Raipur

CG बोर्ड 10वीं रिजल्ट आज 2:30 बजे जारी, 3.20 लाख स्टूडेंट्स का इंतजार खत्म

छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल (CGBSE) आज दोपहर 2:30 बजे 10वीं बोर्ड परीक्षा का परिणाम घोषित करने जा रहा है। लाखों छात्रों का इंतजार अब खत्म होने वाला है और वे अपना रिजल्ट आधिकारिक वेबसाइट पर रोल नंबर के जरिए देख सकेंगे। इस साल करीब 3,20,535 छात्र-छात्राओं ने 10वीं बोर्ड परीक्षा के लिए पंजीयन कराया था। परीक्षा देने वाले सभी विद्यार्थी अपने परिणाम का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, जो अब कुछ ही घंटों में खत्म हो जाएगा। पिछले वर्ष यानी 2025 की बात करें तो लगभग 3,23,094 छात्र परीक्षा में शामिल हुए थे, जिनमें से 76.53 प्रतिशत छात्र सफल हुए थे। यह परिणाम पिछले चार वर्षों में सबसे बेहतर माना गया था, जिसमें करीब 2.46 लाख विद्यार्थियों ने सफलता हासिल की थी। 2025 में कुल मिलाकर करीब 5.65 लाख विद्यार्थियों ने बोर्ड परीक्षा दी थी, जिसमें 10वीं के परीक्षार्थियों की संख्या 3.23 लाख के आसपास थी। वहीं 2026 में यह आंकड़ा थोड़ा घटकर लगभग 3.20 लाख रह गया है। पिछले साल की तरह इस बार भी रिजल्ट में छात्राओं के प्रदर्शन पर विशेष नजर रहेगी, क्योंकि बीते वर्षों में लड़कियों ने बेहतर परिणाम दिए हैं। इसके अलावा मेरिट लिस्ट, टॉपर्स और पास प्रतिशत को लेकर भी छात्रों और अभिभावकों की उत्सुकता बनी हुई है।

CG बोर्ड 10वीं रिजल्ट आज 2:30 बजे जारी, 3.20 लाख स्टूडेंट्स का इंतजार खत्म Read Post »

Chhattisgarh, Education, GOVERNMENT, Raipur, State, Top News

छत्तीसगढ़ में 5 दिन अंधड़-बारिश का अलर्ट, 40-50 किमी/घंटा की रफ्तार से चलेगी हवा; तापमान में और गिरावट संभव

छत्तीसगढ़ में भीषण गर्मी के बीच अब मौसम ने करवट लेनी शुरू कर दी है। पिछले 24 घंटों में अधिकतम तापमान में करीब 2 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई है। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले 2 से 3 दिनों में तापमान में 2 से 3 डिग्री तक और कमी आ सकती है, जिससे लोगों को गर्मी से कुछ राहत मिलने की संभावना है। हालांकि राहत के साथ-साथ मौसम विभाग ने अगले 5 दिनों के लिए चेतावनी भी जारी की है। इस दौरान प्रदेश के कई इलाकों में गरज-चमक के साथ हल्की बारिश हो सकती है और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। तापमान के आंकड़ों पर नजर डालें तो Durg में अधिकतम तापमान 43.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो प्रदेश में सबसे ज्यादा रहा। वहीं Ambikapur में न्यूनतम तापमान 23.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। फिलहाल अगले कुछ दिनों तक मौसम का यही रुख बने रहने का अनुमान है। Raipur की बात करें तो सुबह आसमान साफ रहने के बाद दोपहर या शाम तक बादल छाने की संभावना है। यहां अधिकतम तापमान करीब 43 डिग्री और न्यूनतम 27 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। मौसम में इस बदलाव के पीछे पूर्वी उत्तर प्रदेश, उत्तर तेलंगाना और उत्तर भारत से पूर्वोत्तर तक फैले साइक्लोनिक सर्कुलेशन और ट्रफ लाइन को मुख्य वजह माना जा रहा है। इसी सिस्टम के कारण प्रदेश में आंधी और बारिश की गतिविधियां बन रही हैं।

छत्तीसगढ़ में 5 दिन अंधड़-बारिश का अलर्ट, 40-50 किमी/घंटा की रफ्तार से चलेगी हवा; तापमान में और गिरावट संभव Read Post »

Bhilai / Durg, Chhattisgarh, Raipur, State, Top News, weather

CGMSC ने आयरन-फोलिक एसिड दवा का बैच वापस मंगाया, रंग बदलने और टूटने की शिकायत के बाद एक्शन

छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कॉर्पोरेशन (CGMSC) ने आयरन-फोलिक एसिड की एक दवा के बैच को एहतियातन वापस मंगाने का फैसला लिया है। यह निर्णय तब लिया गया जब रायपुर और बलौदाबाजार जिलों के स्वास्थ्य केंद्रों में वितरित इस दवा की कुछ गोलियों के रंग बदलने और टूटने की शिकायत सामने आई। यह मामला फेरस सल्फेट और फोलिक एसिड (लाल रंग) टैबलेट, ड्रग कोड D221M और बैच नंबर FFR 240703 से संबंधित है। शिकायत मिलने के बाद दवा का दोबारा गुणवत्ता परीक्षण कराया गया। हालांकि जांच में दवा मानकों के अनुरूप पाई गई, फिर भी सावधानी बरतते हुए संबंधित कंपनी मेसर्स सिप्को फार्मास्यूटिकल्स को पूरा बैच वापस लेने के निर्देश दिए गए हैं। Raipur और Baloda Bazar के सभी अस्पतालों, जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC), प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) और शहरी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों को आदेश जारी किया गया है कि इस बैच का उपलब्ध स्टॉक तुरंत गोदाम में जमा कराया जाए। यह दवा मुख्य रूप से गर्भवती महिलाओं, किशोरियों और एनीमिया से पीड़ित मरीजों को दी जाती है। आयरन और फोलिक एसिड शरीर में खून की कमी दूर करने, हीमोग्लोबिन बढ़ाने और नई कोशिकाओं के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य कार्यक्रमों में इस दवा का उपयोग एनीमिया नियंत्रण, मातृ-शिशु स्वास्थ्य और पोषण योजनाओं के तहत व्यापक रूप से किया जाता है। इसी वजह से किसी भी तरह की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए यह कदम उठाया गया है। स्वास्थ्य विभाग ने सभी संबंधित संस्थानों को निर्देश दिया है कि दवा का वितरण रोककर उसे वापस किया जाए, ताकि मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

CGMSC ने आयरन-फोलिक एसिड दवा का बैच वापस मंगाया, रंग बदलने और टूटने की शिकायत के बाद एक्शन Read Post »

Chhattisgarh, GOVERNMENT, Raipur, State, Top News

गुवाहाटी में हिरासत में रायपुर पुलिस टीम, 24 घंटे बाद रिहा; डिजिटल अरेस्ट केस में पैसों के लेन-देन के आरोप

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से गई पुलिस टीम को असम की राजधानी Guwahati में हिरासत में लिए जाने की घटना ने पुलिस महकमे में हलचल पैदा कर दी। यह मामला टिकरापारा थाने में दर्ज डिजिटल अरेस्ट से जुड़ी ठगी की जांच के दौरान सामने आया, जिसमें करीब 17.15 लाख रुपए की धोखाधड़ी हुई थी। जानकारी के अनुसार, इस केस में आरोपियों की तलाश में रायपुर पुलिस की टीम Raipur से गुवाहाटी पहुंची थी। टीम में थाना प्रभारी रविंद्र यादव सहित चार पुलिसकर्मी शामिल थे। आरोप है कि कार्रवाई के दौरान टीम ने कुछ आरोपियों को पकड़ने के बाद कथित रूप से पैसों के बदले दो अन्य संदिग्धों को छोड़ दिया। इसी आरोप के आधार पर असम पुलिस ने रायपुर पुलिस टीम को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की। कार्रवाई के दौरान करीब 2.50 लाख रुपए भी जब्त किए गए, जिन्हें स्थानीय पुलिस ने संदिग्ध लेन-देन से जुड़ा बताया है। वहीं, जिन आरोपियों को छोड़े जाने का दावा किया गया, उनकी शिकायत पर एफआईआर भी दर्ज की गई। हालांकि, छत्तीसगढ़ पुलिस का कहना है कि यह रकम ठगी के केस में रिकवरी का हिस्सा थी। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, आरोपियों से पूछताछ के दौरान ठगी गई राशि वापस ली जा रही थी, लेकिन स्थानीय लोगों ने इसे रिश्वत का मामला बताकर विरोध किया और पुलिस को सूचना दे दी। पूरे घटनाक्रम के बाद दोनों राज्यों की पुलिस के बीच तनाव की स्थिति बन गई। वरिष्ठ अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद करीब 24 घंटे की पूछताछ के पश्चात असम पुलिस ने रायपुर पुलिस टीम को छोड़ दिया। इसके बाद टीम वापस छत्तीसगढ़ के लिए रवाना हो गई। यह मामला टिकरापारा क्षेत्र के एक निवासी शरद कुमार से जुड़ा है, जिन्हें वीडियो कॉल के जरिए खुद को सरकारी अधिकारी बताने वाले ठग ने डराकर बैंक डिटेल हासिल कर ली थी। आरोपी ने अलग-अलग किश्तों में करीब 17 लाख 15 हजार रुपए ट्रांसफर करवा लिए थे। जब पीड़ित को रकम वापस नहीं मिली, तब उसने थाने में शिकायत दर्ज करवाई। फिलहाल इस मामले की जांच दोनों राज्यों की पुलिस अपने-अपने स्तर पर कर रही है और पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने आने का इंतजार है।

गुवाहाटी में हिरासत में रायपुर पुलिस टीम, 24 घंटे बाद रिहा; डिजिटल अरेस्ट केस में पैसों के लेन-देन के आरोप Read Post »

Chhattisgarh, Cyber Crime, Raipur, State, Top News

बोरझारा की अऊम इंजिनियरिंग में श्रम विवाद गहराया, 30 अप्रैल को उग्र धरना-प्रदर्शन की चेतावनी

रायपुर के बोरझारा स्थित अऊम इंजिनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड में श्रमिकों के साथ कथित अन्याय का मामला सामने आया है, जिसने अब बड़ा रूप ले लिया है। दो कर्मचारियों—कृष्ण कुमार कुजूर और किशोर मिर्धा—ने फैक्ट्री प्रबंधन पर बिना कारण बताए नौकरी से निकालने और बकाया भुगतान नहीं करने का आरोप लगाया है। शिकायत के अनुसार, कृष्ण कुमार कुजूर लगभग 6 महीने से क्वालिटी इंचार्ज और किशोर मिर्धा करीब 1 महीने से सुपरवाइजर के पद पर कार्यरत थे। दोनों का दावा है कि उनके काम को लेकर कभी कोई शिकायत नहीं की गई। इसके बावजूद 22 अप्रैल 2026 को अचानक बिना किसी पूर्व सूचना या नोटिस के उन्हें काम से निकाल दिया गया और फैक्ट्री गेट बंद कर दिया गया। आरोप यह भी है कि काम के दौरान उनका नाम ESIC और PF (PAF) में दर्ज नहीं किया गया, जो श्रम कानूनों का उल्लंघन है। कर्मचारियों का कहना है कि जब उन्होंने अपने बकाया वेतन और हिसाब-किताब की मांग की, तो प्रबंधन ने भुगतान करने से इनकार कर दिया और धमकी भरे लहजे में बात की। इस मामले में आवेदक बेदराम साहू ने बताया कि उन्होंने दो बार फोन के माध्यम से फैक्ट्री प्रबंधन से बातचीत कर मजदूरों का भुगतान कराने का प्रयास किया, लेकिन यश गुप्ता नामक व्यक्ति ने गलत नियमों का हवाला देते हुए भुगतान से साफ मना कर दिया। श्रम कानूनों के तहत अब किशोर मिर्धा को दो महीने का नोटिस पेमेंट और कृष्ण कुमार कुजूर को एक महीने का नोटिस पेमेंट मिलना चाहिए। कुल मिलाकर कृष्ण कुजूर के 34,660 रुपये और किशोर मिर्धा के 43,200 रुपये बकाया बताए गए हैं। आवेदक ने फैक्ट्री प्रबंधन को दो दिन के भीतर भुगतान करने की चेतावनी दी है। अन्यथा 30 अप्रैल 2026 को फैक्ट्री गेट के सामने मजदूर परिवार और स्थानीय लोगों के साथ धरना-प्रदर्शन और घेराव किया जाएगा। साथ ही, इस दौरान होने वाली किसी भी स्थिति के लिए पूरी जिम्मेदारी कंपनी प्रबंधन की होगी।

बोरझारा की अऊम इंजिनियरिंग में श्रम विवाद गहराया, 30 अप्रैल को उग्र धरना-प्रदर्शन की चेतावनी Read Post »

Chhattisghar, Raipur, State, Top News

छत्तीसगढ़ बोर्ड रिजल्ट कल 2:30 बजे जारी: 10वीं-12वीं के 5.66 लाख छात्रों का इंतजार खत्म

छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल (Chhattisgarh Board of Secondary Education) कल दोपहर 2:30 बजे हाई स्कूल (10वीं) और हायर सेकेंडरी (12वीं) परीक्षा के नतीजे घोषित करेगा। इसकी जानकारी स्कूल शिक्षा मंत्री Gajendra Yadav ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X के जरिए दी। इस साल करीब 5.66 लाख छात्र-छात्राओं ने बोर्ड परीक्षा दी थी, जिनकी मेहनत का परिणाम अब सामने आने वाला है। मंडल की आधिकारिक वेबसाइट पर छात्र अपना रोल नंबर दर्ज कर आसानी से रिजल्ट देख सकेंगे। इस बार 10वीं में 3,20,535 और 12वीं में 2,45,785 परीक्षार्थी शामिल हुए। आंकड़ों के मुताबिक, 10वीं के छात्रों की संख्या 12वीं से लगभग 31 प्रतिशत अधिक रही, जो हर साल की तरह इस बार भी ट्रेंड को दिखाता है। पिछले साल के मुकाबले इस बार कुल परीक्षार्थियों की संख्या लगभग स्थिर रही है, हालांकि 12वीं में छात्रों की संख्या में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं 75% उपस्थिति अनिवार्य होने के कारण करीब 1400 छात्र परीक्षा में शामिल नहीं हो पाए। रिजल्ट का इंतजार सिर्फ छात्रों के लिए ही नहीं, बल्कि उनके परिवारों और स्कूलों के लिए भी बेहद अहम होता है। 10वीं के छात्र जहां आगे के विषय और स्ट्रीम का चयन करेंगे, वहीं 12वीं के छात्र कॉलेज एडमिशन और करियर की दिशा तय करेंगे। पिछले साल की तरह इस बार भी सभी की नजर पास प्रतिशत, मेरिट लिस्ट और टॉपर्स पर टिकी हुई है। मंडल ने छात्रों से अपील की है कि वे रिजल्ट को सकारात्मक रूप से लें। अच्छे अंक आने पर आगे की तैयारी में जुटें, और यदि परिणाम उम्मीद के मुताबिक न हो तो निराश होने के बजाय नए अवसरों पर ध्यान दें।

छत्तीसगढ़ बोर्ड रिजल्ट कल 2:30 बजे जारी: 10वीं-12वीं के 5.66 लाख छात्रों का इंतजार खत्म Read Post »

Chhattisgarh, Education, GOVERNMENT, Raipur, State, Top News

AI वीडियो विवाद: भूपेश बघेल और सौम्या चौरसिया का कथित वीडियो वायरल, FIR दर्ज, जांच तेज

छत्तीसगढ़ में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और पूर्व उपसचिव सौम्या चौरसिया से जुड़ा एक कथित AI जनरेटेड वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद राजनीतिक और कानूनी विवाद खड़ा हो गया है। इस वीडियो को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कड़ी आपत्ति जताते हुए राज्य के अलग-अलग 8 थानों में शिकायत दर्ज कराई है। मामला भिलाई नगर थाना क्षेत्र का बताया जा रहा है, जहां पुलिस ने संबंधित इंस्टाग्राम आईडी संचालक के खिलाफ FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। विवाद बढ़ने के बाद संबंधित इंस्टाग्राम पेज को भी बैन कर दिया गया है। यह वीडियो ‘कांग्रेस पोल खोल’ और ‘रैंडम छत्तीसगढ़’ नाम के इंस्टाग्राम अकाउंट से साझा किया गया था, जिसे कांग्रेस नेताओं ने आपत्तिजनक और भ्रामक बताया है। जिला कांग्रेस कमेटी दुर्ग (ग्रामीण) के अध्यक्ष राकेश ठाकुर ने इस पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 353(2) के तहत केस दर्ज किया है। इस मुद्दे को लेकर 26 अप्रैल को कांग्रेस नेताओं ने एसएसपी विजय अग्रवाल से मुलाकात कर कार्रवाई की मांग की थी। इसके बाद जिले के कई थाना क्षेत्रों—जामगांव आर, कुम्हारी, भिलाई-3, नंदिनी नगर अहिवारा, जामुल, धमधा, अंडा, जेवरा सिरसा और रानीतराई—में कार्यकर्ताओं ने पहुंचकर विरोध दर्ज कराया। फिलहाल पुलिस ने जिन इंस्टाग्राम आईडी से वीडियो पोस्ट किया गया था, उन्हें प्लेटफॉर्म से हटवा दिया है और अब उन अकाउंट्स को संचालित करने वाले लोगों की पहचान की जा रही है। मामले की जांच साइबर टीम को सौंपी गई है, जो वीडियो के स्रोत, एडिटिंग और अपलोड की पूरी प्रक्रिया का पता लगाने में जुटी है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही आरोपियों तक पहुंचकर सख्त कार्रवाई की जाएगी। इधर राज्य महिला आयोग ने भी इस मामले में स्वतः संज्ञान लिया है और दुर्ग के एसएसपी को पत्र लिखकर जांच के निर्देश दिए हैं। आयोग ने इसे बेहद संवेदनशील मामला बताते हुए कहा है कि तकनीक का दुरुपयोग कर किसी की छवि खराब करना, खासकर महिलाओं को लेकर आपत्तिजनक सामग्री तैयार करना, गंभीर अपराध है और ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जरूरी है।

AI वीडियो विवाद: भूपेश बघेल और सौम्या चौरसिया का कथित वीडियो वायरल, FIR दर्ज, जांच तेज Read Post »

Chhattisgarh, Crime, GOVERNMENT, Political, Raipur, State, Top News

21 करोड़ की फोरेंसिक वैन खड़ी, जांच ठप: जिलों में न पहुंचने से रायपुर लैब पर बढ़ा दबाव

राज्य में अपराध जांच को आधुनिक और तेज बनाने के उद्देश्य से सरकार ने 21.35 करोड़ रुपए खर्च कर 35 मोबाइल फोरेंसिक वैन खरीदीं, लेकिन खरीदी के करीब चार महीने बाद भी ये वाहन जिलों तक नहीं पहुंच पाए हैं और अमलेश्वर में खड़े हैं। इसका सीधा असर जांच प्रक्रिया पर देखने को मिल रहा है। जहां पहले किसी केस की फोरेंसिक रिपोर्ट 2-3 दिनों में मिल जाती थी, अब वही रिपोर्ट आने में 3 से 4 हफ्ते लग रहे हैं। दरअसल, प्रदेश के किसी भी जिले में गंभीर अपराध होने पर अब भी सैंपल जांच के लिए रायपुर की फोरेंसिक लैब भेजे जा रहे हैं, जिससे वहां काम का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। केंद्र सरकार के नए बीएनएस कानून के तहत गंभीर मामलों में फोरेंसिक जांच अनिवार्य किए जाने के बावजूद संसाधनों का सही तरीके से उपयोग नहीं हो पा रहा है। रायपुर की हाईटेक लैब में डीएनए जांच, डिजिटल साक्ष्य, हथियार, विस्फोटक और विभिन्न जैविक नमूनों की जांच की जा रही है, लेकिन पूरे राज्य का भार एक ही जगह होने से प्रक्रिया धीमी हो गई है। वहीं, मोबाइल फोरेंसिक वैन का मुख्य उद्देश्य यही था कि घटनास्थल पर ही साक्ष्य एकत्र कर उनकी प्राथमिक जांच की जा सके। इन वैन के जरिए मौके पर ही फोटो-वीडियो रिकॉर्डिंग, सीन स्केच और साक्ष्यों की सुरक्षित पैकेजिंग जैसी सुविधाएं मिल सकती हैं, जिससे जांच की गुणवत्ता और गति दोनों में सुधार होता। हालांकि विभाग का कहना है कि वाहनों को जिलों में भेजने की प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है और एक सप्ताह के भीतर इन्हें रवाना कर दिया जाएगा, जिसके बाद जांच व्यवस्था में सुधार की उम्मीद है।

21 करोड़ की फोरेंसिक वैन खड़ी, जांच ठप: जिलों में न पहुंचने से रायपुर लैब पर बढ़ा दबाव Read Post »

Chhattisgarh, Crime, GOVERNMENT, Political, Raipur, State, Top News

नगर निगम सभा में हंगामा: महिला सशक्तिकरण पर तीखी बहस, माइक छीना तो बढ़ा विवाद

नगर निगम की विशेष सामान्य सभा में महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर जमकर राजनीतिक टकराव देखने को मिला। चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए, जिससे माहौल काफी गरमा गया। विवाद उस समय और बढ़ गया जब नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने बिना किसी का नाम लिए ‘अंग्रेजों के मुखबिर’ जैसी टिप्पणी कर दी। इस बयान पर भाजपा पार्षद नाराज हो गए और विरोध जताते हुए उनका माइक छीनने तक पहुंच गए। इसके चलते करीब 15 मिनट तक हंगामा और नारेबाजी होती रही, जिसके बाद स्थिति को संभालने के लिए सभापति को बैठक कुछ समय के लिए स्थगित करनी पड़ी। करीब साढ़े पांच घंटे तक चली इस बैठक में आखिरकार महिला सशक्तिकरण को लेकर जनजागरूकता अभियान चलाने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया। इससे पहले भाजपा पार्षद महिला आरक्षण संशोधन के विरोध में काले कपड़े और काले रिबन पहनकर सभा में पहुंचे थे। बैठक खत्म होने के बाद उन्होंने निगम मुख्यालय से कोतवाली चौक तक रैली निकालकर अपना विरोध भी दर्ज कराया। बैठक के दौरान सत्ता पक्ष ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह महिला अधिकारों के मुद्दे पर सहयोग नहीं कर रहा है। वहीं विपक्ष ने पलटवार करते हुए कहा कि महिला सशक्तिकरण के नाम पर राजनीति की जा रही है और शहर की मूलभूत समस्याएं जैसे पेयजल, सफाई और सड़क को नजरअंदाज किया जा रहा है। महापौर मीनल चौबे ने महिला सशक्तिकरण को एक जरूरी पहल बताते हुए विपक्ष की आलोचना की, जबकि विपक्ष ने इसे महज राजनीतिक एजेंडा करार दिया।

नगर निगम सभा में हंगामा: महिला सशक्तिकरण पर तीखी बहस, माइक छीना तो बढ़ा विवाद Read Post »

Chhattisgarh, GOVERNMENT, Political, Raipur, State, Top News

छत्तीसगढ़ में RTE से प्री-स्कूल बाहर: 38 हजार बच्चों पर असर, सरकार बनाम स्कूल एसोसिएशन आमने-सामने

छत्तीसगढ़ सरकार ने प्री-स्कूल (नर्सरी, LKG, UKG) कक्षाओं को शिक्षा का अधिकार (RTE) कानून के दायरे से बाहर करने का निर्णय लिया है। 16 दिसंबर 2025 को जारी इस आदेश का असर राज्य के करीब 38 हजार गरीब बच्चों पर पड़ने की आशंका है। इस फैसले को लेकर विवाद भी तेज हो गया है। छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर इसे संविधान के खिलाफ बताया है। एसोसिएशन का कहना है कि आज के समय में शिक्षा की शुरुआत प्री-स्कूल स्तर से होती है, ऐसे में गरीब बच्चों को इस शुरुआती चरण से बाहर करना उन्हें आगे की पढ़ाई में भी पीछे धकेल सकता है। सरकार ने अपने पक्ष में तर्क दिया है कि RTE अधिनियम मूल रूप से 6 से 14 वर्ष की आयु के बच्चों, यानी कक्षा 1 से 8 तक के लिए बनाया गया है। ऐसे में प्री-स्कूल को इसमें शामिल करना कानूनी रूप से अनिवार्य नहीं है। इसके साथ ही सरकार ने आर्थिक बोझ का मुद्दा भी उठाया है। सरकार के अनुसार यदि प्री-स्कूल को RTE के तहत रखा जाता है, तो हर साल लगभग 60 से 70 करोड़ रुपए का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ेगा। सरकार का यह भी कहना है कि पहले प्री-स्कूल को RTE में शामिल करना एक प्रशासनिक त्रुटि थी, जिसे अब सुधारने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि, इस फैसले का एक अलग पक्ष भी है। साल 2015-16 में राज्य सरकार ने खुद यह निर्णय लिया था कि प्री-स्कूल को RTE के दायरे में लाया जाए, ताकि 3 से 6 साल के बच्चों को शुरुआती स्तर पर बेहतर शिक्षा मिल सके। उस समय सरकार का मानना था कि प्रारंभिक शिक्षा से बच्चों का मानसिक विकास बेहतर होता है और भविष्य में ड्रॉपआउट दर भी कम होती है। साथ ही, यह कदम सामाजिक समानता को बढ़ावा देने के लिए भी अहम माना गया था, ताकि गरीब और अमीर बच्चे एक साथ पढ़ सकें। सरकार ने अपने जवाब में यह भी कहा है कि छोटे बच्चों में ड्रॉपआउट दर अधिक होती है और प्री-स्कूल के नाम पर कई नए संस्थान खुल रहे हैं, जिससे कानून के दुरुपयोग की आशंका है। लेकिन उपलब्ध आंकड़े इस दावे पर सवाल खड़े करते हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार 3 से 8 साल के बच्चों में ड्रॉपआउट दर लगभग 2 से 3 प्रतिशत के बीच है, जो बहुत अधिक नहीं मानी जाती। हालांकि, नामांकन में कमी जरूर देखी गई है, जहां 16 से 28 प्रतिशत तक बच्चे अब भी प्री-प्राइमरी शिक्षा से बाहर हैं। वर्तमान में यह मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है और सभी की नजरें अदालत के फैसले पर टिकी हैं। कोर्ट के निर्णय के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि प्री-स्कूल कक्षाएं दोबारा RTE के दायरे में आएंगी या नहीं, और राज्य की शिक्षा नीति किस दिशा में आगे बढ़ेगी

छत्तीसगढ़ में RTE से प्री-स्कूल बाहर: 38 हजार बच्चों पर असर, सरकार बनाम स्कूल एसोसिएशन आमने-सामने Read Post »

Chhattisgarh, Education, GOVERNMENT, Raipur
Scroll to Top