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छात्रों के स्क्रीन टाइम पर सख्ती: Karnataka सरकार का ड्राफ्ट—मनोरंजन के लिए रोज 1 घंटा, शाम 7 बजे बाद इंटरनेट बंद

Karnataka सरकार ने 9वीं से 12वीं कक्षा के छात्रों के डिजिटल उपयोग को नियंत्रित करने के लिए नई ड्राफ्ट पॉलिसी जारी की है। इसमें पढ़ाई के अलावा मनोरंजन के लिए स्क्रीन टाइम प्रतिदिन अधिकतम 1 घंटा रखने की सिफारिश की गई है। साथ ही शाम 7 बजे के बाद इंटरनेट बंद करने का सुझाव भी दिया गया है। प्रस्ताव में कहा गया है कि बच्चों को सोने से कम से कम एक घंटे पहले मोबाइल या स्क्रीन से दूर रखा जाए। मोबाइल में ‘चाइल्ड प्लान’ लागू करने की सलाह दी गई है, जिसमें सीमित इंटरनेट और ऑडियो-ओनली जैसे विकल्प शामिल होंगे। उम्र के अनुसार सुरक्षित डिवाइस और ऑपरेटिंग सिस्टम विकसित करने की भी बात कही गई है। सरकार का कहना है कि लगभग 25 प्रतिशत किशोर इंटरनेट की लत से प्रभावित हैं, जिससे नींद की कमी, चिंता और एकाग्रता में गिरावट जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। इसी को देखते हुए यह पहल की गई है। ड्राफ्ट के अनुसार स्कूलों में डिजिटल वेल-बीइंग, ऑनलाइन सुरक्षा, साइबर बुलिंग और प्राइवेसी जैसे विषय पढ़ाए जाएंगे। टेक-फ्री पीरियड, डिजिटल डिटॉक्स डे और व्हाट्सऐप की जगह डायरी के माध्यम से संवाद जैसे कदम भी सुझाए गए हैं। इसके अलावा स्कूलों में काउंसलिंग व्यवस्था मजबूत करने, शिक्षकों को डिजिटल लत के संकेत पहचानने की ट्रेनिंग देने और अभिभावकों की सक्रिय भूमिका तय करने पर भी जोर दिया गया है। AI के उपयोग पर भी अलग दिशा-निर्देश बनाने की बात कही गई है। यह ड्राफ्ट स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग और National Institute of Mental Health and Neurosciences सहित कई संस्थानों के सहयोग से तैयार किया गया है।

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म्यूनिसिपल स्कूल मैदान बना कचरा घर, घास खत्म; खिलाड़ियों को हो रही परेशानी

राजनांदगांव शहर के म्यूनिसिपल स्कूल मैदान की हालत लगातार खराब होती जा रही है। मैदान में जगह-जगह कचरा फैल गया है, जिससे न सिर्फ शहर की सुंदरता प्रभावित हो रही है बल्कि यहां अभ्यास करने वाले खिलाड़ियों को भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मैदान से लगे गांधी सभा गृह के पास लोग कचरा फेंक रहे हैं। इस कचरे में प्लास्टिक, पन्नी और कपड़े शामिल हैं, जिन्हें आवारा कुत्ते खींचकर मैदान तक ले आते हैं। परिणामस्वरूप पूरे मैदान में गंदगी फैल गई है। गांधी सभा गृह की ओर से मैदान में प्रवेश करने वाले रास्ते पर बड़ी मात्रा में पुराने कपड़े और कचरा बिखरा पड़ा है। लंबे समय से सफाई नहीं होने के कारण स्थिति और बदतर होती जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मैदान में घास भी लगभग खत्म हो चुकी है और नियमित सफाई नहीं होने से यहां खेलना मुश्किल हो गया है। नागरिकों ने प्रशासन से जल्द सफाई अभियान चलाकर मैदान को उपयोग योग्य बनाने की मांग की है। स्थानीय निवासी आशिष यादव ने बताया कि यदि समय रहते सफाई नहीं की गई तो मैदान पूरी तरह बेकार हो सकता है और बच्चों व खिलाड़ियों के लिए सुरक्षित स्थान नहीं बचेगा।

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12वीं का हिंदी पेपर रद्द, 10 अप्रैल को दोबारा परीक्षा; एग्जाम से 10 घंटे पहले हुआ था लीक

छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल ने कक्षा 12वीं की हिंदी विषय की परीक्षा को निरस्त कर दिया है। 14 मार्च 2026 को आयोजित यह परीक्षा अब अमान्य मानी जाएगी और छात्रों को 10 अप्रैल 2026 को दोबारा परीक्षा देनी होगी। बोर्ड के अनुसार सोशल मीडिया और कुछ समाचार माध्यमों में हिंदी प्रश्नपत्र के सेट ‘बी’ के लीक होने की जानकारी सामने आई थी। मामले को गंभीर मानते हुए इसकी जांच के लिए साइबर थाने को सूचना दी गई और सिटी कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराई गई। जांच रिपोर्ट पर विचार करने के बाद 23 मार्च 2026 को हुई परीक्षा समिति की बैठक में परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया गया। 10 अप्रैल को फिर होगी परीक्षा बोर्ड ने नई तारीख के साथ परीक्षा का समय भी तय कर दिया है। हिंदी विषय की परीक्षा 10 अप्रैल को सुबह 9:00 बजे से दोपहर 12:15 बजे तक आयोजित होगी। विद्यार्थियों को 9 बजे तक केंद्र पहुंचना अनिवार्य होगा। 9:05 बजे उत्तर पुस्तिका, 9:10 बजे प्रश्नपत्र और 9:15 बजे से लिखने की अनुमति दी जाएगी। बोर्ड ने छात्रों को नई समय-सारणी ध्यान से देखने और उसी अनुसार तैयारी करने की सलाह दी है। यह भी कहा गया है कि आवश्यकता पड़ने पर परीक्षा की तारीख या समय में बिना पूर्व सूचना बदलाव किया जा सकता है। यदि परीक्षा के दिन कोई अवकाश घोषित होता है, तब भी परीक्षा निर्धारित समय पर ही होगी। टेलीग्राम पर पहले ही पहुंच गया था पेपर जानकारी के मुताबिक 13 मार्च की रात करीब 11 बजे एक टेलीग्राम ग्रुप में “12th Board Hindi Paper — CG Board 2026 Real Question Paper” के नाम से एक तस्वीर साझा की गई थी। इस तस्वीर में हाथ से लिखे हुए 15 प्रश्न थे और पहले पेज पर सेट ‘B’ अंकित था। कुछ ही समय में यह इमेज हजारों छात्रों तक पहुंच गई। 14 मार्च को जब परीक्षा शुरू हुई तो सेट ‘B’ में वही प्रश्न और उसी क्रम में पूछे गए, जो वायरल तस्वीर में थे। यहां तक कि वैकल्पिक प्रश्न भी मेल खाते पाए गए। इससे स्पष्ट हुआ कि परीक्षा शुरू होने से लगभग 10 घंटे पहले ही पेपर लीक हो चुका था। कई विषयों के पेपर शेयर होने की आशंका जांच में यह भी सामने आया कि सिर्फ हिंदी ही नहीं, बल्कि अंग्रेजी और अन्य विषयों के प्रश्नपत्र भी इसी तरह अलग-अलग ग्रुपों में साझा किए गए थे। यह मामला किसी एक जिले तक सीमित नहीं बताया जा रहा है। साइबर पुलिस कर रही जांच पेपर लीक की शिकायत परीक्षा के दो दिन बाद पुलिस और साइबर थाने में दर्ज कराई गई। फिलहाल साइबर पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। बोर्ड अधिकारियों का कहना है कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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विधानसभा में बड़ा खुलासा: 665 खतरनाक अपशिष्ट फैलाने वाले उद्योग सक्रिय, OPS पर भी गरमाई बहस

प्रदेश में 665 खतरनाक उद्योगों का संचालन, 2.91 लाख कर्मचारियों ने चुना OPS — बजट सत्र के आखिरी दिन सदन में गूंजे कई बड़े मुद्दे विधानसभा के बजट सत्र के अंतिम दिन प्रश्नकाल के दौरान पर्यावरण, कर्मचारियों की पेंशन और स्वास्थ्य से जुड़े गंभीर मुद्दों पर तीखी बहस देखने को मिली। सरकार ने पहली बार खुलासा किया कि प्रदेश में सैकड़ों ऐसे उद्योग चल रहे हैं जो खतरनाक अपशिष्ट उत्पन्न करते हैं। साथ ही OPS बनाम NPS पर भी आंकड़े सामने आए, जिससे कर्मचारियों से जुड़े सवालों को नई दिशा मिली। ⚖️ पूरी खबर (विस्तार से) विधानसभा बजट सत्र के आखिरी दिन प्रश्नकाल में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सत्ता और विपक्ष आमने-सामने दिखाई दिए। नेता प्रतिपक्ष द्वारा प्रदेश में खतरनाक अपशिष्ट पैदा करने वाले उद्योगों की संख्या और नियंत्रण व्यवस्था पर सवाल उठाया गया। 665 खतरनाक अपशिष्ट उत्पन्न करने वाले उद्योग संचालित सरकार की ओर से जवाब देते हुए मंत्री ओपी चौधरी ने बताया कि प्रदेश में कुल 665 औद्योगिक इकाइयाँ ऐसी हैं जो खतरनाक अपशिष्ट उत्पन्न करती हैं। उन्होंने कहा कि इन उद्योगों की निगरानी के लिए कदम उठाए जा रहे हैं और अभी तक 19 उद्योगों में ऑनलाइन एमिशन मॉनिटरिंग सिस्टम लगाया गया है। यह सिस्टम उद्योगों द्वारा अपने खर्च पर स्थापित किया जाता है और प्रदूषण पर लगातार निगरानी रखी जाती है। 🌫️ इस मुद्दे पर सदन में हल्की नोकझोंक भी देखने को मिली, क्योंकि विपक्ष ने निगरानी व्यवस्था को पर्याप्त नहीं बताया। छातिम (सप्तपर्णी) वृक्ष पर रोक नहीं भाजपा विधायक द्वारा छातिम वृक्ष के दुष्प्रभावों को लेकर सवाल पूछा गया कि क्या इसके रोपण पर प्रतिबंध लगाया गया है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि: ➡️ छातिम वृक्ष के रोपण पर फिलहाल कोई रोक नहीं➡️ इसे हटाने की भी कोई योजना नहीं यह पेड़ अक्टूबर में फूलता है और इसकी तेज गंध व परागकण कई लोगों में एलर्जी और सांस की समस्या पैदा करते हैं। OPS बनाम NPS: 2.91 लाख कर्मचारियों ने चुना OPS सरकारी कर्मचारियों की पेंशन व्यवस्था भी चर्चा का प्रमुख विषय रही। सरकार ने बताया कि: ➡️ कुल 2,91,797 अधिकारी-कर्मचारियों ने NPS छोड़कर OPS का विकल्प चुना➡️ पेंशन योजना निर्धारित नियमों के अनुसार संचालित की जा रही है इस मुद्दे पर भी सदन में तीखी बहस हुई क्योंकि OPS वित्तीय बोझ से जुड़ा बड़ा विषय माना जाता है। छातिम (सप्तपर्णी) वृक्ष: फायदे और नुकसान संभावित नुकसान औषधीय महत्व निष्कर्ष बजट सत्र के अंतिम दिन सदन में पर्यावरण प्रदूषण, स्वास्थ्य, पेड़-पौधों के प्रभाव और कर्मचारियों की पेंशन जैसे जनहित के मुद्दे प्रमुख रूप से सामने आए। सरकार ने आंकड़े तो दिए, लेकिन कई सवाल अभी भी जवाब की प्रतीक्षा में हैं।

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मान्यता बिना CBSE पढ़ाई का खुलासा: बिलासपुर में पेरेंट्स के हंगामे के बाद जांच कमेटी गठित

Bilaspur में बिना आधिकारिक मान्यता के CBSE पैटर्न पर पढ़ाई कराने का मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने जांच के लिए कमेटी बना दी है। आरोप है कि कई स्कूलों ने खुद को Central Board of Secondary Education से संबद्ध बताकर बच्चों को पूरे साल उसी कोर्स से पढ़ाया, लेकिन परीक्षा के समय 5वीं और 8वीं के छात्रों को Chhattisgarh Board of Secondary Education की परीक्षा देने के लिए बाध्य किया गया। इस मुद्दे पर अभिभावकों में भारी नाराजगी है। उनका कहना है कि प्रवेश के समय स्कूलों ने CBSE स्कूल होने का दावा किया था, जिस भरोसे उन्होंने बच्चों का दाखिला कराया। अब अचानक राज्य बोर्ड की परीक्षा दिलाने से बच्चों का भविष्य प्रभावित हो सकता है। बताया जा रहा है कि Brilliant Public School और Narayana e‑Techno School सहित कुछ स्कूलों में केवल 8वीं तक कक्षाएं संचालित हैं। CBSE से संबद्धता के लिए 12वीं तक स्कूल चलाना जरूरी होता है, इसलिए इन संस्थानों को मान्यता नहीं मिली। इसके बावजूद CBSE पैटर्न से पढ़ाई कराई जा रही थी। जब छात्रों पर राज्य बोर्ड की परीक्षा देने का दबाव बनाया गया तो अभिभावकों ने विरोध शुरू कर दिया। उन्होंने स्कूल प्रबंधन के साथ कलेक्ट्रेट का भी घेराव किया और शिकायत उच्च स्तर तक पहुंचाई। मामले के बढ़ने पर शिक्षा विभाग ने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की है, जिसे 7 दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषी स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। साथ ही अभिभावकों को सलाह दी गई है कि किसी भी स्कूल में दाखिला लेने से पहले उसकी मान्यता और संबद्धता की आधिकारिक जांच जरूर करें।

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विदेश से ऑनलाइन MBBS करने वालों पर सख्ती: ऑफलाइन पढ़ाई पूरी किए बिना नहीं मिलेगा रजिस्ट्रेशन

Chhattisgarh के उन मेडिकल छात्रों के लिए बड़ी परेशानी की खबर है, जिन्होंने कोरोना काल में विदेशों से ऑनलाइन माध्यम से एमबीबीएस की पढ़ाई की थी। National Medical Commission (NMC) के नए निर्देश के अनुसार केवल ऑनलाइन पढ़ाई को मान्य नहीं माना जाएगा। अब ऐसे छात्रों को उसी देश में वापस जाकर ऑफलाइन कक्षाएं, क्लीनिकल ट्रेनिंग और प्रैक्टिकल पूरा करना अनिवार्य होगा, जहां से उन्होंने प्रवेश लिया था। रूस, यूक्रेन, किर्गिस्तान और कजाकिस्तान जैसे देशों में पढ़ रहे प्रदेश के लगभग 1800 छात्र इस नियम से प्रभावित होंगे। Chhattisgarh Medical Council ने भी स्पष्ट कर दिया है कि बिना वैध ऑफलाइन प्रशिक्षण प्रमाणपत्र के किसी को स्थायी पंजीयन नहीं दिया जाएगा। यदि कोई बिना रजिस्ट्रेशन के प्रैक्टिस करता पाया गया तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई और एफआईआर दर्ज की जा सकती है। NMC का कहना है कि मेडिकल शिक्षा में क्लीनिकल और प्रैक्टिकल प्रशिक्षण बेहद जरूरी होता है, जिसकी भरपाई ऑनलाइन कक्षाओं से संभव नहीं है। इसलिए जितनी अवधि ऑनलाइन पढ़ाई हुई है, उतनी अवधि तक ऑफलाइन ट्रेनिंग करना अनिवार्य होगा। राज्य में ऐसे सभी छात्रों की सूची तैयार की जा रही है और उन्हें विदेश जाकर पढ़ाई पूरी कर “कंपनसेशन सर्टिफिकेट” लाना होगा। इसके बिना स्टेट मेडिकल काउंसिल स्थायी रजिस्ट्रेशन नहीं देगी।

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सुल्तानपुर में आपदा मित्रों ने रखीं अहम मांगें

सुल्तानपुर में आपदा मित्र एसोसिएशन ने केंद्रीय गृह मंत्री और जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर अपनी सुविधाओं और अधिकारों से जुड़ी कई महत्वपूर्ण मांगें उठाई हैं। लगातार कर रहे हैं जोखिम भरा काम एसोसिएशन का कहना है कि वर्ष 2018 से आपदा मित्र प्रशासन के साथ मिलकर विभिन्न आपदा प्रबंधन कार्यों और बड़े आयोजनों में सेवा दे रहे हैं। इनमें कोरोना महामारी के दौरान राहत कार्य, माघ मेला और कुंभ मेला की ड्यूटी, गणतंत्र दिवस समारोह, प्रशिक्षण कार्यक्रम और मॉक ड्रिल जैसी जिम्मेदारियां शामिल हैं। पहले भी मिली हैं कुछ सुविधाएं सरकार की ओर से कुछ प्रोत्साहन दिए गए थे, जिनमें कुछ आपदा मित्रों को टैबलेट और वर्दी, होमगार्ड भर्ती में अतिरिक्त अंक, डीजी वॉकर प्रमाणपत्र, तीन वर्ष के लिए 5 लाख रुपये का जीवन व दुर्घटना बीमा तथा सड़क सुरक्षा कार्यों से जोड़ने का आश्वासन शामिल है। मुख्य मांगें बीमा और वेतनएसोसिएशन ने बीमा राशि 5 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये करने और सभी आपदा मित्रों के लिए 26,910 रुपये प्रति माह का न्यूनतम वेतन तय करने की मांग की है। सामाजिक सुरक्षास्वास्थ्य बीमा, पीएफ, वित्तीय सुरक्षा, सेवानिवृत्ति लाभ और व्यापक सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने की भी मांग की गई है। कर्मचारी का दर्जाआपदा मित्रों को सड़क सुरक्षा, अग्निशमन सेवाओं और विभिन्न सरकारी योजनाओं में नियमित कर्मचारी घोषित करने की मांग भी रखी गई है। अन्य सुविधाएंइसके अलावा स्वीकृत आपदा कार्यालयों में नियुक्ति, मानसून से पहले बीमा सक्रिय करना, बैंक केवाईसी कार्ड, ड्रेस किट, नियमित प्रशिक्षण और किए गए कार्यों का समय पर भुगतान सुनिश्चित करने की मांग की गई है। आपदा मित्रों का कहना है कि वे कठिन और जोखिम भरी परिस्थितियों में जनता की सुरक्षा के लिए काम करते हैं, इसलिए उन्हें स्थायी सुरक्षा, सम्मानजनक वेतन और आवश्यक सुविधाएं मिलनी चाहिए।

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यूपी बोर्ड की नई मार्कशीट 2026: न फटेगी, न पानी से खराब होगी, 16 सुरक्षा फीचर शामिल

उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UP Board) ने 2026 की परीक्षाओं के बाद जारी होने वाली मार्कशीट में बड़े बदलाव करने का फैसला किया है। 10वीं और 12वीं के लाखों छात्रों को इस बार पहले से ज्यादा सुरक्षित और टिकाऊ मार्कशीट मिलेगी। बोर्ड की परीक्षाएं 12 मार्च 2026 को समाप्त हो चुकी हैं और अब परिणाम के साथ नई तकनीक वाली मार्कशीट जारी की जाएगी। पानी और फटने से सुरक्षित नई मार्कशीट विशेष मजबूत सामग्री पर तैयार की जाएगी, जिससे यह आसानी से फटेगी नहीं और भीगने पर भी खराब नहीं होगी। इसका उद्देश्य दस्तावेज को लंबे समय तक सुरक्षित रखना है। 16 नए सुरक्षा फीचर इस बार मार्कशीट में करीब 16 प्रकार के सुरक्षा फीचर जोड़े जा रहे हैं। इनमें कुछ फीचर सामान्य तौर पर दिखाई देंगे, जबकि कुछ ऐसे होंगे जिन्हें केवल विशेष उपकरण या जांच के माध्यम से ही देखा जा सकेगा। इससे नकली मार्कशीट बनाना बेहद कठिन हो जाएगा। होलोग्राम और कोडिंग मार्कशीट पर विशेष होलोग्राम, कोडिंग और सुरक्षा चिह्न शामिल किए जाएंगे, जिससे उसकी सत्यता आसानी से जांची जा सकेगी। छेड़छाड़ करना होगा मुश्किल नई डिजाइन में ओवरराइटिंग या किसी भी तरह की फेरबदल की कोशिश तुरंत पकड़ में आ सकेगी। इससे फर्जी प्रमाण पत्र के मामलों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। बदलाव का उद्देश्य बोर्ड का मानना है कि नई व्यवस्था से छात्रों के दस्तावेज सुरक्षित रहेंगे और नौकरी, प्रवेश या अन्य प्रक्रियाओं में सत्यापन आसान होगा।

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आरटीई सीट निर्धारण में गड़बड़ी: अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में हिंदी के आधार पर भर दी सीटें, 11 अधिकारियों को नोटिस

राजधानी रायपुर में आरटीई (Right to Education) कोटे की सीटों को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। निजी स्कूलों में सीट निर्धारण प्रक्रिया में अनियमितता पाए जाने पर जिला शिक्षा अधिकारी ने 11 स्कूलों के नोडल अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। जांच में पाया गया कि कई स्कूलों में वास्तविक छात्र संख्या और माध्यम (हिंदी/अंग्रेजी) के अनुसार सीटें तय नहीं की गईं। कुछ स्कूल अंग्रेजी माध्यम के होने के बावजूद हिंदी माध्यम के आधार पर सीटें सुरक्षित कर दी गईं। क्या है मुख्य गड़बड़ी जिला शिक्षा कार्यालय के अनुसार, सीट प्रोटेक्शन प्रक्रिया में गलत आधार अपनाया गया। कई मामलों में छात्र संख्या कम या ज्यादा होने के बावजूद सीटें पुराने आंकड़ों के अनुसार भर दी गईं। बाद में समीक्षा के बाद संशोधित सूची जारी की गई और संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया। डीईओ हिमांशु भारतीय ने बताया कि जहां-जहां त्रुटियां मिली हैं, वहां जिम्मेदार अधिकारियों को नोटिस देकर जवाब तलब किया गया है। जिन क्षेत्रों के स्कूलों में मामला सामने आया मामला मंदिर हसौद, उरला, फुंडहर, रामनगर बस्ती, पारसदा, अमलीडीह और अन्य इलाकों के निजी स्कूलों से जुड़ा है। मंदिर हसौद और उरला क्षेत्र के कई स्कूलों में माध्यम के आधार पर गलत सीट निर्धारण पाया गया। सीट संख्या में भी बदलाव जांच के बाद कई स्कूलों में सीट संख्या भी बदली गई। उदाहरण के तौर पर कहीं 26 सीटों के स्थान पर 30, 86 के स्थान पर 89 और 12 के स्थान पर 13 सीटें तय की गईं। प्रमुख स्कूल जहां त्रुटियां मिलीं आरटीई सीटों को लेकर पहले से विवाद प्रदेश में आरटीई कोटे की सीटों की संख्या कम होने को लेकर पहले से ही अभिभावकों में नाराजगी बनी हुई है। ऐसे में सीट निर्धारण में गड़बड़ी का मामला सामने आने से विवाद और बढ़ सकता है।

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22,466 करोड़ का स्कूल शिक्षा बजट पास: पहली कक्षा से योग-वैदिक गणित, खेल पीरियड अनिवार्य, मार्कशीट डिजिटल

राज्य सरकार ने स्कूल शिक्षा विभाग के लिए 22,466 करोड़ रुपये का बजट पारित कर दिया है। विधानसभा में इसे ध्वनिमत से मंजूरी मिली। सरकार का कहना है कि यह बजट शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक, समावेशी और गुणवत्तापूर्ण बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने बताया कि अब सरकारी स्कूलों में पहली कक्षा से ही योग की पढ़ाई शुरू होगी और वैदिक गणित को भी पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा। इसके साथ ही हर स्कूल में अंतिम पीरियड खेल गतिविधियों के लिए अनिवार्य होगा। पीएम श्री योजना के तहत आधुनिक स्कूल पीएम श्री योजना के अंतर्गत स्कूलों को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा। इसके लिए बजट में 250 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा गया है। इन स्कूलों में स्मार्ट क्लास, डिजिटल लाइब्रेरी, आधुनिक लैब, खेल सुविधाएं, ग्रीन कैंपस और करियर काउंसिलिंग जैसी व्यवस्थाएं विकसित की जाएंगी। शिक्षकों को भी उच्च शिक्षण संस्थानों से प्रशिक्षण दिया जाएगा। 150 उत्कृष्ट विद्यालयों की स्थापना ग्रामीण क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने के लिए 150 स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट विद्यालय स्थापित किए जाएंगे। इसके लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। ये स्कूल प्रत्येक ब्लॉक के ग्रामीण इलाकों में संचालित होंगे। नवा रायपुर में बनेगा प्रशासनिक भवन नवा रायपुर में शिक्षा विभाग का आधुनिक प्रशासनिक कॉम्पोजिट भवन बनाया जाएगा। इसके लिए प्रारंभिक तौर पर 5.90 करोड़ रुपये रखे गए हैं। यहां लोक शिक्षण संचालनालय, समग्र शिक्षा, संस्कृत विद्या मंडल, मदरसा बोर्ड और माध्यमिक शिक्षा मंडल जैसे कार्यालय संचालित होंगे। दस्तावेज होंगे पूरी तरह डिजिटल छात्रों की मार्कशीट, ट्रांसफर सर्टिफिकेट (TC) और अन्य शैक्षणिक दस्तावेज ऑनलाइन उपलब्ध कराए जाएंगे। प्रत्येक दस्तावेज पर क्यूआर कोड और यूनिक आईडी होगी, जिससे उसकी डिजिटल सत्यता तुरंत जांची जा सकेगी। तीसरी कक्षा की परीक्षा टैबलेट पर देशभर में बुनियादी साक्षरता और गणना क्षमता मापने के लिए तीसरी कक्षा के छात्रों की परीक्षा अब टैबलेट पर ली जाएगी। पहले यह परीक्षा ओएमआर शीट पर होती थी। यह सर्वे सीबीएसई द्वारा कराया जा रहा है, जिसमें तकनीकी मार्गदर्शन एनसीईआरटी की इकाई परख दे रही है। इस अभियान में देश के 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लगभग 776 जिलों के 10 हजार से अधिक स्कूल और एक लाख से ज्यादा छात्र शामिल होंगे। स्कूलों के लिए निर्देश जिन स्कूलों का चयन किया गया है, उन्हें सर्वे की निर्धारित तारीख पर विद्यालय खुला रखना और छात्रों की उपस्थिति सुनिश्चित करना अनिवार्य होगा। सर्वे टीम को प्रशासनिक और तकनीकी सहयोग भी देना होगा।

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