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बिलासपुर में 11KV हाईटेंशन लाइन की चपेट में आए 5 मजदूर, बिना सुरक्षा उपकरण काम कराने पर ठेकेदार पर उठे सवाल

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में स्ट्रीट लाइट का पोल लगाते समय बड़ा हादसा हो गया। सिरगिट्टी थाना क्षेत्र के आदर्श नगर में 11 केवी हाईटेंशन बिजली लाइन की चपेट में आने से एक महिला सहित पांच मजदूर गंभीर रूप से झुलस गए। सभी घायलों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटना के बाद कार्यस्थल पर सुरक्षा व्यवस्था और ठेकेदार की लापरवाही को लेकर सवाल उठ रहे हैं। जानकारी के अनुसार, नगर निगम की ओर से वार्ड क्रमांक 11 स्थित आदर्श नगर की पानी टंकी के पास स्ट्रीट लाइट लगाने का काम कराया जा रहा था। शुक्रवार दोपहर करीब 2 बजे मजदूर लोहे का पोल खड़ा कर रहे थे। इसी दौरान पोल ऊपर से गुजर रही 11 केवी हाईटेंशन लाइन से टकरा गया, जिससे पूरे पोल में करंट दौड़ गया और उसे पकड़े मजदूर बिजली की चपेट में आ गए। हादसे के तुरंत बाद स्थानीय लोगों ने पुलिस और डायल-112 को सूचना दी। पुलिस तथा आसपास मौजूद लोगों की मदद से सभी घायलों को जिला अस्पताल पहुंचाया गया। घायलों की पहचान मध्य प्रदेश के मंडला जिले के रहने वाले दीपक यादव (30), मुकेश कुमार (38), सेवाराम (24), प्रहलाद चौरसिया (45) और जयंती धुर्वे के रूप में हुई है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, मजदूरों के पास आवश्यक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं थे। साथ ही, हाईटेंशन लाइन के नीचे काम शुरू करने से पहले बिजली सप्लाई बंद कराने और अन्य सुरक्षा मानकों का पालन भी नहीं किया गया। ऐसे में ठेकेदार और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, हाईटेंशन लाइन के नीचे किसी भी प्रकार का कार्य शुरू करने से पहले बिजली विभाग से लाइन शटडाउन लेना, सुरक्षा बैरिकेडिंग करना और प्रशिक्षित सुपरवाइजर की निगरानी में काम कराना जरूरी होता है। इस मामले में इन प्रक्रियाओं का पालन हुआ या नहीं, इसकी जांच की जाएगी। पुलिस का कहना है कि हादसे की जांच जारी है। यदि जांच में किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने आती है, तो संबंधित ठेकेदार, अधिकारी या जिम्मेदार एजेंसी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

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राजनांदगांव में पहली बारिश में धंसा 26 करोड़ का रेलवे ओवरब्रिज, विधानसभा अध्यक्ष ने रेल मंत्री से मांगी जांच

छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में प्रधानमंत्री गति शक्ति योजना के तहत निर्मित लगभग 26 करोड़ रुपये के रेलवे ओवरब्रिज में पहली ही बारिश के बाद गंभीर निर्माण संबंधी खामियां सामने आई हैं। जून में लोकार्पण के कुछ समय बाद हुई बारिश में ओवरब्रिज की सड़क धंस गई और उस पर बड़ी दरारें दिखाई देने लगीं। मामले को गंभीर मानते हुए विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखकर पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। बारिश के बाद सड़क में आई बड़ी दरारें डोंगरगढ़-राजनांदगांव रेलखंड पर बने इस ओवरब्रिज में 4 और 5 जुलाई की बारिश के बाद करीब 60 से 70 फीट लंबी तथा 15 से 20 सेंटीमीटर चौड़ी दरारें दिखाई दीं। सड़क का एक हिस्सा धंसने से ओवरब्रिज की संरचना पर सवाल उठने लगे हैं। निर्माण सामग्री को लेकर आरोप स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि टेंडर की शर्तों के अनुसार बेस में उच्च गुणवत्ता की मुरुम का उपयोग किया जाना था, लेकिन उसकी जगह साधारण मिट्टी का इस्तेमाल किया गया। आरोप है कि बारिश के कारण मिट्टी बैठने से सड़क धंस गई। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही होगी। गुणवत्ता जांच पर भी उठे सवाल मामले में निर्माण सामग्री की गुणवत्ता जांच और तकनीकी परीक्षण की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं। आरोप है कि पर्याप्त परीक्षण के बिना ही ओवरब्रिज को यातायात के लिए खोल दिया गया था। अस्थायी मरम्मत के बाद भी जारी है आवाजाही प्रशासन ने फिलहाल दरारों को सीमेंट से भरकर अस्थायी मरम्मत की है। इसके बावजूद ओवरब्रिज से भारी वाहनों का आवागमन जारी है, जिससे स्थानीय लोगों में सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है। रेल मंत्री से की गई प्रमुख मांगें डॉ. रमन सिंह ने अपने पत्र में पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने, निर्माण एजेंसी, ठेकेदार, कंसल्टेंट और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने तथा तकनीकी सुरक्षा परीक्षण के बाद आवश्यक मरम्मत या पुनर्निर्माण कराने की मांग की है।

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बिलासपुर के स्कूल में पुलिस की जागरूकता क्लास, छात्रों को साइबर सुरक्षा, पॉक्सो कानून और ट्रैफिक नियमों की दी जानकारी

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में पुलिस ने छात्रों को कानून और सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से विशेष अभियान चलाया। पचपेड़ी थाना क्षेत्र के ग्राम जोंधरा स्थित हायर सेकेंडरी स्कूल में आयोजित इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों को साइबर अपराध, पॉक्सो एक्ट, यातायात नियमों और ग्रामीण क्षेत्रों में होने वाली ठगी से बचाव की महत्वपूर्ण जानकारी दी गई। साइबर ठगी से बचने के बताए उपाय पुलिस अधिकारियों ने छात्रों को बताया कि साइबर अपराधी मोबाइल कॉल, फर्जी लिंक और ऑनलाइन माध्यमों के जरिए लोगों को ठगी का शिकार बनाते हैं। विद्यार्थियों को सलाह दी गई कि वे किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ ओटीपी, बैंक खाते की जानकारी या अन्य व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें और संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से बचें। पॉक्सो कानून और शिकायत प्रक्रिया की जानकारी थाना प्रभारी कमला पुसाम और उनकी टीम ने पॉक्सो एक्ट, छेड़छाड़, यौन अपराध और शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया पर विस्तार से जानकारी दी। पुलिस ने छात्रों को बताया कि किसी भी प्रकार की घटना होने पर बिना डर के शिकायत करें। शिकायतकर्ता की पहचान गोपनीय रखी जाती है और कानून पीड़ितों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है। यातायात नियमों का पालन करने की अपील कार्यक्रम में सड़क सुरक्षा पर भी विशेष जोर दिया गया। छात्रों को हेलमेट और सीट बेल्ट का अनिवार्य रूप से उपयोग करने, शराब पीकर वाहन नहीं चलाने, तेज गति से बचने तथा 18 वर्ष की आयु से पहले वाहन नहीं चलाने की सलाह दी गई। पुलिस ने दोपहिया वाहन पर निर्धारित क्षमता से अधिक सवारी न बैठाने की भी अपील की। संदिग्ध गतिविधियों की तुरंत दें सूचना पुलिस ने ग्रामीण क्षेत्रों में सक्रिय ठगी करने वाले गिरोहों, संदिग्ध फेरीवालों और चोरी की रेकी करने वाले लोगों से सतर्क रहने को कहा। यदि किसी संदिग्ध व्यक्ति की गतिविधि दिखाई दे तो उसकी सूचना तुरंत नजदीकी पुलिस थाने को देने की सलाह दी गई। अंधविश्वास के खिलाफ भी किया जागरूक कार्यक्रम के दौरान टोनही प्रताड़ना, जादू-टोना और अंधविश्वास जैसी सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ भी विद्यार्थियों को जागरूक किया गया। पुलिस ने छात्रों से अपील की कि वे यह जानकारी अपने परिवार और आसपास के लोगों तक भी पहुंचाएं, ताकि समाज में जागरूकता बढ़ सके। थाना प्रभारी कमला पुसाम ने बताया कि जिले में साइबर सुरक्षा, महिला एवं बाल सुरक्षा तथा सड़क सुरक्षा को लेकर जागरूकता अभियान लगातार चलाया जा रहा है, जिससे लोगों को अपराधों से बचाने और कानून के प्रति जागरूक करने में मदद मिल सके।

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छत्तीसगढ़ में 2027 से बदलेगा स्कूलों का शैक्षणिक सत्र, पहली कक्षा में प्रवेश के लिए न्यूनतम उम्र 6 वर्ष अनिवार्य

छत्तीसगढ़ सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप स्कूल शिक्षा व्यवस्था में अहम बदलाव करने का निर्णय लिया है। नए नियमों के अनुसार वर्ष 2027 से प्रदेश के सभी स्कूलों में पहली कक्षा में प्रवेश के लिए बच्चे की न्यूनतम आयु 6 वर्ष निर्धारित की गई है। इस संबंध में स्कूल शिक्षा विभाग ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए हैं। इसके साथ ही वर्ष 2027 से राज्य में नया शैक्षणिक सत्र 1 अप्रैल से शुरू होगा। पहले जहां स्कूल 16 जून से खुलते थे, वहीं अब अप्रैल के पहले दिन से प्रवेश प्रक्रिया और शैक्षणिक गतिविधियां शुरू हो जाएंगी। इस दौरान विद्यार्थियों को किताबें, यूनिफॉर्म और पात्र छात्रों को साइकिल भी उपलब्ध कराई जाएगी। इसके बाद 1 मई से 15 जून तक ग्रीष्मकालीन अवकाश रहेगा। शैक्षणिक सत्र में होगा बदलाव नई व्यवस्था के तहत पूरे प्रदेश में शैक्षणिक सत्र 1 अप्रैल से 31 मार्च तक संचालित होगा। यह प्रणाली केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के शैक्षणिक कैलेंडर के अनुरूप लागू की जाएगी, जिससे सीजी बोर्ड और सीबीएसई स्कूलों के बीच सत्र का अंतर समाप्त हो सके। बदलाव की वजह वर्तमान व्यवस्था में स्कूल जून के मध्य में खुलते हैं और शुरुआती कई सप्ताह तक प्रवेश, पुस्तक वितरण, यूनिफॉर्म और अन्य योजनाओं का लाभ देने की प्रक्रिया चलती रहती है। इससे नियमित पढ़ाई देर से शुरू होती है और कई स्कूलों में जुलाई तक पढ़ाई प्रभावित रहती है। शिक्षा विभाग का मानना है कि नए कैलेंडर से विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए अधिक समय मिलेगा, पाठ्यक्रम समय पर पूरा होगा और बोर्ड परीक्षाओं के परिणामों में भी सुधार देखने को मिलेगा। आयु सीमा में विशेष छूट यदि कोई बच्चा 1 अप्रैल तक निर्धारित 6 वर्ष की आयु पूरी नहीं करता, लेकिन 1 जुलाई तक उसकी आयु 6 वर्ष हो जाती है, तो उसे अधिकतम तीन महीने की विशेष छूट देकर पहली कक्षा में प्रवेश दिया जा सकेगा। सभी स्कूलों में लागू होगा नियम नई आयु सीमा और शैक्षणिक सत्र की व्यवस्था सरकारी, निजी तथा अनुदान प्राप्त सभी स्कूलों पर समान रूप से लागू होगी। शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम के तहत निजी स्कूलों में 25 प्रतिशत आरक्षित सीटों पर होने वाले प्रवेश भी इसी नियम के अनुसार किए जाएंगे। इन विद्यार्थियों को मिलेगी छूट जो छात्र किसी मान्यता प्राप्त विद्यालय की प्री-प्राइमरी या केजी शिक्षा पूरी करके पहली कक्षा में प्रवेश ले रहे हैं, उन पर नई आयु सीमा लागू नहीं होगी। ऐसे मामलों में विद्यालय द्वारा जारी टीसी, अंकसूची या स्कोर कार्ड में दर्ज जन्मतिथि के आधार पर प्रवेश दिया जाएगा। शिक्षा विभाग का उद्देश्य स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह के अनुसार इन बदलावों का उद्देश्य प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाना है। उनका कहना है कि नई व्यवस्था से विद्यार्थियों को समय पर किताबें और अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई जा सकेगी तथा सत्र की शुरुआत से ही नियमित पढ़ाई सुनिश्चित होगी।

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रायपुर में PHE ठेकेदारों का नीर भवन के बाहर प्रदर्शन, लंबित भुगतान को लेकर विभाग के खिलाफ नारेबाजी

रायपुर में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) विभाग के मुख्यालय नीर भवन के बाहर सोमवार को ठेकेदारों ने बकाया भुगतान की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। बारिश के बीच बड़ी संख्या में पहुंचे ठेकेदारों ने विभागीय अधिकारियों के खिलाफ नारेबाजी करते हुए जल्द भुगतान की मांग उठाई। प्रदर्शन कर रहे ठेकेदारों का कहना है कि उन्होंने विभाग के लिए ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पेयजल योजनाओं सहित कई निर्माण कार्य तय समय पर पूरे किए हैं, लेकिन लंबे समय से उनके बिलों का भुगतान नहीं किया जा रहा। कई बार अधिकारियों से मुलाकात और लिखित आवेदन देने के बावजूद केवल आश्वासन मिला, जबकि भुगतान अब तक लंबित है। ठेकेदारों का आरोप है कि भुगतान में देरी के कारण वे गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं। कर्मचारियों को समय पर वेतन देना, बैंक की किस्तें चुकाना, मशीनों का किराया और निर्माण सामग्री सप्लायर्स का बकाया भुगतान करना मुश्किल हो गया है। उनका कहना है कि कई छोटे और मध्यम ठेकेदार नए काम लेने की स्थिति में भी नहीं बचे हैं। प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए। यातायात प्रभावित न हो, इसके लिए सुभाष स्टेडियम से कटोरा तालाब जाने वाले मार्ग पर रूट डायवर्ट किया गया। इस संबंध में ट्रैफिक पुलिस ने पहले ही एडवाइजरी जारी कर दी थी और मौके पर अतिरिक्त पुलिस बल भी तैनात किया गया।

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स्कूलों में मंत्रोच्चार के खिलाफ याचिका खारिज, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सबूत के साथ दोबारा आने की दी छूट

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य के स्कूलों में मंत्रोच्चार कराए जाने से जुड़े सरकारी आदेश को चुनौती देने वाली याचिका फिलहाल खारिज कर दी है। अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है, जिससे यह साबित हो सके कि संबंधित आदेश का स्कूलों में वास्तव में पालन किया जा रहा है। यह याचिका पूर्व वक्फ बोर्ड अध्यक्ष अब्दुल सलमान रिज़वी की ओर से दायर की गई थी। याचिका में राज्य सरकार के आदेश को संविधान के विरुद्ध बताते हुए उसे निरस्त करने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता डॉ. अमीर खान के अनुसार, हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने कहा कि केवल आदेश जारी होने के आधार पर हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता। जब तक यह साबित न हो कि आदेश लागू किया जा रहा है, तब तक अदालत राहत देने का आधार नहीं मान सकती। हालांकि, अदालत ने याचिकाकर्ता को भविष्य में दोबारा याचिका दायर करने की अनुमति दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि किसी स्कूल में आदेश के पालन के ठोस साक्ष्य, जैसे वीडियो, फोटो या अन्य दस्तावेज उपलब्ध हों, तो उन्हें रिकॉर्ड के साथ नई याचिका दाखिल की जा सकती है। फिलहाल इस फैसले के बाद स्कूलों में मंत्रोच्चार से जुड़े सरकारी आदेश पर कानूनी रोक नहीं लगी है। हालांकि, यदि भविष्य में आदेश के क्रियान्वयन के प्रमाण सामने आते हैं, तो यह मामला फिर से न्यायालय के समक्ष लाया जा सकता है.

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रायपुर: NIT के पास 7 संस्थानों पर नगर निगम की कार्रवाई, गंदगी और सिंगल यूज प्लास्टिक मिलने पर ₹50 हजार का जुर्माना

रायपुर नगर पालिक निगम के जोन क्रमांक-7 ने स्वच्छता संबंधी मिली जनशिकायत पर त्वरित कार्रवाई करते हुए एनआईटी के आसपास स्थित सात संस्थानों का औचक निरीक्षण किया। जांच के दौरान कई जगहों पर गंदगी और प्रतिबंधित सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग पाए जाने पर संबंधित संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई की गई। नगर निगम आयुक्त संबित मिश्रा के निर्देश पर जोन-7 की जोन कमिश्नर डॉ. तृप्ति पाणीग्रही के मार्गदर्शन में यह अभियान चलाया गया। निरीक्षण के दौरान जोन स्वास्थ्य अधिकारी आत्मानंद साहू और स्वास्थ्य विभाग की टीम भी मौजूद रही। निरीक्षण में प्राप्त जनशिकायत सही पाए जाने के बाद सातों संस्थानों के संचालकों को भविष्य में स्वच्छता नियमों का पालन करने की सख्त चेतावनी दी गई। साथ ही नगर निगम ने सभी संस्थानों पर कुल 50 हजार रुपये का ई-चालान जारी किया। नगर निगम ने स्पष्ट किया है कि शहर में स्वच्छता बनाए रखने और सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध का सख्ती से पालन कराने के लिए ऐसे अभियान आगे भी लगातार जारी रहेंगे। नागरिकों से भी अपील की गई है कि वे स्वच्छता नियमों का पालन करें और सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी फैलाने से बचें।

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नकटी गांव में बुलडोजर कार्रवाई के बाद खुले आसमान तले गुजरी विस्थापितों की रात, सांसद के आश्वासन पर उठे सवाल

रायपुर के नकटी गांव में सोमवार तड़के हुई बुलडोजर कार्रवाई के बाद कई परिवारों को पूरी रात खुले आसमान के नीचे गुजारनी पड़ी। प्रभावित लोगों का आरोप है कि सुबह करीब 4 बजे पहले इलाके की बिजली बंद कर दी गई और उसके बाद प्रशासन ने मकानों को हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी। इस अभियान में करीब 80 घरों को ध्वस्त किया गया, जिससे महिलाएं, बुजुर्ग और छोटे बच्चे बेघर हो गए। देर रात कांग्रेस नेता विकास उपाध्याय प्रभावित परिवारों से मिलने पहुंचे। लोगों ने उन्हें बताया कि पुनर्वास के नाम पर बड़े परिवारों को केवल एक कमरा दिया जा रहा है। उनका कहना है कि जिन मकानों का आवंटन किया जा रहा है, वहां बिजली, पानी और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं भी पर्याप्त नहीं हैं, जिससे वहां रहना मुश्किल होगा। ग्रामीणों ने यह भी दावा किया कि दो दिन पहले वे रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल से मिले थे। उनका कहना है कि सांसद ने आश्वासन दिया था कि बारिश के मौसम में किसी भी घर को नहीं तोड़ा जाएगा और प्रशासन के साथ बातचीत कर समाधान निकाला जाएगा। कार्रवाई होने के बाद प्रभावित परिवारों ने इस आश्वासन पर सवाल उठाते हुए नाराजगी जताई। कार्रवाई के दौरान कई भावुक तस्वीरें सामने आईं। कोई अपने घर का सामान मलबे के बीच समेटता नजर आया तो कोई टूटे हुए मकान के पास परिवार के साथ बैठा रहा। कई लोग पूरे दिन अपने घरों के अवशेषों के पास ही डटे रहे। प्रशासन का कहना है कि प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अधिकारियों के अनुसार, नया रायपुर के सेक्टर-30 स्थित ईडब्ल्यूएस मकानों में विस्थापित परिवारों को बसाने के लिए आवंटन की कार्रवाई जारी है। इस पूरे मामले पर पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने बरसात से ठीक पहले की गई इस कार्रवाई को असंवेदनशील बताते हुए इसकी आलोचना की और सरकार के फैसले पर सवाल उठाए। वहीं कांग्रेस नेता विकास उपाध्याय ने आरोप लगाया कि विधायक आवास परियोजना के लिए 95 से अधिक परिवारों को बेघर किया गया है। उन्होंने कहा कि लोगों को पहले आश्वासन दिया गया था कि बारिश के दौरान कोई कार्रवाई नहीं होगी, लेकिन इसके बावजूद मकान तोड़ दिए गए। बुलडोजर कार्रवाई से प्रभावित बच्चों ने भी अपनी पीड़ा साझा की। उनका कहना था कि सुबह से घर में खाना नहीं बन पाया था और वे भूखे-प्यासे थे। इसी दौरान प्रशासन और पुलिस की टीम पहुंची और मकानों को तोड़ने की कार्रवाई शुरू कर दी। कार्रवाई के बीच एक ओर जहां लोगों के घर गिराए जा रहे थे, वहीं दूसरी ओर प्रशासन की ओर से मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों और प्रभावित लोगों को नाश्ते के पैकेट भी वितरित किए गए। पूरे घटनाक्रम के बाद नकटी गांव का माहौल देर रात तक तनावपूर्ण बना रहा।

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छत्तीसगढ़ में सिर्फ डायल-112 बनेगा इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबर, 100 से 1091 तक सभी सेवाएं होंगी एकीकृत

देशभर में आपातकालीन सेवाओं को अधिक सरल और प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। आने वाले समय में पुलिस, फायर ब्रिगेड, एंबुलेंस और अन्य सभी इमरजेंसी सेवाओं के लिए अलग-अलग हेल्पलाइन नंबरों की जगह केवल डायल-112 का इस्तेमाल किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को तीन महीने के भीतर 100, 101, 102, 108, 1033, 1091 समेत सभी आपातकालीन नंबरों को 112 में शामिल करने का निर्देश दिया है। साथ ही इस प्रक्रिया की प्रगति रिपोर्ट भी अदालत में प्रस्तुत करने को कहा गया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद छत्तीसगढ़ सरकार ने भी इस दिशा में तैयारी शुरू कर दी है। गृह विभाग के अधिकारियों ने हाल ही में बैठक कर सभी इमरजेंसी सेवाओं को एक ही प्लेटफॉर्म पर लाने की योजना पर चर्चा की। इसके लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जा रही है, ताकि सभी विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो सके। वर्तमान में प्रदेश में लगभग 400 डायल-112 वाहन और करीब 375 एंबुलेंस 108 सेवा के तहत संचालित हैं। अभी किसी मेडिकल आपात स्थिति की सूचना डायल-112 से 108 सेवा को भेजी जाती है, जबकि आग लगने जैसी घटनाओं की जानकारी अलग प्रणाली के माध्यम से फायर विभाग तक पहुंचती है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद सभी सूचनाएं एक ही सिस्टम के जरिए संबंधित विभाग तक पहुंचेंगी, जिससे प्रतिक्रिया का समय कम होगा और राहत कार्य तेजी से शुरू किया जा सकेगा। सुप्रीम कोर्ट ने 26 मई 2026 को सेव लाइफ फाउंडेशन बनाम भारत संघ मामले की सुनवाई के दौरान कहा था कि सड़क दुर्घटना के पीड़ितों को समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत जीवन के अधिकार का महत्वपूर्ण हिस्सा है। अदालत ने माना कि सहायता मिलने में देरी कई बार जानलेवा साबित होती है, इसलिए पूरे देश में एकीकृत आपातकालीन व्यवस्था आवश्यक है। छत्तीसगढ़ में डायल-112 सेवा की शुरुआत 15 अगस्त 2018 को “एक्के नंबर, सब्बो बर” अभियान के साथ हुई थी। बाद में इस सेवा का विस्तार राज्य के सभी 33 जिलों तक किया गया। वर्तमान में डायल-112 प्रतिदिन लगभग 10 हजार कॉल संभाल रहा है। 20 मई से 16 जून 2026 के बीच इस सेवा पर 3,06,264 कॉल प्राप्त हुईं, जिनमें 79,782 घटनाएं दर्ज की गईं। सुप्रीम Court ने अपने आदेश में यह भी निर्देश दिया है कि सड़क दुर्घटना के घायलों को कैशलेस इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई जाए, गुड सेमेरिटन कानून का प्रभावी पालन सुनिश्चित किया जाए, सभी एंबुलेंस में जीपीएस और व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग सिस्टम अनिवार्य हो, पैरामेडिकल कर्मचारियों को मानकीकृत प्रशिक्षण दिया जाए, ट्रॉमा सेंटरों की ग्रेडिंग की जाए और नई व्यवस्था की जानकारी लोगों तक पहुंचाने के लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाए।

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छत्तीसगढ़ में UCC लागू करने की तैयारी तेज, गोवा-उत्तराखंड मॉडल का होगा अध्ययन

छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की दिशा में राज्य सरकार ने प्रक्रिया तेज कर दी है। इसके लिए गठित उच्चस्तरीय समिति गोवा और उत्तराखंड में लागू यूसीसी के प्रावधानों का विस्तृत अध्ययन करेगी। साथ ही गुजरात, असम और मध्य प्रदेश में यूसीसी को लेकर बनी समितियों की रिपोर्ट और अनुभवों का भी विश्लेषण किया जाएगा, ताकि राज्य के लिए एक उपयुक्त मसौदा तैयार किया जा सके। समिति की अध्यक्षता पूर्व न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं। उनके साथ सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी शत्रुघ्न सिंह, एमके राउत, वरिष्ठ अधिवक्ता मोहन पवार और सेवानिवृत्त प्राचार्य ज्योति रानी सिंह सदस्य के रूप में शामिल हैं। अध्ययन के दौरान विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, संपत्ति के अधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े कानूनों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। गोवा और उत्तराखंड में लिव-इन संबंधों से जन्मे बच्चों को कानूनी अधिकार और संपत्ति में हिस्सेदारी देने जैसे प्रावधान मौजूद हैं। इन्हीं व्यवस्थाओं का मूल्यांकन कर छत्तीसगढ़ के लिए संभावित कानून तैयार किया जाएगा। राज्य में बड़ी आदिवासी आबादी को देखते हुए समिति यह भी जांच करेगी कि संविधान की पांचवीं और छठी अनुसूची के तहत संरक्षित जनजातीय परंपराओं, रीति-रिवाजों और प्रथागत कानूनों की सुरक्षा किस प्रकार सुनिश्चित की जा सकती है। उत्तराखंड की तरह छत्तीसगढ़ में भी अनुसूचित जनजातियों को यूसीसी के कुछ प्रावधानों से आंशिक या पूर्ण छूट देने की संभावना पर विचार किया जा सकता है। गोवा सिविल कोड के तहत पति-पत्नी को एक-दूसरे की संपत्ति में समान अधिकार प्राप्त हैं। तलाक की स्थिति में पत्नी को संपत्ति में बराबरी का हिस्सा मिल सकता है। माता-पिता की संपत्ति में बेटियों और बेटों को समान अधिकार दिए गए हैं। सामान्य रूप से एक से अधिक विवाह की अनुमति नहीं है, हालांकि हिंदू समुदाय से जुड़ा एक पुराना अपवाद कानून में मौजूद है, जिसे राज्य सरकार अब अप्रासंगिक मानती है और दशकों से इसका उपयोग नहीं हुआ है। वहीं उत्तराखंड यूसीसी कानून में सभी नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, गोद लेने और उत्तराधिकार संबंधी समान नियम बनाए गए हैं। बहुविवाह और एकतरफा तलाक पर रोक, विवाह का अनिवार्य पंजीकरण, लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीकरण, बेटा-बेटी को समान संपत्ति अधिकार और धर्मनिरपेक्ष गोद लेने की व्यवस्था इसके प्रमुख प्रावधान हैं। उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि संविधान निर्माताओं ने समान नागरिक संहिता का मार्ग पहले ही निर्धारित किया था और अब छत्तीसगढ़ भी उसी दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि समिति सभी वर्गों से चर्चा कर सुझावों के आधार पर मसौदा तैयार करेगी। दूसरी ओर, कांग्रेस ने इस पहल पर सवाल उठाए हैं। पूर्व मंत्री अमरजीत भगत का कहना है कि यूसीसी भारत जैसे विविधता वाले देश के लिए एक जटिल विषय है। उनके अनुसार यह सभी समुदायों के लिए समान रूप से उपयुक्त नहीं हो सकता और सरकार इसे राजनीतिक मुद्दे के रूप में आगे बढ़ा रही है।

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