Raipur

रायपुर में राज्योत्सव से पहले छत्तीसगढ़ महतारी की मूर्ति हुई क्षतिग्रस्त, क्रांति सेना ने किया प्रदर्शन

राजधानी रायपुर में राज्योत्सव से पहले छत्तीसगढ़ महतारी की मूर्ति तोड़े जाने की घटना ने हड़कंप मचा दिया है। घटना की जानकारी मिलने पर छत्तीसगढ़ी क्रांति सेना के सदस्य तुरंत मौके पर पहुंचे और विरोध प्रदर्शन किया। संगठन ने इसे छत्तीसगढ़ की अस्मिता पर हमला करार देते हुए कड़ी नाराजगी जताई। यह घटना तेलीबांधा थाना क्षेत्र में हुई। 🔹 घटना का विवरण शहर के VIP चौक के पास राम मंदिर के समीप छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा लगी थी। अज्ञात व्यक्तियों ने देर रात मूर्ति को नुकसान पहुंचाया, जिससे सुबह लोगों ने यह देखा और आसपास इकट्ठा हो गए। 🔹 पुलिस कार्रवाई घटना की सूचना पाते ही तेलीबांधा पुलिस और वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस CCTV फुटेज की जांच कर रही है ताकि आरोपियों की पहचान की जा सके। 🔹 मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि इस घटना में शामिल किसी भी व्यक्ति को नहीं बख्शा जाएगा और उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यह मामला राज्योत्सव के ठीक पहले सामने आने के कारण और भी संवेदनशील हो गया है और प्रशासन ने इसे गंभीरता से लिया है।

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रायपुर नगर निगम अब शेयर मार्केट की तरह करेगा कमाई, 100 करोड़ की म्यूनिसिपल बॉन्ड योजना को मिली स्वीकृति

रायपुर नगर निगम ने अब शेयर मार्केट स्टाइल निवेश योजना शुरू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। राज्य शासन ने 100 करोड़ रुपए की म्यूनिसिपल बॉन्ड योजना को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। इस योजना के तहत आम नागरिक निगम की परियोजनाओं में छोटे और बड़े दोनों स्तर पर निवेश कर सकेंगे और निवेशकों को ब्याज के रूप में लाभ मिलेगा। 🔹 म्यूनिसिपल बॉन्ड का उद्देश्य म्यूनिसिपल बॉन्ड का मुख्य उद्देश्य शहर के विकास कार्यों के लिए पूंजी जुटाना है। इससे निगम अपनी वित्तीय स्थिति मजबूत कर सकेगा और राज्य सरकार पर निर्भरता कम होगी। बॉन्ड से जुटाई गई राशि का इस्तेमाल सड़कों, जलापूर्ति, सीवरेज, स्ट्रीट लाइट और ग्रीन जोन परियोजनाओं में किया जाएगा। 🔹 निवेशकों के लिए खास बातें 🔹 देश में सफल मॉडल रायपुर नगर निगम की इस योजना का मॉडल पहले ही पुणे, अहमदाबाद और इंदौर में सफल साबित हो चुका है। इन शहरों में म्यूनिसिपल बॉन्ड के जरिए करोड़ों की राशि जुटाई गई और निवेशकों को मुनाफा हुआ। 🔹 निगम की जिम्मेदारी और राज्य सरकार की गारंटी नहीं राज्य शासन ने स्पष्ट किया है कि इस योजना में किसी भी घाटे या मुनाफे की पूरी जिम्मेदारी नगर निगम की होगी। राज्य सरकार कोई गारंटी नहीं देगी और Viability Gap Funding भी उपलब्ध नहीं कराई जाएगी। निगम को SEBI और RBI के नियमों के अनुसार अनुमति लेनी होगी। 🔹 बॉन्ड से होने वाले निवेश निगम के अधिकारियों के अनुसार, इस योजना से मिलने वाली राशि का उपयोग मुख्यतः अधोसंरचना और नागरिक सुविधाओं के विकास में किया जाएगा। इसमें शामिल हैं: 🔹 केंद्र सरकार का योगदान केंद्र सरकार इस योजना के तहत 25% सब्सिडी देगी। यानी कुल 100 करोड़ रुपए के बॉन्ड में 25 करोड़ रुपए सीधे निगम को उपलब्ध होंगे, जिसका फायदा सीधे रायपुर नगर निगम को होगा। इस पहल से निवेशकों को आकर्षक रिटर्न के अवसर मिलेंगे और रायपुर शहर की विकास परियोजनाओं में जनभागीदारी भी बढ़ेगी।

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छत्तीसगढ़ में 10 दवाओं में बड़ी गड़बड़ी, 9 अमानक और 1 नकली पाई गई

केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर 2025 में देशभर में 112 दवाओं के सैंपल क्वालिटी टेस्ट में फेल पाए गए, जबकि एक दवा नकली निकली। इस सूची में छत्तीसगढ़ की 10 दवाएं शामिल हैं, जिनमें 9 दवाएं मानक गुणवत्ता (NSQ) पर खरी नहीं उतरीं और 1 दवा नकली (Spurious) पाई गई। 🔹 अमानक और नकली दवाओं का विवरण छत्तीसगढ़ में फेल पाई गई दवाओं में आम घरेलू दवाएं भी शामिल हैं, जैसे: अमानक दवाओं में डिज़ॉल्यूशन टेस्ट और Assay टेस्ट में खामी पाई गई, यानी दवा शरीर में सही ढंग से असर नहीं कर रही थी या सक्रिय तत्व निर्धारित मात्रा से कम था। नकली फंगल क्रीम मामले में कंपनी ने किसी असली ब्रांड का नाम इस्तेमाल किया था और उसके पास लाइसेंस नहीं था। 🔹 दवाओं की खपत और कारोबार 🔹 NSQ यानी “Not of Standard Quality” एक दवा को NSQ तभी माना जाता है जब वह किसी निर्धारित क्वालिटी मानक पर फेल हो। यह जांच विशेष बैच पर होती है। एक बैच फेल होने का मतलब यह नहीं कि पूरे ब्रांड की दवा खराब है। 🔹 प्रशासन का कहना राज्य के खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने बताया कि केंद्र से नोटिफिकेशन अभी तक उन्हें नहीं मिला है। CDSCO हर महीने देशभर की दवाओं का क्वालिटी चेक करता है और फेल या नकली दवाओं की सूची अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित करता है। 🔹 इन दवाओं से बचने के उपाय इस रिपोर्ट से स्पष्ट होता है कि बाज़ार में बिकने वाली हर दवा पर भरोसा नहीं किया जा सकता और सही सावधानी बेहद जरूरी है।

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छत्तीसगढ़ के नवा रायपुर में देश का पहला डिजिटल ट्राइबल म्यूजियम तैयार हो गया है — यह म्यूजियम भारत की आदिवासी विरासत, स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान और शौर्य गाथाओं को आधुनिक तकनीक के ज़रिए जीवंत रूप में पेश करता है।

1 नवंबर को राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस संग्रहालय का उद्घाटन करेंगे। करीब 9.75 एकड़ में फैले इस म्यूजियम का निर्माण लगभग 3 साल 5 महीने में हुआ है और इस पर 50 करोड़ रुपये की लागत आई है। 🔸 डिजिटल तकनीक से सजी 14 गैलरी म्यूजियम में कुल 14 गैलरी बनाई गई हैं — जिनमें 12 आदिवासी विद्रोह और 2 सत्याग्रहों की कहानी प्रदर्शित की गई है।यहां डिजिटल स्क्रीन, ऑडियो-विजुअल डिस्प्ले, और प्रोजेक्शन मैपिंग के माध्यम से आदिवासी नायकों की वीरता को दिखाया गया है।लोग QR कोड स्कैन कर हर गाथा को हिन्दी और अंग्रेजी में सुन और देख सकते हैं। 🔸 प्रमुख विद्रोह और नायक हल्बा, सरगुजा, भोपालपट्नम, परलकोट, तारापुर, मुरिया, रानी चौरिस, भूमकाल, सोनाखान विद्रोह, झंडा और जंगल सत्याग्रह जैसे आंदोलनों को यहां जीवंत झांकी के रूप में दिखाया गया है।संग्रहालय में वीर नारायण सिंह, बिरसा मुंडा, रानी गाइडलो, वीर गुंडाधुर, गैंद सिंह, सुकदेव पातर जैसे महान नायकों की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं। 🔸 साल वृक्ष की प्रतीकात्मक झांकी मुख्य प्रवेश द्वार पर 1400 वर्ष पुराने साल वृक्ष की प्रतिकृति बनाई गई है, जिसकी पत्तियों पर 14 विद्रोहों का संक्षिप्त वर्णन अंकित है।बाहर की दीवारों पर वीर नारायण सिंह से जुड़े ऐतिहासिक दस्तावेज — जैसे जेल रिकॉर्ड और सजा के आदेश की प्रतियां — प्रदर्शित की गई हैं। 🔸 सभी के लिए सुविधाएं यहां सीनियर सिटिज़न और दिव्यांग जनों के लिए रैंप और आराम क्षेत्र बनाए गए हैं। परिसर में एक तालाब, सेल्फी पॉइंट्स, और कैफेटेरिया भी है। 🔸 प्रवेश शुल्क जल्द तय होगा यह म्यूजियम आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान परिसर, नवा रायपुर में स्थित है।भविष्य में यहां प्रवेश के लिए टिकट लेना अनिवार्य होगा, हालांकि अभी तक प्रवेश शुल्क का निर्धारण नहीं हुआ है।टिकट काउंटर और चेक प्वाइंट की व्यवस्था पहले से तैयार कर ली गई है। यह संग्रहालय न सिर्फ छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय है — जो भारत के आदिवासी नायकों की अमर गाथाओं को डिजिटल युग में नई पहचान देगा।

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शराबबंदी और पेंशन की मांग पर छत्तीसगढ़ में ड्राइवरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल, प्रदेशभर में परिवहन ठप

छत्तीसगढ़ में ड्राइवर महासंगठन ने अपनी 9 सूत्रीय मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। राज्य के लगभग 3 लाख ड्राइवरों ने वाहन स्टेयरिंग छोड़ दिया है, जिससे ट्रक, बस, टैक्सी और ऑटो सड़कों पर खड़े हैं। कई हाईवे और मुख्य मार्गों पर लंबा जाम लग गया है, जिससे माल ढुलाई और यात्री परिवहन दोनों प्रभावित हुए हैं। संगठन ने पहले ही चेतावनी दी थी कि अगर उनकी मांगें 25 अक्टूबर तक पूरी नहीं की गईं, तो व्यापक हड़ताल और चक्काजाम किया जाएगा। अब यह चेतावनी सड़कों पर दिख रही है। महासंघ का कहना है कि वर्षों से उनकी मांगों को नजरअंदाज किया गया। शराबबंदी मुख्य मांग ड्राइवर महासंघ की सबसे अहम मांग राज्य में पूर्ण शराबबंदी लागू करना है। उनका दावा है कि सड़क हादसों में अक्सर ड्राइवरों पर गलत आरोप लगाए जाते हैं, जबकि असली वजह शराब और सड़क सुरक्षा की कमी होती है। संगठन का कहना है कि शराबबंदी से सड़क हादसे घटेंगे और ड्राइवरों की प्रतिष्ठा भी सुधरेगी। अन्य प्रमुख मांगें संगठन की अन्य मांगों में शामिल हैं: सड़कों पर जाम, व्यापार प्रभावित रायपुर के रायपुरा और भाठागांव बस स्टैंड के पास ड्राइवरों का प्रदर्शन जारी है। राजधानी के साथ ही राजनांदगांव, खैरागढ़ और कबीरधाम जिलों में भी व्यावसायिक वाहन सड़कों पर खड़े कर दिए गए हैं, जिससे व्यापार और आम लोगों को परेशानी हो रही है। पुलिस और प्रशासन ने जाम को नियंत्रित करने के लिए मौके पर निगरानी बढ़ा दी है।

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कोरबा में ड्राइवरों का NH पर चक्काजाम: शराबबंदी और सुरक्षा कानून समेत 11 मांगों को लेकर आंदोलन, दोनों ओर वाहनों की लगी कतारें

छत्तीसगढ़ ड्राइवर महासंघ ने अपनी 11 सूत्रीय मांगों को लेकर शुक्रवार से अनिश्चितकालीन चक्काजाम शुरू कर दिया है। आंदोलन के पहले दिन ही कोरबा जिले के पाली क्षेत्र के डुमरकछार में ड्राइवरों ने राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) पर यातायात रोक दिया, जिससे दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। सुबह से ही ट्रक, बस और मालवाहक वाहनों को सड़क पर खड़ा कर दिया गया, जिसके कारण कोरबा, कटघोरा, पाली और बिलासपुर रोड पर घंटों तक यातायात बाधित रहा। इस जाम का असर आवश्यक सेवाओं पर भी दिखा और यात्रियों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी। स्थिति को संभालने के लिए प्रशासन और पुलिस बल मौके पर तैनात किए गए हैं। अधिकारी लगातार प्रदर्शनकारियों से बात करने की कोशिश कर रहे हैं। ड्राइवर महासंघ के पदाधिकारियों ने कहा कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। महासंघ की प्रमुख मांगों में शामिल हैं — महासंघ ने कहा कि ओडिशा सरकार ने ड्राइवरों की सुरक्षा और कल्याण के लिए जो कदम उठाए हैं, वैसे ही प्रावधान छत्तीसगढ़ में भी लागू किए जाने चाहिए। आंदोलन से पहले जिला और ब्लॉक स्तर पर ड्राइवर संघ ने वाहनों पर पैम्फलेट चिपकाकर और सभाएं आयोजित कर लोगों को आंदोलन के बारे में जागरूक किया था।

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रायपुर VIP चौक में बस से टकराई बाइक, युवक की मौके पर मौत: ड्राइवर हिरासत में, गलत तरीके से खड़ी थी बस

रायपुर के वीआईपी चौक में शनिवार सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसा हुआ। यहां खड़ी कांकेर रोडवेज की बस से बाइक सवार युवक की टक्कर हो गई, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। मृतक की पहचान महासमुंद निवासी ईश्वर साहू के रूप में हुई है। मामला तेलीबांधा थाना क्षेत्र का है। जानकारी के अनुसार, सुबह करीब 5:30 बजे ईश्वर साहू अपनी बाइक (CG07BT4836) से महासमुंद की ओर जा रहे थे। इसी दौरान कांकेर रोडवेज प्राइवेट लिमिटेड की बस (CG04PB8100) सड़क किनारे गलत तरीके से खड़ी थी। तेज रफ्तार में जा रहे बाइक सवार की बस से टक्कर हो गई, जिससे उसका सिर फट गया और मौके पर ही मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और बस चालक को हिरासत में लिया। थाना प्रभारी नरेंद्र मिश्रा ने बताया कि ड्राइवर ने लापरवाहीपूर्वक बस खड़ी की थी, जिसके कारण यह हादसा हुआ। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और आगे की जांच जारी है। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई थी। राहगीरों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। बीते कुछ महीनों में रायपुर और आसपास के इलाकों में सड़क हादसों की संख्या लगातार बढ़ रही है। केवल चार महीनों में 78 से ज्यादा दुर्घटनाएं दर्ज की गई हैं, जिनमें 28 लोगों की मौत हो चुकी है। अधिकतर हादसों की वजह तेज रफ्तार, लापरवाही और गलत पार्किंग बताई जा रही है।

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9 साल की बच्ची की आंख से दिमाग तक घुसी घंटी: रायपुर डीकेएस अस्पताल में 4 घंटे चला ऑपरेशन, डॉक्टरों ने बचाई आंख और जान

रायपुर के डीकेएस सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में डॉक्टरों ने दिवाली की रात एक चमत्कारिक सर्जरी की। बिलासपुर की 9 साल की काव्या की आंख से होते हुए दिमाग तक घुसी घंटी का हैंडल डॉक्टरों ने सावधानीपूर्वक निकालकर न सिर्फ उसकी जान बचाई, बल्कि उसकी आंख की रोशनी भी बरकरार रखी। घटना बिलासपुर के सिविल लाइन इलाके की है। दिवाली के दिन खेलते-खेलते काव्या मुंह के बल गिर गई। जिस घंटी से वह खेल रही थी, उसका ऊपरी सिरा बाईं आंख में घुसकर सीधा दिमाग तक जा पहुंचा। बच्ची की चीख सुनकर परिजन दौड़े और उसे तुरंत सिम्स बिलासपुर ले गए। जांच में पता चला कि घंटी की नुकीली नोक आंख की हड्डी पार कर दिमाग में लगभग 5 सेंटीमीटर तक फंसी हुई है। स्थिति गंभीर थी, इसलिए डॉक्टरों ने तुरंत रायपुर के डीकेएस अस्पताल रेफर कर दिया। दिवाली की रात इमरजेंसी में न्यूरोसर्जन डॉ. राजीव साहू और उनकी टीम—डॉ. लवलेश राठौड़, डॉ. नमन चंद्राकर, डॉ. प्रांजल मिश्रा और डॉ. देवश्री—ने 4 घंटे तक चले ऑपरेशन में बच्ची को बचाने की जद्दोजहद की। ऑपरेशन एंडोस्कोपिक तकनीक से किया गया ताकि दिमाग के ऊत्तकों को नुकसान न पहुंचे। भौंह के ऊपर से छोटा चीरा लगाकर डॉक्टरों ने धीरे-धीरे घंटी का हिस्सा बाहर निकाला। सर्जरी के बाद जब बच्ची ने दोनों आंखों से साफ देखा और मुस्कुराई, तो ओटी में मौजूद सभी डॉक्टरों ने राहत की सांस ली। डॉक्टरों के अनुसार, यह प्रदेश में अपनी तरह का पहला केस है, जिसमें आंख के रास्ते दिमाग तक घुसे मेटल ऑब्जेक्ट को सफलतापूर्वक निकाला गया। बच्ची फिलहाल सुरक्षित है और अस्पताल में निगरानी में है।

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रायपुर में बढ़ते अपराधों पर लगेगा लगाम, नवंबर से लागू होगी पुलिस कमिश्नरी प्रणाली

रायपुर में बढ़ती आबादी और तेजी से बढ़ते अपराधों को देखते हुए अब पुलिस कमिश्नरी प्रणाली लागू करने की तैयारी पूरी कर ली गई है। राजधानी में पिछले पांच सालों में अपराध के मामलों में लगभग दो गुना बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वर्ष 2020 में जहां 8,461 मामले दर्ज हुए थे, वहीं 2024 में यह संख्या बढ़कर 17 हजार से अधिक हो गई है। सूत्रों के अनुसार, नई प्रणाली लागू होने से पुलिस को अधिक अधिकार मिलेंगे और प्रशासनिक स्तर पर त्वरित निर्णय लिए जा सकेंगे। अब तक अधिकांश प्रतिबंधात्मक कार्रवाईयों पर जिला प्रशासन की मंजूरी लेनी पड़ती थी, जिससे समय लगता था। कमिश्नरी प्रणाली से इस प्रक्रिया में तेजी आएगी और कानून व्यवस्था बेहतर होने की उम्मीद है। चार जोन में बंटेगा रायपुर, हर जोन में एसपी स्तर के अधिकारीरायपुर को चार जोनों में विभाजित करने की तैयारी चल रही है — रायपुर उत्तर, रायपुर दक्षिण, रायपुर पश्चिम और नवा रायपुर। पुलिस कमिश्नर (सीपी) के अधीन एडिशनल सीपी और ज्वाइंट सीपी जैसे वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी रहेंगे। हर जोन में एसपी स्तर के अधिकारी नियुक्त किए जाएंगे, जिनके अधीन एएसपी, डीएसपी और टीआई रहेंगे। कमिश्नरी में लॉ एंड ऑर्डर, क्राइम, और साइबर क्राइम के लिए अलग-अलग विंग बनाए जाएंगे। अधिकारियों की पोस्टिंग और मुख्यालय तय करने की प्रक्रिया फिलहाल जारी है। बढ़ती जनसंख्या के हिसाब से जरूरी सुधारराजधानी रायपुर की आबादी अब करीब 25 लाख के आसपास पहुंच चुकी है। वर्तमान में जिले में 3,805 पुलिसकर्मी स्वीकृत हैं, जिनमें लगभग 800 पद खाली हैं। नई प्रणाली लागू होने के बाद बल की संख्या 5,000 तक बढ़ाई जाएगी ताकि शहर की सुरक्षा को और मजबूत किया जा सके। पुराने अनुभवी अफसरों की वापसी संभवकमिश्नरी प्रणाली के पहले प्रयोग के रूप में रायपुर में उन अनुभवी अधिकारियों को तैनात करने की योजना है जो पहले यहां कार्य कर चुके हैं। कई आईपीएस और डीएसपी स्तर के अफसरों ने भी राजधानी में दोबारा काम करने की इच्छा जताई है। हालांकि, अफसरों की पोस्टिंग को लेकर विभाग के भीतर खींचतान की खबरें भी सामने आई हैं। पुलिस कमिश्नरी प्रणाली को 1 नवंबर से लागू करने का लक्ष्य रखा गया है। कमिश्नर कार्यालय के लिए पुराने पुलिस मुख्यालय या शंकर नगर स्थित आईजी ऑफिस को संभावित स्थान माना जा रहा है।

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छत्तीसगढ़ में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, सीएम की नाराजगी के बाद तीन जिलों के एसपी बदले — IPS अंकिता शर्मा बनीं राजनांदगांव की नई एसपी

छत्तीसगढ़ में कलेक्टर-आईजी-एसपी कॉन्फ्रेंस के बाद पुलिस विभाग में बड़ा reshuffle किया गया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की नाराजगी के बाद सरकार ने तीन जिलों के पुलिस अधीक्षकों को हटा दिया है। शुक्रवार को गृह (पुलिस) विभाग ने सात आईपीएस अधिकारियों के तबादले और नई पदस्थापना के आदेश जारी किए। जारी आदेश के अनुसार, राजनांदगांव के एसपी मोहित गर्ग को उनके पद से हटाकर सहायक पुलिस महानिरीक्षक, पुलिस मुख्यालय नवा रायपुर में पदस्थ किया गया है। वहीं शक्ति जिले की एसपी अंकिता शर्मा को राजनांदगांव की नई पुलिस अधीक्षक नियुक्त किया गया है। मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के एसपी चंद्रमोहन सिंह को भी स्थानांतरित कर निदेशक, ट्रेनिंग, ऑपरेशन, अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएं, नगर सेना एवं नागरिक सुरक्षा मुख्यालय भेजा गया है। उनकी जगह सहायक पुलिस महानिरीक्षक रतना सिंह को जिले की कमान सौंपी गई है। इसी तरह कोंडागांव के एसपी यदुवली अक्षय कुमार को हटाकर एआईजी, पुलिस मुख्यालय, नवा रायपुर पदस्थ किया गया है। उनके स्थान पर 13वीं वाहिनी सशस्त्र बल, बांगो (कोरबा) के सेनानी पंकज चंद्रा को नया एसपी बनाया गया है। शक्ति जिले की जिम्मेदारी अब 4वीं वाहिनी, छसबल माना के सेनानी प्रफुल्ल ठाकुर को दी गई है। गृह विभाग ने सभी अधिकारियों को तुरंत प्रभाव से अपने नए पदों पर कार्यभार संभालने के निर्देश दिए हैं। खराब प्रदर्शन पर सीएम की सख्ती का असर13 अक्टूबर को हुई कलेक्टर-आईजी-एसपी कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और गृहमंत्री विजय शर्मा ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था, नशा नियंत्रण, सड़क सुरक्षा और साइबर अपराधों पर समीक्षा की थी। इस दौरान कुछ जिलों की पुलिस व्यवस्था को लेकर सीएम ने नाराजगी जताई थी और खराब प्रदर्शन वाले कप्तानों को फटकार लगाई थी। उसी के बाद से तबादले की अटकलें तेज थीं। अब इन तबादलों को उसी सख्ती का परिणाम माना जा रहा है।

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