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शादी का वादा कर युवती से दुष्कर्म, इंकार के बाद आरोपी गिरफ्तार — इंस्टाग्राम से हुई थी पहचान

Raigarh जिले में शादी का झांसा देकर युवती के साथ दुष्कर्म करने का मामला सामने आया है। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी युवक को गिरफ्तार कर लिया है। मामला Chakradhar Nagar थाना क्षेत्र का है। पुलिस के अनुसार, 29 वर्षीय युवती की पहचान इंस्टाग्राम के जरिए सरिया निवासी Suraj alias Suryakant Sahu से हुई थी। 29 अप्रैल 2024 को शुरू हुई यह ऑनलाइन पहचान धीरे-धीरे दोस्ती में बदल गई और दोनों के बीच फोन पर बातचीत होने लगी। घर में अकेली पाकर जबरदस्ती बताया गया कि 20 अक्टूबर 2025 को आरोपी युवती के घर पहुंचा, जहां वह अकेली थी। आरोप है कि उसने जबरन शारीरिक संबंध बनाए और विरोध करने पर जान से मारने की धमकी देकर किसी को न बताने को कहा। डर के कारण युवती चुप रही। रायपुर ले जाकर भी किया शोषण इसके बाद 25 नवंबर 2025 को आरोपी युवती को Raipur घुमाने के बहाने अपने रिश्तेदारों के घर ले गया, जहां दो दिनों तक उसके साथ रहा और शारीरिक संबंध बनाए। कुछ समय बाद युवती गर्भवती हो गई। पीड़िता के अनुसार, आरोपी ने शादी की बात टालनी शुरू कर दी। बाद में वह युवती के घर आया और खाना लाकर दिया, जिसके अगले दिन युवती को तेज पेट दर्द हुआ और गर्भपात हो गया। इसके बाद आरोपी ने संपर्क बंद कर दिया। शादी से इंकार के बाद शिकायत 5 मार्च 2026 को आरोपी ने युवती को सरिया के बाजार चौक बुलाया और शादी से साफ इंकार कर दिया। इसके बाद पीड़िता ने परिजनों को पूरी घटना बताई और महिला थाना में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।

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Chhattisgarh, Crime, Raigarh, Top News

महिला सहकारिता सम्मेलन में जुटीं 800 से अधिक प्रतिनिधि, मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने मातृशक्ति की भूमिका बताई अहम

Sahakar Bharati छत्तीसगढ़ द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय महिला सहकारिता सम्मेलन Prajapita Brahma Kumaris Ishwariya Vishwa Vidyalaya के सेक्टर-7 स्थित परिसर में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आईं 800 से ज्यादा महिला प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जिससे महिला-आधारित सहकारिता गतिविधियों में बढ़ती भागीदारी का संकेत मिला। मुख्य अतिथि मंत्री Lakshmi Rajwade ने कहा कि मातृशक्ति आज हर क्षेत्र में नेतृत्व कर रही है। उन्होंने महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण में सहकारिता की अहम भूमिका बताते हुए कहा कि शासन की योजनाएं महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में सहायक बन रही हैं। पंच परिवर्तन पर दिया गया जोर सम्मेलन में राष्ट्रीय महिला प्रमुख Revati Tai Shendurnikar ने सहकारिता से जुड़े विभिन्न कार्यों की जानकारी दी और “पंच परिवर्तन” — स्वदेशी, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता, परिवार जागरण और नागरिक कर्तव्य — के महत्व को रेखांकित किया। दो सत्रों में आयोजित कार्यक्रम में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी के माध्यम से सहकारिता आंदोलन को और मजबूत करने के लिए विचार-विमर्श किया गया तथा भविष्य की रणनीति पर चर्चा हुई। कई प्रमुख हस्तियां रहीं मौजूद इस अवसर पर Asha Didi, विधायक Rikesh Sen, समाजसेवी Rajni Vijay Baghel सहित अनेक पदाधिकारी और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। संगठन को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से विभिन्न प्रादेशिक दायित्वों की घोषणा भी की गई। इनमें महिला प्रकोष्ठ प्रदेश संयोजक के रूप में स्मिता दोड़के, सह-संयोजक पूजा पांडे, एफपीओ प्रदेश संयोजक डॉ. अनुज नारद, दुर्ग संभाग संयोजक दीपक मिश्रा तथा मत्स्य प्रकोष्ठ महिला संयोजक अंजू मटियारा को जिम्मेदारी सौंपी गई।

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Bhilai / Durg, Chhattisgarh, Political, State, Top News

गाड़ी धक्का लगाने से इनकार पर दोस्त की पिटाई से मौत, भिलाई केस में 6 दोषियों को 10-10 साल की सजा

Bhilai के चर्चित हत्याकांड में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। Durg स्थित पंचम अपर सत्र न्यायालय के न्यायाधीश दीपक कुमार कोशले ने मामले में सभी छह आरोपियों को दोषी ठहराते हुए 10-10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने इसे हत्या (धारा 302) नहीं बल्कि गैर-इरादतन हत्या (धारा 304 भाग-2) माना। प्रत्येक दोषी पर 500 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। दोषियों में भूपेश देवदास, ब्रिजेश उर्फ बिजू, हरीश कुमार घृतलहरे, समीर खान उर्फ अमन, अजय उर्फ अज्जू भदौरिया और पंकज कुमार लाउत्ररे शामिल हैं। कैसे शुरू हुआ विवाद घटना 20 सितंबर 2022 की रात करीब 11 बजे की है। अब्दुल ग्यासू उर्फ बाबा कुरैशी अपने साथियों के साथ भोजन के लिए जा रहे थे। कार में आरोपी भी सवार थे। Bhagat Singh Chowk Vaishali Nagar के पास गाड़ी खराब हो गई। आरोपियों ने गाड़ी धक्का लगाने को कहा, लेकिन मना करने पर कहासुनी शुरू हो गई। झगड़ा बना जानलेवा देखते-ही-देखते विवाद हिंसक हो गया। आरोपियों ने ग्यासू पर हाथ-मुक्कों, ईंट और चाकू से हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल अवस्था में उसे वहीं छोड़कर आरोपी फरार हो गए। परिजन उसे अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। पोस्टमार्टम में खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट में अत्यधिक रक्तस्राव, गंभीर चोटों और महत्वपूर्ण अंगों को क्षति को मौत का कारण बताया गया। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर साक्ष्य जुटाए और आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया। चार साल चली सुनवाई दिसंबर 2022 में मामला सत्र न्यायालय पहुंचा और लंबी सुनवाई के बाद 20 मार्च 2026 को फैसला आया। अदालत ने माना कि मौत आरोपियों की मारपीट से हुई, लेकिन हत्या की पूर्व योजना या स्पष्ट इरादा साबित नहीं हुआ। घटना अचानक आवेश में हुई। क्यों नहीं लगी हत्या की धारा अदालत के अनुसार, आरोपियों को यह अंदाजा था कि इतनी हिंसा से मौत हो सकती है, इसलिए धारा 304 भाग-2 लागू की गई। हत्या साबित करने के लिए आवश्यक तत्व नहीं मिले। सजा तय करते समय क्या देखा गया बचाव पक्ष ने आरोपियों की कम उम्र और पहली बार अपराध करने की बात रखी, लेकिन अदालत ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए 10 साल की सजा उचित मानी। जुर्माना नहीं भरने पर अतिरिक्त 6 महीने की सजा भुगतनी होगी।

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बलरामपुर में भगवा ध्वज को लेकर विवाद, कचरा वाहन में ले जाने के आरोप से बढ़ा आक्रोश

Balrampur जिला मुख्यालय में नवरात्रि के दौरान भगवा ध्वज के कथित अपमान को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। नगर पालिका परिषद के पार्षद Amit Gupta Mantu सहित कई हिंदू संगठनों ने इस घटना पर कड़ी आपत्ति जताई है। आरोप है कि पुराने ध्वज को हटाने के बाद उसे सम्मानपूर्वक सुरक्षित रखने के बजाय लापरवाही से कचरा वाहन में रखकर नगर पालिका कार्यालय लाया गया और परिसर में उसी वाहन के पास छोड़ दिया गया। घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय स्तर पर नाराजगी बढ़ गई। विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ताओं ने इसे धार्मिक प्रतीक का अपमान बताते हुए प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि नवरात्रि जैसे पवित्र पर्व के दौरान ऐसी घटना से लोगों की आस्था आहत हुई है। पार्षद ने जताई कड़ी आपत्ति पार्षद Amit Gupta Mantu ने कहा कि भगवा ध्वज श्रद्धा और सम्मान का प्रतीक है, इसलिए उसके साथ इस प्रकार का व्यवहार अस्वीकार्य है। उन्होंने नगर पालिका पर लापरवाही और असंवेदनशीलता का आरोप लगाते हुए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई की मांग की। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए धार्मिक प्रतीकों के रखरखाव और सम्मान से जुड़े स्पष्ट दिशा-निर्देश बनाए जाने चाहिए। फिलहाल यह मामला पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहे हैं।

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BALRAMPUR, Chhattisgarh, State, Top News

रामानुजगंज में चैती छठ महापर्व संपन्न, उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रतियों ने की पूजा

Ramanujganj में चार दिवसीय चैती छठ महापर्व का समापन उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने के साथ हुआ। Kanhar River के तट पर हजारों व्रती और श्रद्धालु एकत्र होकर भगवान सूर्य की आराधना में लीन रहे। सूर्योदय के समय व्रतियों ने पारंपरिक विधि-विधान के अनुसार अर्घ्य अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि और मंगल की कामना की। घाटों पर छठी मैया के भजन, लोकगीत और जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा। प्रमुख बिंदु • उगते सूर्य को अर्घ्य के साथ चार दिवसीय व्रत का समापन• कन्हर नदी तट पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़• प्रशासन की निगरानी में शांतिपूर्ण आयोजन• सुरक्षा और व्यवस्थाओं के व्यापक इंतजाम भीड़ को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। घाटों पर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। पूरे आयोजन को सुव्यवस्थित और शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराया गया। नगर पालिका अध्यक्ष सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि भी घाट पर पहुंचे और व्रतियों का अभिवादन कर उनके उत्साह को बढ़ाया।

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बिलासपुर में बर्ड फ्लू की पुष्टि के बीच लापरवाही, कॉलोनी के पास फेंके गए मरे मुर्गे; संक्रमण का खतरा बढ़ा

Bilaspur जिले में हजारों मुर्गियों की मौत के बाद बर्ड फ्लू की पुष्टि होने से हड़कंप मच गया है। इस बीच प्रशासनिक लापरवाही का मामला भी सामने आया है। Khamtarai क्षेत्र की ड्रीम सिटी कॉलोनी के पास 30–35 मरे हुए मुर्गे फेंके हुए मिले, जिससे आसपास के लोग बदबू और संभावित संक्रमण को लेकर परेशान हैं। प्रशासन ने दावा किया था कि मृत पक्षियों को सुरक्षित तरीके से दफनाया गया है, लेकिन कॉलोनी के पास बोरियों में बंद मुर्गियां मिलने से सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों ने तुरंत इन्हें हटाने और क्षेत्र को सैनिटाइज करने की मांग की है। सरकारी पोल्ट्री फार्म में हुई थी हजारों पक्षियों की मौत जानकारी के अनुसार, Koni स्थित सरकारी पोल्ट्री फार्म में पिछले पांच दिनों के भीतर 5 हजार से अधिक मुर्गे-मुर्गियों की मौत हो गई थी। जांच के लिए भेजे गए नमूनों में संक्रमण की पुष्टि हुई, जिसके बाद पूरे फार्म को एहतियातन बंद कर दिया गया। संभावित खतरे को देखते हुए आसपास के जिलों, विशेषकर Raigarh में भी अलर्ट जारी किया गया है। सरकार संचालित है पोल्ट्री परिसर कोनी स्थित कुक्कुट पालन परिसर का संचालन सरकार द्वारा किया जाता है। यहां अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के किसानों को मुर्गी पालन के लिए चूजे उपलब्ध कराए जाते हैं। परिसर में लगभग 6 हजार से अधिक पक्षियों का पालन और प्रजनन किया जाता है। 18 मार्च से शुरू हुई मौतें बताया गया है कि 18 मार्च से पोल्ट्री शेड में पक्षियों की मौत शुरू हुई थी। शुरुआती दिनों में संख्या कम थी, लेकिन कुछ ही दिनों में यह तेजी से बढ़ गई और पांच दिनों में हजारों पक्षी मर गए। पहले इसे सामान्य बीमारी माना गया, लेकिन मौतें बढ़ने पर वरिष्ठ अधिकारियों और जिला प्रशासन को सूचना दी गई। संवेदनशील क्षेत्र घोषित, फिर भी लापरवाही घटना के बाद फार्म के आसपास 5 किलोमीटर के दायरे को संवेदनशील क्षेत्र घोषित किया गया और हजारों अंडों सहित मृत पक्षियों को नष्ट किया गया। इसके बावजूद कॉलोनी के पास नाली में बोरियों में भरे मुर्गे मिलने से लोगों में डर का माहौल है। पहले भी सामने आ चुका है मामला फरवरी 2025 में भी Raigarh जिले के एक सरकारी पोल्ट्री फार्म में एच5एन1 बर्ड फ्लू की पुष्टि हुई थी। उस समय एहतियात के तौर पर हजारों मुर्गियां, चूजे और अंडे नष्ट किए गए थे तथा प्रभावित क्षेत्र में पोल्ट्री उत्पादों की बिक्री पर रोक लगाई गई थी।

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Bilaspur, Chhattisgarh, Health, Political, State, Top News

रामावतार जग्गी हत्याकांड फिर खुला, हाईकोर्ट में दोबारा सुनवाई शुरू; 1 अप्रैल को अंतिम बहस

छत्तीसगढ़ के चर्चित Ramavatar Jaggi murder case की सुनवाई एक बार फिर शुरू हो गई है। Supreme Court of India के निर्देश पर Chhattisgarh High Court में मामले को दोबारा खोला गया है। बुधवार को मुख्य न्यायाधीश Ramesh Sinha की डिवीजन बेंच में सुनवाई हुई, जिसमें मृतक के पुत्र सतीश जग्गी भी मौजूद रहे। अदालत ने अंतिम सुनवाई के लिए 1 अप्रैल की तारीख तय की है। इससे पहले हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने दो वर्ष पूर्व दोषियों की अपील खारिज करते हुए आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा था। बाद में सीबीआई की अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने मामले को दोबारा हाईकोर्ट भेजते हुए कहा कि केस की मेरिट पर विस्तार से सुनवाई की जाए। हत्या के बाद जांच CBI को सौंपी गई थी हत्या के बाद शुरुआती पुलिस जांच पर पक्षपात के आरोप लगे थे, जिसके बाद राज्य सरकार ने जांच Central Bureau of Investigation को सौंप दी। सीबीआई ने अपनी जांच में पूर्व मुख्यमंत्री Ajit Jogi के पुत्र Amit Jogi सहित कई लोगों पर हत्या और साजिश का आरोप लगाया था। 2003 में हुई थी गोली मारकर हत्या 4 जून 2003 को एनसीपी नेता रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में कुल 31 लोगों को आरोपी बनाया गया था। इनमें से दो आरोपी सरकारी गवाह बन गए, जबकि Amit Jogi को छोड़कर शेष आरोपियों को सजा सुनाई गई। हालांकि 31 मई 2007 को रायपुर की विशेष अदालत ने सबूतों के अभाव में अमित जोगी को बरी कर दिया था। इस फैसले के खिलाफ मृतक के पुत्र सतीश जग्गी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी। बाद में सर्वोच्च अदालत ने मामले को पुनः हाईकोर्ट भेज दिया। सतीश जग्गी का आरोप — राजनीतिक साजिश हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान सतीश जग्गी की ओर से पेश अधिवक्ता ने दलील दी कि हत्या एक प्रायोजित साजिश थी और जांच के दौरान सबूतों से छेड़छाड़ की गई। उनका कहना था कि इस मामले में केवल प्रत्यक्ष सबूत ही नहीं, बल्कि साजिश की पूरी पृष्ठभूमि पर विचार करना जरूरी है। कौन थे रामावतार जग्गी व्यवसाय से जुड़े रामावतार जग्गी पूर्व केंद्रीय मंत्री Vidyacharan Shukla के करीबी सहयोगी थे। जब शुक्ल कांग्रेस छोड़कर Nationalist Congress Party में शामिल हुए, तब जग्गी भी उनके साथ चले गए और उन्हें छत्तीसगढ़ में पार्टी का कोषाध्यक्ष बनाया गया। सियासी पृष्ठभूमि भी रही अहम छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद प्रदेश की राजनीति में बड़े बदलाव हो रहे थे। उस समय मुख्यमंत्री पद को लेकर कांग्रेस में खींचतान चल रही थी। बाद में Ajit Jogi के मुख्यमंत्री बनने से नाराज होकर Vidyacharan Shukla ने पार्टी छोड़ दी और एनसीपी में शामिल हो गए। बताया जाता है कि 2003 विधानसभा चुनाव से पहले एनसीपी का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा था और एक बड़ी रैली की तैयारी चल रही थी, जिसमें Sharad Pawar समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल होने वाले थे। इसी राजनीतिक माहौल के बीच रामावतार जग्गी की हत्या ने प्रदेश की राजनीति को हिला दिया था।

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उद्घाटन से पहले ही तैयारियों पर सवाल: मंत्री के सामने पनीर, जाते ही खिलाड़ियों को मिला आलू

देश के पहले ट्राइबल गेम्स की मेजबानी कर रहे छत्तीसगढ़ में उद्घाटन से पहले व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठने लगे हैं। एक तरफ उपमुख्यमंत्री एवं खेल मंत्री Arun Sao मीडिया के सामने तैयारियों को संतोषजनक बता रहे थे, वहीं दूसरी ओर अंदर खिलाड़ियों को पूरा भोजन तक नहीं मिल पाया। जानकारी के अनुसार, जब मंत्री डोम में लगे कैटरिंग की जांच कर रहे थे, तब खिलाड़ियों को पनीर की सब्जी परोसी जा रही थी। लेकिन उनके जाते ही मेन्यू बदल गया और पनीर की जगह आलू की सब्जी दी जाने लगी। कई खिलाड़ियों ने अधूरा भोजन मिलने की शिकायत की। महाराष्ट्र से आए खिलाड़ियों ने व्यवस्थाओं को ठीक बताया, लेकिन भोजन की मात्रा कम होने की बात कही। रोटी के लिए भी खिलाड़ियों को इंतजार करना पड़ा। इस आयोजन में देशभर से तीन हजार से अधिक खिलाड़ी और अधिकारी शामिल हो रहे हैं, लेकिन मैदान में बुनियादी सुविधाओं को लेकर अव्यवस्था दिखाई दी। ड्यूटी चार्ट नहीं, भोजन के लिए भी भटकते कर्मचारी आयोजन से एक दिन पहले तक मीडिया के एक्रेडिटेशन कार्ड तैयार नहीं हो सके थे। कई विभागों के बीच समन्वय की कमी साफ नजर आई। स्कूल शिक्षा विभाग से तैनात 50 से अधिक पीटीआई बिना ड्यूटी चार्ट के काम करते दिखे। कुछ कर्मचारियों को भोजन तक नहीं मिला, जबकि खाने के लिए भी पहले मैनेजर से अनुमति लेने को कहा जा रहा था। पीने के पानी की व्यवस्था में भी असमानता की शिकायतें सामने आईं। सरकार का दावा — तैयारियां पूरी खेल मंत्री Arun Sao ने कहा कि नेशनल ट्राइबल गेम्स का उद्घाटन बुधवार शाम Raipur में होगा और तैयारियां अंतिम चरण में हैं। देश के 30 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से खिलाड़ी इसमें भाग लेंगे। कुश्ती और मलखंब प्रतियोगिताएं Ambikapur में, जबकि एथलेटिक्स स्पर्धाएं Jagdalpur में आयोजित होंगी। अधिकारियों के अनुसार खिलाड़ियों के ठहरने, भोजन और परिवहन की व्यवस्था पूरी कर ली गई है। अब तक 500 से अधिक खिलाड़ी रायपुर पहुंच चुके हैं और Sports Authority of India के अधिकारी भी व्यवस्थाओं की निगरानी कर रहे हैं। इस आयोजन में छत्तीसगढ़ के लगभग 180 स्थानीय खिलाड़ियों को राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा।

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चुंगी क्षतिपूर्ति के सहारे चल रहे निकाय, 125 करोड़ मिलने के बाद भी आत्मनिर्भरता दूर

प्रदेश के नगरीय निकायों को मार्च माह के लिए राज्य सरकार ने चुंगी क्षतिपूर्ति की राशि जारी कर दी है, लेकिन इसके बावजूद अधिकांश निकाय आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर नहीं हो पाए हैं। नगरीय प्रशासन विभाग ने सभी शहरी निकायों को कुल 9.48 करोड़ रुपये वितरित किए हैं। इसमें 14 नगर निगमों को 6.23 करोड़ रुपये मिले, जबकि Raipur नगर निगम को अकेले 3.36 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। इसके अलावा 56 नगर पालिकाओं को 1.83 करोड़ और नगर पंचायतों को 1.41 करोड़ रुपये दिए गए हैं। यह राशि निकायों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि इसी से कर्मचारियों और अधिकारियों का वेतन भुगतान होता है। हर साल मिलती है भारी सहायता अधिकारियों के अनुसार राज्य सरकार हर वर्ष लगभग 252 करोड़ रुपये चुंगी क्षतिपूर्ति के रूप में देती है। हालांकि पेंशन अंशदान, परिवार कल्याण और अन्य मदों में कटौती के बाद निकायों को करीब 125 करोड़ रुपये ही वास्तविक रूप से मिल पाते हैं। कटौती के बाद हर महीने औसतन लगभग 10 करोड़ रुपये निकायों में बांटे जाते हैं। आय बढ़ाने के प्रयास कमजोर चुंगी (ऑक्ट्रॉय) समाप्त होने के बाद निकायों को नुकसान से बचाने के लिए यह व्यवस्था लागू की गई थी, ताकि वे अपने खर्च पूरे कर सकें और धीरे-धीरे खुद के आय स्रोत विकसित करें। लेकिन अधिकांश निकाय आज भी सरकार से मिलने वाली राशि पर ही निर्भर हैं। इनकी आय मुख्य रूप से संपत्ति कर, दुकान किराया और जुर्माने तक सीमित है। नए राजस्व स्रोत विकसित न होने के कारण कई निकायों को कर्मचारियों की तनख्वाह देने के लिए भी सरकारी सहायता का इंतजार करना पड़ता है। कुछ ही निगम आर्थिक रूप से मजबूत प्रदेश के 14 नगर निगमों में से केवल Raipur और Bilaspur नगर निगम ही अपने स्थापना खर्च का बड़ा हिस्सा स्वयं के राजस्व से पूरा कर पा रहे हैं। रायपुर नगर निगम ने पिछले वर्ष लगभग 300 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया, जबकि उसका वार्षिक खर्च करीब 250 करोड़ रुपये है। इस खर्च में कर्मचारियों का वेतन, प्लेसमेंट स्टाफ का भुगतान, सफाई व्यवस्था और वाहन संचालन शामिल है। इसी तरह बिलासपुर नगर निगम ने करीब 90 करोड़ रुपये की आय जुटाई, जबकि उसका खर्च लगभग 80 करोड़ रुपये रहा। ग्रीन बॉण्ड जारी करने की तैयारी रायपुर नगर निगम जल्द ही लगभग 100 करोड़ रुपये का ग्रीन बॉण्ड जारी करने की तैयारी में है। नगरीय प्रशासन विभाग के अनुसार अन्य नगर निगमों को भी शामिल कर संयुक्त बॉण्ड जारी करने की संभावना पर विचार किया जा रहा है, ताकि विकास कार्यों के लिए अतिरिक्त वित्तीय संसाधन जुटाए जा सकें।

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20 साल तक अपनी मौत की झूठी खबरें फैलाकर बचता रहा कुख्यात नक्सली पापा राव, अब करेगा आत्मसमर्पण

दक्षिण बस्तर के घने जंगलों में लंबे समय तक सुरक्षा बलों के लिए चुनौती बना रहा कुख्यात नक्सली कमांडर “पापा राव” अब हथियार डालने की तैयारी में है। Jagdalpur से लेकर Sukma और Bijapur तक फैले नक्सली नेटवर्क में उसका नाम बड़े नेताओं में गिना जाता रहा है। उसका सरेंडर बस्तर में माओवाद के एक लंबे और हिंसक दौर के खत्म होने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। बताया जाता है कि उसकी सबसे बड़ी ताकत हथियार नहीं, बल्कि रणनीति और छल था। पिछले लगभग दो दशकों में उसने कई बार अपनी मौत की अफवाहें फैलाकर सुरक्षाबलों को भ्रमित किया। कभी सांप के काटने से मौत की खबर फैलाई गई, तो कभी बीमारी से मरने की बात कही गई। जांच में सामने आया कि ये सारी कहानियां खुद उसी ने गढ़ीं, ताकि सुरक्षा एजेंसियां उसकी तलाश धीमी कर दें और वह छिपकर संगठन को मजबूत करता रहे। बस्तर में नेटवर्क खड़ा करने में अहम भूमिका पापा राव ने सुकमा और बीजापुर के दुर्गम इलाकों में माओवादी संगठन की जड़ें मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उसने तथाकथित “जनताना सरकार” के नाम पर समानांतर व्यवस्था खड़ी की, नए कैडरों की भर्ती और प्रशिक्षण कराया तथा ग्रामीण क्षेत्रों में संगठन का विस्तार किया। पुलिस को मिल सकता है बड़ा इंटेलिजेंस सुरक्षा एजेंसियों के लिए उसका आत्मसमर्पण बड़ी कामयाबी माना जा रहा है, क्योंकि उसके पास नक्सली संगठन के वित्तीय नेटवर्क, शहरी संपर्कों और भविष्य की रणनीतियों से जुड़ी अहम जानकारी होने की संभावना है। अधिकारियों को उम्मीद है कि उसके खुलासों से कई छिपे समर्थकों और सक्रिय कैडरों तक पहुंच बन सकेगी। कब-कब फैली मौत की अफवाह • जुलाई 2016 — Sukma में सांप काटने से मौत की खबर• मई 2020 — किडनी फेल होने से मृत्यु की अफवाह• जनवरी 2026 — Bijapur में मुठभेड़ में मारे जाने की सूचना कई बड़े हमलों से जुड़ा नाम उस पर दक्षिण बस्तर में कई घातक हमलों की साजिश रचने, सुरक्षा बलों पर एंबुश कराने, सड़क निर्माण और विकास कार्यों को बाधित करने, हथियार व रसद आपूर्ति संभालने और भर्ती अभियान चलाने के आरोप रहे हैं। घटती गई ताकत पापा राव स्टेट जोनल कमेटी का सदस्य और पश्चिम बस्तर डिवीजन का प्रभारी था। कभी उसके साथ 30–35 हथियारबंद नक्सली रहते थे, लेकिन हाल के वर्षों में यह संख्या घटकर लगभग आधी रह गई थी। सूत्रों के अनुसार वह लंबे समय से Indravati National Park के दुर्गम जंगलों में छिपा हुआ था। अब ‘केशा’ सबसे बड़ा सक्रिय चेहरा पापा राव के सरेंडर के बाद अब Sukma जिले का इनामी नक्सली सोढ़ी केशा सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। उस पर 25 लाख रुपये का इनाम घोषित है और उसके साथ 25 से 30 हथियारबंद कैडरों के होने की जानकारी है। बताया जा रहा है कि वह लगातार ठिकाना बदल रहा है और संभव है कि वह पड़ोसी राज्य तेलंगाना की ओर निकल गया हो।

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BASTAR, Chhattisgarh
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