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बिलासपुर में 50 ई-बसों के रूट पर जनता की राय लेगा निगम, यात्रियों के सुझाव से तय होगा नया रूट प्लान

बिलासपुर। प्रधानमंत्री ई-बस सेवा शुरू होने से पहले बिलासपुर में इलेक्ट्रिक बसों के रूट तय करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। शहर में चलने वाली 50 ई-बसों के संचालन को लेकर अब यात्रियों और आम नागरिकों से सुझाव मांगे जा रहे हैं, ताकि लोगों की जरूरत और आवागमन के आधार पर बेहतर रूट तैयार किया जा सके। बिलासपुर जिला अर्बन पब्लिक सर्विस सोसाइटी ने छात्र-छात्राओं, नौकरीपेशा लोगों, व्यापारियों और विभिन्न संस्थानों से जुड़े लोगों से राय मांगी है। अधिकारियों का कहना है कि जिन मार्गों पर रोजाना अधिक संख्या में लोगों का आना-जाना होता है, उन रूटों को प्राथमिकता दी जाएगी। ई-बसों के रूट तय करते समय विश्वविद्यालय, कॉलेज, स्कूल, औद्योगिक क्षेत्र, बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठान और सरकारी-निजी कार्यालयों को जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। आसपास के गांवों और कस्बों से रोज शहर आने वाले लोगों की सुविधा को भी इसमें शामिल किया जाएगा। प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के तहत बिलासपुर को 50 वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसों की मंजूरी मिली है। इनमें पहले चरण में 35 बसों का संचालन शुरू किया जाएगा, जबकि बाद में 15 और बसें चलाई जाएंगी। ई-बसों के संचालन के लिए कोनी में करीब 8 करोड़ रुपए की लागत से डिपो तैयार किया जा रहा है। डिपो में चार्जिंग स्टेशन, वर्कशॉप, सब-स्टेशन और अन्य सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। यहां 14 चार्जिंग पॉइंट बनाए जा रहे हैं, जहां एक साथ 14 बसों को चार्ज किया जा सकेगा। अधिकारियों के अनुसार, नागरिक अपने सुझाव ई-मेल के माध्यम से या नगर निगम के विकास भवन स्थित अर्बन पब्लिक सर्विस सोसाइटी के कक्ष क्रमांक-42 में जमा कर सकते हैं। प्राप्त सुझावों के आधार पर अंतिम रूट चार्ट तैयार किया जाएगा।

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रायपुर मेकाहारा अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में लगी आग, मरीजों को सुरक्षित स्थान पर किया गया शिफ्ट

रायपुर। राजधानी रायपुर के डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति अस्पताल (मेकाहारा) के मेडिसिन विभाग स्थित इमरजेंसी वार्ड में मंगलवार दोपहर अचानक आग लगने से अस्पताल में कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। घटना की जानकारी मिलते ही दमकल विभाग की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और काफी प्रयास के बाद आग पर नियंत्रण पा लिया गया। आग के कारण इमरजेंसी वार्ड में धुआं भर गया, जिसके चलते मरीजों और उनके परिजनों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। अस्पताल प्रबंधन, डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और सुरक्षा कर्मियों ने मिलकर राहत एवं बचाव कार्य को तेजी से अंजाम दिया, जिससे किसी बड़े हादसे को टाला जा सका। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, इमरजेंसी वार्ड में लगे एयर कंडीशनर (एसी) में तकनीकी खराबी आने या उसके फटने की वजह से आग लगने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, आग लगने के वास्तविक कारणों की पुष्टि अभी नहीं हुई है। पुलिस और संबंधित विभाग मामले की जांच कर रहे हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही आग लगने की सही वजह स्पष्ट हो सकेगी।

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रायपुर में स्मार्ट मीटर के विरोध में कांग्रेस का धरना, पुराने बिजली मीटर बहाल करने की उठी मांग

रायपुर में स्मार्ट बिजली मीटर के विरोध को लेकर कांग्रेस ने सोमवार को राजीव गांधी चौक (पुराना फायर ब्रिगेड) पर धरना-प्रदर्शन किया। सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक चले इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस ने मांग की कि जिन उपभोक्ताओं के यहां स्मार्ट मीटर लगाए गए हैं, वहां दोबारा पुराने बिजली मीटर लगाए जाएं। साथ ही नए स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने और बढ़े हुए बिजली बिलों की समीक्षा कर उनमें सुधार करने की भी मांग की गई। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद कई उपभोक्ताओं के बिजली बिल पहले की तुलना में अधिक आ रहे हैं, जिससे लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से उपभोक्ताओं की शिकायतों का समाधान करने और पूरी व्यवस्था की निष्पक्ष समीक्षा करने की मांग की। प्रदेश कांग्रेस के महामंत्री कन्हैया अग्रवाल ने कहा कि पार्टी लगातार स्मार्ट मीटर का विरोध कर रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। यह धरना पहले निर्धारित तिथि पर आयोजित होना था, लेकिन दिल्ली में छात्रों पर हुए लाठीचार्ज और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस के प्रदेशभर में हुए विरोध-प्रदर्शनों के कारण इसे स्थगित कर दिया गया था।

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रायपुर में अवैध कॉलोनी और बिना पार्किंग वाली बिल्डिंग की बनेगी लिस्ट, निगम करेगा कार्रवाई

शहर में अवैध निर्माण, अवैध प्लॉटिंग और बिना पार्किंग संचालित हो रहे व्यावसायिक परिसरों पर अब नगर निगम सख्त कार्रवाई की तैयारी कर रहा है। रायपुर नगर निगम आयुक्त संबित मिश्रा ने सभी जोन कमिश्नरों को अपने-अपने क्षेत्रों में सर्वे कर ऐसे मामलों को चिन्हित करने और नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। निगम की साप्ताहिक समीक्षा बैठक में आयुक्त ने अधिकारियों से कहा कि अवैध कॉलोनियों, अवैध निर्माण और नियमों का उल्लंघन करने वाली संपत्तियों की सूची तैयार की जाए। इसके साथ ही मुख्य सड़कों पर बिना पार्किंग सुविधा के चल रहे व्यावसायिक भवनों का सर्वे कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है। बड़े बकायेदारों पर होगी सीलबंदी और कुर्की बैठक में राजस्व वसूली की समीक्षा करते हुए आयुक्त ने अधिकारियों को बड़े बकायेदारों के खिलाफ सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि निर्धारित लक्ष्य के अनुसार टैक्स वसूली में तेजी लाई जाए और लंबे समय से बकाया राशि जमा नहीं करने वालों की संपत्तियों पर नियमानुसार कुर्की और सीलबंदी की कार्रवाई की जाए। आयुक्त ने बताया कि 30 सितंबर 2026 तक संपत्तिकर जमा करने वाले नागरिकों को 5 प्रतिशत छूट का लाभ दिया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक लोग समय पर कर जमा करें। अवैध नल कनेक्शन नियमित करने अभियान तेज नगर निगम क्षेत्र में अवैध नल कनेक्शनों को नियमित करने के अभियान को भी तेज करने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों को कहा गया है कि लोगों को योजना की जानकारी देकर ज्यादा से ज्यादा आवेदन प्राप्त किए जाएं और लंबित मामलों का जल्द समाधान किया जाए। रेन वाटर हार्वेस्टिंग पर रहेगा जोर ‘कैच द रेन’ अभियान के तहत सभी वार्डों में वर्षा जल संरक्षण को बढ़ावा देने के निर्देश दिए गए हैं। निगम आयुक्त ने अधिकारियों से ज्यादा से ज्यादा स्थानों पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लागू कराने और लोगों को इसके प्रति जागरूक करने को कहा। निर्माण नियम तोड़ने वालों पर जुर्माना बैठक में बिना ग्रीन नेट के निर्माण कार्य कराने, सड़क पर अतिक्रमण करने, कचरा फैलाने और सीएंडडी वेस्ट नियमों का उल्लंघन करने वालों पर लगातार कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। ऐसे मामलों में ई-चालान के माध्यम से जुर्माना लगाने को कहा गया है। जन शिकायतों का समय पर समाधान आयुक्त ने अधिकारियों को सीएम हेल्पलाइन, मुख्यमंत्री जनदर्शन, कलेक्टर कॉल सेंटर, निदान-1100 और जनप्रतिनिधियों से मिलने वाली शिकायतों का जल्द निराकरण करने के निर्देश दिए। इसके अलावा प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत अधूरे मकानों को जल्द पूरा कराने और बीएलसी घटक के पात्र हितग्राहियों के आवास निर्माण में तेजी लाने के निर्देश भी दिए गए।

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रायपुर के लोधी चौक में 5 दुकानों पर नगर निगम की कार्रवाई, गंदगी और सिंगल यूज प्लास्टिक मिलने पर लगाया जुर्माना

रायपुर: नगर पालिक निगम रायपुर के जोन क्रमांक-3 स्वास्थ्य विभाग ने स्वच्छता संबंधी जनशिकायत मिलने के बाद लोधीपारा स्थित वीरांगना अवंती बाई लोधी चौक से क्रिस्टल आर्केड तक स्थित पांच दुकानों का औचक निरीक्षण किया। यह कार्रवाई नगर निगम आयुक्त संबित मिश्रा के निर्देश और जोन-3 कमिश्नर प्रीति सिंह के मार्गदर्शन में की गई। निरीक्षण के दौरान कई दुकानों में प्रतिबंधित सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग पाया गया, जिसे मौके पर ही जब्त कर लिया गया। साथ ही दुकानों में डस्टबिन नहीं मिले और परिसर में गंदगी भी पाई गई। जनशिकायत सही मिलने पर जोन स्वास्थ्य अधिकारी पूरन कुमार तांडी ने संबंधित दुकानदारों के खिलाफ तत्काल ई-चालान की कार्रवाई की। कार्रवाई के तहत पंजाबस तड़का और रोल्स मानिया पर 5-5 हजार रुपये, कृष्णा स्वीट्स पर 3 हजार रुपये, मोहित खत्री पर 1500 रुपये तथा प्रशांत तिवारी अमृततुल्य चाय पर 500 रुपये का जुर्माना लगाया गया। नगर निगम ने सभी दुकानदारों को भविष्य में स्वच्छता नियमों का पालन करने की सख्त चेतावनी भी दी।

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एम्स रायपुर में लैब टेस्ट हुआ पूरी तरह पेपरलेस, अब बिना पर्ची सीधे सैंपल दे सकेंगे मरीज

एम्स रायपुर ने मरीजों की सुविधा बढ़ाने के लिए लैब टेस्ट की प्रक्रिया को पूरी तरह पेपरलेस कर दिया है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद अब ओपीडी में आने वाले मरीजों को लैब जांच के लिए प्रिंटेड पर्ची लेकर अलग-अलग काउंटरों पर जाने की जरूरत नहीं होगी। डॉक्टर जैसे ही कंप्यूटर सिस्टम में जांच लिखेंगे, उसकी जानकारी तुरंत लैब के सिस्टम तक पहुंच जाएगी। नई व्यवस्था के तहत मरीज सीधे डोम-1 स्थित फलेबोटोमी जोन पहुंचकर अपना रजिस्ट्रेशन कराएंगे। वहां बारकोड जनरेट होने के बाद ब्लड या अन्य आवश्यक सैंपल लिए जाएंगे। इससे जांच प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक तेज, आसान और सुविधाजनक हो जाएगी। फलेबोटोमी जोन अस्पताल का वह सैंपल कलेक्शन सेंटर होता है, जहां मरीजों के खून और अन्य लैब सैंपल एकत्र किए जाते हैं। एम्स प्रशासन का कहना है कि इस डिजिटल व्यवस्था से मरीजों को पर्ची खोने की चिंता नहीं रहेगी, इंतजार का समय कम होगा और पूरी प्रक्रिया अधिक सुरक्षित एवं व्यवस्थित बनेगी। साथ ही कागज की खपत कम होने से पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी। बच्चों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए डोम-1 में अलग से चाइल्ड-फ्रेंडली सैंपल कलेक्शन रूम तैयार किया गया है। इस कक्ष में ऑडियो-वीडियो की व्यवस्था की गई है, ताकि ब्लड सैंपल देते समय बच्चे सहज महसूस करें और उन्हें डर या घबराहट न हो। एम्स रायपुर के कार्यपालक निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल अशोक जिंदल ने कहा कि संस्थान मरीजों को बेहतर और सरल स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार डिजिटल तकनीक को अपनाने की दिशा में काम कर रहा है। वहीं मेडिकल सुपरिंटेंडेंट प्रो. (डॉ.) डी.के. त्रिपाठी के अनुसार, नई पेपरलेस व्यवस्था से प्रतिदिन आने वाले हजारों मरीजों को तेजी से सेवाएं मिलेंगी और अस्पताल की कार्यप्रणाली भी अधिक प्रभावी होगी। अस्पताल प्रशासन ने बताया कि यह नई व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है। अब ओपीडी के जिन मरीजों को लैब टेस्ट कराना होगा, वे सीधे डोम-1 फलेबोटोमी जोन पहुंचकर अपना सैंपल दे सकेंगे।

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रायपुर में 360 स्कूल बसों की जांच, 22 बसों में मिली सुरक्षा खामियां; 53 हजार रुपए का जुर्माना

राजधानी रायपुर में स्कूली बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए रविवार को पुलिस परेड ग्राउंड में स्कूल बसों का विशेष निरीक्षण अभियान चलाया गया। इस दौरान 38 स्कूलों की कुल 360 बसों की मैकेनिकल और दस्तावेजी जांच की गई। जांच के दौरान 22 बसों में सुरक्षा संबंधी विभिन्न खामियां पाई गईं, जिसके चलते संबंधित स्कूल प्रबंधन पर कुल 53 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया। साथ ही 15 दिनों के भीतर सभी कमियों को दूर करने के निर्देश दिए गए हैं। गौरतलब है कि स्कूलों को करीब दो महीने पहले ही बसों की जांच को लेकर नोटिस जारी किया गया था। इसके बावजूद कई बसें निर्धारित सुरक्षा मानकों पर खरी नहीं उतर सकीं। जांच के दौरान बसों के चालक और परिचालकों का स्वास्थ्य परीक्षण भी किया गया, जिसमें कई लोगों में उच्च रक्तचाप (बीपी), शुगर और कमजोर दृष्टि जैसी समस्याएं सामने आईं। अभियान के दौरान अग्निशमन विभाग की टीम ने चालक और परिचालकों को बस में आग लगने की स्थिति में बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालने और फायर एक्सटिंग्विशर के उपयोग का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया। अधिकारियों ने आपात स्थिति में त्वरित और सुरक्षित कार्रवाई के बारे में विस्तार से जानकारी दी। निरीक्षण के दौरान अधिकांश बसों में सीसीटीवी कैमरे, मेडिकल किट, फायर फाइटिंग सिस्टम और खिड़कियों पर सुरक्षा जाली जैसी सुविधाएं मौजूद मिलीं। हालांकि कुछ बसों में ऑटोमैटिक डोर लॉक की व्यवस्था नहीं थी। कई बसों के बीमा और फिटनेस से जुड़े दस्तावेज अधूरे पाए गए, जबकि कुछ चालकों के ड्राइविंग लाइसेंस की वैधता समाप्त हो चुकी थी। कुछ बसों के दरवाजे हाथ से बंद किए जा रहे थे और कई बसों की सीटें भी पुरानी हालत में मिलीं। स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान एक 62 वर्षीय चालक अपनी जगह परिचालक को जांच के लिए भेजकर बचने की कोशिश करता मिला। पूछताछ में उसने बताया कि वह बीपी और शुगर की दवाइयां ले रहा है। बाद में उसकी भी जांच की गई। स्वास्थ्य परीक्षण में 48 चालक-परिचालकों में बीपी और शुगर की समस्या तथा 22 चालकों की नजर कमजोर पाई गई। कई चालक जरूरत होने के बावजूद चश्मा नहीं पहन रहे थे। इससे पहले मई महीने में तीन दिन तक चले विशेष अभियान में 751 स्कूल बसों की जांच की गई थी, जिसमें 284 बसों में खामियां मिली थीं। स्कूलों को एक महीने के भीतर कमियां दूर करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद रविवार को दोबारा हुई जांच में 22 बसों में फिर से कमियां मिलने के बाद निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। यह भी सवाल उठ रहा है कि पहले जारी किए गए नोटिस के बाद सुधार कार्यों की निगरानी किस स्तर पर की गई। डीसीपी ट्रैफिक डॉ. अर्चना झा ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्कूली बच्चों की सुरक्षा के लिए जारी 16 बिंदुओं वाले दिशा-निर्देशों के आधार पर बसों की जांच की गई। उन्होंने कहा कि जीपीएस, सीसीटीवी कैमरा, स्पीड गवर्नर सहित सभी अनिवार्य सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने के लिए आगे भी ऐसे अभियान जारी रहेंगे।

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रायपुर के सरोना रेलवे स्टेशन का 13.57 करोड़ से कायाकल्प, मिलेंगी आधुनिक यात्री सुविधाएं

रायपुर के सरोना रेलवे स्टेशन का अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत पुनर्विकास किया गया है। करीब 13.57 करोड़ रुपये की लागत से स्टेशन को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया गया है। अब यह स्टेशन यात्रियों के लिए पहले से ज्यादा सुरक्षित और सुविधाजनक बनाया गया है। पुनर्विकास कार्य के तहत स्टेशन पर 95 वर्गमीटर का नया कॉन्कोर्स भवन तैयार किया गया है। वहीं यात्रियों और वाहनों की बेहतर आवाजाही के लिए स्टेशन के बाहर 1,912 वर्गमीटर का नया सर्कुलेटिंग एरिया विकसित किया गया है। यात्रियों की सुविधा को देखते हुए नया फुटओवर ब्रिज बनाया गया है। बुजुर्ग और दिव्यांग यात्रियों के लिए स्टेशन पर 2 नई लिफ्ट लगाई गई हैं। प्लेटफॉर्म पर शेल्टर की संख्या बढ़ाकर 3 से 7 कर दी गई है और करीब 2,800 वर्गमीटर प्लेटफॉर्म की नई सरफेसिंग की गई है। स्टेशन परिसर में यात्रियों के बैठने के लिए 189 नई बेंच और फर्नीचर लगाए गए हैं। इसके अलावा प्रतीक्षालय का नवीनीकरण किया गया है। स्थानीय कला और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए स्टेशन परिसर में आकर्षक चित्रकारी भी कराई गई है। यात्रियों की अन्य सुविधाओं के लिए 550 वर्गमीटर पार्किंग क्षेत्र, 10 किलोवाट क्षमता का सोलर प्लांट और ट्रेन की जानकारी देने के लिए 4 इंटीग्रेटेड पैसेंजर इंफॉर्मेशन सिस्टम लगाए गए हैं। रात के समय बेहतर रोशनी के लिए सोलर लाइट मास्ट भी स्थापित किए गए हैं। दिव्यांग यात्रियों के लिए रैंप, व्हीलचेयर सुविधा, दिव्यांग अनुकूल शौचालय, कम ऊंचाई वाले टिकट काउंटर और पेयजल जैसी व्यवस्थाएं विकसित की गई हैं। इसके साथ ही आधुनिक साइनेज, कोच गाइडेंस सिस्टम, बेहतर प्रकाश व्यवस्था और व्यवस्थित पार्किंग की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। रेलवे के अनुसार, अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत हुए इस विकास कार्य से सरोना रेलवे स्टेशन की तस्वीर बदलेगी और यात्रियों को अधिक आरामदायक, सुरक्षित और आधुनिक सुविधाएं मिल सकेंगी।

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रायपुर में E20 पेट्रोल से इंजन खराब होने पर बड़ा फैसला, मारुति सुजुकी को नई कार देने या 20.5 लाख लौटाने का आदेश

रायपुर के जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने E20 पेट्रोल से जुड़ी एक अहम शिकायत पर बड़ा फैसला सुनाया है। आयोग ने मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड और उसके अधिकृत डीलर को सेवा में कमी का दोषी मानते हुए ग्राहक को 45 दिनों के भीतर उसी मॉडल की E20-अनुकूल नई कार देने या फिर वाहन की पूरी कीमत 20.5 लाख रुपये लौटाने का आदेश दिया है। मामला किडनी रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रेमराज देबता से जुड़ा है, जिन्होंने 3 जून 2024 को मारुति की एक एसयूवी खरीदी थी। कुछ महीनों बाद वाहन में बार-बार तकनीकी खराबी आने लगी। शुरुआत में कंपनी ने ईंधन को दोषी बताते हुए फ्यूल टैंक साफ कर वाहन वापस कर दिया, लेकिन इसके बाद भी समस्या लगातार बनी रही। बताया गया कि वाहन कुल पांच बार वर्कशॉप पहुंचा। जांच के दौरान कई बार फ्यूल टैंक, पाइपलाइन और फिल्टर में सफेद परत और जेली जैसा पदार्थ मिला। बाद में इंजन चेतावनी संकेत आने लगे और आखिरकार वाहन पूरी तरह बंद हो गया। इसके बाद उपभोक्ता ने कंज्यूमर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के दौरान सरकारी मान्यता प्राप्त एसजीएस लैब से ईंधन की जांच कराई गई। रिपोर्ट में पेट्रोल में इथेनॉल की मौजूदगी की पुष्टि हुई। जांच में यह भी सामने आया कि ईंधन में इथेनॉल अलग होकर नीचे जमा हो गया था, जिससे उसका प्रभाव प्रभावित हुआ। आयोग ने माना कि संबंधित वाहन का इंजन E20 ईंधन के अनुरूप नहीं था, जबकि उपभोक्ता को ऐसा वाहन बेचा गया। आयोग ने आदेश दिया कि यदि कंपनी निर्धारित समय में नई E20-अनुकूल कार उपलब्ध नहीं कराती है, तो उसे वाहन की कीमत के साथ आरटीओ पंजीकरण, बीमा और अन्य खर्चों सहित पूरी राशि लौटानी होगी। इसके अलावा भुगतान होने तक 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज, मानसिक प्रताड़ना के लिए 1 लाख रुपये और मुकदमे के खर्च के रूप में 10 हजार रुपये भी देने होंगे। ऑटो विशेषज्ञों का कहना है कि इथेनॉल और पेट्रोल की संरचना अलग होने के कारण कुछ परिस्थितियों में ईंधन प्रणाली प्रभावित हो सकती है। हालांकि, हर इंजन खराबी के लिए केवल इथेनॉल को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। उनका मानना है कि देश में अभी भी कई वाहन पूरी तरह E20 ईंधन के अनुरूप विकसित नहीं हुए हैं, इसलिए ईंधन के साथ-साथ वाहनों की तकनीक को भी अपडेट करने की जरूरत है।

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रायपुर में बदले कचरा प्रबंधन के नियम: अब गीला-सूखा ही नहीं, 4 तरह का कचरा अलग करना होगा

राजधानी रायपुर में कचरा प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने के लिए नगर निगम ने सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स-2026 के तहत नई व्यवस्था लागू करने की शुरुआत कर दी है। इसके लिए जोन-1 की साम्राज्य और अनुग्रह रेसिडेंसी सोसायटियों को मॉडल के रूप में चुना गया है। यहां रहने वाले परिवारों को अब गीला, सूखा, सैनिटरी और विशेष देखभाल वाले कचरे को अलग-अलग करके ही नगर निगम की एजेंसी को देना होगा। नगर निगम के अनुसार, दोनों सोसायटियों में 200 से अधिक परिवार रहते हैं। स्वच्छता दीदियों और रामकी कंपनी के कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है ताकि वे घर-घर जाकर लोगों को नए नियमों की जानकारी दें। जागरूकता अभियान पूरा होने के बाद यदि कोई परिवार मिश्रित कचरा देगा तो उस पर जुर्माना लगाया जाएगा। जिन क्षेत्रों में कचरा वाहन सीधे नहीं पहुंच सकते, वहां ‘व्हील गैंग’ के माध्यम से कचरा एकत्र कर मुख्य वाहनों तक पहुंचाया जाएगा। नगर निगम 100 किलो से अधिक कचरा उत्पन्न करने वाले बल्क वेस्ट जनरेटरों का ऑनलाइन पंजीयन भी करा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि मॉडल सोसायटियों में सफलता मिलने के बाद यह चार-स्तरीय कचरा पृथक्करण व्यवस्था पूरे रायपुर में चरणबद्ध तरीके से लागू की जाएगी।

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