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महिला दिवस पर उरला थाने में सम्मान समारोह, समाज सेवा में सक्रिय महिलाओं को किया सम्मानित

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर रायपुर के उरला थाना परिसर में विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में समाज और स्वास्थ्य सेवाओं में महत्वपूर्ण योगदान देने वाली महिलाओं को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के दौरान थाना प्रभारी रोहित मालेकर और एडिशनल डीएसपी आकाश मरकाम ने स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी दीदियों और मितानिन कार्यकर्ताओं को उनके सराहनीय कार्यों के लिए सम्मानित किया। सभी महिलाओं को बुके और ट्रॉफी देकर उनके योगदान की सराहना की गई। इस अवसर पर पुलिस अधिकारियों ने कहा कि मितानिन और स्वास्थ्य कार्यकर्ता समाज में लोगों की सेवा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उनका समर्पण और मेहनत समाज के लिए प्रेरणादायक है। कार्यक्रम में एडिशनल डीएसपी, आईपीएस अधिकारी और थाना प्रभारी की मौजूदगी रही। सम्मान मिलने के बाद सभी महिलाएं काफी खुश नजर आईं और उन्होंने अपने कार्य को और बेहतर तरीके से जारी रखने की बात कही।

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रायपुर में सरकारी भर्ती में डेटा प्राइवेसी पर सवाल: 31 आत्मानंद स्कूलों में 151 पदों के लिए गूगल फॉर्म का इस्तेमाल

रायपुर में शिक्षा विभाग द्वारा संविदा पदों पर भर्ती के लिए गूगल फॉर्म के माध्यम से आवेदन आमंत्रित किए जाने पर डेटा प्राइवेसी को लेकर सवाल उठने लगे हैं। स्वामी आत्मानंद इंग्लिश मीडियम स्कूलों में कुल 151 पदों पर भर्ती के लिए 31 स्कूलों में कलेक्टर कार्यालय से विज्ञापन जारी किया गया है। कौन-कौन से पदों पर भर्ती:इन पदों में व्याख्याता, प्रधानपाठक प्राथमिक शाला, शिक्षक, कम्प्यूटर शिक्षक, व्यायाम शिक्षक, सहायक शिक्षक, सहायक शिक्षक विज्ञान प्रयोगशाला, ग्रंथपाल, सहायक ग्रेड-3, भृत्य और चौकीदार शामिल हैं। चयन मेरिट के आधार पर किया जाएगा। डेटा प्राइवेसी पर उठ रहे सवाल:साइबर एक्सपर्ट मुकेश चौधरी के अनुसार, “यदि भर्ती प्रक्रिया में ऑनलाइन तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है तो यह अच्छा है, लेकिन सरकारी कामकाज में सरकारी सर्वर का ही उपयोग होना चाहिए। निजी प्लेटफॉर्म के माध्यम से अभ्यर्थियों का डेटा थर्ड पार्टी सर्वर पर जाने से प्राइवेसी का खतरा बनता है। हमारे देश के लोगों की जानकारी गूगल जैसी विदेशी कंपनियों के पास क्यों जाए?” सरकारी भर्ती में आमतौर पर NIC, राज्य पोर्टल और सरकारी डेटा सेंटर का उपयोग होता रहा है, लेकिन गूगल फॉर्म के माध्यम से आवेदन करने को लेकर तकनीकी और कानूनी सवाल खड़े हो रहे हैं। इस फॉर्म में अभ्यर्थियों का नाम, जन्मतिथि, शैक्षणिक योग्यता और संपर्क विवरण जैसी संवेदनशील जानकारी मांगी जा रही है। भर्ती प्रक्रिया का बयान:डीईओ हिमांशु भारतीय ने कहा कि गूगल फॉर्म पूरी तरह सुरक्षित हैं और डेटा चोरी का खतरा नहीं है। इसके माध्यम से मेरिट लिस्ट तैयार करना आसान हो जाता है और सभी प्रक्रिया पारदर्शिता के साथ पूरी की जाती है। आवेदन प्रक्रिया 20 फरवरी से शुरू होकर 20 मार्च दोपहर 12 बजे तक जारी रहेगी। इच्छुक अभ्यर्थी गूगल फॉर्म लिंक https://forms.gle/nHLLo6ERcgfAosmh9 से आवेदन कर सकते हैं। भर्ती से संबंधित पूरी जानकारी https://raipur.gov.in पर उपलब्ध है।

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आरटीई छात्रों से स्कूल में पुताई और मजदूरी कराने का आरोप, कलेक्टर से शिकायत

सूरजपुर जिले के तिलसिवां स्थित मुख्यमंत्री डीएवी पब्लिक स्कूल में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत पढ़ने वाले बच्चों से श्रम कार्य कराए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि स्कूल प्रबंधन ने गरीब छात्रों से परिसर में पुताई और निर्माण संबंधी काम करवाया। इस संबंध में अभिभावकों ने कलेक्टर जनदर्शन में पहुंचकर लिखित शिकायत दर्ज कराई है। बच्चों से कराए गए श्रम कार्य का आरोप अभिभावकों द्वारा दी गई शिकायत में कहा गया है कि आरटीई के अंतर्गत अध्ययनरत छात्रों से सीमेंट और रेत ढोने के साथ-साथ कक्षाओं की पुताई जैसे काम करवाए गए। परिजनों का आरोप है कि काम करने से मना करने पर बच्चों को स्कूल से निकालने और ट्रांसफर सर्टिफिकेट (टीसी) देने की धमकी दी गई। परिजनों का कहना है कि जब वे इस मामले में चर्चा करने स्कूल पहुंचे तो प्राचार्य ने उनके साथ उचित व्यवहार नहीं किया। शिकायत के मुताबिक, उन्हें यह कहा गया कि उनके बच्चों को बैग, किताबें और अन्य सुविधाएं मुफ्त मिल रही हैं, इसलिए वे सवाल न उठाएं। कक्षा को आवास के रूप में उपयोग करने का भी आरोप शिकायत में यह भी उल्लेख है कि प्राचार्य एक कक्षा का उपयोग अपने पति के साथ रहने के लिए कर रही हैं। अभिभावकों ने बच्चों के काम करते हुए फोटो और वीडियो साक्ष्य के रूप में प्रशासन को सौंपे हैं। मामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर ने जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) को तत्काल जांच के निर्देश दिए हैं। तीन सदस्यीय जांच समिति गठित जिला शिक्षा अधिकारी अजय मिश्रा ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है। समिति में सहायक संचालक योजना लता बेक को अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि बीईओ सूरजपुर हरेंद्र सिंह और सेजेस जयनगर की प्राचार्य पुष्पा राय को सदस्य नियुक्त किया गया है। समिति को सात दिनों के भीतर जांच पूरी कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। रिपोर्ट के आधार पर दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। प्राचार्य ने आरोपों से किया इनकार स्कूल की प्राचार्य विधु शर्मा ने सभी आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि शिकायत द्वेषवश की गई है और जांच में सच्चाई सामने आ जाएगी। उन्होंने जांच में पूरा सहयोग देने की बात कही है। प्रशासन अब जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है, जिसके बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

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CGPSC प्रीलिम्स 2026: पेपर ने बढ़ाई उलझन, कटऑफ घटने के संकेत; रायपुर में 4,500 से ज्यादा अभ्यर्थी अनुपस्थित

रायपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की राज्य सेवा प्रारंभिक परीक्षा 22 फरवरी को दो शिफ्ट में संपन्न हुई। परीक्षा 48 केंद्रों पर आयोजित की गई। इस बार प्रश्नपत्र का स्तर मॉडरेट से टफ के बीच रहा, जिससे अभ्यर्थियों में उलझन देखने को मिली। विशेषज्ञों के अनुसार कटऑफ में 5 से 10 अंकों तक गिरावट संभव है। उपस्थिति का आंकड़ा औसतन करीब 75% उपस्थिति रही, जबकि रायपुर में 4,500 से अधिक अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल नहीं हुए। कैसा रहा पेपर? सामान्य अध्ययन (GS-I) विशेषज्ञों के मुताबिक इस बार पेपर अपेक्षाकृत कठिन रहा। सी-सैट (GS-II) सी-सैट सामान्य स्तर का रहा। गणित और रीजनिंग आसान से मध्यम स्तर के थे। हिंदी और छत्तीसगढ़ी भाषा से 20 प्रश्न पूछे गए। नियमित अभ्यास करने वाले अभ्यर्थियों के लिए क्वालिफाई करना कठिन नहीं माना जा रहा। क्यों उलझा पेपर? इसी वजह से पेपर कठिन से ज्यादा “भ्रमित करने वाला” माना जा रहा है। कटऑफ पर क्या असर? विश्लेषण के अनुसार ओवरऑल 56 प्रश्न सरल, 18 मॉडरेट और 26 कठिन रहे। अनुमान है कि इस बार जनरल वर्ग की कटऑफ 105-110 अंकों के बीच जा सकती है, जो पिछले सालों की तुलना में कम है। 238 पदों पर होगी भर्ती इस भर्ती के माध्यम से राज्य की विभिन्न सेवाओं में कुल 238 पदों पर नियुक्ति होगी। प्रमुख पद इस प्रकार हैं: पिछले दशक में पदों की संख्या में उतार-चढ़ाव देखा गया है। 2015 में 352 पदों पर भर्ती हुई थी, जबकि कोविड काल में यह संख्या घटकर 170 के आसपास रह गई थी। इस वर्ष 238 पदों के साथ प्रक्रिया जारी है। सख्त ड्रेस कोड और नियम आयोग ने परीक्षा के दौरान सख्त ड्रेस कोड लागू किया। बिना वैध फोटो पहचान पत्र प्रवेश नहीं दिया गया। प्रवेश पत्र और आईडी में नाम अंतर होने पर शपथ पत्र अनिवार्य था। आगे की रणनीति विशेषज्ञों का मानना है कि परिणाम की प्रतीक्षा करने के बजाय अभ्यर्थियों को तुरंत मुख्य परीक्षा की तैयारी शुरू कर देनी चाहिए। पेपर के पैटर्न से संकेत मिलता है कि आयोग अवधारणात्मक समझ और सूक्ष्म तथ्यों दोनों पर जोर दे रहा है।

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रायपुर में निजी स्कूलों का बढ़ता दायरा: 10 में से 6 छात्र प्राइवेट संस्थानों में नामांकित

रायपुर। जिले की स्कूली शिक्षा व्यवस्था पर जारी 2026 की ताजा APAAR आईडी स्टेटस रिपोर्ट ने बड़ा संकेत दिया है। आंकड़ों के मुताबिक अब रायपुर में सरकारी स्कूलों की तुलना में निजी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की संख्या कहीं अधिक हो चुकी है। रिपोर्ट बताती है कि जिले में कुल 5,40,869 छात्र नामांकित हैं। इनमें से 2,22,265 छात्र सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में अध्ययनरत हैं, जबकि 3,18,604 छात्र निजी स्कूलों में दर्ज हैं। यानी करीब 96 हजार से अधिक छात्र निजी स्कूलों में ज्यादा हैं। सरल शब्दों में कहें तो रायपुर में हर 10 में से लगभग 6 बच्चे प्राइवेट स्कूलों में और 4 बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे हैं। राजधानी ब्लॉक में सबसे ज्यादा अंतर रायपुर शहरी ब्लॉक के आंकड़े सबसे अधिक चौंकाने वाले हैं। यहां कुल 2,34,828 छात्र नामांकित हैं, जिनमें से 1,73,825 छात्र निजी और मदरसा स्कूलों में पढ़ रहे हैं। जबकि केवल 61,003 छात्र सरकारी और एडेड स्कूलों में हैं। इसका अर्थ है कि राजधानी क्षेत्र में लगभग 70 से 80 प्रतिशत छात्र निजी संस्थानों की ओर रुख कर चुके हैं। धरसींवा जैसे औद्योगिक प्रभाव वाले क्षेत्रों में भी निजी स्कूलों की पकड़ मजबूत नजर आती है। ब्लॉकवार स्थिति सरकारी स्कूल अपेक्षाकृत मजबूत निजी स्कूलों का दबदबा यह ट्रेंड दर्शाता है कि ग्रामीण इलाकों में सरकारी स्कूल अब भी टिके हुए हैं, जबकि शहरी और औद्योगिक क्षेत्रों में निजी स्कूलों की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है। APAAR रिपोर्ट क्या है? APAAR (Automated Permanent Academic Account Registry) केंद्र सरकार की “वन नेशन, वन स्टूडेंट आईडी” पहल का हिस्सा है। इसके तहत हर छात्र को एक यूनिक डिजिटल आईडी प्रदान की जाती है, जो आधार सत्यापन से जुड़ी होती है। नामांकन, आधार वैलिडेशन और आईडी जनरेशन का पूरा डेटा डिजिटल डैशबोर्ड पर दर्ज किया जाता है। रिपोर्ट के अनुसार रायपुर जिले में 95.11% छात्रों की APAAR आईडी बन चुकी है, जो डिजिटल कवरेज के लिहाज से बेहतर स्थिति दर्शाती है। विशेषज्ञों की राय शिक्षाविदों का मानना है कि निजी स्कूलों में बढ़ती संख्या के पीछे कई सामाजिक और संरचनात्मक कारण हैं। अभिभावकों के बीच यह धारणा मजबूत हुई है कि निजी स्कूलों में अंग्रेजी माध्यम, अनुशासन और प्रतिस्पर्धी वातावरण बेहतर मिलता है। दूसरी ओर, सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी, अधोसंरचना की चुनौतियां और बार-बार तबादलों जैसी समस्याएं पढ़ाई की निरंतरता को प्रभावित करती हैं। आंकड़े क्या संकेत दे रहे हैं? APAAR रिपोर्ट के आंकड़े स्पष्ट संकेत देते हैं कि रायपुर में शिक्षा का संतुलन अब निजी संस्थानों की ओर झुक चुका है। आने वाले समय में सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि सरकारी स्कूलों में गुणवत्ता, आधारभूत सुविधाएं और अभिभावकों का विश्वास कैसे मजबूत किया जाए, ताकि नामांकन का अंतर कम हो सके।

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नया रायपुर: नाइजीरियाई छात्रों की अनुशासनहीन हरकतें, स्थानीय लोग परेशान

रायपुर। नया रायपुर के सेक्टर 30 में विदेशी मूल के नाइजीरियाई छात्रों की अनुशासनहीन हरकतों ने स्थानीय लोगों की जिंदगी मुश्किल कर दी है। क्षेत्रवासियों के मुताबिक, ये छात्र विभिन्न प्राइवेट यूनिवर्सिटी में पढ़ते हैं, लेकिन उनका व्यवहार अब रिहायशी इलाकों के लिए चिंता का विषय बन गया है। वायरल वीडियो में कैद हुई हरकतें हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें नाइजीरियाई युवक और युवती पार्किंग एरिया में अश्लील हरकतें करते दिख रहे हैं। स्थानीय लोग बताते हैं कि यह पहली बार नहीं हुआ; देर रात पब्लिक जगहों पर शोर-शराबा और अनुशासनहीन गतिविधियां आम हो गई हैं। स्थानीय लोग परेशान स्थानीय निवासियों का कहना है कि जब वे इन हरकतों पर विरोध करते हैं, तो छात्र अक्सर मारपीट पर उतर आते हैं। लोगों की शिकायत है कि पुलिस और प्रशासन को इस ओर ध्यान देने की आवश्यकता है ताकि सार्वजनिक स्थान सुरक्षित और शांति पूर्ण बने। प्रशासनिक कदम की मांग विरोध और विवाद बढ़ने के कारण इलाके के नागरिक प्रशासन और यूनिवर्सिटी अधिकारियों से कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। क्षेत्र में सुरक्षा और अनुशासन सुनिश्चित करने के लिए निगरानी बढ़ाने की जरूरत है।

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रायपुर में NEET अभ्यर्थी की आत्महत्या, भांठागांव की अवधपुरी कॉलोनी में घटना

रायपुर। राजधानी के भांठागांव स्थित अवधपुरी कॉलोनी में रविवार को एक नीट अभ्यर्थी ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। मृतक की पहचान रायगढ़ जिले के रहने वाले पुष्पेंद्र पटेल के रूप में हुई है। मामला Raipur के पुरानी बस्ती थाना क्षेत्र का है। पुलिस से मिली प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, छात्र भांठागांव में किराए के मकान में रहकर मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET की तैयारी कर रहा था। बताया जा रहा है कि उसने मकान की दूसरी मंजिल से गले में जीआई तार बांधकर छलांग लगा दी, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। मौके पर पहुंची पुलिस, जांच जारी घटना की सूचना मिलते ही पुरानी बस्ती थाना पुलिस मौके पर पहुंची। शव को नीचे उतारकर पंचनामा कार्रवाई की गई और पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया। कमरे की तलाशी ली गई है और कुछ सामान जब्त किया गया है। परिजनों को दी गई सूचना पुलिस ने मृतक के परिजनों को घटना की जानकारी दे दी है। आसपास के लोगों और परिचितों से पूछताछ की जा रही है। फिलहाल आत्महत्या के कारणों का स्पष्ट खुलासा नहीं हो सका है, हालांकि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि छात्र प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी को लेकर मानसिक दबाव में था। पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है।

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खरोरा के पीएम श्री भरत देवांगन हाई स्कूल में पेड़ों की कटाई पर बवाल, कार्रवाई की मांग तेज

खरोरा स्थित पीएम श्री भरत देवांगन हाई स्कूल में बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। इस मामले में शाला प्रबंधन समिति के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठी है। शिकायतकर्ताओं ने आरटीआई आवेदन के साथ एसडीएम, कलेक्टर और वन विभाग को लिखित ज्ञापन सौंपकर जांच की मांग की है। 20 से अधिक पेड़ काटे जाने का आरोप पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष और सांसद प्रतिनिधि अनिल सोनी ने आरोप लगाया है कि स्कूल परिसर में सागौन, शीशम और खम्हार समेत 20 से ज्यादा पेड़ बिना संबंधित विभाग की अनुमति के कटवा दिए गए। उनका कहना है कि पेड़ों की कटाई किस आधार पर की गई और काटी गई लकड़ी का उपयोग कहां हुआ, इसकी कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। प्रबंधन की ओर से भी अब तक आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है। ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान का जिक्र अनिल सोनी ने कहा कि एक ओर प्रधानमंत्री ‘एक पेड़ मां के नाम’ जैसा संदेश देकर पर्यावरण संरक्षण की अपील कर रहे हैं, वहीं उनके नाम से संचालित पीएम श्री स्कूल में पेड़ों की कटाई होना गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने खरोरा के पटवारी पर भी प्रक्रिया में लापरवाही का आरोप लगाया। उनका कहना है कि पंचनामा के दौरान दोनों पक्षों की उपस्थिति आवश्यक होती है, लेकिन उन्हें सूचना नहीं दी गई। इस संबंध में उन्होंने उच्च अधिकारियों से शिकायत करने की बात कही है। पटवारी ने मानी चूक पटवारी हरिशंकर निषाद ने बताया कि तहसीलदार के निर्देश पर त्वरित कार्रवाई करनी पड़ी। उन्होंने स्वीकार किया कि एक पक्ष को फोन पर सूचना दी गई, लेकिन जल्दबाजी के कारण दूसरे पक्ष को सूचित नहीं किया जा सका। शाला समिति ने दिया जवाब शाला विधायक प्रतिनिधि और शाला विकास समिति के सदस्य सुमित सेन ने कहा कि मामला जांच के अधीन है और जांच पूरी होने के बाद ही सच्चाई सामने आएगी। वहीं शाला समिति अध्यक्ष नरेंद्र ठाकुर ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि परिसर में छातिम के पेड़ थे, जिनसे स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों की आशंका थी। छात्रों के हित और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उन्हें हटाया गया। उन्होंने यह भी बताया कि बाउंड्री वॉल के पास लगे पेड़ों की पत्तियां छत पर गिरकर पानी जमा कर देती थीं, जिससे भवन को नुकसान हो रहा था और पढ़ाई प्रभावित हो रही थी। स्कूल के विकास और सुरक्षा के मद्देनजर यह निर्णय लिया गया।

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आज से शुरू हुई छत्तीसगढ़ बोर्ड 12वीं की परीक्षा, नए पैटर्न में बढ़े MCQ

छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा आयोजित हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी बोर्ड परीक्षाओं की शुरुआत आज 20 फरवरी से हो गई है। परंपरा के अनुसार इस बार भी परीक्षा का आगाज़ 12वीं कक्षा से किया गया है। खास बात यह है कि इस वर्ष परीक्षाएं निर्धारित समय से करीब 10 दिन पहले शुरू की गई हैं। नई शिक्षा नीति लागू होने के बाद 10वीं और 12वीं कक्षाओं के लिए नया ब्लू प्रिंट तैयार किया गया है। इसी के अनुरूप प्रश्नपत्र तैयार किए गए हैं। इस बार प्रश्नपत्र में बहुविकल्पीय (MCQ) और अति लघु उत्तरीय प्रश्नों की संख्या बढ़ाई गई है। बोर्ड का उद्देश्य छात्रों की रटने की बजाय उनकी अवधारणात्मक समझ का मूल्यांकन करना है। CBSE पैटर्न पर आधारित प्रश्नपत्र माध्यमिक शिक्षा मंडल ने इस साल परीक्षा तिथियां भी CBSE की तर्ज पर पहले घोषित की हैं। नए पैटर्न में वस्तुनिष्ठ और छोटे उत्तर वाले प्रश्नों का प्रतिशत बढ़ाया गया है, जिससे विद्यार्थियों की विषय समझ और विश्लेषण क्षमता को परखा जा सके। 12वीं कक्षा की पहली परीक्षा भूगोल और भौतिक शास्त्र विषय से शुरू हुई। परीक्षा को शांतिपूर्ण और पारदर्शी तरीके से संपन्न कराने के लिए सभी केंद्राध्यक्षों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। नकल रोकने के लिए विशेष इंतजाम परीक्षा में अनुचित साधनों के उपयोग को रोकने के लिए मंडल ने सख्त व्यवस्था की है। सभी जिलों के कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारियों को विशेष निर्देश दिए गए हैं। जिला और विकासखंड स्तर पर उड़नदस्तों का गठन किया गया है, जो परीक्षा केंद्रों की निगरानी करेंगे। 5.46 लाख से अधिक विद्यार्थी होंगे शामिल इस वर्ष 10वीं और 12वीं मिलाकर कुल 5,46,430 विद्यार्थियों ने पंजीकरण कराया है। 12वीं कक्षा के प्रमुख आंकड़े इस प्रकार हैं: इस बार विद्यार्थियों की संख्या में वृद्धि दर्ज की गई है। जिला स्तर पर रायपुर सबसे आगे है, जहां से 12वीं कक्षा के लिए 21,473 विद्यार्थियों ने पंजीकरण कराया है।

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रायपुर में मजबूत पब्लिक ट्रांसपोर्ट की मांग तेज, 350 सिटी बसें और मेट्रो जैसी सुविधा पर जोर

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में तेजी से बढ़ती आबादी और शहर के विस्तार के बीच बेहतर पब्लिक ट्रांसपोर्ट की जरूरत एक बार फिर प्रमुख मुद्दा बन गई है। शहर में सस्ती, सुलभ और नियमित बस सेवा नहीं होने से आम लोगों को रोजाना परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसी विषय को लेकर आयोजित फोकस ग्रुप डिस्कशन (FGD) में शहर के जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने खुलकर अपनी बात रखी। सभी का मानना है कि जब तक मजबूत और भरोसेमंद पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम विकसित नहीं होगा, तब तक ट्रैफिक और महंगे निजी साधनों पर निर्भरता कम नहीं होगी। 350 सिटी बसों की जरूरत पूर्व महापौर और वर्तमान विधायक सुनील सोनी ने कहा कि शहर में कम से कम 350 सिटी बसें अलग-अलग रूटों पर संचालित होनी चाहिए। उन्होंने नवा रायपुर (एससीआर) तक सुगम आवागमन की कमी पर चिंता जताई। उनका कहना है कि आम नागरिक को अपनी बात रखने के लिए भी नवा रायपुर जाने में 500 रुपए तक खर्च करने पड़ते हैं, जो अतिरिक्त आर्थिक बोझ है। उन्होंने सुझाव दिया कि प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल के तहत बस संचालन शुरू किया जा सकता है, जिससे फंडिंग में देरी न हो और बेहतर परिणाम मिल सकें। मिनी बसों और लंबी दूरी के रूट पर फोकस रायपुर उत्तर विधायक पुरंदर मिश्रा ने शहर के आंतरिक इलाकों के लिए मिनी सिटी बसों की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि 2008 में 40 बसों से शुरू हुई सेवा एक समय 100 बसों तक पहुंची थी, लेकिन कोरोना काल के बाद व्यवस्था चरमरा गई। ग्रामीण विधायक मोतीलाल साहू का कहना है कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट को शहर की “संस्कृति” का हिस्सा बनाना होगा। लंबी दूरी के रूटों पर नियमित बसें चलेंगी तो लोगों का भरोसा बढ़ेगा। माना, सेजबहार जैसे इलाकों में भी मांग बढ़ रही है। ट्रैफिक जाम से मिलेगी राहत रायपुर पश्चिम विधायक राजेश मूणत ने कहा कि कई जगह बस स्टॉप तो बने हैं, लेकिन बसें नहीं चल रहीं। ई-बसों के संचालन की प्रक्रिया जारी है। उनका मानना है कि सिटी बसों के नियमित संचालन से ट्रैफिक जाम की समस्या कम होगी और लोग निजी वाहनों के बजाय सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता देंगे। निगम और परिवहन विभाग की जिम्मेदारी मेयर मीनल चौबे ने कहा कि पूर्व की व्यवस्थाओं में मेंटेनेंस और प्लानिंग की कमी रही, जिसके कारण सेवा प्रभावित हुई। वहीं नगर निगम नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने सरकार से ठोस पहल की मांग की। परिवहन उपायुक्त कृष्णा पटेल के अनुसार 30 सिटी बसों के लिए परमिट जारी किए गए हैं, लेकिन संचालन की जिम्मेदारी नगर निगम की है। ऑटो और ई-रिक्शा के किराए तय हैं, उल्लंघन पर शिकायत की जा सकती है। 100 पीएम ई-बसें और नया डिपो शहर में पब्लिक ट्रांसपोर्ट को मजबूत करने के लिए पीएम ई-बस योजना के तहत 100 इलेक्ट्रिक बसें प्रस्तावित हैं। जरवाय क्षेत्र में लगभग 2 हेक्टेयर भूमि पर डिपो निर्माण कार्य जारी है, जो करीब 4 महीने में पूरा होने की संभावना है। इसके लिए आवश्यक विद्युत इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जा रहा है। सस्ती और भरोसेमंद सेवा ही समाधान जनप्रतिनिधियों का मानना है कि अगर नागरिकों को 10-20 रुपए में समय पर बस सुविधा मिलेगी तो उनका भरोसा बढ़ेगा। मजबूत पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम न केवल ट्रैफिक और प्रदूषण कम करेगा, बल्कि शहर की समग्र छवि भी बदलेगा।

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