Raipur

रायपुर में नक्सलियों का शहरी नेटवर्क बेनकाब: मजदूर बनकर रहते थे, पेनड्राइव-कोडवर्ड से भेजते थे सूचना

छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के शहरी नेटवर्क को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। राज्य अन्वेषण अभिकरण (SIA) ने 9 आरोपियों के खिलाफ बिलासपुर की विशेष अदालत में चार्जशीट दाखिल करते हुए बताया कि ये लोग शहर में मजदूर बनकर रह रहे थे और गुप्त सूचनाएं जंगल में बैठे नक्सली नेताओं तक पहुंचा रहे थे। जांच के अनुसार आरोपी Raipur के रिहायशी इलाकों में किराए के मकानों में रहते थे, ताकि किसी को शक न हो। बताया गया कि संगठन का सदस्य आकाश उर्फ पवन उर्फ पुष्कर मुआर्य चंगोराभाठा क्षेत्र में मजदूर बनकर रह रहा था और यही मकान शहरी नेटवर्क का संचालन केंद्र बना हुआ था। पेनड्राइव और कोडवर्ड से होता था संपर्क 💻 SIA की जांच में सामने आया कि आरोपी पेनड्राइव, लिफाफों में बंद पत्र और तय कोडवर्ड के जरिए संदेश भेजते थे। वे Raipur, Simga, Rajim और Bilaspur में गुप्त बैठकों का आयोजन करते थे। कुछ आरोपी शहर और जंगल के बीच “कूरियर” की भूमिका निभाते थे—वे सूचनाएं, विस्फोटक सामग्री और जरूरी सामान पहुंचाते-लाते थे। छापे में सोना, नकदी और इलेक्ट्रॉनिक सामान बरामद 💰 जांच एजेंसी ने कार्रवाई के दौरान बड़ी मात्रा में सामान बरामद किया, जिसमें सोने के बिस्किट, करीब 2.5 लाख रुपये नकद, लैपटॉप, कई पेनड्राइव और मोबाइल फोन शामिल हैं। कुल मिलाकर लगभग 30 तोला सोना मिलने की बात सामने आई है। कॉल इंटरसेप्शन से मिला सुराग 📡 खुफिया एजेंसियों को जग्गू उर्फ रवि उर्फ रमेश कुरसम और उसकी पत्नी कमला के बारे में फोन कॉल इंटरसेप्शन से जानकारी मिली। तकनीकी निगरानी में रायपुर से बस्तर क्षेत्र तक संपर्क होने के संकेत मिलने पर पुलिस सक्रिय हुई। 23 सितंबर 2025 को डीडी नगर थाने में मामला दर्ज किया गया था, जिसके बाद जांच SIA को सौंपी गई। टीम ने रायपुर के साथ-साथ Bijapur और Narayanpur में भी दबिश देकर नेटवर्क को ध्वस्त किया। गिरफ्तारी के बाद बढ़ सकती है कार्रवाई ⚖️ गिरफ्तार आरोपियों पर गंभीर धाराओं—BNS और UAPA—के तहत केस दर्ज किया गया है। चार्जशीट दाखिल होने के बाद अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य सहयोगियों पर भी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।

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रायपुर में सीवरेज टैंक हादसा: सफाई के दौरान 3 कर्मियों की दम घुटने से मौत, एक गंभीर

रायपुर के पचपेड़ी नाका स्थित रामकृष्ण अस्पताल के पीछे बने सीवरेज टैंक की सफाई के दौरान बड़ा हादसा हो गया। जहरीली गैस के संपर्क में आने से टैंक में उतरे तीन सफाईकर्मियों की मौत हो गई, जबकि एक अन्य की हालत गंभीर बताई जा रही है। मामला टिकरापारा थाना क्षेत्र का है। जानकारी के अनुसार, मंगलवार रात करीब 8 बजे अस्पताल परिसर में सीवरेज टैंक की सफाई का काम चल रहा था। सफाई के लिए बुलाए गए मजदूरों में से जैसे ही पहला कर्मचारी टैंक के अंदर उतरा, वह गैस की वजह से बेहोश होकर गिर पड़ा। उसे बचाने के लिए उसके अन्य साथी भी एक-एक कर नीचे उतरे, लेकिन वे भी जहरीली गैस की चपेट में आ गए। हादसे में अनमोल मांझी, गोविंद सेंद्रे और सत्यम कुमार की मौत हो गई, जबकि एक अन्य मजदूर गंभीर रूप से घायल है और उसका इलाज जारी है। घटना के बाद अस्पताल के बाहर तनावपूर्ण स्थिति बन गई। मृतकों के परिजनों ने सुरक्षा इंतजाम न होने का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया। इस दौरान पुलिस और परिजनों के बीच धक्का-मुक्की भी हुई और कुछ लोगों ने पथराव भी किया। हालात को काबू में करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करना पड़ा। परिजनों का कहना है कि मजदूरों को बिना किसी सुरक्षा उपकरण के गटर में उतारा गया, जबकि अंदर जहरीली गैस होने का खतरा था। हादसे के बाद अस्पताल प्रबंधन ने परिसर में लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी, जिससे आक्रोश और बढ़ गया। अस्पताल प्रबंधन ने आधिकारिक बयान में कहा कि सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) में रखरखाव का काम कर रहे श्रमिक बाहरी ठेका एजेंसी के माध्यम से तैनात थे और कार्य के दौरान आपात स्थिति में फंस गए। प्रबंधन ने दो मौतों की पुष्टि की है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। हादसे के कारणों के साथ-साथ लापरवाही के आरोपों की भी जांच की जा रही है।

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Swami Vivekananda Airport पर फर्जी पहचान के सहारे हवाई यात्रा करने की कोशिश कर रहे एक युवक को सुरक्षा कर्मियों ने पकड़ लिया

युवक किसी दूसरे व्यक्ति के नाम पर जारी टिकट से रायपुर से इंदौर जाने वाला था। सुरक्षा जांच के दौरान उसने पहचान के लिए आधार कार्ड दिखाया, लेकिन दस्तावेज संदिग्ध लगने पर अधिकारियों ने गहन जांच की। जांच में पता चला कि आधार कार्ड नकली है और उसमें असली धारक की जगह आरोपी की फोटो चिपकाई गई थी। पुलिस के अनुसार घटना 12 मार्च 2026 की है, जब नियमित चेकिंग के दौरान एक यात्री इंदौर जाने वाली फ्लाइट के लिए पहुंचा। उसने स्नेहल राजू भाई पटेल के नाम से जारी टिकट प्रस्तुत किया। पहचान पत्र की जांच में गड़बड़ी सामने आने पर उसे तुरंत रोक लिया गया। पूछताछ में आरोपी की पहचान कुलदीप सिंघल के रूप में हुई, जो मूल रूप से इंदौर का रहने वाला है। उसने अपने परिचित के आधार कार्ड में अपनी तस्वीर लगाकर नकली दस्तावेज तैयार किया था और उसी के आधार पर यात्रा करने की कोशिश कर रहा था। सुरक्षा कर्मियों ने युवक को हिरासत में लेकर पुलिस के हवाले कर दिया 🚨। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया। माना सीएसपी के अनुसार आरोपी पेशे से फोटोग्राफर है। फिलहाल पुलिस यह भी जांच कर रही है कि नकली आधार कार्ड बनाने में किसी और व्यक्ति या गिरोह की भूमिका तो नहीं है।

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2 लाख पौधों से बनेगा ‘बी कॉरिडोर’: हाईवे किनारे फूलों की हरियाली, मधुमक्खियों के लिए खास पहल

राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) अब सड़कों के निर्माण के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी बड़ा कदम उठा रहा है। योजना के तहत हाईवे किनारे मधुमक्खियों के लिए विशेष “बी कॉरिडोर” विकसित किए जाएंगे, जिनमें बड़ी संख्या में फूलदार पौधे लगाए जाएंगे। इस पहल की शुरुआत छत्तीसगढ़ से की जा रही है। सबसे पहले नेशनल हाईवे‑53 के आरंग से सरायपाली मार्ग पर यह कॉरिडोर बनाया जाएगा। अन्य हाईवे भी होंगे शामिल इसके बाद चरणबद्ध तरीके से अन्य प्रमुख मार्गों पर भी परियोजना लागू होगी, जिनमें — सालभर मिलेगा मधुमक्खियों को भोजन कॉरिडोर में विभिन्न प्रजातियों के फूलदार पौधे लगाए जाएंगे ताकि मधुमक्खियों को पूरे वर्ष पराग और मधुरस मिलता रहे। इससे शहद उत्पादन, परागण और जैव विविधता को बढ़ावा मिलेगा। हाईवे किनारे विकसित हरित पट्टी में करंज, महुआ, पलाश, बॉटल ब्रश और जामुन जैसे पेड़ लगाए जाएंगे। अनुमान है कि इस परियोजना के तहत करीब 2 लाख पौधे लगाए जाएंगे, जिससे सड़क किनारे फूलों की हरियाली भी बढ़ेगी। गांवों से दूरी पर बनाया जाएगा कॉरिडोर अधिकारियों के अनुसार इन कॉरिडोर को गांवों से औसतन 5 से 6 किलोमीटर दूर विकसित किया जाएगा, ताकि लोगों को किसी प्रकार की परेशानी न हो और मधुमक्खियों के लिए सुरक्षित वातावरण बन सके। जल्द होगी अधिकारियों की बैठक परियोजना को लेकर रायपुर स्थित क्षेत्रीय कार्यालय में संबंधित जिलों के अधिकारियों और प्रोजेक्ट डायरेक्टरों की बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें कार्ययोजना तय की जाएगी।

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आरटीई सीट निर्धारण में गड़बड़ी: अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में हिंदी के आधार पर भर दी सीटें, 11 अधिकारियों को नोटिस

राजधानी रायपुर में आरटीई (Right to Education) कोटे की सीटों को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। निजी स्कूलों में सीट निर्धारण प्रक्रिया में अनियमितता पाए जाने पर जिला शिक्षा अधिकारी ने 11 स्कूलों के नोडल अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। जांच में पाया गया कि कई स्कूलों में वास्तविक छात्र संख्या और माध्यम (हिंदी/अंग्रेजी) के अनुसार सीटें तय नहीं की गईं। कुछ स्कूल अंग्रेजी माध्यम के होने के बावजूद हिंदी माध्यम के आधार पर सीटें सुरक्षित कर दी गईं। क्या है मुख्य गड़बड़ी जिला शिक्षा कार्यालय के अनुसार, सीट प्रोटेक्शन प्रक्रिया में गलत आधार अपनाया गया। कई मामलों में छात्र संख्या कम या ज्यादा होने के बावजूद सीटें पुराने आंकड़ों के अनुसार भर दी गईं। बाद में समीक्षा के बाद संशोधित सूची जारी की गई और संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया। डीईओ हिमांशु भारतीय ने बताया कि जहां-जहां त्रुटियां मिली हैं, वहां जिम्मेदार अधिकारियों को नोटिस देकर जवाब तलब किया गया है। जिन क्षेत्रों के स्कूलों में मामला सामने आया मामला मंदिर हसौद, उरला, फुंडहर, रामनगर बस्ती, पारसदा, अमलीडीह और अन्य इलाकों के निजी स्कूलों से जुड़ा है। मंदिर हसौद और उरला क्षेत्र के कई स्कूलों में माध्यम के आधार पर गलत सीट निर्धारण पाया गया। सीट संख्या में भी बदलाव जांच के बाद कई स्कूलों में सीट संख्या भी बदली गई। उदाहरण के तौर पर कहीं 26 सीटों के स्थान पर 30, 86 के स्थान पर 89 और 12 के स्थान पर 13 सीटें तय की गईं। प्रमुख स्कूल जहां त्रुटियां मिलीं आरटीई सीटों को लेकर पहले से विवाद प्रदेश में आरटीई कोटे की सीटों की संख्या कम होने को लेकर पहले से ही अभिभावकों में नाराजगी बनी हुई है। ऐसे में सीट निर्धारण में गड़बड़ी का मामला सामने आने से विवाद और बढ़ सकता है।

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रायपुर के औद्योगिक इलाकों में छापा: 7 नाबालिग बाल श्रमिक मुक्त, चार संस्थानों पर मामला दर्ज

राजधानी रायपुर के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में बाल श्रम के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए पुलिस और एनजीओ की संयुक्त टीम ने सात नाबालिग बच्चों को काम से मुक्त कराया है। उरला, सिलतरा और खमतराई स्थित कारखानों में छापेमारी कर इन बच्चों को रेस्क्यू किया गया, जहां उनसे उम्र से कहीं अधिक कठिन और जोखिम भरे काम कराए जा रहे थे। जांच के दौरान सामने आया कि बच्चों से भारी मशीनों और रसायनों के बीच वेल्डिंग, लोडिंग और पैकिंग जैसे काम कराए जा रहे थे। जिन संस्थानों पर कार्रवाई हुई, उनमें सोनी प्लाईवुड इंडस्ट्री, शैमरॉक ओवरसीज प्राइवेट लिमिटेड, इंद्राक्षी पाली प्लास्टर एलएलपी प्लांट तथा सन लॉजिस्टिक एंड डिस्ट्रीब्यूटर शामिल हैं। पुलिस ने कंपनी संचालकों के साथ एक ठेकेदार के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की है। शिकायतों के बाद हुई कार्रवाई एसोसिएशन फॉर वॉलंटरी एक्शन छत्तीसगढ़ (AVA) के अनुसार इन इलाकों में नाबालिगों से काम कराए जाने की लगातार शिकायतें मिल रही थीं। सूचना मिलने के बाद पुलिस के साथ संयुक्त टीम ने चार अलग-अलग स्थानों पर छापा मारा। कार्रवाई में उरला से तीन और खमतराई से चार बच्चों को मुक्त कराया गया। कुछ बच्चों से उद्योगों के अलावा बेकरी में भी काम कराया जा रहा था। मेडिकल जांच के बाद बाल गृह भेजे गए रेस्क्यू किए गए सभी बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया और फिर उन्हें बाल कल्याण समिति के सामने पेश किया गया। फिलहाल बच्चों को सुरक्षित बाल गृह में रखा गया है, जहां उनकी काउंसलिंग की जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक बच्चों के परिवारों से संपर्क स्थापित किया जा रहा है और आगे भी ऐसे अभियान जारी रहेंगे। पहले भी सामने आ चुका है बड़ा मामला रायपुर में बाल मजदूरी का यह पहला मामला नहीं है। करीब पांच महीने पहले खरोरा स्थित मोजो मशरूम फैक्ट्री से 109 नाबालिगों को मुक्त कराया गया था। उस कार्रवाई में 68 लड़कियां और 41 लड़के शामिल थे। हालांकि उस मामले में अब तक ठोस कार्रवाई न होने की बात सामने आ रही है। प्रशासन का कहना है कि शहर को बाल श्रम मुक्त बनाने के लिए निगरानी और छापेमारी अभियान लगातार जारी रहेंगे।

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बिजली खंभों पर बेतरतीब केबल का जाल, मामूली किराये के बदले शहर की सुरक्षा खतरे में

शहर में बिजली के खंभों पर फैले इंटरनेट और टीवी केबलों का जाल अब नागरिकों के लिए खतरा बनता जा रहा है। जगह-जगह बिना मानक के लगाए गए तार न केवल अव्यवस्था पैदा कर रहे हैं, बल्कि हादसों की आशंका भी बढ़ा रहे हैं। कई इलाकों में खंभे पूरी तरह केबल से ढके नजर आते हैं। बिजली विभाग के आंकड़ों के अनुसार शहर के लगभग 51 हजार पोलों पर निजी कंपनियों और स्थानीय केबल ऑपरेटरों के तार लगे हुए हैं। इसके बदले विभाग प्रति पोल सालाना करीब 100 रुपये किराया वसूल रहा है, लेकिन सुरक्षा नियमों का पालन नहीं हो रहा। कई स्थानों पर ये केबल जमीन से काफी कम ऊंचाई पर लटक रहे हैं। इससे बड़े वाहनों के फंसने और दोपहिया चालकों के दुर्घटनाग्रस्त होने का खतरा बना रहता है। नागरिकों का कहना है कि लटकते तारों के कारण कई बार दुर्घटनाएं भी हो चुकी हैं। योजनाएं बनीं, अमल नहीं बिजली विभाग ने पुराने तार हटाकर सुरक्षित एबी केबल लगाने की योजना बनाई थी, लेकिन यह कार्य वर्षों से अधूरा पड़ा है। इसी तरह केबलों को व्यवस्थित करने की योजना भी फाइलों तक सीमित बताई जा रही है। प्रमुख बाजार क्षेत्रों में स्थिति खराब शहर के कारोना चौक, सदर बाजार, गोल बाजार, सिविल लाइन और बृहस्पति बाजार जैसे व्यस्त इलाकों में खंभों पर तारों का जाल साफ देखा जा सकता है, जहां पैदल चलना भी जोखिम भरा हो जाता है। नियमों की हो रही अनदेखी नियमों के अनुसार जमीन से 3–4 मीटर तक खंभे पर खुले तार नहीं होने चाहिए और केबल को पाइप से ढंकना जरूरी है। इसके बावजूद कई स्थानों पर बिना सुरक्षा के तार लगाए गए हैं। विभाग ने जांच के दिए निर्देश अधिकारियों का कहना है कि कम ऊंचाई वाले केबलों की जांच कराई जाएगी। जहां जरूरत होगी वहां तार बदले जाएंगे और अव्यवस्थित तरीके से लगाए गए केबल हटाए जाएंगे, ताकि लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

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छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज गरमाएंगे कई मुद्दे, प्रश्नकाल में गौवंश से फ्लाईऐश तक उठेंगे सवाल

छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज का दिन राजनीतिक और जनहित के मुद्दों के लिहाज से काफी अहम रहने वाला है। सदन की कार्यवाही की शुरुआत अविभाजित मध्यप्रदेश की पूर्व विधायक मंगलीबाई रावटे को श्रद्धांजलि देकर की जाएगी। इसके बाद प्रश्नकाल में विभिन्न विभागों से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होगी। प्रश्नकाल के दौरान कृषि, पशुपालन, आदिम जाति कल्याण, आवास एवं पर्यावरण तथा पर्यटन विभाग से जुड़े सवाल उठाए जाएंगे। साथ ही सदन में कुल 77 ध्यानाकर्षण प्रस्ताव भी सूचीबद्ध हैं, जिनमें कानून-व्यवस्था, उद्योगों में सुरक्षा, सामाजिक और विकास से जुड़े मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगा जाएगा। इन प्रस्तावों में बलौदाबाजार जिले के बकुलाही स्थित इस्पात संयंत्र में मजदूरों की मौत का मामला भी शामिल है। इस घटना में सुरक्षा मानकों की अनदेखी के आरोपों पर सरकार से कार्रवाई और जांच की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की जाएगी। प्रदेश में बढ़ती चाकूबाजी की घटनाओं को लेकर भी सदन में चर्चा होने की संभावना है। विधायक इस मुद्दे पर सरकार से अपराध नियंत्रण के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी मांग सकते हैं। इसके अलावा राज्य में गौवंश की स्थिति, कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम, पशुधन विकास योजनाओं और मंडी निधि से बने सामुदायिक भवनों की प्रगति पर भी सवाल उठेंगे। मंदिरों के जीर्णोद्धार और धार्मिक स्थलों के संरक्षण से जुड़े मुद्दे भी चर्चा का हिस्सा बनेंगे। रायपुर विकास प्राधिकरण और हाउसिंग बोर्ड की कॉलोनियों को नगर निगम सीमा में शामिल करने का विषय भी सदन में उठेगा, जो इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को शहरी सुविधाएं उपलब्ध कराने से जुड़ा है। उद्योगों से निकलने वाले फ्लाईऐश के प्रबंधन, मछली पालन योजनाओं और उत्पादन बढ़ाने के प्रयासों पर भी सरकार से जवाब मांगा जाएगा। इसके साथ ही विभिन्न मंत्रियों के विभागों की योजनाओं और उनके क्रियान्वयन पर भी चर्चा होने की संभावना है। कुल मिलाकर आज का प्रश्नकाल कई अहम मुद्दों पर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस का साक्षी बन सकता है।

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रायपुर में ड्रिंक एंड ड्राइव पर सख्ती, 3 महीने में 949 चालकों पर कार्रवाई

राजधानी रायपुर में पुलिस कमिश्नरेट लागू होने के बाद शराब पीकर वाहन चलाने वालों के खिलाफ अभियान तेज कर दिया गया है। शहर के विभिन्न इलाकों में यातायात पुलिस द्वारा नियमित चेकिंग की जा रही है, जिसके तहत जनवरी से मार्च के बीच अब तक 949 चालकों पर कार्रवाई की गई है। आंकड़ों के अनुसार जनवरी में 130, फरवरी में 279 और मार्च में अब तक 540 लोगों को नशे की हालत में वाहन चलाते पकड़ा गया। पुलिस का कहना है कि सड़क दुर्घटनाओं को कम करने और यातायात को सुरक्षित बनाने के लिए यह विशेष अभियान चलाया जा रहा है। हाल ही में 11 मार्च की रात फुंडहर चौक, टेमरी चौक, ऊर्जा पार्क रोड, ऐश्वर्या बाजार और विधानसभा रोड सहित कई स्थानों पर चेकिंग अभियान चलाया गया। इस दौरान 58 चालक शराब के नशे में वाहन चलाते पाए गए, जिनके खिलाफ मोटर व्हीकल एक्ट के तहत चालान कर उन्हें न्यायालय में पेश किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक रायपुर में हर साल ड्रिंक एंड ड्राइव के कारण बड़ी संख्या में सड़क हादसे होते हैं। अनुमान है कि प्रतिवर्ष 1800 से 2000 दुर्घटनाएं नशे में वाहन चलाने की वजह से दर्ज होती हैं, जिनमें 600 से अधिक लोगों की जान चली जाती है। वर्ष 2025 में ही ऐसे 1523 मामलों में कार्रवाई की गई थी और 680 ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित किए गए थे। मोटर वाहन अधिनियम 2019 के अनुसार शराब पीकर वाहन चलाते पकड़े जाने पर 10 हजार रुपये तक का जुर्माना, लाइसेंस निलंबन और जेल की सजा का प्रावधान है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि इस अपराध के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल जुर्माना लगाने से समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होगी। इसके लिए लोगों में जागरूकता, जिम्मेदारी और सख्त निगरानी भी उतनी ही जरूरी है।

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रायपुर में मुंशी 10 लाख लेकर फरार, कंपनी का कैश जमा कराने गया था बैंक

राजधानी रायपुर के गंज थाना क्षेत्र में एक कारोबारी के साथ विश्वासघात का मामला सामने आया है, जहां कंपनी का मुंशी 10 लाख रुपये लेकर फरार हो गया। कारोबारी की शिकायत के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार पीड़ित विजय गोयल देवेंद्र नगर के निवासी हैं और आयरन एंड स्टील ट्रेडिंग का व्यवसाय करते हैं। उनका कार्यालय स्टेशन रोड स्थित अरिहंत कॉम्प्लेक्स में संचालित होता है। कंपनी के लेन-देन से संबंधित नकदी इकट्ठा कर बैंक में जमा करने की जिम्मेदारी मुंशी अनिल साल्वे को सौंपी गई थी। बताया गया कि अनिल साल्वे विभिन्न पार्टियों से कंपनी के लगभग 10 लाख रुपये लेकर आया, लेकिन रकम बैंक में जमा कराने के बजाय वह फरार हो गया। जब काफी समय तक वह वापस नहीं लौटा तो कारोबारी ने उससे संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उसका मोबाइल फोन बंद मिला। इसके बाद विजय गोयल ने गंज थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी और गबन के मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। थाना प्रभारी के अनुसार मामले को गंभीरता से लिया गया है और आरोपी की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर तलाश जारी है।

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