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बिलासपुर गोलीकांड: कांग्रेस में वर्चस्व की जंग में चली गोलियां — नितेश सिंह की हत्या की साजिश रचने वाला मास्टरमाइंड युवा कांग्रेस का पूर्व उपाध्यक्ष निकला

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में हाल ही में हुए गोलीकांड ने कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति को हिला कर रख दिया है। पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि इस हमले के पीछे युवा कांग्रेस के पूर्व उपाध्यक्ष विश्वजीत अनंत का हाथ था, जिसने राजनीतिक वर्चस्व और जमीन विवाद के चलते कांग्रेस नेता और जनपद उपाध्यक्ष नितेश सिंह की हत्या की साजिश रची थी। विश्वजीत और उसके साथियों ने पहले दो बार हत्या की कोशिश की, लेकिन असफल रहे। तीसरी बार, 28 अक्टूबर की शाम उन्होंने नितेश सिंह के मस्तूरी स्थित ऑफिस के बाहर अंधाधुंध फायरिंग कर दी। हालांकि, हमले में नितेश बाल-बाल बच गए और उनके साथियों को मामूली चोटें आईं। 24 घंटे में पुलिस ने किया खुलासा, मास्टरमाइंड समेत 7 आरोपी गिरफ्तार पुलिस ने तेजी दिखाते हुए 24 घंटे के भीतर ही मास्टरमाइंड विश्वजीत अनंत, उसके भाइयों और साथियों सहित सात आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जिनमें दो नाबालिग भी शामिल हैं। एसएसपी रजनेश सिंह ने बताया कि हमले के दौरान 14 राउंड फायरिंग की गई थी। अगर हमलावर प्रोफेशनल शूटर होते, तो बड़ा हादसा हो सकता था। पुलिस ने मौके से दो देसी पिस्टल, एक कट्टा, कई कारतूस और मैगजीन बरामद किए हैं। राजनीतिक वर्चस्व और जमीन विवाद से उपजी रंजिश जांच में सामने आया है कि आरोपी विश्वजीत अनंत और नितेश सिंह के बीच राजनीतिक गुटबाजी और जमीन विवाद लंबे समय से चल रहा था। नितेश ने जनपद उपाध्यक्ष चुनाव में नागेंद्र राय को हराया था, जो अब विपक्षी गुट में हैं। पुलिस का मानना है कि इसी राजनीतिक प्रतिद्वंदिता और वर्चस्व की लड़ाई ने इस घटना को जन्म दिया। सोशल मीडिया पर वायरल हुए आरोपी के मंत्री और धार्मिक गुरुओं के साथ फोटो गिरफ्तारी के बाद विश्वजीत अनंत के सोशल मीडिया अकाउंट से कई तस्वीरें और वीडियो वायरल हुए हैं, जिनमें वह राज्य सरकार के मंत्री और समाज के धार्मिक गुरुओं के साथ दिखाई दे रहा है। इनमें मंत्री खुशवंत साहेब के साथ उसके करीबी संबंधों की झलक मिलती है। यह भी सामने आया कि घटना के बाद विश्वजीत ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो स्टोरी अपलोड की, जिसमें वह कार चलाते हुए बैकग्राउंड में “बंदूक लाठी चाहे गोली बरसाए” गाने पर रील बना रहा था। पुलिस जुटा रही हथियारों के स्रोत की जानकारी पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि हमलावरों को हथियार और कारतूस कहां से मिले। एसएसपी ने कहा है कि अवैध हथियार सप्लाई चेन से जुड़े सभी लोगों को गिरफ्तार किया जाएगा। जांच अभी जारी है और पुलिस अन्य संभावित आरोपियों की भी पहचान कर रही है।

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बिलासपुर में नर्सिंग छात्रा ने की खुदकुशी: क्लास के बाद लौटी अकेले, हॉस्टल के कमरे में फांसी पर लटकती मिली; मोबाइल पर आते थे अनजान कॉल

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में नर्सिंग कॉलेज की एक छात्रा ने हॉस्टल के कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। यह घटना मंगलवार की शाम मस्तूरी थाना क्षेत्र में हुई। मृतका की पहचान 22 वर्षीय यामिनी कोसले, निवासी लोहर्सी गांव (पचपेड़ी) के रूप में की गई है। यामिनी संदीपनी नर्सिंग कॉलेज में फर्स्ट ईयर की छात्रा थी और पेंड्री स्थित एक निजी हॉस्टल में रहती थी। जानकारी के अनुसार, मंगलवार को यामिनी अपनी सहेलियों के साथ कॉलेज गई थी। क्लास खत्म होने के बाद वह दोपहर में सहेलियों से पहले हॉस्टल लौट आई। शाम करीब साढ़े छह बजे जब बाकी छात्राएं हॉस्टल पहुंचीं, तो उन्होंने यामिनी को कमरे के पंखे से लटकता पाया। तुरंत इसकी सूचना हॉस्टल संचालक और पुलिस को दी गई। मौके पर नहीं मिला सुसाइड नोट, मौत की वजह बनी रहस्य पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। बुधवार को शव परिजनों को सौंप दिया गया। फोरेंसिक टीम ने भी घटनास्थल की जांच की, लेकिन कमरे से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। फिलहाल आत्महत्या के कारणों का खुलासा नहीं हो सका है। अनजान नंबरों से आ रहे थे फोन, पुलिस कर रही कॉल डिटेल जांच जांच में सामने आया है कि यामिनी को पिछले कुछ दिनों से अनजान नंबरों से फोन कॉल आ रहे थे। पुलिस ने इन कॉल्स को लेकर परिजनों से पूछताछ की, लेकिन उन्होंने किसी भी नंबर को पहचानने से इनकार किया। थाना प्रभारी हरीश टांडेकर ने बताया कि छात्रा का मोबाइल जब्त कर लिया गया है और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) की जांच शुरू कर दी गई है। इसके अलावा, हॉस्टल में रहने वाली अन्य छात्राओं से भी पूछताछ की जा रही है ताकि घटना के पीछे की वजह का पता लगाया जा सके।

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भिलाई में युवती से साइबर ठगी: बांग्लादेश के नंबर से मिली धमकी, एडिट फोटो वायरल करने की दी चेतावनी

भिलाई की एक युवती ऑनलाइन लोन ऐप के जाल में फंस गई और बांग्लादेश के नंबर से कॉल करने वाले ठगों का शिकार बन गई। युवती ने मोबाइल पर लोन के लिए आवेदन किया था, लेकिन ऐप इंस्टॉल करते समय उसने अपने फोन का पूरा एक्सेस दे दिया। इसके बाद ठगों ने उसकी तस्वीरों को एडिट कर आपत्तिजनक बनाते हुए ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया। मामला दुर्ग जिले के जामुल थाना क्षेत्र का है। जानकारी के अनुसार, युवती ने सोशल मीडिया पर दिखे एक लोन ऐप का विज्ञापन देखकर उसे डाउनलोड किया। ऐप ने मोबाइल गैलरी, कॉन्टेक्ट और फाइल्स तक पहुंच मांगी, जिसे युवती ने अनुमति दे दी। इसके बाद उसने लोन के लिए जरूरी जानकारी और दस्तावेज अपलोड किए, लेकिन लोन की राशि नहीं मिली। कुछ दिनों बाद उसे बांग्लादेश के नंबर से व्हाट्सऐप कॉल आने लगी। कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को लोन कंपनी का प्रतिनिधि बताया और किश्त भरने का दबाव डालने लगा। जब युवती ने कहा कि उसे कोई लोन नहीं मिला है, तो आरोपी ने उसकी फोटो को एडिट कर आपत्तिजनक बना दिया और वायरल करने की धमकी दी। डर के कारण युवती ने 6 हजार रुपये ठगों को भेज दिए। एक बार भुगतान करने के बाद ठग लगातार और पैसे मांगने लगे। तब युवती को ठगी का एहसास हुआ और उसने जामुल थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच साइबर क्राइम सेल को सौंप दी है। थाना प्रभारी रामेन्द्र कुमार सिंह के मुताबिक, पुलिस आरोपी के मोबाइल नंबर और बैंक खाते की जांच कर रही है। साइबर एक्सपर्ट की सलाह:

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बरगद के पेड़ से लटकता मिला युवक का शव, प्रेम-प्रसंग में उठाया आत्मघाती कदम – त्योहार मनाने गांव आया था इलेक्ट्रिशियन

दुर्ग जिले के पाटन थाना क्षेत्र में मंगलवार सुबह एक युवक का शव बरगद के पेड़ से लटका हुआ मिला। घटना ग्राम पंदर के खेल मैदान की है, जहां ग्रामीणों ने सुबह-सुबह शव देखकर पुलिस को सूचना दी। मौके से युवक की मोटरसाइकिल, मोबाइल फोन और पर्स बरामद किए गए हैं। मृतक की पहचान अरुण कुमार साहू (22 वर्ष) निवासी ग्राम कुम्हली के रूप में हुई है। अरुण पेशे से इलेक्ट्रिशियन था और रायपुर में किराए के मकान में रहकर काम करता था। दीपावली के मौके पर वह अपने गांव लौटा था। प्रेम-प्रसंग से जुड़ा मामला होने की आशंका पुलिस की प्रारंभिक जांच में यह मामला प्रेम-प्रसंग से जुड़ा आत्महत्या का मामला माना जा रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि अरुण पिछले कुछ समय से मोबाइल में व्यस्त रहता था और आसपास के लोगों से दूरी बनाए हुए था। सोमवार दोपहर करीब 2 बजे वह घर से निकला था, लेकिन रात तक वापस नहीं लौटा। अगली सुबह ग्रामीणों ने खेल मैदान के पास उसके शव को देखा। पिता ने भी की थी आत्महत्या जानकारी के अनुसार, अरुण के पिता ने भी करीब 5-6 साल पहले आत्महत्या की थी। परिवार में अब उसकी मां और एक बहन हैं। पुलिस ने मर्ग कायम कर मोबाइल फोन जब्त कर लिया है ताकि मौत की असली वजह का पता लगाया जा सके। फिलहाल पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार है और मामले की जांच जारी है।

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छत्तीसगढ़ में कारोबारियों के ठिकानों पर ACB-EOW की बड़ी कार्रवाई, DMF घोटाले से जुड़ी जांच जारी

छत्तीसगढ़ में बुधवार सुबह एसीबी (ACB) और ईओडब्ल्यू (EOW) की संयुक्त टीम ने राज्य के कई जिलों में एक साथ छापेमारी की। रायपुर, दुर्ग, धमतरी और राजनांदगांव में यह कार्रवाई डीएमएफ (District Mineral Fund) घोटाले से जुड़ी जांच के तहत की गई है। रायपुर में पचपेड़ी नाका स्थित वॉलफोर्ट इंक्लेव में अशोक और अमित कोठारी के घर छापा मारा गया। दोनों का इक्विपमेंट सप्लाई का कारोबार है।राजनांदगांव में राधाकृष्ण अग्रवाल, ललित भंसाली और यश नाहटा के यहां दबिश दी गई। इनमें राधाकृष्ण अग्रवाल कोल कारोबार से जुड़े हैं, जबकि ललित भंसाली सरकारी स्कूलों के सामान सप्लाई करते हैं। यश नाहटा इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जैसे कंप्यूटर और टीवी की सप्लाई करते हैं। दुर्ग के महावीर नगर में कारोबारी नीलेश पारख के घर जांच हुई, वहीं धमतरी के सिर्री गांव में ठेकेदार अभिषेक त्रिपाठी के यहां पांच घंटे तक तलाशी चली। सुबह 7 बजे शुरू हुई इस कार्रवाई में टीम ने कई दस्तावेज जब्त किए। सूत्रों के अनुसार, यह जांच DMF फंड से जुड़ी सरकारी सप्लाई और कमीशन लेनदेन में अनियमितताओं को लेकर की जा रही है। टीमों ने कई वित्तीय रिकॉर्ड और दस्तावेज जब्त किए हैं। अब तक इस मामले में किसी अधिकारी की ओर से आधिकारिक बयान नहीं आया है। ⚖️ क्या है DMF घोटाला? ईडी (ED) की रिपोर्ट के आधार पर ईओडब्ल्यू ने आईपीसी की धारा 120बी और 420 के तहत मामला दर्ज किया है। जांच में सामने आया है कि डिस्ट्रिक्ट माइनिंग फंड (DMF) के तहत टेंडर आवंटन में भारी गड़बड़ियां की गईं। ठेकेदारों और बिचौलियों ने मिलकर करोड़ों रुपये का घोटाला किया। जांच में यह भी खुलासा हुआ कि DMF प्रोजेक्ट में फंड खर्च के नियमों को इस तरह बदला गया कि अधिक कमीशन वाले प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी जा सके।इस घोटाले में कलेक्टर को 40%, सीईओ को 5%, एसडीओ को 3% और सब-इंजीनियर को 2% तक कमीशन दिया गया। कोरबा जिले में हुए 575 करोड़ रुपये के DMF स्कैम की जांच में यह सब उजागर हुआ है। एसीबी की रिपोर्ट के मुताबिक 76.50 लाख रुपये नकद, कई डिजिटल डिवाइस, फर्जी फर्मों से जुड़े दस्तावेज और 8 बैंक खाते जब्त किए गए हैं, जिनमें करीब 35 लाख रुपये जमा थे। ईडी की रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि ठेकेदारों ने अधिकारियों और नेताओं को 25% से 40% तक कमीशन दिया था। घूस की रकम को फर्जी अकाउंट्स और डमी कंपनियों के जरिए छिपाया गया था।

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रायपुर में राज्योत्सव से पहले छत्तीसगढ़ महतारी की मूर्ति हुई क्षतिग्रस्त, क्रांति सेना ने किया प्रदर्शन

राजधानी रायपुर में राज्योत्सव से पहले छत्तीसगढ़ महतारी की मूर्ति तोड़े जाने की घटना ने हड़कंप मचा दिया है। घटना की जानकारी मिलने पर छत्तीसगढ़ी क्रांति सेना के सदस्य तुरंत मौके पर पहुंचे और विरोध प्रदर्शन किया। संगठन ने इसे छत्तीसगढ़ की अस्मिता पर हमला करार देते हुए कड़ी नाराजगी जताई। यह घटना तेलीबांधा थाना क्षेत्र में हुई। 🔹 घटना का विवरण शहर के VIP चौक के पास राम मंदिर के समीप छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा लगी थी। अज्ञात व्यक्तियों ने देर रात मूर्ति को नुकसान पहुंचाया, जिससे सुबह लोगों ने यह देखा और आसपास इकट्ठा हो गए। 🔹 पुलिस कार्रवाई घटना की सूचना पाते ही तेलीबांधा पुलिस और वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस CCTV फुटेज की जांच कर रही है ताकि आरोपियों की पहचान की जा सके। 🔹 मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि इस घटना में शामिल किसी भी व्यक्ति को नहीं बख्शा जाएगा और उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यह मामला राज्योत्सव के ठीक पहले सामने आने के कारण और भी संवेदनशील हो गया है और प्रशासन ने इसे गंभीरता से लिया है।

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दुर्ग में 16 चाकूबाज गिरफ्तार: धारदार हथियारों के साथ पुलिस ने पकड़ा, 24 घंटे में बड़ी कार्रवाई

दुर्ग जिले में लगातार बढ़ रही चाकूबाजी और असामाजिक घटनाओं पर रोक लगाने के लिए पुलिस ने विशेष अभियान चलाया। इस कार्रवाई में बीते 24 घंटों के भीतर 16 आरोपियों को धारदार हथियारों के साथ गिरफ्तार किया गया है। सभी के खिलाफ आर्म्स एक्ट की धारा 25 और 27 के तहत केस दर्ज कर जेल भेज दिया गया है। इसके अलावा पुलिस ने जिले में 22 असामाजिक तत्वों पर प्रतिबंधात्मक कार्रवाई भी की है, ताकि भविष्य में किसी तरह की वारदात को रोका जा सके। जानकारी के अनुसार, थाना पद्मनाभपुर पुलिस ने पोटिया चौक से मोह. एजाज, सिविल लाइन से इम्तियाज अहमद खान, सुभाष नगर से मोहित ध्रुव और आदर्श नगर से संजय साहू को पकड़ा। सभी के पास से चाकू और अन्य हथियार जब्त किए गए। वहीं, सुपेला थाना पुलिस ने एक नाबालिग, टुनटुन चौहान और श्याम तांडी को अलग-अलग इलाकों से गिरफ्तार किया। इनसे भी धारदार हथियार बरामद किए गए। थाना दुर्ग कोतवाली पुलिस ने निखिल तांडी, विजय ढीमर और भूपेंद्र साहू को पकड़ा, जबकि भिलाई नगर थाना पुलिस ने सोहेब खान और नासिर कुरैशी को गिरफ्तार किया। इनके अलावा वैशाली नगर पुलिस ने आकाश दीप विश्वास और शाहबाज खान, तथा नंदिनी नगर थाना पुलिस ने प्रदीप और पीयूष साहू को हथियारों के साथ गिरफ्तार किया। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, यह कार्रवाई जिले में चलाए जा रहे एंटी-क्राइम अभियान का हिस्सा है। इससे पहले भी 6 आरोपियों को इसी तरह पकड़ा गया था। अब तक कुल 22 आरोपी जेल भेजे जा चुके हैं। पुलिस ने साफ कहा है कि चाकूबाजी, गुंडागर्दी और असामाजिक गतिविधियों में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। यह अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा।

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बिलासपुर में जवाली नाले पर निगम की कार्रवाई, भेदभाव के आरोपों से घिरा प्रशासन

बिलासपुर नगर निगम ने दिवाली के बाद एक बार फिर अवैध कब्जों के खिलाफ अभियान शुरू किया है। शनिवार (25 अक्टूबर) को जवाली नाले के पास बने कई दुकानों और मकानों पर बुलडोजर चलाया गया। इस दौरान स्थानीय लोगों और व्यापारियों ने निगम अधिकारियों पर पक्षपातपूर्ण कार्रवाई का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल केवल सरकारी जमीन पर किए गए कब्जों को हटाया जा रहा है, जबकि अवैध निर्माणों के खिलाफ अलग से नोटिस जारी कर आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं, स्थानीय लोगों का आरोप है कि निगम छोटे व्यापारियों पर सख्ती कर रहा है, जबकि बड़े कब्जाधारियों पर कार्रवाई टाल दी गई है। जानकारी के मुताबिक, निगम ने करीब छह महीने पहले जवाली नाले के पास नजूल भूमि पर हुए अवैध निर्माणों की जांच कराई थी। तब 44 लोगों को नोटिस भेजे गए थे। बावजूद इसके, एक व्यापारी द्वारा बिना अनुमति के चार मंजिला कमर्शियल कॉम्प्लेक्स बना लिया गया, जिस पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। एक महीने पहले भी निगम ने जवाली पुल के पास अवैध निर्माण पर बुलडोजर चलाया था, लेकिन राजनीतिक दबाव के चलते कार्रवाई रोक दी गई थी। इस मामले में व्यापारी वर्ग ने निगम पर सिंधी समाज को निशाना बनाने का आरोप लगाया था, जिस पर मेयर पूजा विधानी ने अफसरों को फटकार लगाई थी। अब दिवाली के बाद अतिक्रमण शाखा फिर से सक्रिय हुई है और चिन्हित कब्जों पर कार्रवाई शुरू की गई है। भवन शाखा प्रभारी अनुपम तिवारी ने कहा कि सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा हटाने की कार्रवाई की जा रही है, जबकि अन्य अवैध निर्माणों को नोटिस भेजने की प्रक्रिया जारी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बड़े बिल्डरों और व्यापारियों के खिलाफ निगम की चुप्पी भ्रष्टाचार और पक्षपात की ओर इशारा करती है।

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रायपुर में बढ़ते अपराधों पर लगेगा लगाम, नवंबर से लागू होगी पुलिस कमिश्नरी प्रणाली

रायपुर में बढ़ती आबादी और तेजी से बढ़ते अपराधों को देखते हुए अब पुलिस कमिश्नरी प्रणाली लागू करने की तैयारी पूरी कर ली गई है। राजधानी में पिछले पांच सालों में अपराध के मामलों में लगभग दो गुना बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वर्ष 2020 में जहां 8,461 मामले दर्ज हुए थे, वहीं 2024 में यह संख्या बढ़कर 17 हजार से अधिक हो गई है। सूत्रों के अनुसार, नई प्रणाली लागू होने से पुलिस को अधिक अधिकार मिलेंगे और प्रशासनिक स्तर पर त्वरित निर्णय लिए जा सकेंगे। अब तक अधिकांश प्रतिबंधात्मक कार्रवाईयों पर जिला प्रशासन की मंजूरी लेनी पड़ती थी, जिससे समय लगता था। कमिश्नरी प्रणाली से इस प्रक्रिया में तेजी आएगी और कानून व्यवस्था बेहतर होने की उम्मीद है। चार जोन में बंटेगा रायपुर, हर जोन में एसपी स्तर के अधिकारीरायपुर को चार जोनों में विभाजित करने की तैयारी चल रही है — रायपुर उत्तर, रायपुर दक्षिण, रायपुर पश्चिम और नवा रायपुर। पुलिस कमिश्नर (सीपी) के अधीन एडिशनल सीपी और ज्वाइंट सीपी जैसे वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी रहेंगे। हर जोन में एसपी स्तर के अधिकारी नियुक्त किए जाएंगे, जिनके अधीन एएसपी, डीएसपी और टीआई रहेंगे। कमिश्नरी में लॉ एंड ऑर्डर, क्राइम, और साइबर क्राइम के लिए अलग-अलग विंग बनाए जाएंगे। अधिकारियों की पोस्टिंग और मुख्यालय तय करने की प्रक्रिया फिलहाल जारी है। बढ़ती जनसंख्या के हिसाब से जरूरी सुधारराजधानी रायपुर की आबादी अब करीब 25 लाख के आसपास पहुंच चुकी है। वर्तमान में जिले में 3,805 पुलिसकर्मी स्वीकृत हैं, जिनमें लगभग 800 पद खाली हैं। नई प्रणाली लागू होने के बाद बल की संख्या 5,000 तक बढ़ाई जाएगी ताकि शहर की सुरक्षा को और मजबूत किया जा सके। पुराने अनुभवी अफसरों की वापसी संभवकमिश्नरी प्रणाली के पहले प्रयोग के रूप में रायपुर में उन अनुभवी अधिकारियों को तैनात करने की योजना है जो पहले यहां कार्य कर चुके हैं। कई आईपीएस और डीएसपी स्तर के अफसरों ने भी राजधानी में दोबारा काम करने की इच्छा जताई है। हालांकि, अफसरों की पोस्टिंग को लेकर विभाग के भीतर खींचतान की खबरें भी सामने आई हैं। पुलिस कमिश्नरी प्रणाली को 1 नवंबर से लागू करने का लक्ष्य रखा गया है। कमिश्नर कार्यालय के लिए पुराने पुलिस मुख्यालय या शंकर नगर स्थित आईजी ऑफिस को संभावित स्थान माना जा रहा है।

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रायपुर के अंबेडकर अस्पताल में तीन दिनों में दो चोरियां, कैंसर विभाग की सेवाएं ठप

रायपुर स्थित डॉ. आंबेडकर अस्पताल में दीवाली के बाद से ही सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ खड़े हुए हैं। अस्पताल में तीन दिनों के भीतर दो चोरी की घटनाएं हुईं। 20 अक्टूबर को कैंसर विभाग से लगभग 20 मीटर तांबे की तार चोरी हो गई, जिससे एयर कंडीशनिंग और रेडिएशन थेरेपी प्रभावित हुई। इसके दो दिन बाद यानी 23 अक्टूबर को चोरों ने विभाग में लगे टीवी का ताला तोड़कर उसे उठा लिया। इस चोरी के कारण कैंसर मरीजों की ‘सेकाई’ प्रक्रिया रोक दी गई है, जिससे उनका उपचार बाधित हो गया है। यह स्थिति गंभीर मरीजों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है। चोरी की घटनाओं का विवरण अस्पताल प्रबंधन ने बताया कि तार चोरी होने से रेडिएशन उपचार में तापमान नियंत्रित नहीं हो पा रहा है, जिससे सेकाई सेवा चार दिनों से बंद है। यह घटना अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़ा करती है। मरीजों और परिजनों की चिंता कैंसर विभाग में रोजाना बड़ी संख्या में गंभीर मरीज इलाज के लिए आते हैं। सेकाई बंद होने के कारण कई मरीजों का उपचार स्थगित करना पड़ा। परिजनों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि सुरक्षा में चूक के कारण मरीजों की जिंदगी खतरे में पड़ गई। सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल अस्पताल में हाई-टेक सीसीटीवी कैमरे और सुरक्षा कर्मियों की तैनाती के बावजूद चोरी हुई। अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि चोरी किसने और कैसे की।

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