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रायपुर में छात्रों को राहत: आधार और निवास प्रमाण पत्र पर मिलेगा 5 किलो LPG सिलेंडर

रायपुर में एलपीजी गैस को लेकर हो रही परेशानियों के बीच जिला प्रशासन ने छात्रों के लिए राहत भरा कदम उठाया है। कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह के निर्देश पर कलेक्टरेट स्थित रेडक्रॉस हॉल में अपर कलेक्टर कीर्तिमान सिंह राठौर ने गैस एजेंसियों के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक में गैस की उपलब्धता, स्टॉक और वितरण व्यवस्था को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों ने बताया कि जिले में रहने वाले विद्यार्थियों को अब 5 किलो का छोटा गैस सिलेंडर एजेंसियों द्वारा उपलब्ध कराया जाएगा। इसके लिए छात्रों को केवल अपना आधार कार्ड और निवास प्रमाण पत्र दिखाना होगा। अपर कलेक्टर ने साफ कहा कि जिले में गैस का पर्याप्त भंडार मौजूद है और सभी उपभोक्ताओं को नियमों के अनुसार गैस दी जा रही है। उन्होंने गैस वितरकों को निर्देश दिए कि वितरण में किसी भी प्रकार की लापरवाही न हो। साथ ही चेतावनी दी कि नियमों के खिलाफ सिलेंडर लेने की कोशिश करने या डिलीवरी कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा, एम्स, मेकाहारा, वृद्धाश्रम, अनाथालय और अन्य जरूरी संस्थानों में गैस आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि शहरी क्षेत्रों में 25 दिन और ग्रामीण क्षेत्रों में 45 दिन के बाद ही अगली गैस बुकिंग की जा सकेगी। फिलहाल नए गैस कनेक्शन और सिंगल-डबल कनेक्शन पर अस्थायी रोक लगाई गई है। इंडेन डीलर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष और ऑल एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष विकास मरकाम ने लोगों से अपील की है कि घबराने की जरूरत नहीं है, पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और सभी को नियमानुसार गैस मिलती रहेगी।

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IIM रायपुर दीक्षांत समारोह: विदेश मंत्री एस. जयशंकर बोले—विदेश नीति अब भारतीयों की सुरक्षा से भी जुड़ी

भारतीय प्रबंधन संस्थान रायपुर में शनिवार को 15वां वार्षिक दीक्षांत समारोह आयोजित किया गया, जिसमें 2023-25 बैच के 552 विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं। इस अवसर पर देश के विदेश मंत्री एस. जयशंकर मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए और छात्रों को भविष्य के प्रति जिम्मेदार और दूरदर्शी दृष्टिकोण अपनाने की सलाह दी। अपने संबोधन में जयशंकर ने कहा कि आज के छात्र ऐसे दौर में स्नातक हो रहे हैं जब भारत जनसांख्यिकीय ऊर्जा, तकनीकी क्षमता और बढ़ती वैश्विक भागीदारी के अहम मोड़ पर खड़ा है। उन्होंने इसे अवसर और जिम्मेदारी दोनों का समय बताया और कहा कि युवा आने वाले समय में न केवल संस्थानों और उद्योगों को दिशा देंगे, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका भी तय करेंगे। उन्होंने युवाओं को लगातार सीखते रहने, मेहनत करने और रिश्तों को महत्व देने की सलाह दी। साथ ही स्पष्ट सोच और सही निर्णय क्षमता को सफलता की कुंजी बताया। उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी के पास तकनीक और जानकारी तक आसान पहुंच है, जिससे उनके अवसर पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गए हैं। वैश्विक हालात को ‘स्ट्रक्चर्ड टर्बुलेंस’ बताते हुए जयशंकर ने कहा कि यह केवल अव्यवस्था नहीं, बल्कि बदलते शक्ति संतुलन, तकनीकी बदलाव और संसाधनों के पुनर्वितरण का संकेत है। ऐसे माहौल में देशों और कंपनियों के लिए जोखिम का संतुलन और विविधता बेहद जरूरी हो गई है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आज की विदेश नीति सिर्फ कूटनीति या व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीय कंपनियों के लिए नए बाजार खोलने, तकनीक की उपलब्धता सुनिश्चित करने और विदेशों में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा से सीधे जुड़ी हुई है। जयशंकर ने कहा कि दुनिया में वैश्वीकरण का पुराना मॉडल बदल रहा है और आत्मनिर्भरता पर जोर बढ़ रहा है। भारत के लिए इसका मतलब है कि खाद्य, स्वास्थ्य, ऊर्जा और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में मजबूती लाना जरूरी है। उन्होंने छात्रों को ‘भाग्यशाली पीढ़ी’ बताते हुए वैश्विक समझ विकसित करने की अपील की। उन्होंने यह भी कहा कि आज करियर केवल देश तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वैश्विक स्तर पर बनते हैं। युवाओं को ‘कैन-डू स्पिरिट’ के साथ आगे बढ़ने और अपने हितों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेने की सलाह दी। अंत में उन्होंने बताया कि पिछले एक दशक में भारत ने डिजिटल तकनीक और बुनियादी ढांचे—जैसे हाईवे, रेल, पोर्ट और एयरपोर्ट—में निवेश कर अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत किया है। भारत अब दुनिया की शीर्ष-5 अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और आगे और भी बेहतर संभावनाएं मौजूद हैं।

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B.Com-LLB रिजल्ट में गड़बड़ी पर बवाल, 25.86% रिजल्ट के बाद छात्रों का प्रदर्शन

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर स्थित अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय में बीकॉम-एलएलबी के परीक्षा परिणाम को लेकर छात्रों में भारी नाराजगी देखने को मिली। रिजल्ट में कथित गड़बड़ियों के विरोध में छात्रों ने विश्वविद्यालय परिसर में जमकर प्रदर्शन किया और रजिस्ट्रार कार्यालय का घेराव किया। छात्रों का आरोप है कि कई ऐसे अभ्यर्थियों को अनुपस्थित (एब्सेंट) दिखा दिया गया है, जिन्होंने परीक्षा में भाग लिया था। वहीं कुछ छात्रों को शून्य अंक दिए गए हैं, जिससे परिणाम पर सवाल खड़े हो रहे हैं। इसी के चलते लॉ के छात्रों ने एनएसयूआई के साथ मिलकर करीब तीन घंटे तक विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की कि उत्तर पुस्तिकाओं की दोबारा जांच बिना किसी शुल्क के कराई जाए। उनका कहना है कि गलती विश्वविद्यालय की है, इसलिए छात्रों से री-इवैल्यूएशन फीस लेना उचित नहीं है। छात्रों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। विश्वविद्यालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, बीकॉम-एलएलबी प्रथम सेमेस्टर का परिणाम मात्र 25.86 प्रतिशत रहा, जो काफी निराशाजनक है। वहीं एलएलएम प्रथम सेमेस्टर का परिणाम 50.35 प्रतिशत दर्ज किया गया। बीए-एलएलबी प्रथम सेमेस्टर का परिणाम 47.87 प्रतिशत रहा, जबकि तीसरे और नौवें सेमेस्टर में क्रमशः 78.57 प्रतिशत और 84.34 प्रतिशत छात्र पास हुए। इसके अलावा एलएलबी पार्ट थ्री (पुराना कोर्स) का रिजल्ट 44.12 प्रतिशत रहा। नए कोर्स में बीकॉम-एलएलबी प्रथम सेमेस्टर का प्रदर्शन सबसे कमजोर रहा, जबकि अन्य सेमेस्टर में अपेक्षाकृत बेहतर परिणाम देखने को मिले। मामले पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. तारणीश गौतम ने कहा कि छात्रों के हितों का पूरा ध्यान रखा जाएगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि जिन छात्रों को अपने परिणाम पर आपत्ति है, वे अपने कॉलेज के माध्यम से आवेदन करें। इसके लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की गई है और सात दिनों के भीतर उत्तर पुस्तिकाओं की दोबारा जांच कर परिणाम जारी कर दिया जाएगा।

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सरकारी शिक्षकों पर नई शर्त: टीईटी पास नहीं किया तो खतरे में नौकरी, 80 हजार पर असर

Chhattisgarh के सरकारी प्राइमरी और मिडिल स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों के लिए अब शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) पास करना अनिवार्य कर दिया गया है। यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद लागू हुआ है, जिसके चलते अब टीईटी क्वालिफाई किए बिना शिक्षकों की नौकरी पर संकट खड़ा हो गया है। प्रदेश में कुल लगभग 1.93 लाख शिक्षक कार्यरत हैं, जिनमें से करीब 42 प्रतिशत यानी लगभग 80 हजार शिक्षक ऐसे हैं, जिन्होंने अभी तक टीईटी पास नहीं किया है। इन शिक्षकों को अब परीक्षा पास करनी होगी, तभी उनकी सेवा जारी रह सकेगी। इस फैसले से राज्य के कई जिलों में बड़ी संख्या में शिक्षक प्रभावित हुए हैं। खासतौर पर कोंडागांव, महासमुंद, बलौदाबाजार, सरगुजा, रायगढ़ और सूरजपुर जैसे जिलों में सबसे ज्यादा संख्या ऐसे शिक्षकों की है, जो टीईटी क्वालिफाई नहीं हैं। इस बीच शिक्षक संगठनों ने लंबे समय से मांग की है कि आरटीई लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से छूट दी जाए। उनका कहना है कि वे वर्षों से सेवा दे रहे हैं और उनकी योग्यता पहले ही सिद्ध हो चुकी है। हाल ही में फरवरी में Chhattisgarh Professional Examination Board द्वारा आयोजित सीजी टीईटी परीक्षा में कई शिक्षक शामिल हुए थे, लेकिन बहुत कम ही सफल हो पाए। शिक्षकों का कहना है कि परीक्षा का स्तर काफी कठिन था और लंबे समय बाद दोबारा परीक्षा देना उनके लिए चुनौतीपूर्ण है। शिक्षक संगठनों ने सुझाव दिया है कि या तो टीईटी से छूट दी जाए या फिर विभागीय परीक्षा आयोजित कर राहत दी जाए। इस मामले में फिलहाल स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से कोई अंतिम निर्देश जारी नहीं हुआ है। राज्य के स्कूल शिक्षा मंत्री Gajendra Yadav ने कहा कि सरकार इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार कर रही है और ऐसा समाधान निकाला जाएगा जिससे किसी शिक्षक को नुकसान न हो।

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रायपुर में नि:संतान दंपती बच्चों की पढ़ाई के लिए बने फरिश्ता, पड़ोसी ने घर भी दिया

रायपुर के राजीव और नैना पटले सात साल की शादी के बाद भी संतान सुख से वंचित रहे। इसके बावजूद उन्होंने दूसरों के बच्चों की जिंदगी को रोशन करने का निर्णय लिया। अब यह दंपती उन बच्चों को पढ़ा रहे हैं, जिनकी मांएं घरों में काम करती हैं या दैनिक मजदूरी पर निर्भर हैं। वर्तमान में वे करीब 70 बच्चों को शिक्षा दे रहे हैं। अकेली मांएं अपने बच्चों को सुबह दंपती के पास छोड़ आती हैं। जो माता-पिता सक्षम हैं, वे फीस देते हैं; जो नहीं दे सकते, उनके लिए शिक्षा निःशुल्क है। शुरू में यह कोचिंग सेंटर था, लेकिन अब यह डे-बोर्डिंग स्कूल जैसी सुविधा बन गई है। पड़ोसी का सहयोग पटले दंपती को उनकी पड़ोसी रेखा केशरवानी ने अपना खाली घर नि:शुल्क दे दिया। उन्होंने कहा कि यह बच्चों को यह महसूस कराने के लिए है कि वे असली स्कूल में पढ़ रहे हैं। फीस का इस्तेमाल जरूरतमंद बच्चों के लिए राजीव (MBA) और नैना (MA) ने बताया कि उनका इलेक्ट्रिक पंप का बिजनेस 2017-2019 में बंद हो गया। कोविड के दौरान उन्होंने मोहल्ले के बच्चों की पढ़ाई शुरू की। संपन्न परिवारों से मिली फीस से उनका खर्च चलता है और बाकी जरूरतमंद बच्चों के लिए कॉपियां, बैग और ड्रेस खरीदी जाती हैं। व्यक्तिगत संघर्ष और शिक्षा की जिम्मेदारी डेढ़ साल पहले सड़क हादसे में राजीव की मृत्यु हो गई। नंदिनी राव और अन्य माता-पिता अब बच्चों की सुरक्षा और पढ़ाई के लिए दंपती पर भरोसा करते हैं। नैना मैम ने जिम्मेदारी संभाली और बच्चों की पढ़ाई को सुनिश्चित किया। माँ पद्मिनी यादव ने बताया कि उनकी बेटी गीत और बेटा योग अच्छे अंक ला रहे हैं। दूसरी मां नंदिनी राव कहती हैं कि उनके बच्चों को पहले पिता ने लावारिस छोड़ दिया था, लेकिन अब वे सुरक्षित और पढ़ाई में ध्यान दे रहे हैं।

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मस्तूरी के स्कूल में शिक्षक का जन्मदिन अनोखे अंदाज में मनाया, न्योता भोज में जुटे ग्रामीण

मस्तूरी क्षेत्र के शासकीय प्राथमिक शाला फदहा, संकुल सरवानी में पदस्थ शिक्षक गौरव निर्णेजक का जन्मदिन विद्यालय परिसर में विशेष रूप से मनाया गया। इस अवसर पर न्योता भोज का आयोजन किया गया, जिसमें स्कूल स्टाफ और ग्रामीणों ने मिलकर भाग लिया। कार्यक्रम में संस्था प्रमुख कुमारी मार्को, संतोषी सिदार और विजय प्रधान के साथ-साथ मनोहर सिंह मार्को, रंजीत मरावी, राधेश्याम गोस्वामी, सुमन फूलगुरिया और अंजली मरकाम उपस्थित रहे। इसके अलावा विद्यालय के रसोइयों और गांव के कई लोग भी कार्यक्रम में शामिल हुए। सभी ने मिलकर शिक्षक गौरव निर्णेजक को जन्मदिन की बधाई दी और उनके अच्छे स्वास्थ्य व उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इस आयोजन के दौरान स्कूल में आपसी सहयोग और अपनत्व का माहौल देखने को मिला, जिसने इस अवसर को खास बना दिया।

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छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल Chhattisgarh Board of Secondary Education ने 12वीं कक्षा की हिंदी विषय की परीक्षा को रद्द कर दिया है।

छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल Chhattisgarh Board of Secondary Education ने 12वीं कक्षा की हिंदी विषय की परीक्षा को रद्द कर दिया है। सोशल मीडिया पर प्रश्नपत्र वायरल होने के बाद यह फैसला लिया गया है। अब इस विषय की पुनः परीक्षा 10 अप्रैल को आयोजित की जाएगी, जिसके लिए बोर्ड ने नई तैयारियां शुरू कर दी हैं। जांच में यह सामने आया है कि वायरल हुआ प्रश्नपत्र मुख्य परीक्षा के सेट-बी से काफी हद तक मेल खाता था। गोपनीयता भंग होने की पुष्टि के बाद बोर्ड ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कराई है और साइबर सेल को जांच सौंपी गई है। बोर्ड का कहना है कि परीक्षा की निष्पक्षता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए इसे रद्द करना जरूरी था। इस फैसले का असर सबसे ज्यादा उन छात्रों पर पड़ा है, जिन्होंने ईमानदारी से परीक्षा दी थी और आगे की तैयारी में जुट गए थे। अब उन्हें दोबारा उसी विषय की तैयारी करनी होगी, जिससे मानसिक दबाव बढ़ गया है। खासकर JEE और NEET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए यह स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो गई है। कई छात्र कोचिंग के लिए दूसरे शहरों में जा चुके थे, जिन्हें अब दोबारा परीक्षा देने के लिए वापस लौटना पड़ रहा है। इससे उनके समय और पढ़ाई दोनों पर असर पड़ रहा है। वहीं, परीक्षा दोबारा होने के कारण मूल्यांकन प्रक्रिया में देरी होना तय है, जिसका सीधा असर रिजल्ट और आगामी कॉलेज एडमिशन प्रक्रिया पर पड़ सकता है। रायगढ़ जिले में इस परीक्षा के लिए पहले 109 केंद्र बनाए गए थे, लेकिन अब हाई स्कूलों को परीक्षा केंद्र से बाहर कर दिया गया है और केवल 100 केंद्रों पर ही परीक्षा आयोजित की जाएगी। केंद्राध्यक्ष पहले की तरह ही रहेंगे और गोपनीय सामग्री का वितरण सख्त निगरानी में किया जाएगा। यह घटना साल 2006 की याद दिलाती है, जब 12वीं हिंदी का पेपर लीक हुआ था और परीक्षा को रद्द कर दोबारा आयोजित करना पड़ा था। करीब 19 साल बाद भी ऐसी घटनाएं सामने आना परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा पर सवाल खड़े करता है। फिलहाल साइबर टीम लीक के स्रोत की जांच कर रही है और विभाग ने इस बार कड़े सुरक्षा इंतजाम करने का दावा किया है।

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छात्रों के स्क्रीन टाइम पर सख्ती: Karnataka सरकार का ड्राफ्ट—मनोरंजन के लिए रोज 1 घंटा, शाम 7 बजे बाद इंटरनेट बंद

Karnataka सरकार ने 9वीं से 12वीं कक्षा के छात्रों के डिजिटल उपयोग को नियंत्रित करने के लिए नई ड्राफ्ट पॉलिसी जारी की है। इसमें पढ़ाई के अलावा मनोरंजन के लिए स्क्रीन टाइम प्रतिदिन अधिकतम 1 घंटा रखने की सिफारिश की गई है। साथ ही शाम 7 बजे के बाद इंटरनेट बंद करने का सुझाव भी दिया गया है। प्रस्ताव में कहा गया है कि बच्चों को सोने से कम से कम एक घंटे पहले मोबाइल या स्क्रीन से दूर रखा जाए। मोबाइल में ‘चाइल्ड प्लान’ लागू करने की सलाह दी गई है, जिसमें सीमित इंटरनेट और ऑडियो-ओनली जैसे विकल्प शामिल होंगे। उम्र के अनुसार सुरक्षित डिवाइस और ऑपरेटिंग सिस्टम विकसित करने की भी बात कही गई है। सरकार का कहना है कि लगभग 25 प्रतिशत किशोर इंटरनेट की लत से प्रभावित हैं, जिससे नींद की कमी, चिंता और एकाग्रता में गिरावट जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। इसी को देखते हुए यह पहल की गई है। ड्राफ्ट के अनुसार स्कूलों में डिजिटल वेल-बीइंग, ऑनलाइन सुरक्षा, साइबर बुलिंग और प्राइवेसी जैसे विषय पढ़ाए जाएंगे। टेक-फ्री पीरियड, डिजिटल डिटॉक्स डे और व्हाट्सऐप की जगह डायरी के माध्यम से संवाद जैसे कदम भी सुझाए गए हैं। इसके अलावा स्कूलों में काउंसलिंग व्यवस्था मजबूत करने, शिक्षकों को डिजिटल लत के संकेत पहचानने की ट्रेनिंग देने और अभिभावकों की सक्रिय भूमिका तय करने पर भी जोर दिया गया है। AI के उपयोग पर भी अलग दिशा-निर्देश बनाने की बात कही गई है। यह ड्राफ्ट स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग और National Institute of Mental Health and Neurosciences सहित कई संस्थानों के सहयोग से तैयार किया गया है।

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म्यूनिसिपल स्कूल मैदान बना कचरा घर, घास खत्म; खिलाड़ियों को हो रही परेशानी

राजनांदगांव शहर के म्यूनिसिपल स्कूल मैदान की हालत लगातार खराब होती जा रही है। मैदान में जगह-जगह कचरा फैल गया है, जिससे न सिर्फ शहर की सुंदरता प्रभावित हो रही है बल्कि यहां अभ्यास करने वाले खिलाड़ियों को भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मैदान से लगे गांधी सभा गृह के पास लोग कचरा फेंक रहे हैं। इस कचरे में प्लास्टिक, पन्नी और कपड़े शामिल हैं, जिन्हें आवारा कुत्ते खींचकर मैदान तक ले आते हैं। परिणामस्वरूप पूरे मैदान में गंदगी फैल गई है। गांधी सभा गृह की ओर से मैदान में प्रवेश करने वाले रास्ते पर बड़ी मात्रा में पुराने कपड़े और कचरा बिखरा पड़ा है। लंबे समय से सफाई नहीं होने के कारण स्थिति और बदतर होती जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मैदान में घास भी लगभग खत्म हो चुकी है और नियमित सफाई नहीं होने से यहां खेलना मुश्किल हो गया है। नागरिकों ने प्रशासन से जल्द सफाई अभियान चलाकर मैदान को उपयोग योग्य बनाने की मांग की है। स्थानीय निवासी आशिष यादव ने बताया कि यदि समय रहते सफाई नहीं की गई तो मैदान पूरी तरह बेकार हो सकता है और बच्चों व खिलाड़ियों के लिए सुरक्षित स्थान नहीं बचेगा।

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12वीं का हिंदी पेपर रद्द, 10 अप्रैल को दोबारा परीक्षा; एग्जाम से 10 घंटे पहले हुआ था लीक

छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल ने कक्षा 12वीं की हिंदी विषय की परीक्षा को निरस्त कर दिया है। 14 मार्च 2026 को आयोजित यह परीक्षा अब अमान्य मानी जाएगी और छात्रों को 10 अप्रैल 2026 को दोबारा परीक्षा देनी होगी। बोर्ड के अनुसार सोशल मीडिया और कुछ समाचार माध्यमों में हिंदी प्रश्नपत्र के सेट ‘बी’ के लीक होने की जानकारी सामने आई थी। मामले को गंभीर मानते हुए इसकी जांच के लिए साइबर थाने को सूचना दी गई और सिटी कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराई गई। जांच रिपोर्ट पर विचार करने के बाद 23 मार्च 2026 को हुई परीक्षा समिति की बैठक में परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया गया। 10 अप्रैल को फिर होगी परीक्षा बोर्ड ने नई तारीख के साथ परीक्षा का समय भी तय कर दिया है। हिंदी विषय की परीक्षा 10 अप्रैल को सुबह 9:00 बजे से दोपहर 12:15 बजे तक आयोजित होगी। विद्यार्थियों को 9 बजे तक केंद्र पहुंचना अनिवार्य होगा। 9:05 बजे उत्तर पुस्तिका, 9:10 बजे प्रश्नपत्र और 9:15 बजे से लिखने की अनुमति दी जाएगी। बोर्ड ने छात्रों को नई समय-सारणी ध्यान से देखने और उसी अनुसार तैयारी करने की सलाह दी है। यह भी कहा गया है कि आवश्यकता पड़ने पर परीक्षा की तारीख या समय में बिना पूर्व सूचना बदलाव किया जा सकता है। यदि परीक्षा के दिन कोई अवकाश घोषित होता है, तब भी परीक्षा निर्धारित समय पर ही होगी। टेलीग्राम पर पहले ही पहुंच गया था पेपर जानकारी के मुताबिक 13 मार्च की रात करीब 11 बजे एक टेलीग्राम ग्रुप में “12th Board Hindi Paper — CG Board 2026 Real Question Paper” के नाम से एक तस्वीर साझा की गई थी। इस तस्वीर में हाथ से लिखे हुए 15 प्रश्न थे और पहले पेज पर सेट ‘B’ अंकित था। कुछ ही समय में यह इमेज हजारों छात्रों तक पहुंच गई। 14 मार्च को जब परीक्षा शुरू हुई तो सेट ‘B’ में वही प्रश्न और उसी क्रम में पूछे गए, जो वायरल तस्वीर में थे। यहां तक कि वैकल्पिक प्रश्न भी मेल खाते पाए गए। इससे स्पष्ट हुआ कि परीक्षा शुरू होने से लगभग 10 घंटे पहले ही पेपर लीक हो चुका था। कई विषयों के पेपर शेयर होने की आशंका जांच में यह भी सामने आया कि सिर्फ हिंदी ही नहीं, बल्कि अंग्रेजी और अन्य विषयों के प्रश्नपत्र भी इसी तरह अलग-अलग ग्रुपों में साझा किए गए थे। यह मामला किसी एक जिले तक सीमित नहीं बताया जा रहा है। साइबर पुलिस कर रही जांच पेपर लीक की शिकायत परीक्षा के दो दिन बाद पुलिस और साइबर थाने में दर्ज कराई गई। फिलहाल साइबर पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। बोर्ड अधिकारियों का कहना है कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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