Education

शराब के नशे में स्कूल पहुंचा शिक्षक, वीडियो वायरल होने पर मचा हड़कंप, DEO ने किया निलंबित

मुंगेली। छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले में शिक्षा विभाग को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है। लोरमी विकासखंड के लखासर स्थित शासकीय प्राथमिक विद्यालय में पदस्थ सहायक शिक्षक लक्ष्मण कोलम के शराब के नशे में स्कूल पहुंचने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो सामने आते ही शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया और मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने तत्काल सख्त कार्रवाई की। जानकारी के अनुसार, यह घटना 5 जनवरी 2026 की बताई जा रही है। वीडियो में शिक्षक की हालत नशे में होने जैसी नजर आ रही है। वायरल वीडियो के बाद ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (BEO) ने मामले की प्राथमिक जांच कर इसकी पुष्टि की और तत्काल जिला शिक्षा अधिकारी मुंगेली एल.पी. डाहिरे को सूचना देते हुए अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की। सरकारी सेवा नियमों का उल्लंघन प्रारंभिक जांच में सामने आया कि शराब के नशे में स्कूल आना न केवल शासकीय सेवा नियमों का गंभीर उल्लंघन है, बल्कि इससे छात्रों की सुरक्षा, अनुशासन और शिक्षा व्यवस्था की गरिमा पर भी सीधा असर पड़ता है। शिक्षा विभाग ने इस कृत्य को विभाग की छवि को नुकसान पहुंचाने वाला बताया है। नियमों के तहत किया गया निलंबन जिला शिक्षा अधिकारी ने मामले को गंभीर मानते हुए इसे छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम, 1965 के नियम 3 (1), (2) और (3) का उल्लंघन करार दिया। इसके बाद छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (नियंत्रण, वर्गीकरण एवं अपील) नियम, 1966 के नियम 9(ए) के तहत सहायक शिक्षक लक्ष्मण कोलम को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि स्कूलों में अनुशासन और बच्चों की सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और इस तरह की लापरवाही पर कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।

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कानपुर-वाराणसी मॉडल पर रायपुर में लागू होगा पुलिस कमिश्नरी सिस्टम, एक जिले में दोहरी पुलिस व्यवस्था की तैयारी

छत्तीसगढ़ में पहली बार राजधानी रायपुर में पुलिस कमिश्नरी सिस्टम लागू होने जा रहा है। प्रस्तावित योजना के अनुसार यह व्यवस्था 23 जनवरी से प्रभावी हो सकती है। इसे लेकर गृह विभाग द्वारा विस्तृत ब्लू प्रिंट तैयार किया जा रहा है। मंत्री परिषद की बैठक के बाद सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक, नगरीय निकाय क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले 22 शहरी थानों में पुलिस कमिश्नरी सिस्टम लागू किया जाएगा। वहीं, ग्रामीण इलाकों के 15 थानों के लिए अलग से ग्रामीण पुलिस अधीक्षक (SP) की नियुक्ति की जाएगी। इस तरह एक ही जिले में दो अलग-अलग पुलिस व्यवस्थाएं लागू होंगी। यह मॉडल पहले उत्तर प्रदेश के कानपुर और वाराणसी में लागू किया गया था, लेकिन वहां इसे व्यावहारिक कठिनाइयों और समन्वय की कमी के चलते असफल माना गया। बाद में यूपी सरकार ने पूरे जिले में एक समान कमिश्नरी सिस्टम लागू कर दिया था। अब इसी मॉडल को रायपुर में लागू करने की तैयारी को लेकर प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि दोहरी पुलिस व्यवस्था से अपराध नियंत्रण, वीआईपी सुरक्षा और जांच प्रक्रिया में कई तरह की जटिलताएं सामने आ सकती हैं। शहरी-ग्रामीण विभाजन से सामने आ सकती हैं ये समस्याएं 1. वीआईपी मूवमेंट में बढ़ेगी जटिलताअगर कमिश्नरी सिस्टम केवल शहरी क्षेत्र तक सीमित रहता है, तो पुराने रायपुर से नवा रायपुर के बीच वीआईपी मूवमेंट के दौरान दो अलग-अलग कारकेड लगाने पड़ेंगे। नगर निगम सीमा तक कमिश्नरी पुलिस और उसके आगे ग्रामीण पुलिस द्वारा सुरक्षा संभालने की व्यवस्था करनी होगी। 2. प्रमुख संस्थानों की सुरक्षा बंटेगी दो हिस्सों मेंइस प्रस्तावित सिस्टम में एयरपोर्ट ग्रामीण एसपी के अधिकार क्षेत्र में रहेगा। वहीं सिविल लाइन स्थित मुख्यमंत्री निवास, राजभवन और मंत्री बंगलों की सुरक्षा पुलिस कमिश्नर के जिम्मे होगी। दूसरी ओर, नवा रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास, विधानसभा, मंत्रालय और सचिवालय की सुरक्षा ग्रामीण एसपी के अधीन रहेगी। 3. अपराध की जांच में सीमा विवादहत्या, लूट, डकैती जैसी गंभीर वारदातों में शहरी और ग्रामीण सीमा को लेकर विवाद की स्थिति बन सकती है। सीमावर्ती इलाकों में घटना होने पर जांच एजेंसी तय करने में देरी और आपसी समन्वय की समस्या उत्पन्न हो सकती है। साथ ही ट्रांसफर, पोस्टिंग और प्रशासनिक अनुमतियों के लिए शासन स्तर पर निर्भरता बढ़ेगी। क्या कहते हैं एक्सपर्ट उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी ओपी सिंह के अनुसार, कमिश्नरी सिस्टम तभी प्रभावी होता है जब पूरे जिले में एक समान व्यवस्था लागू हो। पुलिस कमिश्नर को धारा 144 लागू करने, हथियार लाइसेंस, जिला बदर और आबकारी से जुड़े अधिकार मिलने चाहिए। उनका मानना है कि आईजी या एडीजी रैंक के अधिकारियों को ही पुलिस कमिश्नर बनाया जाना चाहिए, ताकि अनुभव के आधार पर बेहतर निर्णय लिए जा सकें। एक शहर, दो पुलिसिंग पर सवाल स्थानीय विशेषज्ञों और पत्रकारों का कहना है कि एक ही शहर में दो तरह की पुलिसिंग व्यवस्था प्रशासनिक भ्रम और जवाबदेही का संकट पैदा कर सकती है। नवा रायपुर जैसे आधुनिक और विकसित क्षेत्र को ग्रामीण श्रेणी में रखना व्यावहारिक रूप से उचित नहीं माना जा रहा। विशेषज्ञों का तर्क है कि जब राजधानी, कलेक्टर और प्रशासनिक ढांचा एक है, तो पुलिस व्यवस्था भी एक समान होनी चाहिए। अन्यथा पुलिस सुधार के नाम पर यह व्यवस्था आधा-अधूरा प्रयोग साबित हो सकती है। भारत में पुलिसिंग के दो प्रमुख मॉडल भारत में पुलिस व्यवस्था मुख्य रूप से दो प्रणालियों पर आधारित है—सुपरिटेंडेंट सिस्टम, जो छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में लागू होता है, जहां कानून-व्यवस्था के अधिकार जिला मजिस्ट्रेट के पास होते हैं।वहीं कमिश्नरेट सिस्टम बड़े शहरों में लागू होता है, जिसमें पुलिस कमिश्नर को मजिस्ट्रियल पावर भी दी जाती है और वे सीधे कानून-व्यवस्था पर नियंत्रण रखते हैं।

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खेलो इंडिया नेशनल ट्राइबल गेम्स: 6 से 8 जनवरी तक चयन ट्रायल, रायपुर और बिलासपुर में होंगे आयोजन

छत्तीसगढ़ में पहली बार आयोजित हो रहे खेलो इंडिया नेशनल ट्राइबल गेम्स के लिए खिलाड़ियों के चयन की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। राज्य की टीमों के चयन हेतु 6 से 8 जनवरी 2026 तक रायपुर और बिलासपुर में चयन ट्रायल आयोजित किए जाएंगे। रायपुर में वेट-लिफ्टिंग, कुश्ती, फुटबॉल और हॉकी, जबकि बिलासपुर में तीरंदाजी, एथलेटिक्स और तैराकी के लिए ट्रायल होंगे। इन ट्रायल्स के माध्यम से विभिन्न खेलों में प्रतिभावान आदिवासी खिलाड़ियों का चयन किया जाएगा। खेल एवं युवा कल्याण विभाग के अनुसार, इच्छुक खिलाड़ी ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से पंजीयन कर सकते हैं। ऑनलाइन पंजीयन के लिए खिलाड़ी विभागीय वेबसाइट sportsyw.cg.gov.in पर उपलब्ध रजिस्ट्रेशन लिंक और क्यूआर कोड का उपयोग कर सकते हैं। वहीं, सभी ट्रायल स्थलों पर ऑफलाइन पंजीयन की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी।

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छत्तीसगढ़ RI प्रमोशन परीक्षा रद्द: हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, 216 पटवारियों की पदोन्नति होगी निरस्त

छत्तीसगढ़ में पटवारी से राजस्व निरीक्षक (RI) पदोन्नति परीक्षा को लेकर सामने आए गंभीर आरोपों पर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के जस्टिस एन.के. व्यास ने अपने अहम फैसले में RI प्रमोशन परीक्षा की पूरी प्रक्रिया को निरस्त कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि परीक्षा में भारी अनियमितताएं पाई गईं, जिससे चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता और विश्वसनीयता प्रभावित हुई है। पटवारी से RI पदोन्नति के लिए लिखित परीक्षा 7 जनवरी 2024 को आयोजित की गई थी, जिसमें 2600 से अधिक पटवारियों ने भाग लिया था। 29 फरवरी 2024 को जारी परिणाम में 216 उम्मीदवारों को प्रशिक्षण के लिए चयनित किया गया, हालांकि अंतिम रूप से केवल 13 अभ्यर्थियों को चयनित किया जाना था। इसके बावजूद 22 लोगों को नियुक्ति दे दी गई, जिसके बाद विवाद गहराता चला गया। हाईकोर्ट में पहुंचा मामला प्रमोशन से वंचित पटवारियों ने परीक्षा प्रक्रिया को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि कम अंक पाने वाले अभ्यर्थियों को भी पदोन्नति के लिए चुन लिया गया, जबकि अधिक अंक लाने वाले योग्य उम्मीदवारों को बाहर कर दिया गया। उन्होंने चयन प्रक्रिया को पक्षपातपूर्ण और नियमों के विरुद्ध बताया। पेपर लीक और भाई-भतीजावाद के आरोप जांच के दौरान सामने आया कि परीक्षा में प्रश्नपत्र पहले ही लीक हो गया था। आरोप है कि कुछ केंद्रों पर पति-पत्नी, भाई-भाई और रिश्तेदारों को जानबूझकर साथ बैठाया गया। एक मामले में फेल हुए पटवारी को बाद में पास दिखाया गया। कई उम्मीदवारों को समान अंक मिलने पर भी संदेह गहराया। EOW-ACB की कार्रवाई RI प्रमोशन घोटाले को लेकर पटवारी संघ और शासन के पत्र के आधार पर EOW-ACB ने 10 अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। इनमें से दो को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है, जबकि अन्य की तलाश जारी है। जांच एजेंसी के अनुसार, इस घोटाले में 18 से अधिक लोगों की संलिप्तता सामने आई है। 216 पदोन्नतियां होंगी रद्द हाईकोर्ट ने सभी पक्षों की सुनवाई के बाद कहा कि चयन प्रक्रिया दूषित, अपारदर्शी और पक्षपात से ग्रस्त थी। कोर्ट ने माना कि परीक्षा की पवित्रता से समझौता किया गया है। इस फैसले के बाद 216 पटवारियों को दी गई पदोन्नति स्वतः निरस्त हो जाएगी। नई परीक्षा कराने की अनुमति हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को पटवारी से RI पदोन्नति के लिए नई परीक्षा आयोजित करने की छूट दी है। कोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि भविष्य में परीक्षा पूरी तरह पारदर्शी, निष्पक्ष और संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप कराई जाए, ताकि योग्य उम्मीदवारों के साथ किसी तरह का अन्याय न हो।

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CAF वेटिंग लिस्ट कैंडिडेट्स का डिप्टी CM हाउस घेराव, 7 साल से भर्ती का इंतज़ार

13 दिनों से तूता में धरना, गृहमंत्री बोले – CM से चर्चा के बाद होगा फैसला छत्तीसगढ़ आर्म्ड फोर्स (CAF) भर्ती 2018 के वेटिंग लिस्ट कैंडिडेट्स का सब्र अब जवाब दे चुका है। नौकरी की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने शनिवार को डिप्टी मुख्यमंत्री विजय शर्मा के बंगले का घेराव कर दिया। ये सभी उम्मीदवार पिछले 13 दिनों से रायपुर के तूता धरना स्थल पर अपने परिवार के साथ आंदोलन कर रहे हैं। दरअसल, साल 2018 में CAF के 1786 पदों पर भर्ती निकली थी, जिसमें मेरिट लिस्ट के बाद 417 अभ्यर्थियों को वेटिंग लिस्ट में रखा गया। सात साल बीतने के बावजूद इन उम्मीदवारों को अब तक नियुक्ति नहीं मिल सकी है, जबकि CAF में तीन हजार से अधिक पद खाली पड़े हैं। धरने के दौरान बिगड़ी बच्चे की तबीयत प्रदर्शन के दौरान एक अभ्यर्थी के छह महीने के बच्चे की तबीयत खराब हो गई, जिससे आंदोलनकारियों का आक्रोश और बढ़ गया। इसी बीच नाराज उम्मीदवारों ने डिप्टी सीएम के बंगले का घेराव कर अपनी मांगें रखीं। डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने कैंडिडेट्स को भरोसा दिलाया कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के दिल्ली से लौटने के बाद पूरे मामले पर उनसे चर्चा की जाएगी। इसके बाद प्रतिनिधिमंडल को बुलाकर कोई ठोस निर्णय लिया जाएगा। साथ ही उन्होंने प्रदर्शन समाप्त करने की अपील भी की। गृहमंत्री अमित शाह को भी लिखा पत्र CAF कैंडिडेट्स अपनी समस्या को लेकर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को भी पत्र लिख चुके हैं। कुछ दिन पहले मीडिया से बातचीत में अभ्यर्थियों ने यहां तक कहा था कि “अगर नक्सली होते तो शायद घर वापसी पर नौकरी और करियर दोनों मिल जाता।” इसके बाद राज्य के गृहमंत्री विजय शर्मा ने जल्द समाधान का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। गुरुवार को अलग-अलग जिलों से आए कैंडिडेट्स अपने माता-पिता, पत्नी और बच्चों के साथ गृहमंत्री के बंगले पहुंचे थे। गृहमंत्री ने उनसे पुलिस मुख्यालय से नोटशीट लाने को कहा और हस्ताक्षर करने का भरोसा दिया, लेकिन उसके बाद वे दौरे पर निकल गए। मजदूरी कर चला रहे परिवार अभ्यर्थियों का कहना है कि नौकरी न मिलने के कारण उन्हें मजदूरी कर परिवार का पेट पालना पड़ रहा है। एक कैंडिडेट के पिता गृहमंत्री आवास के बाहर हाथ जोड़कर मीडिया से मदद की गुहार लगाते नजर आए। आधे से ज्यादा कैंडिडेट हो चुके ओवरएज भर्ती के समय सभी अभ्यर्थियों की उम्र 28 से 32 वर्ष थी, लेकिन सात साल बीत जाने के कारण अब 50 प्रतिशत से ज्यादा कैंडिडेट 36 से 40 साल की उम्र पार कर चुके हैं। वे अब किसी नई भर्ती के लिए भी योग्य नहीं रह गए हैं। मेरिट लिस्ट में चयनित कई उम्मीदवार मेडिकल में अनफिट हुए या नौकरी छोड़ दी, जिससे सीटें खाली हुईं। बावजूद इसके, वेटिंग लिस्ट कैंडिडेट्स को मौका नहीं मिला। सरकार बदलने के बाद भी उनकी मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। CAF और पुलिस बल में हजारों पद खाली छत्तीसगढ़ पुलिस बल में लंबे समय से भारी कमी बनी हुई है। प्रदेश में कुल 83,259 स्वीकृत पदों में से केवल 65,439 जवान कार्यरत हैं। यानी करीब 17,820 पद खाली पड़े हैं। प्रदेश में 13 IPS और 129 DSP अधिकारियों की कमी है। वहीं सूबेदार, हेड कॉन्स्टेबल और कॉन्स्टेबल के हजारों पद भी रिक्त हैं, जिससे अपराध जांच और कानून व्यवस्था पर असर पड़ रहा है। भर्ती प्रक्रिया भी अधर में अक्टूबर 2024 में पुलिस विभाग में 341 पदों पर भर्ती निकाली गई थी, लेकिन उसकी प्रक्रिया भी अब तक पूरी नहीं हो पाई है। कॉन्स्टेबल भर्ती भी लंबे समय से अटकी हुई है। CAF वेटिंग लिस्ट कैंडिडेट्स का कहना है कि अगर सरकार चाहे तो अभी भी खाली पदों पर उनकी नियुक्ति की जा सकती है। अब सभी की निगाहें मुख्यमंत्री से होने वाली बैठक और सरकार के फैसले पर टिकी हैं।

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निजी स्कूलों में RTE से अब सिर्फ कक्षा-1 में मिलेगा दाखिला

नर्सरी, पीपी-1 और पीपी-2 में गरीब बच्चों की एंट्री बंद, अभिभावकों पर बढ़ेगा आर्थिक दबाव छत्तीसगढ़ सरकार ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) के तहत निजी स्कूलों में प्रवेश के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। नए प्रावधान के अनुसार अब निजी स्कूलों में 25 प्रतिशत आरक्षित सीटों पर गरीब परिवारों के बच्चों को नर्सरी के बजाय सीधे कक्षा-1 से ही प्रवेश मिलेगा। यह व्यवस्था आगामी शैक्षणिक सत्र से लागू होगी। सरकार के इस फैसले से राज्य को सालाना करीब 63 करोड़ रुपए की बचत होगी, लेकिन इसका सीधा असर गरीब परिवारों और उनके बच्चों पर पड़ेगा। पहले जहां नर्सरी से ही बच्चों को मुफ्त शिक्षा मिलती थी, अब अभिभावकों को नर्सरी, पीपी-1 और पीपी-2 की पूरी फीस खुद वहन करनी होगी। क्यों बदला गया नियम आरटीई अधिनियम के तहत 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों को मुफ्त शिक्षा का अधिकार दिया गया है। इसी आधार पर निजी स्कूलों में 25 फीसदी सीटें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित रहती हैं। करीब 12 साल पहले छत्तीसगढ़ में नर्सरी से ही RTE के तहत दाखिले की अनुमति दी गई थी, लेकिन नए निर्देशों में इसे खत्म कर दिया गया है। अब सिर्फ कक्षा-1 को ही प्रवेश कक्षा माना जाएगा। गरीब बच्चों के सामने मुश्किलें इस बदलाव के बाद बड़ी संख्या में गरीब परिवारों के बच्चे कक्षा-1 से पहले निजी स्कूलों में पढ़ाई नहीं कर पाएंगे। जो अभिभावक फीस चुकाने में सक्षम होंगे, वे अपने बच्चों को निजी स्कूलों की प्री-प्राइमरी कक्षाओं में दाखिला दिलाएंगे। वहीं आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों के पास आंगनबाड़ी या सीमित सरकारी विकल्प ही बचेंगे। अधिकांश सरकारी स्कूलों में नर्सरी की सुविधा नहीं है, सिर्फ कुछ आत्मानंद स्कूलों में ही पीपी-1 और पीपी-2 संचालित हैं। फायदे और नुकसान नुकसान फायदा शिक्षा विशेषज्ञों की चिंता शिक्षाविदों का मानना है कि 3 से 6 वर्ष की उम्र बच्चों के विकास के लिए सबसे अहम होती है। इस उम्र में भाषा, व्यवहार और सीखने की बुनियाद पड़ती है। नर्सरी और प्री-प्राइमरी शिक्षा से वंचित रहने पर गरीब बच्चों का शैक्षणिक स्तर कमजोर रह सकता है। इससे आत्मविश्वास में कमी, पढ़ाई में पिछड़ना और ड्रॉपआउट का खतरा बढ़ सकता है। खर्च का गणित ऐसे समझें इस सत्र में प्रदेश के 6,947 निजी स्कूलों में RTE के तहत करीब 53 हजार सीटें थीं। इनमें से लगभग 30 हजार सीटें नर्सरी स्तर की थीं। सरकार प्रति छात्र 7 हजार रुपए सालाना की प्रतिपूर्ति करती थी। यदि नर्सरी से लेकर केजी तक 90 हजार बच्चों को शामिल किया जाए, तो सरकार पर लगभग 63 करोड़ रुपए का वार्षिक खर्च आता था, जो अब बचेगा। एक्सपर्ट की राय शिक्षाविद राजीव गुप्ता के अनुसार, यह फैसला शैक्षणिक असमानता को और बढ़ाएगा। नर्सरी और प्री-प्राइमरी शिक्षा से वंचित बच्चे फॉनिक्स, बुनियादी शब्दावली और कक्षा की दिनचर्या से अनजान रहेंगे। इससे कक्षा-1 का अंग्रेजी माध्यम पाठ्यक्रम उनके लिए भारी साबित होगा। परिणामस्वरूप स्कूलों में रेमेडियल क्लासेस की जरूरत पड़ेगी, लेकिन संसाधनों की कमी इसे मुश्किल बना देगी। यह स्थिति अभिभावकों पर मानसिक दबाव बढ़ाएगी और बच्चों के स्कूल छोड़ने की आशंका भी बढ़ा सकती है।

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बीजापुर में विश्व दिव्यांग दिवस पर विशेष कार्यक्रम, बच्चों ने दिखाई अपनी प्रतिभा

विश्व दिव्यांग दिवस पर बीजापुर में समग्र शिक्षा–समावेशी शिक्षा विभाग द्वारा एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिला मुख्यालय स्थित कन्या आदर्श गुरुकुल आवासीय विद्यालय में हुए इस कार्यक्रम में चारों विकासखंडों से दिव्यांग बच्चे, उनके शिक्षक, अभिभावक और पालक बड़ी संख्या में पहुंचे। कार्यक्रम के दौरान बच्चों के लिए विविध प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया, जिनमें कुर्सी दौड़, जलेबी दौड़, ट्रायसाइकिल रेस, मटका फोड़, रंगोली, पेंटिंग, मेहंदी, निबंध लेखन और एकल गीत जैसी गतिविधियाँ शामिल रहीं। प्रतिभागियों ने बड़े उत्साह और आत्मविश्वास के साथ हिस्सेदारी कर अपनी क्षमताओं का शानदार प्रदर्शन किया। हर प्रतियोगिता में प्रथम और द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाले बच्चों को मंच पर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में नगर पालिका परिषद बीजापुर की अध्यक्ष गीता सोम पुजारी मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहीं। उपाध्यक्ष भुवन सिंह चौहान तथा पार्षद सत्यवती परतागिरी विशिष्ट अतिथि रहे। अतिथियों ने विजेताओं को पुरस्कार प्रदान कर सभी प्रतिभागियों का मनोबल बढ़ाया।

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इस बार CG-बोर्ड परीक्षा 20 फरवरी से, 10वीं में छात्रों की संख्या घटी; 12वीं में बढ़ी

छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) ने कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षा 2025 के लिए फॉर्म भरने की प्रक्रिया पूरी कर ली है। इस बार पंजीयन आंकड़ों में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। जहां 10वीं के विद्यार्थियों की संख्या में कमी दर्ज हुई है, वहीं 12वीं में छात्रों का रुझान बढ़ा है। मंडल ने परीक्षा संबंधी तैयारियां शुरू कर दी हैं। दोनों कक्षाओं की प्रैक्टिकल/प्रोजेक्ट परीक्षाएं 1 जनवरी से आयोजित की जाएंगी। पंजीयन आंकड़े: किस कक्षा में कितने विद्यार्थी? कक्षा 10वीं कक्षा 12वीं पिछले साल के मुकाबले 10वीं में दर्ज हुए छात्रों की संख्या 12वीं से 11,478 कम है। इस बार परीक्षाएं एक सप्ताह पहले– 20 फरवरी से शुरू पहले बोर्ड परीक्षाएं 1 मार्च से शुरू होती थीं, लेकिन इस बार तारीख आगे बढ़ाकर 20 फरवरी कर दी गई है। परीक्षा शेड्यूल जारी हो चुका है। परीक्षा पहले होने के कारण प्रैक्टिकल परीक्षाएं भी इस बार 10 दिन पहले यानी 1 जनवरी से शुरू होंगी। 10 साल बाद बड़ा बदलाव— नया ब्लू प्रिंट लागू नई शिक्षा नीति (NEP) के अनुरूप इस वर्ष बोर्ड परीक्षा का पैटर्न पूरी तरह बदला गया है।नए ब्लू प्रिंट के अनुसार: कक्षा 10वीं और 12वीं दोनों के लिए प्रैक्टिकल/प्रोजेक्ट परीक्षा 1 जनवरी से होगी। पिछले वर्ष का परिणाम

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छत्तीसगढ़ में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, सीएम की नाराजगी के बाद तीन जिलों के एसपी बदले — IPS अंकिता शर्मा बनीं राजनांदगांव की नई एसपी

छत्तीसगढ़ में कलेक्टर-आईजी-एसपी कॉन्फ्रेंस के बाद पुलिस विभाग में बड़ा reshuffle किया गया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की नाराजगी के बाद सरकार ने तीन जिलों के पुलिस अधीक्षकों को हटा दिया है। शुक्रवार को गृह (पुलिस) विभाग ने सात आईपीएस अधिकारियों के तबादले और नई पदस्थापना के आदेश जारी किए। जारी आदेश के अनुसार, राजनांदगांव के एसपी मोहित गर्ग को उनके पद से हटाकर सहायक पुलिस महानिरीक्षक, पुलिस मुख्यालय नवा रायपुर में पदस्थ किया गया है। वहीं शक्ति जिले की एसपी अंकिता शर्मा को राजनांदगांव की नई पुलिस अधीक्षक नियुक्त किया गया है। मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के एसपी चंद्रमोहन सिंह को भी स्थानांतरित कर निदेशक, ट्रेनिंग, ऑपरेशन, अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएं, नगर सेना एवं नागरिक सुरक्षा मुख्यालय भेजा गया है। उनकी जगह सहायक पुलिस महानिरीक्षक रतना सिंह को जिले की कमान सौंपी गई है। इसी तरह कोंडागांव के एसपी यदुवली अक्षय कुमार को हटाकर एआईजी, पुलिस मुख्यालय, नवा रायपुर पदस्थ किया गया है। उनके स्थान पर 13वीं वाहिनी सशस्त्र बल, बांगो (कोरबा) के सेनानी पंकज चंद्रा को नया एसपी बनाया गया है। शक्ति जिले की जिम्मेदारी अब 4वीं वाहिनी, छसबल माना के सेनानी प्रफुल्ल ठाकुर को दी गई है। गृह विभाग ने सभी अधिकारियों को तुरंत प्रभाव से अपने नए पदों पर कार्यभार संभालने के निर्देश दिए हैं। खराब प्रदर्शन पर सीएम की सख्ती का असर13 अक्टूबर को हुई कलेक्टर-आईजी-एसपी कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और गृहमंत्री विजय शर्मा ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था, नशा नियंत्रण, सड़क सुरक्षा और साइबर अपराधों पर समीक्षा की थी। इस दौरान कुछ जिलों की पुलिस व्यवस्था को लेकर सीएम ने नाराजगी जताई थी और खराब प्रदर्शन वाले कप्तानों को फटकार लगाई थी। उसी के बाद से तबादले की अटकलें तेज थीं। अब इन तबादलों को उसी सख्ती का परिणाम माना जा रहा है।

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रायपुर में धरना-प्रदर्शन पर दो महीने की रोक: तूता स्थल बंद, वैकल्पिक जगह का फैसला नहीं

रायपुर में धरना-प्रदर्शन पर अस्थायी प्रतिबंध लगा दिया गया है। नवा रायपुर के तूता धरना स्थल पर अगले दो महीने तक किसी भी प्रकार के धरना, प्रदर्शन या सभा की अनुमति नहीं होगी। यह फैसला स्थल के रखरखाव और सुधार कार्य के कारण लिया गया है। कलेक्टर ने जारी किया आदेश जिला कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने आदेश जारी किया है कि अगली सूचना तक तूता धरना स्थल पर कोई भी धरना-प्रदर्शन नहीं किया जा सकेगा।नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने बताया कि यह कार्य लगभग दो महीने तक चलेगा और इस दौरान स्थल को नगर विकास प्राधिकरण के अधीन रखा जाएगा। वैकल्पिक धरना स्थल तय नहीं धरना-प्रदर्शन के लिए फिलहाल किसी वैकल्पिक स्थल की घोषणा नहीं की गई है। इसके चलते राजनीतिक दल, सामाजिक संगठन और आंदोलनकारी फिलहाल प्रदर्शन स्थल उपलब्ध न होने की स्थिति में हैं। तूता धरना स्थल का महत्व तूता धरना स्थल नवा रायपुर के राज्योत्सव मैदान के सामने स्थित है और राज्य स्तर पर संगठनों और राजनीतिक आंदोलनों के लिए आरक्षित माना जाता है। पिछले वर्षों में यहां कई बड़े राजनीतिक और सामाजिक आंदोलन हुए हैं।

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