Raipur

छत्तीसगढ़ में मानसून का कहर: सरगुजा में आकाशीय बिजली से 3 की मौत, बिलासपुर में कार पर गिरा पेड़

छत्तीसगढ़ में मानसून अब पूरे प्रदेश में सक्रिय हो चुका है। लगातार हो रही बारिश के बीच कई जिलों से हादसों की खबरें सामने आई हैं। सरगुजा जिले के धौरपुर थाना क्षेत्र के डुमकी गांव में सोमवार शाम आकाशीय बिजली गिरने से दो बच्चों और एक युवक की मौत हो गई, जबकि एक 12 वर्षीय बच्ची गंभीर रूप से झुलस गई। जानकारी के अनुसार, बच्चे आम बीनने के लिए एक पेड़ के नीचे खड़े थे। इसी दौरान पास में मवेशी चरा रहा एक युवक भी वहां पहुंच गया। अचानक पेड़ पर बिजली गिरने से चारों उसकी चपेट में आ गए। हादसे में 5 वर्षीय सागर, 9 वर्षीय रानी और 36 वर्षीय राम साय की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि श्रद्धा (12) गंभीर रूप से घायल हो गई, जिसका इलाज जारी है। उधर, बिलासपुर में सोमवार शाम तेज आंधी और बारिश के कारण कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई। कलेक्टर बंगले के पास एक बड़ा पेड़ सड़क किनारे खड़ी कार पर गिर गया, जिससे वाहन क्षतिग्रस्त हो गया। हालांकि कार में मौजूद लोग सुरक्षित बच गए। पेड़ गिरने से बिजली के तार भी टूट गए, जिसके चलते आसपास के क्षेत्र में कुछ समय तक बिजली आपूर्ति बाधित रही। मौसम विभाग के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून ने 22 जून को दंतेवाड़ा से छत्तीसगढ़ में प्रवेश किया था। अब 30 जून तक मानसून पूरे प्रदेश में फैल चुका है। सरगुजा, सूरजपुर, बलरामपुर, कोरिया, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, जशपुर, कोरबा, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, बिलासपुर, मुंगेली, जांजगीर-चांपा, सक्ती, सारंगढ़-बिलाईगढ़ और रायगढ़ सहित उत्तर एवं उत्तर-पूर्व के 14 जिलों में भी मानसून पहुंच गया है। मौसम विभाग ने अगले चार दिनों तक प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में मध्यम से भारी बारिश की संभावना जताई है। साथ ही कई क्षेत्रों में गरज-चमक और आकाशीय बिजली गिरने की चेतावनी भी जारी की गई है। लोगों से खराब मौसम के दौरान खुले मैदान, पेड़ों के नीचे और बिजली के खंभों के आसपास खड़े होने से बचने की अपील की गई है। राजधानी रायपुर में मंगलवार को दिनभर बादल छाए रहने और गरज-चमक के साथ बारिश होने का अनुमान है। अधिकतम तापमान लगभग 35 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है। बारिश के आंकड़ों पर नजर डालें तो बस्तर संभाग में प्रदेश के अन्य हिस्सों की तुलना में बेहतर वर्षा हुई है, लेकिन वहां भी सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। वहीं मध्य छत्तीसगढ़ और कुछ अन्य जिलों में वर्षा की भारी कमी बनी हुई है। राजनांदगांव, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, बलौदाबाजार, सारंगढ़-बिलाईगढ़ और सक्ती जैसे जिलों में सामान्य से 80 से 95 प्रतिशत तक कम बारिश रिकॉर्ड की गई है। मौसम विभाग का मानना है कि आने वाले दिनों की बारिश से इस कमी में कुछ हद तक सुधार हो सकता है।

छत्तीसगढ़ में मानसून का कहर: सरगुजा में आकाशीय बिजली से 3 की मौत, बिलासपुर में कार पर गिरा पेड़ Read Post »

Accident, Bilaspur, Raipur

रायपुर में RSS नेता इंद्रेश कुमार ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से की मुलाकात, राष्ट्र निर्माण समेत कई मुद्दों पर चर्चा

रायपुर में आयोजित “आपातकाल स्मृति दिवस” कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के वरिष्ठ प्रचारक इंद्रेश कुमार ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से मुख्यमंत्री निवास में मुलाकात की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने पुष्पगुच्छ और स्मृति-चिह्न भेंट कर उनका स्वागत किया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बताया कि मुलाकात के दौरान राष्ट्र निर्माण, सामाजिक समरसता, जनकल्याण और आपातकाल से जुड़े ऐतिहासिक अनुभवों पर विस्तार से चर्चा हुई। साथ ही लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा और समाजहित में किए गए कार्यों को लेकर भी विचार-विमर्श किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इंद्रेश कुमार का राष्ट्रहित के प्रति समर्पण और समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर चलने का दृष्टिकोण प्रेरणादायक है। उन्होंने कहा कि उनका मार्गदर्शन राष्ट्रसेवा के प्रति सरकार के संकल्प को और अधिक मजबूत करने में सहायक है। इंद्रेश कुमार रायपुर में आयोजित “आपातकाल स्मृति दिवस” कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में शामिल होने पहुंचे थे। इसी अवसर पर मुख्यमंत्री निवास में दोनों नेताओं की मुलाकात हुई, जिसमें विभिन्न सामाजिक और राष्ट्रीय विषयों पर चर्चा की गई।

रायपुर में RSS नेता इंद्रेश कुमार ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से की मुलाकात, राष्ट्र निर्माण समेत कई मुद्दों पर चर्चा Read Post »

Political, Raipur

मानसून में बढ़ा गलघोंटू बीमारी का खतरा, पशुपालकों को समय पर टीकाकरण कराने की सलाह

रायपुर। मानसून के दौरान पशुओं में फैलने वाली गलघोंटू (हेमोरेजिक सेप्टीसीमिया-एचएस) बीमारी का खतरा बढ़ने लगा है। इसे देखते हुए पशुधन विकास विभाग ने प्रदेश के सभी पशुपालकों को सतर्क रहने और अपने पशुओं का समय पर टीकाकरण कराने की सलाह दी है। विभाग का कहना है कि समय पर वैक्सीनेशन और शुरुआती उपचार से इस गंभीर बीमारी से पशुओं की सुरक्षा की जा सकती है। पशुधन विकास विभाग के अनुसार गलघोंटू एक संक्रामक जीवाणुजनित रोग है, जो मुख्य रूप से गाय, भैंस और भेड़ों को प्रभावित करता है। मानसून के मौसम में नमी और अनुकूल वातावरण के कारण इसके फैलने की संभावना अधिक रहती है। यदि समय रहते उपचार नहीं किया जाए तो यह बीमारी पशुओं के लिए जानलेवा भी साबित हो सकती है। अधिकारियों ने बताया कि संक्रमित पशुओं में तेज बुखार, गले और जबड़े के नीचे सूजन, मुंह से अत्यधिक लार निकलना, नाक से स्राव, सांस लेने में कठिनाई और गले से घरघराहट जैसी आवाजें सुनाई देना प्रमुख लक्षण हैं। कई मामलों में पशु चारा खाना छोड़ देते हैं, दूध उत्पादन कम हो जाता है और गंभीर संक्रमण की स्थिति में उनकी मृत्यु भी हो सकती है। पशु चिकित्सा विभाग ने पशुपालकों से अपील की है कि यदि किसी पशु में ऐसे लक्षण दिखाई दें तो उसे तुरंत अन्य पशुओं से अलग रखें और बिना देरी किए नजदीकी पशु चिकित्सालय या पशु चिकित्सा अधिकारी से संपर्क करें। यदि किसी क्षेत्र में एक साथ कई पशुओं में बीमारी के लक्षण दिखाई दें तो इसकी सूचना तत्काल विभाग को देने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग ने कहा है कि मानसून के दौरान पशुधन को सुरक्षित रखने के लिए नियमित स्वास्थ्य जांच, समय पर टीकाकरण और शीघ्र उपचार सबसे प्रभावी उपाय हैं। इसी उद्देश्य से राज्यभर में निगरानी बढ़ाने और आवश्यक सतर्कता बरतने के निर्देश जारी किए गए हैं।

मानसून में बढ़ा गलघोंटू बीमारी का खतरा, पशुपालकों को समय पर टीकाकरण कराने की सलाह Read Post »

Animal, Raipur

छत्तीसगढ़ में सिर्फ डायल-112 बनेगा इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबर, 100 से 1091 तक सभी सेवाएं होंगी एकीकृत

देशभर में आपातकालीन सेवाओं को अधिक सरल और प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। आने वाले समय में पुलिस, फायर ब्रिगेड, एंबुलेंस और अन्य सभी इमरजेंसी सेवाओं के लिए अलग-अलग हेल्पलाइन नंबरों की जगह केवल डायल-112 का इस्तेमाल किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को तीन महीने के भीतर 100, 101, 102, 108, 1033, 1091 समेत सभी आपातकालीन नंबरों को 112 में शामिल करने का निर्देश दिया है। साथ ही इस प्रक्रिया की प्रगति रिपोर्ट भी अदालत में प्रस्तुत करने को कहा गया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद छत्तीसगढ़ सरकार ने भी इस दिशा में तैयारी शुरू कर दी है। गृह विभाग के अधिकारियों ने हाल ही में बैठक कर सभी इमरजेंसी सेवाओं को एक ही प्लेटफॉर्म पर लाने की योजना पर चर्चा की। इसके लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जा रही है, ताकि सभी विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो सके। वर्तमान में प्रदेश में लगभग 400 डायल-112 वाहन और करीब 375 एंबुलेंस 108 सेवा के तहत संचालित हैं। अभी किसी मेडिकल आपात स्थिति की सूचना डायल-112 से 108 सेवा को भेजी जाती है, जबकि आग लगने जैसी घटनाओं की जानकारी अलग प्रणाली के माध्यम से फायर विभाग तक पहुंचती है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद सभी सूचनाएं एक ही सिस्टम के जरिए संबंधित विभाग तक पहुंचेंगी, जिससे प्रतिक्रिया का समय कम होगा और राहत कार्य तेजी से शुरू किया जा सकेगा। सुप्रीम कोर्ट ने 26 मई 2026 को सेव लाइफ फाउंडेशन बनाम भारत संघ मामले की सुनवाई के दौरान कहा था कि सड़क दुर्घटना के पीड़ितों को समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत जीवन के अधिकार का महत्वपूर्ण हिस्सा है। अदालत ने माना कि सहायता मिलने में देरी कई बार जानलेवा साबित होती है, इसलिए पूरे देश में एकीकृत आपातकालीन व्यवस्था आवश्यक है। छत्तीसगढ़ में डायल-112 सेवा की शुरुआत 15 अगस्त 2018 को “एक्के नंबर, सब्बो बर” अभियान के साथ हुई थी। बाद में इस सेवा का विस्तार राज्य के सभी 33 जिलों तक किया गया। वर्तमान में डायल-112 प्रतिदिन लगभग 10 हजार कॉल संभाल रहा है। 20 मई से 16 जून 2026 के बीच इस सेवा पर 3,06,264 कॉल प्राप्त हुईं, जिनमें 79,782 घटनाएं दर्ज की गईं। सुप्रीम Court ने अपने आदेश में यह भी निर्देश दिया है कि सड़क दुर्घटना के घायलों को कैशलेस इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई जाए, गुड सेमेरिटन कानून का प्रभावी पालन सुनिश्चित किया जाए, सभी एंबुलेंस में जीपीएस और व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग सिस्टम अनिवार्य हो, पैरामेडिकल कर्मचारियों को मानकीकृत प्रशिक्षण दिया जाए, ट्रॉमा सेंटरों की ग्रेडिंग की जाए और नई व्यवस्था की जानकारी लोगों तक पहुंचाने के लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाए।

छत्तीसगढ़ में सिर्फ डायल-112 बनेगा इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबर, 100 से 1091 तक सभी सेवाएं होंगी एकीकृत Read Post »

GOVERNMENT, Raipur, State, Top News

छत्तीसगढ़ में UCC लागू करने की तैयारी तेज, गोवा-उत्तराखंड मॉडल का होगा अध्ययन

छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की दिशा में राज्य सरकार ने प्रक्रिया तेज कर दी है। इसके लिए गठित उच्चस्तरीय समिति गोवा और उत्तराखंड में लागू यूसीसी के प्रावधानों का विस्तृत अध्ययन करेगी। साथ ही गुजरात, असम और मध्य प्रदेश में यूसीसी को लेकर बनी समितियों की रिपोर्ट और अनुभवों का भी विश्लेषण किया जाएगा, ताकि राज्य के लिए एक उपयुक्त मसौदा तैयार किया जा सके। समिति की अध्यक्षता पूर्व न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं। उनके साथ सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी शत्रुघ्न सिंह, एमके राउत, वरिष्ठ अधिवक्ता मोहन पवार और सेवानिवृत्त प्राचार्य ज्योति रानी सिंह सदस्य के रूप में शामिल हैं। अध्ययन के दौरान विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, संपत्ति के अधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े कानूनों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। गोवा और उत्तराखंड में लिव-इन संबंधों से जन्मे बच्चों को कानूनी अधिकार और संपत्ति में हिस्सेदारी देने जैसे प्रावधान मौजूद हैं। इन्हीं व्यवस्थाओं का मूल्यांकन कर छत्तीसगढ़ के लिए संभावित कानून तैयार किया जाएगा। राज्य में बड़ी आदिवासी आबादी को देखते हुए समिति यह भी जांच करेगी कि संविधान की पांचवीं और छठी अनुसूची के तहत संरक्षित जनजातीय परंपराओं, रीति-रिवाजों और प्रथागत कानूनों की सुरक्षा किस प्रकार सुनिश्चित की जा सकती है। उत्तराखंड की तरह छत्तीसगढ़ में भी अनुसूचित जनजातियों को यूसीसी के कुछ प्रावधानों से आंशिक या पूर्ण छूट देने की संभावना पर विचार किया जा सकता है। गोवा सिविल कोड के तहत पति-पत्नी को एक-दूसरे की संपत्ति में समान अधिकार प्राप्त हैं। तलाक की स्थिति में पत्नी को संपत्ति में बराबरी का हिस्सा मिल सकता है। माता-पिता की संपत्ति में बेटियों और बेटों को समान अधिकार दिए गए हैं। सामान्य रूप से एक से अधिक विवाह की अनुमति नहीं है, हालांकि हिंदू समुदाय से जुड़ा एक पुराना अपवाद कानून में मौजूद है, जिसे राज्य सरकार अब अप्रासंगिक मानती है और दशकों से इसका उपयोग नहीं हुआ है। वहीं उत्तराखंड यूसीसी कानून में सभी नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, गोद लेने और उत्तराधिकार संबंधी समान नियम बनाए गए हैं। बहुविवाह और एकतरफा तलाक पर रोक, विवाह का अनिवार्य पंजीकरण, लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीकरण, बेटा-बेटी को समान संपत्ति अधिकार और धर्मनिरपेक्ष गोद लेने की व्यवस्था इसके प्रमुख प्रावधान हैं। उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि संविधान निर्माताओं ने समान नागरिक संहिता का मार्ग पहले ही निर्धारित किया था और अब छत्तीसगढ़ भी उसी दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि समिति सभी वर्गों से चर्चा कर सुझावों के आधार पर मसौदा तैयार करेगी। दूसरी ओर, कांग्रेस ने इस पहल पर सवाल उठाए हैं। पूर्व मंत्री अमरजीत भगत का कहना है कि यूसीसी भारत जैसे विविधता वाले देश के लिए एक जटिल विषय है। उनके अनुसार यह सभी समुदायों के लिए समान रूप से उपयुक्त नहीं हो सकता और सरकार इसे राजनीतिक मुद्दे के रूप में आगे बढ़ा रही है।

छत्तीसगढ़ में UCC लागू करने की तैयारी तेज, गोवा-उत्तराखंड मॉडल का होगा अध्ययन Read Post »

GOVERNMENT, Raipur, State, Top News

अबूझमाड़ में राजस्व सर्वे के बीच बढ़ी जंगलों की कटाई, सरकारी पट्टे की उम्मीद में साफ किए जा रहे वन क्षेत्र

छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ क्षेत्र में पहली बार हो रहे राजस्व सर्वे के बीच बड़े पैमाने पर जंगलों की कटाई का मामला सामने आया है। दावा किया जा रहा है कि सरकारी भूमि पट्टे मिलने की संभावना को देखते हुए कई स्थानों पर वन क्षेत्र साफ किए जा रहे हैं, ताकि जमीन पर कब्जे और दावे को मजबूत किया जा सके। पहली बार हो रहा राजस्व सर्वे आजादी के बाद पहली बार अबूझमाड़ क्षेत्र का राजस्व सर्वे कराया जा रहा है। बताया जा रहा है कि सर्वे के बाद पात्र लोगों को भूमि अधिकार और पट्टे दिए जा सकते हैं। इसी को लेकर क्षेत्र में यह धारणा फैल गई है कि अधिक जमीन पर कब्जा दिखाने से भविष्य में उसका लाभ मिल सकता है। कई गांवों में दिखी पेड़ों की कटाई जांच के दौरान नारायणपुर, ओरछा, इरकभट्टी, कच्चापाल, कोडलियार, पदमकोट, कुतुल और नेलांगूर सहित कई गांवों के आसपास बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई और जंगल जलाने की घटनाएं सामने आईं। कई स्थानों पर पेड़ों को पहले आंशिक रूप से काटकर सूखने के लिए छोड़ दिया जाता है, बाद में उन्हें गिराकर या जलाकर जमीन खाली की जा रही है। स्थानीय और लौटे हुए लोग भी कर रहे हैं कब्जे की तैयारी जानकारी के अनुसार, जंगल साफ करने वालों में स्थानीय आदिवासियों के साथ वे लोग भी शामिल हैं, जो नक्सल हिंसा, रोजगार या अन्य कारणों से वर्षों पहले गांव छोड़ चुके थे और अब वापस लौट रहे हैं। आरोप है कि कुछ लोग अधिक जमीन पर दावा मजबूत करने के लिए बड़े पैमाने पर वन क्षेत्र साफ कर रहे हैं। नक्सल प्रभाव कम होने के बाद बढ़ी गतिविधियां अबूझमाड़ लंबे समय तक नक्सल प्रभावित क्षेत्र रहा, जहां सुरक्षा कारणों से विकास कार्य सीमित थे। हाल के वर्षों में सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ने और नए कैंप स्थापित होने के बाद इलाके में सरकारी गतिविधियां तेज हुई हैं। इसके साथ ही जंगलों की कटाई की घटनाओं में भी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। पर्यावरण संरक्षण को लेकर उठी चिंता पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोगों ने इस मामले को गंभीर बताते हुए राज्य सरकार का ध्यान आकर्षित किया है। उनका कहना है कि अबूझमाड़ का बड़ा हिस्सा वन क्षेत्र की श्रेणी में आता है और यहां अनियंत्रित कटाई से जैव विविधता और पर्यावरण को नुकसान पहुंच सकता है। वन विभाग ने शुरू किए रोकथाम के प्रयास वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, अबूझमाड़ क्षेत्र के बेहतर प्रबंधन के लिए नए वन परिक्षेत्र के गठन का प्रस्ताव सरकार को भेजा गया है। इसके अलावा जंगलों की निगरानी और अवैध कटाई रोकने के लिए करीब 30 स्थानों पर स्थानीय युवाओं की नियुक्ति की गई है। अधिकारियों का कहना है कि वन संरक्षण के लिए आगे भी सख्त कदम उठाए जाएंगे।

अबूझमाड़ में राजस्व सर्वे के बीच बढ़ी जंगलों की कटाई, सरकारी पट्टे की उम्मीद में साफ किए जा रहे वन क्षेत्र Read Post »

Raipur

रायपुर मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों की कमी और गहराई, प्रोफेसर बनने के बाद 17 शिक्षकों का हुआ तबादला

रायपुर के सरकारी मेडिकल कॉलेज में शिक्षकों की कमी लगातार बनी हुई है। हाल ही में 21 डॉक्टरों को प्रोफेसर पद पर पदोन्नत किया गया, लेकिन इनमें से 17 डॉक्टरों का विभिन्न सरकारी मेडिकल कॉलेजों में तबादला कर दिया गया। इससे पहले से स्टाफ की कमी से जूझ रहे मेडिकल कॉलेज पर अतिरिक्त दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। 417 में से 166 पद अब भी खाली मेडिकल कॉलेज में शिक्षकों के कुल 417 स्वीकृत पद हैं, जिनमें से 166 पद अभी भी रिक्त हैं। वर्तमान में 251 डॉक्टर शिक्षण कार्य कर रहे हैं। इनमें 156 नियमित और 95 संविदा पर कार्यरत हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि शिक्षकों की कमी का सीधा असर मेडिकल छात्रों की पढ़ाई और पीजी सीटों की संख्या पर पड़ता है। पहले भी घट चुकी हैं पीजी सीटें शिक्षकों की कमी का असर पहले भी देखने को मिला है। वर्ष 2025 में सर्जरी विभाग में पर्याप्त फैकल्टी नहीं होने के कारण पीजी की दो सीटें कम करनी पड़ी थीं। ऐसे में यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो भविष्य में अन्य विभाग भी प्रभावित हो सकते हैं। प्रदेशभर के मेडिकल कॉलेजों में भी स्टाफ की कमी केवल रायपुर ही नहीं, बल्कि प्रदेश के सभी सरकारी मेडिकल और डेंटल कॉलेज भी फैकल्टी की कमी से जूझ रहे हैं। राज्य के 10 सरकारी मेडिकल कॉलेज और एक सरकारी डेंटल कॉलेज में कुल 1,934 स्वीकृत शिक्षकों के पद हैं, जिनमें से 985 पद खाली हैं। यानी लगभग 51 प्रतिशत पदों पर अब भी नियुक्तियां नहीं हो सकी हैं। सुपरस्पेशलिटी अस्पतालों में भी डॉक्टरों की कमी रायपुर के डीकेएस सुपरस्पेशलिटी अस्पताल और बिलासपुर के सुपरस्पेशलिटी अस्पताल की स्थिति भी चिंताजनक है। दोनों संस्थानों में कुल 139 स्वीकृत पदों में से 81 पद खाली हैं, जिससे मरीजों को विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने में भी चुनौतियां सामने आ रही हैं। ढाई साल में 100 से अधिक डॉक्टरों ने छोड़ी नौकरी नियमित भर्ती प्रक्रिया लंबे समय से लंबित रहने के कारण कई डॉक्टर सरकारी सेवा छोड़ चुके हैं। पिछले करीब ढाई वर्षों में आंबेडकर अस्पताल और डीकेएस अस्पताल से 100 से अधिक डॉक्टर इस्तीफा दे चुके हैं। इनमें से कई डॉक्टर बेहतर अवसर मिलने पर मध्यप्रदेश, राजस्थान और अन्य राज्यों के मेडिकल संस्थानों में कार्यरत हो गए। इन विभागों के डॉक्टरों का हुआ तबादला पदोन्नति के बाद जिन डॉक्टरों का तबादला किया गया है, वे फॉरेंसिक मेडिसिन, फार्माकोलॉजी, एनाटॉमी, माइक्रोबायोलॉजी, मेडिसिन, गायनिक, ईएनटी, सर्जरी, दंत रोग, एनेस्थीसिया, चर्म रोग और रेडियोथेरेपी विभाग से जुड़े हैं। इनकी नई पदस्थापना कवर्धा, जांजगीर-चांपा, दंतेवाड़ा, मनेंद्रगढ़, महासमुंद, दुर्ग, कांकेर और बिलासपुर के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में की गई है.

रायपुर मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों की कमी और गहराई, प्रोफेसर बनने के बाद 17 शिक्षकों का हुआ तबादला Read Post »

GOVERNMENT, Raipur, State, Top News

रायपुर में कोचिंग सेंटर्स की सुरक्षा जांच तेज, कई संस्थानों को नोटिस; फायर सेफ्टी और इमरजेंसी व्यवस्था में मिली खामियां

रायपुर में कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था की जांच लगातार दूसरे दिन भी जारी रही। नगर निगम, अग्निशमन विभाग और अन्य संबंधित विभागों की संयुक्त टीम ने शहर के कई प्रमुख कोचिंग सेंटरों का औचक निरीक्षण किया। जांच के दौरान फायर सेफ्टी, वेंटिलेशन, लिफ्ट सुरक्षा और इमरजेंसी एग्जिट जैसी व्यवस्थाओं में कई कमियां सामने आने पर संबंधित संचालकों को नोटिस जारी किए गए। प्रमुख कोचिंग संस्थानों का हुआ निरीक्षण निरीक्षण के दौरान एलन, अनअकादमी, विद्यापीठ, आरसीसी और अकादजा कोचिंग संस्थानों की जांच की गई। अधिकारियों ने पाया कि एलन, अनअकादमी और विद्यापीठ की कुछ कक्षाओं में निर्धारित क्षमता से अधिक विद्यार्थियों को बैठाया जा रहा था। इसके अलावा कई स्थानों पर वेंटिलेशन व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं मिली। वहीं आरसीसी और अकादजा में फायर सेफ्टी, प्रवेश और निकास मार्ग, वेंटिलेशन तथा अन्य सुरक्षा मानकों में कई कमियां पाई गईं। अधिकारियों ने इन संस्थानों को एक सप्ताह के भीतर सभी खामियां दूर करने के निर्देश दिए हैं। तीन कोचिंग सेंटरों को जारी किया गया नोटिस नगर निगम के जोन-3 की टीम ने चाणक्य, इम्पैक्ट और क्लेट कोचिंग सेंटर का निरीक्षण किया। आनंद नगर स्थित चाणक्य कोचिंग सेंटर में संचालक फायर ऑडिट प्रमाणपत्र प्रस्तुत नहीं कर सके। इसके अलावा इमरजेंसी एग्जिट के सामने फर्नीचर रखा मिला, जिसे सुरक्षा नियमों का उल्लंघन माना गया। इस पर संचालक को नोटिस जारी किया गया। शंकर नगर के गीतांजलि नगर स्थित इम्पैक्ट कोचिंग सेंटर में फायर सेफ्टी सिस्टम पर्याप्त नहीं पाया गया। अधिकारियों ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए तत्काल सुधार के निर्देश दिए। इसी तरह शंकर नगर सेक्टर-1 स्थित क्लेट कोचिंग सेंटर में लिफ्ट का अलार्म सिस्टम बंद मिला। साथ ही लिफ्ट संचालन व्यवस्था भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं पाई गई। इस मामले में भी संचालक को नोटिस जारी कर निर्धारित समय के भीतर जवाब मांगा गया है। अन्य कोचिंग संस्थानों की भी हुई जांच निरीक्षण अभियान के तहत नगर निगम के विभिन्न जोनों में कृतविद्या, उड़ान, फुदान और दिल्ली आईएएस अकादमी स्टडी पॉइंट सहित अन्य कोचिंग संस्थानों की भी जांच की गई। अधिकारियों ने सभी संस्थानों को सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन करने और आवश्यक व्यवस्थाएं दुरुस्त रखने के निर्देश दिए। सुरक्षा नियमों के पालन पर रहेगा विशेष जोर हाल के समय में देशभर में कोचिंग संस्थानों में हुई दुर्घटनाओं के बाद प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सख्ती बढ़ा दी है। अधिकारियों का कहना है कि जिन संस्थानों में फायर सेफ्टी और अन्य आवश्यक सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जाएगा, उनके खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

रायपुर में कोचिंग सेंटर्स की सुरक्षा जांच तेज, कई संस्थानों को नोटिस; फायर सेफ्टी और इमरजेंसी व्यवस्था में मिली खामियां Read Post »

Raipur

छत्तीसगढ़ में UCC लागू करने की दिशा में बड़ा कदम, सरकार ने बनाई 5 सदस्यीय हाई लेवल कमेटी

छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code – UCC) लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है। यह समिति यूसीसी का प्रारूप तैयार करने के साथ-साथ विभिन्न पक्षों का अध्ययन कर सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा 25 जून को जारी आदेश के अनुसार, समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई करेंगी। समिति में शत्रुघ्न सिंह, एम.के. राउत, मोहन पवार और ज्योति रानी सिंह को सदस्य बनाया गया है। किन विषयों पर करेगी अध्ययन समिति राज्य में लागू विभिन्न व्यक्तिगत कानूनों (पर्सनल लॉ) का अध्ययन करेगी। इसके अंतर्गत विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, दत्तक ग्रहण तथा अन्य नागरिक मामलों से जुड़े मौजूदा कानूनी प्रावधानों की समीक्षा की जाएगी। अध्ययन के आधार पर समान नागरिक संहिता का मसौदा तैयार किया जाएगा। आम जनता और विशेषज्ञों से भी लिए जाएंगे सुझाव सरकार ने समिति को निर्देश दिया है कि वह नागरिकों, सामाजिक संगठनों, विधि विशेषज्ञों और अन्य संबंधित पक्षों से सुझाव प्राप्त करे। इसके अलावा उन राज्यों के अनुभवों का भी अध्ययन किया जाएगा, जहां यूसीसी लागू हो चुकी है या इस दिशा में ठोस पहल की गई है। रिपोर्ट मिलने के बाद सरकार करेगी फैसला समिति अपनी विस्तृत रिपोर्ट और यूसीसी का ड्राफ्ट राज्य सरकार को सौंपेगी। इसके साथ आवश्यक विधायी और प्रशासनिक सुझाव भी दिए जाएंगे। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि सरकार सभी पहलुओं पर व्यापक विचार-विमर्श और अध्ययन के बाद आगे की प्रक्रिया तय करेगी। यूसीसी लागू होने पर क्या बदलेगा यदि राज्य में समान नागरिक संहिता लागू होती है तो विवाह, तलाक, संपत्ति का उत्तराधिकार, गोद लेने और भरण-पोषण जैसे मामलों में सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून लागू होगा। वर्तमान में अलग-अलग धर्मों के लोग अपने-अपने पर्सनल लॉ के अनुसार इन मामलों का पालन करते हैं। सरकार का कहना है कि यूसीसी का उद्देश्य नागरिकों के लिए समान कानूनी व्यवस्था सुनिश्चित करना, विभिन्न व्यक्तिगत कानूनों के कारण होने वाली असमानताओं को कम करना तथा महिलाओं को समान अधिकार प्रदान करना है। किन राज्यों में लागू है यूसीसी उत्तराखंड देश का पहला राज्य है जहां समान नागरिक संहिता लागू की जा चुकी है। इसके अलावा गुजरात और असम ने भी यूसीसी से संबंधित विधेयक पारित किए हैं। वहीं गोवा में पुर्तगाली शासनकाल से लागू गोवा सिविल कोड आज भी प्रभावी है, हालांकि इसमें कुछ विशेष प्रावधान होने के कारण इसे पूर्ण आधुनिक यूसीसी नहीं माना जाता। छत्तीसगढ़ में गठित यह समिति राज्य में यूसीसी लागू करने की दिशा में शुरुआती और महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। समिति की रिपोर्ट के आधार पर सरकार आगे की कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया तय करेगी।

छत्तीसगढ़ में UCC लागू करने की दिशा में बड़ा कदम, सरकार ने बनाई 5 सदस्यीय हाई लेवल कमेटी Read Post »

GOVERNMENT, Political, Raipur

रायपुर की छात्रा महिमा राजपूत अंतरराष्ट्रीय स्पेस मिशन ShaktiSAT के लिए चयनित, बनाएंगी सैटेलाइट

रायपुर के तिलक नगर स्थित स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट इंग्लिश मीडियम स्कूल की कक्षा 10वीं की छात्रा महिमा राजपूत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। उनका चयन वैश्विक स्पेस मिशन ‘ShaktiSAT’ के लिए हुआ है। कई चरणों वाली ऑनलाइन चयन प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पार करने के बाद महिमा नेशनल फाइनलिस्ट बनी हैं और अब भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। महिमा का चयन देशभर से आए हजारों आवेदनों के बीच लिखित परीक्षा और इंटरव्यू के आधार पर किया गया। इस मिशन में दुनिया के 108 देशों की छात्राएं भाग लेंगी और अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़े विशेष प्रोजेक्ट्स पर काम करेंगी। अगस्त 2026 में नई दिल्ली में आयोजित होने वाली आठ दिवसीय ShaktiSAT वर्कशॉप में महिमा हिस्सा लेंगी। इस दौरान उन्हें सैटेलाइट डिजाइन, स्पेस टेक्नोलॉजी और मिशन प्लानिंग की व्यावहारिक जानकारी दी जाएगी। विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में छात्राएं वास्तविक स्पेस प्रोजेक्ट्स पर काम करने का अनुभव प्राप्त करेंगी। 23 अगस्त से शुरू होने वाले इस कार्यक्रम में विभिन्न देशों की छात्राएं मिलकर दो सैटेलाइट तैयार करेंगी। इनमें से एक सैटेलाइट को चंद्रमा की कक्षा में भेजने की योजना है, जबकि दूसरा चंद्रमा की सतह पर उतरने के लिए विकसित किया जाएगा। मिशन के तहत तैयार किए गए सैटेलाइट्स को अक्टूबर 2026 में श्रीहरिकोटा स्थित ISRO के लॉन्च पैड से अंतरिक्ष में भेजने का लक्ष्य रखा गया है। यह अवसर विज्ञान और अंतरिक्ष अनुसंधान में रुचि रखने वाले विद्यार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। महिमा ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, शिक्षकों, विद्यालय प्रबंधन और जिला प्रशासन को दिया है। उन्होंने विशेष रूप से अपनी शिक्षिका योगेश्वरी लहरी और विद्यालय की प्राचार्य जॉली साहू के मार्गदर्शन को महत्वपूर्ण बताया। महिमा की रुचि पेंटिंग और कहानी लेखन में है, जबकि भविष्य में वह भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में जाना चाहती हैं। उनका मानना है कि यदि विद्यार्थियों को सही मार्गदर्शन और अवसर मिले तो वे किसी भी क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकते हैं। ShaktiSAT मिशन का उद्देश्य दुनिया भर की छात्राओं को स्पेस साइंस, सैटेलाइट टेक्नोलॉजी, रोबोटिक्स और वैज्ञानिक अनुसंधान से जोड़ना है। यह पहल विशेष रूप से STEM शिक्षा में लड़कियों की भागीदारी बढ़ाने और भविष्य के वैज्ञानिकों एवं शोधकर्ताओं को तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

रायपुर की छात्रा महिमा राजपूत अंतरराष्ट्रीय स्पेस मिशन ShaktiSAT के लिए चयनित, बनाएंगी सैटेलाइट Read Post »

Raipur, State, Tech, Top News
Scroll to Top