Crime

सोशल मीडिया पर ठगी का नया तरीका: लड़कों और लड़कियों को वीडियो कॉल और शादी का झांसा देकर ब्लैकमेल किया जा रहा

सोशल मीडिया अब सिर्फ बातचीत और मनोरंजन का माध्यम नहीं रहा, बल्कि ठगी और ब्लैकमेलिंग का बड़ा प्लेटफॉर्म बन गया है। फर्जी प्रोफाइल बनाकर अपराधी लड़कों और लड़कियों दोनों को निशाना बना रहे हैं। लड़कों को आकर्षक लड़कियों के रूप में फंसाया जाता है, जबकि लड़कियों को लड़के बनाकर शादी का झांसा दिया जाता है। 📉 ठगी का पैटर्न ⚠️ सुरक्षा के टिप्स 👮‍♂️ 262 फर्जी आईडी बनाकर गिरोह फूटा, 11 गिरफ्तार छत्तीसगढ़ और झारखंड में पुलिस ने ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया। आरोपियों ने 262 फर्जी आईडी बनाकर लड़कों को शादी का झांसा दिया और अश्लील चैट तथा वीडियो कॉल के जरिए पैसे वसूले। 🌐 आरोपी और स्थान इस मामले ने एक बार फिर सोशल मीडिया पर सावधानी बरतने और फर्जी प्रोफाइल से सतर्क रहने की जरूरत को रेखांकित किया है।

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दुर्ग में युवक का संदिग्ध शव मिला: करवा चौथ की रात पत्नी इंतजार करती रही, सुबह शव मिलने से फैली सनसनी

दुर्ग जिले में शनिवार सुबह बिजली ऑफिस के सामने एक युवक का शव संदिग्ध परिस्थितियों में पाया गया। मृतक की पहचान शिवपारा, दुर्ग निवासी अनिल यादव (35) के रूप में हुई। प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि उसकी हत्या की गई हो सकती है, क्योंकि शव पर चोट के निशान पाए गए हैं। 🔹 घटना का विवरण घटना सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र, मोहलई इलाके की है। अनिल यादव की दो बेटियां हैं। परिवार के अनुसार, वह शुक्रवार रात लगभग 11 बजे घर से निकला था और वापस नहीं लौटा। उस रात उसकी पत्नी करवा चौथ का व्रत करने के कारण देर तक उसका इंतजार करती रही।अनिल ई-रिक्शा चलाने और पुताई का काम करता था। 🔹 पुलिस जांच सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। पुलिस ने कहा कि मृत्यु का कारण पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद स्पष्ट होगा। कोतवाली थाना प्रभारी तापेश्वर नेताम ने कहा कि शव पर चोट के निशान हैं, इसलिए हत्या की आशंका को नकारा नहीं जा सकता।स्थानीय लोगों ने रात के समय क्षेत्र में कुछ संदिग्ध आवाजें सुनने की बात बताई है। 🔹 आगे की कार्रवाई

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छत्तीसगढ़ कोल लेवी घोटाला: 570 करोड़ की अवैध वसूली का खुलासा, नेताओं-अफसरों की मिलीभगत सामने आई

छत्तीसगढ़ के चर्चित कोल लेवी घोटाले में बड़ा खुलासा हुआ है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच में सामने आया है कि सूर्यकांत तिवारी ने अफसरों और नेताओं की मदद से करीब 570 करोड़ रुपए से अधिक की वसूली करवाई। इस वसूली के नेटवर्क को देवेंद्र डडसेना और नवनीत तिवारी संचालित कर रहे थे। जांच में सामने आया है कि वॉट्सएप ग्रुप्स — “पाल”, “वीकली”, “टावर” और “जुगनू” — के जरिए पूरे ऑपरेशन का समन्वय किया जाता था। इसमें कोडवर्ड्स का इस्तेमाल होता था: चार्जशीट में यह भी बताया गया है कि नवनीत तिवारी रायगढ़ क्षेत्र की वसूली संभालता था और हर महीने रकम रायपुर के अनुपम नगर स्थित सूर्यकांत तिवारी के घर पहुंचाई जाती थी। 🔹 3 IPS अफसर भी संपर्क में थे ED की चार्जशीट में कहा गया है कि तत्कालीन सीएम भूपेश बघेल की उप सचिव सौम्या चौरसिया और कारोबारी सूर्यकांत तिवारी के संपर्क में तीन IPS अधिकारी भी थे — पारूल माथुर, प्रशांत अग्रवाल और भोजराम पटेल।इन अफसरों पर आरोप है कि उन्होंने विभागीय जानकारी तिवारी को दी। पारूल माथुर पर यह भी आरोप है कि वह तिवारी के कहने पर कोयला वाहनों पर कार्रवाई करवाती थीं। इसके अलावा, कॉन्स्टेबल अमित कुमार दुबे पर ईडी अधिकारियों की जासूसी का आरोप है। 🔹 कोल वाशरी और ट्रांसपोर्टर से भी वसूली चार्जशीट के मुताबिक, कोयला ट्रांसपोर्टर्स से 25 रुपए प्रति टन और कोल वाशरी संचालकों से 100 रुपए प्रति टन की अवैध लेवी वसूली जाती थी। इस तरह कारोबारियों से दो बार कमीशन लिया जा रहा था।वसूली के लिए कोरबा और रायगढ़ में अलग-अलग ऑफिस बनाए गए थे। 🔹 नवनीत और मोइनुद्दीन संभालते थे फील्ड नेटवर्क रायगढ़ में नवनीत तिवारी और कोरबा में मोइनुद्दीन वसूली का पूरा संचालन करते थे। सूर्यकांत तिवारी के घर से मिली डायरी में नवनीत (नीतू) के नाम के आगे 17.73 करोड़ रुपए दर्ज पाए गए हैं। 🔹 ACB-EOW ने 36 लोगों पर FIR दर्ज की ED की रिपोर्ट के आधार पर ACB/EOW ने इस मामले में दो पूर्व मंत्रियों, विधायकों, IAS अधिकारियों और कारोबारियों सहित 36 लोगों पर नामजद FIR दर्ज की है।गिरफ्तारों में IAS रानू साहू, IAS समीर विश्नोई, सौम्या चौरसिया, जेडी माइनिंग एसएस नाग और सूर्यकांत तिवारी शामिल हैं।

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Bilaspur में फरार हिस्ट्रीशीटर ने पिस्टल के साथ वीडियो बनाकर किया धमकी का वीडियो वायरल

बिलासपुर के सरकंडा थाना क्षेत्र में एक फरार हिस्ट्रीशीटर लुटू पांडेय ने इंस्टाग्राम पर पिस्टल और अन्य हथियारों के साथ रील बनाकर शहर के भाजपा और कांग्रेस नेताओं को जान से मारने की धमकी दी है। वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। पुलिस पिछले दो महीने से आरोपी की तलाश में जुटी है, लेकिन वह लगातार फरार है और अपने मोबाइल से धमकी भरे वीडियो अपलोड कर रहा है। पुलिस के रिकॉर्ड के अनुसार, लुटू पांडेय नशे का सामान बेचने, चोरी, मारपीट और गुंडागर्दी के मामलों में फरार चल रहा है। उसका साथी शिवम मिश्रा भी उसी तरह पिस्टल के साथ वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डर फैलाता रहा है। दोनों आरोपियों ने भाजपा युवा मोर्चा के मंडल पदाधिकारी मुसर्रफ खान और एनएसयूआई के महासचिव लक्की मिश्रा समेत अन्य युवाओं को जान से मारने की धमकी दी। लुटू पांडेय का कहना है कि वह पिस्टल और रिवॉल्वर सप्लाई कर सकता है और उसने कुछ युवकों को हथियारों की तस्वीरें भी भेजी हैं। सरकंडा और सिविल लाइन थानों में इस मामले की शिकायत दर्ज की गई है। पुलिस ने बताया कि लुटू पांडेय और उसका साथी यूपी में अपना ठिकाना बना चुके हैं। गिरफ्तारी से पहले ही उन्होंने मोबाइल बंद कर दिया और ठिकाना बदल लिया। दुर्ग पुलिस ने बताया कि लुटू पांडेय पहले चोरी के मामले में जेल गया था। जेल से बाहर आने के बाद वह नशे के कारोबार में सक्रिय हो गया। सरकंडा पुलिस लगातार आरोपियों की तलाश कर रही है और फरार अपराधियों को पकड़ने के लिए छापेमारी कर रही है। इस मामले ने बिलासपुर में कानून-व्यवस्था और अपराधियों की हिम्मत पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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Raipur में नर्स की अफेयर के शक में हत्या, आरोपी बॉयफ्रेंड गिरफ्तार

रायपुर में एक नर्स को उसके ही बॉयफ्रेंड ने चाकू से वार कर मार डाला। मृतिका प्रियंका दास (23), जो निजी अस्पताल में नर्स थीं और मनेंद्रगढ़ की रहने वाली थीं, टिकरापारा में किराए के कमरे में अपनी तीन सहेलियों के साथ रहती थीं। घटना गुरुवार सुबह सामने आई, जब प्रियंका की सहेली कमरे में गई और वहां खून से सनी लाश देखी। तुरंत पड़ोसियों ने पुलिस को सूचना दी। ASP डॉ. दौलतराम पोर्ते ने बताया कि पुलिस और फोरेंसिक टीम ने मौके पर पहुंचकर सबूत जुटाए। कमरे में चाकू और खून बिखरा हुआ मिला। पड़ोसियों ने किसी को कमरे से बाहर निकलते नहीं देखा, जिससे साफ है कि हत्यारा मौके से बिना किसी की नजर में आए फरार हुआ। पुलिस ने आरोपी युवक दुर्गेश वर्मा को हिरासत में लिया। पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि वह प्रियंका का बॉयफ्रेंड था और पिछले कुछ समय से प्रियंका दूसरे लड़के से बात कर रही थी। इसी शक में उसने एक दिन पहले चाकू खरीदा और विवाद के दौरान प्रियंका के सीने में वार कर उसे मार डाला। प्रियंका ने एक दिन पहले ही अस्पताल में डे शिफ्ट में ड्यूटी की थी। घटना के बाद आरोपी युवक फरार हो गया, लेकिन बाद में सरेंडर कर दिया। पुलिस ने उसके कब्जे से चाकू जब्त किया है। इस मामले पर छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर सरकार पर हमला किया। कांग्रेस ने कहा कि रायपुर में नर्स की बेरहमी से हत्या, भाजपा के कुशासन को उजागर करती है। उनका कहना है कि अपराधी बेलगाम हैं, पुलिस लाचार और सरकार खामोश है। पुलिस अब मामले की गहन जांच कर रही है और सभी डिजिटल एवं फोरेंसिक सबूतों का विश्लेषण कर रही है। इस घटना ने राजधानी में कानून व्यवस्था और सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: सुप्रीम कोर्ट ने ED-EOW को 3 महीने में पूरी जांच का अल्टीमेटम, बड़े अधिकारियों और भूपेश के बेटे गिरफ्तार

छत्तीसगढ़ का शराब घोटाला मामले सुप्रीम कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आर्थिक अपराध शाखा (EOW) को चेतावनी दी है। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि वे दिसंबर के अंत तक पूरी जांच पूरी करें और फाइनल रिपोर्ट पेश करें। सितंबर के आखिरी सप्ताह में सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश को जारी किया था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ED और EOW ने मामले की जांच तेजी से शुरू कर दी है। आबकारी विभाग के लगभग 30 अधिकारियों से पूछताछ की जा रही है, जिनमें 7 रिटायर्ड अधिकारी भी शामिल हैं। ED के वकील सौरभ पांडे ने बताया कि जांच को करीब दो साल हो चुके हैं और अब इसे मुकाम तक पहुंचाना जरूरी है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में इस मामले से जुड़ी 13 याचिकाओं की सुनवाई हुई थी, जिनमें अलग-अलग FIR, जमानत याचिकाएं और प्रवर्तन निदेशालय की रिपोर्ट शामिल थी। कोर्ट ने सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया और जांच पूरी करने का निर्देश दिया। EOW के अनुसार, इस मामले में पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा, पूर्व सीएम भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल और अन्य बड़े अधिकारियों और कारोबारी शामिल हैं। विदेशी शराब पर सिंडिकेट द्वारा लिए गए कमीशन और मनी लॉन्ड्रिंग का विश्लेषण किया जा रहा है। जांच में पता चला कि करीब 3,000 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ। तत्कालीन सरकार के कार्यकाल में IAS अधिकारी अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के MD AP त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर ने मिलकर सिंडिकेट बनाया और घोटाले को अंजाम दिया। अनवर ढेबर ने पैसे को रिश्तेदारों और कंपनियों के नाम निवेश किया। घोटाले की रणनीति: फरवरी 2019 में अनवर ढेबर ने होटल वेनिंगटन में डिस्टलरी मालिकों और अधिकारियों की मीटिंग कर कमीशन और शराब सप्लाई की रणनीति तय की थी। ED और EOW की जांच जारी है और कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि तीन महीने के अंदर पूरी जांच और पूरक आरोपपत्र दाखिल किया जाए।

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छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: अनवर ढेबर को सुप्रीम कोर्ट से 4 दिन की अंतरिम जमानत

छत्तीसगढ़ के बड़े शराब घोटाले में कारोबारी अनवर ढेबर को सुप्रीम कोर्ट ने 4 दिन की अंतरिम जमानत दी है। जमानत मां के खराब स्वास्थ्य के कारण दी गई है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह राहत केवल पारिवारिक परिस्थिति के लिए है और 4 दिन बाद उन्हें फिर से जेल लौटना होगा। ढेबर के वकीलों ने कोर्ट को बताया कि उनकी मां गंभीर रूप से बीमार हैं और अस्पताल में भर्ती हैं। कोर्ट ने कहा कि ऐसे समय में परिवार के पास रहने का अवसर मिलना चाहिए। 🔹 छत्तीसगढ़ शराब घोटाले का मामला ED की जांच में सामने आया कि 3,000 करोड़ रुपए से अधिक का घोटाला हुआ। तत्कालीन भूपेश सरकार के कार्यकाल में IAS अधिकारी अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के MD AP त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर ने मिलकर सिंडिकेट बनाया। अनवर ढेबर ने रिश्तेदारों और CA के नाम कंपनियों में निवेश कर कमीशन का पैसा छिपाया। EOW के अनुसार, शराब डिस्टलर्स से कमीशन और बी पार्ट की बिक्री से 15% रकम अनवर ढेबर को जाती थी। इसे ढेबर के करीबी विकास अग्रवाल और सुब्बू इकट्ठा करते थे। 🔹 फरवरी 2019 में बना सिंडिकेट अनवर ढेबर ने फरवरी 2019 में जेल रोड स्थित होटल वेनिंगटन में डिस्टलरी मालिकों और आबकारी अधिकारियों की बैठक कर सिंडिकेट बनाया। इसमें नवीन केडिया, भूपेंदर पाल सिंह भाटिया, प्रिंस भाटिया, राजेंद्र जायसवाल और AP त्रिपाठी समेत अन्य शामिल थे। सिंडिकेट ने शराब बिक्री के लेन-देन को ए, बी और सी पार्ट में बांटा: A: डिस्टलरी संचालकों से कमीशन B: नकली होलोग्राम वाली शराब C: डिस्टलरी सप्लाई एरिया बदलकर अवैध वसूली 🔹 गिरफ्तारी EOW ने इस मामले में कवासी लखमा, अरुणपति त्रिपाठी, अरविंद सिंह, अनवर ढेबर, त्रिलोक सिंह ढिल्लन, अनुराग द्विवेदी, अमित सिंह, दीपक दुआरी, दिलीप टुटेजा, सुनील दत्त समेत कई लोगों को गिरफ्तार किया।पूर्व मंत्री कवासी लखमा के बाद पूर्व CM भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को भी शराब घोटाला और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में गिरफ्तार किया गया। इस जमानत का लाभ ढेबर केवल परिवार के साथ समय बिताने के लिए ले सकेंगे, और चार दिन बाद उन्हें जेल लौटना अनिवार्य है।

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छत्तीसगढ़ NGO घोटाला: CBI ने तेज की जांच, 14 लोगों पर शिकंजा कसने की तैयारी

छत्तीसगढ़ में समाज कल्याण विभाग से जुड़ा बहुचर्चित NGO घोटाला एक बार फिर चर्चा में है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने इस मामले की जांच की रफ्तार बढ़ा दी है। सोमवार को CBI अधिकारियों ने मना स्थित समाज कल्याण विभाग के दफ्तर पर दबिश दी और स्टेट रिसोर्स सेंटर (SRC) से जुड़े दस्तावेज मांगे। अधिकारियों ने NGO से संबंधित तीन बंडल फाइलों की फोटो कॉपी भी अपने कब्जे में ली है। CBI ने साफ किया है कि इन दस्तावेजों की जांच की जाएगी और सबूतों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। इस केस में एक पूर्व मंत्री, सात IAS अफसर और कई राज्य प्रशासनिक सेवा (RAS) अधिकारियों समेत कुल 14 लोगों के नाम जांच के घेरे में हैं। कैसे बना था NGO और कौन थे संस्थापक 2004 में तत्कालीन समाज कल्याण मंत्री रेणुका सिंह के साथ कई शीर्ष अफसरों — जैसे रिटायर्ड IAS विवेक ढांढ, MK राउत, डॉ. आलोक शुक्ला, सुनील कुजूर, BL अग्रवाल, सतीश पांडे और पीपी श्रोती — ने मिलकर दो NGO की स्थापना की थी। दिव्यांगों की मदद के नाम पर बने इन संगठनों का उद्देश्य व्हीलचेयर, कृत्रिम अंग, ट्राईसाइकिल और सुनने की मशीनें बांटना था, लेकिन हकीकत में यह काम केवल कागजों पर ही हुआ। बिना मान्यता और बिना चुनाव के चला NGO यह NGO समाज कल्याण विभाग से कभी मान्यता प्राप्त नहीं कर सका, फिर भी राज्य और केंद्र की योजनाओं के तहत इसे करोड़ों रुपये ट्रांसफर किए गए। सरकारी नियमों के अनुसार कोई भी सरकारी कर्मचारी NGO का सदस्य नहीं हो सकता, लेकिन मंत्री और अफसरों ने नियमों को ताक पर रखकर संगठन बना लिया। न चुनाव हुआ, न प्रबंधकारिणी की बैठक, न ही 17 साल तक कोई ऑडिट। कैसे खुला घोटाले का राज 2016 में इस फर्जीवाड़े का पर्दाफाश तब हुआ जब संविदा कर्मचारी कुंदन ठाकुर ने अपनी नौकरी रेगुलर करवाने के लिए आवेदन किया। उन्हें पता चला कि वे पहले से ही एक अन्य पद पर पदस्थ हैं और उनके नाम से दूसरी जगह से वेतन जारी हो रहा है। RTI लगाने पर खुलासा हुआ कि उनके जैसे कई कर्मचारी हैं जिनके नाम पर दो-दो जगह से वेतन लिया जा रहा है। फर्जी नियुक्तियां और डबल सैलरी का खेल जांच में सामने आया कि कई कर्मचारियों को कागजों में पदस्थ दिखाया गया, जबकि वे जमीन पर काम ही नहीं कर रहे थे। कुछ कर्मचारियों के नाम से 2 से 3 जगहों से सैलरी निकाली जाती रही। सिर्फ पांच साल में लगभग 1 करोड़ 70 लाख रुपये फर्जी नियुक्तियों के जरिए खर्च दिखाए गए। जांच रिपोर्ट में बड़े खुलासे हाईकोर्ट के आदेश पर तत्कालीन मुख्य सचिव अजय सिंह ने डॉ. कमलप्रीत सिंह को जांच सौंपी थी। रिपोर्ट में पाया गया कि 2004 से अब तक NGO का एक भी ऑडिट नहीं हुआ। फर्जी नियुक्तियां की गईं और कर्मचारियों को नकद में भुगतान किया गया।सरकार ने अदालत में यह तर्क दिया कि केंद्र भौतिक रूप से संचालित था और वहां कृत्रिम अंग लगाए गए, लेकिन भुगतानों में पारदर्शिता नहीं रही। अब CBI की नजर बड़े नामों पर CBI अब उन अधिकारियों और पूर्व मंत्रियों पर फोकस कर रही है जिनके दस्तखत फंड ट्रांसफर फाइलों में मिले हैं। साथ ही जिला स्तर के अफसर, ऑडिट रोकने वाले अधिकारी और फर्जी सैलरी पाने वाले नाम भी जांच की जद में हैं। 15 दिनों के भीतर सभी दस्तावेज जब्त करने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। जांच आगे बढ़ने पर और कई बड़े नाम बेनकाब होने की संभावना है।

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सरकारी नौकरी का झांसा देकर 200 लड़कियों को बंधक बनाया गया, गुडवे फैशन कंपनी पर FIR दर्ज

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में एक प्राइवेट कंपनी ने सरकारी नौकरी का झांसा देकर लगभग 150-200 लड़कियों को बंधक बनाया। इन लड़कियों से मार्केटिंग का काम करवाया जाता था, लेकिन वे सैलरी नहीं पा रही थीं। कंपनी की 5-10 लड़कियां पीड़ितों पर दबाव डालती थीं कि वे सोशल मीडिया पर लड़कों को फंसाएं और उन्हें कंपनी में बुलाएं, तभी उन्हें पेमेंट मिलेगा। मामला पद्मनाभपुर थाना क्षेत्र का है। जांच में सामने आया कि यह कंपनी गुडवे फैशन प्राइवेट लिमिटेड है, जो कॉस्मेटिक और कपड़े बेचने का काम करती है। बोरसी के कदम प्लाजा में अलग-अलग जिलों से लड़कियों को बुलाकर बंधक बनाया गया। पीड़ितों का आरोप है कि उन्हें 25-30 हजार रुपए की नौकरी का झांसा देकर लाया गया और उनके मोबाइल छीन लिए गए। घर वालों से बात करने की अनुमति नहीं दी गई और आधी रात तक लड़कों को सोशल मीडिया पर फंसाने का दबाव बनाया जाता था। मामले का खुलासा भानुप्रतापपुर की एक लड़की ने अपने माता-पिता को किया, जिन्होंने आरएसएस कार्यकर्ता रवींद्र जैन और बजरंग दल प्रांत संयोजक रतन यादव को जानकारी दी। इसके बाद 3 अक्टूबर को बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने कंपनी पर हमला किया और पुलिस ने 7 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की। इसमें रामभरोष साहू, सत्यम पटेल, साहिल कश्यप, सौरभ चौधरी, राहुल सौंधिया, वेदप्रकाश शास्त्री और साधना पटेल शामिल हैं। पीड़िताओं ने बताया कि कंपनी में पढ़ाई या असली जॉब नहीं होती, बल्कि उन्हें नए लड़के-लड़कियों को जोड़ने और पैसों की चेन चलाने का दबाव डालते हैं। ट्रेनिंग फीस और पैसे जमा करने के लिए भी मजबूर किया जाता था। खाना समय पर नहीं दिया जाता और रात 2-3 बजे तक लड़कों से बातचीत करने को कहा जाता। धमतरी की एक पीड़िता के पिता ने बताया कि बेटी को नौकरी दिलाने के लिए उन्होंने 47 हजार रुपए कर्ज लेकर दिए, लेकिन अब सात महीने से पेमेंट नहीं मिली। दुर्ग CSP हर्षित मेहर ने कहा कि पुलिस ने लिखित शिकायत पर जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में पता चला कि कंपनी नौकरी के नाम पर युवाओं से पैसे वसूलती है और नए लोगों को जोड़ने का दबाव डालती है। मामले की आगे सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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बिलासपुर में बिना अनुमति 3 मंजिला भवन में चल रहा था OYO होटल, निगम ने किया सील

बिलासपुर के बहतराई रोड, गीतांजलि सिटी फेस-1 में एक तीन मंजिला भवन बिना नगर निगम की अनुमति के बनाकर वहां OYO होटल चलाया जा रहा था। शिकायत और जांच के बाद नगर निगम ने इस अवैध भवन को सील कर दिया है। पार्षद रेखा पांडेय की शिकायत पर निगम ने शुक्रवार को कार्रवाई की। उन्होंने कहा कि होटल संचालन से क्षेत्र का सामाजिक माहौल प्रभावित हो रहा था। पहले भवन पर OYO का बोर्ड लगा था, जिसे विरोध के बाद हटा दिया गया, लेकिन होटल का संचालन लगातार जारी था। नगर निगम की जांच में पता चला कि यह भवन गायत्री केडिया की है, लेकिन इसका नक्शा निगम से पास नहीं कराया गया। बावजूद इसके, भवन में 17 कमरों वाला होटल तैयार कर लिया गया था और लंबे समय से होटल संचालित हो रहा था। निगम कमिश्नर के निर्देश पर भवन शाखा की टीम मौके पर पहुंची और होटल को सील कर दिया। मौके पर स्टाफ से पूछताछ की गई, लेकिन कोई वैध दस्तावेज पेश नहीं किया गया। नगर निगम के अधिकारियों ने कहा कि बिना अनुमति निर्माण और अवैध व्यवसाय पर कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी। नियमों का उल्लंघन करने वाले किसी भी भवन मालिक को बख्शा नहीं जाएगा और जरूरत पड़ने पर एफआईआर भी दर्ज की जाएगी।

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