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रायपुर सेंट्रल जेल से वीडियो वायरल: NDPS आरोपी ने की वीडियो कॉल, कसरत करते और दोस्तों संग सेल्फी लेते दिखा

रायपुर। राजधानी रायपुर की सेंट्रल जेल एक बार फिर विवादों में है। जेल के अंदर बंद NDPS एक्ट के आरोपी मोहम्मद रशीद अली उर्फ राजा बैजड़ का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में राजा बैजड़ बैरक नंबर 15 में मोबाइल फोन से अपने परिवार को वीडियो कॉल करता नजर आ रहा है। आरोप है कि इस वीडियो को खुद आरोपी ने बनवाया और सोशल मीडिया पर वायरल किया ताकि जेल के अंदर अपनी पहुंच और दबदबा दिखा सके। यह वीडियो 13 से 15 अक्टूबर के बीच का बताया जा रहा है। जेल में करता है कसरत, सोशल मीडिया पर भी सक्रिय वायरल फुटेज में राजा बैजड़ को कसरत करते और अपने साथियों के साथ सेल्फी लेते हुए भी देखा जा सकता है। जानकारी के अनुसार, वह पिछले तीन महीने से रायपुर सेंट्रल जेल में बंद है, लेकिन फिर भी सोशल मीडिया पर एक्टिव बना हुआ है। जेल सूत्रों के मुताबिक, राजा बैजड़ जेल के अंदर से ही नशे के नेटवर्क और वसूली रैकेट को संचालित कर रहा है, जिसमें कुछ जेल कर्मियों की मिलीभगत की आशंका भी जताई जा रही है। रिश्तेदार से की थी वीडियो कॉल, फिर खुद बनाया क्लिप बताया जा रहा है कि आरोपी ने पहले अपने किसी रिश्तेदार को वीडियो कॉल किया और उसके बाद खुद का वीडियो रिकॉर्ड कर उसे बाहर भेजा। इसमें वह यह संदेश देने की कोशिश करता दिख रहा है कि जेल के अंदर उसी का राज चलता है और किसी का उस पर नियंत्रण नहीं। जुलाई में हुआ था गिरफ्तार पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, क्राइम नंबर 317/25 के तहत राजा बैजड़ को 11 जुलाई 2025 को थाना टिकरापारा पुलिस ने गिरफ्तार किया था। उस पर NDPS एक्ट की धारा 20(बी) के तहत मामला दर्ज है। तब से वह रायपुर सेंट्रल जेल में बंद है। पहले भी विवादों में रही रायपुर जेल यह पहला मौका नहीं जब रायपुर सेंट्रल जेल विवादों में आई हो। इससे पहले गैंगस्टर अमन साव का फोटोशूट भी जेल के अंदर से वायरल हुआ था। बाद में अमन साव को झारखंड पुलिस ने एनकाउंटर में ढेर कर दिया था। उस घटना के बाद भी जेल प्रशासन पर मिलीभगत और सुरक्षा चूक के गंभीर आरोप लगे थे।

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नान घोटाला केस: रिटायर्ड IAS आलोक शुक्ला और अनिल टुटेजा को जमानत, 7 दिसंबर को ED पेश करेगी चार्जशीट

छत्तीसगढ़ के चर्चित नान (नागरिक आपूर्ति निगम) घोटाला मामले में रिटायर्ड IAS अधिकारी आलोक शुक्ला और अनिल टुटेजा को राहत मिली है। रायपुर की स्पेशल कोर्ट ने दोनों को जमानत दे दी है। दोनों अधिकारियों ने 22 सितंबर को ईडी (ED) कोर्ट में सरेंडर किया था। कोर्ट ने उन्हें 16 अक्टूबर तक ED की कस्टडी में भेजा था। रिमांड अवधि खत्म होने पर दोनों को रायपुर की विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां उन्हें जमानत मिल गई। अब 7 दिसंबर को ED (प्रवर्तन निदेशालय) इस मामले में चार्जशीट पेश करेगी, जिसके बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू होगी। ED ने दिल्ली में की थी पूछताछ सरेंडर से पहले दोनों अफसर करीब 5 दिन तक ED कोर्ट के चक्कर लगाते रहे। आखिरकार उन्होंने अधिकारियों की मौजूदगी में कोर्ट में सरेंडर किया। इसके बाद ED ने उन्हें दिल्ली मुख्यालय ले जाकर पूछताछ की थी। क्या है नान घोटाला? यह मामला नागरिक आपूर्ति निगम (NAN) में चावल, नमक और अन्य खाद्य सामग्री के परिवहन और भंडारण में भारी गड़बड़ी से जुड़ा है। 12 फरवरी 2015 को ACB और EOW की टीमों ने नान मुख्यालय रायपुर सहित 28 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की थी। कार्रवाई में करीब 1.75 करोड़ रुपए नकद बरामद हुए, जबकि कुल 3.50 करोड़ रुपए की जब्ती हुई। टीमों ने कई अहम दस्तावेज भी कब्जे में लिए। जांच पूरी होने के बाद नान के तत्कालीन मैनेजर समेत 16 आरोपियों के खिलाफ चालान पेश किया गया। बाद में केंद्र सरकार से अनुमति मिलने के बाद IAS आलोक शुक्ला और अनिल टुटेजा के खिलाफ पूरक चालान दाखिल किया गया। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा था? ED ने हाईकोर्ट से मिली अग्रिम जमानत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। एजेंसी ने कहा कि दोनों अधिकारियों ने जांच को प्रभावित करने की कोशिश की थी। सुनवाई के बाद जस्टिस सुंदरेश और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने हाईकोर्ट का फैसला रद्द करते हुए ED को दोनों अधिकारियों की कस्टडी लेने की अनुमति दी थी। कोर्ट ने कहा था कि उन्हें 4 हफ्ते ED की हिरासत में रहना होगा, उसके बाद ही जमानत दी जा सकेगी। साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने जांच एजेंसियों को तय समय सीमा में कार्रवाई पूरी करने के निर्देश दिए — IAS आलोक शुक्ला की भूमिका IAS आलोक शुक्ला डॉक्टर से अफसर बने अधिकारी हैं। 2015 में जब नान घोटाले का खुलासा हुआ, उस समय वे खाद्य विभाग के प्रमुख सचिव थे, जबकि अनिल टुटेजा नान के MD के पद पर थे। दोनों पर वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप हैं।

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दिवाली पर मिलावटी खाने का खतरा बढ़ा: दूध, पनीर और खोए में केमिकल की मिलावट, ऐसे करें घर पर जांच

दिवाली नजदीक है और बाजारों में मिठाइयों की रौनक बढ़ गई है। लेकिन त्योहार के मौसम में जहां मिठाइयों की मांग तेज़ होती है, वहीं मुनाफा कमाने की लालच में कुछ व्यापारी नकली और मिलावटी खाद्य उत्पाद बेचने से नहीं चूकते। ये प्रोडक्ट्स न सिर्फ सेहत के लिए हानिकारक हैं बल्कि गंभीर बीमारियों का कारण भी बन सकते हैं। रायपुर में इस साल खाद्य सुरक्षा विभाग ने अब तक 8,000 किलो से अधिक नकली पनीर जब्त किया है। शहर में दो बड़ी फैक्ट्रियों पर छापेमारी कर विभाग ने मिलावटी पनीर बनाने वाले गिरोहों का भंडाफोड़ किया। रायपुर में दो नकली पनीर फैक्ट्रियों का खुलासा केस 1:31 जुलाई को भाठागांव इलाके में फूड डिपार्टमेंट की टीम ने छापा मारकर 700 किलो से ज्यादा नकली पनीर बरामद किया। फैक्ट्री में सस्ते पाम ऑयल और मिल्क पाउडर से पनीर तैयार किया जा रहा था। यह फैक्ट्री मुरैना (मध्य प्रदेश) के हुकुमचंद बंसल और उनके बेटे अंकुर बंसल चला रहे थे। केस 2:5 अगस्त को शंकर नगर हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में नाले के ऊपर बनी एक अवैध यूनिट में नकली पनीर तैयार होता पाया गया। यहां बेहद गंदगी के बीच पाम ऑयल और फैट से पनीर बनाया जा रहा था। इस फैक्ट्री से 300 किलो से अधिक नकली पनीर बरामद हुआ। मिलावटी पनीर की पहचान कैसे करें? नकली पनीर आमतौर पर खराब दूध, मैदा, अरारोट, पाम ऑयल और मिल्क पाउडर से बनाया जाता है। यह दिखने में असली लगता है, लेकिन शरीर के लिए बेहद हानिकारक है। घरेलू जांच का तरीका:थोड़ा पनीर पानी में डालकर कुछ बूंदें टिंचर आयोडीन की मिलाएं। अगर पनीर का रंग बैंगनी हो जाए, तो इसमें स्टार्च या मिलावट है। अगर रंग पीला ही रहे तो पनीर शुद्ध है। एनालॉग चीज क्या है और क्यों खतरनाक है? एनालॉग चीज (Analog Cheese) असली दूध से नहीं बनता, बल्कि पाम ऑयल, फैट और मिल्क पाउडर से तैयार किया जाता है। इसमें पौष्टिकता नहीं होती और ज्यादा सेवन करने से कोलेस्ट्रॉल और हृदय रोगों का खतरा बढ़ता है।हालांकि इसे बेचना गैरकानूनी नहीं है, लेकिन इसे ‘पनीर’ के नाम पर बेचना नियमों के खिलाफ है। उपभोक्ता इन बातों का रखें ध्यान: मिलावटी खोया और मिठाई की पहचान सस्ता खोया अक्सर खराब मिल्क पाउडर, मैदा और स्टार्च से बनाया जाता है। इससे स्वाद तो कम होता ही है, साथ ही यह अपच, एसिडिटी, डायरिया और लीवर-किडनी से जुड़ी बीमारियों का कारण बन सकता है। जांच का तरीका:थोड़ा खोया पानी में घोलें और उसमें टिंचर आयोडीन की कुछ बूंदें डालें। अगर रंग नीला या बैंगनी हो जाए तो उसमें स्टार्च मिला है। असली और नकली दूध की पहचान आजकल दूध को गाढ़ा दिखाने के लिए उसमें स्टार्च, यूरिया, डिटर्जेंट या कास्टिक सोडा मिलाया जाता है। जांच करें ऐसे:दूध को हल्का गर्म करें और टिंचर आयोडीन डालें। अगर रंग नीला या बैंगनी हो जाए तो उसमें मिलावट है। मिठाइयों की चमक भी नकली सिर्फ दूध या खोया ही नहीं, मिठाई पर लगाई जाने वाली चांदी की परत (Silver Foil) भी कई बार असली नहीं होती।कई दुकानदार असली चांदी की जगह एल्युमिनियम फॉइल का उपयोग करते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। त्योहारों में बिकने वाली रंगीन मिठाइयों में नकली सिंथेटिक फूड कलर भी डाले जाते हैं, जो पेट और लिवर पर बुरा असर डालते हैं। शिकायत कहां करें? अगर आपको किसी उत्पाद में मिलावट का संदेह है, तो सीधे शिकायत करें:

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इयरफोन में गाना सुनते हुए ट्रेन की चपेट में आया युवक, दुर्ग में रेल्वे ट्रैक पर मिली लाश

दुर्ग जिले में एक युवक की रेलवे दुर्घटना में मौत हो गई। यह हादसा गुरुवार (16 अक्टूबर) सुबह 7:45 बजे ठगड़ा बांध रेलवे क्रॉसिंग पर हुआ। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार युवक रेलवे ट्रैक पार करते समय मोबाइल पर गाना सुन रहा था, कानों में इयरफोन लगे होने के कारण उसे ट्रेन के आने का अंदाजा नहीं हुआ और वह ट्रेन की चपेट में आ गया। ट्रेन की रफ्तार और हादसे का भयावह दृश्य घटना के समय ट्रेन की रफ्तार इतनी तेज थी कि टक्कर लगने के बाद युवक लगभग 50 मीटर तक घसीटता चला गया। रेलवे ट्रैक पर युवक के शव के कई हिस्से बिखर गए। मौके पर बिखरे हुए टिफिन और मोबाइल चार्जर केबल से यह साफ था कि वह काम पर जाने के लिए घर से निकला था। मृतक और उसकी पहचान मृतक की पहचान विष्णु यादव (22 वर्ष) के रूप में हुई, जो विद्युत नगर के पास जोगी नगर का रहने वाला था और मजदूरी करता था। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि वह मजदूरी के लिए टिफिन लेकर घर से निकला था। पुलिस और रेलवे प्रशासन की कार्रवाई स्थानीय लोगों ने तुरंत रेलवे प्रशासन और पुलिस को सूचना दी। डायल 112 की टीम मौके पर पहुंची और पंचनामा कर शव को पोस्टमॉर्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया। परिवार पर गहरा सदमा विष्णु यादव अपने माता-पिता के तीन बेटों में सबसे छोटा था। परिवार मजदूरी करके अपना जीवन यापन करता है। इस आकस्मिक हादसे ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है।

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गांजा के गढ़ में पुलिस की बड़ी कार्रवाई: कुम्हारी की ओडिया बस्ती के सभी घरों की तलाशी, आधार-राशन कार्ड की जांच

दुर्ग जिले के कुम्हारी थाना क्षेत्र में पुलिस ने बुधवार तड़के सर्च ऑपरेशन चलाया। यह अभियान रुप नगर ओडिया बस्ती में नशे और अपराधों में बार-बार संलिप्तता की शिकायतों के आधार पर किया गया। पुलिस ने बस्ती को चारों तरफ से घेरकर हर घर की तलाशी ली और सभी निवासियों के दस्तावेजों की जांच की। बड़े पैमाने पर पुलिस बल तैनात इस कार्रवाई के लिए एसएसपी विजय अग्रवाल के निर्देश पर लगभग 70 सदस्यीय टीम को लगाया गया। टीम में कुम्हारी, भिलाई-3 और खुर्सीपार थाना के स्टाफ, महिला रक्षा टीम और पुलिस लाइन के जवान शामिल थे। तलाशी के दौरान बस्ती के लगभग 120 घरों में दबिश दी गई और संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान और दस्तावेज (विशेषकर आधार कार्ड और राशन कार्ड) की जांच की गई। कार्रवाई से इलाके में हड़कंप अचानक हुई इस छापेमारी से बस्ती और आसपास के इलाके में हड़कंप मच गया। भारी संख्या में पुलिस बल देखकर लोग अपने घरों से बाहर आए। पुलिस ने बस्ती की गलियों को चारों तरफ से घेरकर एक-एक घर की पूरी जांच की। बस्ती का अपराधों से जुड़ा इतिहास जानकारी के अनुसार, रुप नगर ओडिया बस्ती लंबे समय से गांजा बिक्री और नशे के अवैध कारोबार के लिए बदनाम है। पुलिस को लगातार इस इलाके से गांजा और ब्राउन शुगर की बिक्री की शिकायतें मिल रही थीं। हालांकि इस छापेमारी में कोई मादक पदार्थ नहीं मिला, लेकिन यह अभियान नशा कारोबारियों में डर पैदा करने में सफल रहा। तड़ीपार और संदिग्धों की जानकारी कुम्हारी थाना प्रभारी योगेंद्र वर्मा ने बताया कि बस्ती में पुराने अपराधी और संदिग्ध तत्व रहते हैं। इनमें से एक अपराधी को पहले ही तड़ीपार किया गया, जबकि दो अन्य संदिग्ध अक्सर बस्ती में दिखाई देते हैं। तलाशी अभियान के दौरान ये तीनों घर पर मौजूद नहीं थे। निरंतर निगरानी और अभियान एसएसपी विजय अग्रवाल ने बताया कि जिले में नशा और अपराधों के खिलाफ लगातार छापेमारी और चेकिंग अभियान चलाए जा रहे हैं। गांजा, हेरोइन, ब्राउन शुगर और अन्य नशीली दवाओं के कारोबार में शामिल लोगों पर पुलिस की नजर बनी हुई है। इस अभियान का उद्देश्य न केवल अवैध गतिविधियों पर रोक लगाना है, बल्कि स्थानीय लोगों में पुलिस की मौजूदगी का संदेश देना भी है।

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Bhilai / Durg, Chhattisgarh, Crime

भाजपा ने जारी किया भूपेश-बघेल के पूर्व ओएसडी का वीडियो, पाटन में दुकान आवंटन विवाद और ‘गुंडागर्दी’ का आरोप

छत्तीसगढ़ में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के ओएसडी रहे आशीष वर्मा से जुड़ा एक वीडियो राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। भाजपा ने इसे ‘गुंडागर्दी’ बताते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा है, जबकि कांग्रेस ने इसे अधूरा और भ्रामक करार देते हुए सफाई दी है। भाजपा का आरोप भाजपा ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर 21 सेकेंड का वीडियो साझा किया और दावा किया कि भूपेश सरकार के दौरान नियम-कायदों को अपनी निजी जागीर समझने वाले लोग अब अधिकारियों को धमका रहे हैं। भाजपा के अनुसार, वीडियो में आशीष वर्मा अधिकारियों को ‘आपका भी परिवार है’ कहकर धमकी देते हुए दिख रहे हैं। भाजपा के कैप्शन में लिखा गया:“भूपेश के ओएसडी रहे आशीष वर्मा की पाटन में चल रही गुंडागर्दी शर्मनाक है। भूपेश जी अपने गुर्गों को संभालिए, जो अधिकारियों को धमका रहे हैं।” कांग्रेस का खंडन कांग्रेस ने भाजपा के आरोपों का फौरन खंडन किया और पूरा 51 सेकेंड का वीडियो जारी किया। उनका दावा है कि भाजपा ने संपादित वीडियो चलाकर पूर्व मुख्यमंत्री और उनके सहयोगियों की छवि खराब करने की कोशिश की। कांग्रेस के अनुसार, पूरा वीडियो दिखाता है कि वर्मा किसी को धमका नहीं रहे थे, बल्कि नियम और कानून का पालन करने की सलाह दे रहे थे। कांग्रेस द्वारा जारी वीडियो में वर्मा कहते हैं:“आप अधिकारी हैं, नियम को फॉलो करवाने के लिए बैठे हैं। यदि जनप्रतिनिधि गलत प्रस्ताव लाता है, तो उसे रोकना आपकी जिम्मेदारी है। नियम न मानने पर दंड अधिकारी को ही मिलेगा।” वर्मा की सफाई आशीष वर्मा ने कहा कि उन्होंने किसी को धमकी नहीं दी, बल्कि समझाइश दी। उनका कहना है कि अधिकारियों का काम नियम और संविधान का पालन कराना है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने आधा वीडियो चलाकर भ्रम फैलाया। भाजपा का रुख दुर्ग जिला भाजपा अध्यक्ष सुरेंद्र कौशिक ने कहा कि वीडियो में जो देखा जा रहा है, वही सच्चाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि भूपेश सरकार के दौरान भ्रष्टाचार और दादागिरी का माहौल था और अब भी कांग्रेस उसी मानसिकता में है कि सरकारी व्यवस्था उनकी निजी जागीर है। विवाद की जड़: पाटन नगर पंचायत में दुकानों का आवंटन विवाद पाटन नगर पंचायत के दुकान आवंटन से जुड़ा है। पूर्व मुख्यमंत्री बघेल के कार्यकाल में बस स्टैंड के पास फुटकर व्यापारियों के लिए व्यवसायिक परिसर का निर्माण हुआ। 2022 में भवन तैयार होने के बावजूद आवंटन में देरी हुई। कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष आभास दुबे का आरोप है कि 193 आवेदकों में से केवल 37 को बिना सूचना चुना गया, रोस्टर प्रणाली का पालन नहीं हुआ और ज्यादातर दुकानों पर बीजेपी से जुड़े लोगों को फायदा पहुंचा। इसी कारण हाईकोर्ट में पिटीशन दायर की गई और फिलहाल आवंटन पर रोक लगी है। प्रशासनिक जांच दुर्ग कलेक्टर अभिजीत सिंह ने आदेश दिए कि नगर पंचायत पाटन में दुकानों के आवंटन में मिली भ्रष्टाचार की शिकायतों की जांच की जाए। एसडीएम पाटन को तत्काल जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। नगर पंचायत के सीएमओ हेमंत वर्मा और अध्यक्ष योगेश भाले से संपर्क नहीं हो पाया।

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बिलासपुर में महिला का अधजला शव मिला: दोनों पैर साड़ी से बंधे, हत्या के बाद जलाने का शक, पुलिस जांच में जुटी

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में एक महिला का अधजला शव मिला है। यह शव रतनपुर के खूंटाघाट डैम के पास झाड़ियों में पड़ा पाया गया। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार यह घटना लगभग एक हफ्ते पुरानी है। शव के दोनों पैर साड़ी से बंधे हुए मिले हैं, जिससे पुलिस को हत्या के बाद शव जलाने की आशंका जताई जा रही है। फिलहाल महिला की पहचान नहीं हो पाई है। घटना स्थल और सूचना यह मामला रतनपुर थाना क्षेत्र का है। डैम के पास से आने वाली बदबू के कारण स्थानीय ग्रामीणों ने पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने पाया कि महिला का शव झाड़ियों के नीचे पड़ा था और उसके पैरों को साड़ी से बांधकर जलाया गया था। साड़ी पैरों से चिपकी हुई मिली। फोरेंसिक जांच और हत्या की संभावना पुलिस ने हत्या की संभावना को ध्यान में रखते हुए फोरेंसिक टीम को बुलाया। प्रारंभिक जांच में शव के केवल 10 प्रतिशत अंग ही बरामद हुए हैं; बाकी 90 प्रतिशत अंग डिस्पोज़ हो चुके हैं। शव के यह हालात यह संकेत देते हैं कि महिला की पहचान और सबूत मिटाने के लिए शव जलाया गया। स्थानीय हालात और पहचान में दिक्कत खूंटाघाट डैम एक पिकनिक स्पॉट है और आसपास जंगल से घिरा हुआ है। घटना स्थल मुख्य सड़क से दूर होने के कारण किसी भी सुराग का पता लगाना कठिन हो गया। आसपास के लोगों और स्थानीय थानों में गुमशुदगी के रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। पुलिस की कार्रवाई पुलिस ने हत्या की आशंका के आधार पर संदिग्धों और इलाके में आने-जाने वाले लोगों से पूछताछ शुरू कर दी है। मौके पर कोई ऐसा सामान नहीं मिला जिससे महिला या हत्यारों की पहचान की जा सके। शव की स्थिति और चुनौतियां शव के अधिकांश हिस्से कुत्तों द्वारा इधर-उधर बिखरे पाए गए। पंचनामा तैयार कर शव के बचे हुए हिस्सों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया। इस वजह से आसपास के लोग भी महिला की पहचान नहीं कर सके। हत्या और साक्ष्य मिटाने का शक पुलिस का अनुमान है कि महिला की हत्या के बाद शव को जंगल में फेंककर जलाया गया। पैरों का साड़ी से बंधा होना और अधजला शव यही संकेत दे रहा है। महिला की पहचान करना अब पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।

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छत्तीसगढ़ बना देश का सबसे तेज़ ई-ऑफिस रोलआउट करने वाला राज्यएक साल में मंत्रालय से ब्लॉक तक पहुंची सुविधा, नोटिंग बाद में नहीं बदली जा सकती, अगले साल तक हर गांव में लागू होगी

छत्तीसगढ़ ने ई-गवर्नेंस के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। राज्य अब देश का सबसे तेज़ डिजिटल परिवर्तन करने वाला राज्य बन गया है। केवल एक साल में ई-ऑफिस प्रणाली सचिवालय से लेकर तहसील और ब्लॉक स्तर तक पूरी तरह लागू हो चुकी है। अगले साल तक इसे गांवों तक भी पहुँचाया जाएगा। ई-ऑफिस प्रणाली की मदद से हर फाइल की स्थिति ऑनलाइन ट्रैक की जा सकती है। अब किसी भी स्तर पर फाइल अटकने या विलंब होने का खतरा नहीं है। सभी अधिकारी और कर्मचारी फाइल की प्रगति देख सकते हैं। इस प्रणाली में किसी भी अधिकारी द्वारा की गई नोटिंग को बाद में बदला नहीं जा सकता। सभी डेटा को मल्टीपल सर्वर पर सुरक्षित रखा गया है, जिससे सर्वर फेल होने या तकनीकी समस्या आने पर भी डेटा सुरक्षित रहता है। कागज से क्लाउड की ओर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि ई-ऑफिस ने शासन में ई-गवर्नेंस को संपूर्ण डिजिटल, पारदर्शी और जवाबदेह बनाया है। अब हर फाइल का रिकॉर्ड डिजिटल रूप में सुरक्षित है। ई-ऑफिस ने सरकारी कामकाज को कागज से क्लाउड की दिशा में अग्रसर किया है। इससे पारदर्शिता, गति और विश्वास में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। अब एक ही दिन में निपट रही फाइलें सचिवालय में लगभग 1.15 लाख फाइलें, विभागाध्यक्ष कार्यालयों में 73,969 फाइलें, और जिला कार्यालयों में 32,000 फाइलें अब ई-ऑफिस से संचालित हो चुकी हैं। ई-ऑफिस लागू होने के बाद फाइलों के निपटान का औसत समय हफ्तों से घटकर केवल एक दिन रह गया है। फाइलों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने की आवश्यकता समाप्त हो गई है। इस बदलाव से डीज़ल और वाहन खर्च में बचत हुई है और समय का अधिकतम उपयोग संभव हो पाया है। अब वह फाइल जो पहले हफ्तों में निपटती थी, अब एक ही दिन में निपट जाती है। साथ ही, ऑटो-अप्रूवल मैकेनिज़्म की सुविधा के चलते रूटीन फाइलें स्वचालित रूप से अप्रूव हो जाती हैं।

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सख्ती: मैजिक बॉक्स से की जाएगी मिलावट की तुरंत पहचान, खराब तेल और मिठाई को मौके पर नष्ट किया जाएगा35 टीमों और 8 मोबाइल टेस्टिंग लैब्स के साथ चौकसी, शिकायत के लिए हेल्पलाइन: 9340597097

त्योहारी सीजन में खाने-पीने की चीजों में मिलावट रोकने के लिए प्रदेशभर में खाद्य विभाग की बड़ी कार्रवाई शुरू हो गई है। पहली बार मैजिक बॉक्स तकनीक का उपयोग करके बाजारों में ऑन-स्पॉट जांच की जा रही है। इस अभियान के लिए विभाग ने 35 से अधिक टीमों और 8 मोबाइल टेस्टिंग लैब्स को सक्रिय किया है। खाद्य विभाग का लक्ष्य इस बार 1200 से अधिक सैंपल जांचना है, जो अब तक का सबसे बड़ा अभियान है। हर टीम को प्रतिदिन लगभग 20 सैंपल जांचने का टारगेट दिया गया है। मोबाइल वैन की मदद से दुकानों और बाजारों में जाकर मिलावटी सामान को तुरंत जब्त और नष्ट किया जाएगा। त्योहारी सीजन में मिलावट रोकने के लिए खाद्य विभाग ने हेल्पलाइन नंबर 9340597097 जारी किया है। इस नंबर पर सप्ताह के सातों दिन, 24 घंटे शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। कंट्रोल रूम से यह भी मॉनिटर किया जा रहा है कि शिकायतों का समाधान सही समय पर हो रहा है या नहीं। मैजिक बॉक्स क्या है मैजिक बॉक्स एक पोर्टेबल किट है, जो खाद्य सामग्री में मिलावट की पहचान करती है। इसके जरिए मिठाई में कृत्रिम रंग, तेल में हानिकारक रसायन, दूध में डिटर्जेंट या स्टार्च जैसी मिलावट तुरंत पकड़ी जा सकती है। एक यूनिट तीन जिले कवर करेगी प्रत्येक मोबाइल यूनिट को तीन जिलों का कवरेज दिया गया है। छोटे जिलों के लिए एक यूनिट रखी गई है। उदाहरण के लिए: बाजारों में लगातार कार्रवाई प्रदेशभर में 35 से अधिक टीमें लगातार जांच कर रही हैं। हर छोटे-बड़े बाजार में जाकर मिलावटी उत्पादों पर तुरंत कार्रवाई की जा रही है।— दीपक अग्रवाल, फूड एंड ड्रग कंट्रोलर

सख्ती: मैजिक बॉक्स से की जाएगी मिलावट की तुरंत पहचान, खराब तेल और मिठाई को मौके पर नष्ट किया जाएगा35 टीमों और 8 मोबाइल टेस्टिंग लैब्स के साथ चौकसी, शिकायत के लिए हेल्पलाइन: 9340597097 Read Post »

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कांकेर में बस और ट्रक की टक्कर, 14 घायल; दो को रायपुर रेफर

छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में गुरुवार (16 अक्टूबर) की सुबह सुकमा से रायपुर जा रही एक यात्री बस और सड़क किनारे खड़े ट्रक में टक्कर हो गई। हादसा सुबह 4 बजे नेशनल हाईवे 30 के जंगलवार कॉलेज के पास हुआ। सड़क किनारे खड़ा पंचर ट्रक अंधेरे में बस ड्राइवर को दिखाई नहीं दिया, जिससे बस उसके पीछे टकरा गई। घायलों की स्थिति:इस दुर्घटना में बस चालक अमित सिंह निर्मलकर, उनकी बहन पल्लवी निर्मलकर और 12 अन्य यात्री घायल हुए, कुल 14 लोग गंभीर रूप से चोटिल हुए। प्राथमिक उपचार के बाद ड्राइवर और उनकी बहन को बेहतर इलाज के लिए रायपुर रेफर किया गया। दुर्घटना का कारण:बस चालक ने बताया कि ट्रक के पीछे बंधा तिरपाल रेडियम पट्टी को ढककर रखता था, जिससे अंधेरे में ट्रक दिखाई नहीं दिया। जैसे ही बस की हेडलाइट से ट्रक नजर आया, टक्कर होना अपरिहार्य था। राहत और ट्रैफिक व्यवस्था:पुलिस और संजीवनी 108 टीम ने मौके पर राहत-बचाव कार्य किया और सभी घायलों को कांकेर जिला अस्पताल पहुंचाया। दुर्घटनाग्रस्त बस को सड़क से हटाया गया और यात्रियों को महिंद्रा ट्रेवल्स की दूसरी बस में शिफ्ट कर रायपुर भेजा गया। यातायात प्रभारी दीपक साव और उनकी टीम ने घंटों तक जाम हटाने का काम किया। यह हादसा सड़क किनारे खड़े वाहनों और अंधेरे में दृश्यता कम होने के कारण हुआ, जिससे भविष्य में सुरक्षा उपायों की आवश्यकता पर ध्यान देने की बात सामने आई है।

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