार्यालय पहुंचकर अपनी उत्तर पुस्तिका का निरीक्षण कर सकेंगे। इसके लिए बोर्ड जल्द ही विस्तृत दिशा-निर्देश और शेड्यूल जारी करेगा। सीबीएसई के इतिहास में यह पहली बार है जब छात्रों को वेरिफिकेशन प्रक्रिया के बाद उत्तर पुस्तिका की फिजिकल जांच का अवसर दिया जा रहा है। पहले वेरिफिकेशन के बाद यदि अंक नहीं बदलते थे, तो छात्रों के पास आगे कोई विकल्प नहीं होता था। बोर्ड का मानना है कि इस नई पहल से मूल्यांकन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनेगी। साथ ही छात्रों को अपनी कॉपी की जांच को लेकर किसी भी प्रकार की शंका दूर करने का अवसर मिलेगा। इसी बीच सीबीएसई ने कक्षा 12वीं के री-इवैल्यूएशन परिणाम भी जारी करने शुरू कर दिए हैं। बोर्ड के अनुसार अब तक प्राप्त कुल आवेदनों में से 87 प्रतिशत से अधिक के नतीजे घोषित किए जा चुके हैं, जबकि शेष आवेदनों की प्रक्रिया तेजी से जारी है।

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दुर्ग में आज NEET री-एग्जाम, 19 परीक्षा केंद्रों पर हाई अलर्ट; जैमर, CCTV और सोशल मीडिया मॉनिटरिंग की व्यवस्था

दुर्ग जिले में आज आयोजित होने वाली NEET री-एग्जाम को लेकर प्रशासन और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए हैं। परीक्षा को निष्पक्ष, सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए जिले के सभी 19 परीक्षा केंद्रों पर विशेष व्यवस्थाएं लागू की गई हैं। प्रशासन के अनुसार प्रत्येक परीक्षा केंद्र पर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया है। इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के दुरुपयोग को रोकने के लिए जैमर लगाए गए हैं, जबकि हर परीक्षा कक्ष में CCTV कैमरे स्थापित किए गए हैं। परीक्षा के दौरान कंट्रोल रूम से इन कैमरों की लाइव निगरानी की जाएगी। इस बार परीक्षा के नियमों में भी कुछ बदलाव किए गए हैं। परीक्षा की अवधि 180 मिनट से बढ़ाकर 195 मिनट कर दी गई है। साथ ही अभ्यर्थियों को रफ वर्क के लिए पहले की तुलना में अधिक रफ शीट्स उपलब्ध कराई जाएंगी। परीक्षा में शामिल होने वाले विद्यार्थियों को नया री-नीट एडमिट कार्ड की दो प्रिंटेड प्रतियां, एक अतिरिक्त पासपोर्ट साइज फोटो और एक वैध फोटो पहचान पत्र साथ लाना अनिवार्य होगा। ड्रेस कोड के तहत अभ्यर्थियों को हल्के रंग के और आधी बांह वाले कपड़े पहनकर आने की सलाह दी गई है। अधिक जेब वाले कपड़े, फुल स्लीव शर्ट, भारी आभूषण, हाई हील वाले जूते और अन्य प्रतिबंधित वस्तुओं से बचने के निर्देश दिए गए हैं। सुरक्षा जांच को आसान बनाने के लिए चप्पल या लो-हील सैंडल पहनने की सलाह दी गई है। परीक्षा केंद्रों में मोबाइल फोन, स्मार्ट वॉच, ब्लूटूथ डिवाइस, कैलकुलेटर सहित किसी भी प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण ले जाने की अनुमति नहीं होगी। प्रवेश से पहले सभी अभ्यर्थियों का बायोमेट्रिक सत्यापन और फ्रिस्किंग की जाएगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि दोपहर 1:30 बजे के बाद किसी भी अभ्यर्थी को परीक्षा केंद्र में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। छात्रों को एडमिट कार्ड में दिए गए समय के अनुसार केंद्र पहुंचने की सलाह दी गई है। स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थिति से निपटने के लिए सभी परीक्षा केंद्रों पर स्वास्थ्य कर्मियों की तैनाती की गई है। इसके अलावा चार एंबुलेंस भी रिजर्व रखी गई हैं। प्रश्न पत्रों की सुरक्षा के लिए मजिस्ट्रेट, ऑब्जर्वर और केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है, जो पूरी परीक्षा प्रक्रिया की निगरानी करेंगे। कलेक्टर अभिजीत सिंह ने बताया कि सोशल मीडिया मॉनिटरिंग के लिए अलग टीम बनाई गई है। यह टीम इंस्टाग्राम, फेसबुक और एक्स जैसे प्लेटफॉर्म पर लगातार नजर रखेगी। पेपर लीक या भ्रामक जानकारी से जुड़ी किसी भी पोस्ट पर तत्काल जांच और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

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गृह मंत्रालय और विधि मंत्रालय की अहम बैठक में शामिल हुए सांसद बृजमोहन अग्रवाल, संवैधानिक संशोधन विधेयकों पर रखे सुझाव

रायपुर/नई दिल्ली। रायपुर लोकसभा सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने नई दिल्ली में आयोजित संयुक्त संसदीय समिति (JPC) की महत्वपूर्ण बैठक में भाग लिया। यह बैठक संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025, जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2025 तथा संघ राज्य क्षेत्र (संशोधन) विधेयक, 2025 के अध्ययन दौरे के तहत आयोजित की गई थी। सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने बताया कि बैठक के दौरान गृह मंत्रालय, विधि एवं न्याय मंत्रालय तथा दिल्ली सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विभिन्न विधेयकों के प्रावधानों और उनके प्रभावों पर विस्तृत चर्चा हुई। इस दौरान उन्होंने अपने सुझाव और विचार भी समिति के समक्ष रखे। बैठक में राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों (NLUs), बार एसोसिएशन, न्यायिक अकादमी, नीति अनुसंधान संस्थानों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों के साथ भी संवाद किया गया। विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों की राय और सुझावों को भी समिति ने गंभीरता से सुना। बैठक में समिति की अध्यक्ष सांसद अपराजिता सारंगी सहित सांसद अनुराग सिंह ठाकुर, बृजलाल, मनन कुमार मिश्रा, उज्ज्वल देवराव निकम, असदुद्दीन ओवैसी तथा अन्य सदस्य और संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने तथा विधायी प्रक्रियाओं को प्रभावी बनाने के उद्देश्य से इस तरह की चर्चाएं महत्वपूर्ण हैं।

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रायपुर में नशे में वाहन चलाने वाले 50 चालकों पर कार्रवाई, ट्रैफिक पुलिस का विशेष अभियान

रायपुर। सड़क सुरक्षा को लेकर रायपुर ट्रैफिक पुलिस लगातार सख्त रुख अपनाए हुए है। इसी कड़ी में शहर के विभिन्न इलाकों में चलाए गए विशेष अभियान के दौरान नशे की हालत में वाहन चला रहे 50 चालकों के खिलाफ कार्रवाई की गई। पुलिस ने प्रमुख चौक-चौराहों और व्यस्त मार्गों पर बैरिकेडिंग कर वाहनों की जांच की। जांच के दौरान ब्रेथ एनालाइजर से परीक्षण में कई चालक शराब के नशे में वाहन चलाते पाए गए। नियमों का उल्लंघन करने वाले सभी चालकों के खिलाफ मोटर वाहन अधिनियम के तहत चालानी कार्रवाई की गई। अधिकारियों के अनुसार, ड्रंक एंड ड्राइव सड़क दुर्घटनाओं का एक प्रमुख कारण है। इसी वजह से यातायात पुलिस द्वारा लगातार विशेष अभियान चलाकर ऐसे वाहन चालकों पर निगरानी रखी जा रही है। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि शराब पीने के बाद वाहन न चलाएं और यातायात नियमों का पालन करें। यातायात विभाग ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में भी इस तरह की कार्रवाई लगातार जारी रहेगी ताकि सड़क हादसों पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सके और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

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वायुसेना के विशेष विमान से जगदलपुर पहुंचे NEET-UG 2026 री-एग्जाम के प्रश्नपत्र

जगदलपुर। 21 जून को आयोजित होने वाली NEET-UG 2026 री-एग्जाम की को अंतिम रूप दिया जा रहा है। इसी क्रम में सोमवार को छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में भारतीय वायुसेना के विशेष विमान के जरिए परीक्षा के प्रश्नपत्र पहुंचाए गए। प्रश्नपत्रों को सीलबंद बक्सों में बेहद कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच विमान से उतारा गया। इसके बाद उन्हें सुरक्षा बलों की निगरानी में सीधे निर्धारित स्ट्रॉन्ग रूम तक पहुंचाया गया। पूरे प्रक्रिया के दौरान गोपनीयता और सुरक्षा मानकों का विशेष रूप से पालन किया गया ताकि किसी भी तरह की अनियमितता या लापरवाही की गुंजाइश न रहे। गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में पेपर लीक की घटनाओं के सामने आने के बाद इस बार परीक्षा संचालन एजेंसियां और प्रशासन अतिरिक्त सतर्कता बरत रहे हैं। इस बीच नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने NEET-UG 2026 री-एग्जाम के लिए एडमिट कार्ड भी जारी कर दिए हैं। अभ्यर्थी आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपने आवेदन संख्या और पासवर्ड की मदद से प्रवेश पत्र डाउनलोड कर सकते हैं। उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि एडमिट कार्ड डाउनलोड करने से पहले अपने बैंक खाते की जानकारी भी सत्यापित कर लें, जिससे रिफंड प्रक्रिया में किसी प्रकार की समस्या न आए।

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किराये पर लिया ट्रेलर बेचकर 5.20 लाख हड़पे, रायगढ़ पुलिस ने शातिर ठग को दबोचा

रायगढ़। कोतरारोड़ पुलिस ने ट्रेलर वाहन को किराये पर लेकर उसे बेच देने के सनसनीखेज धोखाधड़ी मामले का खुलासा करते हुए मुख्य आरोपी सुदामा प्रधान उर्फ छोटू को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी ने फर्जी पहचान का सहारा लेकर वाहन मालिक का विश्वास जीता और ट्रेलर को अपने कब्जे में लेने के बाद उसे रायपुर में बेच दिया। मामले की शिकायत गोरखा निवासी हरदीप सिंह ने दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि करीब दो वर्ष पहले एक व्यक्ति ने फोन कर स्वयं को राकेश डनसेना बताया और ट्रेलर वाहन किराये पर लेने की इच्छा जताई। बातचीत के बाद दोनों पक्षों के बीच 80 हजार रुपये प्रतिमाह किराया तय हुआ और 7 नवंबर 2024 को किरायानामा तैयार किया गया। भरोसा दिलाने के लिए आरोपी ने एचडीएफसी बैंक का हस्ताक्षरयुक्त ब्लैंक चेक भी दिया था। वाहन लेने के कुछ समय बाद आरोपी का मोबाइल बंद हो गया। न तो वाहन का किराया मिला और न ही ट्रेलर वापस किया गया। संदेह होने पर वाहन मालिक ने स्वयं जांच की, जिसमें सामने आया कि राकेश डनसेना के नाम से पहचान बताने वाला व्यक्ति वास्तव में सुदामा प्रधान उर्फ छोटू है। शिकायत के आधार पर कोतरारोड़ थाना में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू की गई। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर पुलिस टीम ने आरोपी की तलाश तेज की और मुखबिर की सूचना पर उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की। पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि उसने अपने साथी गुरप्रीत सिंह के साथ मिलकर ट्रेलर वाहन को किराये पर लेकर बेचने की साजिश रची थी। योजना के तहत फर्जी नाम से किरायानामा तैयार कराया गया और वाहन मालिक को भरोसे में लिया गया। इसके बाद ट्रेलर वाहन क्रमांक CG 15 AC 4476 को रायपुर ले जाकर बेच दिया गया। आरोपी ने पुलिस को बताया कि रायपुर के गुढ़ियारी क्षेत्र में वाहन को हार्स और ट्राला सहित 5 लाख 20 हजार रुपये में बेच दिया गया था। बिक्री से मिली राशि दोनों आरोपियों ने आपस में बांट ली थी। आरोपी के हिस्से में मिली रकम में से केवल 15 हजार रुपये शेष होना बताया गया है। जांच के दौरान पुलिस को यह भी जानकारी मिली कि संबंधित ट्रेलर को रायपुर स्थित एक डिस्पोजल गोदाम में काटकर नष्ट कर दिया गया है। वहीं मामले का दूसरा आरोपी गुरप्रीत सिंह अभी फरार है, जिसकी तलाश जारी है। पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपी ने पूछताछ में वाहन और मोबाइल चोरी की कुछ अन्य घटनाओं में भी संलिप्तता स्वीकार की है, जिनकी अलग से जांच की जा रही है। फिलहाल आरोपी सुदामा प्रधान उर्फ छोटू को न्यायालय में पेश कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है।

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रायपुर में भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों के मूल्यांकन पर संगोष्ठी, विशेषज्ञों ने आर्थिक अवसरों और चुनौतियों पर की चर्चा

रायपुर में भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते व्यापारिक संबंधों तथा उनके आर्थिक प्रभावों पर केंद्रित एक महत्वपूर्ण संगोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम का विषय “भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों का मूल्यांकन” रहा, जिसमें व्यापार, उद्योग, शिक्षा और नीति निर्माण से जुड़े विशेषज्ञों ने भाग लिया। बैठक में दोनों देशों के बीच बढ़ते द्विपक्षीय व्यापार, निवेश के अवसर, वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और संभावित व्यापार समझौतों पर विस्तार से चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है, जिससे उद्योग, तकनीक, कृषि और सेवा क्षेत्र में नए अवसर पैदा हो रहे हैं। विशेषज्ञों ने इस बात पर भी जोर दिया कि बदलते वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में भारत के लिए अमेरिकी बाजार महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। साथ ही उन्होंने व्यापारिक चुनौतियों, शुल्क नीतियों, निर्यात प्रतिस्पर्धा और निवेश संबंधी मुद्दों पर भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम में यह मत सामने आया कि भारत-अमेरिका व्यापारिक साझेदारी को और मजबूत बनाने के लिए उद्योगों को वैश्विक मानकों के अनुरूप तैयार करना होगा। इससे रोजगार सृजन, निवेश वृद्धि और आर्थिक विकास को नई गति मिल सकती है। प्रतिभागियों ने व्यापारिक सहयोग को बढ़ाने, नई तकनीकों को अपनाने और निर्यात क्षमता को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया। संगोष्ठी के दौरान छात्रों, शोधकर्ताओं और उद्योग प्रतिनिधियों ने भी अपने प्रश्न और सुझाव साझा किए।

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