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1600 आदिवासी शिक्षक पदों की नियुक्ति को लेकर डीएड अभ्यर्थियों का आंदोलन तेज, राष्ट्रपति-प्रधानमंत्री को भेजे हजारों पत्र

रायपुर। छत्तीसगढ़ में सहायक शिक्षक भर्ती 2023 के अंतर्गत रिक्त पड़े 1600 अनुसूचित जनजाति (ST) पदों पर नियुक्ति की मांग को लेकर डीएड अभ्यर्थियों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। पीड़ित अभ्यर्थियों ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल रामेन डेका, मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री को स्पीड पोस्ट के माध्यम से हजारों पत्र भेजकर मामले में तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है। नियुक्ति नहीं होने से नाराज अभ्यर्थी आमरण अनशन पर अभ्यर्थियों का कहना है कि न्यायालयों के स्पष्ट आदेशों के बावजूद अब तक नियुक्ति प्रक्रिया पूरी नहीं की गई है। इससे आक्रोशित अभ्यर्थी और उनके परिजन 24 सितंबर से अनिश्चितकालीन आमरण अनशन पर बैठे हुए हैं। 2300 पदों में 1600 ST, फिर भी नियुक्ति शून्य प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों के अनुसार, सहायक शिक्षक भर्ती 2023 में कुल 2300 पद घोषित किए गए थे, जिनमें से करीब 1600 पद अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित थे। इसके बावजूद आज तक इन पदों पर नियुक्ति नहीं हो पाई है।आदिवासी समाज का आरोप है कि यह स्थिति तब बनी हुई है, जब राज्य में आदिवासी मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली सरकार है। कोर्ट के आदेशों की अनदेखी का आरोप आंदोलनरत अभ्यर्थियों का दावा है कि अनशन के दौरान बिगड़ी 200 से अधिक युवाओं की तबीयत आदिवासी अभ्यर्थियों का आमरण अनशन अब गंभीर स्थिति में पहुंच गया है। आंदोलन के दौरान 200 से अधिक युवाओं की तबीयत बिगड़ चुकी है, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। कई अभ्यर्थियों की हालत चिंताजनक बताई जा रही है। आदिवासी परिवारों पर बढ़ा सामाजिक-आर्थिक दबाव आदिवासी संगठनों का कहना है कि वर्षों की पढ़ाई, प्रशिक्षण और पात्रता के बावजूद युवाओं को रोजगार से वंचित रखा जा रहा है। इससे आदिवासी परिवार गहरे सामाजिक और आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगें आंदोलन और तेज करने की चेतावनी अभ्यर्थियों और आदिवासी संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और व्यापक व उग्र रूप दिया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

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कक्षा 1 से 11वीं तक की परीक्षाओं की जिम्मेदारी अब DEO के हाथों में, निजी स्कूलों ने जताया विरोध

छत्तीसगढ़ में बोर्ड परीक्षाओं के बाद अब कक्षा 1 से 11वीं तक की वार्षिक परीक्षाओं के संचालन की जिम्मेदारी भी जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) को सौंपी गई है। लोक शिक्षण संचालनालय ने इस संबंध में औपचारिक आदेश जारी कर दिया है, जो सत्र 2025-26 से लागू होगा। जारी निर्देशों के अनुसार, वार्षिक परीक्षाओं से जुड़ी पूरी प्रक्रिया—प्रश्नपत्र निर्माण, मॉडरेशन, मूल्यांकन और परिणाम घोषणा—अब DEO की निगरानी में संपन्न होगी। यह नई व्यवस्था केवल सरकारी स्कूलों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि अनुदान प्राप्त, अशासकीय और स्वामी आत्मानंद विद्यालयों पर भी लागू होगी। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि परीक्षा संचालन के लिए जिला स्तर पर संचालन समिति, प्रश्नपत्र निर्माण समिति और मॉडरेशन समिति का गठन किया जाएगा। कक्षा 1 से 11वीं तक की वार्षिक परीक्षाएं 25 मार्च से 10 अप्रैल 2026 के बीच आयोजित होंगी, जबकि सभी स्कूलों को 30 अप्रैल तक परीक्षा परिणाम घोषित करने के निर्देश दिए गए हैं। निजी स्कूल संगठनों का विरोध तेज इस फैसले को लेकर छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने कड़ा ऐतराज जताया है। एसोसिएशन का कहना है कि निजी स्कूलों की आंतरिक परीक्षा प्रणाली में सरकारी नियंत्रण उनकी स्वायत्तता को कमजोर करता है। साथ ही, शैक्षणिक सत्र के अंतिम चरण में नियमों में बदलाव करना व्यवहारिक नहीं है। एसोसिएशन पदाधिकारियों का आरोप है कि इस निर्णय से निजी स्कूलों की पहले से तय अकादमिक योजना प्रभावित होगी। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि तीन दिनों के भीतर आदेश में संशोधन नहीं किया गया, तो प्रदेशभर के निजी स्कूल विरोध प्रदर्शन और आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे। इस संबंध में स्कूल शिक्षा मंत्री और विभागीय अधिकारियों से मुलाकात कर मांग रखने की भी बात कही गई है। नए आदेश की मुख्य बातें

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कमिश्नरी सिस्टम के बाद रायपुर पुलिस का बड़ा एक्शन, अपराधियों को CSP ऑफिस में सख्त चेतावनी

रायपुर।रायपुर में कमिश्नरी सिस्टम लागू होने के बाद पुलिस ने अपराध नियंत्रण को लेकर सख्ती बढ़ा दी है। इसी कड़ी में आज खमतराई CSP कार्यालय में आदतन अपराधियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की गई। डिप्टी कमिश्नर मयंक गुज्जर के निर्देश पर खमतराई, उरला और गुढ़ियारी थाना क्षेत्र के आदतन अपराधियों को खमतराई CSP ऑफिस में पेश किया गया। इस दौरान CSP पूर्णिमा लामा, उरला थाना प्रभारी रोहित मालेकर, गुढ़ियारी थाना प्रभारी बी.एल. चंद्राकर और खमतराई थाना प्रभारी राजेश सिंह मौजूद रहे। खमतराई, उरला और गुढ़ियारी थाना क्षेत्र के आदतन अपराधियों को CSP ऑफिस में पेश किया गया। पुलिस अधिकारियों ने सभी अपराधियों को स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि वे दोबारा किसी भी आपराधिक गतिविधि में शामिल पाए गए, तो उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने कहा कि अब अपराध को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पुलिस ने अपराधियों को समाज की मुख्यधारा में लौटने, अपराध से दूर रहने और शांतिपूर्ण जीवन जीने की सलाह दी। साथ ही यह भी साफ किया गया कि कमिश्नरी सिस्टम के तहत पुलिस अब पहले से ज्यादा सख्ती और निगरानी के साथ काम कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की कार्रवाइयों से शहर में कानून-व्यवस्था मजबूत होगी और आम नागरिकों में सुरक्षा की भावना बढ़ेगी। रायपुर पुलिस ने भरोसा जताया है कि आने वाले दिनों में अपराध पर प्रभावी नियंत्रण देखने को मिलेगा।

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डेंटल कॉलेज के पीजी-इंटर्न छात्र अनिश्चितकालीन हड़ताल पर, स्टाइपेंड समानता और गर्ल्स हॉस्टल की मांग

बातचीत बेनतीजा, अस्पताल सेवाएं प्रभावित राजधानी रायपुर स्थित शासकीय डेंटल कॉलेज के पीजी और इंटर्न छात्र अपनी लंबित मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठ गए हैं। छात्र पिछले 6 दिनों से आंदोलन कर रहे थे, जिसे अब और तेज करते हुए उन्होंने पूर्ण हड़ताल का ऐलान कर दिया है। हड़ताल के दौरान छात्रों ने कॉलेज और अस्पताल परिसर में डॉक्टरों, मरीजों और स्टाफ की आवाजाही रोक दी, जिससे दंत चिकित्सा सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो गईं। हालात को देखते हुए कॉलेज परिसर में भारी पुलिस बल तैनात किया गया, ताकि किसी प्रकार की कानून-व्यवस्था की स्थिति न बने। मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा आंदोलनकारी छात्रों का साफ कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस और लिखित निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक हड़ताल समाप्त नहीं की जाएगी। छात्रों की प्रमुख मांगों में स्टाइपेंड में समानता और गर्ल्स हॉस्टल की कमी को दूर करना शामिल है। प्रशासन से बातचीत, नहीं निकला हल हड़ताल की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और छात्रों से लंबी चर्चा की। अधिकारियों ने छात्रों से आंदोलन समाप्त करने की अपील की, लेकिन बातचीत किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए प्रदर्शनकारी छात्रों को बसों में भरकर तूता धरना स्थल छोड़ दिया। हालांकि इसके बावजूद हड़ताल जारी रही। मरीजों को हो रही परेशानी हड़ताल का सीधा असर मरीजों पर पड़ा है। इलाज के लिए पहुंचे कई मरीजों को बिना परामर्श लौटना पड़ा।पीड़ित शिव कुमार महानंद ने बताया कि उनके पिता का एक्सीडेंट हुआ है, जिसमें उनका बायां जबड़ा टूट गया, लेकिन छात्रों की हड़ताल के कारण इलाज में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। आंदोलन के दो प्रमुख मुद्दे 1. स्टाइपेंड में समानता की मांगपीजी और इंटर्न छात्रों का कहना है कि मेडिकल और आयुर्वेदिक कॉलेजों के छात्रों को जिस दर से स्टाइपेंड मिलता है, डेंटल कॉलेज के छात्रों को उससे कम भुगतान किया जा रहा है।छात्रों का तर्क है कि ड्यूटी टाइम, ओपीडी, सर्जरी और मरीजों की जिम्मेदारियां समान होने के बावजूद उनके साथ भेदभाव किया जा रहा है। वे मेडिकल कॉलेज के अनुरूप स्टाइपेंड और उसे बैकडेट से लागू करने की मांग कर रहे हैं। 2. गर्ल्स हॉस्टल की कमीछात्रों ने महिला पीजी छात्रों के लिए पर्याप्त हॉस्टल सुविधा न होने का मुद्दा भी उठाया है। कई छात्राओं को बाहर किराए के मकान या पीजी में रहना पड़ता है, जिससे सुरक्षा और आर्थिक बोझ बढ़ जाता है। छात्र कॉलेज परिसर में अतिरिक्त गर्ल्स हॉस्टल की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं। सेवाएं पूरी तरह ठप होने की आशंका हड़ताल के चलते गुरुवार को अधिकांश ओपीडी और उपचार सेवाएं प्रभावित रहीं। कई विभागों में कुर्सियां खाली नजर आईं।छात्रों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो आंदोलन और उग्र होगा। लंबे समय तक हड़ताल जारी रहने पर दंत चिकित्सा सेवाएं पूरी तरह ठप होने की आशंका जताई जा रही है।

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मेडिकल PG में MBBS छात्रों को बड़ी राहत: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 50% संस्थागत आरक्षण को दी मंजूरी

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने मेडिकल पीजी प्रवेश को लेकर अपने पहले के फैसले में महत्वपूर्ण संशोधन करते हुए प्रदेश के एमबीबीएस छात्रों को बड़ी राहत दी है। अब राज्य के मेडिकल कॉलेजों से एमबीबीएस करने वाले छात्रों को पोस्ट ग्रेजुएट (PG) कोर्स में मैरिट के आधार पर 50 प्रतिशत संस्थागत आरक्षण मिल सकेगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यह व्यवस्था संवैधानिक रूप से वैध है। यह फैसला मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति बीडी गुरु की डिवीजन बेंच ने सुनाया। बेंच ने अपने पूर्व आदेश के उस हिस्से को हटा दिया, जिसमें राज्य सरकार को उम्मीदवारों के बीच श्रेणी के आधार पर भेदभाव न करने का निर्देश दिया गया था। इस बदलाव के साथ ही संस्थागत कोटा के तहत आरक्षण का रास्ता साफ हो गया है। दरअसल, शुभम विहार निवासी डॉ. समृद्धि दुबे ने छत्तीसगढ़ मेडिकल पीजी प्रवेश नियम 2025 के नियम 11(a) और 11(b) को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इन नियमों के तहत राज्य के मेडिकल कॉलेजों से एमबीबीएस करने वाले छात्रों को प्राथमिकता दी जा रही थी। इस पर 20 नवंबर 2025 को हाईकोर्ट ने इन नियमों को असंवैधानिक करार दिया था। राज्य सरकार ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दाखिल की। 18 दिसंबर 2025 को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को यह छूट दी कि वह हाईकोर्ट से यह स्पष्ट कराए कि संस्थागत कोटे के तहत कितनी सीटों का आरक्षण उचित होगा। इसके बाद राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में स्पष्टीकरण याचिका दाखिल की। सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता शशांक ठाकुर ने दलील दी कि निवास आधारित आरक्षण समाप्त कर दिया गया है और अब केवल संस्थान आधारित प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने बताया कि 1 दिसंबर 2025 को नियमों में संशोधन कर 50 प्रतिशत सीटें संस्थागत आरक्षण और 50 प्रतिशत ओपन मेरिट के लिए निर्धारित कर दी गई हैं। हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि पीजी मेडिकल सीटों में निवास आधारित आरक्षण गलत है, लेकिन सीमित दायरे में संस्थागत प्राथमिकता दी जा सकती है। इस आदेश के बाद राज्य सरकार अब तन्वी बहल केस में सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय दिशा-निर्देशों के अनुरूप संस्थागत आरक्षण लागू कर सकेगी।

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NEET PG कट-ऑफ विवाद: छत्तीसगढ़ सिविल सोसाइटी ने राष्ट्रपति से की NMC को भंग करने की मांग

देश में चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। NEET PG परीक्षा का कट-ऑफ घटाकर ‘माइनस 40’ किए जाने के फैसले के बाद विवाद और गहरा गया है। इस मुद्दे को लेकर छत्तीसगढ़ सिविल सोसाइटी ने राष्ट्रपति को पत्र लिखते हुए राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) को तत्काल भंग करने की मांग की है। सोसाइटी के संयोजक डॉ. कुलदीप सोलंकी ने इस निर्णय को चिकित्सा क्षेत्र के इतिहास का एक चिंताजनक अध्याय बताया है। उनका कहना है कि इस तरह के फैसले न केवल योग्यता आधारित चयन प्रणाली को कमजोर करते हैं, बल्कि भविष्य में आम जनता की स्वास्थ्य सुरक्षा पर भी गंभीर खतरा पैदा कर सकते हैं। योग्यता से समझौते का आरोप राष्ट्रपति को भेजे गए ज्ञापन में कहा गया है कि NMC का गठन चिकित्सा शिक्षा के स्तर को ऊंचा उठाने के उद्देश्य से किया गया था, लेकिन हालिया नीतिगत निर्णय इसके उलट परिणाम दे रहे हैं। डॉ. सोलंकी का आरोप है कि कट-ऑफ को शून्य से नीचे ले जाना पेशे की गरिमा के साथ समझौता है और इससे कम योग्य डॉक्टरों के विशेषज्ञ बनने का रास्ता खुल सकता है। NMC पर गंभीर आरोप छत्तीसगढ़ सिविल सोसाइटी ने केंद्र सरकार से NMC अधिनियम 2019 की धारा 55 के तहत आयोग को भंग करने की मांग की है। पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि आयोग चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के बजाय निजी मेडिकल कॉलेजों की सीटें भरने को प्राथमिकता दे रहा है। सोसाइटी ने सुझाव दिया है कि जब तक नया आयोग गठित न हो, तब तक ईमानदार स्वास्थ्य विशेषज्ञों और प्रख्यात शिक्षाविदों की एक बोर्ड ऑफ गवर्नर्स नियुक्त की जाए, जो पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित कर सके। ब्रेन ड्रेन और सिस्टम फेल होने का आरोप ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि गलत नीतियों के चलते मेधावी छात्र विदेशों में पढ़ाई और करियर बनाने को मजबूर हो रहे हैं, जिससे देश को दीर्घकालिक नुकसान हो रहा है। साथ ही, NMC पर बुनियादी ढांचे की कमी, फैकल्टी संकट और गुणवत्ता नियंत्रण जैसे अहम मुद्दों को नजरअंदाज करने का आरोप भी लगाया गया है। इस मांग के बाद अब चिकित्सा जगत और छात्रों की निगाहें केंद्र सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।

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छत्तीसगढ़ में विवाह पंजीयन अनिवार्य: 7 दिन में मिलेगा मैरिज सर्टिफिकेट, बाल विवाह और फर्जी शादी पर लगेगी रोक

छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में विवाह पंजीयन को अनिवार्य कर दिया है। इस संबंध में विधि-विधायी कार्य विभाग द्वारा अधिसूचना जारी कर राजपत्र में प्रकाशित कर दी गई है। नए नियमों के तहत 29 जनवरी 2016 के बाद जिन दंपतियों का विवाह हुआ है, उन्हें तय समय-सीमा के भीतर अनिवार्य रूप से विवाह का पंजीयन कराना होगा। सरकार का कहना है कि इस फैसले से फर्जी, दिखावटी और अवैध शादियों पर प्रभावी नियंत्रण लगेगा। साथ ही बाल विवाह जैसी सामाजिक कुप्रथाओं पर रोक लगेगी और महिलाओं के कानूनी अधिकारों को मजबूती मिलेगी। कहां और कैसे कराएं विवाह पंजीयन विवाह का पंजीयन नगर निगम, नगर पालिका, जनपद पंचायत या राज्य सरकार द्वारा अधिकृत ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से कराया जा सकता है। नगर निगम क्षेत्र में रहने वाले दंपतियों को संबंधित नगर निगम कार्यालय में आवेदन करना होगा। इसके अलावा चॉइस सेंटर के माध्यम से भी विवाह पंजीयन की सुविधा उपलब्ध है। विवाह की तारीख से एक महीने के भीतर पंजीयन कराने पर मात्र 20 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है। यदि एक माह के बाद पंजीयन कराया जाता है तो इसके लिए 520 रुपये शुल्क देना होगा। मैरिज सर्टिफिकेट के लिए आवश्यक दस्तावेज मैरिज सर्टिफिकेट के लिए आवेदन करने वाले पति और पत्नी का भारतीय नागरिक होना आवश्यक है। साथ ही दोनों की उम्र भारतीय कानून के अनुसार निर्धारित सीमा में होनी चाहिए। विवाह के एक महीने के भीतर आवेदन करना अनिवार्य है, हालांकि इसके बाद भी लेट फीस और सक्षम प्राधिकारी की अनुमति से आवेदन किया जा सकता है। यदि किसी आवेदक का पूर्व में विवाह हो चुका है और तलाक हो गया है, तो नए विवाह के पंजीयन के लिए तलाक का प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। एक सप्ताह में जारी होगा सर्टिफिकेट रायपुर नगर निगम की विवाह रजिस्ट्रार तृप्ति पाणिग्रही के अनुसार, आवेदन के साथ जमा किए गए दस्तावेज सही पाए जाने पर एक सप्ताह के भीतर मैरिज सर्टिफिकेट जारी कर दिया जाता है। आवेदन प्रक्रिया के दौरान दस्तावेजों के सत्यापन के लिए पति-पत्नी की उपस्थिति आवश्यक होती है। किन मामलों में नहीं बनेगा मैरिज सर्टिफिकेट भारतीय कानून के अनुसार विवाह के समय लड़की की न्यूनतम उम्र 18 वर्ष और लड़के की न्यूनतम उम्र 21 वर्ष तय है। यदि विवाह के समय इनमें से किसी की भी उम्र तय सीमा से कम पाई जाती है, तो वह विवाह कानूनी रूप से मान्य नहीं होगा और ऐसे मामलों में मैरिज सर्टिफिकेट जारी नहीं किया जाएगा।

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कान में ब्लूटूथ, कपड़ों में डिवाइस: SSC परीक्षा में हाईटेक नकल करते राजस्थान का युवक गिरफ्तार

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में SSC द्वारा आयोजित दिल्ली पुलिस भर्ती परीक्षा के दौरान हाईटेक नकल का मामला सामने आया है। सिम कार्ड से ऑपरेट होने वाले ब्लूटूथ डिवाइस को कान में छिपाकर और कपड़ों में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण लगाकर परीक्षा दे रहा राजस्थान का अभ्यर्थी रंगे हाथों पकड़ा गया। आरोपी को परीक्षा केंद्र प्रभारी ने पुलिस के हवाले कर दिया। मामला सीपत थाना क्षेत्र का है। संदेह हुआ तो घबराया अभ्यर्थी शुक्रवार (9 जनवरी) को सीपत के फरहदा स्थित जीटीबी कॉलेज में SSC द्वारा आयोजित हेड कांस्टेबल (लिपिक) दिल्ली पुलिस भर्ती 2025 की परीक्षा चल रही थी। शाम 4:30 से 6:30 बजे की शिफ्ट के दौरान केंद्र प्रभारी विजय कुमार लहरे को एक अभ्यर्थी की गतिविधियां संदिग्ध लगीं। जब वह उसके नजदीक पहुंचे तो अभ्यर्थी घबरा गया। तलाशी लेने पर उसके कान से सिम-ऑपरेटेड ब्लूटूथ और कपड़ों में छिपाए गए इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस बरामद हुए, जिनकी मदद से वह प्रश्नों के उत्तर प्राप्त कर रहा था। राजस्थान का रहने वाला है आरोपी पकड़े गए युवक की पहचान मोहित मीना (25) के रूप में हुई है, जो राजस्थान के दौसा जिले के बसवा थाना क्षेत्र का निवासी है। पूछताछ में सामने आया है कि वह सभी डिवाइस राजस्थान से ही लेकर बिलासपुर पहुंचा था और उनका उपयोग कर परीक्षा में नकल कर रहा था। मामला दर्ज, न्यायिक रिमांड पर भेजा गया केंद्र प्रभारी की शिकायत पर सीपत पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी और परीक्षा अधिनियम की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है। पूछताछ के बाद आरोपी को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। बड़े नकल गिरोह की आशंका कड़ी सुरक्षा और जांच व्यवस्था के बावजूद आरोपी का परीक्षा केंद्र के भीतर डिवाइस ले जाना पुलिस के लिए भी सवाल बन गया है। पुलिस को आशंका है कि इस मामले के पीछे किसी संगठित नकल गिरोह की भूमिका हो सकती है। फिलहाल आरोपी के मोबाइल फोन और जब्त इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की तकनीकी जांच की जा रही है।

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कुत्ते के नाम में ‘राम’ विकल्प बना विवाद की जड़: चौथी के पेपर पर बवाल, प्रधान पाठक निलंबित

रायपुर। छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में कक्षा चौथी के अंग्रेजी प्रश्न पत्र में पूछे गए एक सवाल ने प्रदेशभर में विवाद खड़ा कर दिया है। प्रश्न में ‘मोना के कुत्ते का नाम’ पूछा गया था, जिसके विकल्पों में बाला, शेरू, कोई नहीं के साथ ‘राम’ नाम भी शामिल था। इस प्रश्न पत्र को रायपुर संभाग के बलौदाबाजार, भाटापारा, महासमुंद, धमतरी और गरियाबंद जिलों में परीक्षा के दौरान वितरित किया गया। जैसे ही प्रश्न पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, हिंदू संगठनों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। उनका कहना था कि कुत्ते के नाम के विकल्प में ‘राम’ लिखे जाने से धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। मामले की जांच के बाद शिक्षा विभाग ने प्रश्न पत्र तैयार करने वाली प्रधान पाठक को निलंबित कर दिया है, जबकि मॉडरेटर शिक्षिका को सेवा से पृथक करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। ‘रामू’ लिखना था, टाइपिंग में गलती हो गई जांच के दौरान दोनों शिक्षिकाओं ने अपनी-अपनी गलती स्वीकार करते हुए लिखित में माफी मांगी है।प्रधान पाठक शिखा सोनी ने स्पष्टीकरण में कहा कि उनका आशय ‘रामू (RAMU)’ लिखने का था, लेकिन टाइपिंग के दौरान ‘U’ छूट गया और ‘RAM’ छप गया। उन्होंने इसे अनजाने में हुई मानवीय भूल बताया। वहीं, मॉडरेटर नम्रता वर्मा ने कहा कि उन्हें जो प्रश्न पत्र का सेट मॉडरेशन के लिए मिला, उसमें विकल्प पहले से मौजूद थे और उनसे भी यह त्रुटि नजरअंदाज हो गई। धार्मिक भावनाएं आहत होने की पुष्टि रायपुर जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा गठित 5 सदस्यीय जांच समिति ने प्रश्न पत्र निर्माण, मॉडरेशन और अंतिम मुद्रण से जुड़े सभी दस्तावेजों की जांच की। समिति की रिपोर्ट में माना गया कि राम हिंदू धर्म के आराध्य देव हैं, ऐसे में विकल्प के रूप में यह नाम देना अनुचित है और इससे धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि प्रश्न पत्र का निर्माण शासकीय प्राथमिक स्कूल नकटी (खपरी), तिल्दा की प्रधान पाठक शिखा सोनी ने किया था और मॉडरेशन सेजेस उच्च माध्यमिक विद्यालय फाफाडीह, रायपुर की सहायक शिक्षक नम्रता वर्मा ने किया। सोशल मीडिया से शुरू हुआ विवाद, राजनीति भी गरमाई 6 जनवरी को परीक्षा के बाद प्रश्न पत्र वायरल हुआ। इसके अगले दिन NSUI रायपुर ने जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा। DEO हिमांशु भारती ने इसे विभागीय चूक मानते हुए कहा कि मामले की जांच के लिए समिति बनाई गई है, जो तय समय में रिपोर्ट देगी और दोषियों पर नियमानुसार कार्रवाई होगी। वहीं महासमुंद DEO विजय लहरे ने कहा कि उनके जिले में जानकारी मिलते ही विवादित विकल्प को हटाकर अन्य प्रश्न पत्र बांटे गए। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी की धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाने का कोई उद्देश्य नहीं था। प्रिंटिंग को लेकर अलग-अलग दावे प्रश्न पत्र की छपाई को लेकर शिक्षा विभाग और प्रिंटिंग प्रेस के बीच भी बयानबाजी सामने आई है। DEO का कहना है कि गलत सेट छप गया, जबकि प्रिंटिंग हाउस संचालक ने दावा किया कि वही सामग्री छापी गई, जो विभाग से भेजी गई थी। NSUI ने इसे सिर्फ तकनीकी गलती मानने से इनकार करते हुए कहा है कि यदि जांच के नाम पर दोषियों को बचाने की कोशिश की गई, तो संगठन आंदोलन करेगा।

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महादेव सट्टा ऐप मामला: ED ने 92 करोड़ की संपत्ति की सीज, दुबई से चल रहा था रिग्ड बेटिंग नेटवर्क

रायपुर / नई दिल्ली।महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 92 करोड़ रुपये की संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच कर लिया है। यह कार्रवाई PMLA कानून के तहत की गई है और इसे अब तक की सबसे अहम कार्रवाइयों में से एक माना जा रहा है। ED की जांच में सामने आया है कि इस पूरे नेटवर्क के पीछे सौरभ चंद्राकर, रवि उप्पल और उनके सहयोगियों का संगठित सिंडिकेट काम कर रहा था, जो भारत से अवैध तरीके से करोड़ों रुपये विदेश भेज रहा था। 💰 किन संपत्तियों पर ED की कार्रवाई ED के अनुसार, इसके अलावा, 🌍 दुबई से संचालित हो रहा था महादेव ऐप जांच एजेंसी के मुताबिक, महादेव ऑनलाइन बुक (MOB) ऐप को सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल प्रमोट कर रहे थे। दोनों छत्तीसगढ़ के निवासी हैं और फिलहाल UAE (दुबई) में मौजूद बताए जा रहे हैं।भारत सरकार उनकी प्रत्यर्पण प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी कर रही है। 🎰 रिग्ड गेम्स से होती थी ग्राहकों की लूट ED की जांच में खुलासा हुआ है किMahadev Online Book और Skyexchange जैसे प्लेटफॉर्म पर रिग्ड गेम्स चलाए जा रहे थे,जहां इस तरह लाखों यूजर्स से अवैध तरीके से रकम वसूली जाती थी। 💸 हवाला, क्रिप्टो और FPI से विदेश पहुंचा पैसा जांच में सामने आया कि सट्टेबाजी से कमाई गई रकम को के जरिए विदेश भेजा गया।बाद में इसी पैसे को FPI (Foreign Portfolio Investment) के नाम पर भारतीय शेयर बाजार में निवेश किया गया। 🔁 कैशबैक रैकेट का भी खुलासा ED ने एक बड़े कैशबैक रैकेट का भी पर्दाफाश किया है।जांच में पता चला कि ED का दावा है कि गगन गुप्ता कोSalasar Techno Engineering और Tiger Logistics से जुड़े सौदों में करीब 98 करोड़ रुपये का फायदा हुआ। 📂 अब तक की कार्रवाई ED के अनुसार, इस नेटवर्क में छत्तीसगढ़ के कई हाई-प्रोफाइल नेता और अधिकारी भी जांच के दायरे में हैं। एजेंसी का कहना है कि महादेव ऐप एक ‘अंब्रेला सिंडिकेट’ की तरह काम कर रहा था। 💎 सर्राफा कारोबारी के जरिए पहुंची प्रोटेक्शन मनी EOW की जांच में यह भी सामने आया है किमहादेव बुक प्रमोटर्स ने कार्रवाई से बचने के लिएराजनेताओं, ब्यूरोक्रेट्स और पुलिस अफसरों तक प्रोटेक्शन मनी पहुंचाई। इसमें छत्तीसगढ़ के सर्राफा कारोबारी सुनील कुमार दम्मानी (श्री आभूषण ज्वैलर्स) की भूमिका सामने आई है।हवाला के जरिए पैसा कलेक्ट करचंद्रभूषण वर्मा और राहुल वक्टे के माध्यम से आगे पहुंचाया जाता था। 👥 पैनल चलाने वाले नाम सामने आए जांच में जिन लोगों के नाम सामने आए हैं: ⚠️ चालान में अफसरों के नाम गायब EOW द्वारा कोर्ट में पेश किए गए चालान मेंकिसी भी ब्यूरोक्रेट या पुलिस अधिकारी को नामजद आरोपी नहीं बनाया गया है।चालान में केवल पदनामों का उल्लेख किया गया है। 🔍 जांच जारी, और खुलासों की उम्मीद ED और EOW का कहना है कि जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में इस हाई-प्रोफाइल सट्टा और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।

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